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Tuesday, January 31, 2012

साथ

   चन्द्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों पर बनी एक लघु फिल्म In the Shadow of the Moon में १९७२ में चांद पर भेजे गए अपोलो १६ यान के यात्री चार्ली ड्यूक की कहानी भी है। चार्ली और उसके साथ एक और अंतरिक्ष यात्री को चांद की सतह पर उतारा गया और वे तीन दिन तक वहां से चांद की चट्टानें एकत्रित करते रहे और प्रयोग करते रहे, फिर सुरक्षित वापस पृथ्वी पर लौट आए।

   बाद में चार्ली का आत्मिक परिवर्तन हुआ। चार्ली ने बताया कि एक मित्र ने उसे एक बाइबल अध्ययन में आमंत्रित किया; उस सभा के बाद चार्ली ने प्रभु यीशु से प्रार्थना करी, "मैं अपना जीवन आप को सौंपता हूं, यदि आप वास्तविक हैं तो मेरे जीवन में आईए।" इस प्रार्थना के बाद चार्ली ने एक अद्भुत शांति अपने अन्दर महसूस करी। यह अनुभव इतना गहरा और गंभीर था कि चार्ली अपने जीवन की यह घटना दूसरों के साथ बांटने लगा। अब चार्ली लोगों को बताने लगा कि "चांद पर मेरा चलना और रहना तीन दिन का ही था, और यह बहुत रोमांचकारी था; लेकिन परमेश्वर के साथ मेरा रहना और चलना अनन्तकाल का रोमांच है।"

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक और व्यक्ति के बारे में बताती है जो इस पृथ्वी पर रहते हुए भी परमेश्वर के साथ रहा और चला: "और हनोक परमेश्वर के साथ साथ चलता था; फिर वह लोप हो गया क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया" (उत्पत्ति ५:२४)। परमेश्वर के साथ हनोक का रहना और चलना इतना घनिष्ठ था कि परमेश्वर उसे सीधे ही अनन्तता में ले गया: "विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्‍योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उस ने परमेश्वर को प्रसन्न किया है" (इब्रानियों ११:५)।

   चार्ली और हनोक, दोनो ही के जीवन से हम सीख सकते हैं कि मसीही विश्वासी के लिए जीवन यात्रा कैसी भी हो, उसका और परमेश्वर का साथ अनन्तकाल का है। - डेनिस फिशर


प्रतिदिन परमेश्वर की ज्योति में चलकर अनन्तकाल के लिए अपना लक्ष्य सुनिश्चित रखिए।

और हनोक परमेश्वर के साथ साथ चलता था; फिर वह लोप हो गया क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया। - उत्पत्ति ५:२४

बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:१-६
Heb 11:1  अब विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है।
Heb 11:2  क्‍योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्‍छी गवाही दी गई।
Heb 11:3  विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्‍टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्‍तुओं से बना हो।
Heb 11:4  विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्‍योंकि परमेश्वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।
Heb 11:5  विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्‍योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उस ने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।
Heb 11:6  और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्‍योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है, और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २५-२६ 
  • मत्ती २०:१७-३४

Monday, January 30, 2012

परदे के पीछे

   पास्टर और लेखक इर्विन लुटज़र ने लिखा: "जैसे ही परदा आपके प्रवेश के लिए खुलेगा और आप उस परदे के पीछे पहुंचेंगे, उसी क्षण आप या तो मसीह यीशु द्वारा स्वागत का आनन्द अनुभव करेंगे या अपने उस विनाश की पहली झलक देखेंगे, जैसा आपने कभी कल्पना भी नहीं किया होगा। दोनो ही हाल में आपका अनन्तकालीन भविष्य निर्धारित हो चुका होगा और फिर कभी किसी हाल नहीं बदल सकेगा।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल के लूका रचित सुसमाचार में एक ऐसी ही घटना का छोटा सा ब्यान है जहां दो व्यक्ति उस परदे के पीछे, अपने अनन्तकालीन भविष्य के लिए पहुंचने वाले हैं। जब प्रभु यीशु मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया तो उनके साथ दो डाकू भी क्रूस पर चढ़ाए गए। मरकुस रचित सुसमाचार में दिए विविरण में, आरंभ में, वे दोनो ही क्रूस पर से प्रभु यीशु की निन्दा और भर्त्सना कर रहे थे (मरकुस १५:३२)।

