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शनिवार, 4 सितंबर 2010

अद्भुत चिन्ह

महान वैज्ञानिक और भौतिकशास्त्री एलबर्ट आईन्स्टीन से पूछा गया कि क्या वह परमेश्वर पर विश्वास करता है? उसने उत्तर दिया, "हम उस छोटे बालक के समान हैं जो अनेक भाषाओं में लिखी गई बहुत सी पुस्तकों के एक बहुत बड़े पुस्तकालय में प्रवेश करता है। बालक इतना समझता है कि इन पुस्तकों का कोई न कोई लेखक तो होगा, लेकिन नहीं जानता कि वह कौन है और पुस्तकें कैसे लिखीं गईं। मुझे लगता है कि संसार के सबसे विद्वान व्यक्ति की परमेश्वर के प्रति प्रतिक्रीया भी ऐसी ही होगी। हम सृष्टि को अद्भुत और सुनियोजित रीति से कार्य करते देखते हैं, यह भी देखते हैं कि सारी सृष्टि कुछ नियमों का पालन कर रही है, लेकिन उन नियमों को स्पष्ट नहीं समझते।" यद्यपि आईन्स्टीन सृष्टि की अद्भुत रचना पर विस्मित रहा, किंतु उसने व्यक्तिगत सृष्टिकर्ता पर विश्वास नहीं किया।
भजनकार भी आईन्स्टीन की तरह सृष्टि की रचना से विस्मित रहा, परन्तु उसने आइन्सटीन से एक कदम आगे बढ़ाय़ा और सृष्टि के सृष्टिकर्ता पर विश्वास किया। भजनकार ने लिखा, "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।" (भजन १९:१)

सृष्टि को निहारने से जो अचंभा और रोमांच होता है, वह सृष्टिकर्ता की ओर इशारा करने वाला एक चिन्ह है। पवित्रशास्त्र हमें बताता है कि "सब कुछ उसी[प्रभु यीशु] के द्वारा उत्‍पन्न हुआ और जो कुछ उत्‍पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्‍तु उसके बिना उत्‍पन्न न हुई।" (यूहन्ना १:३)

क्या आपके मन में सृष्टिकर्ता पर सन्देह है? आज रात ऊपर निगाहें करके सितारों को देखिये, और उनके बारे में विचार कीजिए। वे आकाश में सृष्टिकर्ता की ओर इशारा करने वाले अद्भुत चिन्ह हैं। - डेनिस फिशर


सृष्टि की रचना उसको रचने वाले महान रचनाकार का प्रमाण है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन १९:१


बाइबल पाठ: भजन १९:१-६

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है, और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है।
दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है।
न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।
उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उस ने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,
जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाई अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है।
वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है, और उसकी गर्मी सबको पहुंचती है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १४३-१४५
  • १ कुरिन्थियों १४:२१-४०

शुक्रवार, 3 सितंबर 2010

जीवन यात्रा

मेरी बाइबल के अन्त के पृष्ठों में कुछ नक्शे हैं, जिनमें से एक है पौलुस द्वारा करी गई सुसमाचार प्रचार यात्राओं का। पौलुस की यात्राओं के इस नक्शे में, उसकी यात्राओं को रंगीन लकीरों द्वारा दिखाया गया है और उसकी यात्रा की दिशा को तीर के निशान द्वारा दिखाया गया है। उसकी पहली तीन यात्राओं में तीर के निशान यात्रा आरंभ करने के स्थान से दूर होते हुए फिर लौटकर उसी स्थान पर आ जाते हैं। चौथी यात्रा के लिये तीर के निशान केवल रोम की ओर ही हैं, वापस नहीं आते, क्योंकि पौलुस बन्दी बनाया जाकर रोम भेजा जा रहा था, जहां से वह फिर नहीं लौटा।

हमें लग सकता है कि पौलुस के लिये यह जीवन का दुर्भाग्य पूर्ण समय था, परन्तु पौलुस के नज़रिये से वह परमेश्वर की इच्छा और मार्गदर्शन में रोम गया और परमेश्वर ने उसे वैसे ही सुसमाचार प्रचार के लिये उपयोगी किया जैसे पहली तीन यात्राओं में किया।

पौलुस ने लिखा, " हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।" (फिलिप्पियों १:१२-१४)

