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बुधवार, 22 सितंबर 2010

अनन्त स्तुतिगान

मैं प्रत्येक ग्रीष्मकाल में हमारे शहर में खुले स्थानों पर आयोजित निशुल्क संगीत समूहगानों का आनन्द लेता हूँ। ऐसे ही एक समूहगान से पहले उस संगीत मंडली के सद्स्यों ने अपना अपना परिचय दिया और बताया कि एक साथ अभ्यास करना और संगीत प्रस्तुत करना उन्हें कितना अच्छा लगता है।

एक साथ जमा हो कर संगीत का आनन्द लेना सदीयों से लोगों को आकर्षित करता रहा है। मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण, चाहे हम छोटे गुट में हों या संगीत मंडली में अथवा किसी बड़े संगीत समूह में, परमेश्वर का स्तुतिगान करना हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण अंग रहा है; और एक दिन हम ऐसे समूह में साथ गाएंगे जो आज हमारी कलपना और समझ से परे है।

अन्त के समय पर होने वाली घटनाओं का प्रेरित यूहन्ना ने दर्शन पाया। यूहन्ना लिखता है उस स्तुतिगान के बारे में जो बहुत थोड़ों से आरंभ होता है और बढ़ कर अनगिनित समूह हो जाता है। परमेश्वर के मेम्ने के सम्मान में, जिसने अपने लोहू से हर जाति, कुल एवं राष्ट्र से लोगों का उद्धार किया, यह समूहगान परमेश्वर के सिंहासन के निकट से आरंभ होता है और फिर इसमें हज़ारों हज़ार स्वर्गदूत और अन्ततः समस्त सृष्टि का हर प्राणी सम्मिलित हो जाता है - "फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे" (प्रकाशितवाक्य ५:१३)।

क्या खूब समूह है! क्या खूब स्तुति का समूहगान है! क्या खूब यह सौभाग्य कि हम अभी से इसमें भाग लेने का अभ्यास कर सकते हैं! - डेविड मैक्कैसलैंड


जो अब मसीह को जानते हैं वे सदा उसकी स्तुति गाते रहेंगे।

फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे। - प्रकाशितवाक्य ५:१३


बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य ५:८-१४

और जब उस ने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थनाएं हैं।
और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है क्‍योंकि तू ने वध होकर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।
और उन्‍हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।
और जब मै ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों की चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्‍द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी।
और वे ऊंचे शब्‍द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।
फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे।
और चारों प्राणियों ने आमीन कहा, और प्राचीनों ने गिर कर दण्‍डवत किया।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक १०-१२
  • गलतियों १

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

पाखण्ड

जैसे जैसे मैं प्रभु यीशु के जीवन का अध्ययन करता हूँ, मुझे विस्मय होता है कि जिन लोगों से वह सबसे अधिक क्रुद्ध हुआ, वे बाहरी रूप से उस से मेल खाने वाले लोग थे। प्रभु यीशु ने मूसा की व्यवस्था का पूरी रीति से पालन किया, कुछ फरीसियों की शिक्षाओं को भी उद्ध्वत किया (मरकुस ९:११, १२; १२:२८-३४)। फिर भी उसने फरीसियों को ही सबसे अधिक डांटा। उसने उन्हें ’सांपों’, ’करैत के बच्चों’, ’मूर्खों’ और ’कपटी’ कहा।

उन में ऐसा क्या था जिसने प्रभु यीशु को उन्हें ऐसा कहने को उकसाया?

फरीसी परमेश्वर के लिये जीवन जीने को समर्पित होते थे; वे, व्यवस्था के अनुसार, अपनी आमदनी का दसवां भाग पूरी खराई से मन्दिर में देते थे (मती २३:२३); व्यवस्था की हर बात का पालन वैधानिक रीति से करते थे; अन्य लोगों में प्रचार करने के लिये सेवकों को भेजते थे कि उन्हें अपने साथ मिला सकें (मती २३:१५); वे अपने समय के ’खुली’ विचारधारा वाले लोगों और नास्तिकों की अपेक्षा, पारंपरिक सिद्धांतों का पालन करते थे।

