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शनिवार, 25 सितंबर 2010

नए जीवन की पीड़ाएं

प्राचीन युनानी दार्शनिक सुकरात की माँ एक दाई थी, इसलिये सुकरात यह देखते हुए बड़ा हुआ कि उसकी माँ संसार में नया जीवन लाने में स्त्रियों की सहायता करती है। उसके इन अनुभवों का प्रभाव बाद में उसके शिक्षा देने के तरीकों पर भी पड़ा। सुकरात ने कहा "मेरी दाई कि कला उनकी जैसी ही है, फर्क सिर्फ इतना है कि मेरे मरीज़ पुरुष होते हैं स्त्रीयां नहीं, और मेरा सरोकार शरीर से नहीं वरन आत्मा से है जो नया जीवन देने को कराह रही है।"

अपने शिष्यों को सिखाने के लिये अपना ज्ञान प्रदान करने की बजाए, सुकरात का तरीका कुछ कष्ट दायक था। वह उनसे टटोलने वाले प्रश्न पूछता था जिनके उत्तर खोजने और फिर निषकर्श निकालने के लिये उन्हें मेहनत करनी पड़ती थी। शिष्यों को ज्ञान अर्जित करने के लिये विचार और चिंतन करना सिखाना, सुकरात के लिये जच्चा की पीड़ा के समान था जो संसार में कुछ नया लाने के लिये स्वयं दर्द सहती है।

पौलुस ने भी, विश्वासियों को विश्वास में शिक्षित करने के लिये, कुछ ऐसे ही भावनाओं को व्यक्त किया, उसने लिखा " हे मेरे बालकों, जब तक तुम में मसीह का रूप न बन जाए, तब तक मैं तुम्हारे लिये फिर जच्‍चा की सी पीड़ाएं सहता हूं" (गलतियों ४:१९)। पौलुस की इच्छा थी कि प्रत्येक विश्वासी, आत्मिक रूप से परिपक्व होकर मसीह यीशु की समानता में बन जाये - "जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएं" (इफिसियों ४:१३)।

मसीह यीशु की समानता में होना जीवन भर का प्रयत्न और कार्य है। इस के लिये हमें, अपने तथा दूसरों के प्रति धैर्य रखना होता है। मसीह की समानता के इस मार्ग में आगे बढ़ते हुए हम में से प्रत्येक को चुनौतियों, कठिनाइयों और निराशाओं का सामना करना पड़ेगा। परन्तु यदि विपरीत परिस्थितियों में भी हम अपना विश्वास प्रभु यीशु पर बनाए रखेंगे तो वह आत्मिक परिपक्वता प्राप्त करने में हमारी सहायता करेगा (२ पतरस १:३-८) और हमें इस योग्य करेगा कि हमारे द्वारा संसार में नए जन्म और जीवन के मार्ग खुल जाएं (मरकुस १६:१५-२०)। - डेनिस फिशर


मन परिवर्तन एक क्षण का चमात्कार है, परिपक्वता आने में सारा जीवन लग जाता है।

हे मेरे बालकों, जब तक तुम में मसीह का रूप न बन जाए, तब तक मैं तुम्हारे लिये फिर जच्‍चा की सी पीड़ाएं सहता हूं। - गलतियों ४:१९


बाइबल पाठ:

२ पतरस १:३-८
क्‍योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सदगुण के अनुसार बुलाया है।
जिन के द्वारा उस ने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ।
और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सदगुण, और सदगुण पर समझ।
और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।
और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
क्‍योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचान में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी।

