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Friday, September 30, 2011

जैसा कहो वैसा करो

   एक पिता प्रार्थना में अपने परिवार की अगुवाई कर रहा था। प्रार्थना के विषयों में उस ने अपने पड़ौस में रहने वाली विधवा और उसकी आवश्यक्ताओं के बार में भी प्रार्थना करी। अपनी प्रार्थना में पिता ने परमेश्वर के सामने उस विधवा की आवश्यक्ताओं को गिनाया और परमेश्वर को यह भी बताया कि किन तरीकों से परमेश्वर उसकी आवश्यक्ताएं पूरी कर सकता है। पिता की यह प्रार्थना सुन कर, सहानुभूति में, उसकी पत्नि के आँसु बहने लगे। लेकिन उनका पुत्र प्रार्थना सुनते सुनते सोचने लगा; जब पिता ने प्रार्थना अन्त करी तो वह पिता से बोला, "पिताजी ज़रा अपना बटुआ मुझे दीजिए, मैं अभी जा कर, आपकी प्रार्थनानुसार उस विधवा की सभी आवश्यक्ताएं पूरी करके आप की प्रार्थना का उत्तर ले आता हूँ!" वह युवक समझ रहा था कि प्रार्थना और उसके अनुरूप कार्य साथ-साथ चलते हैं।

   जब हम परमेश्वर से वार्तालाप करें तो साथ-साथ परमेश्वर के लिए कार्य करने को भी तैयार रहें। जब हम परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह संसार रूपी खेत से अपने राज्य के लोगों रूपी फसल की कटाई के लिए मज़दूर भेजे, तो साथ ही हमें इस कार्य के लिए संसार में जाने को परमेश्वर के लिए उपलब्ध भी रहना चाहिए। यदि हम उस से अपने किसी मित्र के लिए उद्धार माँगें तो हमें उस मित्र के सामने प्रभु के लिए गवाही देने और प्रभु का वचन उस तक पहुँचाने को तत्पर रहना चाहिए। जब हम प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि वह शीघ्र आए तो उसके आगमन के लिए अपने आप को तैयार रखना चाहिए - अपने व्यवसाय में नैतिकता, प्रभु से मिली अपनी संपदा के श्रेष्ठ भंडारी बनने, और अपनी जीवन शैली में प्रभु को आदर एवं प्रथम स्थान देने के द्वारा।

   प्रभु यीशु के चेले युहन्ना ने अपनी पहली पत्री में इस विचार को समझाया है। उसने लिखा कि हमें अपने प्रेम को केवल शब्दों तक ही सीमित नहीं रखना है, उसे अपने कर्मों में प्रदर्शित भी करना है - "और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है; क्‍योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं और जो उसे भाता है वही करते हैं" (१ युहन्ना ३:२२)। हमारी प्रार्थनाओं की सार्थकता, उन प्रार्थनाओं के अनुरूप हमारे कार्यों द्वारा प्रदर्शित होती है। - पौल वैन गोर्डर

हमारे कर्म हमारी प्रार्थनाओं की सार्थकता के सूचक और उत्तर बनते हैं।

हे बालको, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। - १ युहन्ना ३:१८
 
बाइबल पाठ: - १ युहन्ना ३:७-१८
    1Jn 3:7  हे बालको, किसी के भरमाने में न आना; जो धर्म के काम करता है, वही उस की नाईं धर्मी है।
    1Jn 3:8  जो कोई पाप करता है, वह शैतान की ओर से है, क्‍योंकि शैतान आरम्भ ही से पाप करता आया है: परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे।
    1Jn 3:9  जो कोई परमेश्वर से जन्मा है वह पाप नहीं करता; क्‍योंकि उसका बीज उस में बना रहता है: और वह पाप कर ही नहीं सकता, क्‍योंकि परमेश्वर से जन्मा है।
    1Jn 3:10  इसी से परमेश्वर की सन्‍तान, और शैतान की सन्‍तान जाने जाते हैं; जो कोई धर्म के काम नहीं करता, वह परमेश्वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता।
    1Jn 3:11  क्‍योंकि जो समाचार तुम ने आरम्भ से सुना, वह यह है, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें।
    1Jn 3:12  और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्‍ट से था, और जिस ने अपने भाई को घात किया: और उसे किस कारण घात किया? इस कारण कि उसके काम बुरे थे, और उसके भाई के काम धर्म के थे।
    1Jn 3:13  हे भाइयों, यदि संसार तुम से बैर करता है तो अचम्भा न करना।
    1Jn 3:14  हम जानते हैं, कि हम मृत्यु से पार होकर जीवन में पहुंचे हैं; क्‍योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्यु की दशा में रहता है।
    1Jn 3:15  जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्यारे में अनन्‍त जीवन नहीं रहता।
    1Jn 3:16  हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उस ने हमारे लिए अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए।
    1Jn 3:17  पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्‍योंकर बना रह सकता है?
    1Jn 3:18  हे बालको, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ९-१० 
  • इफिसियों ३

