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रविवार, 1 अगस्त 2010

परमेश्वर की जीवनी

मान लीजिये कि आप एक बहुत प्रसिद्ध व्यक्ति हैं; इसलिये लोग आपके बारे में सब प्रकार की बातें जानना चाहेंगे। अब सोचिये कि आप मुझ से सम्पर्क करते हैं और पुछते हैं कि क्या मैं आपकी जीवनी लिखना पसन्द करूंगा? मान लीजिये कि मैं इस के लिये तैयार हो जाता हूँ। अब मैं आपके बारे में सब जनकारी जमा करने का प्रयास करुंगा। जैसे पतंगा रौशनी के चारों ओर मंडराता रहता है, मैं भी आपसे संबंधित हर प्रकार की जनकारी पाने के लिये आपके चारों ओर मंडराता रहूंगा। मैं आपसे अनेक प्रशन पूछुंगा। आपसे आपके संबंधियों, मित्रों और जानकारों की सूचि मांगुंगा और फिर उनसे संपर्क करूंगा जिससे अपके बारे में और जानकारी पा सकूं। फिर मैं आपसे कहुंगा कि आप के जीवन से संबंधित जो भी दस्तावेज़, तस्वीरें या अन्य कुछ भी हों, सब मुझे उप्लब्ध करा दें कि मैं उनका अध्ययन कर सकूं।

किसी को भी जानने के लिये तीन बातों की तरफ ध्यान देना अनिवार्य होता है, और मैं उन तीनों बातों पर ध्यान दूंगा। वे तीन बातें हैं - आप अपने बारे में क्या कहते हैं; लोग आपके बारे में क्या कहते हैं और आपने क्या उल्लेखनीय कार्य किये हैं। अब यही बात, ऐसे ही, परमेश्वर के संबंध में जनकारी पाने पर भी लागू होती है - परमेश्वर अपने बारे में क्या कहता है, दूसरे उसके बारे में क्या कहते हैं और उसने क्या कुछ किया है?

परमेश्वर को एक नये और अनोखे तरीके से जानने के लिये, इन तीनों बातों का प्रयोग कीजिये। बाइबल में पढ़िये कि परमेश्वर अपने बारे में क्या कहता है (निर्गमन ३४:६, ७; लैव्यवस्था १९:२; यर्मियाह ३२:२७)। फिर देखिये कि बाइबल के लेखक उसके बारे में और उसके अदभुत गुणों के बारे में क्या कहते हैं (भजन १९:१-४; रोमियों १:१६-२०; १ युहन्ना ४:८-१०)। और अन्त में देखिये कि परमेश्वर ने कैसे अदभुत कार्य किये हैं (उत्पत्ति १:१; निर्गमन १४:१०-३१; युहन्ना ३:१६)।

परमेश्वर को जानिये, उसकी जीवनी के लेखक बनिये। ऐसा करने से आप उसके बारे में इतना सीखेंगे जितना आप ने कभी संभव नहीं समझा होगा। - डेव ब्रैनन


जिस परमेश्वर ने इस सृष्टि को रचा है, वह चाहता है कि आप उसे जाने।

क्‍योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्‍व जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते हैं... - रोमियों १:२०

बाइबल पाठ: रोमियों १:१६-२०
क्‍योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ है।
क्‍योंकि उस में परमेश्वर की धामिर्कता विश्वास से और विश्वास के लिये प्रगट होती है: जैसा लिखा है, कि विश्वास से धर्मी जन जीवित रहेगा।।
परमेश्वर का क्रोध तो उन लोगों की सब अभक्ति और अधर्म पर स्‍वर्ग से प्रगट होता है, जो सत्य को अधर्म से दबाए रखते हैं।
इसलिये कि परमश्‍ेवर के विषय में ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्‍योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है।
क्‍योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्‍व जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरूत्तर हैं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५७-५९
  • रोमियों ४