चाहे हमारी जीवन यात्रा बाधाओं और बन्धनों से अवरुध भी हो, तब भी जब हम विश्वास में बने रहकर परमेश्वर के वचन का प्रचार करते हैं, तो विश्वास रखिये कि परमेश्वर हमारे इस प्रयास का उपयोग दूसरों को प्रोत्साहित करने के लिये करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी के लिये, जीवन यात्रा का घुमावदार और टेढ़ा-मेढ़ा मार्ग, वास्तव में आशीश का एक नया मार्ग हो सकता है।

हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। - फिलिप्पियों १:१२


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों १:८-१८

इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति करके तुम सब की लालसा करता हूं।
और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।
यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्‍चे बने रहो, और ठोकर न खाओ।
और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे।।
हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।
यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं।
और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।
कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से।
कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं।
और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्‍पन्न करें।
सो क्‍या हुआ केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्‍चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १४०-१४२
  • १ कुरिन्थियों १४:१-२०

गुरुवार, 2 सितंबर 2010

धैर्य और विश्वास

क्या आपने ध्यान दिया कि कभी कभी दूसरों द्वारा कोई बात भूलने के कारण आपके धैर्य की कैसी परीक्षा होती है? मैं एक कॉलेज का प्राध्यापक हूँ और कई बार जब कोई छात्र अपने वे कार्य करना भूल जाते हैं जो उनके पाठ्यक्रम में स्पष्ट लिखे हैं, तो मुझे उअनके प्रति अपने धैर्य को बनाए रखने के लिये काफी प्रयास करना पड़ता है।

पुराने नियम में यूसुफ की कहानी में हम इससे भी बुरा उदाहरण पाते हैं, और हम बस कल्पना ही कर सकते हैं कि निरपराध यूसुफ ने अपने उपर हुए अन्याय में भी धैर्य बनाए रखने के लिये कितना कष्ट उठाया होगा।

हुआ यूं कि बन्दीगृह में यूसुफ ने फिरौन (राजा) के समक्ष प्याला रखने वाले के स्वप्न का अर्थ बताया, और यूसुफ के कहे के अनुसार वह बन्दीगृह से स्वतंत्र हो गया। युसुफ ने साथ ही उससे यह निवेदन भी किया था कि, "सो जब तेरा भला हो जाए तब मुझे स्मरण करना, और मुझ पर कृपा करके, फिरौन से मेरी चर्चा चलाना, और इस घर से मुझे छुड़वा देना।" ( उत्पत्ति ४०:१४)। यह मानना स्वाभाविक है कि अपने स्वतंत्र होने के बाद, वह व्यक्ति यूसुफ को आभार सहित याद रखेगा और अवश्य उसके लिये कुछ करेगा। परन्तु ऐसा नहीं हुअ, वह भूल गया और दो वर्ष के बाद ही उसे यूसुफ की याद आई और तब उसने फिरौन से यूसुफ के बारे में बात करी (उत्पत्ति ४१:९) और फिर युसुफ बन्दीगृह से छुड़ाया गया।

बेकुसूर यूसुफ की बन्दीगृह से छुड़ाए जाने के लिये अधीरता की कल्पना कीजिये, किंतु युसुफ के साथ परमेश्वर था (उतपत्ति ३९:२१),और उसने अपना धैर्य नहीं खोया और अपनी खराई को बनाए रखा; और परमेश्वर ने यूसुफ को सही समय पर छुड़ाया जिससे वह बन्दीगृह से निकल कर सीधा फिरौन का प्रधानमंत्री बना और राजा के बाद सारे मिस्त्र देश पर उसी का नाम और अधिकार हुआ।

आज भी परमेश्वर अपने विश्वासियों और उससे प्रेम करने वालों के साथ ऐसे ही बना रहता है (इब्रानियों १३:५)। जब कभी आप परिस्थितियों के कारण विचलित होकर अधीर होने लगें तो अपने अनुग्रहकारी परमेश्वर पिता का सहारा लीजिए और वह आपकी अधीरता के स्थान पर आपको धैर्य और विश्वास से भर देगा। - डेव ब्रैनन


धैर्य का अर्थ है, बिना परमेश्वर के प्रेम पर शक किये, परमेश्वर के समय का इंतिज़ार करना।

क्‍योंकि उस[परमेश्वर] ने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों १३:५


