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Saturday, February 28, 2015

दुख और शान्ति


   1960 के अशान्त दशक में अमेरिका में प्रचलित संगीत में भी एक विचित्र मिश्रण था देशभक्ति और विरोध के भावों का; कुछ गीत ऐसे थे जो युद्ध, लालच, समाज में हो रहे अन्याय के तीखे निन्दक थे, तो कुछ अन्य देश के प्रति कर्तव्य और पारंपरिक मूल्यों के निर्वाह पर ज़ोर देते थे। उन दिनों एक गीत प्रचलित हुआ था, "Pack Up Your Sorrows" (अपने दुखों की गठरी बना लो) जो इन भिन्न भावनाओं को एक साथ व्यक्त करता था और व्यक्तिगत जीवन में शांति पर ध्यान केंद्रित करता था। उस गीत का कोरस कहता था: "यदि तुम अपने दुखों की गठरी बना सको, तो उसे लाकर मुझे दे देना; तुम दुखों से छूट पाओगे, और मुझे उनका उपयोग करना आता है; उन्हें मुझे दे देना।" इस गीत में व्यक्त किया गया था कि ऐसा कोई हो जो दूसरों के दुखों को उठा सके, और बदले में उन्हें मन की वास्तविक एवं स्थाई शान्ति दे सके।

   अच्छी खबर यह है कि कोई है जो यह कर सकता है, और वह यह सेंत-मेंत करने के लिए सारे संसार के सभी लोगों के लिए सहर्ष उपलब्ध है, क्योंकि वह सभी को मन की सच्ची तथा स्थाई शान्ति देना चाहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह की पुस्तक के 53वें अध्याय में भविष्यवाणी के रूप में सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह का चित्रण है; यह भविष्यवाणी प्रभु यीशु के जीवन, बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान में पूरी हुई। उस अध्याय में एक स्थान पर लिखा है, "निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं" (यशायाह 53:4-5)।

   प्रभु यीशु ने संसार के प्रत्येक जन के पाप और दुख तथा उनका दण्ड अपने ऊपर ले लिए और अपने बलिदान से उस दण्ड को सब के लिए चुका दिया। अब जो कोई साधारण विश्वास से प्रभु यीशु के इस बलिदान के कार्य को स्वीकार करता है, उसे अपना मुक्तिदाता प्रभु ग्रहण कर लेता है, प्रभु यीशु उसे पापों के दण्ड से क्षमा तथा परमेश्वर के साथ मेल एवं अनन्त शान्ति प्रदान कर देता है। क्या आज आप अपने दुख उसे देकर उससे अनन्त शान्ति प्राप्त करना चाहेंगे? - डेविड मैक्कैसलैंड


कोई दुख इतना बड़ा नहीं है जिसे प्रभु यीशु अपने ऊपर लेकर उसके बदले अपनी अनन्त शान्ति ना दे सके।

वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। - 1 पतरस 2:24 

बाइबल पाठ: यशायाह 53:1-6
Isaiah 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ? 
Isaiah 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते। 
Isaiah 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isaiah 53:4 निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया; तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। 
Isaiah 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। 
Isaiah 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13