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Thursday, June 20, 2013

संक्षिप्त

   एक बार मैं ने गिनती की और पाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध "गेट्सीबर्ग भाषण" में 300 से भी कम शब्द प्रयुक्त हुए थे; अर्थात बात के प्रभावी और विस्मर्णीय होने के लिए शब्दों की बहुतायत होने की आवश्यकता नहीं है।

   यह भी एक कारण है कि मुझे भजन 117 बहुत पसन्द है; संक्षिप्त होना इस भजन की खासियत है। भजनकार ने कुल 38 शब्दों में जो कुछ वह कहना चाहता था कह दिया है; मूल इब्रानी भाषा में तो इस भजन में केवल 17 शब्द ही प्रयुक्त हुए हैं। परमेश्वर की स्तुति एवं प्रशंसा के इस भजन में सारे संसार के लिए संदेश है कि परमेश्वर यहोवा का करूणामय प्रेम हमारे ऊपर प्रबल हुआ है इसलिए वह स्तुति और धन्यवाद का पात्र है।

   थोड़ा परमेश्वर के प्रेम के बारे में मनन करें। हमारे जन्म और अस्तित्व से पहले ही परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया; हमारे जीवन भर उसका व्यवहार हमारे प्रति प्रेम और करुणा से भरा रहता है और हमारी मृत्योपरांत भी उसका प्रेम अपनी सन्तान के प्रति बना रहेगा। पौलुस प्रेरित ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण दिलाया कि उनके प्रति मसीह यीशु के प्रेम से हमें अलग कर सकने वाली कोई भी बात नहीं है (रोमियों 8:39)। परमेश्वर का हृदय प्रेम का एक ऐसा सोता है जो ना कभी सूख सकता है और ना कभी समाप्त हो सकता है।

   इस संक्षिप्त से स्तुति एवं प्रशंसा के भजन को पढ़कर अपनी जीवन यात्रा में प्रोत्साहन पाने के लिए परमेश्वर के मेरे प्रति करुणामय प्रेम से बढ़कर लाभकारी किसी अन्य बात की मैं कलपना भी नहीं कर सकता; जीवन यात्रा को सफल बनाने के लिए उसका प्रेम ही मेरे लिए पर्याप्त है। क्या आपने अपने जीवन में परमेश्वर के प्रेम को स्थान दिया है? - डेविड रोपर


जितना हम परमेश्वर को अनुभव करते हैं उतना ही उसके प्रति आनन्दित और स्तुतिपूर्ण होते जाते हैं।

और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगो; उसे सराहो। - रोमियों 15:11 

बाइबल पाठ: भजन 117; रोमियों 8:31-39
Psalms 117:1 हे जाति जाति के सब लोगों यहोवा की स्तुति करो! हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो!
Psalms 117:2 क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो!

Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2 
  • प्रेरितों 5:1-21