बाइबल पाठ: उतपत्ति ४०:१-१४, २३

इन बातों के पश्चात्‌ ऐसा हुआ, कि मिस्र के राजा के पिलानेहारे और पकानेहारे ने अपने स्वामी का कुछ अपराध किया।
तब फिरौन ने अपने उन दोनों हाकिमों पर, अर्थात पिलानेहारे के प्रधान, और पकानेहारों के प्रधान पर क्रोधित होकर
उन्हें कैद करा के, जल्लादों के प्रधान के घर के उसी बन्दीगृह में, जहां यूसुफ बन्धुआ था, डलवा दिया।
तब जल्लादों के प्रधान ने उनको यूसुफ के हाथ सौपा, और वह उनकी सेवा टहल करने लगा: सो वे कुछ दिन तक बन्दीगृह में रहे।
और मिस्र के राजा का पिलानेहारा और पकानेहारा, जो बन्दीगृह में बन्द थे, उन दोनों ने एक ही रात में, अपने अपने होनहार के अनुसार, स्वप्न देखा।
बिहान को जब यूसुफ उनके पास अन्दर गया, तब उन पर उस ने जो दृष्टि की, तो क्या देखता है, कि वे उदास हैं।
सो उस ने फिरौन के उन हाकिमों से, जो उसके साथ उसके स्वामी के घर के बन्दीगृह में थे, पूछा, कि आज तुम्हारे मुंह क्यों उदास हैं ?
उन्होंने उस से कहा, हम दोनो ने स्वप्न देखा है, और उनके फल का बताने वाला कोई भी नहीं। यूसुफ ने उन से कहा, क्या स्वप्नों का फल कहना परमेश्वर का काम नहीं है? मुझे अपना अपना स्वप्न बताओ।
तब पिलानेहारों का प्रधान अपना स्वप्न यूसुफ को यों बताने लगा: कि मैं ने स्वप्न में देखा, कि मेरे साम्हने एक दाखलता है;
और उस दाखलता में तीन डालियां हैं: और उस में मानो कलियां लगीं हैं, और वे फूलीं और उसके गुच्छों में दाख लगकर पक गई।
और फिरौन का कटोरा मेरे हाथ में था: सो मै ने उन दाखों को लेकर फिरौन के कटोरे में निचोड़ा और कटोरे को फिरौन के हाथ में दिया।
यूसुफ ने उस से कहा, इसका फल यह है कि तीन डालियों का अर्थ तीन दिन है:
सो अब से तीन दिन के भीतर फिरौन तेरा सिर ऊंचा करेगा, और फिर से तेरे पद पर तुझे नियुक्त करेगा, और तू पहले की समान फिरौन का पिलानेहारा होकर उसका कटोरा उसके हाथ में फिर दिया करेगा।
सो जब तेरा भला हो जाए तब मुझे स्मरण करना, और मुझ पर कृपा करके, फिरौन से मेरी चर्चा चलाना, और इस घर से मुझे छुड़वा देना।
फिर भी पिलानेहारों के प्रधान ने यूसुफ को स्मरण न रखा, परन्तु उसे भूल गया।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १३७-१३९
  • १ कुरिन्थियों १३

बुधवार, 1 सितंबर 2010

जीवन की दौड़

सबसे पुरानी लंबी दूरी की दौड़ - The Comrades Marathon सन १९२१ में आरंभ हुई थी। यह दौड़ ९० कि.मी. (५६ मील) की दूरी की है और दक्षिणी अफ्रीका में सालाना आयोजित करी जाती है। ब्रूस फोरडिस १९८० के दशक में इस दौड़ पर छाया रहा, सन १९८१ से १९९० तक उसने ९ बार इस दौड़ को जीता। इस दैड़ को ५ घंटे २४ मिनिट और ७ सैकिंड में दौड़ने का उसके द्वारा १९८६ में स्थापित रिकार्ड २१ साल - सन २००७ तक कायम रहा। मुझे अचंभा होता है कि वह इस दौड़ को हर साल दौड़ता रहा है।

एक प्रकार से हम मसीही विश्वासी भी एक लंबी दूरी की दौड़ में भाग ले रहे हैं। जीवन की इस दौड़ को दौड़ने और भली भांति पूरा करने के लिये बहुत सहनशक्ति की आवश्यक्ता होती है। पौलुस प्रेरित ने फिलिप्पियों के विश्वासियों को अपनी पत्री में लिखा कि किस प्रकार वह "...जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है" (फिलिप्पियों ३:१३, १४)।

हमारे प्रभु यीशु ने हमें हर विपरीत परिस्थिति के बावजूद, जीवन की दौड़ को दौड़ने का उदाहरण प्रस्तुत किया; बाइबल सिखाती है कि "...विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें, जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दुख सहा...। इसलिये उस पर ध्यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया; कि तुम निराश होकर हियाव न छोड़ दो।" जैसे प्रभु यीशु अपनी दौड़ पूरी करके "... सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों १२:२, ३), वैसे ही हमें भी अपनी दौड़ भली भांति पूरी करने पर हमारा प्रतिफल मिलेगा।

जीवन की दौड़ को सफलता पूर्वक पूरा करने की कुंजी है उस परम आनन्द पर ध्यान लगाये रखना जो इस जीवन के पश्चात, अनन्त जीवन में प्रवेश करने पर, प्रभु यीशु के साथ प्रत्येक विश्वासी को मिलेगा। - सी. पी. हिया


मसीही विश्वासी के लिये की जीवन की दौड़ हारने-जीतने की प्रतियोगिता नहीं वरन प्रभु में उसकी सहनशक्ति का माप है।

निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है - फिलिप्पियों ३:१४


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ३:१२-२१

यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्‍तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्‍हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।
क्‍योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिन की चर्चा मैं ने तुम से बार बार किया है और अब भी रो रोकर कहता हूं, कि वे अपनी चालचलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं।
उन का अन्‍त विनाश है, उन का ईश्वर पेट है, वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्‍ड करते हैं, और पृथ्वी की वस्‍तुओं पर मन लगाए रहते हैं।
पर हमारा स्‍वदेश स्‍वर्ग पर है और हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं।
वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिस के द्वारा वह सब वस्‍तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १३५, १३६
  • १ कुरिन्थियों १२

मंगलवार, 31 अगस्त 2010

प्रेम के स्मृति-चिन्ह

जब १९४१ में अमेरिका दूसरे विश्वयुद्ध में उतरा तो एस्टेल ने बहुत प्रयास किया कि उसका प्रेमी सिडनी सेना में भरती न हो, परन्तु वह न माना। वह सेना में भर्ती हुआ और प्रशिक्षण लिया और युद्ध पर गया। अगले तीन वर्ष तक, युद्ध भूमि से वह एस्टेल को प्रेम पत्र लिखता रहा, उसने कुल ५२५ पत्र लिखे। मार्च १९४५ में एस्टेल को मालूम पड़ा कि उसका प्रीय मंगेतर युद्ध में मारा गया।

एस्टेल ने आखिरकर शादी तो कर ली, पर अपने पहले प्रेम की यादों को वह कभी भुली नहीं। अपने पहले प्रेम को सम्मानित करने के लिये, ६० वर्ष पश्चात उसने एक पुस्तक प्रकाशित करी - सिडनी के युद्धकालीन पत्रों के अपने संकलन की।

उन पत्रों की तरह, हमारे प्रभु ने भी हमारे प्रति अपने प्रेम के स्मृति-चिन्ह रख छोड़े हैं - उसका वचन। प्रभु कहता है:
"मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ, इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है।" - यर्मियाह ३१:३
"जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैंने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।" - युहन्ना १५:९
बाइबल हमें यह भी बताती है कि "मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया।" - इफिसियों ५:२५
"जिस [यीशु] ने अपने आप को हमारे लिये दे दिया, कि हमें हर प्रकार के अधर्म से छुड़ा ले, और शुद्ध करके अपने लिये एक ऐसी जाति बना ले जो भले भले कामों में सरगर्म हो।" - तीतुस २:१४
"...परमेश्वर प्रेम है।" - १ युहन्ना ४:८

परमेश्वर के वचन को बारंबार पढ़िये और स्मरण रखिये कि यीशु ने आपसे प्रेम किया है और आपके लिये अपनी जान दी है। - एनी सेटास


परमेश्वर का प्रेम अतुल्य है।

...परमेश्वर प्रेम है। - १ युहन्ना ४:८


बाइबल पाठ: युहन्ना १९:१-७, १६-१८

इस पर पीलातुस ने यीशु को लेकर कोड़े लगवाए।
और सिपाहियों ने कांटों का मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा, और उसे बैंजनी वस्‍त्र पहिनाया।
और उसके पास आ आकर कहने लगे, हे यहूदियों के राजा, प्रणाम! और उसे थप्‍पड़ मारे।
तब पीलातुस ने फिर बाहर निकल कर लोगों से कहा, देखो, मैं उसे तुम्हारे पास फिर बाहर लाता हूं ताकि तुम जानो कि मैं उसमें कुछ भी दोष नहीं पाता।
तब यीशु कांटों का मुकुट और बैंजनी वस्‍त्र पहिने हुए बाहर निकला और पीलातुस ने उन से कहा, देखो, यह पुरूष।
जब महायाजकों और प्यादों ने उसे देखा, तो चिल्लाकर कहा, कि उसे क्रूस पर चढ़ा, क्रूस पर : पीलातुस ने उन से कहा, तुम ही उसे लेकर क्रूस पर चढ़ाओ क्‍योंकि मैं उस में दोष नहीं पाता।
यहूदियों ने उस को उत्तर दिया, कि हमारी भी व्यवस्था है और उस व्यवस्था के अनुसार वह मारे जाने के योग्य है क्‍योंकि उस ने अपने आप को परमेश्वर का पुत्र बनाया। तब उस ने उसे उन के हाथ सौंप दिया ताकि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।।
तब वे यीशु को ले गए। और वह अपना क्रूस उठाए हुए उस स्थान तक बाहर गया, जो खोपड़ी का स्थान कहलाता है और इब्रानी में गुलगुता।
वहां उन्‍होंने उसे और उसके साथ और दो मनुष्यों को क्रूस पर चढ़ाया, एक को इधर और एक को उधर, और बीच में यीशु को।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १३५, १३६
  • १ कुरिन्थियों ११:१७-३४

सोमवार, 30 अगस्त 2010

हीरों से भी बेशकीमती

खगोल शास्त्रियों को आकाश मंडल में अपनी खोज के दौरान एक ऐसे तारे का पता लगा जो बुझ कर ठंडा हो गया , सिकुड़ कर विशालकाय हीरा बन गया था। पृथ्वी पर पाया गया सबसे बड़ा हीरा ’कलिनन हीरे’ के नाम से जाना जाता है और उसका वज़न है ३१०० कैरट, इसकी तुलना में आकाश मंडल में पाए गए उस हीरे का वज़न हज़ारों खरबों कैरट है।

हमारे संसार में हीरों की कीमत उनके अनूठेपन, सौन्दर्य और टिकाऊ होने से होती है; कहावत है कि ’हीरा सदा के लिये होता है’। किंतु परमेश्वर हीरों से आसक्त नहीं है, उसके लिये तो कुछ और ही है जिसे वह बेशकीमती मानता है।

हज़ारों साल पहले, दाउद ने अचंभा किया कि परमेश्वर ने मनुष्य जाति को इतना कीमती क्योंकर जाना? दाउद ने कहा कि "तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है" (भजन ८:४, ५)।

असलियत तो यह है कि परमेश्वर ने हमारी इतनी कीमत आंकी कि पाप और उसके दण्ड से हमारे छुटकारे के लिये उसने अपने प्रीय पुत्र मसीह यीशु को दे दिया (१ पतरस १:१८, १९)।

यदि परमेश्वर हमें इतना बहुमूल्य मानता है तो हमें भी उन लोगों को कीमती मानना चाहिये जिन्हें वह हमारे जीवनों में लेकर आता है। हमें चाहिये कि उन लोगों को हम प्रभु के समक्ष अपनी प्रार्थनाओं में लेकर आएं। परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह हमें दिखाए कि कैसे प्रत्येक मनुष्य सृष्टी के सबसे बेशकीमती हीरे से भी बहुमूल्य है। - डेनिस फिशर


यीशु के लिये हम सबसे बहुमूल्य हीरे से भी अधिक कीमती हैं।

तू ने...महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है। - भजन ८:५


बाइबल पाठ: भजन ८

हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना विभव स्वर्ग पर दिखाया है।
तू ने अपने बैरियों के कारण बच्चों और दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नेव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेने वालों को रोक रखे।
जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं,
तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?
क्योंकि तू ने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है, और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है।
तू ने उसे अपने हाथों के कार्यों पर प्रभुता दी है, तू ने उसके पांव तले सब कुछ कर दिया है।
सब भेड़-बकरी और गाय-बैल और जितने वन पशु हैं,
आकाश के पक्षी और समुद्र की मछलियां, और जितने जीव-जन्तु समुद्रों में चलते फिरते हैं।
हे यहोवा, हे हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२९-१३१
  • १ कुरिन्थियों ११:१-१६

