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सोमवार, 26 नवंबर 2018

पहरा



      क्या आपने कभी कोई ऐसी ई-मेल भेजी है जिसे भेजते ही आपको एहसास हुआ हो कि वह किसी गलत व्यक्ति को चली गई है, या उसमें कुछ ऐसा लिखा है जो कि कटु और हानिकारक है, और आप नहीं चाहते हैं कि वह पढ़ा जाए? काश कि ऐसा कोई प्रावधान होता कि हम ऐसे संदेशों को रोकने पाते। अब ऐसा संभव हो गया है। अनेकों कंपनियां अब आपको यह सुविधा प्रदान करती हैं कि ई-मेल भेजने के कुछ समय पश्चात तक आप उसे अपने कंप्यूटर से आगे जाने से रोके रख सकते हैं। किन्तु प्रेषित हो जाने के पश्चात फिर वह सन्देश मुँह से निकले शब्द के समान है जिसे वापस लौटाया नहीं जा सकता है। ई-मेल को रोक कर रखने के प्रावधान को समस्याओं के समाधान की बजाए एक ऐसी स्मृति के रूप में देखना चाहिए जो हमें सचेत करती है कि हम जो भी कहें पहले उसके विषय में सावधानीपूर्वक विचार अवश्य कर लें।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस की पहली पत्री में उसने प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों से कहा,कि वे अपने प्रति की गई बुराई का प्रत्युत्तर बुराई से न दें, वरन भलाई से दें, अपनी जुबां को बुरा कहने से रोक कर रखें, और बुराई का नहीं वरन भलाई और शान्ति की बातों के खोजी हों (1 पतरस 3:9-11)। भजनकार दाऊद ने लिखा, “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर!” (भजन 141:3)। दिन आरंभ करने के लिए, तथा प्रत्येक उस परिस्थिति के लिए जिसमें हम अपने शब्दों के द्वारा किसी पर प्रहार करना चाहते हैं, किसी से बदला लेना चाहते हैं, यह एक बहुत अच्छी प्रार्थना है।

      हे प्रभु हमारे शब्दों की रखवाली करें और हमारे मुँह पर पहरा लगाएँ जिससे हम अपने शब्दों के द्वारा किसी की कोई हानि न करें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा। - नीतिवचन 18:21

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-18
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो।
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे।
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे।
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है?
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ।
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ।
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों।
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।
1 Peter 3:18 इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात अधर्मियों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुंचाए: वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1 पतरस 3



रविवार, 25 नवंबर 2018

प्रसिद्धि



      हम में से अनेकों प्रसिद्धि से आसक्त हैं – या तो स्वयं प्रसिद्ध होने के लिए या फिर प्रसिद्ध लोगों के जीवनों के ब्यौरे की प्रत्येक जानकारी, जैसे कि उन लोगों के अंतर्राष्ट्रीय फिल्म या पुस्तक दौरे, उनके द्वारा रेडियो अथवा टेलिविज़न कार्यक्रमों में उपस्थिति और कथन, सोशल मीडिया जैसे कि ट्विटर, फेसबुक आदि पर उनके लेख और उनके प्रशंसकों की संख्या आदि की जानकारी रखना, आदि।

      हाल ही में अमेरिका में किए गए एक शोध में शोधकर्ताओं ने इंटरनेट के माध्यम से विशेष रीति से बनाए गए कार्यक्रम द्वारा संसार के लोगों द्वारा इंटरनेट के माध्यम से प्रसिद्ध लोगों की खोज को सूचीबद्ध किया। उनके इस शोध में इतिहास में सबसे अधिक प्रसिद्ध हस्ती प्रभु यीशु मसीह थे।

      परन्तु फिर भी तथ्य यही है कि प्रभु यीशु मसीह ने कभी अपनी प्रसिद्धि नहीं चाही। जब वे पृथ्वी पर थे, तब भी उन्होंने प्रसिद्धि नहीं चाही (मत्ती 9:30; यूहन्ना 6:15); परन्तु फिर भी प्रसिद्धि उनके पीछे-पीछे आती थी, और उनके विषय जानकारी उनके इलाके में तुरंत फैल गई (मरकुस 1:28; लूका 4:37)।