मरकुस १६:१५-२०

और उस[यीशु] ने उन[चेलों] से कहा, तुम सारे जगत में जा कर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।
जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्‍तु जो विश्वास ने करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा।
और विश्वास करने वालों में ये चिन्‍ह होंगे कि वे मेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को निकालेंगे।
नई नई भाषा बोलेंगे, सांपों को उठा लेंगे, और यदि वे नाशक वस्‍तु भी पी जांए तौभी उन की कुछ हानि न होगी, वे बीमारों पर हाथ रखेंगे, और वे चंगे हो जाएंगे।
निदान प्रभु यीशु उन से बातें करने के बाद स्‍वर्ग पर उठा लिया गया, और परमेश्वर की दाहिनी ओर बैठ गया।
और उन्‍होंने निकल कर हर जगह प्रचार किया, और प्रभु उन के साथ काम करता रहा, और उन चिन्‍हों के द्वारा जो साथ साथ होते थे वचन को, दृढ़ करता रहा। आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • श्रेष्ठगीत ६-८
  • गलतियों ४

शुक्रवार, 24 सितंबर 2010

संतोष

एक बुज़ुर्ग औरत की फोटो ने मेरे मन को जकड़ लिया और मुझे सोचने पर बाध्य कर दिया। मुस्कुराती हुई वह बुज़ुर्ग औरत कूड़े के एक ढेर पर बैठी थी और वहां से उठाया कुछ भोजन खा रही थी। उस औरत को प्रसन्न करने के लिये कितनी ज़रा सी और कैसी तुच्छ चीज़ भी काफी थी!

अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल और महंगाई की चर्चाएं बहुत आम बात हो गई है। बहुत से लोग अपने जीविका कमाने के बारे में चिंतित रहते हैं। क्या इन परिस्थितियों में यह संभव है कि हम मत्ती ६:२५ में अपने प्रभु यीशु द्वारा दी गई शिक्षा "मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे" पर ध्यान दें और विश्वास रखें?

हमारा प्रभु यह नहीं कह रहा था कि हमें कोई काम करने की आवश्यक्ता नहीं है, या हमें कुछ खाने की आवश्यक्ता नहीं है, या हम ने कैसे कपड़े पहने हैं इस के लिये सोचने की आवश्यक्ता नहीं है। वह जीवन में इन बातों के महत्व और आवश्यक्ता को भली भांति जानता था। वह जो सिखा रहा था वह था जीवन में इन बातों के प्रति सही दृष्टिकोण रखना। वह चेतावनी दे रहा था कि ये बातें हमारे लिये कभी इतनी बड़ी न बन जाएं कि इन की प्राप्ति के पीछे हम धन संपत्ति के ग़ुलाम बन जाएं और यीशु पर अपने विश्वास को छोड़ बैठें। उसने कहा "कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते" और "इसलिये पहिले तुम उस [परमेश्वर] के राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी"(मत्ती ६:२४, ३३)।

पहले परमेश्वर के धर्म और राज्य की खोज करने का तातपर्य है कि हम इस बात को पहिचाने कि हम चाहे जितनी भी मेहनत अपने और अपने परिवार की समृद्धि के लिये कर लें, अन्ततः परमेश्वर ही है जो हमारी आवश्यक्ताओं को पूरा करता है; और क्योंकि हम स्वर्गीय परमेश्वर पिता की सन्तान हैं, तो हमारी आवश्यक्ताओं की चिंता करना उसका कार्य है और वह समय अनुसार हमें हमारी आवश्यक्ता कि हर वस्तु उपलब्ध कराता रहेगा। - सी. पी. हिया


यदि धन के ग़ुलाम बनने से बचना है तो उसे परमेश्वर द्वारा उपलब्ध कराया संसाधन बना कर प्रयोग करें।

कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते। - मत्ती ६:२४


बाइबल पाठ: मत्ती ६:२४-३४

कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते।
इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे? क्‍या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं?
आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं, तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है। क्‍या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते?
तुम में कौन है, जो चिन्‍ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
और वस्‍त्र के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्‍योंकर न पहिनाएगा?
इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे?
क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिएं।
इसलिये पहले तुम उस के राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी।
सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्‍योकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा, आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल:
  • श्रेष्टगीत ४, ५
  • गलतियों ३

गुरुवार, 23 सितंबर 2010

साधारण विश्वास की प्रार्थना

सन २००८ में Day of Discovery का फिल्म बनाने वाला दल एक विशेष अभियान पर चीन गया। उनका उद्देश्य था चीन में काम कर चुके प्रसिद्ध मिशनरी एरिक लिडल के मिशनरी जीवन पर फिल्म बनाना। एरिक लिडल १९२४ के ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता भी था और उसके जीवन पर Chariots of Fire नामक फिल्म बन चुकी थी। वह दल एरिक की तीन बेटियों और उनकी बुज़ुर्ग रिशतेदार लूइज़ी को भी अपने साथ ले गया, जिससे वे उन स्थानों को देख सकें जहां एरिक ने काम किया था और एरिक की दो बड़ी बेटियां रहीं थीं।

जब वे चीन की राजधानी बीजिंग पहुंचे तो एक स्थान पर उन्हें अपना सामान उठा कर काफी लंबी दूरी पैद्ल चलना पड़ा, चलते चलते लूइज़ी की सांस फूल गई और उसे सांस लेने में मुशकिल होने लगी। उस द्ल की एक सद्स्या जूली लूइज़ी के पास उसके साथ बैठ गई और उस के घुटनों पर हाथ रख कर बड़े स्वाभाविक रूप से छोटी से प्रार्थना करी - "प्रीय प्रभु यीशु, आंटी लूइज़ी को सांस लेने में सहायता करें" और तुरंत ही लुइज़ी की सांस ठीक चलने लगी।

बाद में एरिक की एक बेटी हीदर ने बताया कि जूली की प्रार्थना और इस घटना ने उसके विश्वास में नई जान फूंकी। जूली के साधारण विश्वास के कार्य ने हीदर को यीशु के साथ उसके लगातार बने रहने वाले रिशते को स्मरण दिलाया - यह वह सच्चाई थी जिसे हीदर उस समय अपने जीवन में भुला चुकी थी।

कभी कभी हमें ऐसे अनुभवों की आवश्यक्ता होती है जो हमें परमेश्वर की लगातार हमारे साथ बनी रहने वाली उपस्थिति हमें स्मरण दिला सकें। जब आपके जीवन में कठिनाईयां और परीक्षाएं आयें, आपको लगे कि परमेश्वर आपसे दूर कहीं है, तो जूली की साधारण विश्वास की प्रार्थना को याद कीजिए - संसार के सृष्टीकर्ता परमेश्वर से हमारी दूरी केवल एक प्रार्थना भर की है, और साधारण विश्वास से करी गई प्रार्थना उसके साथ हमारे संबंध को कार्यान्वित कर देती है (यूहन्ना १४:१३, १४)। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर अपने लोगों की सच्ची प्रार्थनाओं में आनन्दित होता है।

जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो। यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा। - यूहन्ना १४:१३, १४


बाइबल पाठ: यूहन्ना १४: १२-१४

मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्‍योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।
और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।
यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • श्रेष्ठगीत १-३
  • गलतियों २

बुधवार, 22 सितंबर 2010

अनन्त स्तुतिगान

मैं प्रत्येक ग्रीष्मकाल में हमारे शहर में खुले स्थानों पर आयोजित निशुल्क संगीत समूहगानों का आनन्द लेता हूँ। ऐसे ही एक समूहगान से पहले उस संगीत मंडली के सद्स्यों ने अपना अपना परिचय दिया और बताया कि एक साथ अभ्यास करना और संगीत प्रस्तुत करना उन्हें कितना अच्छा लगता है।

एक साथ जमा हो कर संगीत का आनन्द लेना सदीयों से लोगों को आकर्षित करता रहा है। मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण, चाहे हम छोटे गुट में हों या संगीत मंडली में अथवा किसी बड़े संगीत समूह में, परमेश्वर का स्तुतिगान करना हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है; और एक दिन हम ऐसे समूह में साथ गाएंगे जो आज हमारी कलपना और समझ से परे है।

