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सोमवार, 12 अप्रैल 2021

जीवन यात्रा

 

          अपनी पुस्तक The Call में ऑस गिन्निस इंग्लैंड के भूतपूर्व प्रधानमंत्री, विंस्टन चर्चिल के जीवन की एक घटना बताते हैं। चर्चिल अपने मित्रों के साथ दक्षिणी फ्रांस में मित्रों के साथ थे। एक ठंडी रात्रि के समय वे आग के पास बैठे हुए थे, और आग में पड़े हुए चीढ़ के लट्ठों को जलते हुए सुन रहे थे; उनके जलने से उनमें से कड़कने, चटकने और फुसफुसाने की आवाज़ें आ रही थीं। अचानक ही उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में गुर्राती हुई सी आवाज़ में कहा, “मैं समझ सकता हूँ कि ये लट्ठे इस प्रकार की आवाजें क्यों निकाल रहे हैं; मैंने भी जलन का अनुभव किया है।”

          हमारी जीवन यात्रा में कठिनाइयाँ, निराशाएं, खतरे, विपत्तियाँ, हमारी अपनी गलतियों का परिणाम हो सकते हैं, किन्तु फिर भी वे हमें जलन देने वाले अनुभव हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियाँ, धीरे-धीरे हमारे हृदय में से शान्ति और आनन्द को छीन लेती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब दाऊद ने अपने ही पाप के कारण उसके जीवन को खोखला कर देने वाले परिणामों को अनुभव किया, तो उसने अपने इस अनुभव के बारे में लिखा,जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई। क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई” (भजन 32:3-4)।

          ऐसी कठिन परिस्थितियों में हम सहायता तथा आशा के लिए किस की ओर मुड़ते हैं? प्रेरित पौलुस ने, जिसकी मसीही जीवन यात्रा सेवकाई के बोझों और दुखों से भरी हुई थी, लिखा “हम चारों ओर से क्लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरुपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते” (2 कुरिन्थियों 4:8-9)।

          यह किस प्रकार कार्य करता है? जब हम प्रभु यीशु में विश्राम लेते हैं, तो वह अच्छा चरवाहा हमारे जी में जी ले आता है (भजन 23:3), और जीवन यात्रा के अगले चरण के लिए हमें सामर्थ्य प्रदान करता है। उसका हम से वायदा है कि हमारी जीवन यात्रा के हर कदम में वह हमारे साथ बना रहेगा, और जीवन यात्रा के पूरे होने तक हर कदम में साथ चलता रहेगा (इब्रानियों 13:5)। - बिल क्राऊडर

 

प्रभु इस जीवन यात्रा में मेरा हाथ थामे हुए मेरा मार्गदर्शन करते हुए, मुझे लिए चल।


तुम्हारा स्वभाव लोभरहित हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: भजन 32

भजन संहिता 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढाँपा गया हो।

भजन संहिता 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।

भजन संहिता 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हड्डियां पिघल गई।

भजन संहिता 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।

भजन संहिता 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के सामने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।

भजन संहिता 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।

भजन संहिता 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।

भजन संहिता 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।

भजन संहिता 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।।

भजन संहिता 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।

भजन संहिता 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54

सोमवार, 15 फ़रवरी 2021

विश्राम

 

          अन्ततः सत्रह वर्षीय रैंडी गार्डनर ने वह कर दिया जो उसने ग्यारह दिन और पच्चीस मिनिट तक नहीं किया था – वह पड़कर सो गया। उसका प्रयास था कि वह गिन्निस बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में किसी भी मनुष्य के सबसे अधिक समय तक लगातार जागते रहने के कीर्तिमान को अपने नाम कर ले। जागते रहने के लिए वह कभी कुछ सॉफ्ट-ड्रिंक्स पीता, कभी बास्केटबॉल खेलता, या अन्य किसी बात में अपने आप को व्यस्त करता, और इस प्रकार डेढ़ सप्ताह तक रैंडी नींद को भगाता रहा; अन्ततः उसके थक कर सो जाने के समय तक उसके स्वाद, सूंघने, और सुनने के शक्ति बहुत गड़बड़ा गई थी। दशकों बाद, उसे बारंबार नींद न आने की बीमारी के प्रबल समयों का सामना भी करना पड़ा। उसने वह कीर्तिमान तो अपने नाम कर लिया, लेकिन एक प्रकट बात की पुष्टि भी कर दी – उचित मात्र और सही समय पर विश्राम भी मनुष्य के लिए आवश्यक है।

          हम में से बहुतेरे हैं जो रात में अच्छे विश्राम को पाने के लिए संघर्ष करते हैं। रैंडी ने तो जान-बूझकर अपने आप को सो जाने से रोके रखा, परन्तु कई बार, अनेकों कारणों से, हम सोना चाहते हुए भी ठीक से सोने नहीं पाते हैं; हमारी अनेकों बातों के लिए चिन्ताएँ, जैसे कि हमें अभी क्या कुछ करना शेष है; दूसरे लोग हम से जो अपेक्षाएँ रखते हैं उन पर पूरा उतरने के प्रयास, जीवन की तीव्र गति के अनुसार औरों के साथ स्पर्धा में अथक चलते रहने के प्रयास, आदि, हमें अपने भय और चिंताओं को छोड़कर शांत होकर विश्राम करने से रोके रखते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार लिखता है “यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनाने वालों को परिश्रम व्यर्थ होगा” (भजन 127:1)। हमारा अपने आप को थका देने वाले प्रयास करते रहना, हमारा सारा परिश्रम व्यर्थ है, जब तक कि हम परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य न करें; क्योंकि वह हम से हमारी सभी आवश्यकताओं के अनुसार हमें सब कुछ प्रदान करने का वायदा करता है – उचित विश्राम भी (पद 2)। परमेश्वर का यह वायदा उसके सभी बच्चों से है। वह कहता है कि हम अपने बोझ और चिताएँ उस पर डाल दें, और उसमें विश्राम लें। - विन्न कोलियर

