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Sunday, March 31, 2019

निमंत्रण



      हाल ही के एक सप्ताह में मुझे डाक में अनेकों निमंत्रण मिले, विभिन्न प्रकार के समारोहों के लिए। उनमें से जितने मुझे ‘सेवा-निवृत्ति’, ‘घर-ज़मीन खरीदने/बेचने’, ‘जीवन-बीमा’ आदि विषयों पर होने वाली चर्चाओं में बुलाने के लिए थे, उन्हें मैंने तुरंत अलग कर दिया, वे मुझे स्वीकारीय नहीं थे। किन्तु एक निमंत्रण मेरे एक लंबे समय के दिवंगत मित्र के सम्मान में आयोजित होने वाली सभा में आने के लिए था, जिसे मैंने तुरंत स्वीकार कर लिया। निमंत्रण + इच्छा = स्वीकृति!

      परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर की ओर से सभी के लिए एक महान निमंत्रण है, “ओहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो” (यशायाह 55:1)। यह परमेश्वर की ओर से भीतरी पोषण, गहरी आत्मिक तृप्ति, और अनन्त जीवन (पद 2-3) ले लेने का निमंत्रण है। इसी निमंत्रण को प्रभु यीशु के द्वारा बाइबल के अंतिम अध्याय में भी दोहराया गया है: “...जो प्यासा हो, वह आए और जो कोई चाहे वह जीवन का जल सेंतमेंत ले” (प्रकाशितवाक्य 22:17)।

      बहुधा हम सोचते हैं कि अनन्त जीवन का आरंभ हमारे शारीरिक जीवन के अन्त के बाद आरंभ होता है। वास्तविकता यह है कि अनन्त जीवन का आरंभ हमारे द्वारा प्रभु यीशु  को अपना उद्धारकर्ता और प्रभु ग्रहण कर लेने के साथ ही आरंभ हो जाता है। प्रभु यीशु में अनन्त जीवन प्राप्त कर लेने का निमंत्रण परमेश्वर की ओर से सँसार के सभी लोगों को दिया गया सबसे महान निमंत्रण है; उसे स्वीकार अथवा अस्वीकार करना प्रत्येक व्यक्ति का अपना चुनाव है! निमंत्रण + इच्छा = स्वीकृति! – डेविड मैक्कैस्लैंड


जब हम उसके पीछे हो लेने के प्रभु यीशु के निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं, 
तो हमारे समस्त जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल जाते हैं।

प्रभु यीशु ने कहा: “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” – मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-7
Isaiah 55:1 ओहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isaiah 55:2 जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isaiah 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isaiah 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isaiah 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 11-12
  • लूका 6:1-26



Saturday, March 30, 2019

जीवन और मृत्यु



      मुझे कभी नहीं भूलेगा कि मैं अपनी सहेली के भाई की मृत्यु के समय उसकी शैया के निकट बैठी थी। वह साधारण में असाधारण के आगमन का दृश्य था। हम तीन जन शान्त होकर बातचीत कर रहे थे जब हमें एहसास हुआ कि रिचर्ड खींच-खींच कर साँस लेने लगा है। हम उसके चारों ओर जमा हो गए, उसे देखते और उसके लिए प्रार्थना करते रहे। जब उसने अपनी अंतिम साँस ली, तो लगा मानो यह एक पवित्र पल है; एक अद्भुत व्यक्ति की जवानी में ही मृत्यु हो जाने के दुःख के समय परमेश्वर की उपस्थिति ने हमें घेर लिया था।

      परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि विश्वास के कई नायकों ने मृत्यु के समय परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को अनुभव किया था। उदाहरण के लिए, याकूब ने बता दिया कि शीघ्र ही वह “अपने लोगों से जा मिलने को है” (उत्पत्ति 49-29-33)। याकूब के एक पुत्र यूसुफ ने भी होने वाली मृत्यु के बारे में बताया; उसने अपने भाईयों से कहा, “मैं तो मरने पर हूँ” और उन्हें विश्वास में दृढ़ बने रहने के लिए निर्देश दिए। वह स्वयँ तो शान्त प्रतीत होता है, परन्तु उत्सुक्त भी है कि उसके भाई प्रभु पर भरोसा बनाए रखें (उत्पत्ति 50:24)।

      हम में से कोई नहीं जानता है कि कब और कैसे हम अपनी अंतिम साँस लेंगे, परन्तु हम परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं कि हम विश्वास बनाए रखें कि हमारी अंतिम साँस के समय वह हमारे साथ होगा। हम प्रभु यीशु मसीह द्वारा अपने अनुयायियों को दिए गए वायदे पर विश्वास रख सकते हैं कि हमारे स्वर्गीय पिता के घर में उसने हमारे लिए स्थान तैयार कर दिया है (यूहन्ना 14:2-3)। -एमी बाउचर पाई


हमारा प्रभु हमें कभी नहीं त्यागेगा, विशेषकर हमारी मृत्यु के समय।

तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। - यूहन्ना 14:1-3

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 50:22-26
Genesis 50:22 और यूसुफ अपने पिता के घराने समेत मिस्र में रहता रहा, और यूसुफ एक सौ दस वर्ष जीवित रहा।
Genesis 50:23 और यूसुफ एप्रैम के परपोतों तक देखने पाया: और मनश्शे के पोते, जो माकीर के पुत्र थे, वे उत्पन्न हो कर यूसुफ से गोद में लिये गए।
Genesis 50:24 और यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा मैं तो मरने पर हूं; परन्तु परमेश्वर निश्चय तुम्हारी सुधि लेगा, और तुम्हें इस देश से निकाल कर उस देश में पहुंचा देगा, जिसके देने की उसने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से शपथ खाई थी।
Genesis 50:25 फिर यूसुफ ने इस्राएलियों से यह कहकर, कि परमेश्वर निश्चय तुम्हारी सुधि लेगा, उन को इस विषय की शपथ खिलाई, कि हम तेरी हड्डियों को वहां से उस देश में ले जाएंगे।
Genesis 50:26 निदान यूसुफ एक सौ दस वर्ष का हो कर मर गया: और उसकी लोथ में सुगन्धद्रव्य भरे गए, और वह लोथ मिस्र में एक सन्दूक में रखी गई।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 9-10
  • लूका 5:17-39



Friday, March 29, 2019

परीक्षाएँ और कठिनाईयाँ



      पिछली शरद ऋतु में मैं कोलराडो में एक प्राकृतिक संग्रहालय (Natural History Museum) गई थी, वहाँ मुझे सफ़ेद पीपल (Aspen) वृक्ष के बारे में कुछ अनूठी बातें पता चलीं। पतले सफ़ेद तनों वाले इस वृक्ष का संपूर्ण झुरमुट एक ही बीज से उत्पन्न हो सकता है, जिनकी धरती के नीचे फ़ैली हुई सभी जड़ें आपस में जुड़ी हुई होती हैं। ये जड़ें धरती के अन्दर हज़ारों वर्षों तक बनी रह सकती हैं, चाहे उन से पेड़ न भी उत्पन्न हों। वे बस धरती के अन्दर ‘सोई’ हुई रहती हैं, जब तक कि छाया देने वाले जंगल में आग, बाढ़ या भू-स्खलन के द्वारा उनके ऊपर की भूमि साफ़ नहीं हो जाती है। किसी प्राकृतिक आपदा के द्वारा जंगल की सफाई हो जाने के बाद, सफ़ेद पीपल की जड़ें किसी प्रकार से उन पर चमकते हुए सूरज को पहचान लेती हैं और उन जड़ों से अंकुर निकल कर ऊपर उठते हैं और सफ़ेद पीपल के वृक्ष बन जाते हैं।

      सफ़ेद पीपल के इन वृक्षों के लिए नयी बढ़ोतरी किसी प्राकृतिक आपदा से हुए विनाश के द्वारा संभव हो जाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा कि मसीही विश्वास में हमारी बढ़ोतरी भी कठिनाईयों और परीक्षाओं द्वारा संभव होने पाती है। याकूब कहता है, “हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे” (याकूब 1:2-4)।