किंतु फिर भी प्रभु यीशु का उन पर किया गया भीषण दोषारोपण दिखाता है कि वह उनके वैधानिक विधिवादिता - अर्थात सच्चे और खरे मन से नहीं वरन केवल बाहरी रूप से आज्ञा पालन करना, के विषैले प्रभाव को कितनी गंभीरता से लेता था। उसे पता था कि इस वैधानिक विधिवादिता के खतरे अप्रत्यक्ष लेकिन बहुत खतरनाक होते हैं, उन्हें परोक्ष में देखना सदा संभव नहीं होता। मेरा मानना है कि यही खतरे आज हमारे लिये भी गंभीर समस्या हैं।

प्रभु यीशु ने भीतरी के बजाए बाहरी पर उनके द्वारा दिये गए ज़ोर की निन्दा की - "हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्‍तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं" (मती२३:२५)। पाखण्ड उन के जीवनों में भरा था, और उन्होंने परमेश्वर के प्रेम को प्रगट करने वाली उसकी व्यवस्था को अपनी स्वार्थसिद्धी का आधार, निज कमाई का साधन और लोगों को प्रभावित करने का ज़रिया बना लिया था - सब कुछ धर्म और परमेश्वर ही के नाम पर। यही प्रभु यीशु को नागवार गुज़रता था, और वह नहीं चाहता था कि ऐसी कोई बात उसके चेलों में कभी पाई जाए।

आपकी आत्मिक परिपक्वता का प्रमाण इसमें नहीं है कि आप संसार के समक्ष अपने आप को कितना "पवित्र और शुद्ध" दिखाते हैं, वरन इसमें है कि आप स्वयं अपनी खामियों को कितना पहचानते हैं, मानते हैं और उनके लिये कितने पश्चातापी हैं। आपका यही बोध और उन खामियों का अंगीकार, परमेश्वर की कृपा और अनुग्रह के द्वार आपके लिये खोल देता है। - फिलिप यैन्सी


पाखण्ड परमेश्वर से हमारे प्रेममय सबंध को नाश कर देता है।

हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय... तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों, अर्थात न्याय और दया और विश्वास को छोड़ दिया है। - मती २३:२३


बाइबल पाठ: मत्ती २३:१-१५

तब यीशु ने भीड़ से और अपने चेलों से कहा।
शास्त्री और फरीसी मूसा की गद्दी पर बैठे हैं।
इसलिये वे तुम से जो कुछ कहें वह करना, और मानना परन्‍तु उन के से काम मत करना क्‍योंकि वे कहते तो हैं पर करते नहीं।
वे एक ऐसे भारी बोझ को जिस को उठाना कठिन है, बान्‍धकर उन्‍हें मनुष्यों के कन्‍धों पर रखते हैं, परन्‍तु आप उन्‍हें अपनी उंगली से भी सरकाना नहीं चाहते ।
वे अपने सब काम लोगों को दिखाने के लिये करते हैं: वे अपने तावीजों को चौड़े करते, और अपने वस्‍त्रों की कोरें बढ़ाते हैं।
जेवनारों में मुख्य मुख्य जगहें, और सभा में मुख्य मुख्य आसन।
और बाजारों में नमस्‍कार और मनुष्य में रब्‍बी [गुरू] कहलाना उन्‍हें भाता है।
परन्‍तु, तुम रब्‍बी न कहलाना, क्योंकि तुम्हारा एक ही गुरू है: और तुम सब भाई हो।
और पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, कयोंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्‍वर्ग में है।
और स्‍वामी भी न कहलाना, क्‍योंकि तुम्हारा एक ही स्‍वामी है, अर्थात मसीह।
जो तुम में बड़ा हो, वह तुम्हारा सेवक बने।
जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा: और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।
हे कपटी शास्‍त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय!
तुम मनुष्यों के विरोध में स्‍वर्ग के राज्य का द्वार बन्‍द करते हो, न तो आप ही उस में प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करने वालों को प्रवेश करने देते हो।
हे कपटी शास्‍त्रियों और फरीसियों तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है, तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक ७-९
  • २ कुरिन्थियों १३