 

परमेश्वर पर भरोसा रखने से हम चिंता से मुक्त विश्राम में आ सकते हैं।


हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: भजन 127:1-2

भजन 127:1 यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनाने वालों को परिश्रम व्यर्थ होगा। यदि नगर की रक्षा यहोवा न करे, तो रखवाले का जागना व्यर्थ ही होगा।

भजन 127:2 तुम जो सवेरे उठते और देर कर के विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद दान करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • लैव्यव्यवस्था 17-18
  • मत्ती 27:27-50

सोमवार, 15 जून 2020

प्रेम के योग्य


     मेरी बेटी एक प्रातः तैयार हो रही थी, और अचानक ही बड़े उत्साह और आनन्द के साथ ऊँची आवाज़ में बोली “Lovable (प्रेम-योग्य);” मुझे समझ नहीं आया उसका अभिप्राय क्या था। मेरे चहरे के भाव को देखकर उसने अपनी टी-शर्ट पर लिखे हुए शब्द की ओर संकेत किया, जहाँ पर बड़े अक्षरों में लिखा था, “Lovable (प्रेम के योग्य)।” मैंने उसे गले से लगाया, और वह आनन्द से मुस्कुराने लगी, और जब मैंने उस से कहा, “तुम प्रेम के योग्य हो” तो उसकी मुस्कराहट और भी बड़ी हो गई; और वह इस शब्द को बारंबार दोहराती हुई कूदती हुई बाहर चली गई।

     मैं कोई सिद्ध पिता तो नहीं हूँ, परन्तु वह पल सिद्ध पल था। उस स्वाभाविक, मनोहर वार्तालाप में मैंने अपने बेटी के दमकते हुए चेहरे में देखा कि बिना किसी शर्त के मिलने वाले प्रेम को प्राप्त करना कैसा होता है: वह पूर्ण आनन्द की छवि थी। वह अच्छे से समझ रही थी कि उस की शर्ट पर लिखी बात उसके प्रति उसके पिता की भावनाओं से पूर्णतः मेल खा रही थी।

     हम में से कितने हैं जो अपने हृदय से इस बात पर पूर्ण विश्वास रखते हैं कि हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमें असीम और अनंतकालीन प्रेम करता है? कभी-कभी हम इस सत्य को लेकर संघर्ष करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि इस्राएलियों ने भी किया। वे सोचने लगे कि क्या उन की परीक्षाओं का यह अर्थ है कि अब परमेश्वर उन से प्रेम नहीं करता है। परन्तु यिर्मयाह 31:3 में भविष्यद्वक्ता ने उन्हें वह स्मरण करवाया जो परमेश्वर ने उन से पहले ही कह रखा था, “मैंने तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ।”

     हमारी भी लालसा ऐसे ही सिद्ध प्रेम को पाने की होती है। परन्तु जो घाव, निराशाएं और गलतियाँ हम अनुभव करते हैं, वे हमें अपने आप को उस ‘प्रेम के योग्य’ समझ पाने में आड़े आती हैं। परन्तु हमारा प्रभु परमेश्वर अपनी बाहें फैलाए हमें अपने पास आ कर उस प्रेम को अनुभव करने और उसके सिद्ध प्रेम में विश्राम करने के लिए आमंत्रित करता है। - एडम होल्ज़

 

हमारे परमेश्वर पिता के समान कोई हम से प्रेम नहीं कर सकता है।


मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा। - यशायाह 43:4

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 31:1-6

यिर्मयाह 31:1 उन दिनों में मैं सारे इस्राएली कुलों का परमेश्वर ठहरूंगा और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यही वाणी है।

यिर्मयाह 31:2 यहोवा यों कहता है: जो प्रजा तलवार से बच निकली, उन पर जंगल में अनुग्रह हुआ; मैं इस्राएल को विश्राम देने के लिये तैयार हुआ।

यिर्मयाह 31:3 यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है।

यिर्मयाह 31:4 हे इस्राएली कुमारी कन्या! मैं तुझे फिर बसाऊंगा; वहां तू फिर सिंगार कर के डफ बजाने लगेगी, और आनन्द करने वालों के बीच में नाचती हुई निकलेगी।

यिर्मयाह 31:5 तू शोमरोन के पहाड़ों पर अंगूर की बारियां फिर लगाएगी; और जो उन्हें लगाएंगे, वे उनके फल भी खाने पाएंगे।

यिर्मयाह 31:6 क्योंकि ऐसा दिन आएगा, जिस में एप्रैम के पहाड़ी देश के पहरुए पुकारेंगे: उठो, हम अपने परमेश्वर यहोवा के पास सिय्योन को चलें।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21


शनिवार, 16 मई 2020

अनुसरण



     हाई-स्कूल के दिनों में लंबी दौड़ के मेरे प्रशिक्षक ने एक बार मुझे सलाह दी, “सबसे आगे रहने का प्रयास मत करो। जो सबसे आगे दौड़ते रहने का प्रयास करते हैं, वे शीघ्र ही थक कर पीछे छुट जाते हैं।” इसके स्थान पर, उनका सुझाव था कि सब से तेज़ दौड़ने वाले धावकों के निकट रहने का प्रयास करूं। उन धावकों द्वारा बनाई गई गति के अनुसार दौड़ते रहने से मैं अपने मानसिक और शारीरिक शक्ति उस समय के लिए बचाए रखूँगी, जब दौड़ को समाप्त करने के लिए मुझे सब से अधिक आवश्यकता होगी।