      प्रभु यीशु जहाँ भी जाते थे, भीड़ उनके पीछे हो लेती थी; जो आश्चर्यकर्म वे करते थे, उससे लोग उनकी ओर आकर्षित होते थे। परन्तु जब उन लोगों ने उन्हें जबरन अपना राजा बनाना चाहा, तो तब प्रभु यीशु चुपचाप उनके मध्य में से निकल गए (यूहन्ना 6:15)। अपने पृथ्वी पर आने के उद्देश्य के विषय वे स्वर्गीय पिता से एक मन रहकर, सदा हर बात को पिता ही की इच्छा और समय पर छोड़ देते थे (यूहन्ना 4:34; 8:29; 12:23)। और पिता की इसी इच्छा के अन्तर्गत उन्होंने “मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली” (फिलिप्पियों 2:8)।

      प्रसिद्धि पाना कभी भी प्रभु यीशु का उद्देश्य नहीं था; उनका तो सीधा सा उद्देश्य था: परमेश्वर का पुत्र होने के नाते उन्होंने नम्रता और समर्पण के साथ अपने आप को परमेश्वर पिता का आज्ञाकारी बनाए रखा और सँसार के सभी लोगों के उद्धार एवँ पापों की क्षमा के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया। वे सँसार के पापों के लिए मारे गए, गाड़े गए और तीसरे दिन मृतकों में से जी भी उठे। प्रभु यीशु का उद्देश्य प्रसिद्धि नहीं, पापियों का उद्धार तथा पापों की क्षमा प्रदान करना था। - सिंडी हैस कैस्पर


प्रभु यीशु मसीह प्रसिद्ध होने के लिए नहीं, 
वरन सँसार के पापों के लिए बलिदान होने के लिए आए थे।

इसी कारण वह जगत में आते समय कहता है, कि बलिदान और भेंट तू ने न चाही, पर मेरे लिये एक देह तैयार किया। होम-बलियों और पाप-बलियों से तू प्रसन्न नहीं हुआ। तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं। - इब्रानियों 10:5-7

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 24-26
  • 1 पतरस 2



शनिवार, 24 नवंबर 2018

भविष्य



      मेरी पत्नि जब कमरे में आई तो उसने मुझे कमरे में रखी विशाल दीवाल घड़ी का पट खोलकर उसकी लकड़ी को अन्दर से सूंघते हुए पाया, और मुझ से पूछा, “यह क्या कर रहे हो?” मैंने झेंपते और पट को बन्द करते हुए उत्तर दिया, “इस घड़ी की लकड़ी में से मेरे माता-पिता के घर जैसी गंध आती है, तुम कह सकती हो कि मैं कुछ पल के लिए अपने घर वापस चला गया था।”

      सूँघना अनेकों प्रबल स्मृतियाँ जगा सकता है। हम उस घड़ी को अपने माता-पिता के घर से लगभग बीस वर्ष पहले देश के एक से दूसरे भाग में लेकर आए थे, परन्तु उस घड़ी की लकड़ी की गंध अभी भी मुझे मेरे बचपन की ओर वापस ले जाती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री का लेखक कुछ लोगों के बारे में लिखता है जो अपने घर की लालसा एक अन्य प्रकार से कर रहे थे। वे बीती स्मृतियों के स्थान पर विश्वास के द्वारा अपने स्वर्गीय घर की प्रतीक्षा में थे। यद्यपि जिसकी उन्हें लालसा थी, वह अभी बहुत दूर प्रतीत हो रहा था, परन्तु उन्हें पूरा भरोसा था कि परमेश्वर जिसने उनसे इसका वायदा किया है, वही उन्हें उस घर तक लेकर जाएगा जहाँ वे सदा काल तक उसके साथ रहेंगे (इब्रानियों 11:13-16)।