सोमवार, 20 सितंबर 2010

विश्वास के अनजाने, अनपहचाने योद्धा

अपने लड़कपन के समय अक्सर, ग्रीष्म कल की अपनी छुट्टियों में से कुछ समय मैं अपने दादा-दादी के साथ बिताती थी। कई बार दोपहर को घर के पीछे के आंगन में टंगे झूले में लेट कर दादा के पुस्तक संग्रह में से पुस्तकें पढ़ती थी। उनमें से एक पुस्तक जो मैंने पढ़ी वह थी Foxe's Book of Martyrs - जो मसीही विश्वास के लिये शहीद हुए विश्वासियों की जीवन गाथाओं का संकलन था। मेरी छोटी उम्र के हिसाब से यह गंभीर और गहन अध्ययन की पुस्तक थी, परन्तु मैं उसमें दिये मसीही विश्वासियों के विश्वास की परीक्षा के वृतांत में पूरी तरह मग्न हो जाती थी - कैसे उन्हें अपने विश्वास से पीछे हटने को मजबूर करने के लिये सताया जाता था और उनके इन्कार करने पर उन्हें कैसी दर्दनाक और भयनाक मृत्यु से होकर जाना पड़ता था।

इब्रानियों की पत्री के ११वें अध्याय में भी ऐसी ही कुछ विश्वासियों के बारे में लिखा है, जिन्होंने परमेश्वर के प्रति असीम विश्वास प्रदर्शित किया। क्लेशों, परीक्षाओं और भारी सताव से निकलने वालों की सूचि में कुछ जाने-पहचाने नामों के बाद वर्णन आता है कई अनाम लोगों का जिन्हें लेखक सिर्फ "कितने’ और "कई और" करके संबोधित करता है (पद ३५, ३६)। यद्यपि उनके नाम तो नहीं दिये गए हैं परन्तु पद ३८ उन्हें यह कह कर श्रद्धांजलि देता है कि "संसार उन के योग्य न था" - यीशु के लिये उन्होंने साहसपूर्वक मृत्यु को गले लगा लिया।

आज भी हम सारे संसार में अपने विश्वास के लिये सताये जाने वाले मसीही विश्वासियों के बारे में सुनते हैं, किंतु हम में से बहुतेरे अभी इस हद तक परखे नहीं गए हैं। मैं अपने विश्वास के बारे में सोचती हूं कि ऐसे सताव, परीक्षा और मृत्यु के जोखिम में क्या मैं विश्वास में स्थिर रह पाउंगी? मैं चाहती हूं कि यदि मुझे इन परिस्थितियों से होकर निकलना पड़े तो मेरा रवैया पौलुस के समान हो जिसने कहा यद्यपि बन्धन और क्लेश मेरा इन्तज़ार कर रहे हैं तौभी मैं अपनी सेवकाई को आनन्द सहित पूरी करूं (प्रेरितों २०:२३, २४)।

क्या हम अपने जीवन को मसीह में ऐसे स्थिर विश्वास से जी रहे हैं? - सिंडी हैस कैस्पर


सताव में भी आनन्दित रहने के लिये यीशु को अपने आनन्द का आधार बनाओ।

धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। आनन्‍दित और मगन होना क्‍योंकि तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्‍होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था। - मत्ती ५:१०, ११


बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:३२-४०

अब और क्‍या कहूँ क्‍योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते, धर्म के काम किए, प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तुएं प्राप्‍त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
आग ही ज्‍वाला को ठंडा किया, तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए, लड़ाई में वीर निकले, विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया, कितने तो मार खाते खाते मर गए और छुटकारा न चाहा इसलिये कि उत्तम पुनरूत्थान के भागी हों।
कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने, और कोड़े खाने, वरन बान्‍धे जाने, और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
पत्थरवाह किए गए, आरे से चीरे गए, उन की परीक्षा की गई, तलवार से मारे गए, वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
संसार उन के योग्य न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्‍छी गवाही दी गई, तोभी उन्‍हें प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तु न मिली।
क्‍योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचें।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक ४-६
  • २ कुरिन्थियों १२

