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बुधवार, 18 अगस्त 2010

धोखे से सावधान

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, ६ जून १९४४ को मित्र देशों की सम्मिलित सेना ने फ्रांस के नॉरमैण्डी शहर के निकट समुद्र तट पर नौसेना द्वारा बहुत बड़ा हमला किया। साथ ही वायुसेना ने हज़ारों छाताधारी सैनिक उस इलाके में उतारे गये। इन छाताधारी सैनिकों के साथ उन्होंने रबर के बने बहुत से पुतले भी, जिन्हें ’रूपर्ट’ नाम दिया गया था, शत्रु की सेना के पीछे उतारे, जिससे शत्रु को पीछे से हमले की गलतफहमी हो और वह असमंजस में पड़ जाए। पुतलों को अपने पीछे ज़मीन पर उतरते देख कई जर्मन चौकियों का ध्यान उनसे लड़ने की ओर चला गया जिससे उनकी सुरक्षा पंक्ति कमज़ोर हो गई और असली सैनिकों को पांव जमाने का अवसर मिल गया।

इस तरह के धोखे को हम दुशमन के इरादों को नाकाम करने और युद्ध लड़ने की एक जायज़ नीति कह सकते हैं, किंतु शैतान द्वारा हमें ऐसे ही किसी धोखे में फंसाना, कभी स्वीकार्य नहीं होना चाहिये। पौलुस ने समझाया कि, "यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्‍योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्‍वर्गदूत का रूप धारण करता है" और "शैतान के सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धारण करते हैं" ( २ कुरिन्थियों ११:१४, १५)।

हमें सचेत रहना है! हमारा आत्मिक शत्रु सदा इस प्रयास में रहता है कि मसीह के अनुयायी झूठी शिक्षा और गलत सिद्धांतों को मानकर गलत रास्ते पर चल निकलें। परन्तु यदि हम अपना ध्यान प्रभु यीशु मसीह पर और उसके वचन की स्पष्ट शिक्षाओं पर केंद्रित रखते हैं तो प्रभु से हमें सही दिशा निर्देश मिलता रहेगा।

धोखे से सावधान, शैतान के ’रूपर्टों’ से सचेत रहो। - बिल क्राउडर


परमेश्वर का सत्य शैतान के झूठ को उजागर कर देता है।

यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्‍योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्‍वर्गदूत का रूप धारण करता है। - २ कुरिन्थियों ११:१४, १५


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ११:३, ४, १२-१५

परन्‍तु मैं डरता हूं कि जैसे सांप ने अपनी चतुराई से हव्‍वा को बहकाया, वैसे ही तुम्हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएं।
यदि कोई तुम्हारे पास आकर, किसी दूसरे यीशु को प्रचार करे, जिस का प्रचार हम ने नहीं किया: या कोई और आत्मा तुम्हें मिले, जो पहिले न मिला था, या और कोई सुसमाचार जिसे तुम ने पहिले न माना था, तो तुम्हारा सहना ठीक होता।
परन्‍तु जो मैं करता हूं, वही करता रहूंगा, कि जो लोग दांव ढूंढ़ते हैं, उन्‍हें मैं दांव न पाने दूं, ताकि जिस बात में वे घमण्‍ड करते हैं, उस में वे हमारे ही समान ठहरें।
क्‍योंकि ऐसे लोग झूठे प्रेरित, और छल से काम करने वाले, और मसीह के प्रेरितों का रूप धरने वाले हैं।
और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्‍योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्‍वर्गदूत का रूप धारण करता है।
सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्‍तु उन का अन्‍त उन के कामों के अनुसार होगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १००-१०२
  • १ कुरिन्थियों १

मंगलवार, 17 अगस्त 2010

स्तुति का नया गीत

पास्टर विलिस को ९४ वर्ष की आयु में एक बुज़ुर्गों की देख भाल करने वाली संस्था में भर्ती कराया गया। एक से दूसरे स्थान जाने के लिये पहिये वाली कुर्सी पर निर्भर होने पर भी, उन्होंने आनन्द के साथ बताया कि कैसे इस संस्था में भर्ती होने के द्वारा परमेश्वर ने उन्हें सुसमाचार प्रचार का नया क्षेत्र दिया है। कुछ वर्ष पश्चात जब वह पूर्णत्य: शय्याग्रस्त हो गये तो वे बड़े जोश के साथ परमेश्वर की ओर मुंह रखने की सबसे उत्तम स्थिति में होने के बारे में बात करते थे। जब १०० वर्ष की आयु में उनका देहान्त हुआ तो वे अपने पीछे जीवन के हर मोड़ पर परमेश्वर की स्तुति का एक नया गीत गाने की विरासत छोड़ कर गए।