      बाइबल में फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री में पौलुस स्मरण करवाता है, “पर हमारा स्‍वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं” (फिलिप्पियों 3:20)। अपने तथा सारे सँसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह को देख पाने और उसमें होकर उन सभी बातों को पा लेने, जिनका परमेश्वर पिता ने हम से वायदा किया है, की लालसा रखना, हमारी सहायता करता है कि हम अपना ध्यान प्रभु की ओर लगाए रखें। न तो जो बीत चुका है, और न ही वर्तमान की किसी बात की तुलना, उस आनन्द से की जा सकती है, जो भविष्य में हम मसीही विश्वासियों के लिए परमेश्वर ने तैयार करके रखा है। - जेम्स बैंक्स


सबसे अच्छा घर, स्वर्ग में हमारे लिए तैयार किया गया घर है।

प्रभु यीशु ने कहा: तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना 14:1-3

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया।
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया।
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है।
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था।
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं।
Hebrews 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं।
Hebrews 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था।
Hebrews 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 22-23
  • 1 पतरस 1



शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

भलाई



      सँसार में, सँसार से, कितना कुछ प्राप्त कर लेना मनुष्य के लिए प्रयाप्त होता है? हम यह प्रश्न उस दिन विशेषकर पूछ सकते हैं जिस दिन को सँसार के अनेकों विकसित देश खरीददारी करने में बिताते हैं। मैं अमेरिका में मनाए जाने वाले धन्यवादी दिवस के अगले दिन मनाए जाने वाले “ब्लैक फ्राईडे” की बात कर रहा हूँ, जिस दिन बहुतेरी दुकाने जल्दी खुलती हैं और दामों में भारी कटौती के सौदे देती हैं। यह दिन और प्रथा सँसार के अन्य देशों में भी फैल गई है। खरीददारी करने वाले कुछ लोगों के पास सीमित संसाधन ही होते हैं और वे ऐसे दामों पर वस्तुएँ खरीदना चाहते हैं जो उनकी सीमा के अन्दर हों। परन्तु दुःख की बात है कि बहुतेरे अपनी खरीददारी लालच के अन्तर्गत करते हैं, और सौदेबाजी करने में लड़ाई-झगड़े भी हो जाते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में “उपदेशक” (सभोपदेशक 1:1) हमें मार्ग दिखाता है उस लालच तथा और अधिक प्राप्त कर लेने की सनक से बच कर रहने का, जो हमारे मनों में हो सकती है और दुकानों में देखने को मिलती है। वह बुद्धिमता से सिखाता है कि जो लोग धन से प्रेम रखते हैं उनके पास कभी भी पर्याप्त नहीं होगा, और वे सदा ही अपनी लालसाओं के आधीन बने रहेंगे। परन्तु मृत्यु पर वे अपने साथ अपनी अर्जित वस्तुओं में से कुछ भी नहीं ले जाने पाएँगे “जैसा वह मां के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके” (सभोपदेशक 5:15)। बाइबल के नए नियम खण्ड में प्रेरित पौलुस “उपदेशक” की इसी शिक्षा को तिमुथियुस को लिखी अपनी पहली पत्री में एक भिन्न रीति से प्रस्तुत करता है। पौलुस सचेत करता है कि धन का लोभ ही प्रत्येक बुराई की जड़ है और मसीही विश्वासियों को “संतोष सहित भक्ति” की चाह रखनी चाहिए (1 तीमुथियुस 6:6-10)।

      हम चाहे बहुतायत में रहते हों हो, या अभाव में, हम सभी में अपने मन में और भी अधिक प्राप्त करने की, सँसार की वस्तुओं को प्राप्त करते रहने की इच्छा रहती है, जिसके कारण हम कभी-कभी अनुचित व्यवहार में भी पड़ जाते हैं। परन्तु जब हम अपनी शान्ति और भलाई के लिए परमेश्वर की ओर देखते हैं, उसे अपनी प्रत्येक आवश्यकता का स्त्रोत तथा मार्ग बनाते हैं तो वह हमें अपनी भलाई और प्रेम के खजानों से भर देता है। - अमी बाउचर पाई


