ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 3 मई 2020

दृष्टिकोण



     हमारे इलाके में पिछले तीस वर्षों की तुलना में सबसे अधिक बर्फ पड़ी थी। लगातार पड़ रही बर्फ को बेलचे से रास्ते से हटाते-हटाते मेरी मांसपेशियां दुखने लगी थीं। उस दिन जब मैं अपने व्यर्थ प्रतीत होने वाले प्रयास को कर के, थकी हुई, घर के अन्दर कमरे में आई तो वहां जल रही आग की गर्मी से, और उसके चारों और बैठे अपने बच्चों को देखकर मुझे अच्छा लगा। अपने घर की सुरक्षा में से जब मैंने खिड़की से बाहर देखा, तो उस मौसम के प्रति मेरा दृष्टिकोण बिलकुल बदल गया। फिर मुझे करने के लिए और परिश्रम के स्थान पर पेड़ों की डालियों पर जमी हुई बर्फ, और दूर-दूर तक धरती पर फ़ैली हुई बर्फ की सफ़ेद चादर के सुन्दर दृश्य दिखाई देने लगे।

     मुझे ऐसा ही, किन्तु और भी अधिक मार्मिक, दृष्टिकोण में परिवर्तन परमेश्वर के वचन बाइबल में आसाप में दिखता है जब मैं उसके द्वारा लिखे गए भजन 73 को पढ़ती हूँ। इस भजन के आरम्भ में वह संसार की कार्य-प्रणाली, कैसे गलत करने वाले लाभान्वित होते दिखाई देते हैं और ईमानदार परेशान रहते हैं, के कारण दुखी होता है। उसे संदेह होता है कि संसार से भिन्न हो कर तथा औरों के लाभ के लिए जीने से क्या कोई लाभ है (पद 13)। परन्तु जब वह परमेश्वर की उपस्थिति में आता है, उसका दृष्टिकोण बदल जाता है (पद 16-17)। उसे ध्यान हो आता है कि परमेश्वर संसार और उसकी समस्याओं के साथ खराई से न्याय करेगा, और इससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात, परमेश्वर की उपस्थिति में होना भला है (पद 28)।

     जब संसार की निरंतर बनी रहने वाली समस्याएं हमारे उत्साह को ठंडा कर देती हैं, हमें हताश करने लगती हैं, तो प्रार्थना में परमेश्वर की उपस्थिति में आने और उसके प्रेम, ढाढ़स, और आशा द्वारा प्रोत्साहित होना बहुत अच्छा होता है। परमेश्वर के जीवन और दृष्टिकोण बदल देने वाले सत्य – कि उसका न्याय और समझ-बूझ, हमारे दृष्टिकोण से कहीं बढ़कर और उत्तम है, हमने ठंडेपन से निकालकर उसकी शांति की गर्मी प्रदान करता है। चाहे हमारी परिस्थितियाँ न भी बदलें, हमारा बदला हुआ दृष्टिकोण हमें परमेश्वर के कार्यों में निहित भलाई और सुन्दरता देख पाने की समझ देता है। - कर्सटिन होल्मबर्ग

परमेश्वर ही हमें सही दृष्टिकोण प्रदान करता है।

मेरी आंखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूं। - भजन 119:18

बाइबल पाठ: भजन 73:12-28
भजन संहिता 73:12 देखो, ये तो दुष्ट लोग हैं; तौभी सदा सुभागी रहकर, धन सम्पत्ति बटोरते रहते हैं।
भजन संहिता 73:13 निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है;
भजन संहिता 73:14 क्योंकि मैं दिन भर मार खाता आया हूं और प्रति भोर को मेरी ताड़ना होती आई है।
भजन संहिता 73:15 यदि मैं ने कहा होता कि मैं ऐसा ही कहूंगा, तो देख मैं तेरे लड़कों की सन्तान के साथ क्रूरता का व्यवहार करता,
भजन संहिता 73:16 जब मैं सोचने लगा कि इसे मैं कैसे समझूं, तो यह मेरी दृष्टि में अति कठिन समस्या थी,
भजन संहिता 73:17 जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्र स्थान में जा कर उन लोगों के परिणाम को न सोचा।
भजन संहिता 73:18 निश्चय तू उन्हें फिसलने वाले स्थानों में रखता है; और गिराकर सत्यानाश कर देता है।
भजन संहिता 73:19 अहा, वे क्षण भर में कैसे उजड़ गए हैं! वे मिट गए, वे घबराते घबराते नाश हो गए हैं।
भजन संहिता 73:20 जैसे जागने हारा स्वप्न को तुच्छ जानता है, वैसे ही हे प्रभु जब तू उठेगा, तब उन को छाया सा समझ कर तुच्छ जानेगा।
भजन संहिता 73:21 मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,
भजन संहिता 73:22 मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था।
भजन संहिता 73:23 तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था; तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा।
भजन संहिता 73:24 तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा।
भजन संहिता 73:25 स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
भजन संहिता 73:26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।
भजन संहिता 73:27 जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे; जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।
भजन संहिता 73:28 परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजाओं 14-15
  • लूका 22:21-46



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें