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शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

सोच-विचार करने वाले

डेविड मैक्कल्लो द्वारा लिखित अमेरिका के संस्थापकों और आरंभिक राष्ट्रपतियों में से एक, जौन एडम्स, की जीवनी में उन्हें "दोनो, एक धर्मपरायण मसीही विश्वासी तथा स्वतंत्र विचारक, और जिनमें दोनो गुणों से कोई अन्तःकलह न हो" कहा गया है। मुझे इस राय ने विचिलित किया, क्योंकि इसमें इस बात पर आश्चर्य निहित है कि एक मसीही विश्वासी में ये दोनो गुण एक साथ हैं। साधारण्तः लोग मसीही विश्वासी को सीधा-सादा और बिना सोच-समझ वाला समझते हैं। लोगों के लिये सोच-विचार करने वाला मसीही विश्वासी होना संभव नहीं है।

यह बिलकुल निराधार और गलत धारणा है। उद्धार का एक बड़ा लाभ है कि उस के कारण विश्वासी के मन में परमेश्वर की शांति रहती है (फिलिप्पियों ४:७), जिससे जीवन की हर बात का वह स्पष्ट विचार, विवेकशीलता और समझ-बूझ के साथ विशलेषण कर सकता है। पौलुस ने इसका वर्णन कुरिन्थुस के विश्वासियों को लिखी अपनी दूसरी पत्री में किया। उसने उन्हें स्मरण दिलाया कि मसीह में हमें क्षम्ता मिली है कि "हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं, और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं।" (२ कुरिन्थियों १०:५)

किसी तर्क का बुद्धिमानी से विशलेषण करना, परमेश्वर के ज्ञान को स्पष्टता से समझ लेना और अपने मन को मसीह के मन के अनुरूप ढाल लेना बहुत मूल्यवान कौशल हैं, ऐसे संसार में जीने के लिये जहां भले बुरे की पहचान रखना कठिन रहता है। ये कौशल हमें मसीह का प्रतिनिधी होकर रहने के योग्य भी करते हैं।

प्रत्येक मसीही विश्वासी को सोच-विचार करने वाला होना चाहिये - क्या आप हैं? - बिल क्राउडर


विश्वास करना, कभी भी बुद्धिमता एवं विचारशीलता को अनुपयोगी करना नहीं है।

सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं, और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं। - २ कुरिन्थियों १०:५


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १०:१-११

मैं वही पौलुस जो तुम्हारे साम्हने दीन हूं, परन्‍तु पीठ पीछे तुम्हारी ओर साहस करता हूं, तुम को मसीह की नम्रता, और कोमलता के कारण समझाता हूं।
मैं यह बिनती करता हूं, कि तुम्हारे साम्हने मुझे निर्भय होकर साहस करना न पड़े जैसा मैं कितनों पर जो हम को शरीर के अनुसार चलने वाले समझते हैं, वीरता दिखाने का विचार करता हूं।
क्‍योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तौभी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते।
क्‍योकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।
सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं, और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं।
और तैयार रहते हैं कि जब तुम्हारा आज्ञा मानना पूरा हो जाए, तो हर एक प्रकार के आज्ञा न मानने का पलटा लें।
तुम इन्‍हीं बातों को दखते हो, जो आंखों के साम्हने हैं, यदि किसी का अपने पर यह भरोसा हो, कि मैं मसीह का हूं, तो वह यह भी जान ले, कि जैसा वह मसीह का है, वैसे ही हम भी हैं।
क्‍योंकि यदि मैं उस अधिकार के विषय में और भी घमण्‍ड दिखाऊं, जो प्रभु ने तुम्हारे बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये हमें दिया है, तो लज्ज़ित न हूंगा।
यह मैं इसलिये कहता हूं, कि पत्रियों के द्वारा तुम्हें डराने वाला न ठहरूं।
क्‍योंकि कहते हें, कि उस की पत्रियां तो गम्भीर और प्रभावशाली हैं, परन्‍तु जब देखते हैं, तो वह देह का निर्बल और वक्तव्य में हल्का जान पड़ता है।
सो जो ऐसा कहता है, कि समझ रखे, कि जैसे पीठ पीछे पत्रियों में हमारे वचन हैं, वैसे ही तुम्हारे साम्हने हमारे काम भी होंगे।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन २७-२९
  • २ कुरिन्थियों १०