सच्चा संतोष सँसार की किसी भी वस्तु पर निर्भर नहीं करता है।

तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा। - 1 यूहन्ना 2:15-17

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:10-20
Ecclesiastes 5:10 जो रूपये से प्रीति रखता है वह रूपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से: यह भी व्यर्थ है।
Ecclesiastes 5:11 जब सम्पत्ति बढ़ती है, तो उसके खाने वाले भी बढ़ते हैं, तब उसके स्वामी को इसे छोड़ और क्या लाभ होता है कि उस सम्पत्ति को अपनी आंखों से देखे?
Ecclesiastes 5:12 परिश्रम करने वाला चाहे थोड़ा खाए, था बहुत, तौभी उसकी नींद सुखदाई होती है; परन्तु धनी के धन के बढ़ने के कारण उसको नींद नहीं आती।
Ecclesiastes 5:13 मैं ने धरती पर एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो,
Ecclesiastes 5:14 और वह किसी बुरे काम में उड़ जाता है; और उसके घर में बेटा उत्पन्न होता है परन्तु उसके हाथ मे कुछ नहीं रहता।
Ecclesiastes 5:15 जैसा वह मां के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके।
Ecclesiastes 5:16 यह भी एक बड़ी बला है कि जैसा वह आया, ठीक वैसा ही वह जाएगा; उसे उस व्यर्थ परिश्रम से और क्या लाभ है?
Ecclesiastes 5:17 केवल इसके कि उसने जीवन भर बेचैनी से भोजन किया, और बहुत ही दु:खित और रोगी रहा और क्रोध भी करता रहा?
Ecclesiastes 5:18 सुन, जो भली बात मैं ने देखी है, वरन जो उचित है, वह यह कि मनुष्य खाए और पीए और अपने परिश्रम से जो वह धरती पर करता है, अपनी सारी आयु भर जो परमेश्वर ने उसे दी है, सुखी रहे: क्योंकि उसका भाग यही है।
Ecclesiastes 5:19 वरन हर एक मनुष्य जिसे परमेश्वर ने धन सम्पत्ति दी हो, और उन से आनन्द भोगने और उस में से अपना भाग लेने और परिश्रम करते हुए आनन्द करने को शक्ति भी दी हो- यह परमेश्वर का वरदान है।
Ecclesiastes 5:20 इस जीवन के दिन उसे बहुत स्मरण न रहेंगे, क्योंकि परमेश्वर उसकी सुन सुनकर उसके मन को आनन्दमय रखता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5



गुरुवार, 22 नवंबर 2018

धन्यवादी



      कौर्नार्स्टोन विश्वविद्यालय में हम प्रत्येक पतझड़ में धन्यवादी दिवस के दिन एक बड़े और भव्य भोज का आयोजन करते हैं। हमारे छात्रों को यह बहुत पसन्द है। पिछले वर्ष भोजन के लिए बैठे छात्रों में से एक मेज़ के चारों ओर बैठे कुछ छात्रों ने एक विशेष खेल को खेलने का निर्णय लिया – उन्होंने एक दूसरे को चुनौती दी कि वे किसी एक विषय का नाम लेंगे जिसके लिए वे धन्यवादी हैं, और विषय को दोहराया नहीं जाएगा; प्रत्येक छात्र के पास नाम लेने के लिए केवल तीन सेकेंड होंगे, और जो नाम नहीं लेने पाया वह खेल से बाहर हो जाएगा।

      पढ़ाई के दौरान अनेकों बातें होती हैं जिनके लिए छात्र शिकायत कर सकते हैं या फिर कुड़कुड़ा सकते हैं; परन्तु इन छात्रों ने धन्यवादी होना चुना था। और मेरा विश्वास है कि उस खेल को खेलने के पश्चात उन सब ने बहुत अच्छा अनुभव किया होगा, विशेषकर उसकी तुलना में जैसा वे शिकायतें करने के पश्चात अनुभव करते।