   कुछ समय बाद, जब उन दोनो में से एक ने प्रभु यीशु की खराई और स्वयं अपनी पापमय दशा की ओर ध्यान किया, तब उस का मन बदला, और उसने दूसरे डाकू को डांटा। फिर उसने प्रभु यीशु से विनती करी कि जब वह अपने राज्य में आए तो उसकी सुधि ले। ये छोटी सी विनती उसके पश्चाताप और प्रभु यीशु में साधारण सच्चे विश्वास की सूचक थी। प्रभु यीशु ने उससे कहा, "...मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा" (लूका २३:४३)। उस पश्चातापी डाकू के लिए उद्धार तत्काल था, उसी क्षण उसका अनन्तकाल का भविष्य निरधारित हो गया। अब उसे सुनिश्चित था कि वह अनन्तकाल कहां व्यतीत करेगा - प्रभु यीशु के साथ स्वर्ग में।

   अपने पापी होने का एहसास करना और पश्चाताप के साथ प्रभु यीशु में विश्वास करके अपना जीवन उसे समर्पित कर देना निर्धारित कर देता है कि हम अनन्तकाल कहां व्यतीत करेंगे; जब हमारे लिए परदा खुलेगा और हम परदे के पीछे लिए जाएंगे, तो हम कहां पहुंचेंगे। - मार्विन विलियम्स


आज प्रभु यीशु पर विश्वास करके अपना कल सुनिश्चित कर लें।

उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा। - लूका २३:४३

बाइबल पाठ: लूका २३:३९-४३
Luk 23:39  जो कुकर्मी लटकाए गए थे, उन में से एक ने उस की निन्‍दा करके कहा; क्‍या तू मसीह नहीं तो फिर अपने आप को और हमें बचा।
Luk 23:40  इस पर दूसरे ने उसे डांटकर कहा, क्‍या तू परमेश्वर से भी नहीं डरता तू भी तो वही दण्‍ड पा रहा है।
Luk 23:41  और हम तो न्यायानुसार दण्‍ड पा रहे हैं, क्‍योंकि हम अपने कामों का ठीक फल पा रहे हैं; पर इस ने कोई अनुचित काम नहीं किया।
Luk 23:42  तब उस ने कहा, हे यीशु, जब तू अपने राज्य में आए, तो मेरी सुधि लेना।
Luk 23:43  उस ने उस से कहा, मैं तुझ से सच कहता हूं कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २३-२४ 
  • मत्ती २०:१-१६

Sunday, January 29, 2012

दौड़

   संसार में कम ही लोग हैं जो स्पिरिडौन ल्युइस को जानते हैं, किंतु ग्रीस देश में वह भली-भांति जाना जाता है। यह १८९६ में ग्रीस के एथेंस शहर में आयोजित ओलंपिक खेलों में जो हुआ था, उस के कारण है। उस वर्ष इन खेलों में ग्रीस ने अच्छा प्रदर्शन किया था और किसी भी अन्य देश के मुकाबले अधिक पदक जीते थे। किंतु ग्रीस के लिए सर्वाधिक गर्व का जो कारण रहा था वह थी उन खेलों में पहली बार सम्मिलित करी गई मैरॉथन - लंबी दूरी की दौड़। विश्व भर से १७ खिलाड़ियों ने ४० किलोमीटर (२४.८ मील) दौड़ने की इस प्रतियोगिता में भाग लिया, लेकिन जीत का सेहरा बंधा एक साधारण से मज़दूर स्पिरिडौन ल्युइस के सिर पर। उसके इस प्रयास के लिए वह ग्रीस के राजा द्वारा सम्मानित किया गया और एक राष्ट्र-नायक बन गया।

