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बुधवार, 31 मई 2023

Miscellaneous Questions / कुछ प्रश्न - 23 - Primary Basis of Faith / विश्वास का प्राथमिक आधार

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प्रभु में विश्वास का प्राथमिक आधार – आश्चर्य कर्म, या परमेश्वर का वचन?


    प्रभु यीशु में हमारे विश्वास का प्राथमिक आधार प्रभु का वचन होना चाहिएन कि उसके नाम में किए गए आश्चर्य कर्म। प्रभु यीशु ने अपनी सेवकाई का आरंभ प्रचार के द्वारा किया थान कि आश्चर्य कर्मों के द्वारा (मरकुस 1:14-15)। जब प्रभु यीशु ने अपने बारह शिष्यों को चुनाउन्हें सामर्थ्य प्रदान की और उन्हें अपने प्रतिनिधि बनाकर उनकी प्रथम सेवकाई के लिए भेजातब प्रभु द्वारा उन्हें दी गई प्राथमिक आज्ञा थी कि वे जा कर प्रचार करें कि स्वर्ग का राज्य निकट हैआश्चर्य कर्म करने के लिए कहना प्रचार के बाद था (मत्ती 10:1, 5-8; मरकुस 3:14-15)। यहाँ पर ध्यान देने के लिए यह महत्वपूर्ण बात है कि जो उन आश्चर्य कर्मों के लिए संदेह करेंगे उनके विरुद्ध कुछ नहीं कहा गया हैपरन्तु जो उस वचन का तिरस्कार करें उनके लिए एक भयानक भविष्य रखा है (मत्ती 10:14-15)। यहाँ पर एक और भी ध्यान देने योग्य महत्वपूर्ण बात है जिसे प्रभु यीशु ने उस समय के लिए कहा यदि ये शिष्य उनकी सेवकाई के कारण उच्च अधिकारियों के सामने ले जाए जाते। प्रभु ने उन्हें आश्वस्त किया कि ऐसी परिस्थिति में उनके बचाव के लिएउन्हें पवित्र आत्मा की सामर्थ्य द्वाराबता दिया जाएगा कि क्या ‘कहें’बजाय इसके कि क्या आश्चर्य कर्म ‘करें’ (मत्ती 10:18-20).

    युहन्ना 17 पढ़िएजो प्रभु की वह महायाजकीय प्रार्थना हैजो उन्होंने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़े जाने से पहले की थी। इस प्रार्थना में ध्यान कीजिए कि कैसे प्रभु बारंबार उस वचन पर ज़ोर दे रहे हैं जो उन्होंने अपने शिष्यों को दिया थाऔर जिसे उन्हें अपनी सेवकाई के दौरान औरों को पहुंचाना था। प्रभु के स्वर्गारोहण से ठीक पहलेजो महान आज्ञा प्रभु ने अपने शिष्यों को दीवह थी कि वे जा कर उस वचन का प्रचार करें जिसे प्रभु ने उन्हें सौंपा था (मत्ती 28:18-20; प्रेरितों 1:8)। प्रथम कलीसिया का जन्म, जो हम प्रेरितों 2 में देखते हैं, पतरस द्वारा किए गए प्रचार से हुआ था न कि किसी आश्चर्य’ कर्म के द्वारा – ‘अन्य भाषाएं’ बोलने के चमत्कार ने तो लोगों में असमंजस और उपहास उत्पन्न कियाविश्वास नहींकिन्तु वचन के प्रचार के द्वारा पश्चाताप, विश्वास, और उद्धार आया। हम देखते हैं कि बाद मेंजो मसीही विश्वासी सताव के कारण यरूशलेम से खदेड़े गएवे भी वचन का प्रचार करते हुए गए (प्रेरितों 8:1-4)। पौलुस ने तिमुथियुस को बल देकर कहा कि परमेश्वर के वचन को सही रीति से और ठीक-ठीक सिखाया जाना चाहिए (2 तिमुथियुस 2:2, 15) क्योंकि वचन ही है जो विश्वास के द्वारा उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धिमान बना सकता है (2 तिमुथियुस 3:14-17)

    प्रभु यीशु मसीह वचन हैंवह वचन जो परमेश्वर के साथ हैवह वचन जो परमेश्वर हैवह वचन जिसने देहधारी होकर हमारे बीच में डेरा किया (यूहन्ना 1:1, 14) – वहजो जीवित वचन है, वही जो मसीही विश्वास का विषय और आधार है। आश्चर्य कर्म विश्वास का आधार नहीं हैंवरन जो वचन या सुसमाचार लोगों को सुनाया जाता है उसकी पुष्टि करने के चिन्ह हैं (मरकुस 16:15-20); सदा से ही परमेश्वर का वचन ही मसीही विश्वास का आधार रहा है। इसीलिए शैतान हमें सदा ही परमेश्वर के वचन से दूर ले जाने का प्रयास करता हैऔर ऐसा करने के लिए आश्चर्य कर्म और अद्भुत चिन्हों को विश्वास का आधार बनाना उसके धोखे और बहकावे के कार्यों में बहुत सहायक होते हैं। लोगपरमेश्वर के वचन के अध्ययन और आज्ञाकारिता में संलग्न होने के स्थान परऐसी लालसाओं में पड़ जाते हैं कि वे भी आश्चर्य कर्म करने वाले हो जाएं, या आश्चर्य कर्मों के द्वारा उन्हें कुछ लाभ मिल जाएया आश्चर्य कर्म करने वाले कहलाए जाने के द्वारा उनका नाम और ख्याति हो जाए, आदि।

    आश्चर्य कर्म तो शैतान, उसके दूत, और उसका अनुसरण करने वाले भी कर सकते हैं (निर्गमन 7:11-12, 22; 8:7; प्रेरितों 16:16-18; 2 थिस्सलुनीकियों 2:9-10; प्रकाशितवाक्य 13:11-15), और यदि व्यक्ति परमेश्वर के वचन – “सत्य में दृढ़ता से स्थापित न होतो शैतान के धोखों और अद्भुत चिन्हों द्वारा बहकाए जाने के द्वारा उन के विनाश में जाने का खतरा बना रहता हैउसी विनाश में जिसमें इस प्रकार के चिन्ह और अद्भुत कार्य करने वाले अंततः जाएंगे (प्रकाशितवाक्य 19:20; 20:10).

    इसलिए हमारे लिए यह सुनिश्चित कर लेना अनिवार्य है कि परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह में हमारा विश्वास किसी चिन्ह अथवा आश्चर्य कर्म आदि पर आधारित नहीं है वरन परमेश्वर के वचन – जो अचूक और दोषरहित है, पर विश्वास लाने और भरोसा रखने पर आधारित है। हमें परमेश्वर के वचन बाइबल  को प्रार्थना सहित पढ़ने और उस पर मनन करने में समय बिताना चाहिए,और उसमें होकर परमेश्वर से मार्गदर्शन के खोजी होना चाहिए (1 शमुएल 3:21; भजन 119:105)। परमेश्वर के वचन में दृढ़ और स्थापित होना ही शैतान के द्वारा बहकाए जाने से बचे रहने का अचूक उपाय है – इसके लिए कुलुस्सियों 2 पर भी मनन करें।

    यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।

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Primary Basis of Belief in the Lord – Miracles or God’s Word?


