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रविवार, 17 जनवरी 2010

समुद्र में भाईचारा

बाइबल पाठ: इफिसियों २:१४-२२

इसलिए तुम अब... पवित्र लोगों के संगी स्वदेशी हो गए। - इफिसीयों २:१९

अगस्त ८, २००५ को संसार ने नाटकीय रीति से बचाए गए सात रूसी नाविकों के बारे में जाना। ये नाविक एक छोटी पन्डुब्बी में थे, जो मछली पकड़ने के जाल में उलझ गई। इन नाविकों ने तीन दिन समुद्र के नीचे की ठंड और अंधेरे में बिताए, उन्हें ज़िन्दा रखने के लिए ६ घंटे से कम समय की ऑकसीजन ही बाकी रह गई थी। ऊपर रूसी, जापानी, ब्रिटिश और अमेरिकन रक्षक उनकी रक्षा करने का मिला जुला प्रयत्न कर रहे थे। अंत में पन्डुब्बी जाल की उलझन से छुड़ाई गई। रूसी सुरक्षा मंत्री ने सब के मिले जुले प्रयास की सराहना की, "हमने शब्दों में नहीं, कामों में समुन्द्र में भाईचारा देखा।"

"इफिसियों" की पत्री में विश्वासियों की यीशु में प्राप्त एकता के बारे में लिखा है, जिसे "परमेश्वर के घराने" (२:१९) की एकता कहा गया है। अन्य जाति के लोग जो कभी मसीह से बेगाने और अजनबी (पद १२) थे, वे अब "मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए" (पद १३)। वे यहूदी भाईयों और बहिनों के साथ एक हुए। मसीही समाज के हर कार्य में यही एकता दिखनी चाहिये।

यीशु के विश्वासियों को एक बहुत ज़रूरी बचाव में लगने के लिये ज़िम्मेदारी दी गई है। यीशु में विश्वास को जाने बिना लोग मर रहे हैं। परमेश्वर की स्तुति हो कि कई मिशन मिलकर संसार भर के निराश लोगों को आशा, उद्धार, शिक्षा और आराम देने का काम कर रहे हैं। मसीह के भाईचारे ऐसे ही मिल जुल कर कार्य करने का नाम है। - डेविड एग्नर


एक स्वस्थ कलीसिया एक दुखी संसार के लिए सर्वोत्तम साक्षी है।
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ४१, ४२
  • मत्ती १२:१-२३

शनिवार, 16 जनवरी 2010

पाप का दूसरा नाम

बाइबल पाठ: उतपत्ति ३९:९
मैं ऐसी बड़ी दुष्टता करके परमेश्वर का अपराधी क्योंकर बनूं? - उत्पत्ति ३९:९

एक दिन यूसुफ ने अपने आपको एक कठिन परिस्थित्ति में पाया, जब उसके मलिक की पत्नी ने उसे अपनी वासना का शिकार बनाना चाहा। जवान युसुफ के लिये उस औरत का प्रलोभन कितना बड़ा होगा। युसुफ ने यह भी एहसास किया होगा कि अगर वह मालकिन के प्रलोभनों के आधीन नहीं हुआ, तो फिर उसे उसके भयंकर क्रोध का शिकार होना पड़ेगा।

तो भी यूसुफ ने मालकिन से साफ इन्कार किया। उसके नैतिक सिद्धाँत का स्त्रोत था पाप के विषय में उसकी स्पष्ट समझ और परमेश्वर के प्रति उसकी श्रद्धा। यूसुफ ने उस मालकिन से कहा "मैं ऐसी बड़ी दुष्टता करके परमेश्वर का अपराधी क्योंकर बनूं?" ( उत्पत्ति ३९:९)

आज पाप को अधिक स्वीकारयोग्य नामों से बुलाने की परंपरा सी बन गई है। परन्तु परमेश्वर के विरुद्ध किये गये अपराधों को पाप ना कहकर, अन्य कोई नाम देने से पाप के प्रति हमारी प्रतिरोध शक्ति को कमज़ोर करेगा और पाप के दुष्परिणामों की गंभीरता से हमारी नज़र हटायेगा।

युसुफ के लिये पाप केवल "निर्णय की गलती" नहीं था, न ही वह "जीभ का फिसलना", या "कम्ज़ोरी के क्षणों में की गई मूर्खता" थी। यूसुफ ने पाप को उसकी वास्तविकता में देखा-परमेश्वर के विरुद्ध किया गया गंभीर अपराध और उसने अपराध की गंभीरता को कभी कम नहीं करना चाहा।