शनिवार, 31 जुलाई 2010

आरंभ का एक मात्र स्थान

जब एक प्रकाशन संस्था ने मुझे आमंत्रण दिया कि मैं उनकी एक नई पुस्तक की भूमिका लिखूं तो मैंने उसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। जब मैं उस पुस्तक को पढ़ने लगा तो मैंने पाया कि वह जवानों को बदलते हुए संसार में परमेश्वर के लिये जीवन जीने को प्रोत्साहित करने के लिये लिखी गई थी, किंतु फिर भी उसे पढ़कर मैं कुछ विचिलित हुआ। यद्यपि उस पुस्तक में बाइबल से बहुत से पद उद्वत किये गए थे और अच्छी आत्मिक सलाह दी गई थी, किंतु उसमें कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि परमेश्वर के साथ सही संबंध का आरंभ प्रभु यीशु में मिला उद्धार है।

लेखक के विचार से आधुनिक समाज में अच्छे आत्मिक जीवन का आधार भले कार्य हैं, सब कुछ हमारे भले कार्यों पर निर्भर है, न कि मसीह पर विश्वास द्वारा मिले उद्धार पर। इसलिये मैंने उस पुस्तक की भूमिका नहीं लिखी।

चर्च का स्वरूप और संसकृति तेज़ी से बदल रही है और नये विचारों की होड़ में सुसमाचार का वास्तविक सन्देश कहीं पीछे छूटता जा है। प्रेरित पौलुस अचंभित था कि लोगों ने "दूसरे सुसमाचार" (गलतियों १:६) को कितनी सहजता से स्वीकार कर लिया। उसने जो प्रचार किया था वह किसी मनुष्य के विचार नहीं थे, उसे वह सन्देश स्वयं प्रभु यीशु से प्राप्त हुआ था (गलतियों १:११, १२)।

इस खरे सुसमाचार को हमें कभी नहीं छोड़ना है कि: मसीह हमारे पापों के लिये मरा, गाड़ा गया और हमें परमेश्वर के सन्मुख धर्मी ठहराने के लिये जी उठा (रोमियों ४:२५, १ कुरिन्थियों १५:३, ४)। केवल यही सुसमाचार है जो प्रत्येक विश्वास करने वाले के लिये उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ है (रोमियों १:१६)।

यदि हम परमेश्वर के लिये जीवन व्यतीत करना चहते हैं तो आरंभ करने का यही एक मात्र स्थान है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के उद्धार के उपहार को केवल मसीह में विश्वास के द्वारा ही ग्रहण किया जा सकता है।

जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो स्‍त्रापित हो। - (गलतियों १:९)

बाइबल पाठ: गलतियों १:६-१२
मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे।
परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं।
परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो स्‍त्रापित हो।
जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो स्‍त्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं?
यदि मैं अब तक मनुष्यों को प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।
हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं।
क्‍योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५४-५६
  • रोमियों ३

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

झंझट

मेरे पति टौम और हमारे मित्र फ्रैड को जब मालूम पड़ा कि सड़क पर यातायात क्यों धीमा चल रहा है तो फ्रेड ने बेचैन होकर कहा, "क्या उस बेचारे की कोई सहायता नहीं करेगा?" वहां सड़क पर एक साईकिल सवार गिरा पड़ा था, उसकी साईकिल उस के उपर पड़ी थी और गाड़ियां बिना रुके उसके करीब से निकलती जा रहीं थीं। फ्रेड ने अपनी कार की सावधानी सूचक बत्तियां जलाईं और अपनी कार को खड़ा करके गाड़ियों के आवगमन को सड़क पर रोक दिया। फिर फ्रैड और टौम दोनो कार से बाहर निकलकर सड़क पर पड़े उस व्यक्ति की सहायता के लिये नीचे उतर पड़े।

फ्रैड और टौम दोनो उस झंझट में पड़ने को तैयार थे, जैसे लूका १० में प्रभु यीशु द्वारा दिये गये दृष्टांत में वह सामरी व्यक्ति तैयार था। उस सामरी के समान, उन दोनो ने भी परेशानी में पड़े एक व्यक्ति की सहायता के लिये, अपनी हिचकिचाहट को काबू में किया और आगे बढ़े। उस सामरी को भी सहायता करने के लिये जाति और सांसकृतिक भेदभाव के ऊपर उठना पड़ा, किंतु उसने सहायता करी; जबकि जिनसे सहायता की उम्मीद करी जाती थी वे घायल व्यक्ति की उपेक्षा करके चले गये।

