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मंगलवार, 15 नवंबर 2011

अनुकम्पा

   एक दिन प्रसिद्ध मसीही प्रचारक डी.एल.मूडी ने प्रभु यीशु मसीह की अनुकम्पा पर एक हृदय स्पर्शी सन्देश दिया। बाद में उनके एक मित्र ने पूछा कि वे इतना दिल छू लेने वाला सन्देश कैसे तैयार कर सके तो उन्होंने उत्तर दिया, "मैं एक दिन प्रभु यीशु मसीह की करुणा के बरे में विचार करने लगा; इसलिए मैंने अपनी बाइबल ली और उसे पढ़ने और ढूंढ़ने लगा कि परमेश्वर का वचन मसीह की करुणा के विषय में क्या कुछ कहता है। जैसे जैसे मुझे संबंधित पद मिलते गए, मैं उन पर मनन और प्रार्थना करता रहा, कुछ ही देर में मसीह की असीम करुणा ने मुझे ऐसा अभिभूत कर लिया कि मैं अपने अध्ययन कक्ष के फर्श पर लेटकर, बाइबल में मूँह रखकर बच्चे के समान फूट फूट कर रोने लगा।"

   कुछ लोगों को लगता है कि रोना कमज़ोरी की निशानी है। परन्तु स्वयं हमारा प्रभु यीशु रोया था। प्रेरित पौलुस भी, जब उस ने परमेश्वर के लोगों के लिए अपने हृदय के बोझ के बारे में लिखा, तो साथ ही अपने आँसुओं के विषय में लिखने से नहीं लज्जाया। मसीह के भले सेवक ऐसे ही होंगे - उनके हृदय कोमल और करुणामय होंगे; उनके मन प्रेम से ऐसे भरे होंगे कि अकसर उनकी भावनाएं आँसुओं के रूप में प्रवाहित होती मिलेंगी।

   जब हम मसीह के क्रूस की छाया में आकर खड़े होंगे, और परमेश्वर के प्रेम से अपनी आत्मा को विभोर होने देंगे, तो हमारे कठोर मन पिघल जाएंगे और मन का ठंडापन जाता रहेगा और उसकी जगह समस्त मानव जाति के लिए परमेश्वर के प्रेम की गर्माहट मन में भर जाएगी। तब ही पाप के दासत्व में पड़े लोगों के लिए मसीह की अनुकम्पा हमारी भी अनुकम्पा बन जाएगी और मसीह का प्रेम हमें वशीभूत करेगा कि हम दूसरों तक उसके प्रेम और उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाने की लालसा रखने तथा हर कष्ट और सताव के बावजूद अपनी इस लालसा की पूर्ति के लिए प्रयास में लगे रहने वाले लोग बन सकें। - पौल वैन गोर्डर


प्रेम भरे हृदय रूपी सोते से आँसु उनमुक्त भाव से बहते हैं।

... मैं ने तीन वर्ष तक रात दिन आंसू बहा बहाकर, हर एक को चितौनी देना न छोड़ा। - प्रेरितों २०:३१
 
बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनीकियों २:१-२०
    1Th 2:1  हे भाइयों, तुम आप ही जानते हो कि हमारा तुम्हारे पास आना व्यर्थ न हुआ।
    1Th 2:2  वरन तुम आप ही जानते हो, कि पहिले पहिल फिलिप्पी में दुख उठाने और उपद्रव सहने पर भी हमारे परमेश्वर ने हमें ऐसा हियाव दिया, कि हम परमेश्वर का सुसमाचार भारी विरोधों के होते हुए भी तुम्हें सुनाएं।
    1Th 2:3  क्‍योंकि हमारा उपदेश न भ्रम से है और न अशुद्धता से, और न छल के साथ है।
    1Th 2:4  पर जैसा परमेश्वर ने हमें योग्य ठहरा कर सुसमाचार सौंपा, हम वैसा ही वर्णन करते हैं; और इस में मनुष्यों को नहीं, परन्‍तु परमेश्वर को, जो हमारे मनों को जांचता है, प्रसन्न करते हैं।
    1Th 2:5  क्‍योंकि तुम जानते हो, कि हम न तो कभी लल्लोपत्तो की बातें किया करते थे, और न लोभ के लिये बहाना करते थे, परमेश्वर गवाह है।
    1Th 2:6  और यद्यपि हम मसीह के प्रेरित होने के कारण तुम पर बोझ डाल सकते थे, तौभी हम मनुष्यों से आदर नहीं चाहते थे, और न तुम से, न और किसी से।
    1Th 2:7  परन्‍तु जिस तरह माता अपने बालकों का पालन-पोषण करती है, वैसे ही हम ने भी तुम्हारे बीच में रह कर कोमलता दिखाई है।
    1Th 2:8  और वैसे ही हम तुम्हारी लालसा करते हुए, न केवल परमेश्वर को सुसमाचार, पर अपना अपना प्राण भी तुम्हें देने को तैयार थे, इसलिये कि तुम हमारे प्यारे हो गए थे।
    1Th 2:9  क्‍योंकि, हे भाइयों, तुम हमारे परिश्रम और कष्‍ट को स्मरण रखते हो, कि हम ने इसलिये रात दिन काम धन्‍धा करते हुए तुम में परमेश्वर का सुसमाचार प्रचार किया, कि तुम में से किसी पर भार न हों।
    1Th 2:10  तुम आप ही गवाह हो: और परमेश्वर भी, कि तुम्हारे बीच में जो विश्वास रखते हो हम कैसी पवित्रता और धामिर्कता और निर्दोषता से रहे।
    1Th 2:11  जैसे तुम जानते हो, कि जैसा पिता अपने बालकों के साथ बर्ताव करता है, वैसे ही हम तुम में से हर एक को भी उपदेश करते, और शान्‍ति देते, और समझाते थे।
    1Th 2:12  कि तुम्हारा चाल चलन परमेश्वर के योग्य हो, जो तुम्हें अपने राज्य और महिमा में बुलाता है।
    1Th 2:13  इसलिये हम भी परमेश्वर का धन्यवाद निरन्‍तर करते हैं; कि जब हमारे द्वारा परमेश्वर के सुसमाचार का वचन तुम्हारे पास पहुंचा, तो तुम ने उसे मनुष्यों का नहीं, परन्‍तु परमेश्वर का वचन समझ कर (और सचमुच यह ऐसा ही है) ग्रहण किया: और वह तुम में जो विश्वास रखते हो, प्रभावशाली है।
    1Th 2:14  इसलिये कि तुम, हे भाइयो, परमेश्वर की उन कलीसियाओं की सी चाल चलने लगे, जो यहूदिया में मसीह यीशु में हैं, क्‍योंकि तुम ने भी अपने लोगों से वैसा ही दुख पाया, जैसा उन्‍होंने यहूदियों से पाया था।
    1Th 2:15  जिन्‍होंने प्रभु यीशु को और भविष्यद्वक्ताओं को भी मार डाला और हम को सताया, और परमेश्वर उन से प्रसन्न नहीं; और वे सब मनुष्यों को विरोध करते हैं।
    1Th 2:16  और वे अन्यजातियों से उन के उद्धार के लिये बातें करने से हमें रोकते हैं, कि सदा अपने पापों का नपुआ भरते रहें; पर उन पर भयानक प्रकोप आ पहुंचा है।
    1Th 2:17  हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं बरन प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हम ने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुंह देखने के लिये और भी अधिक यत्‍न किया।
    1Th 2:18  इसलिये हम ने (अर्थात मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, वरन दो बार तुम्हारे पास आना चाहा, परन्‍तु शैतान हमें रोके रहा।
    1Th 2:19  भला हमारी आशा, या आनन्‍द या बड़ाई का मुकुट क्‍या है? क्‍या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे?
    1Th 2:20  हमारी बड़ाई और आनन्‍द तुम ही हो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल १-२ 
  • इब्रानियों ११:१-१९

सोमवार, 14 नवंबर 2011

संवेदनशील और कृपालु

    एक छोटी बच्ची की माँ बिमार पड़ी और उसे अस्पताल में भरती होना पड़ा। जीवन में पहली बार वह बच्ची बिना माँ के रहने जा रही थी। जब रात हुई और उसके पिता ने सोने के लिए बत्ती बुझाई, तो उसने पूछा, "पिताजी आप यहीं हैं न?" पिता ने उसे आश्वासन दिया कि वह वहीं उसके साथ है। थोड़ी देर में बच्ची ने फिर प्रश्न किया, "पिताजी, आप मुझे देख रहे हैं ना?" पिता ने फिर उसे आश्वस्त किया और उसका ढाढस बंधाया, और तब वह बच्ची निश्चिंत होकर सो गई।