      परीक्षाओं में आनन्दित होना कठिन होता है, परन्तु हम इस तथ्य से आशावान हो सकते हैं कि परमेश्वर हमारी परिस्थितियों का उपयोग हमें परिपक्वता तक ले जाने के लिए करता है। उन सफ़ेद पीपल के वृक्षों के समान, हमारा विश्वास परीक्षाओं के उन समयों में बढ़ सकता है जब कठिनाईयाँ हमारे हृदय से जंगल को हटाकर परमेश्वर की ज्योति को हमें स्पर्श करवा देती हैं। - एमी पीटर्सन


परीक्षाएं और कठिनाईयाँ हमें मसीह के और भी निकट ला सकती हैं।

मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं। - भजन 119:71

बाइबल पाठ: याकूब 1:1-12
James 1:1 परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
James 1:2 हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
James 1:3 तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है।
James 1:4 पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
James 1:5 पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है; और उसको दी जाएगी।
James 1:6 पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे; क्योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
James 1:7 ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
James 1:8 वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
James 1:9 दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
James 1:10 और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्योंकि वह घास के फूल के समान जाता रहेगा।
James 1:11 क्योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
James 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 7-8
  • लूका 5:1-16



Thursday, March 28, 2019

फल



      वायु-यान की खिड़की से दिखने वाला वह दृश्य ध्यान आकर्षित करने वाला था: दो बंजर पहाड़ों के बीच की उस वादी में पकते हुए गेहूँ के खेत और फलों के बगीचे का एक पतला सा इलाका दिखाई दे रहा था, और एक जीवन-दायी जल की नदी बह रही थी। यदि वह नदी नहीं होती तो वहाँ कोई फल भी नहीं होता।

      जैसे भरपूरी की फसल स्वच्छ जल के स्त्रोत के विद्यमान होने पर निर्भर है, उसी प्रकार मेरे मसीही जीवन, मेरे शब्दों, मेरे कार्यों, और मेरे रवैये से उत्पन्न होने वाले “फल” भी मुझ में प्रवाहित होने वाले आत्मिक ‘जल’ पर निर्भर हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा कि जो व्यक्ति परमेश्वर की व्यवस्था में मगन रहता है वह ऐसे फलवन्त होगा मानो बहती नालियों के के किनारे लगा हुआ वृक्ष हो जो अपनी ऋतु में फलदाई होता है (भजन 1:1-3)। प्रेरित पौलुस ने भी लिखा कि जो परमेश्वर की पवित्र-आत्मा के चलाए चलते हैं उनके जीवनों में आत्मा के गुणों के फल बने रहेंगे (गलातियों 5:22-23)।

      कभी-कभी मेरा दृष्टिकोण या मेरी परिस्थितियाँ अप्रिय हो जाते हैं, और तब मेरे शब्द तथा मेरे कार्य भी कठोर हो जाते हैं। मेरे जीवन से अच्छा फल नहीं आता, और मुझे एहसास होता है कि मैंने परमेश्वर और उसके वचन के साथ उपयुक्त समय नहीं बिताया है, उस जीवन-दायी जल को अपने में से प्रवाहित होकर उसे मुझे स्वच्छ और फलवन्त करने नहीं दिया है। परन्तु जब मेरे दिन की प्रत्येक गतिविधि परमेश्वर के वचन के अनुसार और उस पर आधारित हो कर होती है, तब मैं अच्छा फल लाने लगता हूँ; तब धैर्य और नम्रता मेरे व्यवहार का अंग होते हैं, और मेरे लिए कुड़कुड़ाने के स्थान पर कृतज्ञ रहना सहज रहता है।

      जिस परमेश्वर ने अपने आप को समस्त सँसार पर प्रभु यीशु मसीह में होकर प्रगट किया है वह हमारे लिए सामर्थ्य, बुद्धि, आनन्द, समझ-बूझ, और शान्ति का स्त्रोत है (भजन 119: 28, 98, 111, 144, 165)। जब हम अपने आप को प्रभु यीशु मसीह के प्रति समर्पित होकर परमेश्वर के वचन से ओत-प्रोत कर लेते हैं, तब जीवन-दायी जल के प्रभाव के समान, परमेश्वर की पवित्र-आत्मा के फल भी हमारे जीवनों से प्रगट होने लगते है। - पीटर चिन, अतिथि लेखक


परमेश्वर का आत्मा उसके लोगों में निवास करता है, जिससे उनमें होकर अपना कार्य करे।

पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:22-23

बाइबल पाठ: भजन 1
Psalms 1:1 क्या ही धन्य है वह पुरूष जो दुष्टों की युक्ति पर नहीं चलता, और न पापियों के मार्ग में खड़ा होता; और न ठट्ठा करने वालों की मण्डली में बैठता है!
Psalms 1:2 परन्तु वह तो यहोवा की व्यवस्था से प्रसन्न रहता; और उसकी व्यवस्था पर रात दिन ध्यान करता रहता है।
Psalms 1:3 वह उस वृक्ष के समान है, जो बहती नालियों के किनारे लगाया गया है। और अपनी ऋतु में फलता है, और जिसके पत्ते कभी मुरझाते नहीं। इसलिये जो कुछ वह पुरूष करे वह सफल होता है।
Psalms 1:4 दुष्ट लोग ऐसे नहीं होते, वे उस भूसी के समान होते हैं, जो पवन से उड़ाई जाती है।
Psalms 1:5 इस कारण दुष्ट लोग अदालत में स्थिर न रह सकेंगे, और न पापी धर्मियों की मण्डली में ठहरेंगे;
Psalms 1:6 क्योंकि यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है, परन्तु दुष्टों का मार्ग नाश हो जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44



Wednesday, March 27, 2019

छवि



      द्वितीय विश्वयुद्ध में इंग्लैण्ड के प्रधान-मंत्री रहे और मित्र राष्ट्रों के साथ विजय में इंग्लैण्ड का नेतृत्व करने वाले, विंस्टन चर्चिल के अस्सीवें जन्म-दिवस के अवसर पर ब्रिटिश संसद ने चित्रकार ग्राहम सदरलैंड को नियुक्त किया कि वे उस सुप्रसिद्ध राजनैतिज्ञ का एक चित्र बनाएँ। कहा जाता है कि चर्चिल ने सदरलैंड से पूछा, “मुझे चित्र में कैसा दिखाओगे; मनोहर स्वर्गदूत जैसा या बुलडॉग के समान?” चर्चिल को अपनी ये दोनों ही छवियाँ पसन्द थीं। किन्तु सदरलैंड ने उत्तर दिया कि जैसा उसे दिखाई देगा, वह वैसा ही चित्र में दिखाएंगे।

      चित्र के बन जाने पर चर्चिल को वह पसन्द नहीं आया; चित्र में चर्चिल को कुर्सी पर पसर कर बैठे दिखाया गया था, और उनके चहरे पर उनकी विख्यात चढ़ी हुई त्यौरियाँ थीं। यह चित्र वास्तविकता के समान तो था किन्तु चर्चिल को प्रशंसनीय दिखाने वाला नहीं था। उस चित्र के औपचारिक अनावरण समारोह के पश्चात उसे तहखाने में रख दिया गया, और बाद में गुप्त रूप से नष्ट कर दिया गया।

