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शनिवार, 5 अप्रैल 2014

घमण्‍ड


   छोटे बच्चों को सिखाई जाने वाली अंग्रेज़ी कविता, Little Jack Horner, को लेकर मैं सदा ही उलझन में रहा हूँ। कविता की पंक्तियाँ कहती हैं कि छोटा बालक जैक हॉर्नर एक कोने में बैठ कर पाइ नामक वयंजन खा रहा था; उसने अपना अंगूठा पाइ में डाला, पाइ में से एक आलूबुखारा निकाला और बोला "देखो मैं कितना अच्छा हूँ!" यह मुझे बड़ा अटपटा लगता है, कि जैक एक कोने में बैठा यह सब कर रहा था और अपने आप को अच्छा कह रहा था, जबकि कोने में तो उन बच्चों को बैठने के लिए कहा जाता है जो कुछ बुरा करते हैं। मेरी उलझन है कि उस कविता में बयान किए गए जैक के कार्यों में आपस में कोई तालमेल नहीं था, तो क्या जैक अपने प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह सब कर रहा था?

   अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और अपनी उपलब्धियों तथा योग्यताओं को लोगों के सामने प्रदर्षित करना हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। हम हर बात का श्रेय लेने की लालसा रखते हैं और चाहते हैं कि सभी लोग हमारा ध्यान रख कर ही कार्य करें, हम ही सभी गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बने रहें। लेकिन इस प्रकार अपने आप को हर बात का केन्द्र बनाकर जीवन जीना अपने आप को धोखा देना और एक निकृष्ट जीवन जीना है। सच्चाई यह है कि हमारे पापों ने हमें परमेश्वर के सामने दोषी ठहराकर हमें एक ’कोने में’ खड़ा कर दिया है, अर्थात दण्ड का भागी बना दिया है। अब फैसला हमारा है कि हम अपने पापों में बने रह कर दण्ड भोगते रहने को तैयार रहेंगे, अथवा परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा का लाभ उठाकर उस दण्ड को भोगते रहने से बच निकलेंगे।

   प्रेरित पौलुस ने इस स्थिति के संबंध में हमारे लिए अपनी गवाही के द्वारा एक सही दृष्टिकोण रखा है। सांसारिक दृष्टि से पौलुस एक बहुत गुणी, ज्ञानी और प्रभावशाली व्यक्ति था। लेकिन पौलुस ने पहचाना के उसका यह सांसारिक ज्ञान, स्थान और उपलब्धियां परमेश्वर के सामने उसे पाप के दोष से मुक्त ठहराने के लिए कतई सक्षम नहीं थे; वह अपने पापों में ही जी रहा था और उनके दण्ड का भागी था। सत्य तथा वास्तविक वस्तुस्थिति का बोध होते ही पौलुस ने उस अनन्त काल के दण्ड से बचने के एकमात्र उपाय को सहर्ष अपना लेने में कोई समय नहीं गंवाया; उसने प्रभु यीशु के प्रभुत्व को सहर्ष स्वीकार किया, और जिन बातों को वह पहले अपने लाभ की मानता था, उन्हें प्रभु यीशु के आधीन कर दिया - "परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:7-8)।

   जिस वास्तविकता को पौलुस ने पहचाना, उसे संसार के लोगों को आज भी पौलुस के समान ही पहचानने की आवश्यकता है - हमारे गुण, योग्यताएं, स्थान और उपलब्धियां हमें हमारे पापों के दोष एवं दण्ड से मुक्त नहीं करेंगे। पाप के दोष एवं दण्ड से बचने का एकमात्र उपाय है प्रभु यीशु पर किया गया विश्वास और समर्पण। उसके बाद फिर अपने ऊपर किसी प्रकार का घमण्ड करने या अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने का कोई स्थान नहीं रह जाता है, वरन फिर "जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे" (1 कुरिन्थियों 1:31)। - जो स्टोवैल


हम प्रभु यीशु के बिना कुछ भी नहीं हैं, इसलिए सारा आदर और श्रेय प्रभु यीशु को ही दें।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:1-11
Philippians 3:1 निदान, हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो: वे ही बातें तुम को बार बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्हारी कुशलता है। 
Philippians 3:2 कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करने वालों से चौकस रहो, उन काट कूट करने वालों से चौकस रहो। 
Philippians 3:3 क्योंकि खतना वाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते। 
Philippians 3:4 पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं। 
Philippians 3:5 आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं; व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं। 
Philippians 3:6 उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला; और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था। 
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 20-22


गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

नाम


   किसी नाम में ऐसा क्या हो सकता है कि हम उसे विशेष समझें? यह प्रश्न मेरे मन में तब उठा जब मैं जैमैका में एक इतवार की प्रातः एक चर्च के बाहर खड़े होकर उस चर्च की एक किशोरी से बात कर रहा था। उस किशोरी ने मुझ से पूछा, "क्या आप मेरा नाम का Our Daily Bread में उल्लेख करेंगे?" मैंने पूछा, "क्या तुम्हारे पास बताने को कोई बात है?" उसने उत्तर दिया, "नहीं, बस मेरे नाम का उल्लेख कर दीजिए।"

   उसके इस आग्रह और उसके नाम के बारे में विचार करते हुए मैं सोचने लगा, उसके माता-पिता ने उस किशोरी का नाम ’जॉयथ’ क्यों रखा होगा? उसके प्रसन्न स्वभाव को देखकर मैंने निषकर्ष निकाला कि यह नाम रखने के पीछे यदि उनका उद्देश्य उसे जीवन में आनन्दित रहने वाली बनाना रहा होगा तो वे अपने उद्देश्य में सफल रहे। अधिकांशतः अभिभावकों के पास यह विकल्प रहता है कि वे अपनी सन्तान का नाम चुनें। लेकिन एक बालक ऐसा भी था जिसका नामकरण बिलकुल अलग रीति से हुआ - ना तो उसके माता-पिता को नाम चुननें की स्वतंत्रता मिली, और ना ही उसे कोई ऐसा नाम दिया गया जो उसे किसी विशेष व्यक्तित्व की ओर जाने को उकसाता।

   वह बालक था यीशु, जिसका नाम और उस नाम का अर्थ एक स्वर्गदूत नें उसके होने वाले सांसारिक पिता को बताया: "वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा" (मत्ती 1:21)। इसमें कोई अचरज की बात नहीं कि ऐसे अद्भुत उद्देश्य वाला नाम, परमेश्वर द्वारा सब नामों में सर्वश्रेष्ठ ठहराया गया, "इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें" (फिलिप्पियों 2:9-10), क्योंकि सारे जगत के लोगों के पापों से मुक्ति और उद्धार पाने के लिए वह ही ठहराया गया, और उसने ही उद्धार का मार्ग सबके लिए तैयार करके दिया है।

   यदि उल्लेख, वर्णन और विश्वास के लायक कोई नाम है तो निसन्देह वह यीशु नाम ही है। - डेव ब्रैनन


यीशु - उसके नाम का अर्थ और उसका उद्देश्य, दोनों एक ही हैं।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: मत्ती 1:18-25
Matthew 1:18 अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उस की माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उन के इकट्ठे होने के पहिले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई। 
Matthew 1:19 सो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की। 
Matthew 1:20 जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा; हे यूसुफ दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। 
Matthew 1:21 वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। 
Matthew 1:22 यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो। 
Matthew 1:23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “ परमेश्वर हमारे साथ”। 
Matthew 1:24 सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहां ले आया। 
Matthew 1:25 और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 14-16


सोमवार, 18 नवंबर 2013

बहुभाषीय


   क्या यह संभव है कि ऐसे समाज तक, जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रति अधिकाधिक उदासीन होते जा रहा है, और उन लोगों तक जो मसीही विश्वास को नहीं मानते यह सुसमाचार सन्देश पहुँचाया जा सके? ऐसा कर सकने का एक माध्यम हो सकता है हम मसीही विश्वासियों का सांसकृतिक रूप से "बहुभाषीय" हो जाना - उन लोगों ’भाषा’ के प्रयोग द्वारा, अर्थात उन लोगों की रुचि और लगाव की बातों के माध्यम से, उन तक प्रभु यीशु मसीह में सेंत-मेंत मिलने वाली मुक्ति के सन्देश को पहुँचाना।