    The primary basis of our belief in the Lord Jesus ought to be His Word, not miracles done in His name. The Lord Jesus started His ministry with preaching, not miracles (Mark 1:14-15). When the Lord Jesus chose twelve of His disciples, empowered them and sent them out on their first mission as His emissaries, the Lord’s primary instruction to them was to go and preach that the Kingdom of heaven is at hand; to perform miracles was the secondary instruction (Matthew 10:1, 5-8; Mark 3:14-15). Here it is also important to note that although nothing is said against those who would be skeptical about the miracles, but those who rejected the Word had a terrible fate awaiting them (Matthew 10:14-15). Another important thing to note here is what the Lord said to those disciples in the event of their being brought before high ranking officials because of their ministry for the Lord Jesus. The Lord assured them that for their defense in such a situation, through the power of the Holy Spirit, they will told what to ‘say’, rather than being given a miracle to ‘do’ (Matthew 10:18-20).

    Read John 17, the High Priestly prayer of the Lord, which He prayed before His being taken captive for crucifixion. See in this prayer how He repeatedly emphasizes upon the Word that He gave to His disciples, which they were to pass on to others in their ministry. At the time of His ascension to heaven, The Great Commission that the Lord gave to His disciples, was to go and preach the Word He had given them (Matthew 28:18-20; Acts 1:8). The first Church was born by the preaching of Peter in Acts 2, not by any miracles – the miracle of ‘tongues’ brought consternation amongst those present and witnessing the miracle, not faith; it was the preaching of the Word that brought repentance, faith and salvation. We see later, that those Christian Believers who were being persecuted and chased out of Jerusalem, went out preaching the Word (Acts 8:1-4). Paul emphasizes to Timothy that it is the Word of God that is to be judiciously taught (2 Timothy 2:2, 15) for it is the Word that is able to make wise for salvation through faith (2 Timothy 3:14-17).

    The Lord Jesus is the Word; the Word with God; the Word was God; the Word that became flesh and dwelt amongst us (John 1:1, 14) – He, the Living Word is the object and basis of the Christian faith. Miracles are not the basis of faith, rather they are meant to be signs to affirm the Word or Gospel that is preached to the people (Mark 16:15-20); it is the Word of God that has always been the basis of the Christian faith. Therefore Satan always tries to draw us away from God’s Word, and to this end using miraculous signs and wonders as the basis of faith serve his purpose to beguile and deceive quite well. People, instead of being involved in studying God’s Word and being obedient to the word, get caught up either in the desire to be those who perform miracles, or in the expectations of being benefited through miracles, or to gain a name and fame through performing miracles.

    Even Satan, his angels, and his followers can perform miracles (Exodus 7:11-12, 22; 8:7; Acts 16:16-18; 2 Thessalonians 2:9-10; Revelations 13:11-15), and unless one is firmly established in the Word of God – “the Truth”, people are prone to get carried away to their destruction by these satanic deceptions and lying wonders, just as those who perform these deceiving signs and wonders will eventually perish (Revelation 19:20; 20:10).

    Therefore it is essential to see that the basis of our belief and faith in God and Lord Jesus is not on the basis of any signs and miracles etc. but through believing and trusting in His Word – which is infallible and inerrant. We need to spend time prayerfully reading, and meditating upon the Word of God – the Bible, and seeking the Lord’s guidance through it (1 Samuel 3:21; Psalms 119:105). Being established in God’s Word is our only sure-shot safety and security against being deceived by Satan – ponder over Colossians 2 for this.

    If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.

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रविवार, 29 मार्च 2020

स्मरण



      कुछ वर्ष पहले की बात है, मैंने अपने बेटों के साथ कुछ समय इडाहो में एक नदी के किनारे खेत में स्थित, सूने और खाली पड़े हुए घर में बिताया। अब वहां कोई नहीं रहता था, सब लोग उसे छोड़ कर जा चुके थे। एक दिन उस घर के आस-पास घूमते हुए मुझे एक पुरानी कब्र दिखाई दी, जिस पर लकड़ी का एक चिन्ह लगा हुआ था, किन्तु काठ के पुराने हो जाने के साथ ही उस पर जो कुछ भी लिखा गया था वह मिट गया था। कोई था जो कभी वहां रहा करता था, परन्तु अब उसका देहांत हो चुका था, और अब उसका कोई स्मरण शेष नहीं था। वह कब्र मुझे दुखदायी लगी। वापस आने के बाद मैंने उस पुराने खेत और स्थान के बारे में जानकारी लेने के लिए कई घंटे बिताए और वहां के इतिहास के बारे में पढ़ा, परन्तु वहां दफनाए गए व्यक्ति के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं मिली।

      कहा जाता है कि हम में से सबसे उत्तम लोगों का स्मरण लगभग 100 वर्ष तक  रहता है; शेष को शीघ्र ही भुला दिया जाता है। पिछली पीढ़ियों की स्मृतियाँ, कब्र पर लगे उसे चिन्ह की लिखावट के समान ही, वे शीघ्र ही धूमिल हो जाती हैं। फिर भी परमेश्वर के परिवार में होने के कारण हम मसीही विश्वासियों की विरासत आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचती रहती है; हमने परमेश्वर तथा औरों से कैसे और कैसा प्रेम किया, उसकी स्मृति बनी रहती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में मलाकी 3:16-17 में लिखा है, “तब यहोवा का भय मानने वालों ने आपस में बातें की, और यहोवा ध्यान धर कर उनकी सुनता था; और जो यहोवा का भय मानते और उसके नाम का सम्मान करते थे, उनके स्मरण के निमित्त उसके साम्हने एक पुस्तक लिखी जाती थी। सेनाओं का यहोवा यह कहता है, कि जो दिन मैं ने ठहराया है, उस दिन वे लोग मेरे वरन मेरे निज भाग ठहरेंगे, और मैं उन से ऐसी कोमलता करूंगा जैसी कोई अपने सेवा करने वाले पुत्र से करे।

      पौलुस ने दाऊद के लिए लिखा कि उसने अपने समय में परमेश्वर की सेवा की और जाता रहा (प्रेरितों 13:36)। परन्तु परमेश्वर की ओर से दाऊद, और पौलुस, दोनों को आज भी स्मरण किया जाता है, उनके जीवनों, कार्यों, और लेखों से शिक्षाएं ली जाती हैं। वैसे ही हम भी आज अपने समय में परमेश्वर की सेवा करें और भविष्य में हमारे स्मरण किए जाने को परमेश्वर पर छोड़ दें। - डेविड एच. रोपर

प्रभु के लिए जीवन व्यतीत करने का एक स्थाई स्मरण बना रहता है।

क्योंकि दाऊद तो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार अपने समय में सेवा कर के सो गया; और अपने बाप दादों में जा मिला; और सड़ भी गया। - प्रेरितों के काम 13:36

बाइबल पाठ: यशायाह 49:14-16
यशायाह 49:14 परन्तु सिय्योन ने कहा, यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, मेरा प्रभु मुझे भूल गया है।
यशायाह 49:15 क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपिउवे बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता।
यशायाह 49:16 देख, मैं ने तेरा चित्र हथेलियों पर खोदकर बनाया है; तेरी शहरपनाह सदैव मेरी दृष्टि के साम्हने बनी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 7-8
  • लूका 5:1-16



शुक्रवार, 22 मार्च 2019

याद



      चीन में स्थित एक भूतपूर्व जापानी बन्दी शिविर के प्रांगण में एक स्मृति का पत्थर खड़ा है, जहाँ 1945 में एक व्यक्ति का देहांत हुआ था। उस स्मृति-चिन्ह पर लिखा है, “एरिक लिड्डल का जन्म तियांजिन प्रांत में स्कॉटलैंड से आए माता-पिता के घर में 1902 में हुआ। उसके जीवन का चरमोत्कर्ष 1924 के ओलिम्पिक खेलों में 400 मीटर की दौड़ में स्वर्ण-पदक जीतना था। उसके बाद वह लौट कर चीन के तियानजिन में आ गए और शिक्षक का कार्य करते रहे। उनका सारा जीवन युवाओं को मनुष्यों की भलाई करते रहने के लिए प्रोत्साहित करते रहने में व्यतीत हुआ।”