     आगे रहना, अगुवाई करना, थका देने वाला हो सकता है; किन्तु पीछे रह कर अनुसरण करना स्वतंत्र करता है। अपने प्रशिक्षक की इस बात का पालन करने से मैंने देखा की मेरे दौड़ने में सुधार आया; परन्तु इसी बात को अपने मसीही जीवन में लागू करने में मुझे बहुत समय लगा। मेरे अपने जीवन में मैं यह सोचा करती थी कि मसीही जीवन जीने का अर्थ है बहुत प्रयास करना। मैंने अपनी ही धारणाएं बना लीं थीं कि मसीही विश्वासी को क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए और उन्हीं को पूरा करने के थका देने वाले प्रयासों में मैं मसीह यीशु में पाए जाने वाले आनंद और स्वतंत्रता (यूहन्ना 8:32, 36) को खो दे रही थी।

     परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें यह नहीं सिखाती है कि हमें अपने जीवनों को स्वयं ही निर्देशित करना होगा; और न ही प्रभु यीशु  ने कोई ‘स्वयं-का-सुधार’ अभियान आरम्भ किया था। वरन उन्होंने यही प्रतिज्ञा दी थी कि उन का अनुसरण करने से हमें वह विश्राम मिलेगा जिसके हम खोजी हैं (मट्टी 11:25-28)। उस समय के अन्य अनेकों धर्म-शिक्षकों की शिक्षाओं के विपरीत कि पवित्र शास्त्र का अध्ययन और उन शिक्षकों के द्वारा प्रचलित किए गए अनेकों नियमों का पालन कठोर अनुशासन और प्रयास से करें, प्रभु यीशु ने एक बहुत सहज और सीधी से बात अपने शिष्यों को सिखाई – उन्हें जान लेने से ही परमेश्वर को जाना जा सकता है (पद 27)। जब हम सच्चे और समर्पित मन से प्रभु यीशु के खोजी होते हैं, तो हम पाते हैं कि वह हमारे बोझ उठा लेता है, और हमें विश्राम देता है, हमारे जीवन बदल देता है (पद 28-30)।

     हमारे विनम्र और दीन अगुवे का अनुसरण करना कभी बोझिल नहीं होता है (पद 29); क्योंकि वही अनंत आशा और पापों से चंगाई का मार्ग है। उस का अनुसरण करने से ही हम उसके प्रेम में विश्राम और शैतान की युक्तिओं से स्वतंत्रता पाते हैं। - मोनिका ब्रैंड्स

मसीह यीशु का अनुसरण करने में ही वास्तविक स्वतंत्रता है।

और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा। सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे। - यूहन्ना 8:32, 36

बाइबल पाठ: मत्ती 11:25-30
मत्ती 11:25 उसी समय यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है।
मत्ती 11:26 हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा।
मत्ती 11:27 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे।
मत्ती 11:28 हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।
मत्ती 11:29 मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे।
मत्ती 11:30 क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजाओं 24-25
  • यूहन्ना 5:1-24



सोमवार, 8 जुलाई 2019

विश्राम



      एक इतवार, मैं हमारी उत्तरी लंडन के रिहायशी इलाके से होकर बहने वाली छोटी सी नदी के किनारे खड़ी थी और उसे निहार रही थी, उसके द्वारा उस आबादी क्षेत्र को मिलने वाली सुन्दरता और मनोहरता में आनन्दित हो रही थी। उस बहते हुए पानी की धवनी और चिड़ियों के चहचहाने की आवाजों को सुनने से मुझे आराम मिला और मैंने प्रभु को धन्यवाद दिया कि किस प्रकार वह हमारे मनों को आराम मिलने के प्रावधान करता है।

      प्रभु परमेश्वर ने अपने लोगों, इस्राएलियों, के लिए एक विश्राम का दिन – सब्त, निर्धारित कर के दिया, जिस दिन वे विश्राम करें और उसकी आराधना में समय बिताएं, तथा अपने जीवनों को नवीनीकृत करें; क्योंकि वह उन्हें बढ़ता तथा फलते-फूलते देखना चाहता था। जैसा हम परमेश्वर के वचन बाइबल में निर्गमन की पुस्तक में देखते हैं, परमेश्वर ने छः दिन कार्य करके सातवें दिन विश्राम करने को कहा, और उन्हें भूमि को भी विश्राम देने के लिए कहा; परमेश्वर ने इस्राएलियों को निर्देश दिए कि वे छः वर्ष अपने खेत में अन्न उपजाएँ और सातवें वर्ष में कोई फसल न बोएं और न काटें। इस्राएलियों की यह जीवन शैली उन्हें और सभी जातियों से पृथक करती थी, क्योंकि विश्राम के इस नमूने का पालन न केवल उन्होंने, वरन उनके घर में रहने वाले परदेसी और उनके दास-दासियों को भी करना था।

      हम अपने विश्राम दिन का निर्वाह आशापूर्ण तथा रचनात्मक रीति से कर सकते हैं, परमेश्वर द्वारा उसकी आराधना करने में समय बिताने तथा अपनी आत्माओं को पोषित करने के अवसर का सदुपयोग कर सकते हैं। अपने शरीर और आत्मा को विश्राम तथा पोषण देने के लिए लोग विभिन्न तरीके अपनाते हैं। कुछ लोग सामूहिक खेल खेलते हैं, कुछ बागबानी करते हैं, कुछ परिवार या मित्र जनों के साथ सामूहिक भोजन करते हैं; तो कुछ सो कर आराम करते हैं।