रविवार, 19 सितंबर 2010

और बेहतर योजना

हाल ही में हमारा परिवर एक रिश्तेदार से मिलने पेन्सिल्वेनिया प्रदेश के ईरी इलाके में गया। वहां पर हमें एक सामुदायिक तैराकी स्थल पर तैराकी करने का अवसर मिला। इसमें हमें बहुत मज़ा आया, लेकिन हमारे मेज़बान की इच्छा थी कि हम वहां से निकल कर ईरी झील के किनारे चलें और झील के तट की बालु, लहरों की अटखेलियां तथा झील में डूबते सूर्य की छटा का आनन्द लें। मेरे बच्चों ने इसका इसका विरोध किया क्योंकि वे तैरने के मज़े को छोड़ना नहीं चाहते थे। मुझे उन्हें समझाना पड़ा कि झील तट पर जाना इससे कहीं अच्छी और मज़ेदार योजना है।

मेरा मानना है कि प्रभु यीशु भी शमौन पतरस को समझाना चाहते थे कि उसके लिये उनकी योजना कहीं उत्तम है - वह मछलियों का नहीं, मनुष्यों का ’मछुआरा’ होगा (लूका ५:१०)। यीशु ने पतरस से कहा कि गहरे पानी में चलकर जाल डाले। जब प्रभु ने उससे यह कहा, तब पतरस सारी रात के असफल प्रयासों के बाद खाली हाथ लौटा ही था, फिर भी उसने आज्ञा मनी और कहा "हे स्‍वामी, हम ने सारी रात मेहनत की और कुछ न पकड़ा, तौभी तेरे कहने से जाल डालूंगा। जब उन्‍होंने ऐसा किया, तो बहुत मछिलयां घेर लाए, और उन के जाल फटने लगे" (लूका ५:५, ६)। इस चमत्कार से प्रभावित होकर वह प्रभु के सामने भय और श्रद्धा के साथ झुक गया, और प्रभु ने उससे कहा कि वह चाहता है कि अब से पतरस मनुष्यों का ’मछुआरा’ बने। पतरस अपना सब कुछ छोड़ कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिया।

हमारे लिये परमेश्वर की बेहतर योजना चाहे हमारी जीविका छोड़ने की ना हो, परन्तु हमारे लिये उसकी योजना में सम्मिलित है कि हम अपने समय, संसाधन और जीविका का उपयोग दूसरों को परमेश्वर के राज्य में लाने के लिये करें। - मार्विन विलियम्स


जिस अगले व्यक्ति से आप मिलें, उसे प्रभु यीशु से मिलने की बड़ी ज़रूरत हो सकती है।

तब यीशु ने शमौन से कहा, मत डर: अब से तू मनुष्यों को जीवता पकड़ा करेगा। - लूका ५:१०


बाइबल पाठ: लूका ५:१-११

जब भीड़ उस पर गिरी पड़ती थी, और परमेश्वर का वचन सुनती थी, और वह गन्नेसरत की झील के किनारे पर खड़ा था, तो ऐसा हुआ।
कि उस ने झील के किनारे दो नावें लगी हुई देखीं, और मछुवे उन पर से उतर कर जाल धो रहे थे।
उन नावों में से एक पर जो शमौन की थी, चढ़ कर, उस ने उस से बिनती की, कि किनारे से थोड़ा हटा ले चले, तब वह बैठ कर लोगों को नाव पर से उपदेश देने लगा।
जब वे बातें कर चुका, तो शमौन से कहा, गहिरे में ले चल, और मछिलयां पकड़ने के लिये अपने जाल डालो।
शमौन ने उसको उत्तर दिया, कि हे स्‍वामी, हम ने सारी रात मेहनत की और कुछ न पकड़ा, तौभी तेरे कहने से जाल डालूंगा।
जब उन्‍होंने ऐसा किया, तो बहुत मछिलयां घेर लाए, और उन के जाल फटने लगे।
इस पर उन्‍होंने अपने साथियों को जो दूसरी नाव पर थे, संकेत किया, कि आकर हमारी सहायता करो: और उन्‍होंने आकर, दोनो नाव यहां तक भर लीं कि वे डूबने लगीं।
यह देखकर शमौन पतरस यीशु के पांवों पर गिरा, और कहा हे प्रभु, मेरे पास से जा, क्‍योंकि मैं पापी मनुष्य हूं।
क्‍योंकि इतनी मछिलयों के पकड़े जाने से उसे और उसके साथियों को बहुत अचम्भा हुआ।
और वैसे ही जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना को भी, जो शमौन के सहभागी थे, अचम्भा हुआ: तब यीशु ने शमौन से कहा, मत डर: अब से तू मनुष्यों को जीवता पकड़ा करेगा।
और व नावों को किनारे पर ले आए और सब कुछ छोड़ कर उसके पीछे हो लिए।

