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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

स्वाद



     कुछ लोगों को चॉकलेट मीठी अच्छी लगती है तो औरों को कडुवी। मध्य अमेरिका के प्राचीन मूल निवासी, माया जनजाति के लोग, चॉकलेट को पेय पदार्थ के रूप में लेते थे, और वे इसमें मिर्च मिलाया करते थे; उन्हें यह “कडुवा पानी”, जैसा वह उसे कहते थे, पसंद था। कई वर्षों के पश्चात चॉकलेट स्पेन पहुँचा, परन्तु स्पेन के लोगों ने इसे मीठा पसंद किया, इसलिए उसकी स्वाभाविक कडुवाहट को छिपाने के लिए वे चॉकलेट में चीनी और शहद मिलाने लगे।

     चॉकलेट ही के समान, दिन भी कडुवे या मीठे हो सकते हैं। सत्रहवीं शताब्दी के एक सुप्रसिद्ध मसीही सन्यासी, ब्रदर लॉरेंस ने लिखा, “यदि हम जानते कि [परमेश्वर] हम से कितना प्रेम करता है तो हम उसके हाथ से, मीठा और कडुवा, बराबर मात्राओं में, लेने के लिए सदा तैयार रहते। मीठा और कडुवा लेने, बराबर मात्राओं में? यह तो कठिन है! ब्रदर लॉरेंस क्या कह रहे थे? कुंजी परमेश्वर के चरित्र में है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के विषय कहा, “तू भला है, और भला करता भी है; मुझे अपनी विधियां सिखा” (पद 68)।

     माया लोग कडुवे चॉकलेट को उसकी चंगा करने और औषधीय गुणों के लिए भी पसंद करते थे। कडुवे समयों का भी महत्त्व होता है। वे हमें हमारी कमज़ोरियों को दिखाते हैं, तथा हमें परमेश्वर पर और भी अधिक निर्भर रहने में सहायता करते हैं। भजनकार ने लिखा, “मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं” (पद 71)। आज हम जीवन को उसके हर भिन्न स्वाद के साथ अपनाएं। जीवन के प्रत्येक स्वाद में परमेश्वर से मिलने वाली भलाई के लिए आश्वस्त रहते हुए, हम भी भजनकार के साथ कहें, “हे यहोवा, तू ने अपने वचन के अनुसार अपने दास के संग भलाई की है” (पद 65)। - कीला ओकोआ

हर परिस्थिति में, परमेश्वर सदा भला है।

क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। - भजन 86:5

बाइबल पाठ: भजन 119:65-72
भजन संहिता 119:65 हे यहोवा, तू ने अपने वचन के अनुसार अपने दास के संग भलाई की है।
भजन संहिता 119:66 मुझे भली विवेक- शक्ति और ज्ञान दे, क्योंकि मैं ने तेरी आज्ञाओं का विश्वास किया है।
भजन संहिता 119:67 उस से पहिले कि मैं दु:खित हुआ, मैं भटकता था; परन्तु अब मैं तेरे वचन को मानता हूं।
भजन संहिता 119:68 तू भला है, और भला करता भी है; मुझे अपनी विधियां सिखा।
भजन संहिता 119:69 अभिमानियों ने तो मेरे विरुद्ध झूठ बात गढ़ी है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों को पूरे मन से पकड़े रहूंगा।
भजन संहिता 119:70 उनका मन मोटा हो गया है, परन्तु मैं तेरी व्यवस्था के कारण सुखी हूं।
भजन संहिता 119:71 मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं।
भजन संहिता 119:72 तेरी दी हुई व्यवस्था मेरे लिये हजारों रूपयों और मुहरों से भी उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 19-21
  • लूका 7:31-50



रविवार, 22 सितंबर 2019

स्वाद



      जब हमारे बेटे ज़ेवियर ने, जिसने चलना अभी ही सीखा था, पहली बार नीबू में दाँत मारे, तो उसने तुरंत नाक सिकोडी और जीभ बाहर निकाल कर तुतला कर बोला, “खट्टा”! मैंने हँसते हुए उससे नीबू लेकर फेंकना चाहा, तो ज़ेवियर मुझ से दूर होने के लिए रसोई से बाहर की ओर दौड़ा, और बोला “अभी और।” नीबू का रस चूसते हुए वह अपने होंठ बिचकाता रहा, किन्तु जब तक नीबू में रस रहा वह उसे चूसता ही रहा, और फिर अन्त में मेरे हाथों में चुसे हुए नीबू का छिलका पकड़ा कर चला गया।