भजन ९८ हमें परमेश्वर के लिये एक नया गीत गाने के लिये प्रेरित करता है "क्योंकि उस ने आश्चर्य कर्म किए हैं! उसके दहिने हाथ और पवित्रा भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है!" (भजन ९८:१)। हमें मुश्किल परिस्थितियों में भी उसकी स्तुति करनी चाहिये क्योंकि "...अपनी करूणा और सच्चाई की सुधि ली..." (पद ३)। यद्यपि यह भजन परमेश्वर द्वारा इस्त्राएलियों को बंधुआई से छुड़ाए जाने के बारे में है, यह आने वाले समय में प्रभु यीशु द्वारा पाप की गुलामी से मिलने वाली स्वतंत्रता की और उसके न्याय की भविष्यद्वाणी भी है। जब हम याद करते हैं कि परमेश्वर ने हमारे लिये क्या कुछ किया है तो हम उस पर भरोसा भी रख सकते हैं कि वह आज की मुश्किलों और आने वाले समय की अनिश्चित्ताओं में भी हमारी सहायता करेगा।

भजनकार ने लिखा "समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें, जगत और उसके निवासी महाशब्द करें! नदियां तालियां बजाएं, पहाड़ मिलकर जयजयकार करें। यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है। वह धर्म से जगत का, और सीधाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा" (पद ७-९)। आइये हम भी परमेश्वर की सृष्टि के साथ मिलकर अपने उद्धारकर्ता की स्तुति करें। - अल्बर्ट ली


परमेश्वर के साथ स्वर मिलाने वाल हृदय ही उसकी स्तुति के गीत गा सकता है।


हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जय जय कार करो, उत्साह पूर्वक जयजयकार करो, और भजन गाओ! - भजन ९८:४


बाइबल पाठ: भजन ९८

यहोवा के लिये एक नया गीत गाओ, क्योंकि उस ने आश्चर्यकर्म किए है! उसके दहिने हाथ और पवित्रा भुजा ने उसके लिये उद्धार किया है!
यहोवा ने अपना किया हुआ उद्धार प्रकाशित किया, उस ने अन्य जातियों की दृष्टि में अपना धर्म प्रगट किया है।
उस ने इस्राएल के घराने पर की अपनी करूणा और सच्चाई की सुधि ली, और पृथ्वी के सब दूर दूर देशों ने हमारे परमेश्वर का किया हुआ उद्धार देखा है।
हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो, उत्साह पूर्वक जयजयकार करो, और भजन गाओ!
वीणा बजाकर यहोवा का भजन गाओ, वीणा बजाकर भजन का स्वर सुनाओ।
तुरहियां और नरसिंगे फूंक फूंककर यहोवा राजा का जयजयकार करो।
समुद्र और उस में की सब वस्तुएं गरज उठें, जगत और उसके निवासी महाशब्द करें!
नदियां तालियां बजाएं, पहाड़ मिलकर जयजयकार करें।
यह यहोवा के साम्हने हो, क्योंकि वह पृथ्वी का न्याय करने को आनेवाला है। वह धर्म से जगत का, और सीधाई से देश देश के लोगों का न्याय करेगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ९७-९९
  • रोमियों १६

सोमवार, 16 अगस्त 2010

प्रभुत्व की पहचान

बालकपन में मुझे एक फिल्म Little Lord Fauntleroy देखना बहुत पसन्द था। यह फिल्म एक बालक सेडरिक की कहानी है जो अपनी मां के साथ न्यूयॉर्क में गरीबी की हालत में रहता है। एक दिन उसे समाचार मिलता है कि वह इंग्लैंड के एक कुलीन परिवार का सीधा वंशज है और बड़ी संपत्ति का उत्तराधिकारी है। न्यूयॉर्क की सड़कों पर खेलने वाला यह गरीब बालक अब अचानक ही इंग्लैंड की सड़कों पर लोगों से जयज्यकार के नारे सुनने और राजसी ठाठ के साथ चलने वाला व्यक्ति बन जाता है।

