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शुक्रवार, 16 अप्रैल 2010

द्वारपालक

पत्रकारिता में "द्वारपालक" शब्द प्रयोग होता है उन संवाददाताओं, संपादकों और प्रकाशकों के लिये जो विविध समाचारों का विशलेषण करके निर्धारित करते हैं कि कौन सा समाचार प्रकाशण के योग्य है। कुछ अनुभवी पत्रकार सावधान करते हैं कि ’इन्टरनैट’ के प्रयोग से समाचार बिना जांच की इस प्रक्रिया से गुज़रे ही अन्दर आ जाते हैं।

पुराने नियम के समय में द्वारपालक मन्दिर के दरवाज़ों की पहरेदारी करते थे, अशुद्ध लोगों को मन्दिर में प्रवेश करने से रोकने के लिये (२ इतिहास २३:१९)। सन ७० ईस्वीं में रोमी सम्राट तीतुस कि सेनाओं द्वारा मन्दिर नाश कर दिया गया। वास्तव में मन्दिर का नाश तो कई साल पहले ही आरंभ हो चुका था, जब मन्दिर की पहरेदारी करने को नियुक्त लेवियों ने सीरीया के राजा ऐन्टिओकस चतुर्थ के दुशप्रभाव में आकर अपना काम ठीक से करना छोड़ दिया था।

पौलुस ने हमारी देह को परमेश्वर का मन्दिर बताया (१ कुरिन्थियों ३:१६, १७), और इस मन्दिर पर हमला करने को कई ताकतें तत्पर रहती हैं। हमारे आत्मिक जीवन के अरक्षित स्थानों में होकर बुराई को जड़ पकड़ने का अवसर मिल सकता है - उन स्थानों द्वारा जहां ईर्ष्या, झगड़े और आपसी मतभेद आदि हमारे आत्मिक जीवन को कमज़ोर कर देते हैं (३:३)। हममें से प्रत्येक को अपनी आत्मा के शत्रु से सावधान होकर शैतान को कभी अवसर नहीं देना चाहिये (इफिसियों ४:२७)।

हमारे मनों में किन चीज़ों ने प्रवेश पाना है, इसके निर्धारण के नाप फिलिप्पियों ४:८ में मिलते हैं: जो बातें सत्य, आदरणीय, उचित, पवित्र, सुहावनी, मन-भावनी, सदगुण और प्रशंसा के योग्य हैं। इनसे जो शांति मिलेगी वह हमारे मन और हृदय के द्वार की रक्षा करेगी। - जूली ऐकरमैन लिंक


यदि आप बुराई से सावधान नहीं रहेंगे तो बुराई से प्रभावित हो जाएंगे।


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ३:१-१७


परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है और वह तुम हो। - १ कुरिन्थियों ३:१७


एक साल में बाइबल:
  • १ शमुएल ३०, ३१
  • लूका १३:२३-३५

गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

अपने व्यवहार को जाँचें

एक बड़े चर्च के समूहगान की मुख्य पुरुष आवाज़ एक प्रशिक्षित संगीत अध्यापक की थी और अधिकतर वही समुहगान के मुख्य एकल भाग गाया करता था। उसी समुह में एक जवान व्यक्ति बॉब था, जिसे संगीत का कोई प्रशिक्षण प्राप्त नहीं था और वह कुछ छोटे एकल भाग गा लिया करता था। क्रिसमस के गानों की तैयारी करते समय समूहगान की संचालिका को लगा कि बॉब की आवाज़ और गाने की शैली उसके मुख्य गायक होने के लिये उपयुक्त है। किंतु उसे यह समझ नहीं आ रहा था कि बॉब को मुख्य गायक बनाने से यदि वह प्रौढ़ संगीत अध्यापक बुरा मान जाए तो स्थिति को कैसे संभाला जाए।

उसकी यह चिंता व्यर्थ निकली क्योंकि उस संगीत अध्यापक का भी ऐसा ही सोचना था, और उस अध्यापक ने संचालिका से कहा कि बॉब को ही मुख्य भाग दिया जाए। वह अध्यापक वफादारी से समूह में अपनी भूमिक निभाता रहा और समूह में केवल कोरस गाता रहा तथा बॉब को भी प्रोत्साहित करता रहा।

जो लोग अपनी स्वार्थी अभिलाषा छोड़ कर वास्तव दूसरों की भलाई चाहते हैं उनके व्यवहार से परमेश्वर प्रसन्न होता है। क्या आपको ध्यान है कि युहन्ना बपतिस्मा देने वाले की क्या प्रतिक्रीया थी जब उसके अनुयायी उसे छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिये? उसने कहा "अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं" (युहन्ना ३:३०)।