ऐसे समयों पर अपने आप को परिस्थिति में डालने से बचने के बहाने बनाना आसान है। साधारणतया, सहायता करने से बचने के बहानों की सूचि में सबसे ऊपर व्यस्तता, उपेक्षा और भय होते हैं। फिर भी यदि हम अपने प्रभु का अनुकरण विश्वासयोग्यता से करने की चाह रखते हैं, तो हम उसके समान, सहानुभूति सहित, सहायता करने के अवसरों का सदुपयोग भी करेंगे (मत्ती १४:१४, १५:३२, मरकुस ६:३४)।

अच्छे सामरी के दृष्टांत में प्रभु यीशु ने उस सामरी की प्रशंसा करी क्योंकि उसने महंगा पड़ने, असुविधाजनक और मुश्किल होने के बावजूद सहानुभूति के साथ एक घायल व्यक्ति की सहायता की।

प्रभु हमें भी यही कहता है "...जा, तू भी ऐसा ही कर" (लूका १०:३७)। - सिंडी हैस कैसपर

कार्यशील प्रेम ही सच्ची सहानुभूति है।

यहोवा अनुग्रहकारी और दयावन्त है। - भजन १११:४

बाइबल पाठ: लूका १०:३०-३७

यीशु ने उत्तर दिया, कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा या, कि डाकुओं ने घेरकर उसके कपड़े उतार लिए, और मार पीट कर उसे अधमूआ छोड़कर चले गए।
और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था: परन्‍तु उसे देख के कतरा कर चला गया।
इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतराकर चला गया।
परन्‍तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया।
और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियां बान्‍धी, और अपनी सवारी पर चढ़ा कर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की।
दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकाल कर भटियारे को दिए, और कहा, इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा।
अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?
उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५१-५३
  • रोमियों २

गुरुवार, 29 जुलाई 2010

घर वापसी

अपने लड़कपन में समय बिताने का मेरा मन पसन्द तरीका था अपने घर के पीछे बह रहे पानी के नाले के साथ साथ चलना। यह करना मेरे लिये बहुत रोमांचकारी होता था; बहुत से मन बहलाने वाले काम करने को होते थे: पत्थरों पर चढ़ना-उतरना,पक्षियों को देखना, जानवरों के पैरों के निशनों के सहारे उनका पीछा करना, उस नाले पर छोटे बांध बनाना, आदि। अगर मैं इन सब के बावजूद नाले के मुहाने तक पहुंच पाता, तो मैं और मेरा पालतु कुत्ता झील के किनारे बैठ कर कुछ खाते और झील पर उड़ान भरते वायुयानों को देखते रहते।

हमसे जितना संभव हो सकता था, हम उतनी देर इन सब में बिताते, परन्तु बहुत देर नहीं कर सकते थे क्योंकि मेरे पिता के निर्देश थे कि हम सूर्यास्त से पहले ही घर पहुंच जाया करें। उस जंगल के रास्ते पर दिन का उजाला जल्द ही कम हो जाता था और मार्ग में बढ़ते अन्धकार के कारण मैं अक्सर सोचता कि काश मैं घर जल्दी पहुंच सकूं।

हमारा घर जंगल के पेड़ों के पार एक टीले पर स्थित था, और जब तक परिवार का प्रत्येक सदस्य घर न पहुंच जाए, घर की बत्ती जली रहती थी। अक्सर मेरे पिता पिछले बरामदे में मेरे इंतिज़ार में बैठे अखबार पढ़ रहे होते थे। मेरे पहुंचने पर वे पूछते, "समय कैसा रहा?" और मैं उत्तर देता, "बहुत बढ़िया, लेकिन घर वापस पहुंचना सबसे अच्छा है।"

अब, बढ़ी उम्र में, उन दिनों की यह यादें मुझे एक और यात्रा के बारे में सोचने को प्रोत्साहित करती हैं - जिस यात्रा पर मैं अब अग्रसर हूं। यह यात्रा आसान नहीं है, लेकिन मैं जानता हूं कि यात्रा के अन्त में अपने अनन्त घर में मैं अपने प्रेमी स्वर्गीय पिता से मिलुंगा, जो मेरी प्रतीक्षा कर रहा है। इस यात्रा के पूरे होने और अपने उस स्वर्गीय पिता से मिलने के लिये मैं बहुत आतुर हूं।