परमेश्वर के नैतिक स्तर अटल हैं। जब हम पाप को परमेश्वर के लिये घृणित बात मानेंगे हैं, तभी हम सही नैतिक निर्णय ले सकेंगे। पाप को एक हलका नाम देने से न तो उसके प्रति परमेश्वर की घृणा मिटेगी और न ही उससे होने वाले हमारे नुक्सान की कीमत घटेगी। - सी. पी. हीया


पाप को नज़रंदाज़ करना एक भारी बेवकूफी है।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति ३९,४०
  • मत्ति ११

शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

यह परमेश्वर के वचन में है

बाइबल पाठ: भजन संहिता ११९:२५-३२
जब तू मेरा हियाव बढ़ाएगा तब मैं तेरी आज्ञाओं के मार्ग में दौड़ूंगा। - भजन संहिता ११९:३२


मैं आशावादी हूँ, हर बात में एक अच्छा पहलू देख लेता हूँ, परन्तु मैं यह भी जानता हूँ कि जीवन में अन्धेरा और अकेलापन भी होता है।

मैंने कई किशोरों से बातें की हैं जिनके माँ या बाप का क्रोध , उनके लिये स्कूल से घर वापस आने जैसी साधारण बात को एक डरावाना अनुभव बनाता है।

मैंने ऐसे लोगों से बातें की हैं जो निराशा से घिरे रहते हैं।

मैंने ऐसे लोगों के साथ काफी समय बिताया है जो मेरे और मेरी पत्नी के समान, अपने बच्चे की अचानक मृत्यु के दुखः के साथ जीवन जी रहे हैं। मैंने देखा है कि संसार भर में गरीबी लोगों को दबोचकर क्या कर सकती है।

ये सब जानते हुए भी, मैं निराश नहीं होता। मैं जानता हूँ कि यीशु में हमेशा आशा है, पवित्र आत्मा के द्वारा मार्ग दर्शन और परमेश्वर के वचन में ज्ञान और सामर्थ मिलती है।

भजन ११९ के शब्द हमें प्रोत्साहन देते हैं। हमारी आत्मा "धूल में पड़ी है" तो भी परमेश्वर का वचन हमें जिला सकता है (पद २५)। जब मन दुखः से भरा हो तो भी उसका वचन हमें संभालता है (पद २८)। जब धोखा हमें डराता है, तब हम परमेश्वर के वचन की सच्चाई का अनुसरण कर सकते हैं (पद २९,३०)। परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करने से हमारा मन स्वतंत्र रहता है (पद ३२)।

क्या जीवन की सम्स्याएं आपको दबा रहीं हैं?" अगर हाँ तो परमेश्वर के वचन से आशा, मार्गदर्शन और ज्ञान पा सकते हैं, यह परमेश्वर के वचन में है। - डेव ब्रैनन


खूब पढ़ने से बाइबल आत्मा का अच्छा पोषण करती है।
एक साल में बाइबल:
  • उतपत्ति ३६ - ३८
  • मत्ती १०:२१-४२

गुरुवार, 14 जनवरी 2010

पंख पर

बाइबल पाठ: मत्ती १०:२७-३१

इस लिये डरो नहीं तुम बहुत गौरयों से बढ़कर हो। - मत्ती १०:३१

ऐलेन टेनेन्ट अपनी पुस्तक "पंख पर" में बाज़ जाति की एक प्रकार के पलायन का मार्ग जानने के अपने प्रयासों को लिखा है। अपने सौन्दर्य, तेज़ी और शक्ति के लिये ये पक्षी बहुत मूल्यवान माने जाते थे।और वे महराजाओं और धनी ऊगों के शिकार के साथी भी रहे। दुखः की बात है कि १९५० के दशक से कीटनाशक रसायन डी.डी.टी.के प्रयोग के कारण इन पक्षियों की प्रजनन क्षम्ता कम हो गई और अब ये लुप्त होने वली प्रजातियों में गिने जाते हैं।

इनकी जाति को बढ़ाने के प्रयत्न में टेनेन्ट ने कुछ चुने बाज़ पक्षियों पर संप्रेषक (ट्रांसमीटर) लगाए, ताकि उनका पलायन के विवरण जान ले। परन्तु उनके पीछे जब वे विमान में उड़े तो उनपर लगाए गये संप्रेषक से संकेत कई बार खो गए।अपने बहुत प्रगतिशील टेक्नीकी ज्ञान के बावजूद, वे उन पक्षियों के पलायन-मार्ग का ठीक से पता नहीं लगा सके।