      चर्चिल के समान, हम सब के मनों में भी अपनी एक छवि होती है, जिसे हम औरों के सामने रखना चाहते हैं – चाहे वह सफलता, या भक्ति, या सुन्दरता, या शक्ति, या अन्य किसी भी गुण की हो। हम लोगों से अपने “कुरूप” स्वरूप को छिपाने के लिए बहुत प्रयास करते हैं। संभवतः हमें लगता है कि यदि हमारी वास्तविकता लोगों के समक्ष आ जाएगी तो लोग हमें पसन्द नहीं करेंगे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि जब इस्राएलियों को बाबुल में बन्दी बना कर ले जाया गया, तब उनकी छवि सबसे बुरी थी। उनके पापों के कारण, परमेश्वर ने उनके शत्रुओं को उन पर विजयी होने दिया था। परन्तु उनसे यह भी कहा कि वे भयभीत न हों; वह उन्हें उनके नाम से जानता था, और उनकी प्रत्येक अपमानजनक स्थिति में उनके साथ बना हुआ था (यशायाह 43:1-2)। वे उसके लिए “अनमोल और प्रतिष्ठित” थे (आयत 4), तथा उसके हाथों में सुरक्षित थे (आयत 13)। परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता और उनके पाप के कारण उनकी उस कुरूपता के बावजूद परमेश्वर उनसे प्रेम करता था।

      जब यह सत्य हमारे अन्दर घर कर लेगा, तो हम अपने आप को लोगों में प्रशंसनीय बनाने के प्रयासों में कम ही लगाएंगे। परमेश्वर हमारी वास्तविक छवि को जानता है किन्तु फिर भी हम से असीमित प्रेम करता है। - शेरिडन वौएसे


हमारे प्रति परमेश्वर का गहरा प्रेम हमें औरों के सामने वास्तविक रहने देता है।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: यशायाह 43:1-9
Isaiah 43:1 हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है।
Isaiah 43:2 जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।
Isaiah 43:3 क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरी सन्ती कूश और सबा को देता हूं।
Isaiah 43:4 मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा।
Isaiah 43:5 मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा, और पच्छिम से भी इकट्ठा करूंगा।
Isaiah 43:6 मैं उत्तर से कहूंगा, दे दे, और दक्खिन से कि रोक मत रख; मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथ्वी की छोर से ले आओ;
Isaiah 43:7 हर एक को जो मेरा कहलाता है, जिस को मैं ने अपनी महिमा के लिये सृजा, जिस को मैं ने रचा और बनाया है।
Isaiah 43:8 आंख रहते हुए अन्धों को और कान रहते हुए बहिरों को निकाल ले आओ!
Isaiah 43:9 जाति जाति के लोग इकट्ठे किए जाएं और राज्य राज्य के लोग एकत्रित हों। उन में से कौन यह बात बता सकता वा बीती हुई बातें हमें सुना सकता है? वे अपने साक्षी ले आएं जिस से वे सच्चे ठहरें, वे सुन लें और कहें, यह सत्य है।

एक साल में बाइबल:  
  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30



Tuesday, March 26, 2019

जाँचना



      दक्षिणपूर्व एशिया के एक क्षेत्र में उत्तरी अमेरिका का एक शिक्षक अतिथि बनकर गया, जहाँ उस अतिथि शिक्षक ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा। अमेरिका से आए उस शिक्षक ने अपनी कक्षा को बहु-विकल्प प्रश्न-पत्र दिया, और उसे देख कर अचम्भा हुआ कि बहुत से विद्यार्थियों ने कई प्रशों को अनुत्तरित छोड़ रखा था। प्रश्न-पत्र को जाँचने के पश्चात विद्यार्थियों को वापस करते समय उसने उन्हें सुझाव दिया कि अगली बार अनुत्तरित छोड़ने की बजाए उन्हें अनुमान लगा कर उत्तर पर चिन्ह लगा देना चाहिए। यह सुनकर अचंभित होकर एक विद्यार्थी ने पूछा, “ऐसे में यदि गलती से मेरे अनुमान द्वारा कोई उत्तर सही हो जाए तो इससे क्या मैं यह नहीं जताऊँगा कि मुझे उत्तर आता है, जबकि वास्तव में मुझे उत्तर आता ही नहीं है?” शिक्षक और विद्यार्थी के दृष्टिकोण और कार्यविधि बहुत फर्क थे।

      नए नियम के दिनों में, जब यहूदी और गैर-यहूदी लोग परिवर्तित होकर मसीही हो रहे थे, तो उनके व्यक्तिगत दृष्टिकोण भी बहुत भिन्न थे। कुछ ही समय में उनमें मतभेद होने लग गए, भिन्न बातों पर, जैसे कि, आराधना का कौन सा दिन होना चाहिए, या, मसीही विश्वासी को क्या खाने या पीने की स्वतंत्रता है, आदि। पौलुस प्रेरित ने आग्रह किया कि वे एक महत्वपूर्ण बात का ध्यान रखें: कोई भी किसी अन्य के हृदय को जानने या जाँचने की स्थिति में नहीं है।

      अन्य मसीही विश्वासियों के साथ सामंजस्य बनाए रखने के लिए, परमेश्वर चाहता है कि हम इस बात का ध्यान रखें कि हम सभी अपने-अपने जीवन और कार्यों के लिए व्यक्तिगत रीति से उसके प्रति उत्तरदायी हैं; और केवल वह ही है जो हमारे हृदयों के भाव को जाँचता है (रोमियों 14:4-7)। - मार्ट डीहान

 औरों को जाँचने में धीमा किन्तु स्वयँ को जाँचने में त्वरित रहें।

हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। - याकूब 1:19



बाइबल पाठ: रोमियों 14:1-12
Romans 14:1 जो विश्वास में निर्बल है, उसे अपनी संगति में ले लो; परन्तु उसकी शंकाओं पर विवाद करने के लिये नहीं।
Romans 14:2 क्योंकि एक को विश्वास है, कि सब कुछ खाना उचित है, परन्तु जो विश्वास में निर्बल है, वह साग पात ही खाता है।
Romans 14:3 और खानेवाला न-खाने वाले को तुच्छ न जाने, और न-खानेवाला खाने वाले पर दोष न लगाए; क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।
Romans 14:4 तू कौन है जो दूसरे के सेवक पर दोष लगाता है? उसका स्थिर रहना या गिर जाना उसके स्वामी ही से सम्बन्ध रखता है, वरन वह स्थिर ही कर दिया जाएगा; क्योंकि प्रभु उसे स्थिर रख सकता है।
Romans 14:5 कोई तो एक दिन को दूसरे से बढ़कर जानता है, और कोई सब दिन एक सा जानता है: हर एक अपने ही मन में निश्चय कर ले।
Romans 14:6 जो किसी दिन को मानता है, वह प्रभु के लिये मानता है: जो खाता है, वह प्रभु के लिये खाता है, क्योंकि वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है, और जो नहीं खाता, वह प्रभु के लिये नहीं खाता और परमेश्वर का धन्यवाद करता है।
Romans 14:7 क्योंकि हम में से न तो कोई अपने लिये जीता है, और न कोई अपने लिये मरता है।
Romans 14:8 क्योंकि यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; सो हम जीएं या मरें, हम प्रभु ही के हैं।
Romans 14:9 क्योंकि मसीह इसी लिये मरा और जी भी उठा कि वह मरे हुओं और जीवतों, दोनों का प्रभु हो।
Romans 14:10 तू अपने भाई पर क्यों दोष लगाता है? या तू फिर क्यों अपने भाई को तुच्छ जानता है? हम सब के सब परमेश्वर के न्याय सिंहासन के साम्हने खड़े होंगे।
Romans 14:11 क्योंकि लिखा है, कि प्रभु कहता है, मेरे जीवन की सौगन्ध कि हर एक घुटना मेरे साम्हने टिकेगा, और हर एक जीभ परमेश्वर को अंगीकार करेगी।
Romans 14:12 सो हम में से हर एक परमेश्वर को अपना अपना लेखा देगा।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 22-24
  • लूका 3