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

गुमनामी में कही बातें

कहावत है कि कायर ही गुमनामी के पीछे छिप कर अपनी बात कहते या करते हैं। गुमनाम लोगों द्वारा जो मुझे पत्र और टिप्पणियां भेजी जाती हैं और जो बातें वे लिखते हैं, उनके आधार पर मुझे यह कहावत काफी सत्य प्रतीत होती है। लोग गुमनामी या झूठी पहचान के पीछे छिप कर दूसरों पर तीव्र आघात और दोषारोपण करने की स्वतंत्रता महसूस करते हैं। गुमनामी उन्हें बिना अपनी कही बातों की ज़िम्मेदारी लिये, कटु होने का अवसर देती है।

जब कभी मुझे प्रलोभन होता है कि मैं किसी बात पर गुमनामी से लिखुं, क्योंकि मैं अपने नाम को अपनी उस बात के साथ जोड़ना नहीं चाहती, तो मैं ठहर कर उस बात पर पुनः विचार करती हूँ। यदि मैं अपने नाम को किसी बात के साथ जुड़ा हुआ नहीं देखना चाहती तो उस बात को कहना मेरे लिये अनुचित होगा; ऐसे में मैं फिर दो में से कोई एक बात करती हूँ - या तो मैं उस बात को छोड़ देती हूँ, या उसे ऐसे तरीके से कहती हूँ कि वह बात चोट पहुँचाने की बजाए उभारने और सहायता करने वाली बात हो जाए।

इफिसियों की पत्री के अनुसार हमारे शब्दों द्वारा दूसरों की उन्नति हो और उन्हें अनुग्रह पहुँचे (इफिसियों ४:२९)। यदि मैं बात कहने के लिये अपने नाम का प्रयोग नहीं करना चाहती, तो प्रगट है कि संभवतः बात का उद्देश्य चोट पहुँचाना है न कि उभारना।

आप को जब कभी किसी को कोई बात गुमनामी में कहने का प्रलोभन हो - चाहे अपने परिवार के सदस्य या सहकर्मी या अपने पास्टर से, तो थोड़ा रुक कर सोचिये कि आप अपनी बात के साथ अपना नाम क्यों नहीं जोड़ना चाहते? और यदि आप ही अपने नाम को अपनी बात के साथ नहीं जोड़ना चाहते तो फिर भला परमेश्वर क्यों चाहेगा कि ऐसी किसी भी बात के साथ उसका नाम जोड़ा जाये?

परमेश्वर अनुग्रहकारी, सहनशील और विलंब से क्रोध करने वाला है (निर्गमन ३४:६) और चाहता है कि उसके लोग भी ऐसे ही हों। - जूली ऐकरमैन लिंक


चोट पहुंचाने वाले शब्दों को कहने के लिये गुमनामी के पीछे छुपना का कायरों का काम है।

बुद्धिमान के वचनों के कारण अनुग्रह होता है - सभोपदेशक १०:१२


बाइबल पाठ: इफिसियों ४:२५-३२

इस कारण झूठ बोलना छोड़ कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
और न शैतान को अवसर दो।
चोरी करने वाला फिर चोरी न करे वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्र्म करे, इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन २५, २६
  • २ कुरिन्थियों ९

बुधवार, 15 सितंबर 2010

छोड़ देना

कहते हैं कि जो किसी के लिये रद्दी है, वही किसी और के लिये बहुमूल्य हो सकता है। डेविड डडले घर बदलने में अपने माता-पिता की सहायता कर रहा था। जिस दूसरे घर में उन्हें जाना था वह उनके वर्तमान घर से छोटा था और उन्हें अपने सामान की छंटाई करने तथा अनुपयोगी चीज़ों को छोड़ देने की आवश्यक्ता थी। परन्तु डेविड के लिये यह बहुत मुश्किल और झुंझलाने वाला कार्य साबित हुआ; क्योंकि जिन वस्तुओं को उसके माता-पिता ने दशकों से प्रयोग नहीं किया था वे उन्हें भी छोड़ने को तैयार नहीं थे। आखिरकर डेविड के पिता ने उसे समझाया की जिन वस्तुओं को वह घिसी-पिटी, पुरानी और अनुपयोगी समझता है वे उनके नज़दीकी मित्रों और कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी हुई हैं और उनके लिये उन वस्तुओं को बेकार समझ कर फेंकना ऐसा है कि मानो वे अपने जीवन को ही फेंक रहे हैं।

