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Wednesday, February 13, 2013

महान एवं महिमामय


   यरुशलेम में परमेश्वर यहोवा के मन्दिर में गाए जाने वाले एक स्तुतिगीत के शब्द "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं" (भजन ४६:१०) परमेश्वर की महानता पर मनन करने को स्मरण कराते हैं। परमेश्वर की महिमा करते रहना और उसकी महानता को स्मरण रखना उसके प्रति सही रवैया बनाए रखने और अपने जीवनों में उसे उचित प्राथमिक स्थान पर बनाए रखने में हमारी बहुत सहायता करता है। परमेश्वर की महिमा और अपने जीवनों में उसे महान रखने के लिए हम उसके गुण, उसके नाम और उसके व्यक्तित्व को आधार बना सकते हैं।

   उसके गुण - यहोवा पूर्णतः विश्वासयोग्य, अनन्त, सर्व-ज्ञानी, सर्व-सामर्थी, सर्व-विद्यमान, अपरिवर्तनीय, अटल, परम-पवित्र, कृपालु, धीरजवन्त, न्यायी, निष्पक्ष, अपरिमित परमेश्वर है। वह पूर्णतः सिद्ध, धर्मी, बुद्धिमान, महिमामय है। वह अपनी सृष्टि से प्रेम रखता है, उनके साथ व्यक्तिगत रीति पर संपर्क रखता है, उनके प्रति करुणामय रहता है और उनके लिए सुलभ एवं उपलब्ध रहता है। वह त्रिएक तथा स्वयंभू है।

   उसके नाम - परमेश्वर यहोवा को उसके वचन बाइबल में अनेक संज्ञाएं दी गईं हैं जो उसके गुणों को दिखाती हैं। बाइबल उसे सृजनहार, पालनहार, तारणहार, प्रेम, ज्योति, उद्धारकर्ता, रक्षक, अच्छा चरवाहा, प्रभु, पिता, शिक्षक भी कहती है। उसे सांत्वना देने वाला, महान, न्यायी, ’मैं हूँ’, सर्वशक्तिमान कहकर भी संबोधित किया गया है।

   उसका व्यक्तित्व - यहोवा शत्रु शैतान के विरुद्ध हमारी ढाल है; वह हमारी सामर्थ है; वह हमारा मार्गदर्शक है; वह संकट के समय हमारा दृढ़ गढ़ है जो अपने बच्चों की सुरक्षा अपनी आँख की पुतली के समान करता है, उनके लिए हर आवश्यक वस्तु उपलब्ध कराता है, उनकी सामर्थ से बाहर किसी परीक्षा में उन्हें पड़ने नहीं देता और प्रतिपल उनकी देखभाल करता रहता है क्योंकि वह ना तो कभी ऊँघता है और ना कभी सोता है।

   परमेश्वर के गुणों पर मनन करें; उसके नामों पर विचार करें; उसके व्यक्तित्व को सराहें। उसे आदर दें, उसकी उपासना करें, उससे प्रेम करें, उसे अपने जीवनों में प्रथम स्थान दें, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहें, उसे अपने जीवनों द्वारा संसार के समक्ष महान करें। यही सच्ची आराधना है, यही मसीही विश्वासी के जीवन का उद्देश्य है। - डेव ब्रैनन


जितने प्राणी हैं सब के सब याह की स्तुति करें! याह की स्तुति करो! - भजन १५०:६

...मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन ४६:१०

बाइबल पाठ: भजन ४६
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १४ 
  • मत्ती २६:५१-७५