युहन्ना बपतिस्मा देने वाले और उस संगीत अध्यापक में क्या समानता थी? यही कि वे दोनो स्वार्थी नहीं थे। सामूहिक भलाई के लिये वे दूसरों को अपने से ऊपर उठते देखने में प्रसन्न हो सके। क्या ऐसा ही व्यवहार आप में भी है? - हर्ब वैन्डर लुट


जब हम अपने बारे में सोचना छोड़ देते हैं तो हम ऐसे कार्य कर पाते हैं जिन्हें दूसरे याद करते हैं।


बाइबल पाठ: युहन्ना ३:२२-३१


अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं। - युहन्ना ३:३०


एक साल में बाइबल:
  • १ शमुएल २७-२९
  • लूका १३:१-२२

बुधवार, 14 अप्रैल 2010

परमेश्वर स्मरण रखता है

एक चीनी त्योहार ’क्विंग मिंग’ बिछड़े हुए रिश्तेदारों को याद करने और उनके लिये दुख मनाने का समय होता है। परंपरा के अनुसार इस समय में लोग कब्रों की मरम्मत करते हैं और प्रीय जनों के साथ खुले इलाकों में घूमते हैं। किवंदन्ती है कि इस प्रथा का आरंभ एक युवक के अपनी माँ से किये अशिष्ट और मूर्खता पूर्ण व्यवहार के कारण हुआ जिससे उसकी माता की मृत्यु हो गयी। तब उस युवक ने निश्चय किया कि वह अपनी माँ द्वारा उसके लिये किये गए कार्यों को समरण करने के लिये वह हर साल उसकी कब्र पर जाया करेगा। दुख की बात है कि माँ की मृत्यु के बाद ही उसे माँ की याद आयी।

परमेश्वर हमसे कितना भिन्न व्यवहार करता है! बाइबल की उत्पत्ती की पुस्तक में हम पढ़ते हैं कि कैसे जल प्रलय ने सारे संसार को नष्ट किया। केवल वे ही जो नूह के साथ जहाज़ में थे बच सके। परमेश्वर ने उनको याद किया (८:१), हवा चला कर पानी को सुखाया ताकि वे जहाज़ से निकल कर भूमि पर आ सकें।

परमेश्वर ने हन्ना को भी याद रखा जब उसने पुत्र के लिये प्रार्थना करी (१ शमुएल १:१९), और उसे एक बेटा दिया - शमुएल।

क्रुस पर मरते हुए चोर को भी प्रभु यीशु ने याद रखा जिसने उससे याचना की थी कि "प्रभु, जब तू अपने राज्य में आये तो मेरी सुधी लेना" और यीशु ने उत्तर दिया कि "आज ही तू मेरे साथ स्वर्ग लोक में होगा" (लूका २३:४२, ४३)।

हम कहीं भी हों, परमेश्वर हमें सदा याद रखता है। हमारी चिंताएं उसकी चिंताएं हैं। हमारे दर्द उसके दर्द हैं। अपनी सब परेशानियों और चुनौतियों को उसे सौंप दो। जैसे एक मां अपने बच्चों को सदा याद रखती है, वह भी हमें सदा याद रखता है, वह सब कुछ देखता और जानता है और हमारी हर आवश्यक्ता को पूरा करने की प्रतीक्षा करता है। - सी. पी. हिया


यह जानना कि परमेश्वर हमें देखता रहता है, हमें तसल्ली भी देता है और कायल भी करता है।


बाइबल पाठ: उत्पत्ती ८:१-१७


परमेश्वर ने नूह की और जितने बनैले पशु और घरेलु पशु उसके संग जहाज़ में थे, उन सभों की सुधि ली। - उत्पत्ति ८:१


एक साल में बाइबल:
  • १ शमुएल २५, २६
  • लूका १२:३२-५९

मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

उमड़ता हुआ आत्मा

कुछ दशक पहले मैं पश्चिमी अफ्रीका के एक मसीही सेवा केंद्र को देखने गया। वहां मैंने देखा कि एक छोटी लड़की एक लाउडस्पीकर लगी लॉरी में चढ़कर एक गीत गाने लगी, जिसका सार इस प्रकार था: "मेरी आत्मा में खुशी के बुलबुले उमड़ रहे हैं, मैं गा रही हूं, मैं प्रसन्न हूं क्योंकि यीशु ने मुझे स्वस्थ किया है, मेरे हृदय को पाप से स्वच्छ किया है और अब मेरे अन्दर रहता है।" मैंने उसे केवल एक बार गाते सुना लेकिन उसके गाने में इतना आनन्द और सामर्थ भरा था कि मुझे आज तक उस गाने के बोल और राग याद है।