   सामान्यतः आम लोगों की रुचि संगीत, सिनेमा, टी.वी., खेल-कूद आदि में होती है और वे ऐसे ही विषयों पर आपस में बातचीत करते हैं। यदि हम मसीही विश्वासी भी इन बातों की आलोचना या निन्दा किए बिना, इन विषयों को बातचीत आरंभ करने का माध्यम बना कर उन तक इन विषयों के सन्दर्भ में परमेश्वर के वचन और उद्धार के मार्ग को प्रस्तुत करें तो सुसमाचार के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना सम्भव होगा।

   प्रेरित पौलुस ने इस बात का उदाहरण अथेने के लोगों के साथ अपने वार्तालाप में दिया। प्रेरितों के कार्य के अध्याय 17 में हम पाते हैं कि अथेने के अरियुपगुस में पौलुस को अवसर हुआ कि एक पूर्णतः गैरमसीही संसकृति के लोगों को मसीही विश्वास और मसीह यीशु में उद्धार के मार्ग के बारे में बताए। ऐसा करने के लिए पौलुस ने उन युनानी लोगों के कवियों की लिखी बातों को संदर्भ बनाकर सुसमाचार को उनके सामने प्रस्तुत किया; पौलुस ने कहा: "क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं" (प्रेरितों 17:28)।

   जैसे पौलुस ने उस संसकृति के लोगों तक अपनी बात उसे आधार बनाकर पहुँचाई जो वे पढ़ रहे थे, हम भी लोगों तक प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को अधिक प्रभावी रीति से लोगों तक पहुँचा सकते हैं यदि हम उन की रुचि के विषय को आधार बनाएं तो। क्या आप किसी पड़ौसी या सहकर्मी तक सुसमाचार पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं? ’बहुभाषीय’ बन कर देखिए, शायद ऐसा करना कारगर हो जाए। - बिल क्राउडर


बाइबल का सन्देश संसार के संपर्क में लाना आवश्यक है।

क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। - प्रेरितों 17:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:18-31
Acts 17:18 तब इपिकूरी और स्‍तोईकी पण्‍डितों में से कितने उस से तर्क करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बकवादी क्या कहना चाहता है परन्तु औरों ने कहा; वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्योंकि वह यीशु का, और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुनाता था। 
Acts 17:19 तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, क्या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्या है? 
Acts 17:20 क्योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्या है? 
Acts 17:21 (इसलिये कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)। 
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10 
  • इब्रानियों 13


शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

स्वच्छ

   मुझे एक व्यावसायिक कार्य से फिलेडेल्फिया जाना पड़ा, और मैं रोज़ प्रातः ब्रॉड स्ट्रीट से सिटी हॉल अपनी ट्रेन पकड़ने के लिए जाता था। रोज़ ही मुझे मार्ग में एक लंबी कतार में खड़े लोग दिखाई देते थे; वे उम्र, संसकृति, रूप-रंग, वेश-भूषा आदि में विभिन्न प्रकार के थे। तीन दिन तक उनके बारे में अचरज करने के बाद आखिर मैंने सड़क के किनारे खड़े एक व्यक्ति से उन लोगों के वहाँ पंक्तिबद्ध खड़े होने के बारे में पूछ ही लिया। उस व्यक्ति ने मुझे बताया कि पंक्ति में खड़े वे सभी लोग अपराधी हैं और कानून तोड़ने के जुर्म में जेल में डाले गए हैं, किंतु किन्हीं कारणों से उन्हें कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति मिली हुई है। अपने बाहर रहने के समय में इन लोगों को प्रति दिन आकर अपनी जाँच करवानी होती है कि वे फिर से किसी नशीले पदार्थ के सेवन या अन्य किसी अपराध में पड़ने से मुक्त हैं कि नहीं।

   यह मेरे लिए एक शक्तिशाली उदाहरण था परमेश्वर के सम्मुख अपने आप को आत्मिक रीति से स्वच्छ रखने की अनिवार्यता का। परमेश्वर के वचन बाइबल में जब भजनकार इस बात पर मनन कर रहा था कि वह परमेश्वर के सामने कैसे स्वच्छ रहे, तो उसका निश्कर्ष था कि परमेश्वर के वचन पर मनन करने और उसके आज्ञाकारी रहने के द्वारा: "मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा" (भजन 119:11-12, 16)।

   परमेश्वर के वचन की ज्योति ना केवल हमारे पापों को हम पर प्रकट करती है वरन उन पापों के निवारण के लिए हमें परमेश्वर के प्रेम भरे उपाय, प्रभु यीशु को भी दिखाती है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। परमेश्वर के वचन का उद्देश्य हमें दोषी ठहराकर हमारी निन्दा करना और हमें ग्लानि से भरना नहीं है, वरन अनन्त काल के दोष और ग्लानि से छुड़ाकर हमें आशीशित और स्वच्छ करना है। क्या आप परमेश्वर के वचन की आज्ञाकारिता के द्वारा आत्मिक रीति से स्वच्छ रहने के प्रयास में रहते हैं? - डेविड मैक्कैसलैंड


बुद्धिमान बनने के लिए बाइबल पढ़ें, सुरक्षित रहने के लिए बाइबल पर विश्वास करें, स्वच्छ रहने के लिए बाइबल के आज्ञाकारी रहें।

धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते। - भजन 37:30-31

बाइबल पाठ: भजन 119:9-16
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26 
  • तीतुस 2


गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

अनपेक्षित

   जाने माने अमेरीकी अखबार, वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेखक ने लोगों द्वारा पहचाने जाने के बारे में एक परीक्षण किया। उस लेखक ने एक बहुत प्रसिद्ध वायलिन वादक को राष्ट्रीय राजधानी के एक रेलवे स्टेशन पर एक प्रातः कुछ समय के लिए वायलिन बजाने को कहा। हज़ारों लोग उस वादक के सामने से निकल गए, केवल कुछ ही ने रुक कर उसका वायलिन वादन सुना, और लगभग 45 मिनिट के इस परीक्षण में कुल मिलाकर 32 डॉलर ही लोगों ने उसकी झोली में डाले। केवल दो दिन पहले ही यही वादक - जोशुआ बेल ने उसी 35 लाख डॉलर कीमत के वायलिन को बजाते हुए एक संगीत सभा में कार्यक्रम दिया था जहाँ उसका वायलिन वादन सुनने के लिए लोगों ने 100 डॉलर प्रति सीट का टिकिट खरीदा था और माँग इतनी थी कि सभी टिकिट बिक गए थे।

   किसी व्यक्ति का महान होते हुए भी पहचाने ना जाने कोई नयी बात नहीं है। यही प्रभु यीशु के साथ भी हुआ। प्रेरित यूहन्ना ने प्रभु यीशु के सम्बंध में उसकी जीवनी में लिखा: "वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना" (यूहन्ना 1:10)। जबकि उस समय के यहूदी लोग अपने मुक्तिदाता मसीहा की प्रतीक्षा में थे, फिर भी उन्होंने प्रभु यीशु के प्रति इतनी उदासीनता क्यों दिखाई? एक कारण था कि लोग मसीहा की आशा तो रखते थे किंतु विश्वास नहीं, इसलिए प्रभु यीशु का आगमन उनके लिए वैसे ही सर्वथा अनेपक्षित था, और वह भी एक गौशाला में जन्म लेने के द्वारा, जैसे लोग यह कलपना में भी नहीं सोच सकते कि इतना प्रसिद्ध वायलिन वादक एक रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर वायलिन बजाता हुआ मिलेगा। अपने मुक्तिदाता के रूप में उन लोगों की अपेक्षा एक राजनैतिक नेता की थी जो उन्हें रोमी साम्राज्य से छुड़ाकर यहूदी राज्य पुनः स्थापित करके दे। वे एक आत्मिक व्यक्ति की तथा स्वर्ग के राज्य की बात करने वाले मसीहा की बाट तो कतई नहीं जोह रहे थे, जो आकर उनसे पापों की क्षमा और पश्चाताप की बात कहे।

   प्रथम ईसवीं के यहूदी लोगों की आँखें, परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु के इस पृथ्वी पर भेजे जाने के उद्देश्य के प्रति बिलकुल बन्द थीं; वे जगत के उद्धारकर्ता की उम्मीद में नहीं थे। लेकिन परमेश्वर का उद्देश्य प्रभु यीशु द्वारा कोई सांसारिक राज्य या सांसारिक गुट बनाने का ना तब था ना अब है। प्रभु यीशु केवल इसलिए आए कि संसार के सभी लोग अपने पापों से मुक्ति और उद्धार का मार्ग पा सकें (यूहन्ना 1:29), और आज भी उनके अनुयायियों द्वारा यही सुसमाचार प्रचार किया जाता है - संसार के राजनैतिक नेता का नहीं वरन सारे जगत के उद्धारकर्ता पर विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और सेंत-मेंत उससे मिलने वाले उद्धार का।

   परमेश्वर का यह वरदान आपके लिए अनेपक्षित तो हो सकता है, लेकिन है अति अनिवार्य, और इस संसार से कूच करने के बाद फिर कभी उपलब्ध भी नहीं होगा। यदि आपने आज तक परमेश्वर के इस वरदान को ग्रहण नहीं किया है तो आज ही, अभी ही इसे ग्रहण कर लीजिए - सच्चे पश्चातापी मन से निकली एक छोटी प्रार्थना, "हे प्रभु यीशु मेरे पाप क्षमा कीजिए और मुझे अपनी शरण में ले लीजिए" आपके जीवन को, पृथ्वी के भी और पृथ्वी के बाद के भी, बदल देगी। - सी. पी. हिया


परमेश्वर ने मानव इतिहास में प्रभु यीशु के रूप में प्रवेश किया, जिससे संसार में सभी को अनन्त जीवन का वरदान मिल सके।

दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। - यूहन्ना 1:29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:6-13
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आने वाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23 
  • तीतुस 1


सोमवार, 8 अप्रैल 2013

विशेषज्ञ


   रेबेका मैक्लैन पुरानी और क्षतिग्रस्त कलाकृतियों को ठीक करके पुनःस्थापित करने की विशेषज्ञ हैं। उनका कहना है कि अनेक ऐसी कलाकृतियाँ, जिन्हें यह समझ कर एक किनारे फेंक दिया जाता है कि वे अब ठीक होने योग्य नहीं हैं, एक विशेषज्ञ के द्वारा फिर से ठीक और पुनःस्थापित करी जा सकती हैं। उन्होंने स्वयं कई ऐसी कलाकृतियों पर से गर्द और पुरानी पड़ी वार्निश की परत को बड़ी सावधानी से हटाकर उनके फीके पड़ गए रंगों को फिर से पहले जैसा और उन कलाकृतियों को पुनःस्थापित किया है। लेकिन साथ ही उन्होंने कई कलाकृतियों को और अधिक खराब होते भी देखा है क्योंकि लोगों ने स्वयं ही उन को घर में पड़े सामान की सफाई करने वाले किसी द्रव्य या पाउडर से साफ करने के प्रयास किए थे। उनकी सलाह है कि यदि आप कलाकृतियों से प्रेम करते हैं और उन्हें पुनःस्थापित देखना चाहते हैं तो उन्हें विशेषज्ञ के पास लेजाएं और उसकी सलाह मानें।

   हम सब मनुष्य भी परमेश्वर की कलाकृति हैं जिन्हें पाप ने बिगाड़ दिया है, हमारे आत्मिक रंग और चमक फीके कर दिये हैं और हमें परमेश्वर की संगति से दूर कर दिया है। फिर भी परमेश्वर हम सब मनुष्यों से प्रेम करता है; वह हमें नाश में नहीं वरन अपने साथ संगति में पुनःस्थापित देखना चाहता है। अपने प्रयासों और कार्यों से हम अपने पाप के दाग़ कभी संपूर्णता से सफलता पूर्वक मिटा नहीं पाते और हमारे ये व्यर्थ प्रयास तथा पाप के प्रभाव हमारे जीवनों में निराशा और कुंठाएं उत्पन्न करते हैं। इन प्रयासों की विफलता के लिए कभी हम परिस्थितियों को, कभी दूसरों को, कभी भाग्य या ऐसी ही अन्य बातों को दोषी ठहराते रहते हैं। बहुत से लोग तो यह मानकर कि हम पाप से जीत नहीं सकते, पाप करने की अपनी प्रवृति को बदल नहीं सकते, हार मान लेते हैं और पाप में ही जीवन व्यतीत करते रहते हैं।

   लेकिन परमेश्वर ने हमें पाप के दोष से मुक्त करके, हमारे बिगड़े स्वरूप को ठीक करके हमें अपने साथ पुनःस्थापित करने के लिए एक मार्ग दिया है - प्रभु यीशु मसीह, जिसका क्रूस पर बहाया हुआ लहु हमें सब पापों से धोकर शुद्ध करता है (1 यूहन्ना 1:7)। प्रभु यीशु क्रूस पर अपने बलिदान और तीसरे दिन मृतकों से पुनरुत्थान के द्वारा पाप और मृत्यु पर विजयी हुआ है और यह विजय वह सब मनुष्यों के साथ बांटना चाहता है। अब जो कोई साधारण विश्वास के साथ प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा मांगकर अपना जीवन उसे समर्पित करता है, उसके पाप प्रभु यीशु के लहु से धुल कर साफ हो जाते हैं, अर्थात वह पापों की क्षमा पाता है और निष्पाप होकर परमेश्वर की संगति में पुनःस्थापित हो जाता है - वह अब एक नई सृष्टि और परमेश्वर के लिए उपयोगी कलाकृति बन जाता है (2 कुरिन्थियों 5:17; इफिसियों 2:10)।

   जब पाप के दाग़ों से आत्मा की सफाई की बात आती है तो कोई मनुष्य अथवा मनुष्य द्वारा स्थापित विधि यह नहीं कर पाती; केवल प्रभु यीशु ही वह एकमात्र विशेषज्ञ है जो पाप से बिगड़े मनुष्य को शुद्ध तथा ठीक करके परमेश्वर के साथ संगति में पुनःस्थापित कर सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


केवल परमेश्वर ही पाप से दूषित आत्मा को अपने अनुग्रह से परिपूर्ण एक भव्य कलाकृति बना सकता है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:14-21
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए।
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा।
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे।
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं।
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 10-12
  • लूका 9:37-62


मंगलवार, 12 मार्च 2013

दर्शन


   संसार की सबसे शक्तिशाली दूरबीनों में से एक ’ग्रैन टेलिस्कोपियो कैनरिस’ कैनरी द्वीप समूह के ला पालोमा में एक शान्त हो चुके ज्वालामुखी के शिखर पर स्थित है। इसका उद्घाटन सन २००९ में स्पेन के राजा कार्लोस ने किया था। इस दूरबीन से नक्षत्र और सितारे का बहुत ही स्पष्ट दिखाई देते हैं क्योंकि 7,870 फीट की ऊँचाई पर स्थित होने के कारण यह बादलों के ऊपर है, वहाँ की हवा साफ और बिना नमी की है तथा हवा के प्रवाह में हलचल नहीं होती। भूमध्य रेखा के निकट स्थित होने के कारण खगोलशास्त्रियों के लिए इस दूरबीन से समस्त उत्तरी खगोलीय गोलार्ध तथा दक्षिणी खगोलीय गोलार्ध के कुछ भाग का अध्ययन करना संभव है।

   प्रभु यीशु भी अपने चेलों को परमेश्वर को समर्पित जीवन के गुण सिखाने के लिए एक पहाड़ पर ले गए। वहाँ पर उन्होंने चेलों को सिखाया कि उनका व्यवहार उनके लिए परमेश्वर के दर्शन को निर्धारित करेगा। परमेश्वर को स्पष्ट जानने के लिए पहाड़ की नहीं वरन चरित्र और परमेश्वर की आज्ञाकारिता कि ऊँचाई आवश्यक है। प्रभु यीशु के उस पहाड़ी उपदेश में से एक वाक्य है: "धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे" (मत्ती 5:8)। यह उन थोड़े से लोगों के लिए नहीं है जो अपने प्रयासों से इसे संभव करना चाहते हैं, वरन उन सभी के लिए है जो दीन और नम्र होकर प्रभु यीशु को स्वीकार कर लेते हैं।

