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सोमवार, 8 सितंबर 2014

हृदय की प्रार्थना


   उस दिन मैलकॉम द्वार करी गई वह प्रार्थना मुझे बहुत अच्छी लगी। अन्य 100 बच्चों के सामने खड़े होकर 7 वर्षीय मैलकॉम ने प्रार्थना करी, "प्रभु यीशु, आपका बहुत धन्यवाद कि हमें फुटबॉल खेलने और चर्च जाने का अवसर मिलता है; और इसके लिए भी धन्यवाद कि आप हमें यहाँ सुरक्षित लाए और आपने हमारे पाप क्षमा किए तथा हमें अनन्त जीवन दिया है। हे प्रभु, हम आपसे बहुत प्रेम करते हैं; कृप्या आप कभी यह नहीं भूलना कि हम आपसे कितना प्रेम करते हैं"।

   उस बच्चे का बड़ी मासूमियत और खराई से अपने हृदय को परमेश्वर के सामने खोलना सुनकर मेरी आँखें नम हो गईं। व्यसक होने के कारण हम अपनी प्रार्थनाओं को परमेश्वर के सामने कुछ विशेष शब्दों के प्रयोग द्वारा ’चमकाने’ का प्रयास करते हैं; यह सोच कर कि इस प्रकार वे परमेश्वर को अधिक अच्छी लगेंगी, या फिर इसलिए कि वे हमारे आस-पास के लोगों को सुनने में अच्छी लगें। लेकिन सच तो यह है कि परमेश्वर शब्दों की नहीं हृदय से निकलने वाले खरी बातों तथा भावनाओं की, जैसे मैलकॉम की वह प्रार्थना, कद्र करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र नहेम्याह ने जब सुना कि उसकी जन्मभूमि यरुशालेम की शहरपनाह टूटी पड़ी है और वहाँ लोग बड़ी दुर्दशा में हैं, तो उसका हृदय उनके लिए चिंतित हुआ (नहेम्याह 1:3)। उस स्थान और वहाँ के लोगों के लिए कुछ करने के लिए उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी। उसने परमेश्वर की आराधना करी (पद 5), उससे पापों के लिए क्षमा माँगी (पद 6), उसकी वाचाओं को स्मरण कराया (पद 9) तथा राजा से भी दया याचना करी (पद 11)। परमेश्वर ने नहेम्याह की प्रार्थना सुनी, उसका उत्तर दिया, उसे आवश्यक संसाधन उपल्बध करवाए और परमेश्वर की सुरक्षा एवं सहायता से नहेम्याह यरुशालेम का पुनर्निमाण करने पाया।

   आज आपके मन में क्या है? परमेश्वर के प्रति धन्यवाद या जीवन के बोझ? जो भी है, अपने हृदय को परमेश्वर के आगे खोल दीजिए। वह आपके हृदय की प्रार्थना को सुनना चाहता है। - ऐनी सेटास


सर्वोच्च कोटि की प्रार्थना एक नम्र हृदय की गहरईयों से निकल कर आती है।

तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा। - दानिय्येल 9:3 

बाइबल पाठ: नहेम्याह 1:1-11
Nehemiah 1:1 हकल्याह के पुत्र नहेम्याह के वचन। बीसवें वर्ष के किसलवे नाम महीने में, जब मैं शूशन नाम राजगढ़ में रहता था, 
Nehemiah 1:2 तब हनानी नाम मेरा एक भाई और यहूदा से आए हुए कई एक पुरुष आए; तब मैं ने उन से उन बचे हुए यहूदियों के विषय जो बन्धुआई से छूट गए थे, और यरूशलेम के विष्य में पूछा। 
Nehemiah 1:3 उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं। 
Nehemiah 1:4 ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कह कर प्रार्थना करता रहा। 
Nehemiah 1:5 हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान और भययोग्य ईश्वर! तू जो अपने प्रेम रखने वाले और आज्ञा मानने वाले के विष्य अपनी वाचा पालता और उन पर करुणा करता है; 
Nehemiah 1:6 तू कान लगाए और आंखें खोले रह, कि जो प्रार्थना मैं तेरा दास इस समय तेरे दास इस्राएलियों के लिये दिन रात करता रहता हूँ, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के पापों को जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, मान लेता हूँ। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है। 
Nehemiah 1:7 हम ने तेरे साम्हने बहुत बुराई की है, और जो आज्ञाएं, विधियां और नियम तू ने अपने दास मूसा को दिए थे, उन को हम ने नहीं माना। 
Nehemiah 1:8 उस वचन की सुधि ले, जो तू ने अपने दास मूसा से कहा था, कि यदि तुम लोग विश्वासघात करो, तो मैं तुम को देश देश के लोगों में तितर बितर करूंगा। 
Nehemiah 1:9 परन्तु यदि तुम मेरी ओर फिरो, और मेरी आज्ञाएं मानो, और उन पर चलो, तो चाहे तुम में से निकाले हुए लोग आकाश की छोर में भी हों, तौभी मैं उन को वहां से इकट्ठा कर के उस स्थान में पहुंचाऊंगा, जिसे मैं ने अपने नाम के निवास के लिये चुन लिया है। 
Nehemiah 1:10 अब वे तेरे दास और तेरी प्रजा के लोग हैं जिन को तू ने अपनी बड़ी सामर्थ और बलवन्त हाथ के द्वारा छुड़ा लिया है। 
Nehemiah 1:11 हे प्रभु बिनती यह है, कि तू अपने दास की प्रार्थना पर, और अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानना चाहते हैं, कान लगा, और आज अपने दास का काम सफल कर, और उस पुरुष को उस पर दयालु कर। (मैं तो राजा का पियाऊ था।)

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 15-18


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