इस गाने में की गई जल और आत्मिक आनन्द की समान्ता बाइबल से उद्वत है। यहूदीयों के एक पर्व - मण्डपों का पर्व मनाते समय, एक याजक पानी उण्डेलता था; यह उस समय की याद के प्रतीक में था जब परमेश्वर ने इस्त्राएलियों को बियाबान में चट्टान में से जल उपलब्ध कराया था। अपने समय में "फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्‍त्र में आया है उसके ह्रृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (युहन्ना ७:३७, ३८)। यीशु ने यह बात पवित्र आत्मा दिये जाने के उस वायदे के विष्य में की जो उसपर विश्वास करने वालों के लिये था (पद३९)। प्यास बुझाने वाले पानी का यह चित्रण उस आत्मिक प्यास की सन्तुष्टी के लिये है जो केवल यीशु ही दे सकता है।

संभवतः आप अपने उस आनन्द को खो चुके हैं जिसे आपने उद्धार पाने के समय अनुभव किया था। जो भी पाप आपको याद आते हैं उन्हें अभी मान कर पश्चाताप कर लें (१ युहन्ना १:९) और परमेश्वर के पवित्र आत्मा से भर जाएं (इफिसियों ५:१८)। वह आपकी आत्मा में भी खुशी के बुलबुले उमड़ने का अदभुत अनुभव देगा। - डैनिस फिशर


मसीह का संसार से जाना पवित्र आत्मा का संसार में आने के लिये था।


बाइबल पाठ: युहन्ना ७:३३-३९


यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए...उसके ह्रृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी।" युहन्ना ७:३७, ३८


एक साल में बाइबल:
  • १ शमुएल २२-२४
  • लूका १२:१-३१

सोमवार, 12 अप्रैल 2010

दीनता और महानता

सात साल का बालक रिचर्ड बर्नस्टईन, जैकी रॉबिन्सन के खेल कुशलता और साहस का बहुत प्रशंसक था क्योंकि वह आधुनिक युग में बड़े और नामी खेल संगठनों में बेसबॉल खेलने वाला पहला अश्वेत अमेरिकी था। कुछ साल पश्चात, एक छोटे शहर के गोल्फ खेलने के मैदान पर काम करते हुए रिचर्ड ने अपने आप को अचानक ही अपने बचपन के इस खेल नायक के साथ पाया, उसे अवसर मिला जैकी के गोल्फ खेलने के सामान को लेकर उसके साथ चलने और उसकी सहायता करने का। वर्षा के कारण खेल स्थगित हुआ तो जैकी ने छाता खोलकर दोनो के सिर पर स्वयं पकड़ा और अपना चॉकलेट रिचर्ड के साथ बांटा। बाद में एक प्रसिद्ध अख़बार ’दि इन्टर्नैशनल हैरल्ड ट्रिब्यून’ में लिखे अपने एक लेख में रिचर्ड ने इस घटना का उदाहरण दिया और कहा कि महानता की पहचान के रूप में, नम्रता और दयालुता के इस व्यव्हार को वह कभी नहीं भूला।

सच्चा बड़प्पन नम्रता से प्रदर्शित होता है न कि घमंड से। प्रभु यीशु मसीह ने इस तत्त्व को बड़े प्रभावकारी ढंग से दिखाया और सिखाया। उसने अपने महत्वकांक्षी चेलों से कहा - "...परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने। जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल की जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे" (मत्ती २०:२६-२८)।

जब परमेश्वर स्वयं इस धरती पर एक मनुष्य - प्रभु यीशु बनकर रहा तो उसने लोगों के पांव धोये, बच्चों को अपने पास बुलाया, और स्वेछा से अपने प्राण हमें पाप के स्वार्थ और अत्याचार से छुड़ाने के लिये दे दिये। उसके जीवन का उदहरण उसकी आज्ञा की पुष्टी करता है। - डेविड मैक्कैसलैन्ड


यदि हम दूसरे मनुष्यों के लिये छोटे कार्य करने को तैयार हैं तो प्रभु के लिये महान कार्य भी कर सकेंगे।


बाइबल पाठ: मत्ती २०:२०-२८


परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। - मत्ती २०:२६


एक साल में बाइबल:
  • १ शमुएल १९ - २१
  • लूका ११:२९-५४

रविवार, 11 अप्रैल 2010

घर की यात्रा

बिल ब्राइट, जो "कैम्पस क्रुसेड फोर क्राईस्ट" नामक संस्था का संस्थापक था एक लाइलाज और नाशक रोग "पलमोनरी फाइब्रोसिस" से ग्रसित था। अन्ततः उसे लम्बे समय तक कार्य से आराम लेना पड़ा। ब्राईट ने अपने विश्राम के समय का सदुप्योग किया एक पुस्तक "द जर्नी होम" (घर की यात्रा) लिखने में।

