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Friday, July 10, 2015

चट्टान


   हाई स्कूल की भू-विज्ञान कक्षा में प्रायोगिक गतिविधि के अन्तर्गत मैंने अपनी एक सहेली के साथ मिलकर जल प्रवाह को प्रभावित करने वाला एक प्रयोग बनाकर लगाया, जिसमें मेरे पिताजी ने हमारी बहुत सहायता करी। हमने प्लाएवुड से एक लंबा बक्सा बनाया, उसके मध्य में एक कब्ज़ा लगाया, फिर उसमें अन्दर से प्लास्टिक लगाया, उसमें रेत भरी, उसके एक सिरे पर पानी का पाइप लगाया और दूसरे सिरे पर पानी निकलने के लिए छेद बनाया। इस सब को तैयार करने के बाद हमने बक्से के पानी के पाइप वाले सिरे को कुछ ऊँचा उठा कर पानी को चालू कर दिया। हमारे सामने प्रत्यक्ष था कि कैसे पानी उस छेद से निकलने के लिए अपना मार्ग बनाता है। फिर अपने प्रयोग के दूसरे भाग को दिखाने के लिए हमने पानी के उस प्रवाह-मार्ग में एक बड़ा पत्थर रख दिया और फिर देखा कि उस पत्थर के प्रभाव से कैसे पानी को उस छेद तक पहुँचने के लिए अपना मार्ग बदलना पड़ा।

   इस प्रयोग ने मुझे ना केवल विज्ञान, वरन जीवन के प्रवाह के बारे में भी बहुत कुछ सिखाया। मैंने सीखा कि किनारे पर खड़े रहकर मैं प्रवाह की दिशा नहीं बदल सकती - उसके लिए मुझे प्रवाह में उतर कर स्थिर खड़े होना पड़ेगा, यदि मैं एक स्थान पर स्थिर खड़ी नहीं रहूँगी तो प्रवाह की दिशा भी बदलने नहीं पाऊँगी।

   ठीक यही कार्य समस्त मानव जाति के लिए प्रभु यीशु ने किया है। परमेश्वर का वचन बाइबल, परमेश्वर से भेंट स्वरूप मिलने वाले उद्धार को चट्टान कहता है (2 शमूएल 22:47; भजन 62:2,6-7) और प्रेरित पौलुस अपनी पत्री में बताता है कि वह चट्टान प्रभु यीशु है (1 कुरिन्थियों 10:4)। परमेश्वर ने संसार के प्रवाह में प्रभु यीशु को दृढ़ और स्थिर चट्टान के रूप में रखा है जिससे संसार के प्रवाह की दिशा विनाश से अनन्त जीवन की ओर बदल सके। जो भी अपने पापों से पश्चाताप कर के प्रभु यीशु पर विश्वास लाता है, अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करता है, उसके जीवन का प्रवाह अनन्त विनाश से अनन्त जीवन की ओर मुड़ जाता है।

   हम मसीही विश्वासी भी जब प्रभु यीशु में स्थिर बने रहते हैं, प्रभु के कार्य में संलग्न रहते हैं, प्रभु के आज्ञाकारी रहते हैं तो परमेश्वर हमें भी दूसरों के जीवनों के प्रवाह को अनन्त जीवन की चट्टान प्रभु यीशु की ओर मोड़ने के लिए प्रयोग करता है। मुक्ति की चट्टान प्रभु यीशु में स्थिर बने रहें, आप भी पाप के कारण विनाश की ओर प्रवाहित होने वाले जीवनों की दिशा को अनन्त जीवन की ओर बदलने वाले हो जाएंगे। - जूली ऐकरमैन लिंक


अपने कदमों का सही जगह पड़ना निश्चित करके वहाँ स्थिर खड़े हो जाएं। - एब्राहम लिंकन

सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है। - 1 कुरिन्थियों 15:58 

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:19-27
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।
Colossians 1:24 अब मैं उन दुखों के कारण आनन्द करता हूं, जो तुम्हारे लिये उठाता हूं, और मसीह के क्‍लेशों की घटी उस की देह के लिये, अर्थात कलीसिया के लिये, अपने शरीर में पूरी किए देता हूं। 
Colossians 1:25 जिस का मैं परमेश्वर के उस प्रबन्‍ध के अनुसार सेवक बना, जो तुम्हारे लिये मुझे सौंपा गया, ताकि मैं परमेश्वर के वचन को पूरा पूरा प्रचार करूं। 
Colossians 1:26 अर्थात उस भेद को जो समयों और पीढिय़ों से गुप्‍त रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है। 
Colossians 1:27 जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 41-42
  • प्रेरितों 16:22-40