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सोमवार, 14 अक्टूबर 2013

परिवर्तित

   टेलिविज़न पर प्रसारित होने वाला एक कार्यक्रम मुझे पसन्द है। उस कार्यक्रम के एक खंड में दो महिलाओं को चुना जाता है और फिर 3 घंटे तक बड़ी तैयारी के साथ उनके केश संवारे जाते हैं, उनका श्रृंगार किया जाता है, उन्हें नई वेशभूषा पहनाई जाती है। इस सब से उन के रूप में होने वाला परिवर्तन अकसर नाटकीय होता है। इस सब के बाद जब उन महिलाओं को परदे के पीछे से उपस्थित दर्शकों के सामने लाया जाता है तो वे अपनी आँखों पर एकाएक विश्वास नहीं कर पाते। कभी कभी उन महिलाओं के परिवार जनों और मित्रगणों की आंखों से, उस रूपांतर को देखकर, आँसू बहने लगते हैं। यह सब हो जाने के बाद ही उन महिलाओं को अपने आप को दर्पण में देखने दिया जाता है; कुछ तो इतनी अचंभित हो जाती हैं कि वे अपने आप को दर्पण में देखती ही रह जाती हैं, उन्हें विश्वास ही नहीं हो पाता कि वे वास्तव में अपने आप को ही देख रही हैं। लेकिन सबसे रोचक बात होती है जब उन महिलाओं से कहा जाता है कि वे चल कर जाएं और दर्शकों में बैठे अपने परिवार या मित्रगणों के साथ जाकर बैठ जाएं।

   जैसे ही वे महिलाएं चलना आरंभ करती हैं, उनका रुपांतर से पहले का स्वरूप प्रकट होने लगता है, क्योंकि अपने नई वेशभूषा और नए जूतों में चलना उन्हें नहीं आता। वे देखने में तो अति आकर्षक लगती हैं लेकिन उनकी अटपटी चाल उनकी वास्तविकता प्रकट कर देती है। यह तुरंत विदित हो जाता है कि उनका यह रूपांतरण अभी अधूरा ही है।

   यही बात हमारे मसीही जीवन पर भी लागू होती है। जब हम अपने पापों से क्षमा मांगकर प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करते हैं तो परमेश्वर भी हमें पुराने मनुष्यत्व से सुधारने संवारने लगता है, एक नए जीवन का द्वार हमारे लिए खोल देता है। लेकिन इस नए जीवन में चलना और इसे निभाने के लिए समय लगता है, उसके लिए अभ्यास और प्रयास चाहिए होता है। यदि हम एक ही स्थान पर खड़े खड़े मुस्कुराते रहें तो संभवतः लोग हमें देखकर सोच लें कि परिवर्तन आया है। लेकिन हमारे परिवर्तन की सार्थकता और गहराई का सूचक होता है हमारा चाल-चलन। यदि हमारे चाल-चलन में हमारे उद्धार के योग्य परिवर्तन नहीं आया, तो यह दिखाता है कि हमें अभी अपने मसीही चाल-चलन में कितना प्रयास और करना है। जो नई शुरुआत परमेश्वर ने हमें दी है, जो नई सामर्थ परमेश्वर से हमें मिली है, उसको सही रीति से प्रयोग करने के लिए हमें कितने अभ्यास की आवश्यकता है।

   मसीह यीशु में परिवर्तित हो जाने का अर्थ है पुरानी बातों और पुराने जीवन को छोड़कर नए जीवन और नए मार्ग पर चलते रहना, और उसे अपने जीवन से प्रगट करना। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परिवर्तित मन से ही परिवर्तित व्यवहार आता है।

और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:15, 17

बाइबल पाठ: रोमियों 6:2-14
Romans 6:2 कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्योंकर जीवन बिताएं? 
Romans 6:3 क्या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया 
Romans 6:4 सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें। 
Romans 6:5 क्योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएंगे। 
Romans 6:6 क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें। 
Romans 6:7 क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा। 
Romans 6:8 सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी। 
Romans 6:9 क्योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठ कर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की। 
Romans 6:10 क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है। 
Romans 6:11 ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। 
Romans 6:12 इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो।
Romans 6:13 और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Romans 6:14 और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 2