अन्त के समय पर होने वाली घटनाओं का प्रेरित यूहन्ना ने दर्शन पाया। यूहन्ना लिखता है उस स्तुतिगान के बारे में जो बहुत थोड़ों से आरंभ होता है और बढ़ कर अनगिनित समूह हो जाता है। परमेश्वर के मेम्ने के सम्मान में, जिसने अपने लोहू से हर जाति, कुल एवं राष्ट्र से लोगों का उद्धार किया, यह समूहगान परमेश्वर के सिंहासन के निकट से आरंभ होता है और फिर इसमें हज़ारों हज़ार स्वर्गदूत और अन्ततः समस्त सृष्टि का हर प्राणी सम्मिलित हो जाता है - "फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे" (प्रकाशितवाक्य ५:१३)।

क्या खूब समूह है! क्या खूब स्तुति का समूहगान है! क्या खूब यह सौभाग्य कि हम अभी से इसमें भाग लेने का अभ्यास कर सकते हैं! - डेविड मैक्कैसलैंड


जो अब मसीह को जानते हैं वे सदा उसकी स्तुति गाते रहेंगे।

फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे। - प्रकाशितवाक्य ५:१३


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य ५:८-१४

और जब उस ने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं।
और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है क्‍योंकि तू ने वध होकर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।
और उन्‍हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।
और जब मै ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों की चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्‍द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी।
और वे ऊंचे शब्‍द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।
फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे।
और चारों प्राणियों ने आमीन कहा, और प्राचीनों ने गिर कर दण्‍डवत किया।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक १०-१२
  • गलतियों १

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

पाखण्ड

जैसे जैसे मैं प्रभु यीशु के जीवन का अध्ययन करता हूँ, मुझे विस्मय होता है कि जिन लोगों से वह सबसे अधिक क्रुद्ध हुआ, वे बाहरी रूप से उस से मेल खाने वाले लोग थे। प्रभु यीशु ने मूसा की व्यवस्था का पूरी रीति से पालन किया, कुछ फरीसियों की शिक्षाओं को भी उद्ध्वत किया (मरकुस ९:११, १२; १२:२८-३४)। फिर भी उसने फरीसियों को ही सबसे अधिक डांटा। उसने उन्हें ’सांपों’, ’करैत के बच्चों’, ’मूर्खों’ और ’कपटी’ कहा।

उन में ऐसा क्या था जिसने प्रभु यीशु को उन्हें ऐसा कहने को उकसाया?

फरीसी परमेश्वर के लिये जीवन जीने को समर्पित होते थे; वे, व्यवस्था के अनुसार, अपनी आमदनी का दसवां भाग पूरी खराई से मन्दिर में देते थे (मती २३:२३); व्यवस्था की हर बात का पालन वैधानिक रीति से करते थे; अन्य लोगों में प्रचार करने के लिये सेवकों को भेजते थे कि उन्हें अपने साथ मिला सकें (मती २३:१५); वे अपने समय के ’खुली’ विचारधारा वाले लोगों और नास्तिकों की अपेक्षा, पारंपरिक सिद्धांतों का पालन करते थे।

किंतु फिर भी प्रभु यीशु का उन पर किया गया भीषण दोषारोपण दिखाता है कि वह उनके वैधानिक विधिवादिता - अर्थात सच्चे और खरे मन से नहीं वरन केवल बाहरी रूप से आज्ञा पालन करना, के विषैले प्रभाव को कितनी गंभीरता से लेता था। उसे पता था कि इस वैधानिक विधिवादिता के खतरे अप्रत्यक्ष लेकिन बहुत खतरनाक होते हैं, उन्हें परोक्ष में देखना सदा संभव नहीं होता। मेरा मानना है कि यही खतरे आज हमारे लिये भी गंभीर समस्या हैं।