Monday, March 25, 2019

कार्य



      
    परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि राजा दाऊद ने मंदिर को बनाने की पूरी तैयारी की, उसके लिए आवश्यक सारा सामान जुटाया (1 इतिहास 28:11-19) परन्तु यरूशलेम में जो पहला मंदिर बनाया गया वह दाऊद द्वारा नहीं वरन उसके पुत्र सुलेमान द्वारा हुआ, और वह सुलेमान का मंदिर जाना गया। क्योंकि परमेश्वर ने दाऊद से कहा, “मेरे निवास के लिये तू घर बनवाने न पाएगा” (1 इतिहास 17:4); परमेश्वर ने दाऊद को नहीं वरन सुलेमान को मंदिर बनवाने के लिए चुना था।

      परमेश्वर द्वारा उसे मंदिर बनवाने से रोके जाने के प्रति दाऊद की प्रतिक्रिया अनुकरणीय थी। उसने इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की बजाए कि वह क्या कुछ नहीं कर सका, उसने अपना ध्यान इस बात पर अलगाया कि परमेश्वर क्या कुछ कर सकता है (पद 16-25)। दाऊद ने एक धन्यवादी मन बनाए रखा, और जो कुछ और भी वह कर सकता था, वह सब किया। उसने इस कार्य में सुलेमान की सहायता के लिए योग्य लोगों को भी खड़ा किया (देखें 1 इतिहास 22)।

      बाइबल टीकाकार जे. जी. मैक्कोन्विल ने इस संदर्भ में लिखा, “बहुधा यह हो सकता है कि जो कार्य हम मसीही सेवकाई में करना चाहते हैं, उस कार्य के लिए हम पूर्णतः योग्य न हों, और वह कार्य परमेश्वर द्वारा हमारे लिए निर्धारित कार्य न हो। हो सकता है, जैसे दाऊद के साथ हुआ, हमारी सेवकाई केवल तैयारी करने की हो, जिसका आगे चल कर प्रयोग किसी अन्य अति भव्य योजना की पूर्ति के लिए किया जाए।”

      दाऊद की इच्छा अपनी नहीं, परमेश्वर की महिमा करना था। उसने परमेश्वर के मंदिर के निर्माण के लिए विश्वासयोग्यता के साथ वह सब कुछ किया जो कुछ वह कर सकता था। उसने अपने बाद आकर उस कार्य को पूरा करने वाले के लिए एक अच्छी तैयारी की, जिससे उस कार्य करने वाले को कोई कमी न रहे।

      इसी प्रकार से आज हम भी उन कार्यों को स्वीकार करें जो परमेश्वर ने हमारे करने के लिए रखें हैं, और उन्हें पूर्ण विश्वासयोग्यता के साथ करके अपनी सेवकाई को परमेश्वर के प्रति धन्यवादी मन के साथ पूरा करें; यह स्मरण रखते हुए कि हमारा परमेश्वर कुछ बहुत ही भव्य कार्य करने जा रहा है। - पो फैंग चिया


हो सकता है कि परमेश्वर की योजना के उद्देश्य गुप्त हों, किन्तु उसकी योजनाए निरुद्देश्य नहीं हैं।

जो काम तुझे मिले उसे अपनी शक्ति भर करना, क्योंकि अधोलोक में जहां तू जाने वाला है, न काम न युक्ति न ज्ञान और न बुद्धि है। - सभोपदेशक 9:10

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 17:1-4, 16-25
 1 Chronicles 17:1 जब दाऊद अपने भवन में रहने लगा, तब दाऊद ने नातान नबी से कहा, देख, मैं तो देवदारु के बने हुए घर में रहता हूँ, परन्तु यहोवा की वाचा का सन्दूक तम्बू में रहता है।
1 Chronicles 17:2 नातान ने दाऊद से कहा, जो कुछ तेरे मन में हो उसे कर, क्योंकि परमेश्वर तेरे संग है।
1 Chronicles 17:3 उसी दिन रात को परमेश्वर का यह वचन नातान के पास पहुंचा, जा कर मेरे दास दाऊद से कह,
1 Chronicles 17:4 यहोवा यों कहता है, कि मेरे निवास के लिये तू घर बनवाने न पाएगा।
1 Chronicles 17:16 तब दाऊद राजा भीतर जा कर यहोवा के सम्मुख बैठा, और कहने लगा, हे यहोवा परमेश्वर! मैं क्या हूँ? और मेरा घराना क्या है? कि तू ने मुझे यहां तक पहुंचाया है?
1 Chronicles 17:17 और हे परमेश्वर! यह तेरी दृष्टि में छोटी सी बात हुई, क्योंकि तू ने अपने दास के घराने के विषय भविष्य के बहुत दिनों तक की चर्चा की है, और हे यहोवा परमेश्वर! तू ने मुझे ऊंचे पद का मनुष्य सा जाना है।
1 Chronicles 17:18 जो महिमा तेरे दास पर दिखाई गई है, उसके विषय दाऊद तुझ से और क्या कह सकता है? तू तो अपने दास को जानता है।
1 Chronicles 17:19 हे यहोवा! तू ने अपने दास के निमित्त और अपने मन के अनुसार यह बड़ा काम किया है, कि तेरा दास उसको जान ले।
1 Chronicles 17:20 हे यहोवा! जो कुछ हम ने अपने कानों से सुना है, उसके अनुसार तेरे तुल्य कोई नहीं, और न तुझे छोड़ और कोई परमेश्वर है।
1 Chronicles 17:21 फिर तेरी प्रजा इस्राएल के भी तुल्य कौन है? वह तो पृथ्वी भर में एक ही जाति है, उसे परमेश्वर ने जा कर अपनी निज प्रजा करने को छुड़ाया, इसलिये कि तू बड़े और डरावने काम कर के अपना नाम करे, और अपनी प्रजा के साम्हने से जो तू ने मिस्र से छुड़ा ली थी, जाति जाति के लोगों को निकाल दे।
1 Chronicles 17:22 क्योंकि तू ने अपनी प्रजा इस्राएल को अपनी सदा की प्रजा होने के लिये ठहराया, और हे यहोवा! तू आप उसका परमेश्वर ठहरा।
1 Chronicles 17:23 इसलिये, अब हे यहोवा, तू ने जो वचन अपने दास के और उसके घराने के विषय दिया है, वह सदैव अटल रहे, और अपने वचन के अनुसार ही कर।
1 Chronicles 17:24 और तेरा नाम सदैव अटल रहे, और यह कह कर तेरी बड़ाई सदा की जाए, कि सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर है, वरन वह इस्राएल ही के लिये परमेश्वर है, और तेरा दास दाऊद का घराना तेरे साम्हने स्थिर रहे।
1 Chronicles 17:25 क्योंकि हे मेरे परमेश्वर, तू ने यह कह कर अपने दास पर प्रगट किया है कि मैं तेरा घर बनाए रखूंगा, इस कारण तेरे दास को तेरे सम्मुख प्रार्थना करने का हियाव हुआ है।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 19-21
  • लूका 2:25-52



Sunday, March 24, 2019

चेहरा



      मेरा चार वर्षीय पुत्र बहुत बातूनी है और सदा प्रश्नों से भरा रहता है। मुझे उससे बातें करना अच्छा लगता है, परन्तु उसमें एक आपत्तिजनक आदत आती जा रही है – वह अपनी पीठ मेरी ओर करके भी मुझ से बोलता रहता है, जिससे मुझे अकसर उससे कहना पड़ता है, “मुझे तुम्हारी बात सुनाई नहीं दे रही है, कृपया मेरी ओर मुँह करके बोलो।”

      कभी-कभी मुझे लगता है कि परमेश्वर भी हम से यही कहना चाहता है – इसलिए नहीं कि उसे हमारी बात सुनाई नहीं देती है, परन्तु हमारी प्रवृत्ति हो सकती है कि उसकी ओर ध्यान किए बिना ही हम उससे कुछ-कुछ कहते चले जाएँ। हम उससे प्रार्थनाएं तो करते हैं, किन्तु हम अपने ही प्रश्नों और अपने ही बारे में सोचने में उलझे हुए रहते हैं, और उसके चरित्र की जिससे हम प्रार्थना कर रहे हैं बिलकुल अनदेखी कर देते हैं। मेरे पुत्र के समान हम प्रश्न तो पूछते हैं, किन्तु जिससे हम बात कर रहे हैं, उसकी ओर ध्यान नहीं लगाते हैं।

