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रविवार, 28 मई 2017

पहेली


   उस पहेली ने मुझे चकरा दिया; किसी ने पूछा, ऐसा क्या है जो परमेश्वर से महान और शैतान से भी अधिक दुष्ट है? वह गरीबों के पास होता है, अमीरों को उसकी आवश्यकता है, और यदि आप उसका सेवन करोगे तो मर जाओगे? क्योंकि मेरा मस्तिष्क प्रगट से भटक गया था, इसलिए मैं उत्तर देने से चूक गया। उस पहेली का उत्तर था "कुछ नहीं"।

   यह पहेली मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई एक अन्य पहेली का स्मरण करवाती है, जिसे, जब वह पूछी गई थी, बूझना और भी अधिक कठिन रहा होगा। प्राचीन काल के एक बुध्दिमान व्यक्ति अगूर ने पूछा था, "कौन स्वर्ग में चढ़ कर फिर उतर आया? किस ने वायु को अपनी मुट्ठी में बटोर रखा है? किस ने महासागर को अपने वस्त्र में बान्ध लिया है? किस ने पृथ्वी के सिवानों को ठहराया है? उसका नाम क्या है? और उसके पुत्र का नाम क्या है? यदि तू जानता हो तो बता!" (नीतिवचन 30:4)।

   आज हम इन प्रश्नों के उत्तर जानते तो हैं; परन्तु कभी कभी जब हम जीवन के प्रश्नों, चिंताओं और आवश्यकताओं से घिरे हुए होते हैं तो प्रगट उत्तर को नज़रन्दाज़ कर देते हैं। जीवन की परेशान करने वाली बातें, जीवन के स्त्रोत, और हमारे सृजनहार, पालनहार तथा तारणहार पर से हमारी नज़रें भटका सकती हैं। इसलिए हमें एक अन्य अति महत्वपूर्ण पहेली को सदा ध्यान में रखना चाहिए: वह कौन हो जो परमेश्वर के साथ एक है, शैतान से कहीं अधिक सामर्थी है, उसकी आवश्यकता संसार के प्रत्येक व्यक्ति को है, धनी और निर्धन सभी उसे जब भी वे चाहे सेंत-मेंत प्राप्त कर सकते हैं, और यदि उसकी मेज़ से खाएंगे-पीएंगे तो कभी नाश नहीं होंगे? उत्तर है प्रभु यीशु मसीह। - मार्ट डीहॉन


जब हम अपनी आँखें प्रभु परमेश्वर पर केंद्रित करते हैं
 तो हमें विचलित करने वाली हमारी परिस्थितियाँ 
हमारा ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पाती हैं।

जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। - विलापगीत 3:25-26

बाइबल पाठ: नीतिवचन 30:1-9
Proverbs 30:1 याके के पुत्र आगूर के प्रभावशाली वचन। उस पुरूष ने ईतीएल और उक्काल से यह कहा, 
Proverbs 30:2 निश्चय मैं पशु सरीखा हूं, वरन मनुष्य कहलाने के योग्य भी नहीं; और मनुष्य की समझ मुझ में नहीं है। 
Proverbs 30:3 न मैं ने बुध्दि प्राप्त की है, और न परमपवित्र का ज्ञान मुझे मिला है। 
Proverbs 30:4 कौन स्वर्ग में चढ़ कर फिर उतर आया? किस ने वायु को अपनी मुट्ठी में बटोर रखा है? किस ने महासागर को अपने वस्त्र में बान्ध लिया है? किस ने पृथ्वी के सिवानों को ठहराया है? उसका नाम क्या है? और उसके पुत्र का नाम क्या है? यदि तू जानता हो तो बता! 
Proverbs 30:5 ईश्वर का एक एक वचन ताया हुआ है; वह अपने शरणागतों की ढाल ठहरा है। 
Proverbs 30:6 उसके वचनों में कुछ मत बढ़ा, ऐसा न हो कि वह तुझे डांटे और तू झूठा ठहरे।
Proverbs 30:7 मैं ने तुझ से दो वर मांगे हैं, इसलिये मेरे मरने से पहिले उन्हें मुझे देने से मुंह न मोड़: 
Proverbs 30:8 अर्थात व्यर्थ और झूठी बात मुझ से दूर रख; मुझे न तो निर्धन कर और न धनी बना; प्रतिदिन की रोटी मुझे खिलाया कर। 
Proverbs 30:9 ऐसा न हो, कि जब मेरा पेट भर जाए, तब मैं इन्कार कर के कहूं कि यहोवा कौन है? वा अपना भाग खो कर चोरी करूं, और अपने परमेश्वर का नाम अनुचित रीति से लूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 10:24-42


शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

पूरक


   क्रिस्टी ने अपने जन्मदिन के उत्सव के दिन आए हुए सब मेहमानों को अपनी ओर से भेंट देकर चकित कर दिया। क्रिस्टी ने हम सब को एक एक व्यक्तिगत चिठ्ठी दी जिसमें उसने प्रत्येक के लिए व्यक्तिगत रिति से लिखा था कि उसके जीवन में हम क्या स्थान रखते हैं, और साथ ही परमेश्वर ने हमें जैसा बनाया और जो जो कार्य सौंपा है उसके विषय में हमें प्रोत्साहित करने के लिए भी कुछ शब्द लिखे थे; प्रत्येक व्यक्ति को लिखी चिठ्ठी के साथ क्रिस्टी ने एक और चीज़ रखी थी - जिग्सौ पहेली के अंश, हमें यह स्मरण दिलाने के लिए हम अपने आप में अद्वितीय तो हैं, किसी के भी बिलकुल जैसा और कोई अन्य नहीं है, लेकिन साथ ही हम एक दूसरे के पूरक भी हैं, जिग्सौ पहेली के समान हम एक साथ मिलकर ही परमेश्वर की योजना का पूरा चित्र बना सकते हैं।

   इस अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए 1 कुरिन्थियों 12 के विविरण को नए दृष्टिकोण से पढ़ने-समझने में सहायता करी। इस अध्याय में प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के विश्वासियों की मण्डली अर्थात चर्च की तुलना मानव शरीर से करी है, यह समझाने के लिए जैसे शरीर अनेक अंगों जैसे हाथ, पैर, आँख, कान इत्यादि से मिलकर बना है और प्रत्येक अंग का अपना उपयोग, अपनी भूमिका, अपनी आवश्यकता है, वैसे ही मसीही मण्डली या चर्च भी मसीह यीशु के सभी विश्वासियों से मिलकर बनी है और सबकी अपनी उपयोगिता, भूमिका और आवश्यकता है, जिसके बिना मण्डली या चर्च अपूर्ण है।

   बहुत सरल होता है किसी दूसरे की सेवकाई और वरदानों को देखकर अपने आप को गौण और महत्वहीन समझ लेना, विशेषकर तब जब वह दूसरा किसी प्रमुख या प्रगट कार्य में लगा हो। लेकिन प्रभु चाहता है कि हम अपने आप को उस नज़रिए से देखें जिससे प्रभु हमें देखता है - उसके द्वारा सृजन में अद्वितीय और भूमिका तथा उपयोगिता में बहुमूल्य तथा अति महत्वपूर्ण। इस सृष्टि और परमेश्वर की योजना रूपी जिग्सौ पहेली में आप एक महत्वपूर्ण भाग हैं, आपके बिना उसका चित्र पूरा नहीं हो सकता। इस चित्र में अपने स्थान को भरने के लिए परमेश्वर ने आपको एक स्वरूप और कुछ गुण दिए हैं, और आप उन ही संसाधनों के द्वारा परमेश्वर के लिए कार्यकारी, उपयोगी और उसे महिमा देने वाले बन सकते हैं।

   अन्य लोगों से अपनी तुलना करने के स्थान पर अपने आप को परमेश्वर की मण्डली में अन्य लोगों के साथ पूरक बनाईए और उसके द्वारा दिए गए संसाधनों का सदुपयोग कीजिए। - डेविड मैक्कैअसलैंड


आपका जीवन परमेश्वर की ओर से आपको दिया गया उपहार है; इस जीवन को परमेश्वर को भेंट करके उसकी महिमा के लिए कार्य करें।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। - रोमियों 12:1

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2
  • इब्रानियों 10:1-18