   मन की शुद्धि उन्हीं के लिए संभव है जिनके पाप प्रभु यीशु में क्षमा हो गए हों। यह पाप क्षमा का अवसर आज भी संसार के सब लोगों के लिए परमेश्वर की ओर से सेंत-मेंत उपलब्ध है। परमेश्वर का संसार के सभी लोगों को आश्वासन है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)।

   पहाड़ की ऊँचाई सितारों को देखने के लिए एक उत्तम स्थान है, लेकिन परमेश्वर के दर्शन के लिए पाप से क्षमा पाया हुआ तथा पाप से परिवर्तित हृदय चाहिए। क्या आपने परमेश्वर के आश्वासन को मानकर प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लिया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के स्पष्ट दर्शन पाने के लिए प्रभु यीशु पर दृष्टि केंद्रित करें।

धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। - मत्ती 5:8

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-12
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए।
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा,
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे।
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे।
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी।
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे।
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे।
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें।
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 17-19 
  • मरकुस 13:1-20


गुरुवार, 21 फ़रवरी 2013

समाधान


   मई १८८४ की बात है, युवा माता-पिता जॉन और मार्था की जोड़ी अपने नवजात बेटे के नामकरण में मध्य नाम को लेकर असहमत थे। माँ मार्था अपने पारिवारिक नाम को लेकर उसका नाम सौलोमन रखना चाहती थी और पिता जॉन अपने पारिवारिक नाम को लेकर उसका नाम शिप्पे रखना माँगते थे। क्योंकि दोनो ही मध्य नाम को लेकर सहमत नहीं हुए इसलिए दोनो ने समस्या के समाधान के लिए केवल अंग्रेज़ी भाषा के S शब्द को, जो दोनो ही विवादाधीन नामों का प्रथम अक्षर था, प्रयोग करने का निर्णय लिया और बच्चे का नाम रखा गया हैरी एस. ट्रूमैन जो आगे चलकर अमेरिका के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति बने जिनका मध्य नाम केवल एक अक्षर ही था। इस बात को १२० वर्ष हो गए हैं, इतिहास उस विवाद को भी बताता है और उसके समाधान को भी।

    परमेश्वर के वचन बाइबल में हम एक और विवाद के बारे में पढ़ते हैं जो प्रभु यीशु के दो अनुयायियों के बीच एक तीसरे अनुयायी को लेकर हुआ। प्रेरितों के काम के १५ अध्याय में प्रेरित पौलुस एवं बरनाबास के इस विवाद का उल्लेख है। बरनाबास और पौलुस को सेवकाई और सुसमाचार प्रचार की यात्रा पर निकलना था। बरनाबास अपने साथ एक युवा विश्वासी मरकुस को भी ले जाना चाहता था, किंतु मरकुस को लेकर कुछ पिछले अनुभवों के आधार पर पौलुस ने इस बात का विरोध किया। बात यहाँ तक बढ़ गई कि पौलुस और बरनाबास ने अलग अलग अपने अपने रास्ते ले लिए। इस बात को दो हज़ार वर्ष के लगभग हो गए हैं, और यह परमेश्वर के वचन में सदा काल के लिए दर्ज भी है। किंतु बात यहीं समाप्त नहीं हुई; आगे चलकर पौलुस और मरकुस के बीच की दूरीयाँ मिट गईं, समस्या का समाधान निकल आया और मरकुस पौलुस का प्रीय बन गया। अपनी सेवकाई के अन्त में, मृत्यु दण्ड के पूरा किए जाने की प्रतीक्षा में कैदखाने में पड़े पौलुस ने अपनी अन्तिम पत्री में एक अन्य मसीही विश्वासी तिमुथियुस को लिखा: "...मरकुस को ले कर चला आ; क्योंकि सेवा के लिये वह मेरे बहुत काम का है" (२ तिमुथियुस ४:११)।

   एक और विवाद मानव जाति के इतिहास के आरंभ में हुआ - पाप के कारण परमेश्वर और हमारे आदि-पूर्वज आदम और हव्वा के बीच दूरी आ गई और हमारे आदि माता-पिता परमेश्वर की संगति से दूर हो गए। तब से पाप मनुष्य में बना हुआ है और आदम हव्वा की सभी संतान इस पाप स्वभाव के साथ ही पैदा होती आई है तथा परमेश्वर से दूर है। परमेश्वर ने ही स्वयं आगे बढ़कर अपने बड़े प्रेम में होकर मानव के लिए पाप से बचने और पाप स्वभाव के चंगुल से निकलने का मार्ग दिया। उसने अपने पुत्र प्रभु यीशु को संसार में भेजा, उसने संसार में एक निष्पाप और निषकलंक जीवन बिताया और समस्त मानव जाति का पाप अपने ऊपर लेकर उस पाप के दण्ड को सभी मनुष्यों के लिए सह लिया। उसने क्रूस पर अपने प्राण बलिदान किए, वह मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन मृतकों से जीवित होकर उसने अपने परमेश्वरत्व को प्रमाणित कर दिया। आज भी उसकी खाली कब्र उसके पुनरुत्थान और परमेश्वर होने की गवाह है।

   प्रभु यीशु के इस बलिदान और पुनरुत्थान के द्वारा पाप की समस्या का समाधान हो गया, सभी मनुष्यों के लिए पाप क्षमा और परमेश्वर से मेल-मिलाप का मार्ग खुल गया। अब जो कोई सच्चे मन से अपने पापों की क्षमा प्रभु यीशु से माँगता है तथा स्वेच्छा से अपना जीवन उसे समर्पित करता है उसे प्रभु यीशु से पापों की क्षमा, पाप स्वभाव से मुक्ति तथा परमेश्वर की सन्तान होने का आदर मिलता है और वह परमेश्वर के साथ संगति में आ जाता है। परमेश्वर का यह प्रयोजन सारे संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है और सभी को परमेश्वर की ओर से इसका निमंत्रण है।

   क्या आपने अपने पापों और उनके कारण हुई परमेश्वर से दूरी का परमेश्वर द्वारा निर्धारित समाधान स्वीकार कर लिया है? यदि नहीं तो अभी अवसर है, कर लीजिए। इस समाधान का तिरस्कार बहुत महंगा, बहुत कष्टदायक और अनन्तकालीन है। - डेव ब्रैनन


पाप के कारण मनुष्य का परमेश्वर से हुआ मनमुटाव समय के साथ नहीं घटता नहीं है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों ५:८

बाइबल पाठ: रोमियों ५:६-१२; १७-१९
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे।
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ।
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १-३ 
  • मरकुस ३


रविवार, 17 फ़रवरी 2013

परिवर्तन


   जिन लोगों की heart-bypass अर्थात हृदय की अवरोधित नाड़ियों के खोलने या अवरोध से पार रक्त प्रवाह पुनः स्थापित करने का ऑपरेशन हुआ है उन्हें यह कहा जाता है कि वे अपने जीवन शैली में परिवर्तन लाएं अन्यथा इस ऑपरेशन का कोई विशेष लाभ नहीं होगा और वे शीघ्र ही पुनः मृत्यु के कगार पर आ जाएंगे। ऐसे ऑपरेशन हुए मरीज़ों के अध्ययन से यह बात सामने आई है कि इतने गंभीर और खर्चीले ऑपरेशन तथा उससे संबंधित चेतावनी के बावजूद ९०% मरीज़ अपनी जीवन शैली में कोई परिवर्तन नहीं लाते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि लोग परिवर्तन की बजाए मृत्यु को अधिक पसन्द करते हैं।

   जैसे डॉक्टर स्वस्थ रहने और मृत्यु से अधिक से अधिक समय तक बचे रहने के लिए भौतिक जीवन शैली में परिवर्तन का संदेश देते हैं, उसी प्रकार प्रभु यीशु के लिए मार्ग तैयार करने वाला - यूहन्ना बप्तिस्मादेनेवाला आत्मिक मृत्यु से बचने के लिए मन परिवर्तन या मन फिराव का सन्देश लेकर आया था; उसने कहा, "मन फिराओ; क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है" (मत्ती ३:२)। वह प्रभु यीशु के लिए, उनकी सेवकाई को आरंभ करने के लिए, लोगों को तैयार कर रहा था जिससे वे प्रभु यीशु में पापों की क्षमा तथा उद्धार का सन्देश ग्रहण कर सकें। प्रभु यीशु ने भी अपनी सेवकाई के आरंभ में इसी बात को दोहराया: "यूहन्ना के पकड़वाए जाने के बाद यीशु ने गलील में आकर परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार प्रचार किया। और कहा, समय पूरा हुआ है, और परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है; मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो" (मरकुस १:१५)। प्रभु यीशु के स्वर्गारोहण के बाद से प्रभु यीशु के अनुयायियों के प्रचार का आधार भी यही मन-फिराव की अनिवार्यता रही है।