हमारे लिये यह जानना लाभदायक है कि परमेश्वर जो हमारा संरक्षण करता है, हम सदा उसकी नज़रों में बने रहते हैं। यीशु ने कहा, तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना एक गौरैया भी भूमि पर नहीं गिर सकती। इसलिय्र डरो नहीं, तुम बहुत गौरयों से बढ़कर हो (मत्ती १०:२९-३१)।

जब हम कठिन हालत में होते हैं तब भय के कारण सन्देह करते हैं कि परमेश्वर हमारी परिस्थिति जानता है कि नहीं। यीशु की शिक्षा है कि परमेश्वर पूरी तौर से हमारी देख-भल करता है और हमारी परिस्थितियों पर नियंत्रण रखता है। हमारे जीवन का नियंत्रण उसके हाथ से कभी नहीं छूटता। - डैनिस फिशर


अगर परमेश्वर पक्षियों का खयाल करता है तो क्या वह अपनी संतान की देख रेख नहीं करेगा?

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ती ३३-३५
  • मत्ती १०:१-२०

बुधवार, 13 जनवरी 2010

बाइबल की प्रार्थना की पाठशाला

बाइबल पाठ: हबक्‍कूक १:१ - ४

मैं अपने मन का खेद खोलकर कहूंगा; और अपने जीभ की कड़वाहट के कारण कुड़्कुड़ाता रहुंगा। - अय्युब ७:११


अगर हम अपने परमेश्वर को एक बेमेल सहभागी कहें तो यह एक हास्यसपद और उसे छोटा करने वाला कथन होगा। परमेश्वर ने वास्तव में हमारे साथ एक ’असमान’ जोड़ी बनाई है, वह हमें ज़िम्मेदारी सौंपता है कि उसके साथ मिलकर इतिहास रचें। इस सहभागिता का एक पख्श बहुत प्रबल है - जैसे माईक्रोसौफ्ट कम्पनी और हाई स्कूल के विद्यार्थी के बीच का सहयोग।

हम जानते हैं कि मनुष्यों के बीच यदि असमानता का सहयोग हो तो क्या होता है - प्रबल पक्ष कमज़ोर पक्ष को दबाकर उसपर अपना अधिकार चलाता है और कमज़ोर पक्ष चुपचाप सहता है। परन्तु परमेश्वर, जिसे मनुष्यों से कोई भय नहीं है, हमें से निरंतर और ईमान्दार संपर्क बना के रखता है।

मुझे कभी कभी आश्चर्य होता है कि परमेश्वर क्यों हमारी प्रार्थना में इमानदारी को इतना महत्त्व देता है, यहाँ तक कि इमानदारी से कहे गए मनुष्य के अन्यायपूर्ण क्रोध भरे शब्दों को भी सह लेता है। बाइबल की कई प्रार्थनाएं अत्यन्त क्रोध भरी हैं, जैसे: यर्मियाह धोखा खाने और अन्याय सहने के बारे में पुकार उठाता है (यर्मियाह २०:७-१०); हबक्‍कूक ने परमेश्वेर को बहरा होने का दोष दिया (हबक्‍कूक १:२); अय्युब ने उसे छिपा होने और न मिलने वाला कहा(अय्युब २३:८,९)। बाइबल हमें शिक्षा देती है कि हम अपने मन की बातें बेबाक सच्चाई से प्रार्थना में प्रकट करें।

परमेश्वर चाहता है कि हम अपनी शिकायतें लेकर उसके सन्मुख आएं। अगर हम अपने जीवन में बाहर से तो मुस्कुराने का बहाना करें और मन में कुढ़ते रहें तो हम परमेश्वर के साथ अपने सम्बंध का निरादर करते हैं। - फिलिप यैन्सी


तुम्हारे आत्मिक तापमान को नापने का पैमना तुम्हारी प्रार्थना की गहनता है। - स्परजन

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ती ३१, ३२
  • मत्ती ९:१८ - ३८

मंगलवार, 12 जनवरी 2010

सहायता के परे?