वहां मेरी प्रतीक्षा हो रही है, प्रतीक्षा में उस अनन्त घर में ज्योति चमक रही है और मेरा पिता मेरी राह देख रहा है। मुझे लगता है कि मेरे पृथ्वी के पिता के समान, मेरे घर पहुंचने पर वह मुझसे पूछेगा "समय कैसा रहा?" और मैं उसे उत्तर दूंगा "बहुत बढ़िया, लेकिन घर वापस पहुंचना सबसे अच्छा है।"

क्या आप भी ऐसे ही घर वापसी की राह देख रहे हैं? - डेविड रोपर


एक मसीही विश्वासी के लिये स्वर्ग का दूसरा नाम घर है।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा करके मुझ को अपने पास रखेगा। - भजन ७३:२४

बाइबल पाठ: भजन ७३:२१-२८

मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,
मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रहकर भी, पशु बन गया था।
तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था, तू ने मेरे दहिने हाथ को पकड़ रखा।
तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा करके मुझ को अपने पास रखेगा।
स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।।
जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे, जो कोई तेरे विरूद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।
परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४९, ५०
  • रोमियों १

बुधवार, 28 जुलाई 2010

मित्रों का मूल्य

जौन क्रिसोसटोम (सन ३४७-४०७) प्रारंभिक चर्च का एक महान प्रचारक था। उसके सुवक्ता होने के कारण उसे यह नाम क्रिसोसटोम दिया गया, जिसका अर्थ है ’सुनहले मुँह वाला’।

मित्र के मूल्य पर उसके द्वारा कही गई कुछ बातों को परखकर देखिये: "यह मित्रता ही है जिसके कारण हम स्थानों और ‌ऋतुओं को चाहते हैं; जैसे फूल अपनी मधुर पंखुड़ियां अपने चारों ओर की भूमि पर बिखेर देते हैं, ऐसे ही मित्र भी अपने आस पास सौहार्द और अनुग्रह बिखेर देते हैं। मित्रों के साथ दरिद्रता में भी आनन्द होता है। हमारे लिये यह अधिक भला होगा कि सूर्य जाता रहे बजाए इसके मित्र न रहें।"

दाऊद और योनातान की कहानी मित्रता के मूल्य को दिखाती है। यद्यपि योनातन का पिता राजा शाउल, अपने पागलपन में, दाऊद को मारने को फिर रहा था, दाऊद ने उस ही के पुत्र की मित्रता से हिम्मत पाई - "और योनातन दाऊद से प्रेम रखता था, ... क्योंकि वह उस से अपने प्राण के बराबर प्रेम रखता था" (१ शमुएल २०:१७)। उनका यह संबंध विश्वास, समझ-बूझ और प्रोत्साहन पर आधारित था। राजा शाऊल द्वारा किये जा रहे अनुचित उत्पीड़न को सहना दाऊद के लिये असंभव होता यदि परमेश्वर पर आधारित योनातान की मित्रता (१ शमुएल २०:४२) का पोषण उसे ना मिलता।

किंतु मित्रता का इससे भी ऊंचा स्तर हम प्रभु यीशु में देखते हैं, जिसने अपने अनुयायियों के प्रति अपनी मित्रता का मूल्य अपने प्राण से भी अधिक रखा "इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे" (यूहन्ना १५:१३)। आज भी उसका अपने मित्रों से वायदा है कि "मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों १३:५)।

क्रिसोसटोम के वचन और दाऊद-योनातान की मित्रता के उदाहरण हमें याद दिलाते हैं कि परमेश्वर द्वारा दिये गये मित्रों की मित्रता को हमें कैसे संवारे रखना है, प्रभु यीशु हमें दिखाता है कि मित्रता का मूल्य क्या है। - डेनिस फिशर


जब संसार हमें छोड़ देता है तो मित्र ही हमारे साथ रहते है।


और योनातन दाऊद से प्रेम रखता था, ... क्योंकि वह उस से अपने प्राण के बराबर प्रेम रखता था" - १ शमुएल २०:१७