इस पुस्तक में ब्राईट, चार्ल्स हैड्डन सपर्जन को उद्वत करता है "हम यहां अजनबियों की तरह रहें और संसार को घर नहीं पर एक सराय समझें, जिसमें हमें भोजन करना और ठहरना तो है, लेकिन अगले दिन यात्रा आरंभ करने को भी तैयार रहना है।"

सपर्जन के इस दृष्टीकोण से ब्राईट अपने आने वाले अंजाम को लेकर बहुत प्रभावित हुआ। ब्राईट ने लिखा " यह जानकारी कि स्वर्ग ही हमारा वास्तविक घर है, पृथवी पर की कठिन परिस्थितियों को पार करना आसान कर देती है। मैंने अकसर इस बात से सांत्वना पाई है कि स्वर्ग में मिलने वाली महिमा के सामने पृथ्वी की यात्रा के क्लेश कुछ भी नहीं हैं।"

परमेश्वर के मित्र इब्राहिम का जीवन इसी दृष्टीकोण का एक उदहरण है: "विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किये हुए देश में परदेसी होकर...तंबुओं में वास किया। क्योंकि वह उस स्थिर नेंव वाले नगर की बाट जोहता था, जिसका रचने वाला...परमेश्वर है" (इब्रानियों ११:९, १०)। इब्राहिम एक परदेसी यात्री की तरह रहा, जो परमेश्वर द्वारा निर्मित अनन्त नगर कि बाट विश्वास से जोहता हो।

मृत्यु चाहे निकट हो या दूर, हम एक ऐसा विश्वास प्रदर्शित करें जो हमारे अनन्तकालीन घर पर केंद्रित हो। - डैनिस फिशर


चाहे हम मरुभूमि के मार्ग पर यात्रा करें, परन्तु स्मरण रखें कि उस मार्ग के अन्त में परमेश्वर की वाटिका है।


बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:१-१०


इब्राहिम उस नगर की बाट जोहता था जिसका रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है। - इब्रानियों ११:१०


एक साल में बाइबल:
  • १ शमुएल १७, १८
  • लूका ११:१-२८

शनिवार, 10 अप्रैल 2010

उसकी ज़िम्मेदारी; हमारी ज़िम्मेदारी

जब परमेश्वर हमें कोई कठिन काम सौंपता है तो उसे पूरा करने के लिये आवश्यक संसाधन भी देता है। जॉन वैसली ने लिखा कि "हमारी आरंभिक सेवा में उठने वाली कई मुश्किलों में मेरा भाई चार्लस कहता था कि यदि परमेश्वर मुझे पंख देता तो मैं उड़ता। तब मैं उसे उत्तर देता कि यदि परमेश्वर चाहेगा कि मैं उड़ुँ तो मैं उसपर भरोसा रखुंगा कि वह मुझे पंख भी देगा।"

आज का बाइबल पाठ हमें बताता है यहोशु के बारे में जिसे एक बड़ा दायित्व सौंपा गया। उस बड़ी चुनौती के सामने, निसन्देह वह डर से थरथरया होगा। वह कैसे मूसा जैसे महान अगुवे का स्थान लेकर लोगों की मूसा के समान ही अगुवाई कर सकेगा? उसकी अपनी सामर्थ में उसके लिये लोगों को वायदा किये हुए देश में लेजाकर बसाना असंभव था। लेकिन कूच के आदेश के साथ परमेश्वर ने उसे एक हिम्मत बढ़ाने वाला वायदा भी दिया - "न तो मैं तुझे धोखा दूंगा और न तुझे छोड़ुंगा" (यहोशु १:५)। फिर परमेश्वर ने उससे कहा "क्या मैंने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बांधकर दृढ़ हो जा; भय न खा और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जायेगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा" (पद९)। यहोशु को ऐसे ही आश्वासन की आवश्यक्ता थी।

यदि परमेश्वर ने आपको कोई विशेष काम दिया है जिससे आप घबरा रहे हैं, तो यह आपकी ज़िम्मेदारी है कि उस कार्य को तुरंत निसंकोच हो कर स्वीकार कर लें। उससे पार लगाना परमेश्वर की ज़िम्मेदारी है। आप विश्वासयोग्यता के साथ अपनी ज़िम्मेदारी पूरी कीजिए, और वह अपनी ज़िम्मेदारी पूरी करेगा। - रिचर्ड डी हॉन


परमेश्वर जहां ले चलता है, वहां उसके लिये आवश्यक संसाधन भी देता है।


बाइबल पाठ: यहोशु १: १-९


तू उठ, यरदन पार होकर जा।...न तो मैं तुझे धोखा दूंगा और न तुझे छोड़ुंगा। - यहोशु १:२, ५


एक साल में बाइबल:
  • १ शमुएल १५, १६
  • लुका १०:२५-४२