बाइबल पाठ:लूका २३:३३ - ४३

यीशु ने उससे कहा,, मैं तुझ से सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा - लूका २३:४३




एक ११० साल की उम्र का इस्त्राएली बेदुइन चरवाहा दिल के दौरे के लिये बीरशीबा के अस्पताल में भर्ती किया गया। उसकी उम्र के बावजूद, डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने का भरसक प्रयत्न किया। यह माना जा रहा है कि दिल के दौरे से पीड़ित वह सबसे अधिक उम्र का व्यक्ति था जिसकी सफल चिकित्सा रक्त का थक्का बनने से रोकने वाली दवा के प्रयोग से हुई। अस्पताल के प्रतिनिधि ने बताय कि वह चरवाहा ठीक होकर नेगेव मरुभूमि के अपने डेरे में लौटा और फिर से भेड़ें चराने लगा।

११० साल के इस बूढ़े की जो चिकित्सा और देख रेख हुई, वह हमें यीशु का स्मरण कराती है, जिसने ठुकराए हुए लोगों की सहायता की। सामजिक सीमाओं को लांघ कर, यीशु ने कोढ़ियों और समाज के निन्दितों की देख रेख की, यह किसी सामन्य भले व्यक्ति के कार्यों से बढ़कर था।

क्रूस पर पीड़ा से स्वयं तड़पते समय भी यीशु ने एक मरते अपराधी की सहायता की, जिसके सहायता के सब मार्ग बन्द थे। वह आदमी अपराधी था मृत्यु दण्ड भोग रहा था और नर्क में प्रवेश से कुछ घंटे ही दुर था। यीशु ने उस अपराधी की मदद की पुकार का उत्तर दिया और कहा, "आज ही तू मेरे साथ स्वर्ग लोक में होगा" (लूका २३:४३)

क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जानते हैं जो निस्सहाय अवस्था में है? शायद आप स्वयं ही निराश हों? बाइबल का परमेश्वर ऐसे लाचारों को, कमज़ोरों को, बहुत समय से पाप के बोझ से दबे हुओं को, मदद देने को तैयार है जिन्हें संसार मदद के लिये अयोग्य मानता है। - मार्ट डी. हॉन



परमेश्वर की सामर्थ हमारी कमज़ोरी में सबसे अधिक प्रगट होती है।
एक साल में बाइबल:

  • उत्पत्ती २९, ३०

  • मत्ती : - १७

सोमवार, 11 जनवरी 2010

वह श्रद्धायुक्त भय के योग्य है!

बाइबल पाठ: भजन संहिता ६६

आओ, परमेश्वर के कामों को देखो, वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है। - भजन संहिता ६६:५

आजकल ’अद्‍भुत’ शब्द का प्रयोग कई प्रसंगों में किया जाता है। मोटर, सिनेमा, गाना, खाना इन सबके बारे में कोई न कोई कहता है ’अद्‍भुत’/’भययोग्य’।

परन्तु जब हम इन सांसारिक वस्तुओं के लिये भी उसी शब्द का प्रयोग करें जो परमेश्वर का विशेषण है, तो हम परमेश्वर के ’अद्‍भुत’ या ’भययोग्य’ होने को हीन करते हैं। मेरी एक दोस्त के घर में यह नियम है कि ’भययोग्य’ शब्द का प्रयोग केवल परमेश्वर के लिये करना है।

परमेश्वर के महत्त्व को हलका करना कोई हलकी बात नहीं है। वह कोई ऐसा साथी नहीं है जिसकी मित्रता को हम मामूली बात समझें, या फिर उसे एक ऐसे ए.टी.एम. कि तरह प्रयोग करें जो हमारी हर लालसा पूरी कर के दे। यदि हम परमेश्वर की भव्यता से स्तब्ध नहीं तो हम अपने आप से ही प्रभावित और अपने में ही मगन रहेंगे, और एक अध्भुत भययोग्य परमेश्वर की संतान होने के अधिकार से हम वंचित रहेंगे।

"भजन संहिता" के भजन हमें परमेश्वर के विषय में सही नज़रिया देते हैं। "यहोवा परम प्रधान और भययोग्य है, वह सारी पृथ्वी के ऊपर महाराजा है" (भजन संहिता ४७:२)। "परमेश्वर से कहो कि तेरे काम क्या ही भयानक हैं!....आओ परमेश्वर के कामों को देखो, वह अपने कार्यों के कारण मनुष्यों को भययोग्य देख पड़ता है" (भजन संहिता ६६:३,५)।

यीशु मसीह के प्रेम से अदभुत और क्या है, जिस प्रेम ने उसे हमारे लिये क्रूस पर मरने को विवश किया? उसे अपने जीवन में योग्य स्थान दो और उसे एकमात्र ’श्रद्धायुक्त भययोग्य’ मानकर उसके महान कार्यों के लिये उसकी प्रशंसा करो जो उसने तुम्हारे लिये किये हैं। - जो स्टोवैल


अगर तुम अपने बड़प्पन से बहुत प्रभावित हो तो परमेश्वर की अदभुत भयावहता पर गहिरी दृष्टि करो।
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ती २७, २८;
  • मत्ती ८:१८-३४