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। - यूहन्ना १५:१३

बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:१२-१७
मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्‍योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्‍या करता है: परन्‍तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्‍योंकि मैं ने जो बातें अपके पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
तुम ने मुझे नहीं चुना परन्‍तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ, और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४६-४८
  • प्रेरितों के काम २८

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

परमेश्वर का मन

यह मानना सहज है कि परमेश्वर इस प्रतीक्षा में रहता है कि जैसे ही आप उसके पास पहुंचें, वह आपके पापों के लिये आप को दण्ड दे। लेकिन प्रकाशितवाक्य के २ और ३ अध्याय में सात मण्डलियों के लिये लिखित उसके सन्देशों में हम ऐसा नहीं पाते हैं। इन स्न्देशों में हम पथभ्रष्ट लोगों के प्रति परमेश्वर के प्रेम पूर्ण हृदय को देखते हैं।

प्रभु यीशु ने इन सन्देशों का आरंभ, उन मण्डलियों में पाई जाने वाली भली बातों की प्रशंसा के साथ किया। यह दिखाता है कि जब हम वह करते हैं जो सही और भला है तो इससे प्रभु प्रसन्न होता है।

साथ ही प्रभु यीशु हमारे जीवन की बुराइयों के लिये भी चिंतित रहता है। इन सन्देशों में प्रशंसा के साथ मण्डलियों को स्पष्ट शब्दों में ताड़ना भी दी गई है। यद्यपि प्रभु से यह सुनना "पर मुझे तेरे विरूद्ध यह कहना है कि..." (प्रकाशितवाक्य २:४, १४, २०) दुख पहुंचाता है, पर प्रभु प्रगट करता है कि हमारे जीवन में क्या बदलना अनिवार्य है जिससे हम अपनी ही नज़रों में सही होने के धोखे और नुकसान से बच सकें।

यह हमें बात के मर्म पर लेकर आता है - मनफिराव। जब प्रभु इन मण्डलियों से मनफिराव करने को कह रहा था तो वह पथभ्रष्ट संतों के प्रति अपने प्रेम को प्रदर्शित कर रहा था। ताड़ना के द्वारा उसका उद्देश्य उन्हें अपराधी ठहराना नहीं था वरन गलत बातों को ठीक करके उसके साथ निकट संबंधों को पुनः स्थापित करने का मार्ग दिखाना था।

यह मत अन्देखा कीजीये के प्रत्येक सन्देश का अन्त "जय" पाने वालों के लिये दी गयी किसी विशेष प्रतिज्ञा से होता है। स्पष्ट है कि जो परमेश्वेर को भावता हुआ जीवन व्यतीत करते हैं, वह उन्हें विशेष प्रतिफल देना चाहता है।
आज आपसे वह क्या कह रहा है? - जो स्टोवैल


मनफिराव परमेश्वर के साथ हमारे घनिष्ट संबंधों को पुनःस्थापित एवं तरोताज़ा करता है।


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य ३:१४-२२
और लौदीकिया की कलीसिया के दूत को यह लिख, कि, जो आमीन, और विश्वासयोग्य, और सच्‍चा गवाह है, और परमेश्वर की सृष्‍टि का मूल कारण है, वह यह कहता है।
कि मैं तेरे कामों को जानता हूं कि तू न तो ठंडा है और न गर्म: भला होता कि तू ठंडा या गर्म होता।
सो इसलिये कि तू गुनगुना है, और न ठंडा है और न गर्म, मैं तुझे अपने मुंह से उगलने पर हूं।
तू जो कहता है, कि मैं धनी हूं, और धनवान हो गया हूं, और मुझे किसी वस्‍तु की घटी नहीं, और यह नहीं जानता, कि तू अभागा और तुच्‍छ और कंगाल और अन्‍धा, और नंगा है।
इसी लिये मैं तुझे सम्मति देता हूं, कि आग में ताया हुआ सोना मुझ से मोल ले, कि धनी हो जाए, और श्वेत वस्‍त्र ले ले कि पहिनकर तुझे अपके नंगेपन की लज्ज़ा न हो, और अपनी आंखों में लगाने के लिये सुर्मा ले, कि तू देखने लगे।
मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूं, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूं, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा।
देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूं, यदि कोई मेरा शब्‍द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूंगा, और वह मेरे साथ।
जो जय पाए, मैं उसे अपने साथ अपने सिंहासन पर बैठाऊंगा, जैसा मैं भी जय पाकर अपने पिता के साथ उसके सिंहासन पर बैठ गया।
जिस के कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्‍या कहता है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४३, ४५
  • प्रेरितों के काम २७:२७-४४