      बहुत से लोगों की दृष्टि में एरिक लिड्डल की सबसे उच्च उपलब्धि खेल के मैदान में थी। परन्तु उन्हें चीन, जहाँ उनका जन्म हुआ और जिस देश से वे प्रेम करते थे, के तियानजिन में युवकों के उत्थान के लिए भी जाना जाता है।

      मूसा को परमेश्वर के वचन बाइबल के विश्वास के अध्याय, इब्रानियों 11 में, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में याद किया गया है जिसने परमेश्वर के लोगों के साथ गिने जाने को मिस्र की दौलत और शोहरत से अधिक मूल्यवान समझा। और परमेश्वर ने उसे अपने लोगों को मिस्र के दासत्व से निकालकर लाने और उन्हें वाचा की भूमि, कनान, तक पहुँचाने के योग्य जाना।

      हम किस बात के लिए याद किए जाएँगे? क्या अपनी शैक्षिक उपलब्धियों के लिए, या कार्य स्थल में प्राप्त की गई पदवी और स्तर के लिए, अथवा हमें प्राप्त होने वाली आर्थिक सफलता के लिए? ये सभी हमें सँसार में पहचान तो दिलवा सकती हैं, किन्तु हमारी वास्तविक और स्थाई याद, जो हमारे बाद भी बनी रहेगी, हमारे द्वारा शान्ति से लोगों के जीवनों को सुधारने-संवारने के लिए किए गए कार्यों के द्वारा ही होगी। - सी. पी. हिया


परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्यता ही सच्ची सफलता है।

और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है। - इब्रानियों 11:6

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:23-29
Hebrews 11:23 विश्वास ही से मूसा के माता पिता ने उसको, उत्पन्न होने के बाद तीन महीने तक छिपा रखा; क्योंकि उन्होंने देखा, कि बालक सुन्‍दर है, और वे राजा की आज्ञा से न डरे।
Hebrews 11:24 विश्वास ही से मूसा ने सयाना हो कर फिरौन की बेटी का पुत्र कहलाने से इन्कार किया।
Hebrews 11:25 इसलिये कि उसे पाप में थोड़े दिन के सुख भोगने से परमेश्वर के लोगों के साथ दुख भोगना और उत्तम लगा।
Hebrews 11:26 और मसीह के कारण निन्‍दित होने को मिस्र के भण्‍डार से बड़ा धन समझा: क्योंकि उस की आंखे फल पाने की ओर लगी थीं।
Hebrews 11:27 विश्वास ही से राजा के क्रोध से न डर कर उसने मिस्र को छोड़ दिया, क्योंकि वह अनदेखे को मानों देखता हुआ दृढ़ रहा।
Hebrews 11:28 विश्वास ही से उसने फसह और लोहू छिड़कने की विधि मानी, कि पहिलौठों का नाश करने वाला इस्त्राएलियों पर हाथ न डाले।
Hebrews 11:29 विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से; और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56



शनिवार, 29 दिसंबर 2018

मुद्रिका



      जब विदेश से आए एक व्यक्ति से मेरी जान-पहचान हुई तो मेरा ध्यान उसके विशिष्ट अंग्रेज़ी उच्चारण और छोटे ऊंगली में पहनी हुई मुद्रिका पर गया। बाद में मुझे पता चला कि वह मुद्रिका मात्र आभूषण नहीं था, वह उसके परिवार के इतिहास का भी सूचक है, उस मुद्रिका पर बने पारिवारिक चिन्ह के द्वारा।

      यह परमेश्वर के वचन बाइबल में, हाग्गै की पुस्तक में उल्लेखित मुद्रिका के समान था। पुराने नियम के इस भविष्यद्वक्ता की इस संक्षिप्त सी पुस्तक में हाग्गै लोगों से परमेश्वर के मंदिर के पुनःनिर्माण को फिर से आरंभ करने का आह्वान करता है। उन लोगों को देश से निष्कासित कर दिया गया था, फिर वे लौट कर अपने देश आए और उन्होंने मंदिर के निर्माण का कार्य आरंभ किया। परन्तु शत्रुओं के विरोध के कारण मंदिर निर्माण का कार्य रुक गया था। हाग्गै के सन्देश में यहूदा के अगुवे जरूब्बाबेल के लिए भी प्रतिज्ञा थी कि उसे एक मुद्रिका के समान चुनकर अगुवा नियुक्त किया गया था।

      प्राचीन समय में मुद्रिका को पहचान के माध्यम के समान भी प्रयोग किया जाता था। अपने नाम का हस्ताक्षर करने के स्थान पर लोग अपनी मुद्रिका को गर्म मोम या नर्म मिट्टी पर दबाकर अपना चिन्ह बना देते थे। परमेश्वर की सन्तान होने के नाते हम मसीही भी सँसार पर अपनी छाप छोड़ते हैं – अपने कार्यों, व्यवहार, सुसमाचार प्रचार, आस-पास के लोगों के साथ प्रेम के व्यवहार, सँसार में शोषण की समाप्ति के लिए कार्य करने, आदि के द्वारा।

      हम में से प्रत्येक की अपने विशिष्ट छाप है जो दिखाती है कि हम कैसे परमेश्वर के स्वरूप में सृजे गए हैं और हमें परमेश्वर ने, उसके कार्यों के लिए, क्या-क्या वरदान, इच्छाएँ और बुद्धिमता प्रदान की है। अब यह हम पर है कि अपनी बुलाहट के अनुसार परमेश्वर के लिए इस सँसार में उसकी मुद्रिका का कार्य करें – लोगों पर उसके प्रेम और उद्धार की छाप छोडें। - एमी बाउचर पाई


हम परमेश्वर के वारिस और राजदूत हैं, संसार पर उसके प्रेम की छाप छोड़ने के लिए।

सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। - 2 कुरिन्थियों 5:20

बाइबल पाठ: हाग्गै 2:15-23
Haggai 2:15 अब सोच-विचार करो कि आज से पहिले अर्थात जब यहोवा के मन्दिर में पत्थर पर पत्थर रखा ही नहीं गया था,
Haggai 2:16 उन दिनों में जब कोई अन्न के बीस नपुओं की आशा से जाता, तब दास ही पाता था, और जब कोई दाखरस के कुण्ड के पास इस आशा से जाता कि पचास बर्तन भर निकालें, तब बीस ही निकलते थे।
Haggai 2:17 मैं ने तुम्हारी सारी खेती को लू और गरूई और ओलों से मारा, तौभी तुम मेरी ओर न फिरे, यहोवा की यही वाणी है।
Haggai 2:18 अब सोच-विचार करो, कि आज से पहिले अर्थात जिस दिन यहोवा के मन्दिर की नेव डाली गई, उस दिन से ले कर नौवें महीने के इसी चौबीसवें दिन तक क्या दशा थी? इसका सोच-विचार करो।
Haggai 2:19 क्या अब तक बीज खत्ते में है? अब तक दाखलता और अंजीर और अनार और जलपाई के वृक्ष नहीं फले, परन्तु आज के दिन से मैं तुम को आशीष देता रहूंगा।
Haggai 2:20 उसी महीने के चौबीसवें दिन को दूसरी बार यहोवा का यह वचन हाग्गै के पास पहुंचा, यहूदा के अधिपति जरूब्बाबेल से यों कह :
Haggai 2:21 मैं आकाश और पृथ्वी दोनों को कम्पाऊंगा,
Haggai 2:22 और मैं राज्य-राज्य की गद्दी को उलट दूंगा; मैं अन्यजातियों के राज्य-राज्य का बल तोडूंगा, और रथों को चढ़वैयों समेत उलट दूंगा; और घोड़ों समेत सवार एक दूसरे की तलवार से गिरेंगे।
Haggai 2:23 सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है, उस दिन, हे शालतीएल के पुत्र मेरे दास जरूब्बाबेल, मैं तुझे ले कर अंगूठी के समान रखूंगा, यहोवा की यही वाणी है; क्योंकि मैं ने तुझी को चुन लिया है, सेनाओं के यहोवा की यही वाणी है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 9-12
  • प्रकाशितवाक्य 20



शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

मार्गदर्शन



      मैं एक युवक को जानता हूँ जो प्रार्थनाओं में परमेश्वर से चिन्ह माँगता है। आवश्यक नहीं कि यह गलत हो, परन्तु उसकी प्रार्थनाएं बहुधा उसकी भावनाओं की पुष्टि के लिए होती हैं। उदाहरण के लिए, वह प्रार्थना करेगा, “परमेश्वर यदि आप चाहते हैं कि मैं ‘यह’ करूँ, तो आप ‘ऐसा’ कर दीजिए, और मैं समझ जाऊँगा कि यह आपकी इच्छानुसार है।”

      इससे दुविधा उत्पन्न होती है। जैसी वह प्रार्थनाएं करता है, और जैसा उसे लगता है कि परमेश्वर ने उसे उत्तर दिया है, उससे उसकी धारणा बनी है कि उस अपने भूतपूर्व प्रेमिका के पास लौट जाना चाहिए; परन्तु उसकी भूतपूर्व प्रेमिका उतनी ही दृढ़ता से यह मानती है कि ऐसा करना परमेश्वर की इच्छानुसार नहीं है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु के समय के धार्मिक अगुवों ने प्रभु से माँग की, कि वह किसी चिन्ह देने के द्वारा अपने दावों को प्रमाणित करें “फरीसियों और सदूकियों ने पास आकर उसे परखने के लिये उस से कहा, कि हमें आकाश का कोई चिन्ह दिखा” (मत्ती 16:1)। वे परमेश्वर से मार्गदर्शन नहीं चाह रहे थे, वे प्रभु के ईश्वरीय अधिकार को चुनौती दे रहे थे। प्रभु ने उन लोगों को उत्तर दिया, “इस युग के बुरे और व्यभिचारी लोग चिन्ह ढूंढ़ते हैं पर यूनुस के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा, और वह उन्हें छोड़कर चला गया” (मत्ती 16:4)। प्रभु यीशु का उन्हें दिया गया यह कड़ा प्रत्युत्तर, सामान्य रीति से लागू किए जाने के लिए परमेश्वर से चिन्ह माँगने की निषेधाज्ञा नहीं थी। वरन प्रभु उन्हें अपने वचन में उनके मसीहा होने के विषय दी गई स्पष्ट भविष्यवाणियों की अवहेलना करने का दोषी ठहरा रहे थे।

      परमेश्वर चाहता है कि हम प्रार्थनाओं के द्वारा उससे मार्गदर्शन प्राप्त करें (याकूब 1:5)। उसने हमारे मार्गदर्शन के लिए हम मसीही विश्वासियों को अपना पवित्र आत्मा भी प्रदान किया है (यूहन्ना 14:26); और उसका वचन भी हमें सही मार्ग दिखाता है (भजन 119:105)। हमारे मार्गदर्शन के लिए प्रभु यीशु का जीवन भी उदाहरण है, और प्रभु अपने भक्त बुद्धिमान परामार्श्दाताओं तथा अगुवों के द्वारा भी हमारा मार्गदर्शन करता है।

      हम अपनी प्रार्थनाओं के द्वारा परमेश्वर के साथ और निकट संबंध बना सकते हैं, उसे और उसकी इच्छाओं को निकटता से जान सकते हैं। परमेश्वर से स्पष्ट मार्गदर्शन माँगना बुद्दिमता है, परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि हम जिस रीति से या जिस रूप में उस मार्गदर्शन की अपेक्षा करें परमेश्वर वैसे ही हमें मार्गदर्शन प्रदान करे। परन्तु वह हमें असहाय कभी नहीं छोड़ता है, किसी-न-किसी रीति से सही मार्गदर्शन अवश्य प्रदान करता है। - टिम गुस्ताफ्सन


परमेश्वर की इच्छा जानने का सर्वोत्तम तरीका है परमेश्वर के आज्ञाकारी बने रहना।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। - रोमियों  12:2

बाइबल पाठ: मत्ती 16:1-4
Matthew 16:1 और फरीसियों और सदूकियों ने पास आकर उसे परखने के लिये उस से कहा, कि हमें आकाश का कोई चिन्ह दिखा।
Matthew 16:2 उसने उन को उत्तर दिया, कि सांझ को तुम कहते हो कि खुला रहेगा क्योंकि आकाश लाल है।
Matthew 16:3 और भोर को कहते हो, कि आज आन्‍धी आएगी क्योंकि आकाश लाल और धुमला है; तुम आकाश का लक्षण देखकर भेद बता सकते हो पर समयों के चिन्‍हों का भेद नहीं बता सकते?
Matthew 16:4 इस युग के बुरे और व्यभिचारी लोग चिन्ह ढूंढ़ते हैं पर यूनुस के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा, और वह उन्हें छोड़कर चला गया।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6



शुक्रवार, 6 अप्रैल 2018

क्रूस


   अमेरिका की सबसे अधिक जानी-पहचानी छवियों में से एक है दक्षिणी कैलिफोर्निया में लगा HOLLYWOOD (हॉलीवुड) चिन्ह। सैलानियों के लिए हॉलीवुड के निकट की पहाड़ी पर लगे उस चिन्ह को देखने से चूकना कठिन है। सँसार भर से लोग इस चमक-धमक से भरे शहर की चकाचौंध, वहाँ के मार्ग में सीमेंट में सिनेमा स्टारों के पैरों के निशान देखने कि लिए आते हैं, और उन्हें आशा रहती है कि संभवतः वे मार्ग में चलते हुए किसी सिनेमा स्टार की एक झलक देखने पाएँगे।

   हॉलीवुड की पहाड़ियों में ही लगा किन्तु कम चर्चित एक और चिन्ह भी है “हॉलीवुड पिलग्रिमेज मेमोरियल मॉन्यूमेंट”, जो अनन्त महत्व का एक बहुत ही जाने पहचाने चिन्ह के द्वारा है – एक 32 फुट ऊँचा क्रूस जो पहाड़ी से शहर की ओर रुख किए हुए है। वह क्रूस वहाँ क्रिस्टीन वेदारिल स्टीवेंसन की यादगार में लगाया गया है, जो एक धनी उत्तराधिकारी थीं और जिन्होंने 1920 में पिलग्रिमेज थयेटर की स्थापना की थी, जिसे आज जौन एनसन फोर्ड थयेटर के नाम से जाना जाता है। उसी स्थान पर मसीह यीशु के बारे में नाटक, ‘द पिलग्रिमेज प्ले’ का मंचन होता था।

   ये दोनों चिन्ह एक रोचक तुलना सामने रखते हैं। सिनेमा, अच्छा या बुरा, जैसा भी हो, आता-जाता ही रहेगा। सिनेमा की मनोरंजन के क्षमता, उसके कलाकारों का योगदान, और उसके विषय का समसामयिक होना सदा अस्थायी ही रहेगा।

