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Saturday, December 24, 2011

एक कदम

   चीन में ताइशान नामक एक पवित्र माना जाना वाला पहाड़ है। भक्त तीर्थयात्री उस पर्वत कि ७००० सीढ़ीयाँ चढ कर उसके शिखर पर पहुँचते हैं, वे पहले उसके "मध्य द्वार" से हो कर निकलते हैं, फिर "स्वर्ग के दक्षिणी द्वार" से हो कर, तब अन्ततः वे शिखर पर स्थित "नीले बादलों के मन्दिर" में पहुँचते हैं जहाँ वे अपनी भेंटें अर्पित करते हैं इस उम्मीद से कि परमेश्वर उन से प्रसन्न हो सकेगा। लेकिन उन भक्तों के लिए कुछ निश्चित नहीं है कि उस पर्वत की पहली सीढ़ी चढ़ते समय वे परमेश्वर के जितने समीप थे, उस से अधिक समीप अब इतने प्रयास के बाद होंगे।

   सभी धर्म मनुष्य के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न कर के उस के समीप आने के प्रयत्न को दर्शाते हैं। इस की तुलना में केवल मसीही विश्वास ही वह एकमात्र मार्ग है जो परमेश्वर के मनुष्य बन कर मनुष्य को परमेश्वर के समीप लाने के प्रयास से आरंभ होता है।

   अपनी पवित्रता में परमेश्वर पापी मनुष्य की पहुँच से इतना दूर है कि मनुष्य और अपने बीच कि खाड़ी केवल स्वयं परमेश्वर ही पाट सकता है; यह मनुष्य के प्रयास अथवा सामर्थ से संभव नहीं है। प्रभु यीशु के मानव रूप में आने के द्वारा परमेश्वर ने यही किया भी - वह मनुष्य की समानता में सदेह हो गया, और अपनी निष्पाप और निष्कलंक देह को समस्त मानव जाति कि पापों के लिए एक ही बार सदा काल तक कार्यकारी बलिदान के रूप में दे दिया। फिर मृत्योप्राँत तीसरे दिन जी उठने के बाद वह वापस स्वर्ग, अपनी महिमा को लौट गया, जहाँ आज भी वह हमारे सहायक के रूप में विद्यमान है, अपने विश्वासियों के लिए एक बार फिर आएगा और उन्हें अपने साथ सदा रखने के लिए स्वर्ग ले जाएगा।

   यह सब उसने हम पापी मनुष्यों के लिए किया, उनसे कोई सांसारिक वस्तु प्राप्त करने के लिए नहीं, वरन उन के प्रति अपने प्रेम के कारण। अब वह हमारे प्रत्युत्तर की प्रतीक्षा में रहता है। जो कोई यह अंगीकार कर लेता है कि वह पापी है, और अपने सभी प्रयास छोड़ कर साधारण विश्वास से उस से पापों की क्षमा माँग कर उसे अपना मुक्तिदाता, उद्धारकर्ता ग्रहण कर लेता है, वह पाप के दण्ड से निकल कर अनन्त जीवन की आशीश में पहुँच जाता है।

   वे जो परमेश्वर को प्रसन्न करने और उस के समीप आने के लिए अपने व्यर्थ प्रयासों की अनन्त सीढ़ीयाँ चढने में लगे हुए हैं, उन से अनुरोध है, कृप्या ये प्रयास छोड़ दीजिए, इन प्रयासों से कुछ मिलने वाला नहीं है; वरन प्रभु यीशु में विश्वास का वह एक मात्र आवश्यक कदम उठाइये, उसी में सब कुछ है।

   अभी पापों से मुक्ति तथा परमेश्वर की निकटता और फिर जीवनोपराँत अनन्त काल के लिए स्वर्ग पहुँचने के लिए आपको प्रभु यीशु की ओर विश्वास का केवल एक कदम ही उठाना पड़ेगा। - डेनिस डी हॉन

उद्धार हम कमा नहीं सकते, लेकिन भेंट में पा सकते हैं।

परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। - यूहन्ना १:१२
 
बाइबल पाठ: यूहन्ना ३:५-२१
Joh 3:5  यीशु ने उत्तर दिया, कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, जब तक कोई मनुष्य जल और आत्मा से न जन्मे तो वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।
Joh 3:6  क्‍योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।
Joh 3:7  अचम्भा न कर, कि मैं ने तुझ से कहा कि तुम्हें नये सिरे से जन्म लेना अवश्य है।
Joh 3:8  हवा जिधर चाहती है उधर चलती है, और तू उसका शब्‍द सुनता है, परन्‍तु नहीं जानता, कि वह कहां से आती और किधर को जाती है जो कोई आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।
Joh 3:9  नीकुदेमुस ने उस को उत्तर दिया, कि ये बातें क्‍यों कर हो सकती हैं?
Joh 3:10  यह सुन कर यीशु ने उस से कहा; तू इस्‍त्राएलियों का गुरू हो कर भी क्‍या इन बातों को नहीं समझता।
Joh 3:11  मैं तुझ से सच सच कहता हूं कि हम जो जानते हैं, वह कहते हैं, और जिसे हम ने देखा है उस की गवाही देते हैं, और तुम हमारी गवाही ग्रहण नहीं करते।
Joh 3:12  जब मैं ने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं, और तुम प्रतीति नहीं करते, तो यदि मैं तुम से स्‍वर्ग की बातें कहूं, तो फिर क्‍यों कर प्रतीति करोगे?
Joh 3:13  और कोई स्‍वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वहीं जो स्‍वर्ग से उतरा, अर्थात मनुष्य का पुत्र जो स्‍वर्ग में है।
Joh 3:14  और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए।
Joh 3:15  ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्‍त जीवन पाए।
Joh 3:16  क्‍योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए।
Joh 3:17  परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्‍तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
Joh 3:18  जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्‍तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहरा चुका; इसलिये कि उस ने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
Joh 3:19  और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्‍धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्‍योंकि उन के काम बुरे थे।
Joh 3:20  क्‍योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए।
Joh 3:21  परन्‍तु जो सच्‍चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • हबक्कूक 
  • प्रकाशितवाक्य १५