अपने घर के बेकार पड़े सामान की छंटाई करने से अनिच्छुक होने का आत्मिक समानन्तर होगा हमारा अपने मन को उन बातों और प्रवृत्तियों से साफ नहीं कर पाना जो हमें बांधे रहती हैं और आगे नहीं बढ़ने देतीं।

कई साल तक पौलूस कुछ बातों को दृढ़ता से थामे रहा; जैसे, परमेश्वर की व्यवस्था के पालन की उसकी स्वधार्मिकता का घमंड, उसका अपने गोत्र, वंश, ज्ञान और कार्य कौशल पर घमंड आदि। उसने इन सबको तब तक नहीं छोड़ा जब तक दमिशक के मार्ग पर उसक सामना जीवित उद्धारकर्ता यीशु से नहीं हुआ। यीशु से हुए साक्षात्कार ने उसकी स्वधार्मिकता और अन्य बातों पर उसके घमंड को उसके जीवन से निकाल दिया। उसके जीवन में आये इस अति महत्वपूर्ण परिवर्तन ने उसे हर बात में अपनी किसी भी सामर्थ पर नहीं वरन केवल परमेश्वर ही पर निर्भर होकर काम करने वाला बना दिया। इसी कारण वह परमेश्वर के लिये बहुत उपयोगी हो सका, और आज भी उसकी लिखी पत्रियां हमें शिक्षाएं देतीं हैं। उसने बाद में लिखा, "परन्‍तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है"। (फिलिप्पियों ३:७)

जब परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमें हमारी किसी ऐसी आदत या प्रवृत्ति को छोड़ देने के लिये उकसाता है जिसके कारण हम प्रभु यीशु का अनुसरण ठीक से नहीं कर पा रहे हैं, तो उसे छोड़ देने से ही हमें सच्ची स्वतंत्रता प्राप्त हो सकती है। - डेविड मैककैसलैंड


मसीह से हमें अनुपयोगी बातों को छोड़ देने की सामर्थ, और छोड़ देने से स्वतंत्रता मिलती है।

परन्‍तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। - फिलिप्पियों ३:७


बाइबल पाठ: फिलिपियों ३:३-११

क्‍योंकि खतना वाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते।
पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं।
आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्‍त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं, इब्रानियों का इब्रानी हूं, व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं।
उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था।
परन्‍तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है।
वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्‍हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्‍त करूं।
और उस में पाया जाऊं, न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूं, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्‍त करूं।
ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन २२-२४
  • २ कुरिन्थियों ८

मंगलवार, 14 सितंबर 2010

धरोहर

हाल ही में, मेरे छोटे मोटे कम करने के लिये इधर उधर जाने के समय, मेरा पोता एलक्स मेरे साथ रहा। एक दिन अप्रतिक्षित रूप से उसने मुझ से प्रश्न किया, "तो दादा जी आपने यीशु को अपना उद्धारकर्ता कैसे ग्रहण किया?" उसके इस प्रश्न ने मेरा हृदय छू लिया और मैंने उसे बताया कि कैसे बचपन में ही मैंने यह कदम उठाया। इस विष्य पर एलक्स की दिलचस्पी बनी रही तो मैंने उसे बताया कि कैसे उसके परदादा विश्वास में आये। उनके इस वर्णन में यह भी सम्मिलित था कि वे कैसे द्वितीय विश्वयुद्ध में जीवित बच सके, पहले पहल कैसे उन्होंने उद्धार के सुसमाचार का विरोध किया, और फिर कैसे मसीही विश्वास में आने के बाद उनका जीवन बदल गया।

