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Thursday, November 14, 2013

विलाप और सांत्वना


   यरुशलेम आग की लपटों से घिरा हुआ था और परमेश्वर का भविष्यद्वकता यिर्मयाह उसकी दुर्दशा पर विलाप कर रहा था। लंबे समय से तथा बारंबार यिर्मयाह यरुशलेम के लोगों और हाकिमों को आते विनाश से बचने के लिए पश्चाताप करने का परमेश्वर का सन्देश पहुँचाता रहा था, लेकिन उन्होंने उसकी एक ना सुनी, उसका तिरस्कार किया, उसे सताया, उसे झूठा कहा। अब वह विनाश का समय अपनी संपूर्ण वीभत्सता के साथ यरुशलेम पर आ पड़ा था और चारों ओर बरबादी ही बरबादी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह द्वारा लिखित छोटी सी पुस्तक ’विलापगीत’ यिर्मयाह द्वारा यरुशलेम की इस बरबादी पर किए गए शोक और विलाप का वर्णन है।

   यिर्मयाह ने इस पुस्तक को एक विशेष रीति से लिखा है। मूल इब्रानी भाषा की वर्णमाला में, जिसमें यह पुस्तक लिखी गई, 22 अक्षर होते हैं। यिर्मयाह ने इस पुस्तक को कविता के रूप में लिखा, और कविता का हर छंद इब्रानी वर्णनमाला के अक्षर से क्रमबुद्ध रूप में आरंभ होता है। प्रत्येक अक्षर के इस प्रकार क्रमबद्ध रूप में प्रयोग करे जाने से ना केवल पाठकों को इसे स्मरण करना सरल है, वरन यह इस बात का भी सूचक है कि यिर्मयाह का शोक और विलाप अधूरा नहीं वरन आरंभ से अन्त तक संपूर्ण था। इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि यिर्मयाह ने ना केवल यरुशलेम और उसके लोगों की दशा बयान करी, वरन साथ ही अपना अनुभव और अपनी व्यथा भी बयान करी, और उससे भी बढ़कर, इस सारे कठोर अनुभव में उसने परमेश्वर से मिलने वाली शांति और सांत्वना को भी लिखा है। यिर्मयाह ने लिखा, "क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है;" (विलापगीत 3:31-32)।

   यह हम मसीही विश्वासियों के लिए एक अद्भुत आशा और मार्गदर्श्न की बात है - हमारा प्रभु, जिस पर हमने विश्वास किया है और जिसे अपना जीवन समर्पित किया है वह हमारे कष्ट और क्लेष में हमारे साथ होता है, हमें संभालता है, हमें सांत्वना देता है। क्या आप भी किसी हृदय विदारक घटना या क्लेष से होकर निकल रहे हैं अथवा आप को निकलना पड़ा है? यिर्मयाह के समान ही, अपने मन के शोक और विलाप को पूरा अवसर दीजिए, साथ ही परमेश्वर की उपस्थिति और बीती समय में उसके द्वारा दिखाई गई भलाईयों को भी स्मरण रखिए। इससे आप उसकी शांति तथा सांत्वना को भी अनुभव करने पाएंगे और भविषय के लिए आशावान भी बने रहेंगे। - डेनिस फिशर


परमेश्वर आज हमारे हृदयों को हमारे आँसुओं से धुल लेने देता है जिससे आते सुख और आनन्द के लिए वे साफ रहें।

क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:17

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:22-33
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5 
  • इब्रानियों 10:19-39