Thursday, September 29, 2011

अप्रत्याशित उत्तर

   बाइबल संबंधित पुस्तकों के लेखक और वक्ता जोश मैक्डोअवल अपनी दिवंगत माँ के मृत्युपूर्व उद्धार पा लेने के बारे में अनिश्चित थे और यह बात उन्हें बहुत परेशान कर रही थी। इस बात को सोच कर कि संभवतः उनकी माँ अनन्त के विनाश में चली गईं हैं और अब कभी वे अपनी माँ से नहीं मिल पाएंगे, वे निराशा में जाने लगे थे। ऐसे में, यद्यपि यह प्रार्थना उन्हें असंभव प्रतीत हुई, फिर भी उन्हों ने परमेश्वर से माँगा कि, "प्रभु मुझे किसी रीति से यह उत्तर दीजिए, जिससे मैं पुनः सामन्य पर आ जाऊँ; मुझे अपनी माँ के उद्धार के बारे में जानना ही है।"

   इस प्रार्थना के दो दिन पश्चात जोश समुद्र तट पर घूमने गए; वे वहाँ तट पर विचरण कर रहे थे कि वहाँ मछली पकड़ने को बैठी एक महिला ने उन से वार्तालाप आरंभ किया और पूछा कि "आप मूलतः कहाँ के रहने वाले हैं?" जोश ने उत्तर दिया "मिशिगन की यूनियन सिटी के, जो कि..." उनकी बात काटते हुए उस महिला ने बात पूरी करी, "..बैटल क्रीक का एक भाग है; मेरे कुछ कुटुंबी वहाँ रहा करते थे - क्या आप वहाँ के किसी मैक्डोवल परिवार को जानते हैं?" जोश आश्चर्यचकित होकर बोले, "जी हाँ; मैं जोश मैक्डोवेल हूँ!" महिला ने विसमित हो कर उत्तर दिया, "मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है; मैं तुम्हारी माँ की चचेरी बहन हूँ।" जोश ने उनसे पूछा, "क्या आपको मेरी माँ के आत्मिक जीवन के बारे में कुछ ज्ञान है?" महिला बोली, "हाँ, अवश्य; बहुत वर्ष पूर्व, जब मैं और तुम्हारी माँ युवतियाँ ही थे, तो हमारे कसबे में एक मसीही प्रचारक आए थे और उन्हों ने मसीही विश्वास के लिए सभाएं संबोधित करीं थीं। सभाओं की चौथी रात को मैंने और तुम्हारी माँ ने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया था।" इतना सुनते ही जोश आनन्द से चिल्ला उठे, "प्रभु की स्तुति और महिमा हो"; वे इतनी ज़ोर से चिल्लाए कि आस-पास बैठे अन्य मछली पकड़ने वाले उन्हें विसमय से देखने लगे। परमेश्वर ने अद्भुत रीति से जोश को उन की असंभव प्रतीत होने वाली प्रार्थना का स्पष्ट उत्तर दे दिया था।

   यदि हम परमेश्वर के आज्ञाकारी रहते हैं और उसकी इच्छानुसार प्रार्थना में उससे माँगते हैं तो वह अवश्य हमें उत्तर देता है। हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर देने की परमेश्वर की क्षमता पर हमें कभी शक नहीं करना चाहिए और ना ही उसे हलका आंकना चाहिए। संभव है कि आपकी प्रार्थनाओं का उत्तर बस आने ही को है। - डेनिस डी हॉन


जब हम परमेश्वर से निश्चित हो कर माँगते हैं, तो निश्चित ही वह उत्तर देता है।

और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है; क्‍योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं और जो उसे भाता है वही करते हैं। - १ युहन्ना ३:२२
 
बाइबल पाठ: १ युहन्ना ३:१९-२४
    1Jn 3:19  इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्य के हैं और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उस विषय में हम उसके साम्हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे।
    1Jn 3:20  क्‍योंकि परमेश्वर हमारे मन से बड़ा है और सब कुछ जानता है।
    1Jn 3:21  हे प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोष न दे, तो हमें परमेश्वर के सामने हियाव होता है।
    1Jn 3:22  और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है; क्‍योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं और जो उसे भाता है वही करते हैं।
    1Jn 3:23  और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उस ने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें।
    1Jn 3:24  और जो उस की आज्ञाओं को मानता है, वह उस में, और यह उस में बना रहता है: और इसी से, अर्थात उस आत्मा से जो उस ने हमें दिया है, हम जानते हैं, कि वह हम में बना रहता है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ७-८ 
  • इफिसियों २

Wednesday, September 28, 2011

सबसे महान सेवकाई

   स्कॉटलैण्ड के सुप्रसिद्ध प्रचारक जौन नौक्स, बहुत बीमार हुए, उन्होंने अपनी पत्नि को बुलाया और कहा, "मुझे बाइबल का वह खंड पढ़कर सुनाओ जिसके द्वारा मैं स्थिर किया गया था।" उनकी पत्नि ने बाइबल पढ़ना आरंभ किया, युहन्ना १७ में प्रभु यीशु की सुन्दर प्रार्थना सुनने के बाद, नौक्स ने प्रार्थना करना आरंभ कर दिया। उन्होंने अपने साथ के लोगों के लिए प्रार्थना करी, उन लोगों के लिए प्रार्थना करी जिन्होंने सुसमाचार की अवहेलना करी थी और प्रभु यीशु को उद्धारकर्ता मानने से इन्कार कर दिय&