      हमारी अनेकों चिंताओं का समाधान हमारे यह स्मरण रखने से ही हो जाता है कि परमेश्वर कौन है और उसने हमारे लिए क्या कुछ किया है। केवल उसपर और उसके प्रेमी, क्षमाशील, अनुग्रहकारी इत्यादि होने, तथा समस्त सृष्टि पर सार्वभौमिक प्रभुत्व रखने आदि गुणों पर पुनः अपना ध्यान केंद्रित करने के द्वारा हम शान्ति और सांत्वना पा सकते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने कहा कि हमें परमेश्वर के चहरे को निरंतर निहारते रहना और उसके कार्यों का बखान करते रहना चाहिए (भजन 105:4-5)। जब दाऊद ने आराधना और प्रार्थना के लिए अगुवाई करने वालों को नियुक्त किया, तो उसने लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे परमेश्वर के चरित्र और गुणों का बखान करें और बीते समय में उसके विश्वासयोग्य होने की बातों को अपनी संतानों को सुनाएं (1 इतिहास 16:8-27)।

      जब हम अपनी दृष्टि परमेश्वर के सुन्दर और मनोहर चेहरे की ओर लगाते हैं, तो अनुत्तरित प्रश्नों के मध्य भी हम उससे हमें संभाले रखने वाली सामर्थ्य और शान्ति को पाते हैं। - एमी पीटर्सन


परमेश्वर के चेहरे को निहारने से हम विश्वास में बलवन्त बनते हैं।

यहोवा और उसकी सामर्थ्य को खोजो, उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहो! उसके किए हुए आश्चर्यकर्म स्मरण करो, उसके चमत्कार और निर्णय स्मरण करो! – भजन 105:4

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 16:8-27
1 Chronicles 16:8 यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो; देश देश में उसके कामों का प्रचार करो।
1 Chronicles 16:9 उसका गीत गाओ, उसका भजन करो, उसके सब आश्चर्य-कर्मों का ध्यान करो।
1 Chronicles 16:10 उसके पवित्र नाम पर घमंड करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो।
1 Chronicles 16:11 यहोवा और उसकी सामर्थ्य की खोज करो; उसके दर्शन के लिये लगातार खोज करो।
1 Chronicles 16:12 उसके किए हुए आश्चर्यकर्म, उसके चमत्कार और न्यायवचन स्मरण करो।
1 Chronicles 16:13 हे उसके दास इस्राएल के वंश, हे याकूब की सन्तान तुम जो उसके चुने हुए हो!
1 Chronicles 16:14 वही हमारा परमेश्वर यहोवा है, उसके न्याय के काम पृथ्वी भर में होते हैं।
1 Chronicles 16:15 उसकी वाचा को सदा स्मरण रखो, यह वही वचन है जो उसने हज़ार पीढिय़ों के  लिये ठहरा दिया।
1 Chronicles 16:16 वह वाचा उसने इब्राहीम के साथ बान्धी, उौर उसी के विषय उसने इसहाक से शपथ खाई,
1 Chronicles 16:17 और उसी को उसने याकूब के लिये विधि कर के और इस्राएल के लिये सदा की वाचा बान्ध कर यह कह कर दृढ़ किया, कि
1 Chronicles 16:18 मैं कनान देश तुझी को दूंगा, वह बांट में तुम्हारा निज भाग होगा।
1 Chronicles 16:19 उस समय तो तुम गिनती में थोड़े थे, वरन बहुत ही थोड़े और उस देश में परदेशी थे।
1 Chronicles 16:20 और वे एक जाति से दूसरी जाति में, और एक राज्य से दूसरे में फिरते तो रहे,
1 Chronicles 16:21 परन्तु उसने किसी मनुष्य को उन पर अन्धेर करने न दिया; और वह राजाओं को उनके निमित्त यह धमकी देता था, कि
1 Chronicles 16:22 मेरे अभिषिक्तों को मत छुओ, और न मेरे नबियों की हानि करो।
1 Chronicles 16:23 हे समस्त पृथ्वी के लोगो यहोवा का गीत गाओ। प्रतिदिन उसके किए हुए उद्धार का शुभ समाचार सुनाते रहो।
1 Chronicles 16:24 अन्यजातियों में उसकी महिमा का, और देश देश के लोगों में उसके आश्चर्य-कर्मों का वर्णन करो।
1 Chronicles 16:25 क्योंकि यहोवा महान और स्तुति के अति योग्य है, वह तो सब देवताओं से अधिक भययोग्य है।
1 Chronicles 16:26 क्योंकि देश देश के सब देवता मूतिर्यां ही हैं; परन्तु यहोवा ही ने स्वर्ग को बनाया है।
1 Chronicles 16:27 उसके चारों ओर वैभव और ऐश्वर्य है; उसके स्थान में सामर्थ्य और आनन्द है।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 16-18
  • लूका 2:1-24



Saturday, March 23, 2019

शान्ति



      मेरी सहेली ने मुझे उसकी चार दिन की बच्ची को गोदी ले लेने का सैभाग्य प्रदान किया। किन्तु उस बच्ची को गोदी में उठा लेने के कुछ ही समय बाद वह बच्ची बेचैन होने लगी। मैंने उसे अपने से और चिपटा लिया, मेरा गाल उसके सर को छू रहा था, और मैं उसे हलके से हिलाते हुए गुनगुनाने लगी जिससे वह शान्त हो जाए किन्तु ऐसा नहीं हुआ। अपने मातृत्व के डेढ़ दशक के अनुभव का संपूर्ण प्रयोग करने के बावजूद मैं उस बच्ची को शान्त नहीं कर पाई, वह और अधिक बेचैन होती चली गई, जब तक कि मैंने उसे वापस उसकी माँ की गोदी में नहीं दे दिया। मेरे ऐसा करते ही वह तुरंत शान्त हो गई, उसका रोना बन्द हो गया, उसका शरीर ढीला पड़ गया, उसने पहचान लिया कि वह फिर से उसके भरोसेमंद सुरक्षा के स्थान में लौट आई है। मेरी सहेली को भी पता था कि उसे अपनी बच्ची को कैसे पकड़ना और सहलाना है जिससे उसकी बेचैनी दूर हो सके।

      परमेश्वर भी अपने बच्चों की देखभाल एक माँ के समान करता है: कोमलता, विश्वासयोग्यता, और शान्ति प्रदान करने में सदा प्रयासरत रहने के साथ। यदि हम थकित या चिन्तित होते हैं तो वह हमें प्रेम के साथ अपनी बाहों में उठाकर हमें अपनी शान्ति और सुरक्षा का एहसास करवाता है। वह हमें बहुत निकटता से जानता और समझता है क्योंकि वह हमारा सृष्टिकर्ता तथा स्वर्गीय पिता है। उसके हम से वायदा है: “जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है” (यशायाह 26:3)।

      जब इस सँसार के बोझ और परेशानियां हमें अभिभूतित करते हैं, तब हम इस बात में सांत्वना और शान्ति पा सकते हैं कि हमारा स्वर्गीय पिता हमारी रक्षा करता है,हमारे लिए संघर्ष करता है, और प्रेमी पिता के समान हमें संभालता है। - कर्स्टन होम्बर्ग