      हम विश्राम दिन को अपने जीवन का अभिन्न भाग बना कर उसमें परमेश्वर के साथ संगति तथा शारीरिक विश्राम द्वारा अपने जीवनों को सुव्यवस्थित, आनन्दमय, और पोषित बना सकते हैं। - एमी बाउचर पाई


हमारे विश्वास और सेवा में विश्राम का भी कार्य के समान ही महत्व है।

उस[प्रभु यीशु]ने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था। - मरकुस 6:31

बाइबल पाठ: निर्गमन 23:10-13
Exodus 23:10 छ: वर्ष तो अपनी भूमि में बोना और उसकी उपज इकट्ठी करना;
Exodus 23:11 परन्तु सातवें वर्ष में उसको पड़ती रहने देना और वैसा ही छोड़ देना, तो तेरे भाई बन्धुओं में के दरिद्र लोग उस से खाने पाएं, और जो कुछ उन से भी बचे वह बनैले पशुओं के खाने के काम में आए। और अपनी दाख और जलपाई की बारियों को भी ऐसे ही करना।
Exodus 23:12 छ: दिन तक तो अपना काम काज करना, और सातवें दिन विश्राम करना; कि तेरे बैल और गदहे सुस्ताएं, और तेरी दासियों के बेटे और परदेशी भी अपना जी ठंडा कर सकें।
Exodus 23:13 और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है उस में सावधान रहना; और दूसरे देवताओं के नाम की चर्चा न करना, वरन वे तुम्हारे मुंह से सुनाईं भी न दें।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 36-37
  • प्रेरितों 15:22-41



बुधवार, 20 मार्च 2019

विश्राम



      मेरा ध्यान उस प्रमुख समाचार की ओर गया: “धावकों के लिए विश्राम दिन भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।” अमेरिका के पहाड़ों पर दौड़ने वाले दल के भूतपूर्व सदस्य, टॉमी मैन्निंग द्वारा लिखे गए उस लेख में लेखक ने एक ऐसे सिद्धान्त पर बल दिया था, समर्पित खिलाड़ी जिसकी कभी-कभी उपेक्षा करते हैं – व्यायाम के पश्चात शरीर को फिर से बल प्राप्ति के लिए विश्राम की आवश्यकता होती है। मैन्निंग ने लिखा, “शरीर की रचना और संचालन के दृष्टिकोण से, प्रशिक्षण में सीखे और अर्जित किए गए परिवर्तन विश्राम के समय में ही शरीर में उन उपयोगी परिवर्तनों को लाने पाते हैं। इसका अर्थ है कि विश्राम भी परिश्रम के समान ही उपयोगी है।”

      यही सिद्धान्त हमारे मसीही विश्वास के जीवन में भी उतना ही सत्य है। हतोत्साहित होने और थक कर शिथिल पड़ जाने से बच कर रहने के लिए विश्राम के नियमित समय आवश्यक हैं, परिश्रम और विश्राम में एक संतुलन बनाए रखना चाहिए। पृथ्वी पर अपनी सेवकाई के समय में प्रभु यीशु ने इस आत्मिक संतुलन को बनाए रखने के अवसरों का उपयोग किया, उसके समय पर होने वाली अत्याधिक मांगों के बावजूद।

      जब प्रभु के शिष्य प्रचार और चंगाई के थका देने वाले कठिन कार्य को कर के लौटे तो प्रभु ने उनसे कहा कि “तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था” (मरकुस 6:31)। परन्तु एक बड़ी भीड़ उनके पीछे आ गई, और वे विश्राम न कर सके, तो प्रभु यीशु ने उस भीड़ को परमेश्वर के राज्य के विषय सिखाया और पाँच रोटी तथा दो मछली से उस भीड़ को भोजन करवाया (पद 32-44)। जब भीड़ चली गई, तो यीशु “उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया” (पद 46)।

      यदि हमारे जीवन केवल हमारे कार्य तथा सेवकाई ही से व्यस्त रहते हैं, तो शीघ्र ही हम अपने कार्यों में कम प्रभावी होते चले जाएँगे। प्रभु यीशु हमें आमंत्रित करता है कि हम नियमित कुछ समय उसके साथ प्रार्थना और विश्राम में बिताने के लिए निकाला करें, जिससे थक कर शिथिल और निष्क्रीय होने से बचे रह सकें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


मसीही विश्वास और सेवकाई के हमारे जीवनों में विश्राम भी सेवकाई के कार्य जितना महत्वपूर्ण है।

और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। - मरकुस 1:35

बाइबल पाठ: मरकुस 6:30-46
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया।
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था।
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।
Mark 6:33 और बहुतों ने उन्हें जाते देखकर पहिचान लिया, और सब नगरों से इकट्ठे हो कर वहां पैदल दौड़े और उन से पहिले जा पहुंचे।
Mark 6:34 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा।
Mark 6:35 जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है।
Mark 6:36 उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्‍तियों में जा कर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें।
Mark 6:37 उसने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं?
Mark 6:38 उसने उन से कहा; जा कर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्होंने मालूम कर के कहा; पांच और दो मछली भी।
Mark 6:39 तब उसने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो।
Mark 6:40 वे सौ सौ और पचास पचास कर के पांति पांति बैठ गए।
Mark 6:41 और उसने उन पांच रोटियों को और दो मछिलयों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछिलयां भी उन सब में बांट दीं।
Mark 6:42 और सब खाकर तृप्‍त हो गए।
Mark 6:43 और उन्होंने टुकडों से बारह टोकिरयां भर कर उठाई, और कुछ मछिलयों से भी।
Mark 6:44 जिन्हों ने रोटियां खाईं, वे पांच हजार पुरूष थे।
Mark 6:45 तब उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Mark 6:46 और उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया।