कुछ समय पश्चात जब मैं बाइबल पढ़ रहा था तो उसके एक खंड ने, जहां विश्वास का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को पहुंचाये जाने की ज़िम्मेदारी के विष्य में लिखा है, मुझे अपने पोते से हुई यह बातचीत स्मरण दिलाई। मूसा ने व्यवस्थाविवरण की पुस्तक में इस्त्रालियों को निर्देश दिये कि उनकी जीवन शैली में अनिवार्य हो कि वे परमेश्वर के शाश्वत सत्य को अपने हृदय में बनाए रखें और उसे अपनी अगली पीढ़ी को भी सिखाएं: "और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें। और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझा कर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।" - व्यवस्थाविवरण ६:६, ७

मसीही विश्वास में होना यह निश्चित तो नहीं करता कि हमारी सन्तान भी परमेश्वर से प्रेम करने वाली होगी, किंतु जब हम अपनी अगली पीढ़ी में आत्मिक बातों की रुचि देखते हैं तो हम उनसे परमेश्वर के वचन के बारे में बातें कर के उनके अन्दर परमेश्वर और उद्धार के लिये आकर्शण उत्पन्न कर सकते हैं। यह किसी भी माता-पिता, दादा-दादी या नाना-नानी द्वारा अपनी अगली पीढ़ी को दी गई सर्वोतम धरोहर होगी। - डेनिस फिशर


एक ईश्वरीय जीवन शैली का उदाहरण, बच्चों के लिये छोड़ी गई सबसे बहुमूल्य धरोहर है।

तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझा कर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। - व्यवस्थाविवरण ६:७


बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ६:४-९

हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है।
तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें।
और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझा कर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी करके बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन १९-२१
  • २ कुरिन्थियों ७

सोमवार, 13 सितंबर 2010

त्रासदी में आशा

कुछ लोगों का मानना है कि हमें अपनी बाइबल में चित्रांकन नहीं करना चाहिये। परन्तु मुझे खुशी है कि मेरी बेटी मेलिसा ने अपनी बाइबल में चित्रांकन किया। उसने अपनी बाइबल में रोमियों ५ के हाशिये में हरी स्याही से एक मुस्कुराता चेहरा बनाया और पद ३ पर गोलाकार निशान लगाया।

वह कैसे जान सकी कि उसके परिवार और मित्रों को, १७ वर्ष की आयु में उसके अचानक कार दुर्घटना में चले जाने के बाद, इस खंड की आवश्यक्ता होगी? वह कैसे जान सकी कि ये पद उसकी कहानी बयान करेंगे और हमारे तथा दूसरों के जीवन को मार्गदर्शन देते रहेंगे, जैसे वे पिछले ७ वर्षों से, उसके जाने के बाद से कर रहे हैं?

रोमियों ५ का आरंभ होता है प्रभु यीशु पर विश्वास करने के द्वारा हमारा परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी ठहराये जाकर उसके साथ हुए मेल से मिलने वाली शांति की व्याख्या से (पद १)। मेलिसा के पास यह शांति थी। अब वह अपने इस विश्वास के फलों का आनन्द ले रही है, जैसा पद २ में बताया गया है। कलपना कीजिये कि अब ऐसे आनन्द में वह और कैसा मुस्कुराता चेहरा बनाती!

और फिर हम सब हैं - हम सब जो पीछे रह गये हैं, जब हमारे प्रीय जन मृत्यु द्वारा हम से आगे चले गये। ऐसे में भी हम "हम क्‍लेशों में भी घमण्‍ड करें" - क्यों? क्योंकि क्लेशों से धीरज और धीरज से खरा निकलना होता है और उससे आशा उत्पन्न होती है (पद ३, ४)।

त्रासदी के समय हम असहाय महसूस करते हैं, परन्तु फिर भी हम कभी आशाविहीन नहीं होते। परमेश्वर अपने प्रेम को हमारे हृदय में उंडेलता है और उसके साथ अपनी महीमा की महान आशा भी। यह सब परमेश्वर की महान, रहस्यमयी और अद्भुत योजना का भाग है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर अक्सर दुखों के फावड़ों से हमारे जीवनों में आनन्द के कुएं खोदता है।