   मन फिराव का अर्थ है परमेश्वर की पवित्रता के सामने अपने मन की भावनाओं और अपने आचरण का विशलेषण करके अपनी जीवन शैली और अपने आचरण को परमेश्वर की इच्छाओं तथा आज्ञाओं के अनुरूप करना। यह व्यक्ति के अन्दर, उसके मन, उसकी आत्मा में परिवर्तन की बात है, उसके बाहरी स्वरूप, बाहरी आचरण अथवा किसी धर्म-परिवर्तन की नहीं। इस मन परिवर्तन के लिए सर्वप्रथम उस व्यक्ति के अन्दर अपने पापों का बोध होना, फिर उनके लिए पश्चातापी होना, तत्पश्चात उन पापों को केवल भले अथवा ’धर्म के कार्यों’ से छिपा या ढांप भर देने अथवा ’भले-बुरे का हिसाब बराबर लेने’ की नहीं वरन उन्हें जीवन से पूर्ण्तया निकाल देने की लालसा होना अनिवार्य है। जब तक मनुष्य के अन्दर उसका पाप-स्वभाव बना रहता है, मनुष्य अपने प्रयासों और कार्यों से अपने अन्दर अपने पाप स्वभाव के प्रति स्थाई तथा सच्चा परिवर्तन नहीं ला पाता। अपनी इच्छा शक्ति और प्रयासों से कुछ परिवर्तन अवश्य संभव हैं किंतु वे ना तो स्थाई होते हैं और ना ही परिपूर्ण, कहीं ना कहीं कोई ना कोई बात रह ही जाती है; और कुछ नहीं तो अन्य लोगों से भला, सिद्ध और धर्मी बन पाने का घमण्ड और अन्य लोगों से इस धार्मिकता के स्तर की पहचान और आदर पाने पाने की भावना ही उस अहम और शेष पाप-स्वभाव की उपस्थिति को दर्शाते रहते हैं। यह स्थाई परिवर्तन मनुष्य के जीवन से पाप स्वभाव के हटाए जाने के बाद ही संभव है, और पाप-स्वभाव को स्वयं अपने प्रयासों से हटा पाना मनुष्य के लिए असंभव है। संसार का इतिहास गवाह है कि किसी भी धर्म, नियम या कानून ने आज तक कभी किसी एक भी जन को पाप से मुक्ति नहीं दी है। प्रत्येक धर्म पाप के सागर में डूबते हुए मनुष्य को तैर कर बाहर आने की विधि तो बताता है किंतु उसे पाप से निकलने के लिए सक्षम नहीं करता। केवल प्रभु यीशु ही है जो पाप-सागर में जाकर मनुष्य को बाहर लेकर आता है और फिर स्वयं उसे शुद्ध करता है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)। केवल प्रभु यीशु ही है जिसने कहा कि वह पापियों का उद्धार करने आया है, उन्हें नाश करने नहीं (मत्ती ९:१३)।

   प्रभु यीशु ने समस्त संसार के हर जन के पापों को अपने ऊपर ले लिया और उन पापों का दण्ड क्रूस पर अपने बलिदान द्वारा चुकाया, तथा मृतकों से पुनरुत्थान के द्वारा अपने परमेश्वरत्व को प्रमाणित कर दिया। अब जो कोई स्वेच्छा से प्रभु यीशु से अपने पापों को अंगीकार करके उनकी क्षमा मांगता है और अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करता है प्रभु यीशु उसके मन से पाप स्वभाव को हटाकर अपनी धार्मिकता उसे दे देता है - उसका मन पाप से परमेश्वर की ओर परिवर्तित हो जाता है। क्योंकि परमेश्वर ना किसी धर्म विशेष का है और ना ही परमेश्वर का कोई धर्म है, और क्योंकि यह परिवर्तन परमेश्वर के समक्ष और परमेश्वर के प्रति है, इसलिए यह किसी धर्म के निर्वाह अथवा परिवर्तन की नहीं केवल उस मनुष्य और परमेश्वर के बीच की बात है और इसमें किसी अन्य मनुष्य अथवा धर्म का कोई हस्तक्षेप नहीं है। यह ना किसी दबाव, ना किसी भय, ना किसी लालच और ना किसी के प्रभावित किए जाने इत्यादि के द्वारा संभव है - क्योंकि परमेश्वर प्रत्येक मनुष्य की किसी बाहरी बात को नहीं वरन मन की वस्तविक दशा को जाँचता है और उसे कोई धोखा नहीं दे सकता। ना ही यह परिवर्तन किसी रीति-रिवाज़ के पालन अथवा क्रीया-अनुष्ठान के माध्यम से संभव है, क्योंकि परमेश्वर ना तो मनुष्यों के रीति-रिवाज़ों और क्रिया-अनुष्ठानों से बन्धा है और ना ही उनके आधीन है और इन बातों के द्वारा सच्चे और जीवते परमेश्वर को कोई किसी बात के लिए बाध्य नहीं कर सकता। यह प्रत्येक व्यक्ति का पापों से हट कर परमेश्वर के साथ पवित्रता में चलने का स्वेच्छा से लिया गया निर्णय है। इस मन फिराव की सच्चाई एवं सार्थकता बोलने भर से नहीं वरन उस व्यक्ति के जीवन, व्यवहार और विचारों में आए परिवर्तन द्वारा विदित एवं प्रमाणित होती है (मत्ती ३:८)।

   यही सुसमाचार है - पाप-स्वभाव तथा पाप के दासत्व से निकलकर परमेश्वर के साथ पवित्रता का जीवन प्रभु यीशु में संभव है और संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है, और इसी मन-फिराव के लिए परमेश्वर आज भी पृथ्वी के समस्त लोगों को सुसमाचार प्रचार द्वारा बुला रहा है - आप को भी। - मार्विन विलियम्स


मन-फिराव का अर्थ पाप से इतनी घृणा करना है कि पाप-स्वभाव से पलट जाने की लालसा जीवन में सर्वोपरी हो जाए।

और यरूशलेम से ले कर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी [यीशु] के नाम से किया जाएगा। - लूका २४:४७

बाइबल पाठ: मत्ती ३:१-१२
Matthew 3:1 उन दिनों में यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला आकर यहूदिया के जंगल में यह प्रचार करने लगा। कि
Matthew 3:2 मन फिराओ; क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आ गया है।
Matthew 3:3 यह वही है जिस की चर्चा यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा की गई कि जंगल में एक पुकारने वाले का शब्द हो रहा है, कि प्रभु का मार्ग तैयार करो, उस की सड़कें सीधी करो।
Matthew 3:4 यह यूहन्ना ऊंट के रोम का वस्‍त्र पहिने था, और अपनी कमर में चमड़े का पटुका बान्‍धे हुए था, और उसका भोजन टिड्डियां और बनमधु था।
Matthew 3:5 तब यरूशलेम के और सारे यहूदिया के, और यरदन के आस पास के सारे देश के लोग उसके पास निकल आए।
Matthew 3:6 और अपने अपने पापों को मानकर यरदन नदी में उस से बपतिस्मा लिया।
Matthew 3:7 जब उसने बहुतेरे फरीसियों और सदूकियों को बपतिस्मा के लिये अपने पास आते देखा, तो उन से कहा, कि हे सांप के बच्‍चों तुम्हें किस ने जता दिया, कि आने वाले क्रोध से भागो?
Matthew 3:8 सो मन फिराव के योग्य फल लाओ।
Matthew 3:9 और अपने अपने मन में यह न सोचो, कि हमारा पिता इब्राहीम है; क्योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि परमेश्वर इन पत्थरों से इब्राहीम के लिये सन्तान उत्पन्न कर सकता है।
Matthew 3:10 और अब कुल्हाड़ा पेड़ों की जड़ पर रखा हुआ है, इसलिये जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में झोंका जाता है।
Matthew 3:11 मैं तो पानी से तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूं, परन्तु जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्तिशाली है; मैं उस की जूती उठाने के योग्य नहीं, वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा।
Matthew 3:12 उसका सूप उस के हाथ में है, और वह अपना खलिहान अच्छी रीति से साफ करेगा, और अपने गेहूं को तो खत्ते में इकट्ठा करेगा, परन्तु भूसी को उस आग में जलाएगा जो बुझने की नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था २१-२२ 
  • मत्ती २८