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक १-३
  • २ कुरिन्थियों ११:१६-३३

शनिवार, 18 सितंबर 2010

दृष्टिकोण

लगता है कि संसार में दो तरह के लोग रहते हैं - एक वे जिनका दृष्टिकोण अनन्त के लिये है और दूसरे वे जो वर्तमान के लिये व्यस्त रहते हैं।

एक शाशवत पर मन लगाते हैं, दूसरे क्षणिक पर। एक स्वर्ग में धन एकत्रित करते हैं, दूसरे इस धरती पर। एक समस्याओं भरे वैवाहिक जीवन को भी निभा लेते हैं इस विश्वास से कि इससे आगे भी कुछ है, दूसरे समस्याओं में नए जीवन साथी ढूंढने लगते हैं यह मान कर कि जो है वो यहीं है। एक दरिद्रता, भूख, अपमान और लज्जा इसलिये सह लेते हैं "क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं" (रोमियों ८:१८), दूसरे इस उद्देश्य से जीवन जीते हैं कि धनी और प्रसिद्ध होना ही सुखी होना है।

सब दृष्टिकोण की बात है।

इब्राहिम का दृष्टिकोण परलोक का था; इसी लिये वह यरदन नदी की तराई का उपजाऊ और भली भांति सींचा हुआ भूभाग बड़ी सहजता से अपने भतीजे लूत के लिये छोड़ सका (उत्पति १३)। वह जानता था कि भविष्य में परमेश्वर ने उसके लिये कुछ इससे भी उत्तम रख छोड़ा है। और ऐसा ही हुआ, परमेश्वर ने उससे कहा कि वह अपने चारों ओर दृष्टि करे, जहां तक भी उसकी निगाह जाती है, वह सारी भूमि उसकी और उसके वंश की होगी और उसके वंशज धूल के किनकों के समान अनगिनत होंगे (पद १६)।

यह ऐसा दृष्टिकोण है जिसे आज बहुतेरे समझ नहीं पाते। वे तो अपनी सारी युक्ति और सामर्थ से बस वर्तमान के लिये ही जीते हैं, यहीं सब कुछ पाना चाहते हैं। पर परमेश्वर के लोग कुछ और ही दृष्टिकोण रखते हैं - वे जानते हैं कि भविष्य में परमेश्वर ने उनके लिये कुछ और भी उतम रख छोड़ा है - "परन्‍तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखीं, और कान ने नहीं सुनीं, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ी, वे ही हैं जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं" (१ कुरिन्थियों २:९)। - डेविड रोपर


जो प्रभु यीशु मसीह के लिये जीवन जीते हैं, वे अनन्तता के लिये जीवन जीते हैं।

क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्‍लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं। - रोमियों ८:१८


बाइबल पाठ: उत्पति १३:१०-१८

तब लूत ने आंख उठा कर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा, कि वह सब सिंची हुई है।
तब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की वाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।
अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा, और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया।
सदोम के लोग यहोवा के लेखे में बड़े दुष्ट और पापी थे।
जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात यहोवा ने अब्राम से कहा, आंख उठा कर जिस स्थान पर तू है वहां से उत्तर-दक्खिन, पूर्व-पश्चिम, चारों ओर दृष्टि कर।
क्योंकि जितनी भूमि तुझे दिखाई देती है, उस सब को मैं तुझे और तेरे वंश को युग युग के लिये दूंगा।
और मैं तेरे वंश को पृथ्वी की धूल के किनकों की नाईं बहुत करूंगा, यहां तक कि जो कोई पृथ्वी की धूल के किनकों को गिन सकेगा वही तेरा वंश भी गिन सकेगा।
उठ, इस देश की लम्बाई और चौड़ाई में चल फिर क्योंकि मैं उसे तुझी को दूंगा।
इसके पशचात अब्राम अपना तम्बू उखाड़ कर, माम्रे के बांज वृक्षों के बीच जो हेब्रोन में थे जा कर रहने लगा, और वहां भी यहोवा की एक वेदी बनाई।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन ३०, ३१
  • २ कुरिन्थियों ११:१-१५

शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

सोच-विचार करने वाले

डेविड मैक्कल्लो द्वारा लिखित अमेरिका के संस्थापकों और आरंभिक राष्ट्रपतियों में से एक, जौन एडम्स, की जीवनी में उन्हें "दोनो, एक धर्मपरायण मसीही विश्वासी तथा स्वतंत्र विचारक, और जिनमें दोनो गुणों से कोई अन्तःकलह न हो" कहा गया है। मुझे इस राय ने विचिलित किया, क्योंकि इसमें इस बात पर आश्चर्य निहित है कि एक मसीही विश्वासी में ये दोनो गुण एक साथ हैं। साधारण्तः लोग मसीही विश्वासी को सीधा-सादा और बिना सोच-समझ वाला समझते हैं। लोगों के लिये सोच-विचार करने वाला मसीही विश्वासी होना संभव नहीं है।

यह बिलकुल निराधार और गलत धारणा है। उद्धार का एक बड़ा लाभ है कि उस के कारण विश्वासी के मन में परमेश्वर की शांति रहती है (फिलिप्पियों ४:७), जिससे जीवन की हर बात का वह स्पष्ट विचार, विवेकशीलता और समझ-बूझ के साथ विशलेषण कर सकता है। पौलुस ने इसका वर्णन कुरिन्थुस के विश्वासियों को लिखी अपनी दूसरी पत्री में किया। उसने उन्हें स्मरण दिलाया कि मसीह में हमें क्षम्ता मिली है कि "हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं, और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं।" (२ कुरिन्थियों १०:५)

किसी तर्क का बुद्धिमानी से विशलेषण करना, परमेश्वर के ज्ञान को स्पष्टता से समझ लेना और अपने मन को मसीह के मन के अनुरूप ढाल लेना बहुत मूल्यवान कौशल हैं, ऐसे संसार में जीने के लिये जहां भले बुरे की पहचान रखना कठिन रहता है। ये कौशल हमें मसीह का प्रतिनिधी होकर रहने के योग्य भी करते हैं।

प्रत्येक मसीही विश्वासी को सोच-विचार करने वाला होना चाहिये - क्या आप हैं? - बिल क्राउडर


विश्वास करना, कभी भी बुद्धिमता एवं विचारशीलता को अनुपयोगी करना नहीं है।

सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं, और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं। - २ कुरिन्थियों १०:५


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १०:१-११

मैं वही पौलुस जो तुम्हारे साम्हने दीन हूं, परन्‍तु पीठ पीछे तुम्हारी ओर साहस करता हूं, तुम को मसीह की नम्रता, और कोमलता के कारण समझाता हूं।
मैं यह बिनती करता हूं, कि तुम्हारे साम्हने मुझे निर्भय होकर साहस करना न पड़े जैसा मैं कितनों पर जो हम को शरीर के अनुसार चलने वाले समझते हैं, वीरता दिखाने का विचार करता हूं।
क्‍योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तौभी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते।
क्‍योकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।
सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहिचान के विरोध में उठती है, खण्‍डन करते हैं, और हर एक भावना को कैद करके मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं।
और तैयार रहते हैं कि जब तुम्हारा आज्ञा मानना पूरा हो जाए, तो हर एक प्रकार के आज्ञा न मानने का पलटा लें।
तुम इन्‍हीं बातों को दखते हो, जो आंखों के साम्हने हैं, यदि किसी का अपने पर यह भरोसा हो, कि मैं मसीह का हूं, तो वह यह भी जान ले, कि जैसा वह मसीह का है, वैसे ही हम भी हैं।
क्‍योंकि यदि मैं उस अधिकार के विषय में और भी घमण्‍ड दिखाऊं, जो प्रभु ने तुम्हारे बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये हमें दिया है, तो लज्ज़ित न हूंगा।
यह मैं इसलिये कहता हूं, कि पत्रियों के द्वारा तुम्हें डराने वाला न ठहरूं।
क्‍योंकि कहते हें, कि उस की पत्रियां तो गम्भीर और प्रभावशाली हैं, परन्‍तु जब देखते हैं, तो वह देह का निर्बल और वक्तव्य में हल्का जान पड़ता है।
सो जो ऐसा कहता है, कि समझ रखे, कि जैसे पीठ पीछे पत्रियों में हमारे वचन हैं, वैसे ही तुम्हारे साम्हने हमारे काम भी होंगे।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन २७-२९
  • २ कुरिन्थियों १०