   ऐसे ही परमेश्वर की प्रत्येक सन्तान अपने प्रेमी स्वर्गीय पिता पर आश्वस्त रह सकती है। परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, दुख चाहे कितना भी गंभीर क्यों न हो, उसकी निगाहें सर्वदा हम पर बनी रहती हैं। यह जानते हुए कि हमारे उद्धारकर्ता और परमेश्वर की निगाहें सर्वदा हम पर बनी हुई हैं, हमें भी उसके समान संवेदनशील, सहायक और प्रेम रखने वाले बनना चाहिए।

   यह संसार बहुत कठोर, दूसरों के दुखों के प्रति लापरवाह और निर्दयी हो सकता है। संसार के लोग अपने पड़ौसियों की तकलीफों के प्रति उदासीन और स्वार्थी हो सकते हैं; लेकिन प्रभु यीशु ऐसे नहीं थे। बारंबार उन्होंने दूसरों के दुख तकलीफों में उनकी सहायता करी। लूका ७ में प्रभु यीशु की संवेदना का उल्लेख है जब उन्होंने एक विध्वा को पुत्रवियोग में देखा और तुरंत उसके मृतक पुत्र को जीवित करके उसकी सहायता करी। आज भी प्रभु यीशु संसार के लोगों की ओर संवेदना से देखता है, चाहता है कि कोई पापों में नाश ना हो, उसके कलवरी के क्रूस पर दिए गए बलिदान पर साधारण विश्वास कर के प्रत्येक जन उद्धार प्राप्त करे।

   जिन्होंने उद्धार प्राप्त किया है, अपने उन अनुयायीयों से वह आशा रखता है कि वे भी उसकी तरह संवेदनशील और कृपालु हों और दूसरों की सहायता के लिए तत्पर रहें। - डेव एग्नर

परमेश्वर प्रत्येक व्यक्ति से ऐसे प्रेम करता है मानो उसके प्रेम का पात्र होने के लिए वही एकमात्र है।

उस ने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्‍योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्‍हें बहुत सी बातें सिखाने लगा। - मरकुस ६:३४
 
बाइबल पाठ: लूका ७:११-१७
    Luk 7:11  थोड़े दिन के बाद वह नाईन नाम के एक नगर को गया, और उसके चेले, और बड़ी भीड़ उसके साथ जा रही थी।
    Luk 7:12  जब वह नगर के फाटक के पास पहुंचा, तो देखो, लोग एक मुरदे को बाहर लिए जा रहे थे; जो अपनी मां का एकलौता पुत्र था, और वह विधवा थी: और नगर के बहुत से लोग उसके साथ थे।
    Luk 7:13  उसे देख कर प्रभु को तरस आया, और उस ने कहा; मत रो।
    Luk 7:14  तब उस ने पास आकर, अर्थी को छुआ, और उठाने वाले ठहर गए, तब उस ने कहा; हे जवान, मैं तुझ से कहता हूं, उठ।
    Luk 7:15  तब वह मुर्दा उठ बैठा, और बोलने लगा: और उस ने उसे उस की मां को सौप दिया।
    Luk 7:16  इस से सब पर भय छा गया और वे परमेश्वर की बड़ाई कर के कहने लगे कि हमारे बीच में एक बड़ा भविष्यद्वक्ता उठा है, और परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपा दृष्‍टि की है।
    Luk 7:17  और उसके विषय में यह बात सारे यहूदिया और आस पास के सारे देश में फैल गई।
 
एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत ३-५ 
  • इब्रानियों १०:१९-३९