रविवार, 13 अक्टूबर 2013

व्यर्थ व्यस्तता

   एक दिन मैं जब यात्रा के लिए वायुयान में चढ़ने की प्रतीक्षा कर रहा था, एक अजनबी मेरे पास आया और मुझ से वार्तालाप करने लगा। उसने मेरा यह कहना सुन लिया था कि मैं एक पास्टर हूँ। वह मुझ से प्रभु यीशु के साथ हुई उसकी मुलाकात तथा उस मुलाकात से पहले और बाद के जीवन के बारे में बताने लगा। उसने बताया कि कैसे उस मुलाकात से पहले का उसका जीवन पाप और स्वार्थ से भरा हुआ था। मैं बड़ी रुची के साथ सुनता रहा कैसे प्रभु यीशु को समर्पण के बाद उसने अपने जीवन में कई परिवर्तन किए और वह अब कैसे भले कार्यों को करता रहता है। लेकिन एक बात मुझे खटक रही थी, उसका सारा वर्णन इस बात पर था कि उसने प्रभु के लिए और प्रभु के नाम में क्या कुछ किया, कहीं भी उस व्यक्ति ने यह नहीं बताया कि वह अब प्रभु के साथ समय कैसे बिताता है, प्रभु यीशु के साथ अब उसकी संगति कैसी है। इसलिए जब उसने कहा कि, "अगर मैं साफ-साफ शब्दों में कहूँ, तो मुझे लगता था कि इन सब के कारण अब तक मैं अपने आप से बहुत प्रसन्न होने पाऊँगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं है" तो मुझे यह सुन कर कोई अचरज नहीं हुआ।

   इस व्यक्ति की बात से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में उल्लेख किया गया मार्था का चरित्र स्मरण हो आया। मार्था अवश्य इस व्यक्ति के साथ सहानुभुति रखती। मार्था ने भी एक समय प्रभु यीशु को अपने घर निमंत्रण देकर बुलाया था, और प्रभु के आने पर वह उसकी आवभगत में दौड़-धूप करने लगी, अनेक प्रकार कि तैयारियाँ करने लगी। प्रभु को प्रसन्न करने की उसकी इस सारी प्रक्रिया में उसके पास प्रभु के साथ बैठने और उससे वार्तालाप करने का समय ही नहीं था। लेकिन उसकी बहन मरियम प्रभु के चरणों पर बैठकर प्रभु की बातें सुन रही थी, जो व्यस्त मार्था को बहुत नागवार गुज़रा, और मार्था ने प्रभु से उपेक्षित स्वर में मरियम को डाँटने के लिए कहा। लेकिन प्रभु यीशु ने मरियम का पक्ष लेते हुए मार्था को समझाया।

   हम में से बहुतेरे यही गलती करते रहते हैं, जो तब मार्था और उस समय उस व्यक्ति ने करी थी। हम या तो संसारिक उपलब्धियों के लिए या फिर प्रभु के लिए और प्रभु के नाम में इतना कुछ करने में अपने आप को व्यस्त कर लेते हैं कि हमारे पास समय ही नहीं होता कि हम जान सकें कि प्रभु हमसे चाहता क्या है और वह क्या है जिससे प्रभु हमसे वास्तव में प्रसन्न होगा। हम प्रभु को बेहतर जानने, उससे संगति करने में समय ही नहीं लगाते; बस अपनी ही मनसाओं, योजनाओं और कार्यक्रमों के अनुसार चलते रहते हैं और फिर थके हुए तथा कुँठित अनुभव करते हैं, निराश होते हैं कि क्यों हमारे मन प्रभु में प्रफुल्लित नहीं रहते।