केवल यही नहीं, बरन हम क्‍लेशोंमें भी घमण्‍ड करें, यही जानकर कि क्‍लेश से धीरज [उत्पन्न होता है]। - रोमियों ५:३


बाइबल पाठ: रोमियों ५:१-५

सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्‍ड करें।
केवल यही नहीं, बरन हम क्‍लेशों में भी घमण्‍ड करें, यही जानकर कि क्‍लेश से धीरज।
ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्‍पन्न होती है।
और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्‍योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन १६-१८
  • २ कुरिन्थियों ६

रविवार, 12 सितंबर 2010

अभद्र व्यवहार

नर्सों की एक पत्रिका Michigan Nurse के एक अंक में एक हैरान करने वाला लेख छपा, जिसने नर्सों के काम काज के दौरान उनके आपसी व्यवहार के कुछ अवगुण प्रकट किये। उस लेख के अनुसार, उनमें आपस में एक दूसरे पर धौंस देना, ज़बर्दस्ती करना, अभद्र व्यवहार करना और गालियां देना, पीठ पीछे बुराई करना, आपसी लड़ाईयां, एक दूसरे पर गलत इल्ज़ाम लगाना, एक दूसरे के विरुद्ध षड़यंत्र रचना आदि प्रचलित था।

यह नहीं है कि इस तरह का व्यवहार न केवल नर्सों में ही देखा जाता है, वरन अन्य काम-काज के स्थानों पर भी देखा जा रहा है और बढ़ता जा रहा है। यह व्यवहार हमेशा ओहदे के दुरुपयोग, हानि के उद्देश्य और भविष्य में और अधिक हानि पहुंचाने की नीयत के साथ जुड़ा होता है।

यदि आपकी धारणा है कि ऐसा व्यवहार क्लीसिया (चर्च) में तो नहीं हो सकता, तो कलीसिया के लोगों और अगुवों के आपसी संबंधों और व्यवहार और जीवन पर ज़रा ग़ौर कीजिये। साथ ही इस पर भी ग़ौर कीजिये कि परिवार के सदस्यों का आपसी व्यवहार कैसा रहता है?

जब भावी स्वर्गीय राज्य में पद-प्रतिष्ठा पाने के लिये चेलों में होड़ लगी तो प्रभु ने उन्हें डांटा और कहा "परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने। जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।" (मत्ती २०:२६-२८)

यदि प्रभु की यह शिक्षा हमारे जीवन में पाई जाये तो हमारे जीवन में कोई अभद्र व्यवहार कभी नहीं पाया जाएगा। - डेव एगनर


केवल वही जो सेवा करना जानता है और करता है, सच्चा अगुवा होने के योग्य होता है।

परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। - मत्ती २०:२६


बाइबल पाठ: मती २०:२०-२८

तब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उस से कुछ मांगने लगी।
उस ने उस से कहा, तू क्‍या चाहती है? वह उस से बोली, यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएं बैठें।
यीशु ने उत्तर दिया, तुम नहीं जानते कि क्‍या मांगते हो; जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्‍या तुम पी सकते हो? उन्‍होंने उस से कहा, पी सकते हैं।
उस ने उन से कहा, तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएं किसी को बिठाना मेरा काम नहीं, पर जिन के लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।
यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।
यीशु ने उन्‍हें पास बुला कर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं, और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।
परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा, परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने।
और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने।
जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन १३-१५
  • २ कुरिन्थियों ५

शनिवार, 11 सितंबर 2010

ईमानदारी के दर्जे

महिलाओं की एक पत्रिका Woman's Day ने २००० से अधिक लोगों का सर्वेक्षण करके पता लगाया कि वे कितने ईमानदार हैं। जब उन लोगों से पूछा गया कि "आप कितने ईमानदार हैं?" तो ४८% ने कहा "बहुत ईमानदार", ५०% ने कहा "कुछ हद तक ईमानदार" और २% ने कहा "ज़्यादा नहीं"।