एक साल में बाइबल:  
  • यहोशू 4-6
  • लूका 1:1-20



सोमवार, 17 सितंबर 2018

संभाल



      मैं स्विमिंग पूल के पास खड़ी थी; मैंने तैराकी प्रशिक्षक को एक प्रशिक्षणार्थी को, जो बहुत देर से पानी में था और थका हुआ सा लग रहा था, एक निर्देश देते हुए सुना। उसने कहा, “लगता है कि तुम थकने लगे हो। जब बिलकुल थक जाओ, और गहरे पानी में हो, तो तैरने की जीवन-रक्षा शैली का अभ्यास करना।”

      जीवन की कुछ परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं जिनमें हमें अपनी मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक सामार्थ्य इतनी व्यय करनी पड़ जाती है कि हम अपने आपको संभाले नहीं रख पाते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने अपने जीवन के एक ऐसे समय के बारे में लिखा जब उसके शत्रु उसपर हावी होने के प्रयास कर रहे थे और वह उनके क्रोध के भावनात्मक दबाव को अनुभव कर पा रहा था। जिस कष्ट से होकर वह निकल रहा था, उसे उससे से बच निकलने की आवश्यकता थी।

      उसने अपनी भावनाओं का विश्लेषण किया, और अपनी कठिनाई के इस समय से उसे बचने का मार्ग दिखाई दिया। उस ने अपने इस अनुभव के आधार पर कहा, “अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा” (भजन 55:22)। उसने पहचाना कि यदि हम अपनी परेशानियां प्रभु पर छोड़ दें, तो उनके निवारण में परमेश्वर हमारी सहायता करता है। हमें अपने जीवन की प्रत्येक परिस्थिति का नियंत्राण अपने ही हाथों में रखकर, स्वयं ही उसके निवारण का प्रयास नहीं करना चाहिए – इससे थकान ही उत्पन्न होती है। क्योंकि परमेश्वर हमारे जीवन की हर बात पर नियंत्रण रखता है, इसलिए, हमें हर बात उस ही के हाथों में छोड़ देनी चाहिए।

      हर बात, हर कार्य को अपने ही प्रयास द्वारा करने का प्रयास करने के स्थान पर, हम प्रभु परमेश्वर में विश्राम पा सकते हैं; वह हमें इस विश्राम के लिए आमंत्रित भी करता है (मत्ती 11:28)। बस हम अपनी हर बात को उसके सक्षम हाथों में समर्पित कर के, थका देने वाले अपने प्रयासों से थम जाएँ, उसमें पूर्ण भरोसे के साथ विश्राम करें, और इस बात का आनन्द लें कि वह हमें संभाले हुए है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु परमेश्वर सुरक्षित विश्राम-स्थान है।

प्रभु यीशु ने कहा: “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।” (मत्ती 11:28)

बाइबल पाठ: भजन 55:4-23
Psalms 55:4 मेरा मन भीतर ही भीतर संकट में है, और मृत्यु का भय मुझ में समा गया है।
Psalms 55:5 भय और कंपकपी ने मुझे पकड़ लिया है, और भय के कारण मेरे रोंए रोंए खड़े हो गए हैं।
Psalms 55:6 और मैं ने कहा, भला होता कि मेरे कबूतर के से पंख होते तो मैं उड़ जाता और विश्राम पाता!
Psalms 55:7 देखो, फिर तो मैं उड़ते उड़ते दूर निकल जाता और जंगल में बसेरा लेता,
Psalms 55:8 मैं प्रचण्ड बयार और आन्धी के झोंके से बचकर किसी शरण स्थान में भाग जाता।
Psalms 55:9 हे प्रभु, उन को सत्यानाश कर, और उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल दे; क्योंकि मैं ने नगर में उपद्रव और झगड़ा देखा है।
Psalms 55:10 रात दिन वे उसकी शहरपनाह पर चढ़कर चारों ओर घूमते हैं; और उसके भीतर दुष्टता और उत्पात होता है।
Psalms 55:11 उसके भीतर दुष्टता ने बसेरा डाला है; और अन्धेर, अत्याचार और छल उसके चौक से दूर नहीं होते।
Psalms 55:12 जो मेरी नामधराई करता है वह शत्रु नहीं था, नहीं तो मैं उसको सह लेता; जो मेरे विरुद्ध बड़ाई मारता है वह मेरा बैरी नहीं है, नहीं तो मैं उस से छिप जाता।
Psalms 55:13 परन्तु वह तो तू ही था जो मेरी बराबरी का मनुष्य मेरा परममित्र और मेरी जान पहचान का था।
Psalms 55:14 हम दोनों आपस में कैसी मीठी मीठी बातें करते थे; हम भीड़ के साथ परमेश्वर के भवन को जाते थे।
Psalms 55:15 उन को मृत्यु अचानक आ दबाए; वे जीवित ही अधोलोक में उतर जाएं; क्योंकि उनके घर और मन दोनों में बुराइयां और उत्पात भरा है।
Psalms 55:16 परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा; और यहोवा मुझे बचा लेगा।
Psalms 55:17 सांझ को, भोर को, दोपहर को, तीनों पहर मैं दोहाई दूंगा और कराहता रहूंगा। और वह मेरा शब्द सुन लेगा।
Psalms 55:18 जो लड़ाई मेरे विरुद्ध मची थी उस से उसने मुझे कुशल के साथ बचा लिया है। उन्होंने तो बहुतों को संग ले कर मेरा साम्हना किया था।
Psalms 55:19 ईश्वर जो आदि से विराजमान है यह सुनकर उन को उत्तर देगा। ये वे हैं जिन में कोई परिवर्तन नहीं और उन में परमेश्वर का भय है ही नहीं।
Psalms 55:20 उसने अपने मेल रखने वालों पर भी हाथ छोड़ा है, उसने अपनी वाचा को तोड़ दिया है।
Psalms 55:21 उसके मुंह की बातें तो मक्खन सी चिकनी थी परन्तु उसके मन में लड़ाई की बातें थीं; उसके वचन तेल से अधिक नरम तो थे परन्तु नंगी तलवारें थीं।
Psalms 55:22 अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा।
Psalms 55:23 परन्तु हे परमेश्वर, तू उन लोगों को विनाश के गड़हे में गिरा देगा; हत्यारे और छली मनुष्य अपनी आधी आयु तक भी जीवित न रहेंगे। परन्तु मैं तुझ पर भरोसा रखे रहूंगा।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 27-29
  • 2 कुरिन्थियों 10