   उस व्यक्ति को जो सलाह मैंने तब दी वही मैं आज आप के साथ भी बाँटना चाहता हूँ; मैंने उससे मार्था को कहे प्रभु यीशु के शब्दों को उद्वत किया: "प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:41-42)। यदि आप प्रभु के साथ संगति करने उसके वचन को पढ़ने और उस पर मनन करने के लिए समय नहीं निकाल पाते, तो प्रभु के नाम में या प्रभु के लिए, या फिर सांसारिक उपलब्धियों के लिए आप जो कुछ भी कर रहे हैं वह व्यर्थ व्यस्तता है, अन्ततः उसका फल निराशा और कुँठा ही है, प्रभु यीशु में मिलने वाली शान्ति और आनन्द नहीं। अपनी प्राथमिकताओं पर विचार कीजिए तथा सही प्राथमिकताओं को निर्धारित कीजिए। - रैण्डी किल्गोर


हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता अपने बच्चों से संगति करने और उनसे वार्तालाप करने को लालायित रहता है।

और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। - लूका 10:39

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा। 
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42 
  • 1 थिस्सुलुनीकियों 1


शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

शक्तिहीन?

   मेरी किशोरावस्था में मैं और मेरे पिता अनेक बार जंगलों में शिकार खेलने तथा मछली पकड़ने साथ-साथ गए। उन अभियानों में से अधिकांशतः तो सुखद यादों से भरे हैं परन्तु एक है जो अनर्थकारी होते होते रह गया। उस अभियान में हम एक पर्वत श्रंखला पर काफी ऊँचाई पर अन्दर जंगलों में गए और वहाँ अपना डेरा लगाया। फिर मछली पकड़ने के लिए हम पैदल नीचे नदी पर आए और सारा दिन धूप तथा गर्मी में मछली पकड़ने में बिताया। फिर समय हुआ कि हम वापस ऊपर अपने डेरे पर लौटें। लेकिन जैसे हम ऊपर कि ओर चढ़ने लगे, मेरे पिता का चेहरा पीला पड़ने लगा, उन्हें चक्कर आने लगा और जी घबराने लगा। उनमें आगे बढ़ने की कोई शक्ति नहीं रही।

   ना घबराने का प्रयास करते हुए, मैंने उन्हें बैठा दिया और पीने के लिए कुछ तरल पदार्थ देने लगा, फिर ऊँचे शब्दों के साथ मैंने परमेश्वर से सहायता के लिए प्रार्थना करनी आरंभ कर दी। उस प्रार्थना के उत्तर में मैंने देखा कि पिताजी की स्थिति सुधरने लगी और फिर वे धीरे धीरे ऊपर डेरे की ओर चढ़ने लगे। मैं उनके आगे आगे था, और वे मेरी कमर पर बन्धी पेटी को पकड़े हुए चढ़ते जा रहे थे, और हम अपने डेरे तक सुरक्षित पहुँच गए।

   जीवन यात्रा में भी हम कभी कभी अपने आप को निराशा की किसी वादी में अशक्त पड़ा हुआ पाते हैं, जहाँ हमें समझ नहीं आता कि क्या करें, कहाँ जाएं, कैसे पार पाएं। हम मसीही विश्वासियों के पास ऐसी परिस्थितियों के लिए परमेश्वर का वायदा है: "वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है" (यशायाह 40:29)।

   क्या आप अपने आप को थका हुआ और शक्तिहीन अनुभव कर रहे हैं? प्रार्थना में उसे पुकारें, उस निराशा की वादी से बाहर निकलने की शक्ति उससे माँगें; उसकी सामर्थ पर निर्भर हो जाएं और उसके मार्गदर्शन का पालन करें। जो उस पर भरोसा करते हैं वे कभी निराश नहीं होते। - डेनिस फिशर


जब परमेश्वर के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं होता तब हम पाते हैं कि परमेश्वर के अतिरिक्त किसी उपाय की हमें आवश्यकता भी नहीं है, वह हर परिस्थिति के लिए काफी है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: यशायाह 40:25-31
Isaiah 40:25 सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है। 
Isaiah 40:26 अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40 
  • कुलुस्सियों 4


शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

पवित्र आत्मा

   प्रेरितों के विश्वास वचन को दोहराते समय हम एक वाक्य बोलते हैं, "मैं पवित्र आत्मा में विश्वास करता हूँ"। बाइबल विद्वान और लेखक जे०बी०फिलिप्स ने इस वाक्य के संबंध में कहा, "जब हम यह कहते हैं तो इसका तात्पर्य होता है कि हम यह मानते हैं कि पवित्र आत्मा जीवित परमेश्वर है जो मानव व्यक्तित्व में आने और उसे संवारने की क्षमता तथा इच्छा रखता है"।

   कई बार हम पवित्र आत्मा को एक अव्यैक्तिक शक्ति मान लेते हैं लेकिन यह सही नहीं है। परमेश्वर का वचन बाइबल पवित्र आत्मा को परमेश्वर बताती है। उसमें परमेश्वर के गुण हैं: वह सर्वविद्यमान है (भजन 139:7-8); वह सब कुछ जानता है (1कुरिन्थियों 2:10-11); उसकी शक्ति असीम है (लूका 1:35)। पवित्र आत्मा ऐसे कार्य करता है जो केवल परमेश्वर ही कर सकता है: उत्पन्न करना (उत्पत्ति 1:2), जीवन देना (रोमियों 8:2)। पवित्र आत्मा त्रिएक परमेश्वर में, पिता और पुत्र के साथ तथा उनके बराबर है।

   पवित्र आत्मा एक व्यक्ति है जो हमारे साथ व्यक्तिगत रीति से सम्बंध बनाए रखता है। जब हम पाप करते हैं तो वह दुखी होता है (इफीसियों 4:30); वह हमें सिखाता है (1कुरिन्थियों 2:13); हमारे लिए प्रार्थना करता है (रोमियों 8:26); हमारा मार्गदर्शन करता है (यूहन्ना 16:13); वह हमें आत्मिक वर्दान देता है (1कुरिन्थियों 12:11); और हमें हमारे उद्धार के विषय में आश्वस्त करता है (रोमियों 8:16)।

   यदि हमने पापों से पश्चाताप करके प्रभु यीशु से उनके लिए क्षमा प्राप्त करी है तो पवित्र आत्मा हमारे अन्दर निवास करता है। वह चाहता है कि हमें परिवर्तित करे कि हम और भी मसीह यीशु की समानता में होते चले जाएं। जितना हम परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर करते हुए बाइबल की आज्ञाकारिता में बढ़ते जाएंगे, उतना ही अधिक हम पवित्र आत्मा के साथ सहयोग करते हुए उसे अपने जीवनों में प्रभावी कार्य करने तथा परिवर्तित करने देने वाले बनते चले जाएंगे, प्रभु यीशु की समानता में बदलते चले जाएंगे। - मार्विन विलियम्स


जो मसीही विश्वासी पवित्र आत्मा की अवहेलना करता है वह उस दीपक के समान है जो बिना ऊर्जा स्त्रोत के है।

मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। - 1 कुरिन्थियों 2:11

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 2:6-16
1 Corinthians 2:6 फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्तु इस संसार का और इस संसार के नाश होने वाले हाकिमों का ज्ञान नहीं। 
1 Corinthians 2:7 परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्‍त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया। 
1 Corinthians 2:8 जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते। 
1 Corinthians 2:9 परन्तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं। 
1 Corinthians 2:10 परन्तु परमेश्वर ने उन को अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किया; क्योंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्वर की गूढ़ बातें भी जांचता है। 
1 Corinthians 2:11 मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। 
1 Corinthians 2:12 परन्तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। 
1 Corinthians 2:13 जिन को हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्तु आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मिक बातें आत्मिक बातों से मिला मिला कर सुनाते हैं। 
1 Corinthians 2:14 ​परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है। 
1 Corinthians 2:15 आत्मिक जन सब कुछ जांचता है, परन्तु वह आप किसी से जांचा नहीं जाता। 
1 Corinthians 2:16 क्योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए? परन्तु हम में मसीह का मन है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38 
  • कुलुस्सियों 3


गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

स्मरण

   मेरे एक पुराने मित्र ने मुझे लिखे एक पत्र में अपने 90वें जन्म दिन के आस-पास के दिनों के बारे में लिखा, "यह समय था बीते समय के बारे में चिन्तन करने का, बीते हुए जीवन का पुनःअवलोकन करने का, और कई घंटे ’स्मरण कर सकने के अनुग्रह’ में बिताने का। कितना सरल होता है भूल जाना कि प्रभु कैसे हमें अपने साथ सुरक्षित लिए चलता रहा है! ’हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना’ (भजन 103:2)"। यह मनोभावना उस व्यक्ति की विशेषता रही है, जिसे मैं पिछले 50 से भी अधिक वर्षों से जानता हूँ और जिसकी सराहना करता रहा हूँ। बजाए इसके कि वे अपने जीवन की निराशाएं स्मरण करते, उनका पत्र परमेश्वर के लिए धन्यवाद और स्तुति से भरा हुआ था।

   पहले उन्होंने परमेश्वर से मिली पार्थिव आशीषों को स्मरण किया - अच्छा स्वास्थ्य, अच्छा परिवार, अच्छा जीवन साथी और बच्चे, कार्य में मिले आनन्द, सफलता और उन्नति, उनको उठाए रखने और संभालने वाले मित्रगण, परमेश्वर की सेवा के लिए मिले अवसर, आदि। उन्होंने इन सब बातों को परमेश्वर से मिले उपहार माना, जो उन्हें, उनमें से एक के भी योग्य ना होने पर भी, अनुग्रह पूर्वक दे दिए गए और उन्होंने कृतज्ञता से स्वीकार किए, उपयोग किए। इसके बाद उन्होंने परमेश्वर से मिली आत्मिक आशीषों को स्मरण किया - मसीही विश्वासी अभिभावकों के प्रभाव और परमेश्वर की दया तथा अनुग्रह का अनुभव जब किशोरावस्था में उन्होंने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया। उन्होंने चर्च मण्डलियों, स्कूलों और मसीही विश्वासी लोगों से मिले प्रोत्साहन और उनकी प्रार्थनाओं के स्मरण के साथ अपने पत्र का अन्त किया।

   मेरे उस मित्र का यह पत्र एक नमूना है, जिसका अनुसरण हमें करते रहना चाहिए और परमेश्वर की आशीषों, देख-भाल तथा दया के आनन्द को सदा अपने सम्मुख रखना चाहिए। बीती बातों में हमारे प्रति परमेश्वर की लगातार बनी विश्वासयोग्यता, आते समय में सदा उपलब्ध रहने वाली उसकी विश्वासयोग्यता के प्रति हमें आश्वस्त करती रहेगी, हमारे विश्वास को दृढ़ बनाए रखेगी और हमें उसके मार्गों से भटकने नहीं देगी: "हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!" (भजन 103:1)। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के उदार उपहारों के लिए उसके धन्यवादी रहें।

हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। - भजन 103:2

बाइबल पाठ: भजन 103:1-14
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! 
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। 
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, 
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है, 
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है। 
Psalms 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए। 
Psalms 103:8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 103:9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा। 
Psalms 103:10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। 
Psalms 103:11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है। 
Psalms 103:12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है। 
Psalms 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है। 
Psalms 103:14 क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36 
  • कुलुस्सियों 2


बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

लड़ाई की कीमत

   प्रथम विश्वयुद्ध को, उसके होने के समय, "सभी युद्धों का अन्त कर देने वाला युद्ध" कहा गया था। उस युद्ध पर बने एक लघुचलचित्र में बताया गया कि यदि उस युद्ध में काम आए ब्रिटैन के नागरिकों को चार-चार की पंक्ति में करके लंडन में बने उस युद्ध के स्मारक के सामने से निकलने को कहा जाता तो उस स्मारक के सामने से सभी लोगों को निकल पाने में 7 दिन लग जाते। इस स्तब्ध कर देने वाले तथ्य ने मुझे युद्ध की भयानक कीमत का एहसास दिलाया। यद्यपि युद्ध की कीमत आंकने में वित्तीय खर्चे, संपत्ति का विनाश और अर्थव्यवस्था का नाश सम्मिलित होते हैं, लेकिन कुछ भी युद्ध से होने वाली मानवीय क्षति और उसके दूरगामी प्रभावों का आंकलन नहीं कर सकता। सैनिकों तथा नागरिकों, दोनों को ही यह भारी कीमत चुकानी पड़ती है, और यह कीमत बचे हुए लोगों को होने वाले दुख और पीड़ा से और कई गुणा बढ़ जाती है। लड़ाई वासत्व में एक बहुत बड़ी कीमत मांगती है।