परमेश्वर की शान्ति हमें पूर्ण आराम देती है।

मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है – यशायाह 51:12

बाइबल पाठ: यशायाह 66:12-16
Isaiah 66:12 क्योंकि यहोवा यों कहता है, देखो, मैं उसकी ओर शान्ति को नदी के समान, और अन्यजातियों के धन को नदी की बाढ़ के समान बहा दूंगा; और तुम उस से पीओगे, तुम उसकी गोद में उठाए जाओगे और उसके घुटनों पर कुदाए जाओगे।
Isaiah 66:13 जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैस ही मैं भी तुम्हें शान्ति दुंगा; तुम को यरूशलेम ही में शान्ति मिलेगी।
Isaiah 66:14 तुम यह देखोगे और प्रफुल्लित होगे; तुम्हारी हड्डियां घास के समान हरी भरी होंगी; और यहोवा का हाथ उसके दासों के लिये प्रगट होगा, और, उसके शत्रुओं के ऊपर उसका क्रोध भड़केगा।
Isaiah 66:15 क्योंकि देखो, यहोवा आग के साथ आएगा, और उसके रथ बवण्डर के समान होंगे, जिस से वह अपने क्रोध को जलजलाहट के साथ और अपनी चितौनी को भस्म करने वाली आग की लपट में प्रगट करे।
Isaiah 66:16 क्योंकि यहोवा सब प्राणियों का न्याय आग से और अपनी तलवार से करेगा; और यहोवा के मारे हुए बहुत होंगे।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80



Friday, March 22, 2019

याद



      चीन में स्थित एक भूतपूर्व जापानी बन्दी शिविर के प्रांगण में एक स्मृति का पत्थर खड़ा है, जहाँ 1945 में एक व्यक्ति का देहांत हुआ था। उस स्मृति-चिन्ह पर लिखा है, “एरिक लिड्डल का जन्म तियांजिन प्रांत में स्कॉटलैंड से आए माता-पिता के घर में 1902 में हुआ। उसके जीवन का चरमोत्कर्ष 1924 के ओलिम्पिक खेलों में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण-पदक जीतना था। उसके बाद वह लौट कर चीन के तियानजिन में आ गए और शिक्षक का कार्य करते रहे। उनका सारा जीवन युवाओं को मनुष्यों की भलाई करते रहने के लिए प्रोत्साहित करते रहने में व्यतीत हुआ।”

      बहुत से लोगों की दृष्टि में एरिक लिड्डल की सबसे उच्च उपलब्धि खेल के मैदान में थी। परन्तु उन्हें चीन, जहाँ उनका जन्म हुआ और जिस देश से वे प्रेम करते थे, के तियानजिन में युवकों के उत्थान के लिए भी जाना जाता है।

      मूसा को परमेश्वर के वचन बाइबल के विश्वास के अध्याय, इब्रानियों 11 में, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया गया है जिसने परमेश्वर के लोगों के साथ गिने जाने को मिस्र की दौलत और शोहरत से अधिक मूल्यवान समझा। और परमेश्वर ने उसे अपने लोगों को मिस्र के दासत्व से निकालकर लाने और उन्हें वाचा की भूमि, कनान, तक पहुँचाने के योग्य जाना।

      हम किस बात के लिए याद किए जाएँगे? क्या अपनी शैक्षिक उपलब्धियों के लिए, या कार्य स्थल में प्राप्त की गई पदवी और स्तर के लिए, अथवा हमें प्राप्त होने वाली आर्थिक सफलता के लिए? ये सभी हमें सँसार में पहचान तो दिलवा सकती हैं, किन्तु हमारी वास्तविक और स्थाई याद, जो हमारे बाद भी बनी रहेगी, हमारे द्वारा शान्ति से लोगों के जीवनों को सुधारने-संवारने के लिए किए गए कार्यों के द्वारा ही होगी। - सी. पी. हिया


परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्यता ही सच्ची सफलता है।

और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है। - इब्रानियों 11:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:23-29
Hebrews 11:23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उसको, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।
Hebrews 11:24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया।
Hebrews 11:25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा।
Hebrews 11:26 और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिस्र के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं।
Hebrews 11:27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिस्र को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा।
Hebrews 11:28 विश्वास ही से उसने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
Hebrews 11:29 विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56



Thursday, March 21, 2019

समर्पण



      मुझे कार्य से कुछ अवकाश लेने की इच्छा हुई, इसलिए मैं निकट के एक उद्यान में टहलने के लिए चली गई। टहलते हुए मार्ग के किनारे मिट्टी से झांकती हुई कुछ हरियाली ने मेरा ध्यान आकर्षति किया। मिट्टी में से जीवन की कुछ कोपलें बाहर निकल रही थीं, जो कुछ ही सप्ताह में सुन्दर डैफोडिल फूलों से भर जाएँगी, जो कि बसंत ऋतु और आते ग्रीष्म काल का संकेत हैं, और इसका भी कि हमने एक और शरद ऋतु पार कर ली थी!

      परमेश्वर के वचन बाइबल में जब हम होशे की पुस्तक को पढ़ते हैं, तो उसके कुछ भाग कभी समाप्त न होने वाली शरद ऋतु के समान प्रतीत हो सकते हैं। क्योंकि परमेश्वर ने अपने इस नबी को एक अपरिहार्य कार्य दिया था – एक दुराचारी तथा विश्वासघाती स्त्री से विवाह करे, जो कि परमेश्वर और उसके लोगों इस्राएल के बीच के संबंध का सूचक था (होशे 1:1-2)। होशे की पत्नि गोमेर ने विवाह के वचनों को तोड़ा और अपने पुराने व्यवहार में लौट गई, किन्तु होशे ने फिर भी उसे वापस बुलाया, इस आशा के साथ कि वह उससे पूर्ण समर्पण के साथ प्रेम करेगी (3:1-3)। इसी प्रकार से परमेश्वर भी चाहता है कि हम उससे ऐसे बल और समर्पण के साथ प्रेम करें जो प्रातः की ओस के समान थोड़े समय में गायब न हो जाए।

      परमेश्वर के प्रति हमारा संबंध कैसा है? क्या हम केवल कठिनाईयों के समयों में ही उसे खोजते हैं, उससे अपनी परेशानियों के समाधान ढूँढते हैं, परन्तु जब आनन्द और उत्सव के समय होते हैं तो उसकी अवहेलना करते हैं? उन इस्राएलियों के समान जो शीघ्र ही अपने आस-पास के लोगों की मूर्तिपूजा को अपना लेते थे और परमेश्वर से दूर हो जाते थे, क्या हम भी अपने समय की मूर्तियों, जैसे कि व्यस्तता, सांसारिक सफलता, समाज और लोगों के प्रभाव आदि में खो जाते हैं और परमेश्वर से दूर हो जाते हैं?

      आज अपने आप को परमेश्वर के प्रति पुनः समर्पित करें; उस परमेश्वर के प्रति जो हम से सदा प्रेम करता है और सदा हर रीति से हमारी भलाई, हमारा उद्धार ही चाहता है। - एमी बाउचर पाई


यद्यपि हम परमेश्वर के प्रति विश्वासघाती हो सकते है, वह हमसे कभी दूर नहीं होता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: होशे 6:1-4
Hosea 6:1 चलो, हम यहोवा की ओर फिरें; क्योंकि उसी ने फाड़ा, और वही चंगा भी करेगा; उसी ने मारा, और वही हमारे घावों पर पट्टी बान्धेगा।
Hosea 6:2 दो दिन के बाद वह हम को जिलाएगा; और तीसरे दिन वह हम को उठा कर खड़ा करेगा; तब हम उसके सम्मुख जीवित रहेंगे।
Hosea 6:3 आओ, हम ज्ञान ढूंढ़े, वरन यहोवा का ज्ञान प्राप्त करने के लिये यत्न भी करें; क्योंकि यहोवा का प्रगट होना भोर का सा निश्चित है; वह वर्षा के समान हमारे ऊपर आएगा, वरन बरसात के अन्त की वर्षा के समान जिस से भूमि सिंचती है।
Hosea 6:4 हे एप्रैम, मैं तुझ से क्या करूं? हे यहूदा, मैं तुझ से क्या करूं? तुम्हारा स्नेह तो भोर के मेघ के समान, और सवेरे उड़ जाने वाली ओस के समान है।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 7-9
  • लूका 1:21-38