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

गुमनामी में कही बातें

कहावत है कि कायर ही गुमनामी के पीछे छिप कर अपनी बात कहते या करते हैं। गुमनाम लोगों द्वारा जो मुझे पत्र और टिप्पणियां भेजी जाती हैं और जो बातें वे लिखते हैं, उनके आधार पर मुझे यह कहावत काफी सत्य प्रतीत होती है। लोग गुमनामी या झूठी पहचान के पीछे छिप कर दूसरों पर तीव्र आघात और दोषारोपण करने की स्वतंत्रता महसूस करते हैं। गुमनामी उन्हें बिना अपनी कही बातों की ज़िम्मेदारी लिये, कटु होने का अवसर देती है।

जब कभी मुझे प्रलोभन होता है कि मैं किसी बात पर गुमनामी से लिखुं, क्योंकि मैं अपने नाम को अपनी उस बात के साथ जोड़ना नहीं चाहती, तो मैं ठहर कर उस बात पर पुनः विचार करती हूँ। यदि मैं अपने नाम को किसी बात के साथ जुड़ा हुआ नहीं देखना चाहती तो उस बात को कहना मेरे लिये अनुचित होगा; ऐसे में मैं फिर दो में से कोई एक बात करती हूँ - या तो मैं उस बात को छोड़ देती हूँ, या उसे ऐसे तरीके से कहती हूँ कि वह बात चोट पहुँचाने की बजाए उभारने और सहायता करने वाली बात हो जाए।

इफिसियों की पत्री के अनुसार हमारे शब्दों द्वारा दूसरों की उन्नति हो और उन्हें अनुग्रह पहुँचे (इफिसियों ४:२९)। यदि मैं बात कहने के लिये अपने नाम का प्रयोग नहीं करना चाहती, तो प्रगट है कि संभवतः बात का उद्देश्य चोट पहुँचाना है न कि उभारना।

आप को जब कभी किसी को कोई बात गुमनामी में कहने का प्रलोभन हो - चाहे अपने परिवार के सदस्य या सहकर्मी या अपने पास्टर से, तो थोड़ा रुक कर सोचिये कि आप अपनी बात के साथ अपना नाम क्यों नहीं जोड़ना चाहते? और यदि आप ही अपने नाम को अपनी बात के साथ नहीं जोड़ना चाहते तो फिर भला परमेश्वर क्यों चाहेगा कि ऐसी किसी भी बात के साथ उसका नाम जोड़ा जाये?

परमेश्वर अनुग्रहकारी, सहनशील और विलंब से क्रोध करने वाला है (निर्गमन ३४:६) और चाहता है कि उसके लोग भी ऐसे ही हों। - जूली ऐकरमैन लिंक


चोट पहुंचाने वाले शब्दों को कहने के लिये गुमनामी के पीछे छुपना का कायरों का काम है।

बुद्धिमान के वचनों के कारण अनुग्रह होता है - सभोपदेशक १०:१२


बाइबल पाठ: इफिसियों ४:२५-३२

इस कारण झूठ बोलना छोड़ कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
और न शैतान को अवसर दो।
चोरी करने वाला फिर चोरी न करे वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्र्म करे, इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल:
  • नीतिवचन २५, २६
  • २ कुरिन्थियों ९