   यह बात केवल देशों की आपसी लड़ाईयों तक ही सीमित नहीं है। जब मसीही विश्वासी आपस में लड़ते हैं, तो इसकी भी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा: "तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?" (याकूब 4:1)। अपनी स्वार्थसिद्धी के अन्तर्गत हम अनेक बार आपस में लड़ने-भिड़ने लगते हैं, बिना इस बात का ध्यान करे कि इस लड़ाई की कीमत हमारे परस्पर संबंधों तथा मसीह यीशु के लिए हमारी गवाही पर बहुत भारी पड़ेगी। संभवतः इसीलिए याकूब ने यह प्रश्न उठाने से पहले मसीही विश्वासियों के सामने एक चुनौती रखी: "और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है" (याकूब 3:18)।

   यदि हम मसीही विश्वासियों को संसार के सामने शांति के राजकुमार प्रभु यीशु के गवाह बनना है, तो आपसी रंजिश, विवाद, लड़ाई-झगड़े आदि छोड़कर उस प्रेम को अपने जीवनों से दिखाना होगा जो परमेश्वर ने हमसे दिखाया है और वह सहनशीलता प्रदर्शित करनी होगी जो मसीह यीशु ने हमारे प्रति रखी है। अन्यथा थोड़ी सी प्रतीत होने वाली आपसी लड़ाई के लिए हमें एक बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। - बिल क्राउडर


जब मसीही विश्वासी आपस में शांति से रहेंगे तब संसार शांति के राजकुमार को स्पष्टता से देख और जान पाएगा।

तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? - याकूब 4:1-10

बाइबल पाठ: याकूब 4:1-10
James 4:1 तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? 
James 4:2 तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं। 
James 4:3 तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो। 
James 4:4 हे व्यभिचारिणयों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है। 
James 4:5 क्या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो? 
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33 
  • कुलुस्सियों 1


मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

विधि

   "महत्वकांक्षी नहीं है", अवश्य ही इस वाक्यांश को आप अपने संबंध में, अपने कार्य समीक्षा रिपोर्ट पर नहीं देखना चाहेंगे। जहाँ तक कार्य का संबंध है, जो कर्मचारी महत्वकांक्षी नहीं होता वह संस्था में अधिक ऊँचाई तक उठ भी नहीं सकता। जब तक कुछ कर दिखाने की सशक्त अभिलाषा ना हो, कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता। लेकिन महत्वकांक्षा का एक बुरा पहलु भी है। कई बार महत्वकांक्षा हर संभव रीति से अपने आप को बढ़ाने की अधिक और दूसरों के लिए कुछ भला करने के लिए कम होती है।

   यही बुरा पहलु हम इस्त्राएल के अनेक राजाओं के संबंध में भी परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए उनके वृतांतों में देखते हैं, और यह सिलसिला इस्त्राएल के पहले राजा से ही आरंभ हो गया था। इस्त्राएल के पहला राजा, शाउल, ने परमेश्वर द्वारा उसे दी गई यह ज़िम्मेदारी बड़ी नम्रता और दीनता के साथ आरंभ करी, लेकिन धीरे-धीरे वह इस पद को परमेश्वर का अनुग्रह नहीं वरन अपनी संपत्ति समझने लग गया। वह यह भूल गया कि परमेश्वर ने उसे इसलिए नियुक्त किया जिससे वह परमेश्वर के चुने हुए लोगों, इस्त्राएल का इस प्रकार से नेतृत्व करे जिससे अन्य जातियों के सामने एक उत्तम उदाहरण हो और वे सच्चे परमेश्वर की ओर आकर्षित हो सकें। जब परमेश्वर ने शाउल से यह ज़िम्मेदारी वापस ले ली, तब भी उसके विचार अपने ही लिए थे (1 शमूएल 15:30)।

