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Tuesday, November 12, 2013

पालनहारा परमेश्वर


   रॉबिन और स्टीव परमर्श देने का कार्य करते हैं, यही उनकी मसीही सेवकाई भी है; किंतु इससे उन्हें आमदानी बहुत कम मिलती है। हाल ही में परिवार में उठी एक समस्य के कारण अपनी पुरानी कार में उन्हें 5,000 मील की यात्रा करनी पड़ी। समस्या से निपटने के बाद वापस लौटते हुए, घर से लगभग 2,000 मील दूर उनकी कार से आवाज़ें आने लगीं और वह चलने में दिक्कत देने लगी। उन्होंने गाड़ी को जब एक कार ठीक करने वाले मिस्त्री को दिखाया तो उत्तर मिला, इसका अब कुछ नहीं हो सकता, पूरा इंजन ही बदलना पड़ेगा। उनके पास नया इंजन डलवाने के लिए पैसे नहीं थे इसलिए बड़ी कठिनाई से वे जैसे-तैसे उस गाड़ी में घर तक तो लौट आए। तब उन्हें एक "कार मिशनरी" का पता चला जो मसीही सेवकाई में लगे लोगों कि सहायता करता था। उसने उनकी कार देखी और उसे अचंभा हुआ कि वह वापस घर तक आ गई थी। लेकिन उससे भी अधिक अचंभा स्टीव और रॉबिन को हुआ जब उस "कार मिशनरी" ने उनसे बिना कोई पैसा लिए उनकी गाड़ी में नया इंजन लगवाने का प्रस्ताव दिया। यदि उन्होंने मार्ग में नया इंजन डलवाने का प्रयास किया होता तो व्यर्थ ही, उतने पैसे ना होते हुए भी उन्हें हज़ारों डॉलर का खर्चा उठाना पड़ जाता। परमेश्वर ने उनके लिए कुछ अलग ही इन्तज़ाम पहले ही कर रखा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में जब इस्त्राएली मिस्त्र की गुलामी से निकल कर परमेश्वर की अगुवाई में वाचा के देश कनान की ओर चले तो उन्हें मरुभूमि से होकर जाना पड़ा। तीन दिन कि यात्रा के बाद उनका पानी समाप्त हो गया, और उन्हें यह भी पता नहीं था कि अब पानी कहाँ से मिलेगा। लेकिन परमेश्वर समस्या भी जानता था और उसका समाधान भी। जिस मार्ग से वे इस्त्राएली जा रहे थे वहाँ दो जगह, मारा और एलीम पर, पानी के सोते थे और परमेश्वर उन्हें वहीं लेकर गया। उन स्थानों पर ना केवल उन्हें पानी मिला वरन विश्राम करने के लिए अच्छा स्थान भी मिला।

   चाहे हमारी समस्या गंभीर और परिस्थिति विकट लगे, हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का यह आश्वासन है कि परमेश्वर हमारी अगुवाई कर रहा है। वह हमारा पालनहारा परमेश्वर है, हमारी यात्रा के मार्ग और मार्ग की हर बात को तथा मार्ग के लिए हमारी प्रत्येक आवश्यकता को वह भली-भांति जानता है। जब आवश्यकता आन पड़ेगी तब हमारा पालनहारा परमेश्वर उसका समाधान भी करेगा। - डेव ब्रैनन


असंभव परिस्थितियाँ परमेश्वर पर हमारे विश्वास को दृढ़ करने के अवसर होते हैं।

तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। - निर्गमन 15:25

बाइबल पाठ: निर्गमन 15:22-27
Exodus 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए; और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला। 
Exodus 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा। 
Exodus 15:24 तब वे यह कहकर मूसा के विरुद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं? 
Exodus 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उसने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उसने यह कहकर उनकी परीक्षा की, 
Exodus 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी आज्ञाओं पर कान लगाए, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजा है उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं। 
Exodus 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे; और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52 
  • इब्रानियों 9