रविवार, 22 जुलाई 2018

विश्राम



      प्रातः अलार्म बजता है; हमें लगता है कि अभी बहुत जल्दी है, कुछ देर और सो लें, परन्तु दिन भर के लिए कार्य आगे रखा है, लोगों से निर्धारित समय पर मिलना है, लोगों की देखभाल करनी है, और भी बहुत कुछ दिन भर के समय में करने के लिए है। ऐसे में आप अकेले नहीं हैं; प्रतिदिन, हम में से बहुतेरों को एक बात से दूसरी की ओर भागते रहना होता है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रेरित अपनी सेवकाई के पहले दौरे से लौटे तो प्रभु को बताने के लिए उनके पास बहुत कुछ था। परन्तु जैसे मरकुस रचित सुसमाचार में लिखा है, प्रभु तुरंत ही उनके कार्य का आंकलन करने नहीं बैठ गया; वरन प्रभु की पहली प्राथमिकता थी कि वे पहले थोड़ा विश्राम कर लें। प्रभु यीशु ने उनसे कहा, “उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो” (मरकुस 6:31)।

      अन्ततः हमें वास्तविक विश्राम अपने साथ परमेश्वर की लगातार बनी रहने वाली उपस्थित का एहसास करने और उस पर भरोसा बनाए रखने से ही मिलता है। चाहे हम अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें, परन्तु हमें यह पहचान भी रखनी है कि हम अपने कार्यों, कार्य में उन्नति, परिवार, सेवकाई, आदि की चिंताएं परमेश्वर के हाथों में सौंप कर उनके विषय उस पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। हमें प्रतिदिन कुछ समय हमारा ध्यान बंटाने वाली बातों से हटाकर, तनाव और बेचैनी को अपने से दूर कर के, अपने प्रति परमेश्वर के लगातार बने रहने वाले अद्भुत प्रेम और विश्वासयोग्यता पर मनन करना चाहिए, उसमें और उसके साथ थोड़ा विश्राम करना चाहिए।

      इसलिए निश्चिन्त होकर आराम की साँस लीजिए; परमेश्वर के हाथों में अपनी सारी चिंताओं को छोड़ दीजिए, और वास्तविक विश्राम का आनन्द लीजिए। - पो फैंग चिया


हम इसलिए विश्राम नहीं करते हैं क्योंकि हमारा कार्य पूरा हो गया है; 
हम इसलिए विश्राम करते हैं क्योंकि यह परमेश्वर की आज्ञा है, 
और उसने हमें ऐसा बनाया है कि हमें विश्राम की आवश्यकता होती है। - गौर्डन मैकडोनाल्ड

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मरकुस 6:7-13, 30-32
Mark 6:7 और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्हें दो दो कर के भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया।
Mark 6:8 और उसने उन्हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे।
Mark 6:9 परन्तु जूतियां पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो।
Mark 6:10 और उसने उन से कहा; जहां कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहां से विदा न हो, तब तक उसी में ठहरे रहो।
Mark 6:11 जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, और तुम्हारी न सुनें, वहां से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो।
Mark 6:12 और उन्होंने जा कर प्रचार किया, कि मन फिराओ।
Mark 6:13 और बहुतेरे दुष्टात्माओं को निकाला, और बहुत बीमारों पर तेल मलकर उन्हें चंगा किया।
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया।
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था।
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35



शुक्रवार, 25 मई 2018

पुनरुत्थान


   हम लोग जो मिशिगन प्रांत में रहते हैं, उन्हें ठण्डी, बर्फीली शरद ऋतु में, आने वाले बसंत ऋतु की आशा संभाले रहती है। मई के महीन में हमारी आशा का परिणाम सामने आता है; और होने वाला परिवर्तन अद्भुत होता है। वे पेड़ और उनकी डालियाँ जो 1 मई को निर्जीव ठूँठ प्रतीत होते हैं, वे माह का अन्त होते-होते हरी भरी डालियाँ बनकर लहलहाने लगते हैं। यद्यपी एक से दूसरे दिन तक कोई परिवर्तन होता हुआ प्रतीत नहीं होता है, परन्तु माह के अन्त तक मेरे आँगन के पेड़ निर्जीव दिखने की बजाए से सजीव दिखने लग जाते हैं।