Wednesday, March 20, 2019

विश्राम



      मेरा ध्यान उस प्रमुख समाचार की ओर गया: “धावकों के लिए विश्राम दिन भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।” अमेरिका के पहाड़ों पर दौड़ने वाले दल के भूतपूर्व सदस्य, टॉमी मैन्निंग द्वारा लिखे गए उस लेख में लेखक ने एक ऐसे सिद्धान्त पर बल दिया था, समर्पित खिलाड़ी जिसकी कभी-कभी उपेक्षा करते हैं – व्यायाम के पश्चात शरीर को फिर से बल प्राप्ति के लिए विश्राम की आवश्यकता होती है। मैन्निंग ने लिखा, “शरीर की रचना और संचालन के दृष्टिकोण से, प्रशिक्षण में सीखे और अर्जित किए गए परिवर्तन विश्राम के समय में ही शरीर में उन उपयोगी परिवर्तनों को लाने पाते हैं। इसका अर्थ है कि विश्राम भी परिश्रम के समान ही उपयोगी है।”

      यही सिद्धान्त हमारे मसीही विश्वास के जीवन में भी उतना ही सत्य है। हतोत्साहित होने और थक कर शिथिल पड़ जाने से बच कर रहने के लिए विश्राम के नियमित समय आवश्यक हैं, परिश्रम और विश्राम में एक संतुलन बनाए रखना चाहिए। पृथ्वी पर अपनी सेवकाई के समय में प्रभु यीशु ने इस आत्मिक संतुलन को बनाए रखने के अवसरों का उपयोग किया, उसके समय पर होने वाली अत्याधिक मांगों के बावजूद।

      जब प्रभु के शिष्य प्रचार और चंगाई के थका देने वाले कठिन कार्य को कर के लौटे तो प्रभु ने उनसे कहा कि “तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था” (मरकुस 6:31)। परन्तु एक बड़ी भीड़ उनके पीछे आ गई, और वे विश्राम न कर सके, तो प्रभु यीशु ने उस भीड़ को परमेश्वर के राज्य के विषय सिखाया और पाँच रोटी तथा दो मछली से उस भीड़ को भोजन करवाया (पद 32-44)। जब भीड़ चली गई, तो यीशु “उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया” (पद 46)।

      यदि हमारे जीवन केवल हमारे कार्य तथा सेवकाई ही से व्यस्त रहते हैं, तो शीघ्र ही हम अपने कार्यों में कम प्रभावी होते चले जाएँगे। प्रभु यीशु हमें आमंत्रित करता है कि हम नियमित कुछ समय उसके साथ प्रार्थना और विश्राम में बिताने के लिए निकाला करें, जिससे थक कर शिथिल और निष्क्रीय होने से बचे रह सकें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीही विश्वास और सेवकाई के हमारे जीवनों में विश्राम भी सेवकाई के कार्य जितना महत्वपूर्ण है।

और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। - मरकुस 1:35

बाइबल पाठ: मरकुस 6:30-46
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया।
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था।
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।
Mark 6:33 और बहुतों ने उन्हें जाते देखकर पहिचान लिया, और सब नगरों से इकट्ठे हो कर वहां पैदल दौड़े और उन से पहिले जा पहुंचे।
Mark 6:34 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा।
Mark 6:35 जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है।
Mark 6:36 उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्‍तियों में जा कर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें।
Mark 6:37 उसने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं?
Mark 6:38 उसने उन से कहा; जा कर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्होंने मालूम कर के कहा; पांच और दो मछली भी।
Mark 6:39 तब उसने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो।
Mark 6:40 वे सौ सौ और पचास पचास कर के पांति पांति बैठ गए।
Mark 6:41 और उसने उन पांच रोटियों को और दो मछिलयों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछिलयां भी उन सब में बांट दीं।
Mark 6:42 और सब खाकर तृप्‍त हो गए।
Mark 6:43 और उन्होंने टुकडों से बारह टोकिरयां भर कर उठाई, और कुछ मछिलयों से भी।
Mark 6:44 जिन्हों ने रोटियां खाईं, वे पांच हजार पुरूष थे।
Mark 6:45 तब उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Mark 6:46 और उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 4-6
  • लूका 1:1-20



Tuesday, March 19, 2019

शब्द



      वह इतवार की रात थी, और अधिकांश लोग सो रहे थे जब पुडिंग लेन में स्थित थॉमस फैरिनर की बेकरी में एक छोटी सी आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने एक से दूसरे घर फैलना आरंभ कर दिया और और शीघ्र ही लंडन सन 1666 के भयानक अग्निकांड में घिर गया जिसमें 70,000 से अधिक लोग बेघर हो गए और शहर का 4/5 भाग ध्वस्त हो गया। एक छोटी सी आग से इतना बड़ा विनाश आया।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक अन्य छोटी परन्तु अत्यन्त विनाशकारी आग के विषय बताता है। जब याकूब ने लिखा, तब वह जीवनों और संबंधों के विषय चिन्तित था न कि मकानों के। याकूब ने अपनी पत्री में कहा, “वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है” (याकूब 3:5)।

      हमारे शब्द रचनात्मक भी हो सकते हैं। नीतिवचन 16:24 में  लिखा है, “मन भावने वचन मधु भरे छते के समान प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं” प्रेरित पौलुस ने लिखा, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए” (कुलुस्सियों 4:6)। जैसे नमक हमारे भोजन को स्वाद देता है, उसी प्रकार अनुग्रह सहित कहे गए हमारे शब्द औरों को बलवंत करने में सहायक होते हैं।

      पवित्र आत्मा की सहायता से हमारे शब्द उन्हें सहायता प्रदान कर सकते हैं जो दुखित हैं, जो अपने विश्वास में बढ़ना चाहते हैं, या जिन्हें उद्धारकर्ता के पास आने की आवश्यकता है। हमारे शब्द आग लगाने की बजाए आग बुझाने और लोगों को सुधारने-संवारने का भी काम कर सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारे शब्द आज कैसे होंगे?

बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। - नीतिवचन 15:2

बाइबल पाठ: याकूब 3:3-12
James 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
James 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए।
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 1-3
  • मरकुस 16



Monday, March 18, 2019

निकट



      हमारे पुत्र, एलेन के जन्म की अगली प्रातः डॉक्टर ने मेरे पास बैठकर हमारे पुत्र के विषय मुझ से कहा, “कुछ गड़बड़ी है” – हमारा पुत्र जो बाहर से देखने में इतना सुडौल दिखा रहा था, उसमें एक जन्म-दोष था जिससे उसकी जान खतरे में थी और उसे तुरंत ऑपरेशन के लिए 700 मील दूर एक अन्य अस्पताल में ले जाना आवश्यक था।

      जब डॉक्टर आपसे कहता है कि आपके बच्चे के साथ कुछ गड़बड़ी है, तो आपका जीवन घबराहट से भर जाता है। आगे के संभावित खतरे से आपकी आत्मा कुचली हुई अनुभव करती है और आप लड़खड़ाते हुए परमेश्वर को थामने का प्रयास करने लगते हैं जो आपको इतनी सामर्थ्य दे कि आप अपने बच्चे को संभाल सकें। आप विचारते हैं, “क्या एक प्रेमी परमेश्वर यह होने देगा?” और साथ ही, “क्या उसे मेरे बच्चे की चिंता है? क्या वह वास्तव में है?” इन, तथा इन जैसे अन्य विचारों ने उस प्रातः मेरे विश्वास को झकझोर दिया।

      फिर मेरे पति, हिराम, आए और उन्हें यह जानकारी दी गई। डॉक्टर के जाने के पश्चात, हिराम ने कहा, “जोलीन, चलो प्रार्थना करें” और मैंने सहमति में सर हिलाया। उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर प्रार्थना की, “पिता परमेश्वर हम आपका धन्यवाद करते हैं एलेन को हमें देने के लिए। प्रभु, वह आपका है, हमारा नहीं। इससे पहले कि हम उसे जानने पाते, आपने उससे प्रेम किया, और वह आपका ही है। हमारी प्रार्थना है कि हम चाहे उसके साथ न हो सकें, परन्तु आप हर समय उसके साथ बने रहें। आमीन।”