      जीवन में शिकायत करने और कुड़कुड़ाने के तो बहुतेरे अवसर आते रहेंगे, परन्तु यदि हम ध्यान से देखें तो धन्यवादी होने के लिए मिली हुई आशीषों की भी कमी नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में, कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास से उन्हें मिले नए जीवन के विषय में बताता है, और तीन बार वह “धन्यवादी” होने के गुण का उल्लेख करता है। कुलुस्सियों 3:15 में वह उन्हें “धन्यवादी बने रहो” कहता है; फिर 3:16 में वह उनसे कहता है कि “...अपने अपने मन में अनुग्रह [धन्यवाद] के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ”; और 3:17 में कहता है, “वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो”। जब हम इस बात का संज्ञान लेते हैं कि पौलुस ने यह पत्री रोमी कैदखाने से लिखी थी, तो हमें सोच कर विसमय होता है कि उस कठिन परिस्थति में भी पौलुस स्वयँ परमेश्वर के प्रति धन्यवादी रहता था तथा औरों को भी धन्यवादी रहने के लिए प्रोत्साहित करता था।

      आज, हम निर्णय लें कि हम परमेश्वर के प्रति धन्यवादी बने रहेंगे, क्योंकि वह हर बात, हर परिस्थिति के द्वारा अन्ततः हमारा भला ही करना चाहता है। - जो स्टोवैल


धन्यवादी बने रहने के रवैये को अपनाएँ।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-17
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4



बुधवार, 21 नवंबर 2018

धन्यवाद



      एमिली सुन रही थी, जब उसके मित्र धन्यवाद दिवस से संबंधित अपने परिवार में प्रचलित परंपराओं की बारे में बता रहे थे। गैरी ने कहा, “हम एक से दूसरे कमरे में जाते हैं और प्रत्येक जन बताता है कि वह परमेश्वर के प्रति किन किन बातों के लिए धन्यवादी है।” एक अन्य मित्र ने अपने परिवार के एक साथ बैठकर धन्यावद का भोजन करने और साथ प्रार्थना करने के विषय बताया। उसने अपने पिता के साथ बिताए गए समय के बारे में स्मरण करते हुए कहा कि जब वे जीवित थे तब, “यद्यपि पिताजी को भूल जाने की बीमारी हो गई थी परन्तु परमेश्वर के प्रति धन्यवाद देने में उनकी यादाशत बिलकुल स्पष्ट होती थी।” रैंडी ने कहा कि “मेरे परिवार में साथ मिलकर परमेश्वर के प्रति स्तुति और धन्यवाद के गीत गाने की परम्परा है, और मेरी दादी तो गाती ही चली जाती हैं, रुकने का नाम ही नहीं लेती हैं!”

      यह सब सुनते सुनते और अपने परिवार के बारे में सोचते हुए एमिली की उदासी और ईर्ष्या बढ़ती चली जा रही थी, और जब उसकी बारी आई तो उसने शिकायत के भाव में कहा, “हमारी परम्परा तो बस टर्की खाना और बैठकर टेलिविज़न देखना है। हमारे घर में कोई परमेश्वर का नाम भी नहीं लेता है और न ही उसे धन्यवाद करता है।”

      तुरंत ही एमिली को अपने रवैये पर ग्लानी हुई। उसके मन में आवाज़ उठी, “तुम उसी परिवार की सदस्या हो। तुम ऐसा क्या भिन्न कर सकती हो जो उस दिन के महत्व को परिवार के सामने सार्थक करे?” उसने निर्णय लिया कि वह वह अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य को व्यक्तिगत रीति से यह बताना चाहती है कि वह परमेश्वर की धन्यवादी है कि वह उसके बहन, भाई, या संबंधी हैं। जब धन्यवादी दिवस आया, तो उसने एक एक करके प्रत्येक से उनके प्रति और उनके लिए परमेश्वर के प्रति अपने धन्यवाद को व्यक्त किया, और उन सब को भी उसका यह प्रेम भरा व्यवहार देखकर बहुत अच्छा लगा। ऐसा करना एमिली के लिए सरल नहीं था क्योंकि यह उसके परिवार का सामान्य व्यवहार या वार्तालाप नहीं था, परन्तु उन सब से उनके प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने से उसे और उन्हें दोनों को बहुत अच्छा लगा।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, “कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो” (इफिसियों 4: 29) औरों के प्रति, तथा औरों के लिए हमारे धन्यवाद के शब्द हमें अपने तथा परमेश्वर के लिए उनकी कीमत का एहसास दिला सकते हैं। - ऐनी सेटास