उन लोगों में से ६८% ने माना कि अपने निज काम के लिये उन्होंने दफतर के सामान को लिया है; और ४०% ने माना कि यदि उन्हें पक्का हो कि वे पकड़े नहीं जाएंगे तो वे अपने कर देने में बेईमानी करेंगे।

हनन्याह और सफीरा ने भी सोचा होगा कि वे बेईमानी से बच निकलेंगे (प्रेरितों ५:१-११)। पर वे शीघ्र ही जान गए कि ऐसा संभव नहीं है, जब पतरस ने उनका झूठ पकड़ कर उनसे कहा कि उन्होंने मनुष्य से नहीं, परमेश्वर के पवित्र आत्मा से झूठ बोला है, और तुरंत मृत्यु ने उन्हें ले लिया।

प्रभु की इच्छा थी कि उसकी नयी कलीसिया (चर्च) पवित्र रहे जिससे वह उस कलीसिया के विश्वासियों को दूसरों तक प्रभु के जीवन को पहुंचाने के लिये प्रयोग कर सके। बाइबल शिक्षक कैम्पबल मौरगन का कहना है कि "पवित्र कलीसिया ही सामर्थी कलीसिया है.... कलीसिया की पवित्रता केवल कलीसिया में परमेश्वर के पवित्र आत्मा के निवास और सामर्थ से होती है।" कलीसिया की पवित्रता द्वारा ही उनकी गवाही अन्य लोगों तक पहुंची जिससे "विश्वास करने वाले बहुतेरे पुरूष और स्‍त्रियां प्रभु की कलीसिया में और भी अधिक आकर मिलते रहे।" (प्रेरितों ५:१४)

हम ऐसे लोग बनें जो ईमानदारी से काम करते हों (नीतिवचन १२:२२) जिससे प्रभु हमारा उपयोग कर सके। - एनी सेटास

ईमानदारी के कोई दर्जे नहीं होते।


झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है। - नीतिवचन १२:२२

बाइबल पाठ: प्रेरितों ५:१-११

और हनन्याह नाम एक मनुष्य, और उस की पत्‍नी सफीरा ने कुछ भूमि बेची।
और उसके दाम में से कुछ रख छोड़ा, और यह बात उस की पत्‍नी भी जानती थी, और उसका एक भाग लाकर प्ररितों के पावों के आगे रख दिया।
परन्‍तु पतरस ने कहा, हे हनन्याह! शैतान ने तेरे मन में यह बात क्‍यों डाली है कि तू पवित्र आत्मा से झूठ बोले, और भूमि के दाम में से कुछ रख छोड़े?
जब तक वह तेरे पास रही, क्‍या तेरी न थी और जब बिक गई तो क्‍या तेरे वश में न थी? तू ने यह बात अपने मन में क्‍यों विचारी? तू मनुष्यों से नहीं, परन्‍तु परमेश्वर से झूठ बोला।
ये बातें सुनते ही हनन्याह गिर पड़ा, और प्राण छोड़ दिए, और सब सुनने वालों पर बड़ा भय छा गया।
फिर जवानों ने उठ कर उसकी अर्थी बनाई और बाहर ले जाकर गाड़ दिया।
लगभग तीन घंटे के बाद उस की पत्‍नी, जो कुछ हुआ था न जान कर, भीतर आई।
तब पतरस ने उस से कहा मुझे बता क्‍या तुम ने वह भूमि इतने ही में बेची थी? उस ने कहा हां, इतने ही में।
पतरस ने उस से कहा यह क्‍या बात है, कि तुम दोनों ने प्रभु की आत्मा की परीक्षा के लिये एका किया है? देख, तेरे पति के गाड़ने वाले द्वार ही पर खड़े हैं, और तुझे भी बाहर ले जाएंगे।
तब वह तुरन्‍त उसके पांवों पर गिर पड़ी, और प्राण छोड़ दिए: और जवानों ने भीतर आकर उसे मरा पाया, और बाहर ले जाकर उसके पति के पास गाड़ दिया।
और सारी कलीसिया पर और इन बातों के सब सुनने वालों पर, बड़ा भय छा गया।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन १०-१२
  • २ कुरिन्थियों ४