रविवार, 29 अगस्त 2010

प्रेम की सामर्थ

एक डॉक्युमेन्टरी फिल्म "Young@Heart" (दिल से जवान) २४ गायकों के ऐसे समूह की रोचक कहानी है जिनकी औसत आयु ८० वर्ष है। इस फिल्म में उनके इस गुट के कार्यों को बड़े रोचक, विनोद से भरे और हलके फुलके अन्दाज़ में दिखाया गया है। इस फिल्म की एक मर्मस्पर्षी घटना है जब वे एक बन्दीगृह में जाकर अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं, और कार्यक्रम के अन्त में वे मंच से उतरकर उपस्थित बन्दियों के बीच में चले जाते हैं और उनके के साथ हाथ मिलाकर और उन से गले लगकर, उन अवाक कैदियों का अभिनन्दन करते हैं।

कैदी उनके इस कोमल और अप्रतिक्षित व्यवहार से प्रभावित और विस्मित हुए। यह मुझे स्पनयाह की पुस्तक स्मरण दिलाता है जहां स्पन्याह भविष्यद्वक्ता दुखः में पड़े लोगों के लिये परमेश्वर की उपस्थिति और प्रेम का सन्देश लेकर आता है - "तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुप ना रहेगा, वह फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा" (स्पन्याह ३:१७)।

बाइबल शिक्षिका हेनरीयटा मेयर्स के अनुसार, "स्पन्याह की पुस्तक का आरंभ तो दुखः के साथ, परन्तु अन्त आनन्द के गीत के साथ होता है। पुस्तक के पहले भाग में उदासी और निराशा है, किंतु अन्तिम भाग में पुराने नियम में पाये जाने वाले प्रेम के सबसे मधुर गीत हैं।"

परमेश्वर का प्रेम हमें सदा चकित करता रहता है, विशेषकर तब जब वह हमें जीवन के किसी निराशा से भरे समय में छूता है। निराशा के ऐसे समयों में परमेश्वर हमारे पास अपने आनन्द, अपने प्रेम और अपने गीत लिये हुए आता है। - डेविड मैककैसलैंड


परमेश्वर की वाटिका में हम कभी न भुलाए जाने वाले सुमन की तरह हैं।

तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुप ना रहेगा, वह फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा। - स्पन्याह ३:१७


बाइबल पाठ: स्पन्याह ३:१४-२०

हे सिय्योन, ऊंचे स्वर से गा, हे इस्राएल, जयजयकार कर! हे यरूशलेम अपने सम्पूर्ण मन से आनन्द कर, और प्रसन्न हो!
यहोवा ने तेरा दण्ड दूर कर दिया और तेरा शत्रु भी दूर किया गया है। इस्राएल का राजा यहोवा तेरे बीच में है, इसलिये तू फिर विपत्ति न भोगेगी।
उस समय यरूशलेम से यह कहा जाएगा, हे सिय्योन मत डर, तेरे हाथ ढीले न पड़ने पाएं।
तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे बीच में है, वह उद्धार करने में पराक्रमी है वह तेरे कारण आनन्द से मगन होगा, वह अपने प्रेम के मारे चुप ना रहेगा, फिर ऊंचे स्वर से गाता हुआ तेरे कारण मगन होगा।
जो लोग नियत पर्वो में सम्मिलित न होने के कारण खेदित रहते हैं, उनको मैं इकट्ठा करूंगा, क्योंकि वे तेरे हैं और उसकी नामधराई उनको बोझ जान पड़ती है।
उस समय मैं उन सभों से जो तुझे दु:ख देते हैं, उचित बर्ताव करूंगा। और मैं लंगड़ों को चंगा करूंगा, और बरबस निकाले हुओं को इकट्ठा करूंगा, और जिनकी लज्जा की चर्चा सारी पृथ्वी पर फैली है, उनकी प्रशंसा और कीर्ति सब कहीं फैलाऊंगा।
उसी समय मैं तुम्हें ले जाऊंगा, और उसी समय मैं तुम्हें इकट्ठा करूंगा, और जब मैं तुम्हारे साम्हने तुम्हारे बंधुओं को लौटा लाऊंगा, तब पृथ्वी की सारी जातियों के बीच में तुम्हारी कीर्ति और प्रशंसा फैला दूंगा, यहोवा का यही वचन है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२६-१२८
  • १ कुरिन्थियों १०:१९-३३