   परन्तु प्रभु यीशु मसीह का क्रूस हमें इतिहास की वास्तविकता के एक ऐसे नाटक का स्मरण करवाता है जो अपने प्रयोजन तथा महत्व में अनन्त है। मसीह यीशु का कार्य हमारे प्रेमी परमेश्वर पिता की कहानी है जो हम पापी मनुष्यों को पाप से छुड़ाने के लिए हमारे पीछे-पीछे आता है, और हमें सेंट-मेंत में अपनी क्षमा का दान देने की पेशकश करता है। प्रभु के पुनरुत्थान ने मृत्यु को सदा के लिए हरा दिया और हम सबके लिए अनन्त काल का प्रभाव छोड़ा है। प्रभु यीशु के जीवन और मृत्यु तथा मृतकों में से पुनरुत्थान के इस उच्च स्तरीय नाटक की वास्ताविकता की जड़ें इतिहास में जमी हुई है। प्रभु यीशु का क्रूस कभी अपने अर्थ और सामर्थ्य को नहीं खोएगा। - डेनिस फिशर


क्रूस का अर्थ समझने के लिए आपको उसे जानना होगा जो उस पर बलिदान हुआ।

पर ऐसा न हो, कि मैं और किसी बात का घमण्‍ड करूं, केवल हमारे प्रभु यीशु मसीह के क्रूस का जिस के द्वारा संसार मेरी दृष्टि में और मैं संसार की दृष्टि में क्रूस पर चढ़ाया गया हूं। - गलतियों 6:14

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 1:18-31
1 Corinthians 1:18 क्योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है।
1 Corinthians 1:19 क्योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा।
1 Corinthians 1:20 कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया?
1 Corinthians 1:21 क्योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्छा लगा, कि इस प्रचार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे।
1 Corinthians 1:22 यहूदी तो चिन्ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं।
1 Corinthians 1:23 परन्तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है।
1 Corinthians 1:24 परन्तु जो बुलाए हुए हैं क्या यहूदी, क्या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है।
1 Corinthians 1:25 क्योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।
1 Corinthians 1:26 हे भाइयो, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए।
1 Corinthians 1:27 परन्तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे।
1 Corinthians 1:28 और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए।
1 Corinthians 1:29 ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए।
1 Corinthians 1:30 परन्तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा।
1 Corinthians 1:31 ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।


एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 4-6
  • लूका 9:1-17


शनिवार, 15 अप्रैल 2017

जीवन वृक्ष


   हमारे घर के पीछे के आँगन में एक वृक्ष 20 वर्ष से भी अधिक तक लगा रहा। उसकी छाँव में खेलते हुए हमारे चारों बच्चों का बचपन बीता, और उससे आस-पास की गिलहरियों को आश्रय स्थल मिला। परन्तु एक शरद ऋतु के बाद जब बसन्त आने पर उसमें पत्ते नहीं आए, तो हम जान गए कि अब उसके काटे जाने का समय आ गया है। उस वृक्ष को काटने के लिए मैं एक सपताह तक प्रतिदिन मेहनत करता रहा - पहले उसे गिराने के लिए, और फिर उसे ऐसे टुकड़ों में काटने के लिए जिन्हें संभाला जा सके। यह सब करते हुए मुझे बहुत समय मिला कि मैं वृक्षों के बारे में सोच-विचार कर सकूँ।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में वृक्षों के बारे में जो लिखा गया है, उस पर भी मैंने विचार किया। पहला वृक्ष वह था जिस पर वह वर्जित फल लगा था, जिसे खाने के लिए परमेश्वर ने आदम और हव्वा को मना किया था, परन्तु वे उसे खाने के प्रलोभन से अपने आप को रोक नहीं सके (उत्पत्ति 3:6), और उनकी इस अनाज्ञाकारिता ने पाप को संसार में प्रवेश दिया। परमेश्वर ने उस वृक्ष का प्रयोग उनकी वफादारी तथा विश्वासयोग्यता को परखने के लिए किया। फिर भजन 1 में भी वृक्ष का उल्लेख है, जो परमेश्वर के साथ भक्ति का जीवन बिताने से होने वाले फलदायी जीवन को दिखाता है। नीतिवचन 3:18 में बुध्दि को जीवन का वृक्ष कहा गया है।

   परन्तु बाइबल का सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष वह है जिससे कलवरी का वह क्रूस बनाया गया जिस पर प्रभु यीशु को टाँगा गया, जहाँ उन्होंने अपना बलिदान दिया। उस वृक्ष पर हमारा तथा समस्त जगत का उध्दारकर्ता पृथ्वी और आकाश के मध्य टाँगा गया; सारे संसार की सभी पीढ़ीयों, भूत, वर्तमान तथा भविष्य, के सभी लोगों के सभी पापों को लिए हुए वह बलिदान हो गया। वह वृक्ष अनन्तकाल के लिए, सारे संसार के लिए प्रभु परमेश्वर के प्रेम, बलिदान, और उध्दार का चिन्ह बन गया। प्रभु यीशु की उस अत्यंत पीड़ादायक तथा वीभ्तस मृत्यु का स्थान, वह वृक्ष, आज सारे संसार के सभी लोगों के लिए जीवन का वृक्ष है; क्योंकि वहाँ दिए गए प्रभु यीशु के बलिदान से सारे संसार के सभी लोगों के लिए अनन्त जीवन का मार्ग खुल गया। - डेव ब्रैनन


मसीह का क्रूस मनुष्य के पाप की निकृष्टतम स्थिति का, 
तथा परमेश्वर के प्रेम की पराकाष्ठा का प्रतीक है।

वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिये हुए क्रूस पर चढ़ गया जिस से हम पापों के लिये मर कर के धामिर्कता के लिये जीवन बिताएं: उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। - 1 पतरस 2:24

बाइबल पाठ: मत्ती 27:27-35
Matthew 27:27 तब हाकिम के सिपाहियों ने यीशु को किले में ले जा कर सारी पलटन उसके चहुं ओर इकट्ठी की। 
Matthew 27:28 और उसके कपड़े उतारकर उसे किरिमजी बागा पहिनाया। 
Matthew 27:29 और काटों को मुकुट गूंथकर उसके सिर पर रखा; और उसके दाहिने हाथ में सरकण्‍डा दिया और उसके आगे घुटने टेककर उसे ठट्ठे में उड़ाने लगे, कि हे यहूदियों के राजा नमस्‍कार। 
Matthew 27:30 और उस पर थूका; और वही सरकण्‍डा ले कर उसके सिर पर मारने लगे। 
Matthew 27:31 जब वे उसका ठट्ठा कर चुके, तो वह बागा उस पर से उतारकर फिर उसी के कपड़े उसे पहिनाए, और क्रूस पर चढ़ाने के लिये ले चले।
Matthew 27:32 बाहर जाते हुए उन्हें शमौन नाम एक कुरेनी मनुष्य मिला, उन्होंने उसे बेगार में पकड़ा कि उसका क्रूस उठा ले चले। 
Matthew 27:33 और उस स्थान पर जो गुलगुता नाम की जगह अर्थात खोपड़ी का स्थान कहलाता है पहुंचकर। 
Matthew 27:34 उन्होंने पित्त मिलाया हुआ दाखरस उसे पीने को दिया, परन्तु उसने चखकर पीना न चाहा। 
Matthew 27:35 तब उन्होंने उसे क्रूस पर चढ़ाया; और चिट्ठियां डाल कर उसके कपड़े बांट लिए।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 27-29
  • लूका 13:1-22


बुधवार, 5 अक्टूबर 2016

चिन्ह


   मैं स्कॉटलैंड में ग्लासगो से एडिनबरा की ओर सड़क से यात्रा कर रहा था, और उस इलाके में सड़क के दोनों ओर चारागाहों के सुन्दर दृश्य का आनन्द ले रहा था कि तभी एक हास्यास्पद दृश्य ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींचा। कुछ दूरी पर, एक टीले के ऊपर गुलाबी रंग दी गई भेड़ों का एक झुण्ड चर रहा था!