रविवार, 13 नवंबर 2011

सहायक

   एडमन्ड हिलेरी और उनके शेरपा साथी तेनज़िंग नौर्गे ने सन १९५३ में एवरेस्ट पर्वत पर एतिहासिक चढ़ाई करी एवं विजय प्राप्त करी। नीचे उतरते समय एक जगह हिलेरी का पांव फिसल गया, और तुरंत तेनज़िंग ने रस्सी को तानकर मज़बूती से पकड़ा और अपनी कुलहाड़ी बर्फ में गड़ा दी। इस स्थिरता के कारण हिलेरी अपना सन्तुलन एवं पैर पुनः जमा सके और दोनो सही सलामत नीचे उतर आए। बाद में जब पत्रकारों ने इस घटना के संदर्भ में तेनज़िंग को प्रशंसा का पात्र बनाना चाहा तो उन्होंने कोई भी श्रेय या प्रशंसा लेने से यह कह कर इन्कार कर दिया कि "यह कोई अनोखी बात नहीं है, पर्वतारोही तो सदैव एक दूसरे की सहायता करते ही हैं"।

   यही बात मसीही विश्वासियों के साथ भी होनी चाहिए। परमेश्वर तो अपने बच्चों की सहायता करता ही है (इब्रानियों १३:६)। उसने हमें प्रभु यीशु मसीह में उद्धार का मार्ग देकर हमें पाप के दण्ड से बचाया है। वह समय एवं आवश्यक्तानुसार भी हमारी सहायता कई प्रकार से करता है, और चाहता है कि हम भी एक दूसरे कि ऐसे ही सहायता किया करें, क्योंकि हम सब एक ही मार्ग के यात्री हैं।

   प्रेरित पौलुस ने उनकी प्रशंसा करी जिन्हों ने रोम में उसकी तथा वहां के विश्वासियों की सहायता करी थी। रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उसने लिखा "मरियम को जिस ने तुम्हारे लिये बहुत परिश्र्म किया, नमस्‍कार" (रोमियों १६:६); तथा फीबे के लिए उसने लिखा "...जिस किसी बात में उस को तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्‍योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है" (रोमियों १६:२)।

   जब किसी का बोझ भारी हो जाए या किसी के कदम लड़खड़ाएं तो जो भी सहायता हम कर सकते हैं, हमें करनी चाहिए। सभी लोगों में हमारी यह पहचान होनी चाहिए "यह कोई अनोखी बात नहीं है, मसीही विश्वासी तो सदैव एक दूसरे की सहायता करते ही हैं"। - डेव एग्नर

एक दूसरे के बोझ बांट लेने से हम सहजता से एक साथ चल सकेंगे।

प्रिसका और अक्‍विला को भी यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्‍कार। - रोमियों १६:३

बाइबल पाठ: रोमियों १६:१-१४
    Rom 16:1  मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंखिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
    Rom 16:2  कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उस को तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्‍योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।
    Rom 16:3  प्रिसका और अक्‍विला को भी यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्‍कार।
    Rom 16:4  उन्‍होंने मेरे प्राण के लिये अपना सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं।
    Rom 16:5  और उस कलीसिया को भी नमस्‍कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्‍कार।
    Rom 16:6  मरियम को जिस ने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार।
    Rom 16:7  अन्‍द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्‍कार।
    Rom 16:8  अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्‍कार।
    Rom 16:9  उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्‍तखुस को नमस्‍कार।
    Rom 16:10  अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्‍कार। अरिस्‍तुबुलुस के घराने को नमस्‍कार।
    Rom 16:11  मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्‍कार। नरिकयुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्‍कार।
    Rom 16:12  त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्‍कार। प्रिया परसिस को जिस ने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार।
    Rom 16:13  रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्‍कार।
    Rom 16:14  असुक्रितुस और फिलगोन और हिमस ओर पत्रुबास और हिमांस और उन के साथ के भाइयों को नमस्‍कार।
 
एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत १-२ 
  • इब्रानियों १०:१-१८

शनिवार, 12 नवंबर 2011

सहारा

   अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत में एक विशेष तरह के पेड़ पाए जाते हैं जो सिकोया रेडवुड वृक्ष कहलाते हैं। ये वृक्ष धरती से ३०० फुट की ऊंचाई को प्राप्त कर लेते हैं, किंतु इनकी जड़ें धरती के अन्दर अधिक गहराई तक नहीं जातीं। इनकी जड़ें धरती की उपरी सतह में फैलती हैं और सतह पर होने वाली नमी सोख़ के वृक्ष के लिए जल अर्जित करतीं हैं। ये वृक्ष कभी अकेले नहीं बढ़ते क्योंकि तेज़ हवाएं इन्हें आसानी से गिरा सकतीं हैं। ये वृक्ष सदा झुर्मुट में बढ़ते हैं; झुर्मुट के सभी वृक्षों की जड़ें आपस में उलझी रहती हैं और इस से एक वृक्ष को दूसरे से सहारा मिल जाता है और इतनी ऊंचाई एवं उथली जड़ों के बवजूद तेज़ आंधियां भी इन्हें गिरा नहीं पातीं।