प्रभु यीशु ने भीतरी के बजाए बाहरी पर उनके द्वारा दिये गए ज़ोर की निन्दा की - "हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्‍तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं" (मती२३:२५)। पाखण्ड उन के जीवनों में भरा था, और उन्होंने परमेश्वर के प्रेम को प्रगट करने वाली उसकी व्यवस्था को अपनी स्वार्थसिद्धी का आधार, निज कमाई का साधन और लोगों को प्रभावित करने का ज़रिया बना लिया था - सब कुछ धर्म और परमेश्वर ही के नाम पर। यही प्रभु यीशु को नागवार गुज़रता था, और वह नहीं चाहता था कि ऐसी कोई बात उसके चेलों में कभी पाई जाए।

आपकी आत्मिक परिपक्वता का प्रमाण इसमें नहीं है कि आप संसार के समक्ष अपने आप को कितना "पवित्र और शुद्ध" दिखाते हैं, वरन इसमें है कि आप स्वयं अपनी खामियों को कितना पहचानते हैं, मानते हैं और उनके लिये कितने पश्चातापी हैं। आपका यही बोध और उन खामियों का अंगीकार, परमेश्वर की कृपा और अनुग्रह के द्वार आपके लिये खोल देता है। - फिलिप यैन्सी


पाखण्ड परमेश्वर से हमारे प्रेममय सबंध को नाश कर देता है।

हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय... तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों, अर्थात न्याय और दया और विश्वास को छोड़ दिया है। - मती २३:२३


बाइबल पाठ: मत्ती २३:१-१५

तब यीशु ने भीड़ से और अपने चेलों से कहा।
शास्त्री और फरीसी मूसा की गद्दी पर बैठे हैं।
इसलिये वे तुम से जो कुछ कहें वह करना, और मानना परन्‍तु उन के से काम मत करना क्‍योंकि वे कहते तो हैं पर करते नहीं।
वे एक ऐसे भारी बोझ को जिस को उठाना कठिन है, बान्‍धकर उन्‍हें मनुष्यों के कन्‍धों पर रखते हैं, परन्‍तु आप उन्‍हें अपनी उंगली से भी सरकाना नहीं चाहते ।
वे अपने सब काम लोगों को दिखाने के लिये करते हैं: वे अपने तावीजों को चौड़े करते, और अपने वस्‍त्रों की कोरें बढ़ाते हैं।
जेवनारों में मुख्य मुख्य जगहें, और सभा में मुख्य मुख्य आसन।
और बाजारों में नमस्‍कार और मनुष्य में रब्‍बी [गुरू] कहलाना उन्‍हें भाता है।
परन्‍तु, तुम रब्‍बी न कहलाना, क्योंकि तुम्हारा एक ही गुरू है: और तुम सब भाई हो।
और पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, कयोंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्‍वर्ग में है।
और स्‍वामी भी न कहलाना, क्‍योंकि तुम्हारा एक ही स्‍वामी है, अर्थात मसीह।
जो तुम में बड़ा हो, वह तुम्हारा सेवक बने।
जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा: और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।
हे कपटी शास्‍त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय!
तुम मनुष्यों के विरोध में स्‍वर्ग के राज्य का द्वार बन्‍द करते हो, न तो आप ही उस में प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करने वालों को प्रवेश करने देते हो।
हे कपटी शास्‍त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है, तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक ७-९
  • २ कुरिन्थियों १३

सोमवार, 20 सितंबर 2010

विश्वास के अनजाने, अनपहचाने योद्धा

अपने लड़कपन के समय अक्सर, ग्रीष्म कल की अपनी छुट्टियों में से कुछ समय मैं अपने दादा-दादी के साथ बिताती थी। कई बार दोपहर को घर के पीछे के आंगन में टंगे झूले में लेट कर दादा के पुस्तक संग्रह में से पुस्तकें पढ़ती थी। उनमें से एक पुस्तक जो मैंने पढ़ी वह थी Foxe's Book of Martyrs - जो मसीही विश्वास के लिये शहीद हुए विश्वासियों की जीवन गाथाओं का संकलन था। मेरी छोटी उम्र के हिसाब से यह गंभीर और गहन अध्ययन की पुस्तक थी, परन्तु मैं उसमें दिये मसीही विश्वासियों के विश्वास की परीक्षा के वृतांत में पूरी तरह मग्न हो जाती थी - कैसे उन्हें अपने विश्वास से पीछे हटने को मजबूर करने के लिये सताया जाता था और उनके इन्कार करने पर उन्हें कैसी दर्दनाक और भयनाक मृत्यु से होकर जाना पड़ता था।