   मैं जानता हूँ कि अपने झुण्ड की पहचान करने के लिए चरवाहे अपने जानवरों पर एक विशेष रंग से कुछ चिन्ह बना देते हैं - लेकिन यहाँ तो चरवाहे ने प्रत्येक भेड़ को पूरा का पूरा ही गुलाबी रंग से रंग दिया था, और वे भेड़ें बिलकुल अलग ही दिखाई दे रही थीं। उस इलाके में सभी जानते होंगे कि उन भेड़ों का चरवाहा कौन है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों को भी अपने भेड़ें कहा है, और उनकी पहचान के लिए एक विशेष चिन्ह भी दिया है। मसीह यीशु के अनुयायी का यह विशेष चिन्ह क्या है? कैसे पहचान करी जा सकती है कि कौन प्रभु यीशु का जन है?

   यूहन्ना रचित सुसमाचार में, उस अच्छे चरवाहे - प्रभु यीशु ने यह पहचान चिन्ह बताया है - प्रेम: "मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो" (यूहन्ना 13:34-35)। अपने व्यवहार और वचन, दोनों ही से एक मसीही विश्वासी को अपने आस-पास के सभी लोगों से प्रेम दिखाना चाहिए, जैसा कि प्रेरित युहन्ना ने अपनी पत्री में लिखा है (1 यूहन्ना 4:11)।

   औरों के प्रति एक मसीही विश्वासी का प्रेम वैसा ही प्रत्यक्ष और सर्वविदित पहचान चिन्ह होना चाहिए जैसा स्कॉटलैंड की उन भेड़ों का गुलाबी रंग उनके चरवाहे का था। - डेव ब्रैनन


मसीही विशवासी होने के नाते, हमारा प्रेम भरा आचरण 
हमें भीड़ में अलग ही प्रकट करने वाला होना चाहिए।

हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - 1 यूहन्ना 4:11 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:7-18
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं। 
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी। 
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। 
John 10:10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं। 
John 10:11 अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। 
John 10:12 मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है। 
John 10:13 वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उसको भेड़ों की चिन्‍ता नहीं। 
John 10:14 अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं। 
John 10:15 इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं। 
John 10:16 और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा। 
John 10:17 पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूं, कि उसे फिर ले लूं। 
John 10:18 कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूं: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25
  • फिलिप्पियों 1


शनिवार, 30 जुलाई 2016

पहचान चिन्ह


   आयरलैण्ड के पश्चिमी तट के निकट एरन द्वीप-समूह है जो अपने खूबसूरत ऊनी स्वेटरों के लिए प्रसिद्ध है। उन स्वेटरों को बनाते समय भेड़ के ऊन के द्वारा ही नमूने स्वेटरों में बुन दिए जाते हैं। इन में से कई नमूने वहाँ की संस्कृति और पारंपरिक बातों पर आधारित होते हैं, लेकिन कुछ अन्य नमूने विशिष्ट एवं व्यक्तिगत होते हैं। उन द्वीपों में बसने वाले प्रत्येक परिवार के अपने ही विशिष्ट पहचान चिन्ह (ट्रेडमार्क) होते हैं, जो परस्पर इतने भिन्न होते हैं कि कहा जाता है कि वहाँ यदि कोई मछुआरा डूब कर मर भी जाए तो उसके पहने हुए स्वेटर से उसके परिवार का पता चल सकता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा लिखी गई उसकी प्रथम पत्री में भी परमेश्वर के घराने के लोगों, अर्थात मसीही विश्वासियों के कुछ पहचान चिन्ह दिए गए हैं। 1 यूहन्ना 3:1 में प्रेरित यूहन्ना इस बात को सुनिश्चित करता है कि हम मसीही विश्वासी परमेश्वर के घराने के लोग हैं: "देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना"; फिर वह परमेश्वर की सन्तान कहलाए जाने वाले लोगों के पहचान चिन्ह बताता है, जिन में से एक है, "हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है" (1 यूहन्ना 4:7)।

   क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है, इसलिए परमेश्वर के हृदय को प्रतिबिंबित करने का मुख्य तरीका है उस प्रेम को प्रदर्शित करना जो परमेश्वर का प्रमुख गुण है। क्योंकि यह प्रेम हम मसीही विश्वासियों के स्वर्गीय परिवार का पहचान चिन्ह है, इसलिए होने दें कि आज आप इस पहचान चिन्ह को अपने जीवन से प्रदर्शित करें और दूसरों तक इसे पहुँचाने का माध्यम बनें। - बिल क्राउडर


मसीह यीशु के अनुयायियों में प्रेम ही पहचान चिन्ह के रूप में संसार को दिखाई देना चाहिए।

मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो। - यूहन्ना 13:34-35

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-16
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 51-53
  • रोमियों 2


मंगलवार, 14 जुलाई 2015

चेतावनी


   उरूगुऐ राष्ट्र के एक रेतीले समुद्र-तट पर आंशिक रूप से रेत में दबी तथा आकाश की ओर उठी हुई कॉन्क्रीट से बनी विशाल ऊँगलियाँ हैं। इसे स्थानीय लोग डूब जाने वालों का स्मारक, "ला मनो" अर्थात "हाथ" कहते हैं। इस स्मारक को चिली देश के कलाकार मारियो इर्राज़बल ने तैरने वालों को डूबने के खतरे के बारे में सचेत करने के लिए बनाया था। यद्यपि यह चेतावनी चिन्ह अब सैलानियों के लिए आकर्षण का स्थान बन गया है, परन्तु आज भी इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र में तैरने जाने वालों को समुद्र के जोखिम के बारे में चेतावनी देना ही है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी परमेश्वर ने हमारे लिए अनेक चेतावनी चिन्ह रखे हैं। बाइबल में इब्रानियों नामक पुस्तक हमारे आत्मा के लिए जोखिमों के बारे में बताती है; जैसे: "हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए" (इब्रानियों 3:12-13)। मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा किए हुए कनान देश जा रहे इस्त्राएलियों का परमेश्वर और उसकी बातों के प्रति अविश्वास और बलवा इस पद का संदर्भ है।

   यद्यपि इस्त्रएलियों के साथ यह घटना इब्रानियों की पुस्तक के लिखे जाने से कई शताबदियों पूर्व घटित हुई थी, उस घटना के आत्मिक सिद्धांत अब भी उतने ही महत्वपूर्ण तथा मान्य हैं जितने उस समय और इब्रानियों की पुस्तक लिखे जाने के समय थे। जो शिक्षा तथा चेतावनी परमेश्वर ने हमारे लिए यहाँ रखी है वह है पाप के कारण उत्पन्न होने वाली मनों की कठोरता, जिसका ना केवल स्वयं हमें प्रतिरोध करना है, वरन दूसरों को भी इसके विषय में सचेत करते रहना है।

   चेतावनी चिन्ह हमें सुरक्षित रखने के लिए दिए जाते हैं। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उसने अपने जीवते वचन बाइबल में हमारे लाभ और सुरक्षा के लिए चेतावनियाँ दी हैं। यह हमारे प्रति उसके प्रेम का सूचक है और हमारे द्वारा उसकी आराधना करने का विषय। उसकी चेतावनियों को नज़रंदाज़ ना करें वरन उन्हें गंभीरता-पूर्वक लें। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमारे प्रति अपने प्रेम के अन्तर्गत अपने वचन के द्वारा हमारी सुरक्षा तथा संभाल की चेतावियाँ हम तक पहुँचाता है।

पर तुम चौकस रहो: देखो, मैं ने तुम्हें सब बातें पहिले ही से कह दी हैं। - मरकुस 13:23