   पौलुस प्रेरित ने भी दौड़ में भाग लेने के चित्रण को मसीही जीवन की व्याख्या के लिए प्रयोग किया है। पौलुस ने अपनी पत्री १ कुरिन्थियों ९:२४ में चुनौती दी कि मसीही विश्वासी केवल दौड़ में भाग लेने वाले ही न बनें वरन जीतने के उद्देश्य से दौड़ें: "क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।" पौलुस की केवल यह कथनी ही नहीं थी, यह उसके जीवन में उसकी करनी भी थी। अपनी अन्तिम पत्री में उसने लिखा: "मैं अच्‍छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है" (२ तिमुथियुस ४:७)। अपनी इस ज़िम्मेवारी को भली भांति पूरा कर लेने के पश्चात वह जानता था कि परमेश्वर की ओर से "भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं" (२ तिमुथियुस ४:८)। परमेश्वर से मिलने वाले इस मुकुट के रोमांच से वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी अपने प्रतिफल की लालसा और आनन्द से भरा हुआ था।

   पौलुस के समान, इस पृथ्वी पर की अपनी जीवन दौड़ जीतने और अपने राजाधिराज परमेश्वर को प्रसन्न करने के उद्देश्य से दौड़ें। - बिल क्राउडर

मसीही जीवन की दौड़ थोड़ी सी दूरी की तेज़ दौड़ नहीं वरन लंबी दूरी और धैर्य की दौड़ है।

क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। - १ कुरिन्थियों ९:२४

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ९:१९-२७
1Co 9:19  क्‍योंकि सब से स्‍वतंत्र होने पर भी मैं ने अपने आप को सब का दास बना दिया है, कि अधिक लोगों को खींच लाऊं।
1Co 9:20  मैं यहूदियों के लिये यहूदी बना कि यहूदियों को खींच लाऊं, जो लोग व्यवस्था के आधीन हैं उन के लिये मैं व्यवस्था के आधीन न होने पर भी व्यवस्था के आधीन बना, कि उन्‍हें जो व्यवस्था के आधीन हैं, खींच लाऊं।
1Co 9:21  व्यवस्थाहीनों के लिये मैं (जो परमेश्वर की व्यवस्था से हीन नहीं, परन्‍तु मसीह की व्यवस्था के आधीन हूं) व्यवस्थाहीन सा बना, कि व्यवस्थाहीनों को खींच लाऊं।
1Co 9:22  मैं निर्बलों के लिये निर्बल सा बना, कि निर्बलों को खींच लाऊं, मैं सब मनुष्यों के लिये सब कुछ बना हूं, कि किसी न किसी रीति से कई एक का उद्धार कराऊं।
1Co 9:23  और मैं सब कुछ सुसमाचार के लिये करता हूं, कि औरों के साथ उसका भागी हो जाऊं।
1Co 9:24  क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।
1Co 9:25  और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्‍तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं।
1Co 9:26  इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्‍तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्‍तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।
1Co 9:27  परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन २१-२२ 
  • मत्ती १९

Saturday, January 28, 2012

संपर्क

   आज की जीवन शैली का एक मुख्य भाग ’संपर्क में रहना’ हो गया है। ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने साथ सदा अपना मोबाइल फोन, लैप्टॉप, आईपौड या अन्य कोई ऐसा उपकरण रखते हैं जिसके द्वारा वे कभी भी कहीं भी दूसरों से संपर्क में रह सकें। अब चौबीसों घंटे उपलब्ध रहना जीवन का उसूल बन गया है। कुछ मनोवैज्ञानिक इस लगातार संपर्क की लालसा को एक व्यसन के रूप में देखते हैं। लेकिन साथ ही ऐसे लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है जो संपर्क में रहने के इन उपकरणों के अपने प्रयोग को सीमित रखने के प्रयत्न में लगे हैं। वे जीवन में प्रौद्यौगिकी के बढ़ते दख़ल को बढ़ावा देने के बजाए, अपने जीवन में जानकारी और प्रौद्यौगिकी के प्रवाह को सीमित करके, अपना समय शांत रहने में व्यतीत करना चाहते हैं जिससे वे अपने मन-मस्तिष्क को आराम दे सकें।