शनिवार, 3 मार्च 2012

प्रबल प्रवाह

   जब मैं किशोरावस्था में था तो मैं, मेरे पिता और अन्य परिवार के सदस्यों के साथ कलिफोर्निया की सैक्रेमैन्टो नदी के उदगम के निकट ट्राउट मछली पकड़ने गया। उस नदी का उदगम बर्फ पिघलने से होता है इसलिए वहां उसका पानी स्वच्छ, प्रबल प्रवाह वाला और ठंडा होता है। मैं और मेरे परिवार के लोग मछली पकड़ते समय उस पानी में उतरने और तरोताज़ा होने से अपने को रोक नहीं पाए।

   घर वापस लौटते समय, हम एक तालाब के पास भी रुके और नहाने के लिए उसमें उतरे। तालाब का पानी वैस आनन्दायक नहीं था, निश्चल होने के कारण स्वच्छ भी नहीं था तथा उस नदी के पानी की तुलना में वह स्फूर्तिदायक भी नहीं था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आमोस भविष्यद्वक्ता ने धार्मिकता द्वारा परिवर्तित होने की सामर्थ को नदी के प्रवाह के प्रभाव द्वारा दर्शाया। इस्त्राएल के प्रभावहीन धार्मिक रीतियों के व्यर्थ पालन और ग़रीबों के शोषण से विस्मित होकर आमोस ने परमेश्वर की ओर से इस्त्राएल में न्याय और धार्मिकता के प्रवाहित होने देने का आवाहन किया (आमोस २:६-८; ५:२१-२७)। उसने कहा कि परमेश्वर के लोग अधर्म और अन्याय के निश्चल और बासी पानी में पड़े हुए हैं जबकि परमेश्वर चाहता है कि वे अपने जीवनों में "न्याय को नदी की नाईं, और धर्म महानद की नाईं बहने दो" (अमोस ५:२४)।

   ना केवल तब के इस्त्राएलियों से वरन आज के लोगों से भी परमेश्वर की यही आशा है कि उनके जीवन में भी न्याय नदी के समान और धर्म महानद के समान बहे, ना कि व्यर्थ रीति-रिवाज़ों और गढ़ी हुई निष्फल धार्मिकता के सहारे लोग अपने आप को सही ठहराने के प्रयास करें। पाप से ग्रसित मन कभी सच्ची धार्मिकता को मन में स्थान पाने नहीं देगा, चाहे कितने भी नियम, कानून, दण्ड, विधि-विधान स्थापित क्यों ना किए जाएं। जब तक मन से पापों का निवारण नहीं होगा, मन स्वच्छ नहीं होगा तब तक उस में न्याय तथा धर्म का स्थिर और अटल स्थान भी नहीं होगा।

   समस्त संसार के हर जन के प्रत्येक पापों के निवारण के लिए कलवरी के क्रूस से प्रभु यीशु के लहु की जीवन दायक धारा ज़ारी है जिसके प्रबल प्रवाह में हर पाप धुल जाता है, और उसमें स्नान करने वाला पापों से शुद्ध होकर निर्मल और स्फूर्तीमान हो जाता है, एक नया जन हो जाता है, परमेश्वर की सन्तान बन जाता है - बस स्वेच्छा और विश्वास से उस धारा में उतरने भर की देर है।

   आज प्रभु यीशु का निमंत्रण संसार के हर एक जन के लिए खुला है कि वह उस प्रबल प्रवाह में धुलकर अपने पापों से स्वच्छ और निर्मल हो जाए। क्या आप ने इस उपल्ब्ध अवसर का लाभ उठाया? - डेनिस फिशर

जहां सत्य प्रवाहित होगा, वहां धार्मिकता भी होगी।

परन्तु न्याय को नदी की नाईं, और धर्म महानद की नाईं बहने दो। - अमोस ५:२४
 
बाइबल पाठ: अमोस ५:२१-२७
Amo 5:21  मैं तुम्हारे पर्वों से बैर रखता, और उन्हें निकम्मा जानता हूं, और तुम्हारी महासभाओं से मैं प्रसन्न नहीं।
Amo 5:22  चाहे तुम मेरे लिये होमबलि और अन्नबलि चढ़ाओ, तौभी मैं प्रसन्न न हूंगा, और तुम्हारे पाले हुए पशुओं के मेल बलियों की ओर न ताकूंगा।
Amo 5:23  अपने गीतों का कोलाहल मुझ से दूर करो; तुम्हारी सारंगियों का सुर मैं न सुनूंगा।
Amo 5:24  परन्तु न्याय को नदी की नाईं, और धर्म महानद की नाईं बहने दो।
Amo 5:25  हे इस्राएल के घराने, तुम जंगल में चालीस वर्ष तक पशुबलि और अन्नबलि क्या मुझी को चढ़ाते रहे?
Amo 5:26  नहीं, तुम तो अपने राजा का तम्बू, और अपनी मूरतों को चरणपीठ, और अपने देवता का तारा लिए फिरते रहे।
Amo 5:27  इस कारण मैं तुम को दमिश्क के उस पार बंधुआई में कर दूंगा, सेनाओं के परमेश्वर यहोवा का यही वचन है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २८-३० 
  • मरकुस ८:२२-३८

रविवार, 18 सितंबर 2011

सामर्थ का रहस्य

   सदा अपने पाप के बारे में सोचते ही रहना तथा अपनी खामियों के लिए हर समय विलाप करते रहना न स्वयं को न दुसरों को अच्छा लगता है। लेकिन पापों को हलके में भी नहीं लेना चाहिए। पवित्र परमेश्वर के नैतिक नियमों की अवहेलना तथा उल्लंघन अति गंभीर बात है। जीवन में पाप की भयानकता और दुषप्रभावों को कभी कमतर कर के नहीं आंकना चाहिए।

   स्कॉटलैंड के जाने-माने प्रचारक रौबर्ट मैक्चेन की मृत्योपरांत एक पादरी उनके शहर में आया। मैक्चेन की सेवकाई से बहुत से लोगों ने अपने पापों से पश्चाताप कर के प्रभ यीशु को अपने व्यक्तिगत उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण किया था। यह पादरी मैक्चेन के ऐसे प्रभावी प्रचार के रहस्य को जानना चाहता था। जिस चर्च से मैक्चेन सेवकाई करते थे, वहाँ के सेवादार ने उस पादरी को मैक्चेन की कुर्सी-मेज़ दिखाई और उनसे कहा, "आप इस कुर्सी पर बैठिए", पादरी बैठ गए; सेवादार ने फिर कहा, "अब अपनी कोहनियाँ मेज़ पर रखिए और अपना सिर अपने हाथों से पकड़ लीजिए", पादरी ने वैसा ही किया; सेवादर ने आगे कहा, "अब पश्चाताप के अपने आँसुओं को अविराल बहने दीजिए, मैक्चेन यही किया करते थे।" फिर सेवादार उस पादरी को चर्च के आगे के भाग में ले गया जहाँ पर वह मंच था जिस से मैक्चेन प्रचार करते थे। सेवादार ने पादरी से कहा, "अपनी कोहनियाँ मंच पर टिकाइए, अपने हाथों से अपने मुँह को पकड़ लीजिए और पश्चाताप के अपने आँसुओं को अविराल बहने दीजिए; मैक्चेन यही किया करते थे।"

   मैक्चेन का स्वभाव था कि वे अपने तथा अपने लोगों के पापों के लिए बेझिझक रोते और पश्चाताप करते थे। पाप के प्रति इस प्रकार कायल रहने ने उन्हें परमेश्वर के सामने दीन और नम्र रखा और परमेश्वर की सामर्थ उनमें हो कर अति प्रभावी रूप से कार्य कर सकी। इसकी तुलना में, पाप के प्रति अकसर हमारा रवैया ढिटाई का होता है। हमें अपने जीवन में पाप के लिए परमेश्वर की पवित्र आत्मा की आवाज़ के प्रति और अधिक संवेदनशील तथा पापमय व्यवहार से अलगाव का जीवन जीने को तत्पर और तैयार रहना चाहिए।

   हम परमेश्वर की क्षमा करने की प्रवृति में आनन्दित तो रह सकते हैं, लेकिन साथ ही हमें पापों के लिए पश्चातापी और शोकित भी रहना चाहिए। यही परमेश्वर के लिए सामर्थी और प्रभावी जीवन का रहस्य है। - डेव एग्नर

कलवरी पर प्रभु यीशु का क्रूस इस बात का प्रमाण है कि पाप परमेश्वर को परेशान करता है; क्या आप भी पाप से परेशान होते हैं?

धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्‍योंकि वे शांति पाएंगे। - मत्ती ५:४

बाइबल पाठ: दानिएल ९:१-१९
     Dan 9:1  मादी क्षयर्ष का पुत्र दारा, जो कसदियों के देश पर राजा ठहराया गया था,
    Dan 9:2  उसके राज्य के पहिले वर्ष में, मुझ दानिय्येल ने शास्त्र के द्वारा समझ लिया कि यरूशलेम की उजड़ी हुई दशा यहोवा के उस वचन के अनुसार, जो यिर्मयाह नबी के पास पहुंचा था, कुछ वर्षों के बीतने पर अर्थात सत्तर वर्ष के बाद पूरी हो जाएगी।
    Dan 9:3  तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा।
    Dan 9:4  मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा मानने वालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करूणा करता रहता है,
    Dan 9:5  हम लोगों ने तो पाप, कुटिलता, दुष्टता और बलवा किया है, और तेरी आज्ञाओं और नियमों को तोड़ दिया है।
    Dan 9:6  और तेरे जो दास नबी लोग, हमारे राजाओं, हाकिमों, पूर्वजों और सब साधारण लोगों से तेरे नाम से बातें करते थे, उनकी हम ने नहीं सुनी।
    Dan 9:7  हे प्रभु, तू धर्मी है, परन्तु हम लोगों को आज के दिन लज्जित होना पड़ता है, अर्थात यरूशलेम के निवासी आदि सब यहूदी, क्या समीप क्या दूर के सब इस्राएली लोग जिन्हें तू ने उस विश्वासघात के कारण जो उन्होंने तेरा किया था, देश देश में बरबस कर दिया है, उन सभों को लज्जित होना पड़ता है।
    Dan 9:8  हे यहोवा हम लोगों ने अपने राजाओं, हाकिमों और पूर्वजों समेत तेरे विरूद्ध पाप किया है, इस कारण हम को लज्जित होना पड़ता है।
    Dan 9:9  परन्तु, यद्यपि हम अपने परमेश्वर प्रभु से फिर गए, तौभी तू दयासागर और क्षमा की खान है।
    Dan 9:10  हम तो अपने परमेश्वर यहोवा की शिक्षा सुनने पर भी उस पर नहीं चले जो उस ने अपने दास नबियों से हमको सुनाई।
    Dan 9:11  वरन सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस शाप की चर्चा परमेश्वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह शाप हम पर घट गया, क्योंकि हम ने उसके विरूद्ध पाप किया है।
    Dan 9:12  सो उस ने हमारे और न्यायियों के विषय जो वचन कहे थे, उन्हें हम पर यह बड़ी विपत्ति डाल कर पूरा किया है; यहां तक कि जैसी विपत्ति यरूशलेम पर पड़ी है, वैसी सारी धरती पर और कहीं नहीं पड़ी।
    Dan 9:13  जैसे मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसे ही यह सारी विपत्ति हम पर आ पड़ी है, तौभी हम अपने परमेश्वर यहोवा को मनाने के लिये न तो अपने अधर्म के कामों से फिरे, और ने तेरी सत्य बातों पर ध्यान दिया।
    Dan 9:14  इस कारण यहोवा ने सोच विचार कर हम पर विपत्ति डाली है; क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा जितने काम करता है उन सभों में धर्मी ठहरता है; परन्तु हम ने उसकी नहीं सुनी।
    Dan 9:15  और अब, हे हमारे परमेश्वर, हे प्रभु, तू ने अपनी प्रजा को मिस्र देश से, बली हाथ के द्वारा निकाल लाकर अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जो आज तक प्रसिद्ध है, परन्तु हम ने पाप किया है और दुष्टता ही की है।
    Dan 9:16  हे प्रभु, हमारे पापों और हमारे पुरखाओं के अधर्म के कामों के कारण यरूशलेम की और तेरी प्रजा की, और हमारे आस पास के सब लोगों की ओर से नामधराई हो रही है; तौभी तू अपने सब धर्म के कामों के कारण अपना क्रोध और जलजलाहट अपने नगर यरूशलेम पर से उतार दे, जो तेरे पवित्र पर्वत पर बसा है।
    Dan 9:17  हे हमारे परमेश्वर, अपने दास की प्रार्थना और गिड़गड़ाहट सुन कर, अपने उजड़े हुए पवित्रस्थान पर अपने मुख का प्रकाश चमका; हे प्रभु, अपने नाम के निमित्त यह कर।
    Dan 9:18  हे मेरे परमेश्वर, कान लगा कर सुन, आंख खोल कर हमारी उजड़ी हुई दशा और उस नगर को भी देख जो तेरा कहलाता है; क्योंकि हम जो तेरे साम्हने गिड़गिड़ा कर प्रार्थना करते हैं, सो अपने धर्म के कामों पर नहीं, वरन तेरी बड़ी दया ही के कामों पर भरोसा रख कर करते हैं।
    Dan 9:19  हे प्रभु, सुन ले; हे प्रभु, पाप क्षमा कर; हे प्रभु, ध्यान देकर जो करता है उसे कर, विलम्ब न कर; हे मेरे परमेश्वर, तेरा नगर और तेरी प्रजा तेरी ही कहलाती है, इसलिये अपने नाम के निमित्त ऐसा ही कर।
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ३०-३१ 
  • २ कुरिन्थियों ११:१-१५

शनिवार, 17 सितंबर 2011

"उड़ाऊ पुत्र" का स्वरूप

   पापियों के प्रति परमेश्वर के प्रेम को समझाने के लिए प्रभु यीशु द्वारा कही गई "उड़ाऊ पुत्र" की नीतिकथा (लूका १५:११-३२) एक प्रचलित उदाहरण रही है। इस नीतिकथा में एक पुत्र अपने पिता से संपत्ति का अपना भाग लेकर अलग हो जाता है, और उस संपत्ति को व्यर्थ और दुराचारी जीवन में उड़ा देता है। सम्पत्ति के समाप्त हो जाने पर जब वह अकेला पड़ जाता है और बदहाल हो जाता है तो अपने व्यवहार और किये पर पश्चातापी मन के साथ अपनी उसी बदहाल दशा में अपने पिता के पास लौटता है, जो आनन्द के साथ उसे स्वीकार कर के परिवार में उसे पुनः यथास्थान स्थापित कर देता है।

   एक चित्रकार ने इस कथा पर चित्र बनाना चाहा। उसे एक ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जिस के स्वरूप पर वह उड़ाऊ पुत्र के बदहाल स्वरूप को चित्रित कर सके। मार्ग पर चलते समय उसे एक भिखारी बहुत ही बदहाल स्वरूप में दिखाई दिया, और चित्रकार ने उसे अपनी चित्रशाला में आकर चित्र बनाने के लिए नमुना बनने का निमंत्रण दिया। अगले दिन जब वह भिखारी उसकी चित्रशाला में पहुँचा तो उसका स्वरूप बदला हुआ था - वह नहा-धो कर, अपनी बढ़ी हुई दाढ़ी साफ करवा कर, बाल बना कर, साफ-सुथरे कपड़े पहन कर चित्रकार के समने प्रस्तुत हुआ था। इस हाल में उसे देख कर चित्रकार विस्मय से बोल उठा, "नहीं, ऐसे नहीं, अब इस स्वरूप में मैं तुम्हें प्रयोग नहीं कर सकता।"