बाइबल पाठ: इब्रानियों 3:1-13
Hebrews 3:1 सो हे पवित्र भाइयों तुम जो स्‍वर्गीय बुलाहट में भागी हो, उस प्रेरित और महायाजक यीशु पर जिसे हम अंगीकार करते हैं ध्यान करो। 
Hebrews 3:2 जो अपने नियुक्त करने वाले के लिये विश्वास योग्य था, जैसा मूसा भी उसके सारे घर में था। 
Hebrews 3:3 क्योंकि वह मूसा से इतना बढ़ कर महिमा के योग्य समझा गया है, जितना कि घर का बनाने वाला घर से बढ़ कर आदर रखता है। 
Hebrews 3:4 क्योंकि हर एक घर का कोई न कोई बनाने वाला होता है, पर जिसने सब कुछ बनाया वह परमेश्वर है। 
Hebrews 3:5 मूसा तो उसके सारे घर में सेवक की नाईं विश्वास योग्य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होने वाला था, उन की गवाही दे। 
Hebrews 3:6 पर मसीह पुत्र की नाईं उसके घर का अधिकारी है, और उसका घर हम हैं, यदि हम साहस पर, और अपनी आशा के घमण्‍ड पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। 
Hebrews 3:7 सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो। 
Hebrews 3:8 तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। 
Hebrews 3:9 जहां तुम्हारे बाप दादों ने मुझे जांच कर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे। 
Hebrews 3:10 इस कारण मैं उस समय के लोगों से रूठा रहा, और कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्‍होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना। 
Hebrews 3:11 तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएंगे। 
Hebrews 3:12 हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। 
Hebrews 3:13 वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12
  • प्रेरितों 19:1-20


रविवार, 2 नवंबर 2014

सचेत


   एक प्रातः मैं मूँह-अंधेरे ही अपनी कार चला कर अपने काम पर जा रहा था, मैं अपने सामने अचानक ही आई एक बड़ी सी भूरी चीज़ से चौंक गया और फिर साथ ही मेरी गाड़ी के किसी चीज़ से टकराने की आवाज़ आई। उस समय मैं खाली सड़क पर 70 मील प्रति घंटे की रफतार से गाड़ी चला रहा था और मेरी गाड़ी की साईड किसी बड़े से जानवर से लगी थी; सौभाग्यवश, ना मेरी गाड़ी और संभवतः ना ही उस जानवर को कोई नुकसान पहुँचा था, क्योंकि पीछे का दृश्य दिखाने वाले दर्पण में सड़क पर कोई ना तो कोई खून और ना ही कोई गिरा हुआ जानवर दिखाई दिया। लेकिन इस घटना ने मुझे हिला दिया; मैं तो अपनी कार हमेशा की तरह खाली सड़क पर निश्चिंत होकर चला रहा था, यह जानते हुए कि इस समय पर सड़क पर बहुत ही कम यात्री होते हैं। लेकिन उस बात ने मेरा ध्यान गाड़ी चलाने पर केंद्रित कर दिया और मैं बिलकुल सचेत होकर गाड़ी चलाने लगा तथा बहुत देर तक अपने दिल की बढ़ी हुई धड़कन को काबू में लाने का प्रयास करता रहा। एक दो पल का ही अन्तर था, वरना मेरी गाड़ी की साईड नहीं सामने का हिस्सा उस जानवर से टकराता और दोनों के ही लिए तब परिणाम बहुत भिन्न हो सकता था। उस दिन सचेत होकर गाड़ी चलाने की वह वास्तव में बहुत अप्रीय चेतावनी थी।

   संसार भी अपनी रफतार में अपने चुने हुए मार्ग पर निश्चिंत दौड़ा जा रहा है, इस बात से बेपरवाह कि उसके न्याय का एक दिन निर्धारित है और प्रतिपल निकट आता जा रहा है। क्योंकि जीवन वैसा ही चल रहा है जैसा रोज़ चलता है, इसलिए लोग सोचते हैं कि कभी कुछ भिन्न होगा ही नहीं। लेकिन अचानक ही वह दिन उनके सामने आकर खड़ा हो जाएगा और तब निर्णय बदलने का समय भी नहीं रहेगा। परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए अन्त के दिनों के चिन्ह एक एक करके पूरे होते जा रहे हैं, जो हमारे लिए प्रमाण है कि उस न्याय के दिन का समय बहुत निकट है। सारे संसार में मसीह यीशु और मसीही विश्वासियों के प्रति बढ़ता हुआ विरोध और सताव भी इन पूरे होने वाले चिन्हों में से एक है। संसार जाने या ना जाने, बाईबल की बात माने या ना माने, परन्तु शैतान जानता और मानता है कि उसका समय पूरा होने को है और वह पूरे जी-जान से सच्चे जीवते परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह के प्रति विरोध को बढ़ाने और उसके अनुयायियों को गिराने, फंसाने, सताने में लगा हुआ है।

   प्रभु यीशु ने अपने चेलों को सचेत किया कि वे जब इन बातों तथा घटनाओं को होते हुए देखें तो समझ जाएं कि अन्त का समय निकट है (मत्ती 24)। यह समय हम मसीही विश्वासियों के लिए अपने प्रभु यीशु की निकटता में बढ़ने, उसके वचन बाइबल को दृढ़ता और विश्वास से थामे रहने एवं उसे अपने मन-मस्तिष्क में बसा लेने तथा अपने प्रभु के निर्देशों के अनुसार प्रभु यीशु में संसार के लिए पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार का भरपूरी से प्रचार करने का समय है। इन अन्त के दिनों में हमारी सुरक्षा तथा आशीष सचेत रहने तथा प्रभु यीशु की निकटता में बने रहने और उसकी आज्ञाओं के पालन में ही है।


मसीही जीवन आत्मिक युद्ध का जीवन है - तैयार रहें।

इसी रीति से जब तुम इन सब बातों को देखो, तो जान लो, कि वह निकट है, वरन द्वार ही पर है। - मत्ती 24:33

बाइबल पाठ: मत्ती 24:4-14
Matthew 24:4 यीशु ने उन को उत्तर दिया, सावधान रहो! कोई तुम्हें न भरमाने पाए। 
Matthew 24:5 क्योंकि बहुत से ऐसे होंगे जो मेरे नाम से आकर कहेंगे, कि मैं मसीह हूं: और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:6 तुम लड़ाइयों और लड़ाइयों की चर्चा सुनोगे; देखो घबरा न जाना क्योंकि इन का होना अवश्य है, परन्तु उस समय अन्‍त न होगा। 
Matthew 24:7 क्योंकि जाति पर जाति, और राज्य पर राज्य चढ़ाई करेगा, और जगह जगह अकाल पड़ेंगे, और भुईंडोल होंगे। 
Matthew 24:8 ये सब बातें पीड़ाओं का आरम्भ होंगी। 
Matthew 24:9 तब वे क्‍लेश दिलाने के लिये तुम्हें पकड़वाएंगे, और तुम्हें मार डालेंगे और मेरे नाम के कारण सब जातियों के लोग तुम से बैर रखेंगे। 
Matthew 24:10 तब बहुतेरे ठोकर खाएंगे, और एक दूसरे से बैर रखेंगे। 
Matthew 24:11 और बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता उठ खड़े होंगे, और बहुतों को भरमाएंगे। 
Matthew 24:12 और अधर्म के बढ़ने से बहुतों का प्रेम ठण्‍डा हो जाएगा। 
Matthew 24:13 परन्तु जो अन्‍त तक धीरज धरे रहेगा, उसी का उद्धार होगा। 
Matthew 24:14 और राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्‍त आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यूहन्ना 1-3