   मानव जीवन में भी यह सिद्धांत लागू होता है। क्लेष और कष्ट सभी पर आते हैं, और कुछ परिस्थितियाँ ऐसे भी होती हैं जो जिस पर आती हैं, उसे ही उन्हें सहना भी होता है; लेकिन तौ भी रिश्तेदार, मित्रगण और निकट के लोग प्रार्थनाओं द्वारा, साथ रहकर या अन्य किसी न किसी रूप में क्लेष भोगने वाले को सहारा एवं सान्तवना दे सकते हैं और उसे टूटने से बचा सकते हैं। किंतु परेशानी तब होती है जब क्लेष भोगने वाला सहायता की अपनी आवश्यक्ता को स्वीकार ना करे और अकेले ही सब कुछ सहने का प्रयास करे।

   समस्त संसार के पापों के लिए क्रूस पर अपने बलिदान से पहले गतसमनी के बाग़ में ऐसे ही सहारे की उम्मीद प्रभु यीशु ने अपने चेलों तथा मित्रों पतरस, याकूब और युहन्ना से रखी थी, जब वह उन्हें अपने साथ प्रार्थना करने के लिए लेकर गया, लेकिन उन्होंने उसे निराश ही किया। जो कष्ट प्रभु भोगने पर था, वह कोई और नहीं भोग सकता था, लेकिन वह चाहता था कि परमेश्वर पिता से उस आते दुख को झेलेने की सामर्थ पाने की प्रार्थना में उसके चेले उसके साथ हों। लेकिन उन्हें प्रार्थना करने की बजाए सोते हुए देख कर उसे अपने अकेलेपन का एहसास और भी अधिक कष्टदायी हुआ होगा।

   यदि प्रभु यीशु को प्रार्थना और सहारे की आवश्यक्ता अनुभव हुई तो हम मनुष्यों के लिए एक दूसरे को सहारा देना और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करना कितना आवश्यक है। आवश्यक्ता अनुसार अपने लिए और अपने साथ किसी को प्रार्थना के लिए तैयार रखना, अथवा किसी अन्य के लिए प्रार्थना में सदा तत्पर रहना एक दूसरे को सहारा देने का कारगर उपाय है। - डेनिस डी हॉन


जो कष्ट में होते हैं उन्हें सान्तवना से अधिक सहारे की आवश्यक्ता होती है।

तब उस ने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। - मत्ती २६:३८

बाइबल पाठ: मत्ती २६:३६-४६
    Mat 26:36  तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जाकर प्रार्थाना करूं।
    Mat 26:37  और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा।
    Mat 26:38  तब उस ने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो।
    Mat 26:39  फिर वह थोड़ा और आगे बढ़ कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए, तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्‍तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।
    Mat 26:40  फिर चेलों के पास आकर उन्‍हें सोते पाया, और पतरस से कहा, क्‍या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके?
    Mat 26:41  जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्‍तु शरीर र्दुबल है।
    Mat 26:42  फिर उस ने दूसरी बार जाकर यह प्रार्थना की, कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्‍छा पूरी हो।
    Mat 26:43  तब उस ने आकर उन्‍हें फिर सोते पाया, क्‍योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं।
    Mat 26:44  और उन्‍हें छोड़ कर फिर चला गया, और वही बात फिर कह कर, तीसरी बार प्रार्थना की।
    Mat 26:45  तब उस ने चेलों के पास आकर उन से कहा, अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है।
    Mat 26:46  उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ५१-५२ 
  • इब्रानियों ९

शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

क्या स्मरण रखें; क्या भूलें

   एक बुद्धिमान पास्टर ने मुझे बताया कि जब वे निराश होने लगते हैं तो वे उस विस्मय और अद्भुत आनन्द को स्मरण करते हैं जो उन्होंने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करने पर अनुभव किया था और उनका मन पुनः प्रफुल्लित हो उठता है। किंतु वे कभी भी उन दो व्यक्तियों को स्मरण करने का प्रयास नहीं करते जिन्होंने चर्च की उनकी प्रथम सेवकाई में उनको हानि पहुँचाई थी; क्योंकि उन दोनो को याद कर के वे अपनी शान्ति भंग करना नहीं चाहते और न ही पुराने विद्वेष को जाग उठने का अवसर देना चाहते हैं।