      मेरी जीभ की स्वाद-कोशिकाएं मेरे जीवन के मधुर पलों के मीठे स्वाद के प्रति मेरे लगाव को वास्तविक रीति से दिखती है। मेरा प्रत्येक कड़ुवी वस्तु के प्रति अलगाव मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्यूब की पत्नि को समरण करवाता है, जो मेरे ही समान दुःख उठाने के खट्टे अनुभव से बचे रहना चाहती थी।

      निःसंदेह, अय्यूब को कठिनाई या क्लेश पसन्द नहीं थे, परन्तु उसने फिर भी अपनी अत्यंत पीड़ादायक परिस्थितियों में भी परमेश्वर को आदर दिया (अय्यूब 1:1-22)। जब अय्यूब की देह पीड़ादायक घावों से भर गई, तब भी वह उस पीड़ा को सहता रहा (2:7-8)। उसकी पत्नि ने उसे उकसाया कि वह परमेश्वर पर भरोसा करने के स्थान पर उसकी निन्दा करे (पद 9), परन्तु, अय्यूब का प्रत्युत्तर क्लेश और कष्ट में भी परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना था (पद 10)।

      यह स्वाभाविक है कि हम जीवन के कडुवे घूंटों को पीना नहीं चाहते हैं। ऐसी परिस्थितियों में हम पर यह प्रलोभन भी आ सकता है कि हम अपनी पीड़ाओं के लिए परमेश्वर को उलाहना दें। परन्तु परमेश्वर परीक्षाओं और कष्टपूर्ण परिस्थितियों के द्वारा हमें उस पर भरोसा बनाए रखना, उस पर निर्भर रहना, और उसे समर्पित रहना सिखाता है; हमें सक्षम करता है कि हम कठिनाइयों में से धीरज के साथ पार निकल सकें। हमारे लिए यह आवश्यक नहीं है कि अय्यूब के समान हम भी दुखों में आनन्दित हों जिससे पीड़ाओं के कडुवे स्वाद के समयों में, परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की अप्रत्याशित मिठास का स्वाद अनुभव करें – जिससे परमेश्वर में हमारा विश्वास और दृढ़ हो जाता है। - जोशील डिक्सन

परमेश्वर क्लेशों के द्वारा हमारे विश्वास को दृढ़ करता है।

हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। - याकूब 1:2-3

बाइबल पाठ: अय्यूब 2:1-10
Job 2:1 फिर एक और दिन यहोवा परमेश्वर के पुत्र उसके साम्हने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी उसके साम्हने उपस्थित हुआ।
Job 2:2 यहोवा ने शैतान से पूछा, तू कहां से आता है? शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, कि इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।
Job 2:3 यहोवा ने शैतान से पूछा, क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है कि पृथ्वी पर उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय मानने वाला और बुराई से दूर रहने वाला मनुष्य और कोई नहीं है? और यद्यपि तू ने मुझे उसको बिना कारण सत्यानाश करते को उभारा, तौभी वह अब तक अपनी खराई पर बना है।
Job 2:4 शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, खाल के बदले खाल, परन्तु प्राण के बदले मनुष्य अपना सब कुछ दे देता है।
Job 2:5 सो केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हड्डियां और मांस छू, तब वह तेरे मुंह पर तेरी निन्दा करेगा।
Job 2:6 यहोवा ने शैतान से कहा, सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।
Job 2:7 तब शैतान यहोवा के साम्हने से निकला, और अय्यूब को पांव के तलवे से ले सिर की चोटी तक बड़े बड़े फोड़ों से पीड़ित किया।
Job 2:8 तब अय्यूब खुजलाने के लिये एक ठीकरा ले कर राख पर बैठ गया।
Job 2:9 तब उसकी स्त्री उस से कहने लगी, क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा।
Job 2:10 उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 10-12
  • गलातियों 1