   परमेश्वर ने अपनी सृष्टि में विश्राम और नवीनीकरण का चक्र बनाया है। हमें जो मृत्यु प्रतीत होता है, वह परमेश्वर के लिए विश्राम है। जैसे विश्राम नवीनीकरण के लिए तैयारी का समय है, वैसे ही मृत्यु पुनरुत्थान के लिए तैयारी है।

   प्रतिवर्ष जंगलों के हरे होने को देखना मुझे बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि यह मुझे स्मरण करवाता है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए मृत्यु एक अस्थायी दशा है, जिसका उद्देश्य हमें नए जीवन, नए आरंभ, कुछ अति उत्तम के लिए तैयार करना है। प्रभु यीशु ने कहा, “मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जब तक गेहूं का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है” (यूहन्ना 12:24)।

   यद्यपि, बसंत ऋतु के आने पर फूलों से निकलने वाले पराग-कण परेशान करते हैं – हमारे फर्नीचर और सामान पर छा जाते हैं, लोगों में एलर्जी और छींकना उत्पन्न करते हैं, परन्तु वे मुझे यह भी स्मरण करवाते हैं कि परमेश्वर जीवन प्रदान करने में कार्य-रत है। परमेश्वर की सारे जगत के सभी लोगों से अटल प्रतिज्ञा है कि जो भी उसके पुत्र प्रभु यीशु पर विश्वास लाएगा, अपने पापों से पश्चाताप करके अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर देगा उसे वह मृत्यु की पीड़ा के पश्चात, एक परम-आनन्द के स्थान में अनन्तकाल के लिए महिमामय पुनरुत्थान प्रदान करेगा। - जूली एकरमैन लिंक


बसंत का प्रत्येक नया पत्ता हमारे पुनरुत्थान की प्रतिज्ञा का स्मरण है।

मैं तुम से सच सच कहता हूं, जो मेरा वचन सुनकर मेरे भेजने वाले की प्रतीति करता है, अनन्त जीवन उसका है, और उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती परन्तु वह मृत्यु से पार हो कर जीवन में प्रवेश कर चुका है। - यूहन्ना 5:24

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:14-27
John 11:14 तब यीशु ने उन से साफ कह दिया, कि लाजर मर गया है।
John 11:15 और मैं तुम्हारे कारण आनन्‍दित हूं कि मैं वहां न था जिस से तुम विश्वास करो, परन्तु अब आओ, हम उसके पास चलें।
John 11:16 तब थोमा ने जो दिदुमुस कहलाता है, अपने साथ के चेलों से कहा, आओ, हम भी उसके साथ मरने को चलें।
John 11:17 सो यीशु को आकर यह मालूम हुआ कि उसे कब्र में रखे चार दिन हो चुके हैं।
John 11:18 बैतनिय्याह यरूशलेम के समीप कोई दो मील की दूरी पर था।
John 11:19 और बहुत से यहूदी मारथा और मरियम के पास उन के भाई के विषय में शान्‍ति देने के लिये आए थे।
John 11:20 सो मारथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्तु मरियम घर में बैठी रही।
John 11:21 मारथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
John 11:22 और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा।
John 11:23 यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा।
John 11:24 मारथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा।
John 11:25 यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा।
John 11:26 और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है?
John 11:27 उसने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 9:1-23


सोमवार, 14 मई 2018

कार्य



   बीच दोपहर का समय था, प्रभु यीशु पैदल यात्रा से थके हुए, याकूब के कुएँ के निकट बैठ गए। उनके शिष्य भोजन लाने के लिए वहीं स्थित सूखार नगर को चले गए। कुएँ से पाने लेने के लिए एक महिला नगर से निकल कर आई ... और वहाँ उसने अपने मसीहा को पा लिया। परमेश्वर के वचन बाइबल का यह वृतान्त आगे बताता है कि प्रभु यीशु से बातचीत करने के तुरंत बाद वह महिला नगर को गई और प्रभु यीशु की बातें सुनने के लिए उसने वहाँ के लोगों को यह कहते हुए आमंत्रित किया “आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यह तो मसीह नहीं है?” (यूहन्ना 4:29)।

   प्रभु के शिष्य भी भोजन लेकर वापस कुएँ पर आ गए। जब शिष्यों ने प्रभु से आग्रह किया कि वे भी भोजन करें, तो प्रभु ने उन्हें उत्तर दिया, “...मेरा भोजन यह है, कि अपने भेजने वाले की इच्छा के अनुसार चलूं और उसका काम पूरा करूं” (पद 34)। अब मेरा आपसे एक प्रश्न है – उस समय प्रभु यीशु भला क्या कार्य कर रहे थे? वे तो कुएँ के निकट बैठे विश्राम तथा प्रतीक्षा कर रहे थे।

   मुझे इस घटना से बहुत प्रोत्साहन मिलता है, क्योंकि मैं भी शारीरिक दुर्बलताओं के साथ जीवन व्यतीत कर रहा हूँ। यह खण्ड मुझे बताता है कि प्रभु के लिए उपयोगी होने के लिए मुझे इधर-उधर भागा-दौड़ी करने की आवश्यकता नहीं है; उसकी इच्छा को पूरा करने, उसके लिए कार्य करने के लिए चिन्तित रहने की आवश्यकता नहीं है। जीवन के इस भाग में आकर, मैं विश्राम और प्रतीक्षा कर सकता हूँ और मेरा परमेश्वर पिता मेरे लिए उपयुक्त कार्य मेरे पास स्वयं लेकर आएगा।