यदि आपने यीशु को नासरत की सड़कों पर खेलते देखा होता तो आपने उस पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया होता। यदि उसे उसकी बढ़ई की दुकान में काम करते देखते तो उसके देवत्व के बारे में आपको आभास भी न होता। और यदि आपने उसे क्रूस पर लटके देखा होता, और आप उसमें निहित महान रहस्य को नहीं जानते, तो उस हृदय विदारक दृष्य ने आपको उसका आदर करने को कतई न उभारा होता।

लेकिन अपने मृत्कों में से पुनुरुत्थान के द्वारा यीशु ने अपनी सच्ची पहिचन संसार के सामने रख दी, कि वह सर्वोत्तम, सर्वश्रेष्ठ और सर्वोच्च महाराजाधिराज है! जबकि "...परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है" (फिलिप्पियों २:९) इसलिये आइये हम बड़े आदर के साथ उसकी आराधना करें, जिसने इतनी नम्रता से अपना समर्पण किया और अपना बलिदान दिया ताकि वह हमारे लिये पाप और मृत्यु पर विजयी महाराजाधिराज हो सके। - जो स्टोवैल


परमेश्वर द्वारा निर्धारित राजाधिकारी को पहिचानिये, उसका आदर कीजिये, उसकी उपासना कीजिये।

..जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं, वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है। - फिलिप्पियों २:१०, ११


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:५-११

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा।
वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है।
कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं, वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ९४-९६
  • रोमियों १५:१४-३३

रविवार, 15 अगस्त 2010

नियमित अभ्यास

पाईक्स पीक चढ़ाई की दौड़ १३.३२ मील की एक अत्यन्त चुनौती भरी दौड़ है जो पहाड़ की तले से आरंभ होकर पहाड़ पर ७८१५ फीट की उंचाई पर समाप्त होती है। मेरे मित्र डॉन वालेस ने इसमें २० बार हिस्सा लिया है। अन्तिम बार जब उसने हिस्सा लिया तब वह अपने ६७वें जन्म दिन से केवल एक सप्ताह दूर था! डॉन इस की तैयारी दौड़ से कुछ समय पहले आरंभ नहीं करता, वरन उसने नियम बना रखा है कि वह प्रतिदिन ६ मील दौड़ेगा और सारे साल वह ऐसा करता है, चाहे वह जहां भी हो। यह अभ्यास वह लगभग अपने संपूर्ण व्यस्क जीवन करता रहा है और अब भी करता है।

पौलुस, १ कुरिन्थियों ९ अध्याय में अपने अनुशासित मसीही जीवन को जीने की उपमा दौड़ने से देता है। वह उद्देश्य और अनुशासन से दौड़ा जिससे कि अनन्त जीवन में वह जीत का मुकुट पा सके, और उसने औरों को भी ऐसा ही करने को प्रोत्साहित किया: "क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो" (१ कुरिन्थियों ९:२४)।

इससे अगले पद, पद २५ में, वह अपने पाठकों को स्मरण दिलाता है कि जो खिलाड़ी इनाम पाने की आशा रखते हैं वे संयम के साथ नियमित अभ्यास करते हैं, क्योंकि अन्तिम समय पर करी गई किसी भी तैयारी की अपेक्षा ऐसा करना कहीं अधिक महत्वपूर्ण और कार्यकारी होता है।

जो जीवन की दौड़ हमारे सामने रखी है (इब्रानियों १२:१), हम उसे कैसा लेते हैं - परमेश्वर को प्रसन्न करने के निश्चय और उद्देश्य के अनुशासन के साथ या हलके में और लापरवाही से?

