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Friday, October 17, 2014

अवसर


   अपनी किशोरावस्था में मेरे बेटे स्टीव ने मुझ से एक प्रश्न पूछा: "पिताजी, यदि परमेश्वर सनातन से है तो सृष्टि को रचने से पूर्व वह क्या करता था?"

   परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि "आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की" (उत्पत्ति 1:1), तो उस ’आदि’ से पूर्व के अवर्णित, असीमित समय में परमेश्वर क्या कर रहा था? बाइबल हमें इस बारे में एक हलकी सी झलक देती है। हम देखते हैं कि प्रभु यीशु मसीह पृथ्वी की सृष्टि से पहले ही परमेश्वर के द्वारा महिमान्वित किया गया और परमेश्वर ने उससे प्रेम रखा (यूहन्ना 17:5, 24)। यह भी लिखा है कि सृष्टि की रचना से पहले "बुद्धि" थी, जिसका उद्गम परमेश्वर का चरित्र था। "बुद्धि" अपने बारे में नीतिवचन 8:23 में कहती है, "मैं सदा से वरन आदि ही से पृथ्वी की सृष्टि के पहिले ही से ठहराई गई हूं।"

   हम तीतुस की पत्री से जानने पाते हैं कि हम मनुष्यों के लिए अनन्त जीवन की आशा की योजना भी परमेश्वर ने सनातन से बना रखी थी "उस अनन्त जीवन की आशा पर, जिस की प्रतिज्ञा परमेश्वर ने जो झूठ बोल नहीं सकता सनातन से की है" (तीतुस 1:2)। बाइबल से हम यह भी ज्ञात होता है कि पृथ्वी की सृष्टि से पहले से ही परमेश्वर के द्वारा मसीह यीशु में होकर अनुग्रह द्वारा मनुष्य के उद्धार की योजना कार्यान्वित हो रही थी: "जिसने हमारा उद्धार किया, और पवित्र बुलाहट से बुलाया, और यह हमारे कामों के अनुसार नहीं; पर अपनी मनसा और उस अनुग्रह के अनुसार है जो मसीह यीशु में सनातन से हम पर हुआ है" (2 तिमुथियुस 1:9)। इसी प्रकार 

   इस पृथ्वी की सृष्टि से पहले ही परमेश्वर द्वारा किए गए कार्यों और बनाई गई योजनाओं की यह एक हलकी सी झलक हमें अपने प्रेमी परमेश्वर पिता की महानता, प्रताप और सामर्थ की हमारी कल्पना से भी बाहर विशालता का आभास करवाती है। कितना अद्भुत है वह परमेश्वर जो हमारे उद्धार के लिए अपनी सृष्टि में एक मानव रूप में सिमट कर आ गया और अन्य मनुष्यों से सब कुछ सहना स्वीकार किया, और आज भी सह रहा है, जिससे साधारण विश्वास और पापों से पश्चाताप के द्वारा हम मनुष्य उद्धार पा जाएं, उसकी सनतान बन जाएं, उसके साथ स्वर्ग में रहने के अधिकारी बन जाएं।

   यदि अभी भी आपने उस अद्भुत परमेश्वर के महान प्रेम को नहीं पहचाना है तो यह अवसर आपके लिए अभी भी उपलब्ध है - वह आपकी प्रतीक्षा में है। - डेव ब्रैनन


यह रचा गया संसार अनन्त में एक लघु अन्तराल मात्र है। - सर थौमस ब्राउन

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:1-31
Genesis 1:1 आदि में परमेश्वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्टि की। 
Genesis 1:2 और पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी; और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था: तथा परमेश्वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डलाता था। 
Genesis 1:3 तब परमेश्वर ने कहा, उजियाला हो: तो उजियाला हो गया। 
Genesis 1:4 और परमेश्वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। 
Genesis 1:5 और परमेश्वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहिला दिन हो गया।
Genesis 1:6 फिर परमेश्वर ने कहा, जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए। 
Genesis 1:7 तब परमेश्वर ने एक अन्तर कर के उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:8 और परमेश्वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया।
Genesis 1:9 फिर परमेश्वर ने कहा, आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:10 और परमेश्वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा; तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्वर ने द&#