मंगलवार, 19 मार्च 2019

शब्द



      वह इतवार की रात थी, और अधिकांश लोग सो रहे थे जब पुडिंग लेन में स्थित थॉमस फैरिनर की बेकरी में एक छोटी सी आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने एक से दूसरे घर फैलना आरंभ कर दिया और और शीघ्र ही लंडन सन 1666 के भयानक अग्निकांड में घिर गया जिसमें 70,000 से अधिक लोग बेघर हो गए और शहर का 4/5 भाग ध्वस्त हो गया। एक छोटी सी आग से इतना बड़ा विनाश आया।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक अन्य छोटी परन्तु अत्यन्त विनाशकारी आग के विषय बताता है। जब याकूब ने लिखा, तब वह जीवनों और संबंधों के विषय चिन्तित था न कि मकानों के। याकूब ने अपनी पत्री में कहा, “वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है” (याकूब 3:5)।

      हमारे शब्द रचनात्मक भी हो सकते हैं। नीतिवचन 16:24 में  लिखा है, “मन भावने वचन मधु भरे छते के समान प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं” प्रेरित पौलुस ने लिखा, “तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए” (कुलुस्सियों 4:6)। जैसे नमक हमारे भोजन को स्वाद देता है, उसी प्रकार अनुग्रह सहित कहे गए हमारे शब्द औरों को बलवंत करने में सहायक होते हैं।

      पवित्र आत्मा की सहायता से हमारे शब्द उन्हें सहायता प्रदान कर सकते हैं जो दुखित हैं, जो अपने विश्वास में बढ़ना चाहते हैं, या जिन्हें उद्धारकर्ता के पास आने की आवश्यकता है। हमारे शब्द आग लगाने की बजाए आग बुझाने और लोगों को सुधारने-संवारने का भी काम कर सकते हैं। - बिल क्राउडर


हमारे शब्द आज कैसे होंगे?

बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। - नीतिवचन 15:2

बाइबल पाठ: याकूब 3:3-12
James 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
James 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए।
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 1-3
  • मरकुस 16



शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016

मधुर सत्य


   जब वास्तव में उनकी आवश्यकता होती है तो मेरी पॉपिन्स कहाँ होती हैं? मैं मानता हूँ मेरा यह प्रश्न उन पुराने भले दिनों की याद दिलाता है जब बच्चों की कहानियों पर बनी फिल्में हमें कालपनिक और जादूई पात्रों और उनके अवास्तविक कार्यों द्वारा समस्याओं को पलक झपकते ही सरलता से सुलझा लेने को दिखाकर खुश करती थीं। लेकिन मेरे मन की अभिलाषा है ऐसे लोगों के लिए जो वास्तविक, आशापूर्ण भविष्य के दर्शन को लेकर कार्य करें। मेरी लालसा है उन लोगों के लिए जो रचनात्मक हैं, आनन्द से भरे हैं और जिन बातों को हम नकारात्मक दृष्टि से देखते हैं, उन्ही बातों के सकारात्मक पहलुओं को भी हमें दिखा सकें; जो हमें एहसास करवा सकें कि कड़ुवी दवाई भी एक चम्मच चीनी के साथ आसानी से निगली जा सकती है!

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने अपने एक भजन में ऐसे ही विचारों को लेकर एक प्रभावी सत्य लिखा: "यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं" (भजन 19:9-10)। आज हम बहुत ही कम यह सुनने पाते हैं कि सत्य मधुर भी हो सकता है; आम धारणा और सामान्यतः कही जाने वाली बात तो यह है कि सत्य कड़ुवा होता है, निगलने या स्वीकार करने में कठोर होता है। लेकिन सत्य का एक महत्वपूर्ण परन्तु कम स्वीकार किया जाने वाला पहलु यह भी है कि सत्य ऐसा आहार है जिससे अनेक रोगों से बचाव होता है। सत्य कोई बीमारी रोधक टीका या दवा नहीं है; सत्य तो भरपूरी से सामर्थ देने वाला पौष्टिक भोजन है जिसे ऐसे परोसा जाना चाहिए जिससे वह भूखों को आकर्षित करके उन्हें उसे चखने के लिए लालायित करे (भजन 34:8)।