   इस्त्राएल के राजा और भजनों के लेखक दाऊद ने परमेश्वर के लिए कहा, "हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना" (भजन १०३:२)। परमेश्वर की दया को स्मरण करना और साथ ही यह भी याद करना कि कैसे उसने हमारे पाप क्षमा किए, हमें चंगा किया, अब तक हमारी देखरेख करता रहा है और हम पर अपनी आशीषें उंडेलेता रहा है भला है। ऐसा करने से हम परमेश्वर के और अधिक धन्यवादी और उस पर अधिक दृढ़ विश्वास करने वाले बन जाते हैं।

   प्रेरित पौलुस ने लिखा, "...यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है" (फिलिप्पियों ३:१३, १४)। यदि पौलुस अपने पुराने जीवन को, जिसमें वह मसीही विश्वासियों को सताने वाला था, स्मरण करता रहता तो निराशा में पड़ जाता; और यदि अपने नए मसीही जीवन की सफलताओं और परमेश्वर से मिले हुए प्रकाशनों के बारे में सोचता रहता तो घमंड में पड़ जाता। इसलिए जो कुछ बीत गया, उसे पीछे छोड़ कर वह अपना ध्यान केवल आगे के कार्य की ओर लगाए रखता था।

   आत्मिक रूप से परिपक्व मसीही विश्वासी इस बात का ध्यान रखते हैं कि वे उन बातों को स्मरण रखें जो मसीह यीशु और उसके द्वारा प्राप्त उद्धार से संबंधित हैं और उन्हें अधिक बहुमूल्य बनाती हैं, तथा उन बातों को भूल जाएं जो उनके मसीही जीवन में अग्रसर होने में बाधा बनती हैं।

   हमें क्या स्मरण रखना है और क्या नहीं इसके विष्य में सचेत रहना चहिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

जिसे भूल जाना चाहिए उसे स्मरण करके तथा जिसे स्मरण रखना चाहिए उसे भूल कर हम अपने जीवन में पराजय को न्यौता देते हैं।

हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। - भजन १०३:२
...यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है। - फिलिप्पियों ३:१३, १४

 
बाइबल पाठ: भजन १०३
    Psa 103:1  हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
    Psa 103:2  हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
    Psa 103:3  वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
    Psa 103:4  वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
    Psa 103:5  वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।
    Psa 103:6  यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
    Psa 103:7  उस ने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।
    Psa 103:8  यहोवा दयालु और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
    Psa 103:9  वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
    Psa 103:10  उस ने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।
    Psa 103:11  जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
    Psa 103:12  उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उस ने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
    Psa 103:13  जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।
    Psa 103:14  क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।
    Psa 103:15  मनुष्य की आयु घास के समान होती है, वह मैदान के फूल की नाईं फूलता है,
    Psa 103:16  जो पवन लगते ही ठहर नहीं सकता, और न वह अपने स्थान में फिर मिलता है।
    Psa 103:17  परन्तु यहोवा की करूणा उसके डरवैयों पर युग युग, और उसका धर्म उनके नाती-पोतों पर भी प्रगट होता रहता है,
    Psa 103:18  अर्थात उन पर जो उसकी वाचा का पालन करते और उसके उपदेशों को स्मरण करके उन पर चलते हैं।
    Psa 103:19  यहोवा ने तो अपना सिंहासन स्वर्ग में स्थिर किया है, और उसका राज्य पूरी सृष्टि पर है।
    Psa 103:20  हे यहोवा के दूतों, तुम जो बड़े वीर हो, और उसके वचन के मानने से उसको पूरा करते हो उसको धन्य कहो!
    Psa 103:21  हे यहोवा की सारी सेनाओं, हे उसके टहलुओं, तुम जो उसकी इच्छा पूरी करते हो, उसको धन्य कहो!
    Psa 103:22  हे यहोवा की सारी सृष्टि, उसके राज्य के सब स्थानों में उसको धन्य कहो। हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ५० 
  • इब्रानियों ८