इब्रानियों की पत्री के ११वें अध्याय में भी ऐसी ही कुछ विश्वासियों के बारे में लिखा है, जिन्होंने परमेश्वर के प्रति असीम विश्वास प्रदर्शित किया। क्लेशों, परीक्षाओं और भारी सताव से निकलने वालों की सूचि में कुछ जाने-पहचाने नामों के बाद वर्णन आता है कई अनाम लोगों का जिन्हें लेखक सिर्फ "कितने’ और "कई और" करके संबोधित करता है (पद ३५, ३६)। यद्यपि उनके नाम तो नहीं दिये गए हैं परन्तु पद ३८ उन्हें यह कह कर श्रद्धांजलि देता है कि "संसार उन के योग्य न था" - यीशु के लिये उन्होंने साहसपूर्वक मृत्यु को गले लगा लिया।

आज भी हम सारे संसार में अपने विश्वास के लिये सताये जाने वाले मसीही विश्वासियों के बारे में सुनते हैं, किंतु हम में से बहुतेरे अभी इस हद तक परखे नहीं गए हैं। मैं अपने विश्वास के बारे में सोचती हूं कि ऐसे सताव, परीक्षा और मृत्यु के जोखिम में क्या मैं विश्वास में स्थिर रह पाउंगी? मैं चाहती हूं कि यदि मुझे इन परिस्थितियों से होकर निकलना पड़े तो मेरा रवैया पौलुस के समान हो जिसने कहा यद्यपि बन्धन और क्लेश मेरा इन्तज़ार कर रहे हैं तौभी मैं अपनी सेवकाई को आनन्द सहित पूरी करूं (प्रेरितों २०:२३, २४)।

क्या हम अपने जीवन को मसीह में ऐसे स्थिर विश्वास से जी रहे हैं? - सिंडी हैस कैस्पर


सताव में भी आनन्दित रहने के लिये यीशु को अपने आनन्द का आधार बनाओ।

धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। आनन्‍दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्‍होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था। - मत्ती ५:१०, ११


बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:३२-४०

अब और क्‍या कहूँ क्‍योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते, धर्म के काम किए, प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तुएं प्राप्‍त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
आग ही ज्‍वाला को ठंडा किया, तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए, लड़ाई में वीर निकले, विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया, कितने तो मार खाते खाते मर गए और छुटकारा न चाहा इसलिये कि उत्तम पुनरूत्थान के भागी हों।
कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने, और कोड़े खाने, वरन बान्‍धे जाने, और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
पत्थरवाह किए गए, आरे से चीरे गए, उन की परीक्षा की गई, तलवार से मारे गए, वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्‍छी गवाही दी गई, तोभी उन्‍हें प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तु न मिली।
क्‍योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचें।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक ४-६
  • २ कुरिन्थियों १२

रविवार, 19 सितंबर 2010

और बेहतर योजना

हाल ही में हमारा परिवर एक रिश्तेदार से मिलने पेन्सिल्वेनिया प्रदेश के ईरी इलाके में गया। वहां पर हमें एक सामुदायिक तैराकी स्थल पर तैराकी करने का अवसर मिला। इसमें हमें बहुत मज़ा आया, लेकिन हमारे मेज़बान की इच्छा थी कि हम वहां से निकल कर ईरी झील के किनारे चलें और झील के तट की बालु, लहरों की अटखेलियां तथा झील में डूबते सूर्य की छटा का आनन्द लें। मेरे बच्चों ने इसका इसका विरोध किया क्योंकि वे तैरने के मज़े को छोड़ना नहीं चाहते थे। मुझे उन्हें समझाना पड़ा कि झील तट पर जाना इससे कहीं अच्छी और मज़ेदार योजना है।