   परमेश्वर भी हमें वैसा ही चाहता है, जैसे उड़ाऊ पुत्र अपने पिता के पास आया था - अपनी बदहाल दशा में। यह विचित्र और विनम्र करने वाला अनुभव है, लेकिन यदि हम अपनी ही धार्मिकता और भलाई द्वारा स्वच्छ तथा परमेश्वर को ग्रहणयोग्य होने का प्रयास करते हैं, तो यह परमेश्वर के सामने व्यर्थ है। परमेश्वर की धार्मिकता, भलाई और स्वच्छता - जिसे हमें प्रदान करने के लिए प्रभु यीशु ने अपने प्राण क्रूस पर बलिदान कर दिए, हमें केवल अपने पापों के लिए हमारे पश्चाताप और क्षमा आग्रह द्वारा ही उपलब्ध होती है, हमारे किन्ही कर्मों के द्वारा नहीं।

   प्रभु यीशु के समय में मन्दिर में सेवकाई करने वाले शास्त्री और फरीसी बहुत कड़ाई से अपनी धर्म-व्यवस्था का पालन करते थे। वे समझते थे कि परमेश्वर उनसे प्रसन्न है क्योंकि उन्होंने अपने आप को "स्वच्छ" रखा हुआ है। जब उन्होंने प्रभु यीशु को ऐसे लोगों के साथ संगति करते और उनके घर जाकर भोजन लेते देखा जो उनकी नज़रों में "अशुद्ध" और "दुष्ट" थे तो उन्हें यह बहुत नागवार गुज़रा, और वे प्रभु यीशु के विरुद्ध कुड़कुड़ाने लगे। लेकिन प्रभु यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, "मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं" (लूका ५:३२)। प्रभु यीशु का यह कहना वास्तव में उनके स्वधार्मिक व्यवहार और उस पर उन के घमण्ड पर किया गया कटाक्ष था। उन स्वधर्मी लोगों को भी अपने जीवन में छुपे पाप का अंगीकार करने की आवश्यक्ता थी, जिसे परमेश्वर भली भांति जानता था। यदि वे पश्चाताप करते तो प्रभु यीशु उन्हें भी ग्रहण कर लेते।

   परमेश्वर नहीं चाहता कि कोई भी पाप में नाश हो; "वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें" (१ तिमुथियुस २:४)। वह सब को पाप क्षमा देना चाहता है, यदि वे अपने पाप के अंगीकार और उससे क्षमा प्रार्थना के लिए तैयार हों। जैसे उड़ाऊ पुत्र, जैसा वह था अपने पिता के पास लौट आया, और पिता से सब कुछ पा लिया, वैसे ही आप भी भी जैसे हैं, प्रभु यीशु के नाम से परमेश्वर की ओर लौट आईये, आप भी उद्धार, अनन्त जीवन का अननत आनन्द, परमेश्वर की संगति और उसके राज्य में प्रवेश के भागीदार हो जाएंगे। - डेनिस डी हॉन


संसार में धनी होने की बजाए परमेश्वर के राज्य में धनी होना कहीं बेहतर है।

धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। - मत्ती ५:३
 
बाइबल पाठ: लूका १५:११-२४
    Luk 15:11  फिर उस ने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।
    Luk 15:12  उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उस ने उन को अपनी संपत्ति बांट दी।
    Luk 15:13  और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा कर के एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी।
    Luk 15:14  जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
    Luk 15:15  और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा: उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
    Luk 15:16  और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्‍हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
    Luk 15:17  जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहा हूँ।
    Luk 15:18  मैं अब उठ कर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है।
    Luk 15:19  अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
    Luk 15:20  तब वह उठ कर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देख कर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
    Luk 15:21  पुत्र न उस से कहा; पिता जी, मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है, और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं।
    Luk 15:22  परन्‍तु पिता ने अपने दासों से कहा, फट अच्‍छे से अच्‍छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।
    Luk 15:23  और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्‍द मनावें।
    Luk 15:24  क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्‍द करने लगे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २७-२९ 
  • २ कुरिन्थियों १०

शुक्रवार, 4 फ़रवरी 2011

ईमानदारी की ज़िम्मेवारी

काश यह संभव होता कि मैं सच्चे मन से कह पाता कि मैंने सदा अपना कहा हर वचन सच्चाई से निभाया है। मैं चाहता हूं कि मैं यह दावा कर सकूं कि मैंने अपने जीवन में और कुछ चाहे किया हो या न किया हो, परन्तु अपने वचन का पालन अवश्य किया है। लेकिन सच्चाई यही है कि मैं यह दावा नहीं कर सकता। न केवल मैंने उन को दुख दिया है जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया, लेकिन अपने वायदे न निभा के अपने परमेश्वर को भी दुखी किया है।

परमेश्वर चाहता है कि मैं जो करने का वायदा करता हूं, वह करूं भी। भजन १५ इस विष्य में सन्देह का कोई स्थान नहीं छोड़ता। इस भजन में लिखा है कि परमेश्वर जिस मनुष्य के साथ रहना चाहता है उसका चरित्र और व्यवहार कैसा होता है: वह अपने चाल चलन में खरा, पूरे मन से ईमानदार, दूसरों के विष्य में झूठा नहीं, और जो कहे उसको सम्पूर्णतः निभाने वाला - चाहे इसके लिये उसे पीड़ा अथवा हानि ही क्यों न उठानी पड़े।

परमेश्वर ने अपने बड़े प्रेम में होकर मेरे पाप क्षमा किये हैं, और आज तक मेरे प्रति अपने प्रत्येक वायदे में पूर्णतः ईमानदार और विश्वासयोग्य रहा है। समय और परिस्थिति के कारण कभी उसे अपने वायदे टालने या बदलने का प्रयास नहीं किया, यहां तक कि मेरे उद्धार के लिये उसने अपने एकलौते पुत्र को भी बलिदान कर दिया।

परमेश्वर ने पाप को दण्डित करने, लेकिन फिर भी जिस किसी ने भी उस पर विश्वास करके उससे क्षमा मांगी, उसके प्रति दयावन्त होकर उसे क्षमा करने की अपनी वचबध्दता सदा निभाई है, चाहे उस व्यक्ति के पाप कैसे भी जघन्य क्यों न रहे हों, चाहे वह व्यक्ति अपनी दृष्टि में भी क्षमा के योग्य न रहा हो।

क्योंकि मेरा परमेश्वर ईमानदार है और अपने वचन का पूर्णतः पालन करता है, मुझे भी उसका पुत्र और अनुयायी होने के नाते, ऐसा ही जीवन बिताना है। उसमें किये गए अपने विश्वास और उससे मिली पापों की क्षमा को यदि मैं अपने ईमानदार जीवन और खरे चरित्र द्वारा संसार के समक्ष न रखूं, तो मेरा उसका पुत्र और अनुयायी होने का दावा करना व्यर्थ है।

जिसने इतनी दया और करुणा मेरे प्रति दिखाई कि मेरे लिये अपने आप को ही दे दिया उसके प्रति यह मेरी ईमानदारी की ज़िम्मेवरी है। - मार्ट डी हॉन


एक चीज़ है जिसे मसीही विश्वासी देकर भी रख सकता है - अपना वचन।

हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा?...जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े। - भजन १५:१, ४

बाइबल पाठ: भजन १५

हे परमेश्वर तेरे तम्बू में कौन रहेगा? तेरे पवित्र पर्वत पर कौन बसने पाएगा?
वह जो खराई से चलता और धर्म के काम करता है, और हृदय से सच बोलता है;
जो अपनी जीभ से निन्दा नहीं करता, और न अपने मित्र की बुराई करता, और न अपने पड़ोसी की निन्दा सुनता है;
वह जिसकी दृष्टि में निकम्मा मनुष्य तुच्छ है, और जो यहोवा के डरवैयों का आदर करता है, जो शपथ खाकर बदलता नहीं चाहे हानि उठाना पड़े;
जो अपना रूपया ब्याज पर नहीं देता, और निर्दोष की हानि करने के लिये घूस नहीं लेता है। जो कोई ऐसी चाल चलता है वह कभी न डगमगाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन ३४-३५ मत्ती
  • २२:२३-४६