प्रोत्साहन के शब्दों से मनुष्य की आत्मा आशा से भर जाती है।

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा। - नीतिवचन 18:21

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:25-32
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3



मंगलवार, 20 नवंबर 2018

दृष्टिकोण



      रैले देखने में एक बलवान कुत्ता प्रतीत होता है – वह आकार में बड़ा है, उसकी मांसपेशियाँ सुडौल हैं, उसके घने बाल हैं, और उसका वज़न 100 पाउंड से भी अधिक है। परन्तु अपने स्वरूप के प्रतिकूल, रैले लोगों के साथ बहुत सरलता से घुल-मिल जाता है। उसका स्वामी उसे लेकर अस्पतालों में जाता है जहाँ  लोग उसके साथ समय बिताने से आनन्दित होते हैं। एक बार एक चार वर्षीय लड़की ने उसे कमरे के पार देख कर उसे सहलाना चाहा, परन्तु उसके आकार को देखकर वह भयभीत रही। अन्ततः उसकी जिज्ञासा उसके भय पर जयवंत हुई और वह रैले के पास आई, उसे थपथपाया, सहलाया और कुछ मिनिट तक उससे बातें भी करती रही। उस लड़की ने जाना कि रैले चाहे देखने में बलवान है परन्तु स्वभाव से बहुत नम्र और मिलनसार है।

      बलवान होते हुए भी नम्र और मिलनसार होने के ये गुण मुझे प्रभु यीशु मसीह के स्वभाव का भी स्मरण करवाते हैं। प्रभु यीशु मसीह के विषय में हम परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में पढ़ते हैं। प्रभु यीशु सुगम्य थे – उन्होंने छोटे बच्चों का स्वागत किया (मत्ती 19:13-15)। वे व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री के साथ उसकी कठिन स्थिति में भी दयालु और कृपालु हुए (यूहन्ना 8:1-11)। सामान्य लोगों के प्रति उनकी अनुकम्पा के अन्तर्गत उन्होंने उन लोगों को परमेश्वर और उसके राज्य के विषय सिखाया (मरकुस 6:34)। लेकिन साथ ही प्रभु यीशु की सामर्थ्य अभूतपूर्व और विस्मयकारी थी। उनके द्वारा दुष्ट-आत्माओं को निकाले जाने, प्रचण्ड आँधी-तूफानों को शान्त करने, और मृतकों को पुनः जीवित करने के द्वारा लोग अवाक रह गए (मरकुस 1:21-34, 4:35-41; यूहन्ना 11)।

      प्रभु यीशु मसीह के प्रति हमारा दृष्टिकोण निर्धारित करता है कि हम उसके साथ कैसा संबंध बनाते हैं। यदि हम केवल उसके बल पर ही ध्यान बनाए रखेंगे, तो हम उससे अंतरंग समबन्ध नहीं बनाने पाएँगे, और एक औपचारिक आदर एवँ आराधना मात्र ही देने पाएँगे। परन्तु यदि हम उसकी दया और कृपा पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे, तो हम उसे बहुत हलके में लेने और उसके साथ लापरवाही का व्यवहार करने के जोखिम में पड़ जाएँगे।

      सत्य तो यह है कि अपनी महानता और सामर्थ्य के कारण प्रभु यीशु को हमारी आज्ञाकारिता और समर्पण मिलना चाहिए, और उनकी नम्रता एवँ प्रेम के कारण वे हमारे अंतरंग मित्र भी बनना चाहते हैं। हम प्रभु यीशु मसीह के प्रति क्या दृष्टिकोण रखते हैं? – जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के प्रति हमारा दृष्टिकोण, उसके साथ हमारे संबंध को निर्धारित करता है।

पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के। इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है। - इब्रानियों  1:1-2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15: 9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2