मसीही जीवन की दौड़ को सफलता से पूरी करने की कुंजी, प्रतिदिन उसके अनुशासन का नियमित अभ्यास है। - डेविड मैककैसलैंड


मसीही जीवन की दौड़ को दौड़ने के लिये समर्पण और अनुशासन अनिवार्य हैं।

क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। - १ कुरिन्थियों ९:२४


बाइबल पाठ:१ कुरिन्थियों ९:२४-२७

क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।
और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्‍तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं।
इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्‍तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्‍तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।
परन्‍तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं, ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ९१-९३
  • रोमियों १५:१-१३

शनिवार, 14 अगस्त 2010

सबसे घातक रोग

वियतनाम में सन २००३ में एक घातक शवास रोग SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) का पता लगा। जब तक कि इसे नियंत्रित किया जा पाता, यह सारे विश्व में फैल चुक था और ८०० के लगभग लोगों की जान ले चुका था। आरंभ में इसके घातक होने का प्रमुख कारण इसे उत्पन्न करने वाले वायरस का पता ना होना था। एक बार उस वायरस को पहचान कर और उसे समझ लिया गया, तो SARS पर काबू पाना आसान हो गया और काबू पा लिया गया।

एक अन्य, इससे भी घातक, बीमारी हमारे संसार में व्याप्त है - पाप का रोग। इसे भी काबू करना आसान नहीं है क्योंकि बहुत से लोग इसकी भयानकता को नहीं पहचानते, और कई इसके विष्य में बाइबल द्वारा दिये निदान और उपचार को नहीं मानते।

यहोशु ७ में हम अकान के पाप की दुखद घटना पढ़ते हैं। परमेश्वर की आज्ञा के विरुद्ध उसने यरीहो से युद्ध की लूट की कुछ वस्तुएं ले कर, अपने डेरे में छिपा दीं (पद २१). उसे और उसके परिवार को इसकी कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी (पद २५)।

परमेश्वर द्वारा दिया गया यह घोर दंड हमें सहमा सकता है। धन्यावाद की बात है कि परमेश्वर हमसे ऐसा व्यवहार नहीं करता, यदि उसने ऐसा किया होता तो हम में से कोई भी जीवित नहीं बचता। तौभी हमें पाप की भयानक घातकता को हलका करके नहीं आंकना चाहिये - हमारे पाप के कारण ही मसीह यीशु को क्रूस पर बलि होना पड़ा।

जैसे SARS को काबू करने के लिये, वैसे ही पाप को काबू करने के लिये भी, पहली आवश्यक्ता है उसकी वास्तविक्ता और कारण को पहिचानना और फिर उसके सही उपचार का पालन करना। परमेश्वर से, पाप के प्रतिफल मृत्यु के स्थान पर मसीह यीशु में अनन्त जीवन के दान को कृतज्ञता से स्वीकार करें। फिर "...अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है। इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है" (कुलुसियों ३:५,६)। यही तरीका है संसार के सबसे घातक रोग को काबू करने का। - सी. पी. हिया


पाप एक ऐसा रोग है जिसका उपचार केवल सृष्टि का सबसे बड़ा चिकित्सक - परमेश्वर ही कर सकता है।

परन्तु वह [यीशु] हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया, हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं। - याशायाह ५३:५

बाइबल पाठ: यहोशु ७:१, १९-२६
परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया, अर्थात्‌ यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उस ने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया, इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
तब यहोशू आकान से कहने लगा, हे मेरे बेटे, इस्राएल के परमेश्वर यहोवा का आदर कर, और उसके आगे अंगीकार कर, और जो कुछ तू ने किया है वह मुझ को बता दे, और मुझ से कुछ मत छिपा।
और आकान ने यहोशू को उत्तर दिया, कि सचमुच मैं ने इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के विरूद्ध पाप किया है, और इस प्रकार मैं ने किया है,
कि जब मुझे लूट में शिनार देश का एक सुन्दर ओढ़ना, और दो सौ शेकेल चांदी, और पचास शेकेल सोने की एक ईट देख पड़ी, तब मैं ने उनका लालच करके उन्हें रख लिया, वे मेरे डेरे के भीतर भूमि में गड़े हैं, और सब के नीचे चांदी है।
तब यहोशू ने दूत भेजे, और वे उस डेरे में दौड़े गए और क्या देखा, कि वे वस्तुएं उसके डेरे में गड़ी हैं, और सब के नीचे चांदी है।
उन को उन्हों ने डेरे में से निकाल कर यहोशू और सब इस्राएलियों के पास लाकर यहोवा के साम्हने रख दिया।
तब सब इस्राएलियों समेत यहोशू जेरहवंशी आकान को, और उस चांदी और ओढ़ने और सोने की ईंट को, और उसके बेटे-बेटियों को, और उसके बैलों, गदहों और भेड़-बकरियों को, और उसके डेरे को, निदान जो कुछ उसका था उन सब को आकोर नाम तराई में ले गया।
तब यहोशू ने उस से कहा, तू ने हमें क्यों कष्ट दिया है? आज के दिन यहोवा तुझी को कष्ट देगा। तब सब इस्राएलियों ने उसको पत्थरवाह किया, और उनको आग में डालकर जलाया, और उनके ऊपर पत्थर डाल दिए।
और उन्होंने उसके ऊपर पत्थरों का बड़ा ढेर लगा दिया जो आज तक बना है। तब यहोवा का भड़का हुआ कोप शान्त हो गया। इस कारण उस स्थान का नाम आज तक आकोर तराई पड़ा है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ८९, ९०
  • रोमियों १४

शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

नियमों का प्रेम

लेखन कला सिखाते समय मैं अपने विद्यार्थियों को समझाता हूं कि छोटे और संक्षिप्त वाक्यों का प्रयोग ज़्यादा अच्छा होता है जैसे "कला और लेखन" अथवा "जीवन, स्वतन्त्रता और आनन्द की खोज" आदि। अपनी जीविका के इस कार्य के आरंभिक दिनों में, उन के लेखों की समीक्षा करते समय मुझे लेखकों को समझाना और मनना पड़ता था कि बस ऐसा करना अच्छा होता है; कुछ समय बाद मुझे इस बारे में एक "नियम" मिल गया। मैंने पाया कि मेरा कहना कि "इस बारे में बस मेरा विश्वास करो" की अपेक्षा, अब इस "नियम" के आधार पर मेरा उन लेखकों के लेखों की समीक्षा एवं सम्पादन करना उनको सहजता से ग्रहण योग्य होता था।

यह मानव स्वभाव का एक भाग है। नियमों के साथ हमारा एक प्रेम/बैर का संबंध है। हमें नियम पसन्द नहीं लेकिन नियमों के बिना हम सही-गलत की पहचान करने और मानने के लिये भी असमंजस में रहते हैं।

परमेश्वर का, हमारे आदी पूर्वज, आदम और हव्वा से संबंध प्रेम पूर्ण विश्वास पर आधारित था। उन्हें केवल एक ही नियम दिया गया था जो उन्हें ऐसे ज्ञान से बचाने के लिये था जिसका अन्त मृत्यु था। लेकिन जब अनाज्ञाकारिता के कारण विश्वास का यह संबंध टूट गया तो उस भटके हुए दम्पति और उनकी आने वाली सन्तान की सुरक्षा के लिये, परमेश्वर ने और कई नियम दिये।

प्रभु यीशु मसीह में एक बार फिर परमेश्वर ने प्रगट किया कि जो उत्तम जीवन वह हमारे लिये चाहता है वह नियमों पर नहीं वरन उसके साथ बने संबंध पर आधारित है। जैसा पौलुस ने लिखा, परमेश्वर के सारे नियमों का सार एक शब्द - प्रेम, में निहित है। क्योंकि हम मसीह - जो प्रेम का प्रतिरूप है, "में हैं" इसलिये हम परमेश्वर और मनुष्य, दोनों के साथ शांति और मेल मिलाप का आनन्द ले सकते हैं - किसी नियम के कारण नहीं, परन्तु प्रेम में होने के कारण। - जूली एकरमैन लिंक


संसार की सबसे शक्तिशाली सामर्थ किसी नियम की मजबूरी नहीं वरन प्रेम की अनुकम्पा है।