सोमवार, 26 जुलाई 2010

नमूने

अन्तर्राष्ट्रीय खेलों में प्रचलित जुए और दवाओं के गलत प्रयोग के अपवाद के मध्य, दो खिलाड़ियों को उनके खेल में मिली उपलब्धियों और उनके चरित्र के लिये सराहा गया और उनके नाम २००७ की राष्ट्रीय बेसबॉल कीर्तिशाला में अन्कित किये गये। इस अवसर पर उपस्थित ७५,००० दर्शकों के विशाल समूह ने उन दोनो - कैल रिप्किन और टोनी ग्वैन को हर्षित किया।

उस अवसर पर रिप्किन ने कहा, "हम चाहे मानें या न मानें, किंतु इतने उंचे और बड़े स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ी होने के कारण हम अवश्य ही दूसरों के लिये नमूने हो जाते हैं। प्रश्न यह है कि यह नमूना सकरात्मक होगा या नकरात्मक।" ग्वैन ने भी इसी विचार के अनुरूप कहा, "यहां बेसबॉल का खेल खेलने से भी अधिक कुछ है...आप ज़िम्मेदार हैं, आपको सही निर्णय लेने होते हैं और लोगों के सामने रखना होता है कि आदर्श रीति से ज़िम्मेदारी निभाना क्या होता है।"

मसीह के अनुयायी होने के कारण, प्रतिदिन लोग हमें देखते हैं, हमें आंकते हैं। ऐसे में हमें पौलुस द्वारा प्रतिदिन के जीवन के लिये रखी गई चुनौती "तुम निर्दोष और भोले होकर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्‍कलंक सन्‍तान बने रहो, जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिए हुए जगत में जलते दीपकों की नाईं दिखाई देते हो" (फिलिप्पियों २:१५) पर खरा उतरना है।

हमें देखने वाले, हमारे समझौता करने से निराश होते हैं, परन्तु हमारा श्रेष्ठ चरित्र उनमें आशा उत्पन्न करता है। जब हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता का जीवन, संसार के समक्ष हम में प्रगट होगा, तो हम दूसरों को प्रोत्साहित कर सकेंगे उन्हें यीशु की ओर आकर्शित कर सकेंगे।

आज जो हमें दे्ख रहे हैं और आंक रहे हैं, उनके लिये हम कैसे नमूने होंगे? - डेविड मैक्कैसलैंड


संसार के लिये सबसे अच्छे नमूने, यीशु को अपना नमूना बनाते हैं।


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों :१२-१८
सो हे मेरे प्यारो, जिस प्रकार तुम सदा से आज्ञा मानते आए हो, वैसे ही अब भी न केवल मेरे साथ रहते हुए पर विशेष करके अब मेरे दूर रहने पर भी डरते और कांपते हुए अपने अपने उद्धार का कार्य पूरा करते जाओ।
क्‍योंकि परमेश्वर ही है, जिस न अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्‍छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है।
सब काम बिना कुड़कुड़ाए और बिना विवाद के किया करो।
ताकि तुम निर्दोष और भोले होकर टेढ़े और हठीले लोगों के बीच परमेश्वर के निष्‍कलंक सन्‍तान बने रहो, जिन के बीच में तुम जीवन का वचन लिए हुए जगत में जलते दीपकों की नाईं दिखाई देते हो।
कि मसीह के दिन मुझे घमण्‍ड करने का कारण हो, कि न मेरा दौड़ना और न मेरा परिश्रम करना व्यर्थ हुआ।
और यदि मुझे तुम्हारे विश्वास के बलिदान और सेवा के साथ अपना लोहू भी बहाना पड़े तौभी मैं आनन्‍दित हूं, और तुम सब के साथ आनन्‍द करता हूं।
वैसे ही तुम भी आनन्‍दित हो, और मेरे साथ आनन्‍द करो।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४० - ४२
  • प्रेरितों के काम २७:१-२६