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Tuesday, August 15, 2017

स्वीकार


   1800 के अन्त की ओर, तथा 1900 के आरंभिक वर्षों में, जॉर्जिया प्रांत के सवान्ना शहर के बन्दरगाह में आने वाले जलपोतों का स्वागत करने के लिए एक बात चिर-परिचित हो गई थी - फ्लोरेंस मार्टस नामक महिला, जो 44 वर्ष तक संसार भर से आने वाले विशाल जलपोतों का स्वागत दिन में रुमाल लिए हुए हाथ हिला-हिला कर और रात में लालटेन हिला कर किया करती थी। आज सवान्ना के मोरेल उद्यान में स्थापित की गई फ्लोरेंस और उसके वफादार कुत्ते की मूर्ति आने वाले जलपोतों का स्वागत करती है।

   हार्दिक अभिनन्दन और स्वागत में कुछ बात है जो स्वीकार करना दिखाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल के रोमियों 15:7 में पौलुस ने अपने पाठकों से आग्रह किया: "इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो"। पौलुस बता रहा था कि मसीही विश्वासी और मसीह यीशु के अनुयायी होने के नाते, हमें एक दूसरे के प्रति कैसा व्यवहार रखना चाहिए: "और धीरज, और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो" (रोमियों 15:5-6)।

   मसीह यीशु में सहविश्वासियों को स्वीकार करना केवल एक दूसरे के प्रति हमारे प्रेम ही को नहीं दिखाता है - यह उस महान प्रेम को प्रतिबिंबित करता है जिसके द्वारा प्रभु परमेश्वर ने हमें अपने परिवार में सम्मिलित किया है - स्थायी रूप से, अनन्तकाल के लिए। - बिल क्राऊडर


मसीही जितना मसीह की निकटता में बढ़ते हैं, 
वे उतना ही एक दूसरे की निकटता में भी बढ़ते हैं।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। - फिलिप्पियों 2:3-4

बाइबल पाठ: रोमियों 15:1-7
Romans 15:1 निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें; न कि अपने आप को प्रसन्न करें। 
Romans 15:2 हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये सुधारने के निमित प्रसन्न करे। 
Romans 15:3 क्योंकि मसीह ने अपने आप को प्रसन्न नहीं किया, पर जैसा लिखा है, कि तेरे निन्दकों की निन्दा मुझ पर आ पड़ी। 
Romans 15:4 जितनी बातें पहिले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्र शास्त्र की शान्ति के द्वारा आशा रखें। 
Romans 15:5 और धीरज, और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हें यह वरदान दे, कि मसीह यीशु के अनुसार आपस में एक मन रहो। 
Romans 15:6 ताकि तुम एक मन और एक मुंह हो कर हमारे प्रभु यीशु मसीह के पिता परमेश्वर की बड़ाई करो। 
Romans 15:7 इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 91-93
  • रोमियों 15:1-13