मेरा मानना है कि प्रभु यीशु भी शमौन पतरस को समझाना चाहते थे कि उसके लिये उनकी योजना कहीं उत्तम है - वह मछलियों का नहीं, मनुष्यों का ’मछुआरा’ होगा (लूका ५:१०)। यीशु ने पतरस से कहा कि गहरे पानी में चलकर जाल डाले। जब प्रभु ने उससे यह कहा, तब पतरस सारी रात के असफल प्रयासों के बाद खाली हाथ लौटा ही था, फिर भी उसने आज्ञा मनी और कहा "हे स्‍वामी, हम ने सारी रात मेहनत की और कुछ न पकड़ा, तौभी तेरे कहने से जाल डालूंगा। जब उन्‍होंने ऐसा किया, तो बहुत मछिलयां घेर लाए, और उन के जाल फटने लगे" (लूका ५:५, ६)। इस चमत्कार से प्रभावित होकर वह प्रभु के सामने भय और श्रद्धा के साथ झुक गया, और प्रभु ने उससे कहा कि वह चाहता है कि अब से पतरस मनुष्यों का ’मछुआरा’ बने। पतरस अपना सब कुछ छोड़ कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिया।

हमारे लिये परमेश्वर की बेहतर योजना चाहे हमारी जीविका छोड़ने की ना हो, परन्तु हमारे लिये उसकी योजना में सम्मिलित है कि हम अपने समय, संसाधन और जीविका का उपयोग दूसरों को परमेश्वर के राज्य में लाने के लिये करें। - मार्विन विलियम्स


जिस अगले व्यक्ति से आप मिलें, उसे प्रभु यीशु से मिलने की बड़ी ज़रूरत हो सकती है।

तब यीशु ने शमौन से कहा, मत डर: अब से तू मनुष्यों को जीवता पकड़ा करेगा। - लूका ५:१०


बाइबल पाठ: लूका ५:१-११

जब भीड़ उस पर गिरी पड़ती थी, और परमेश्वर का वचन सुनती थी, और वह गन्नेसरत की झील के किनारे पर खड़ा था, तो ऐसा हुआ।
कि उस ने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं, और मछुवे उन पर से उतर कर जाल धो रहे थे।
उन नावों में से एक पर जो शमौन की थी, चढ़ कर, उस ने उस से बिनती की, कि किनारे से थोड़ा हटा ले चले, तब वह बैठ कर लोगों को नाव पर से उपदेश देने लगा।
जब वे बातें कर चुका, तो शमौन से कहा, गहिरे में ले चल, और मछिलयां पकड़ने के लिये अपने जाल डालो।
शमौन ने उसको उत्तर दिया, कि हे स्‍वामी, हम ने सारी रात मेहनत की और कुछ न पकड़ा, तौभी तेरे कहने से जाल डालूंगा।
जब उन्‍होंने ऐसा किया, तो बहुत मछिलयां घेर लाए, और उन के जाल फटने लगे।
इस पर उन्‍होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव पर थे, संकेत किया, कि आकर हमारी सहायता करो: और उन्‍होंने आकर, दोनो नाव यहां तक भर लीं कि वे डूबने लगीं।
यह देखकर शमौन पतरस यीशु के पांवों पर गिरा, और कहा हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्‍योंकि मैं पापी मनुष्य हूं।
क्‍योंकि इतनी मछिलयों के पकड़े जाने से उसे और उसके साथियों को बहुत अचम्भा हुआ।
और वैसे ही जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना को भी, जो शमौन के सहभागी थे, अचम्भा हुआ: तब यीशु ने शमौन से कहा, मत डर: अब से तू मनुष्यों को जीवता पकड़ा करेगा।
और व नावों को किनारे पर ले आए और सब कुछ छोड़ कर उसके पीछे हो लिए।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक १-३
  • २ कुरिन्थियों ११:१६-३३