प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है। - रोमियों १३:१०

बाइबल पाठ: रोमियों १३:१-१०
हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे, क्‍योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं।
इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्‍ड पाएंगे।
क्‍योंकि हाकिम अच्‍छे काम के नहीं, परन्‍तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं, सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्‍छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी।
क्‍योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्‍तु यदि तू बुराई करे, तो डर, क्‍योकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्‍ड दे।
इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्‍तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है।
इसलिये कर भी दो, क्‍योंकि वे परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं।
इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो, जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो, जिस से डरना चाहिए, उस से डरो, जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।।
आपस के प्रेम को छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो, क्‍योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है।
क्‍योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना, चोरी न करना, लालच न करना, और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।
प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ८७, ८८
  • रोमियों १३

गुरुवार, 12 अगस्त 2010

वह पर्याप्त है

कभी कभी हम जीवन की कुछ बातों से हताश और उदास हो जाते हैं, जैसे, किसी न किसी कारण चढ़ते रहने वाल कर्ज़, निराशाएं, बीमारीयां, लोगों से मनमुटाव आदि। ऐसा प्रभु यीशु के चेलों के साथ हुआ और मेरे साथ भी हुआ।

ऐसे में, इन परिस्थितियों पर जयवन्त होने के लिये, प्रभु यीशु विभिन्न तरीकों से हमें आश्वासन देता है। मत्ती रचित सुसमाचार के चौथे अध्याय में तीन बार प्रभु यीशु शैतान द्वारा उसपर लाई गई परीक्षाओं पर यह कह कर विजयी हुआ, (परमेश्वर के वचन के संदर्भ में) कि "लिखा है..." (पद ४, ७, १०)। प्रभु यीशु ने इस प्रकार हमें प्रमाण दिया कि परमेश्वर का वचन खरा है और हर प्रकार की परीक्षा पर जयवन्त करने में सक्षम है।

गरजते तूफान और उफनते समुद्र को शांत करके (मत्ती १४:२७) प्रभु यीशु ने भयभीत चेलों को दिखाया कि उसकी उपस्थिति उन पर आने वाले परेशानी के हर तूफान को रोकने के लिये काफी है।

क्रूस पर से यह कह कर कि "पूरा हुआ" (यूहन्ना १९:३०) प्रभु यीशु ने आशव्स्त किया कि उसकी मृत्यु हमारे पापों की कीमत चुका कर हमें पाप की गुलामी से आज़ाद करने के लिये पर्याप्त है।

हमारी कोई भी परिस्थिति हो, प्रभु यीशु अपने प्रेम, अनुकंपा और अनुग्रह के साथ, सर्वदा हमारे साथ बना रहता है। जीवन की हर परिस्थिति के पार ले जाने के लिये, हमारे साथ सदा बनी रहने वाली उसकी उपस्थिति पर्याप्त है। - डेव एगनर


परमेश्वर का प्रेम हमें परीक्षाओं में पड़ने से नहीं बचाता, वरन उन में से जयवन्त होकर निकलने में हमारी सहायता करता है।

बाइबल पाठ: मत्ती १४:२२-३३
और उस ने तुरन्‍त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढ़ाया, कि वे उस से पहिले पार चले जाएं, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
वह लोगों को विदा कर के, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया, और सांझ को वहां अकेला था।
उस समय नाव झील के बीच लहरों से डगमगा रही थी, क्‍योंकि हवा साम्हने की थी।
और वह रात के चौथे पहर झील पर चलते हुए उन के पास आया।
चेले उस को झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए! और कहने लगे, वह भूत है; और डर के मारे चिल्ला उठे।
यीशु ने तुरन्‍त उन से बातें की, और कहा, ढाढ़स बान्‍धो, मैं हूं; डरो मत।
पतरस ने उस को उत्तर दिया, हे प्रभु, यदि तू ही है, तो मुझे अपने पास पानी पर चल कर आने की आज्ञा दे।
उस ने कहा, आ: तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा।
पर हवा को देखकर डर गया, और जब डूबने लगा, तो चिल्लाकर कहा हे प्रभु, मुझे बचा।
यीशु ने तुरन्‍त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उस से कहा, हे अल्प-विश्वासी, तू ने क्‍यों सन्‍देह किया?
जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई।
इस पर जो नाव पर थे, उन्‍होंने उसे दण्‍डवत कर के कहा, सचमुच तू परमेश्वर का पुत्र है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ८४-८६
  • रोमियों १२