   हम आराधना का एक गीत "यीशु सबसे मधुर नाम" तो गाते हैं किंतु यीशु के नाम और जीवन को संसार के समक्ष ऐसे प्रस्तुत करते हैं मानो वह नाम खट्टा पड़ गया हो। जो लोग आत्मिक भोजन के लिए तरसते हैं, उनके लिए प्रभु यीशु का निर्मल सत्य, जो यदि हमारे अहंकार या कटु व्यवहार अथवा स्वभाव से कलंकित नहीं हुआ है, सबसे मधुर स्वाद और तरोताज़गी देनेवाला होता है। हम मसीही विश्वासियों को यह आदर है कि हम इस मधुर सत्य को, पाप की कड़ुवाहट झेल रहे संसार के सामने प्रस्तुत करें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो! - भजन 117:2

परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। - भजन 34:8

बाइबल पाठ: भजन 19:7-14
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22


शुक्रवार, 5 अप्रैल 2013

स्वाद


   एक दोपहर की बात है, एंजेला ने अपनी बेटी एलियाना को चार टौफियाँ दीं और उससे बड़े स्पष्ट शब्दों में दृढ़ता से कहा कि आज के लिए उसे बस इतनी ही मिलेंगी, इससे अधिक और इसके बाद एक भी नहीं। एंजेला के देखते देखते उस बच्ची एलियाना ने तीन टौफियाँ तो बड़ी जल्दी जल्दी खालीं परन्तु चौथी को खाने में उसने बहुत समय लगाया। एलियाना ने उस दिन की उस अन्तिम टौफी को धीरे धीरे चूसा, कभी वह उसे अपने मुँह से निकालती और उसका एक छोटा सा टुकड़ा दाँतों से काट कर चूसती, कभी मुँह के बाहर ही उसपर जीभ फेरकर उसका स्वाद लेती। अपनी उस दिन की उस अन्तिम टौफी को खत्म कर लेने में एलियाना ने पूरे 45 मिनिट लगाए। एंजेला अपनी बेटी की यह करतूत बड़ी दिलचस्पी से देखती रही। एंजेला को एहसास हुआ कि वह एलियाना को एक महत्वपूर्ण पाठ सीखते देख रही है - स्वाद लेने और रस तथा आनन्द का अन्तिम कतरा तक निकाल पाने का पाठ।

   कुछ ऐसी ही आशा परमेश्वर भी हमसे अपने वचन बाइबल के पढ़े जाने के प्रति रखता है। वह चाहता है कि हम समय लगाकर, मनन कर के, गंभीरता और अर्थपूर्ण रीति से उसके वचन का अध्ययन करें, जिससे उसका पूरा पूरा स्वाद ले सकें, उसकी गहराईयों को समझ सकें और उसकी संगति का आनन्द उठा सकें। दाउद ने कहा, "चखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है!" (भजन 34:8)। प्रभु यीशु ने स्पष्ट कहा है कि उसके वचन के साथ समय बिताना ही उसके प्रति हमारे प्रेम का सूचक है, परमेश्वर के साथ समय बिताना है, जो यह करते हैं परमेश्वर भी उनसे प्रेम करता है और उनके साथ वास करता है: "जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।" (यूहन्ना 14:21, 23)।

   परमेश्वर के वचन का स्वाद लेना सीखिए - उसपर मनन करने के द्वारा, अपने हृदय में उसे बसा लेने के द्वारा, उसका पालन करने के द्वारा, उसे दूसरों के साथ बांटने के द्वारा, दूसरों को इस जीवते वचन की सामर्थ और प्रतिभा बताने के द्वारा और आप पाएंगे कि आपके अपने जीवन का स्वाद संसार की कड़ुवाहट से भरने की बजाए ईश्वरीय सुगन्ध और मिठास से भर जाएगा। - सिंडी हैस कैस्पर


हम मसीही विश्वासीयों सबसे बड़ा सौभाग्य परमेश्वर का स्वाद लेते रहना है।

चखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। - भजन 34:8

बाइबल पाठ: भजन 34:1-10
Psalms 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।
Psalms 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।
Psalms 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।
Psalms 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।
Psalms 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।
Psalms 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।
Psalms 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।
Psalms 34:8 चखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है।
Psalms 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगों, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती!
Psalms 34:10 जवान सिंहों को तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 1-3 
  • लूका 8:26-56