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Tuesday, February 24, 2015

ज्योतिसतंभ


   उत्तरी मिशिगन प्रांत में स्थित मिशिगन झील के एक प्रायद्वीप पर स्थित ज्योतिस्तंभ "मिशन पॉइन्ट लाइटहाउस" कहलाता है। इसे झील के उस तट के समीप पानी में स्थित चट्टानों और रेत के टीलों में जलयानों के फंसने से बचने के लिए सन 1870 में बनाया गया था। लेकिन इसका यह नाम एक अन्य प्रकार के ज्योतिस्तंभ के कारण पड़ा - निकट ही स्थित "ओल्ड मिशन चर्च" के कारण जिसका निर्माण 31 वर्ष पहले हुआ था। सन 1839 में पादरी पीटर डोहर्टी ने उस प्रायद्वीप पर स्थित मूल अमरीकी निवासियों के बीच मसीही सेवकाई की अपनी बुलाहट को स्वीकार किया और वहाँ पर एक चर्च की स्थापना करी। उनके नेतृत्व में किसानों, शिक्षकों और कारीगरों के मेहनती समाज ने एक साथ मिलकर कार्य किया जिससे उस इलाके ने बहुत उन्नति पाई।

   जब मसीही विश्वासियों का समूह एक साथ मिलकर अपनी सेवकाई की ज़िम्मेदारी को पूरा करता है, तो उनका विश्वास और सहभागिता पाप के अन्धकार में पड़े संसार को आत्मिक ज्योति तथा उन्नति प्रदान करता है (फिलिप्पियों 2:15)। प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा, "तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:14-16)।

   ज्योतिस्तंभ "मिशन पॉइन्ट लाइटहाउस" जलयानों को पानी की सतह के नीचे छिपे खतरों के लिए सचेत करता था और "ओल्ड मिशन चर्च" लोगों को आत्मिक खतरों के लिए सचेत करके, मानने वालों को उन आत्मिक खतरों से सुरक्षित बचकर निकलने के मार्ग - प्रभु यीशु के बारे में बताता था।

   आज भी हम मसीही विश्वासी उस ज्योतिसतंभ के समान कार्य करने के लिए संसार में रखे गए हैं जिससे अपने जीवनों और मसीही विश्वासियों की मण्डलियों द्वारा संसार को पाप के विनाश के बारे में सचेत कर सकें और पाप से बच कर सुरक्षित निकल पाने के मार्ग प्रभु यीशु के बारे में बता सकें। हम परमेश्वर के ज्योतिस्तंभ हैं क्योंकि परमेश्वर की ज्योति प्रभु यीशु मसीह हम में रहता है, कार्य करता है।


जब मसीही विश्वासियों में होकर मसीह की ज्योति चमकती है, तो वे पाप में भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाने वाले बन जाते हैं।

ताकि तुम निर्दोष और भोले हो कर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्‍कलंक सन्तान बने रहो, (जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिये हुए जगत में जलते दीपकों की नाईं दिखाई देते हो)। - फिलिप्पियों 2:15

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-16
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20