   एक और भी संपर्क है आज जिसकी अवहेलना होती जा रही है, किंतु जिसका महत्व और जिसकी उपयोगिता संसार के आपसी संपर्क से कहीं अधिक बढ़कर है - परमेश्वर के साथ हमारा नित्यप्रायः संपर्क। मसीही विश्वासी इस बात को पहचानते हैं कि प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन और परमेश्वर के साथ प्रार्थना में बिताया गया समय न केवल उनके विश्वास के जीवन वरन प्रतिदिन के जीवन में भी में आगे बढ़ने के लिए कितना महत्व रखता है। उनका यह "शांत समय" संसार से ध्यान हटा कर परमेश्वर के साथ संपर्क साधने का समय होता है, जहां वे अपनी दिनचर्या और अपनी गतिविधियों के लिए परमेश्वर से सामर्थ और क्षमता पाते हैं। भजन २३ के दूसरे पद में भजनकार परमेश्वर द्वारा ’हरी चराईयों’ और ’सुखदायी जल के सोतों’ पर ले जाए जाने की बात करता है; यह किसी सुन्दर प्राकृतिक स्थान में ले जाए जाने की बात नहीं है। यह परमेश्वर से बने संपर्क द्वारा हमारे मन को शांत और बहाल किए जाने के स्रोतों पर जाने तथा परमेश्वर के मार्गों में चलने के बारे में है।

   हम में से प्रत्येक परमेश्वर के साथ समय बिता सकता है, लेकिन क्या हम में से प्रत्येक ऐसा करता है या करना भी चाहता है? अपनी पुस्तक "7 Minutes With God" में रौबर्ट फौस्टर इस संपर्क की साधना को आरंभ करने के लिए एक विधि सुझाते हैं: मार्गदर्शन के लिए एक छोटी सी प्रार्थना के साथ आरंभ करें, फिर कुछ मिनिट बाइबल पढ़ने और पढ़े गए पर मनन में बिताएं, और फिर कुछ समय प्रार्थना में बिताएं जिसमें परमेश्वर की आराधना, पापों का अंगीकार, परमेश्वर को धन्यवाद और दूसरों की आवश्यक्ताओं के लिए विनती सम्मिलित हो।

   परमेश्वर के साथ अपने संपर्क को जोड़िए; संसार के साथ के किसी भी संपर्क से यह कहीं अधिक अनिवार्य और अति लाभप्रद है। - डेविड मैककैसलैंड


परमेश्वर के साथ बिताया गया समय, समय का सदुपयोग है।

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; - भजन २३:२

बाइबल पाठ: भजन २३
Psa 23:1  यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।
Psa 23:2  वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है;
Psa 23:3  वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त अगुवाई करता है।
Psa 23:4  चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।
Psa 23:5  तू मेरे सताने वालों के साम्हने मेरे लिये मेज बिछाता है; तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है।
Psa 23:6  निश्चय भलाई और करूणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १९-२० 
  • मत्ती १८:२१-३५

Friday, January 27, 2012

प्रभाव

   माना जाता है कि विलियम एडम्स (१५६४-१६२०) जापान पहुंचने वाले प्रथम ब्रिटिश नागरिक थे। उनके व्यवहार से प्रसन्न होकर जापान के तत्कालीन शासक ने उन्हें अपना निज दुभाषिया और पश्चिमी ताकतों के प्रति निर्णयों के लिए अपना सलाहकार बना लिया। आगे चलकर उनकी सेवा के लिए शासक ने उन्हें दो तलवारें भेंट करीं और ’समुराई’ का दर्जा दिया, जो जापान के शासकों के अति विशिष्ट योद्धा और विश्वासपात्र होते थे। क्योंकि एडम्स ने अपने विदेशी राजा की सेवा वफादारी और भली-भांति करी, इसलिए उन्हें और अधिक प्रभावी और आदर्णीय होने के अवसर मिले।