शुक्रवार, 12 अप्रैल 2013

संकेत


   मेरे पति जे और मैं कार से जे के पिता से मिलने निकले जो दक्षिण कैरोलाइना में रहते थे। मार्ग अच्छा था और हम बिना किसी परेशानी के बढ़ते जा रहे थे। जब हम टेनिस्सी के मनोहर पहाड़ी रास्ते से होकर निकलने लगे तो कुछ समय पश्चात मुझे मार्ग के किनारे लगे संकेत दिखने आरंभ हो गए जो इस मार्ग को छोड़कर दूसरे मार्ग की ओर जाने को कह रहे थे। लेकिन जे फिर भी उसी मार्ग पर चलते जा रहे थे, इसलिए मैंने भी यह मान लिया कि ये संकेत हमारे लिए नहीं हैं, उन संकेतों के निर्देश हम पर लागू नहीं होते। लेकिन उत्तरी कैरोलाइना की सीमा के निकट आते आते मार्ग रुका हुआ मिला और वहां लिखा था कि आगे पहाड़ी मलबा गिरने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया है। जे को बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने क्षुब्ध होकर कहा, "पहले से ही इसके संकेत क्यों नहीं दीए गए? अब कितना पीछे जाकर मार्ग बदलना पड़ेगा।" मैंने कहा, "तुमने देखा नहीं; मार्ग में तो बहुत से संकेत लगे हुए थे!" तो जे बोले, "नहीं, मैंने संकेतों की ओर ध्यान नहीं दिया; लेकिन तुमने मुझे क्यों नहीं बताया?" मेरा उत्तर था, "मैंने समझा तुम देख रहे हो और सही मार्ग जानते हो।" अब हम यह घटना अपने मित्रों को एक मनोरंजक कहानी के रूप में सुनाते हैं।

   लेकिन इस जीवन से आने वाले अनन्त जीवन को ले जाने वाले सही मार्ग के चुनाव के संकेतों की अनदेखी कोई मनोरंजक घटना नहीं होगी और ना ही फिर कोई वापसी का मार्ग होगा। मानव जाति के संपूर्ण इतिहास में परमेश्वर सभी लोगों को एक के बाद एक अनेक संकेत देता आया है कि सही मार्ग कौन सा है और किस पर उन्हें चलना चाहिए, लेकिन अधिकांश लोग उन संकेतों की अन्देखी कर के अपने ही बनाए और चुने मार्ग पर चलते जा रहे हैं।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन का मार्ग बनाकर दिया। अपने जीवन काल के समय में वह इस्त्राएल के लिए एक चिन्ह और संकेत थे (लूका 11:30)। किंतु इस्त्राएल के धार्मिक अगुवों ने उनकी चेतावनियों की अनदेखी करी और अपनी गलती के बारे में सुनना नहीं चाहा (पद 43, 45)। प्रभु यीशु ने संसार के अन्त और मानव जाति के न्याय के संबंध में भी अनेक चिन्ह बताए जो आज हमारे समय में एक के बाद एक पूरे होते जा रहे हैं। यह दिखाता है कि प्रभु यीशु का दूसरा आगमन और संसार का न्याय बहुत निकट है; पापों से पश्चाताप और उद्धार पाने का समय अब थोड़ा ही रह गया है।

   आज हम भी ऐसे ही हो सकते हैं। जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है तो हम गलत मार्ग से सही मार्ग पर आने की चेतावनी संकेतों की अनदेखी करते रहते हैं। मार्ग का सुगम, तथा बाहरी दृश्य का मनोहर होना भी इस बात का निश्चय नहीं है कि मार्ग सही है। संकेतों की अनदेखी ना करें, चिन्हों पर ध्यान दें और उन्हें पहचाने, हाथ से निकला अवसर फिर नहीं मिलेगा। प्रभु यीशु आज एक प्रेमी उद्धारकर्ता के रूप में आपको बुला रहा है; ना हो कि उससे आपकी अगली मुलाकात संसार के न्यायी के रूप में हो। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर अपनी चेतावनियां हमें दण्डित करने के लिए नहीं, हमें सुरक्षित रखने के लिए देता है।

जैसा यूनुस नीनवे के लोगों के लिये चिन्ह ठहरा, वैसा ही मनुष्य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा। - लूका 11:30 

बाइबल पाठ: लूका 11:29-45
Luke 11:29 जब बड़ी भीड़ इकट्ठी होती जाती थी तो वह कहने लगा; कि इस युग के लोग बुरे हैं; वे चिन्ह ढूंढ़ते हैं; पर यूनुस के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा।
Luke 11:30 जैसा यूनुस नीनवे के लोगों के लिये चिन्ह ठहरा, वैसा ही मनुष्य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा।
Luke 11:31 दक्‍खिन की रानी न्याय के दिन इस समय के मनुष्यों के साथ उठ कर, उन्हें दोषी ठहराएगी, क्योंकि वह सुलैमान का ज्ञान सुनने को पृथ्वी की छोर से आई, और देखो यहां वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है।
Luke 11:32 नीनवे के लोग न्याय के दिन इस समय के लोगों के साथ खड़े हो कर, उन्हें दोषी ठहराएंगे; क्योंकि उन्होंने यूनुस का प्रचार सुनकर मन फिराया और देखो, यहां वह है, जो यूनुस से भी बड़ा है।
Luke 11:33 कोई मनुष्य दीया बार के तलघरे में, या पैमाने के नीचे नहीं रखता, परन्तु दीवट पर रखता है कि भीतर आने वाले उजियाला पाएं।
Luke 11:34 तेरे शरीर का दीया तेरी आंख है, इसलिये जब तेरी आंख निर्मल है, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला है; परन्तु जब वह बुरी है, तो तेरा शरीर भी अन्‍धेरा है।
Luke 11:35 इसलिये चौकस रहना, कि जो उजियाला तुझ में है वह अन्‍धेरा न हो जाए।
Luke 11:36 इसलिये यदि तेरा सारा शरीर उजियाला हो, ओर उसका कोई भाग अन्‍धेरा न रहे, तो सब का सब ऐसा उलियाला होगा, जैसा उस समय होता है, जब दीया अपनी चमक से तुझे उजाला देता है।
Luke 11:37 जब वह बातें कर रहा था, तो किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे यहां भेजन कर; और वह भीतर जा कर भोजन करने बैठा।
Luke 11:38 फरीसी ने यह देखकर अचम्भा दिया कि उसने भोजन करने से पहिले स्‍नान नहीं किया।
Luke 11:39 प्रभु ने उस से कहा, हे फरीसियों, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर तो मांजते हो, परन्तु तुम्हारे भीतर अन्‍धेर और दुष्‍टता भरी है।
Luke 11:40 हे निर्बुद्धियों, जिसने बाहर का भाग बनाया, क्या उसने भीतर का भाग नहीं बनाया?
Luke 11:41 परन्तु हां, भीतरवाली वस्‍तुओं को दान कर दो, तो देखो, सब कुछ तुम्हारे लिये शुद्ध हो जाएगा।
Luke 11:42 पर हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सुदाब का, और सब भांति के साग-पात का दसवां अंश देते हो, परन्तु न्याय को और परमेश्वर के प्रेम को टाल देते हो: चाहिए तो था कि इन्हें भी करते रहते और उन्हें भी न छोड़ते।
Luke 11:43 हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम आराधनालयों में मुख्य मुख्य आसन और बाजारों में नमस्‍कार चाहते हो।
Luke 11:44 हाय तुम पर! क्योंकि तुम उन छिपी कब्रों के समान हो, जिन पर लोग चलते हैं, परन्तु नहीं जानते।
Luke 11:45 तब एक व्यवस्थापक ने उसको उत्तर दिया, कि हे गुरू, इन बातों के कहने से तू हमारी निन्‍दा करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54