   इसी प्रकार आपके लिए भी आपका छोटा सा निवास-स्थान, आपका सीमित कार्य-स्थल, आपका बंदीगृह का कमरा, या आपका अस्पताल का बिस्तर ही आपके लिए ‘याकूब का कूआँ’ बन सकता है – एक विश्राम और प्रतीक्षा का स्थान, जहाँ परमेश्वर पिता आपके पास आपके लिए उपयुक्त कार्य को लेकर आएगा, आपको अपने लिए इस्तेमाल करेगा। न जाने आज किसे वह आपके पास ले आए? – डेविड रोपर


यदि आपको परमेश्वर के लिए कार्य-स्थल चाहिए, तो आपने आस-पास देखिए।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:4-14
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था।
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था।
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई।
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 19-21
  • यूहन्ना 4:1-30



रविवार, 18 फ़रवरी 2018

सेवा


   हास्य-कलाकार फ्रेड एलेन ने कहा, “एक ख्याति प्राप्त व्यक्ति वह होता है जो सारी उम्र प्रसिद्ध होने के लिए कठिन परिश्रम करता है, फिर काला चश्मा लगाकर घूमता है कि कहीं पहचान न लिया जाए।” ख्याति मिलने के साथ ही, व्यक्तिगत समय की हानि तथा लोगों के लगातार ध्यान में रहना भी आता है।

   जब प्रभु यीशु ने सिखाने और चंगाई देने की अपनी सार्वजनिक सेवा का आरंभ किया, तो वे तुरंत ही लोगों की नज़रों में चढ़ गए और सहायता माँगने वालों की भीड़ से घिरे रहते थे। वे जहाँ भी जाते थे, भीड़ उनके पीछे चली आती थी। परन्तु प्रभु यीशु जानते थे कि सामर्थ्य और सही दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए उन्हें परमेश्वर के साथ एकांत में समय बिताना कितना आवश्यक था।

   जब प्रभु यीशु के शिष्य अपने सफल प्रथम प्रचार सेवा से लौट कर आए, जिसमें उन्होंने परमेश्वर के राज्य का प्रचार और बीमारों को चंगाई देने का कार्य किया, तब प्रभु यीशु उन्हें एक एकांत स्थान पर विश्राम करवाने के लिए ले गए (लूका 9:2, 10)। लेकिन शीघ्र ही लोगों की भीड़ ने उन्हें ढूँढ लिया, और प्रभु यीशु ने उस भीड़ का स्वागत भी किया। प्रभु ने उन्हें परमेश्वर के राज्य के बारे में सिखाया, और जिन्हें चंगाई की आवश्यकता थी, उन्हें चँगा भी किया (पद 11)। भोजन के लिए अपना इंतज़ाम करने के लिए भेजने के स्थान पर, प्रभु यीशु ने उनके लिए वहीं 5000 से अधिक की उस भीड़ के लिए भोजन का इंतजाम भी कर के दिया (पद 12-17)।

   प्रभु यीशु जिज्ञासु और दुखी लोगों की सेवा से आने वाले दबाव से अपरिचित नहीं थे, इसीलिए वे सामाजिक सेवा और व्यक्तिगत एकांत के मध्य संतुलन बनाए रखने के लिए प्रार्थना और विश्राम के लिए समय निकाला करते थे।

   हम जब प्रभु यीशु के नाम में सेवा करते हैं, तो हम भी प्रार्थना और विश्राम के लिए समय निकालने के प्रभु के इस उदाहरण का अनुसरण करें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


हमें परमेश्वर की आवाज़ को सुनने के लिए 
जीवन के शोर की ध्वनि की तीव्रता को कम करना ही होगा।

उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था। - मरकुस 6:31

बाइबल पाठ: लूका 9:1-2, 10-17
Luke 9:1 फिर उसने बारहों को बुलाकर उन्हें सब दुष्टात्माओं और बिमारियों को दूर करने की सामर्थ और अधिकार दिया।
Luke 9:2 और उन्हें परमेश्वर के राज्य का प्रचार करने, और बिमारों को अच्छा करने के लिये भेजा।
Luke 9:10 फिर प्रेरितों ने लौटकर जो कुछ उन्होंने किया था, उसको बता दिया, और वह उन्हें अलग कर के बैतसैदा नाम एक नगर को ले गया।
Luke 9:11 यह जानकर भीड़ उसके पीछे हो ली: और वह आनन्द के साथ उन से मिला, और उन से परमेश्वर के राज्य की बातें करने लगा: और जो चंगे होना चाहते थे, उन्हें चंगा किया।
Luke 9:12 जब दिन ढलने लगा, तो बारहों ने आकर उस से कहा, भीड़ को विदा कर, कि चारों ओर के गावों और बस्‍तियों में जा कर टिकें, और भोजन का उपाय करें, क्योंकि हम यहां सुनसान जगह में हैं।
Luke 9:13 उसने उन से कहा, तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्होंने कहा, हमारे पास पांच रोटियां और दो मछली को छोड़ और कुछ नहीं: परन्तु हां, यदि हम जा कर इन सब लोगों के लिये भोजन मोल लें, तो हो सकता है: वे लोग तो पांच हजार पुरूषों के लगभग थे।
Luke 9:14 तब उसने अपने चेलों से कहा, उन्हें पचास पचास कर के पांति में बैठा दो।
Luke 9:15 उन्होंने ऐसा ही किया, और सब को बैठा दिया।
Luke 9:16 तब उसने वे पांच रोटियां और दो मछली लीं, और स्वर्ग की और देखकर धन्यवाद किया, और तोड़ तोड़कर चेलों को देता गया, कि लोगों को परोसें।
Luke 9:17 सो सब खाकर तृप्‍त हुए, और बचे हुए टुकड़ों से बारह टोकरी भरकर उठाईं।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 23-24
  • मरकुस 1:1-22