   इससे भी सदियों पहले, एक अन्य व्यक्ति, नहेम्याह ने भी, अपने विदेशी राजा पर बहुत प्रभाव डाला था। नहेम्याह एक यहूदी था जो दास बनाकर लाए गए इस्त्राएलीयों में से था; वह फारसी राजा अर्तक्षत्र को प्याला देनेहारा नियुक्त किया गया था (नहेम्याह १:११)। राजा के दरबार में, राजा को दाखरस देने से पहले उसे पीकर जाँचना और फिर राजा को देना उसका काम था। यह जोखिम भरा भी था, क्योंकि दाखरस में कोई ज़हर भी मिला सकता था, किंतु यह राजा के विश्वासपात्र होने और उसपर प्रभाव डाल पाने की स्थिति में होने का भी प्रमाण था। नहेम्याह की ईमानदारी, प्रशासनीय कार्यकुशलता और बुद्धिमानी ने उसे राजा का विश्वासपात्र और प्रीय बना दिया था। अपने इन ही गुणों के कारण वह राजा से यरुशलेम की टूटी हुई दीवारों के पुनःर्निर्माण के लिए अनुमति और संसाधन उपलब्ध करवा सका।

   नहेम्याह ही के समान हम में से प्रत्येक को कुछ गुण और प्रभाव का क्षेत्र दिया गया है। यह बच्चों का पालन-पोषण, हमारी नौकरी की ज़िम्मेदारियां, चर्च तथा सेवकाई के कार्य आदि कुछ भी ऐसा हो सकता है जिसके द्वारा हम दूसरों पर प्रभाव डालने वाले होते हैं। यह प्रभाव भला भी हो सकता है और बुरा भी; अन्ततः परिणाम ही उस प्रभाव की व्याख्या करते हैं।

   अपने आस-पास देखिए, परमेश्वर ने आप के जीवन में किसे दिया है जिसपर आप का प्रभाव पड़ रहा है - सुनिश्चित कीजिए कि यह प्रभाव भला ही हो। - डेनिस फिशर


एक छोटा उदाहरण भी मसीह के लिए बड़ा प्रभावी हो सकता है।

राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? - नहेम्याह २:४

बाइबल पाठ: नहेम्याह २:१-९
Neh 2:1  अर्तक्षत्र राजा के बीसवें वर्ष के नीसान नाम महीने में, जब उसके साम्हने दाखमधु था, तब मैं ने दाखमधु उठाकर राजा को दिया। इस से पहिले मैं उसके साम्हने कभी उदास न हुआ था।
Neh 2:2  तब राजा ने मुझ से पूछा, तू तो रोगी नहीं है, फिर तेरा मुंह क्यों उतरा है? यह तो मन ही की उदासी होगी।
Neh 2:3  तब मैं अत्यन्त डर गया। और राजा से कहा, राजा सदा जीवित रहे ! जब वह नगर जिस में मेरे पुरखाओं की कबरें हैं, उजाड़ पड़ा है और उसके फाटक जले हुए हैं, तो मेरा मुंह क्यों न उतरे?
Neh 2:4  राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? तब मैं ने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना करके, राजा से कहा;
Neh 2:5  यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कबरों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊं।
Neh 2:6  तब राजा ने जिसके पास रानी भी बैठी थी, मुझ से पूछा, तू कितने दिन तक यात्रा में रहेगा? और कब लैटेगा? सो राजा मुझे भेजने को प्रसन्न हुआ; और मैं ने उसके लिये एक समय नियुक्त किया।
Neh 2:7  फिर मैं ने राजा से कहा, यदि राजा को भाए, तो महानद के पार के अधिपतियों के लिये इस आशय की चिट्ठियां मुझे दी जाएं कि जब तक मैं यहूदा को न पहुंचूं, तब तक वे मुझे अपने अपने देश में से होकर जाने दें।
Neh 2:8  और सरकारी जंगल के रखवाले आसाप के लिये भी इस आशय की चिट्ठी मुझे दी जाए ताकि वह मुझे भवन से लगे हुए राजगढ़ की कडिय़ों के लिये, और शहरपनाह के, और उस घर के लिये, जिस में मैं जाकर रहूंगा, लकड़ी दे। मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर थी, इसलिये राजा ने यह बिनती ग्रहण किया।
Neh 2:9  तब मैं ने महानद के पार के अधिपतियों के पास जाकर उन्हें राजा की चिट्ठियां दीं। राजा ने मेरे संग सेनापति और सवार भी भेजे थे। 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १६-१८ 
  • मत्ती १८:१-२०