   इस संसार में जहाँ महत्वकांक्षाएं लोगों को, किसी भी विधि द्वारा, एक दूसरे से शीर्ष होने के लिए उकसाती रहती हैं और जहाँ अनुचित विधियों के प्रयोग द्वारा ऊपर उठना आम देखने में आता है, परमेश्वर अपने लोगों से एक भिन्न मार्ग पर चलने को कहता है - स्वार्थ, विरोध तथा पाप के मार्ग से हटकर: "विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो" (फिलिप्पियों 2:3); "इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें" (इब्रानियों 12:1), जिससे वे परमेश्वर की आशीषों के साथ और परमेश्वर द्वारा ऊपर उठ सकें।

   यदि आप वास्तव में शीर्ष पर पहुंचना चाहते हैं, तो दीनता के साथ परमेश्वर से प्रेम तथा उसकी सेवा करने के महत्वकांक्षी हो जाईए, और वह आपको बढ़ाएगा: "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए" (1 पतरस 5:6)। मसीही विश्वासी के लिए ऊँचे उठने और बढ़ते जाने की यही सही और सबसे कारगर विधि है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि महत्वकांक्षा परमेश्वर पर केंद्रित नहीं है तो उसके परिणाम दीर्घकालीन नहीं होंगे।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब 4:10

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 15:17-30
1 Samuel 15:17 शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया? 
1 Samuel 15:18 और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी, और कहा, जा कर उन पापी अमालेकियों को सत्यानाश कर, और जब तक वे मिट न जाएं, तब तक उन से लड़ता रह। 
1 Samuel 15:19 फिर तू ने किस लिये यहोवा की वह बात टालकर लूट पर टूट के वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है? 
1 Samuel 15:20 शाऊल ने शमूएल से कहा, नि:सन्देह मैं ने यहोवा की बात मानकर जिधर यहोवा ने मुझे भेजा उधर चला, और अमालेकियों को सत्यानाश किया है। 
1 Samuel 15:21 परन्तु प्रजा के लोग लूट में से भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, अर्थात सत्यानाश होने की उत्तम उत्तम वस्तुओं को गिलगाल में तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि चढ़ाने को ले आए हैं। 
1 Samuel 15:22 शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। 
1 Samuel 15:23 देख बलवा करना और भावी कहने वालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है। 
1 Samuel 15:24 शाऊल ने शमूएल से कहा, मैं ने पाप किया है; मैं ने तो अपनी प्रजा के लोगों का भय मानकर और उनकी बात सुनकर यहोवा की आज्ञा और तेरी बातों का उल्लंघन किया है। 
1 Samuel 15:25 परन्तु अब मेरे पाप को क्षमा कर, और मेरे साथ लौट आ, कि मैं यहोवा को दण्डवत करूं। 
1 Samuel 15:26 शमूएल ने शाऊल से कहा, मैं तेरे साथ न लौटूंगा; क्योंकि तू ने यहोवा की बात को तुच्छ जाना है, और यहोवा ने तुझे इस्राएल का राजा होने के लिये तुच्छ जाना है। 
1 Samuel 15:27 तब शमूएल जाने के लिये घूमा, और शाऊल ने उसके बागे की छोर को पकड़ा, और वह फट गया। 
1 Samuel 15:28 तब शमूएल ने उस से कहा आज यहोवा ने इस्राएल के राज्य को फाड़कर तुझ से छीन लिया, और तेरे एक पड़ोसी को जो तुझ से अच्छा है दे दिया है। 
1 Samuel 15:29 और जो इस्राएल का बलमूल है वह न तो झूठ बोलता और न पछताता है; क्योंकि वह मनुष्य नहीं है, कि पछताए। 
1 Samuel 15:30 उसने कहा, मैं ने पाप तो किया है; तौभी मेरी प्रजा के पुरनियों और इस्राएल के साम्हने मेरा आदर कर, और मेरे साथ लौट, कि मैं तेरे परमेश्वर यहोवा को दण्डवत करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31 
  • फिलिप्पियों 4