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Tuesday, March 14, 2017

मध्यस्थ


   कल्पना कीजिए कि आप पर्वत की तलहटी पर, अपने समाज के लाखों अन्य लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाए हुए खड़े हैं। ऊपर भारी गर्जन और बिजली की चकाचौंध हो रही है; आपको तुरही का कर्णभेदी स्वर सुनाई देता है। आग की लपटों के मध्य, परमेश्वर पर्वत की चोटी पर उतर आता है। चोटी धुएं से ढक जाती है; सारा पर्वत काँप रहा है, और साथ ही आप भी काँप रहे हैं (निर्गमन 19:16-20)।

   जब सिनै पर्वत के निकट इस्त्राएलियों को इस भयावह अनुभव से होकर निकलना पड़ा, तो उन्हों ने मूसा से निवेदन किया, "...तू ही हम से बातें कर, तब तो हम सुन सकेंगे; परन्तु परमेश्वर हम से बातें न करे, ऐसा न हो कि हम मर जाएं" (निर्गमन 20:19)। इसत्राएली मूसा से निवेदन कर रहे थे कि वह उनके और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के बीच मध्यस्थ बने, "और वे लोग तो दूर ही खड़े रहे, परन्तु मूसा उस घोर अन्धकार के समीप गया जहां परमेश्वर था" (निर्गमन 20:21)। इसके बाद से मूसा ही परमेश्वर से मिलने जाया करता था और परमेश्वर के सन्देश लाकर इस्त्राएलियों को सुना दिया करता था।

   आज हम भी उसी महान परमेश्वर कि आराधना करते हैं जिसने सिनै पर्वत पर अपनी आशचर्यजनक महानता प्रगट की। क्योंकि परमेश्वर की सिद्ध पवित्रता है, और हम अत्यन्त पापी स्वभाव के हैं, इसलिए हम उसके संपर्क में नहीं आ सकते हैं, उससे संबंध नहीं बना सकते हैं। यदि हम अपने आप पर ही छोड़ दिए जाएं तो हम भी, परमेश्वर की उपस्थिति में उन इस्त्राएलियों के समान ही काँपने लगेंगे, और ऐसा होना भी चाहिए। परन्तु प्रभु यीशु ने हमारे लिए यह संभव कर दिया कि हम परमेश्वर से संबंध बना सकें, उसके समीप आ सकें, उस से संवाद कर सकें क्योंकि प्रभु यीशु ने हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर, क्रूस पर दिए गए बलिदान तथा मृतकों में से अपने पुनरुत्थान द्वारा स्वयं ही उनका सारा दण्ड चुका दिया (1 कुरिन्थियों 15:1-4), और परमेश्वर से हमारा मेल-मिलाप होने का मार्ग बना कर दे दिया। अब जो भी अपने पापों से पश्चाताप कर के साधारण विश्वास द्वारा प्रभु यीशु के इस कार्य को स्वीकार करता है, उसे अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करके अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, वह परमेश्वर की सन्तान, उसके परिवार का सदस्य हो जाता है (यूहन्ना 1:12-13)। अपने सभी अनुयायियों के लिए, सिद्ध एवं पवित्र परमेश्वर तथा अपने चेलों के बीच आज भी संपर्क बनाए रखने वाला मध्यस्थ प्रभु यीशु ही है (रोमियों 8:34; 1 तिमुथियुस 2:5)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु ने हमारे और परमेश्वर के बीच की दूरी को पाट दिया है।

हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो। उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ। इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया। ओर गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा। - 1 कुरिन्थियों 15:1-4

बाबल पाठ: निर्गमन 20:18-26
Exodus 20:18 और सब लोग गरजने और बिजली और नरसिंगे के शब्द सुनते, और धुआं उठते हुए पर्वत को देखते रहे, और देख के, कांपकर दूर खड़े हो गए; 
Exodus 20:19 और वे मूसा से कहने लगे, तू ही हम से बातें कर, तब तो हम सुन सकेंगे; परन्तु परमेश्वर हम से बातें न करे, ऐसा न हो कि हम मर जाएं। 
Exodus 20:20 मूसा ने लोगों से कहा, डरो मत; क्योंकि परमेश्वर इस निमित्त आया है कि तुम्हारी परीक्षा करे, और उसका भय तुम्हारे मन में बना रहे, कि तुम पाप न करो। 
Exodus 20:21 और वे लोग तो दूर ही खड़े रहे, परन्तु मूसा उस घोर अन्धकार के समीप गया जहां परमेश्वर था।
Exodus 20:22 तब यहोवा ने मूसा से कहा, तू इस्त्राएलियों को मेरे ये वचन सुना, कि तुम लोगों ने तो आप ही देखा है कि मैं ने तुम्हारे साथ आकाश से बातें की हैं। 
Exodus 20:23 तुम मेरे साथ किसी को सम्मिलित न करना, अर्थात अपने लिये चान्दी वा सोने से देवताओं को न गढ़ लेना। 
Exodus 20:24 मेरे लिये मिट्टी की एक वेदी बनाना, और अपनी भेड़-बकरियों और गाय-बैलों के होमबलि और मेलबलि को उस पर चढ़ाना; जहां जहां मैं अपने नाम का स्मरण कराऊं वहां वहां मैं आकर तुम्हें आशीष दूंगा। 
Exodus 20:25 और यदि तुम मेरे लिये पत्थरों की वेदी बनाओ, तो तराशे हुए पत्थरों से न बनाना; क्योंकि जहां तुम ने उस पर अपना हथियार लगाया वहां तू उसे अशुद्ध कर देगा। 
Exodus 20:26 और मेरी वेदी पर सीढ़ी से कभी न चढ़ना, कहीं ऐसा न हो कि तेरा तन उस पर नंगा देख पड़े।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 23-25
  • मरकुस 14:1-26