      हीराम सदा ही कम बोलने वाले रहे हैं। उन्हें अपने विचार शब्दों में व्यक्त करने में कठिनाई होती है, और वे बोलकर व्यक्त करने का प्रयास भी कम ही करते हैं, यह जानते हुए कि उनके न बोलने पर भी मेरे पास समझने के लिए पर्याप्त शब्द रहते हैं। परन्तु उस दिन जब मेरा हृदय टूटा हुआ था, मेरी आत्मा कुचला हुआ अनुभव कर रही थी, और मेरा विश्वास जाता रहा था, परमेश्वर ने हिराम को वे शब्द कहने की सामर्थ्य दी जो मैं नहीं बोलने पाई थी। और अपने पति के हाथों को कसकर पकड़े हुए, अपने आँसुओं और चुप्पी में, मैंने अनुभव किया कि परमेश्वर मेरे बहुत निकट है। - जोलीन फिलो, अतिथि लेखिका


सबसे अच्छा मित्र, प्रार्थना करने वाला मित्र होता है।

जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। – यशायाह 43:2-3

बाइबल पाठ: भजन 34:11-18
Psalms 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
Psalms 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?
Psalms 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।
Psalms 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।
Psalms 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psalms 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psalms 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psalms 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 32-34
  • मरकुस 15:26-47



Sunday, March 17, 2019

भरोसा



      कुछ संस्कृतियों में यह अपेक्षा की जाती है कि आयु में कम व्यक्ति अपने से बड़े को कमरे में पहले जाने देगा; जबकि कुछ अन्य में इस बात का ध्यान रखा जाता है कि जिसका ओहदा अधिक ऊँचा होगा, वह पहले प्रवेश करेगा। हमारी परम्पराएँ चाहे जो भी हों, ऐसे समय भी आते हैं जब यह चुनना कठिन होता है कि महत्वपूर्ण मामलों में पहले कौन होगा, विशेषकर तब जब पहले होने का विशेषाधिकार हमारा अपना होता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक, अब्राहम, के विषय हम देखते हैं कि उसके तथा उसके भतीजे लूत के पास इतना पशु-धन और नौकर थे कि उनके सेवकों में बारंबार होने वाली नोक-झोंक के कारण उनका साथ रहना और यात्रा करना कठिन होने लगा था। संघर्ष से बच कर रहने के लिए अब्राहम ने सलाह दी कि वे दोनों अलग हो जाएँ, और उदारतापूर्वक लूत को अधिकार दिया कि वह पहला चुनाव करे कि उसे किस ओर जाना है “तब अब्राम लूत से कहने लगा, मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई बन्धु हैं। क्या सारा देश तेरे साम्हने नहीं? सो मुझ से अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊंगा” (उत्पत्ति 13:8-9)। लूत ने अपने लिए यार्दन नदी की घाटी का उपजाऊ इलाका चुना, और अब्राहम के लिए शेष इलाका जो उसके समान उपजाऊ नहीं था, छोड़ दिया।

      बड़ा होने पर भी अब्राहम ने इस परिस्थिति में अपने विशेषाधिकार पर बल नहीं दिया, परन्तु अपने भविष्य को परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया। लूत के चुनाव ने आगे चलाकर उसके तथा उसके परिवार के लिए बहुत परेशानी खड़ी कर दी (देखें उत्पत्ति 19)। किन्तु अब्राहम परमेश्वर की अगुवाई और अनुग्रह में बढ़ता तथा सामर्थी होता चला गया।

      आज जब हमारे समक्ष अनेकों प्रकार के विकल्प और चुनाव होते हैं, तो हम अपने स्वर्गीय पिता पर भरोसा रखें कि वह हमारा मार्गदर्शन करेगा, हमें सही मार्ग पर ले जाएगा। उसका हमसे वायदा है कि वह हमारी देखभाल करेगा, हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा; हम उसपर भरोसा बनाए रखें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जो चुनाव परमेश्वर पर छोड़ देते हैं, परमेश्वर उन्हें सदा सर्वोत्तम ही देता है। - जिम ईलियट

और जब कभी तुम दाहिनी वा बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो। – यशायाह 30:21

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 13:1-18
Genesis 13:1 तब अब्राम अपनी पत्नी, और अपनी सारी सम्पत्ति ले कर, लूत को भी संग लिये हुए, मिस्र को छोड़ कर कनान के दक्खिन देश में आया।
Genesis 13:2 अब्राम भेड़-बकरी, गाय-बैल, और सोने-रूपे का बड़ा धनी था।
Genesis 13:3 फिर वह दक्खिन देश से चलकर, बेतेल के पास उसी स्थान को पहुंचा, जहां उसका तम्बू पहले पड़ा था, जो बेतेल और ऐ के बीच में है।
Genesis 13:4 यह स्थान उस वेदी का है, जिसे उसने पहले बनाई थी, और वहां अब्राम ने फिर यहोवा से प्रार्थना की।
Genesis 13:5 और लूत के पास भी, जो अब्राम के साथ चलता था, भेड़-बकरी, गाय-बैल, और तम्बू थे।
Genesis 13:6 सो उस देश में उन दोनों की समाई न हो सकी कि वे इकट्ठे रहें: क्योंकि उनके पास बहुत धन था इसलिये वे इकट्ठे न रह सके।
Genesis 13:7 सो अब्राम, और लूत की भेड़-बकरी, और गाय-बैल के चरवाहों के बीच में झगड़ा हुआ: और उस समय कनानी, और परिज्जी लोग, उस देश में रहते थे।
Genesis 13:8 तब अब्राम लूत से कहने लगा, मेरे और तेरे बीच, और मेरे और तेरे चरवाहों के बीच में झगड़ा न होने पाए; क्योंकि हम लोग भाई बन्धु हैं।
Genesis 13:9 क्या सारा देश तेरे साम्हने नहीं? सो मुझ से अलग हो, यदि तू बाईं ओर जाए तो मैं दाहिनी ओर जाऊंगा; और यदि तू दाहिनी ओर जाए तो मैं बाईं ओर जाऊंगा।
Genesis 13:10 तब लूत ने आंख उठा कर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा, कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और अमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की बाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।
Genesis 13:11 सो लूत अपने लिये यरदन की सारी तराई को चुन के पूर्व की ओर चला, और वे एक दूसरे से अलग हो गए।
Genesis 13:12 अब्राम तो कनान देश में रहा, पर लूत उस तराई के नगरों में रहने लगा; और अपना तम्बू सदोम के निकट खड़ा किया।
Genesis 13:13 सदोम के लोग यहोवा के लेखे में बड़े दुष्ट और पापी थे।
Genesis 13:14 जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात यहोवा ने अब्राम से कहा, आंख उठा कर जिस स्थान पर तू है वहां से उत्तर-दक्खिन, पूर्व-पश्चिम, चारों ओर दृष्टि कर।
Genesis 13:15 क्योंकि जितनी भूमि तुझे दिखाई देती है, उस सब को मैं तुझे और तेरे वंश को युग युग के लिये दूंगा।
Genesis 13:16 और मैं तेरे वंश को पृथ्वी की धूल के किनकों के समान बहुत करूंगा, यहां तक कि जो कोई पृथ्वी की धूल के किनकों को गिन सकेगा वही तेरा वंश भी गिन सकेगा।
Genesis 13:17 उठ, इस देश की लम्बाई और चौड़ाई में चल फिर; क्योंकि मैं उसे तुझी को दूंगा।
Genesis 13:18 इसके पशचात्‌ अब्राम अपना तम्बू उखाड़ कर, माम्रे के बांजों के बीच जो हेब्रोन में थे जा कर रहने लगा, और वहां भी यहोवा की एक वेदी बनाई।

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 30-31
  • मरकुस 15:1-25