गुरुवार, 10 नवंबर 2011

व्याकुल हृदयों के लिए शान्ति

   एक प्रिय मित्र ने अपने पत्र में हमारे साथ एक रोचक घटना बाँटी: उनकी एक अन्य सहेली का पालन पोष्ण एक भक्तिहीन एवं नास्तिक परिवार में हुआ था और वह अपने जीवन से बहुत असन्तुष्ट और निराश रहती थी। एक दिन उसने अखबार में ’शान्ति सेना’ में भर्ती के लिए विज्ञापन देखा और उसे विचार आया कि मेरे जीवन में शान्ति ही की तो कमी है, और वह उस शान्ति की तलाश में शान्ति सेना में भर्ती हो गई और उसे एक कबायली इलाके में स्वयंसेवा के लिए भेज दिया गया। सेवा करने के कुछ समय में ही वह जान गई कि जिस शान्ति की उसे तलाश थी वह अभी भी उस से दूर ही थी। अपने कार्य के दौरान वह एक वृद्ध कबायली के संपर्क में आई, और उसने देखा कि वह अन्य जितने कबायलियों के साथ संपर्क में आई थी, यह वृद्ध अपने व्यवहार और जीवन में उन सब से भिन्न है। उसने उस वृद्ध से उसके जीवन में इस सन्तुष्टि और शान्ति का राज़ पूछा, तो व्रुद्ध ने कहा यह इसलिए है क्योंकि प्रभु यीशु मसीह उसके हृदय में राज्य करते हैं। उस वृद्ध के कहने से उस स्त्री ने बाइबल पढ़नी आरंभ करी, और परमेश्वर के वचन तथा उस वृद्ध के जीवन की गवाही ने उसके जीवन में कार्य किया और उसने मसीह यीशु में उस अद्भुत शान्ति को पा लिया।

   यही शान्ति उन सब को भी उपलब्ध है जो साधारण विश्वास द्वारा प्रभु यीशु को अपने निज उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करते हैं। जिनके पास परमेश्वर की यह शान्ति है उनका परमेश्वर के साथ मेलमिलाप है "जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें" (रोमियों ५:१); तथा वे हर समय उस परमेश्वर और उसकी शान्ति की सुरक्षा में रहते हैं "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी" (फिलिप्पियों ४:६, ७)।

   व्याकुल हृदयों के लिए इसी संसार में शान्ति उपलब्ध है - परमेश्वर की अद्भुत शान्ति; जीवन में यदि प्रभु यीशु नहीं तो शान्ति भी नहीं। - रिचर्ड डी हॉन

यीशु को ग्रहण करो, उसकी शान्ति स्वतः ही आ जाएगी।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - युहन्ना १४:२७
 
बाइबल पाठ: युहन्ना १४:१५-२७
    Joh 14:15  यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।
    Joh 14:16  और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।
    Joh 14:17  अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्‍योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
    Joh 14:18  मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।
    Joh 14:19  और थोड़ी देर रह गई है कि संसार मुझे न देखेगा, परन्‍तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
    Joh 14:20  उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में।
    Joh 14:21  जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्‍हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।
    Joh 14:22  उस यहूदा ने जो इस्‍किरयोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्‍या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं।
    Joh 14:23  यीशु ने उस को उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।
    Joh 14:24  जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिस ने मुझे भेजा।
    Joh 14:25  ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
    Joh 14:26  परन्‍तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
    Joh 14:27  मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४८-४९ 
  • इब्रानियों ७

बुधवार, 9 नवंबर 2011

शांति

   भूतपूर्व अमेरीकी राष्ट्रपति जेरालड फोर्ड ने अपनी एक पुस्तक A Time to Heal में एक ऐसी कहानी बताई जो कुछ वर्ष पहले उन्होंने सुनी थी - ग्रीस (युनान) देश के गृह युद्ध के समय, सन १९४८ में, अमेरीका में बसने जा रहे एक गाँव वाले ने अपने साथ के लोगों से पूछा, "अमेरीका पहुँच कर मैं तुम्हारे लिए क्या भेजूँ - पैसा, भोजन, कपड़े?" उसके एक गरीब पड़ौसी ने उत्तर दिया, "नहीं, इन में से कुछ नहीं, बस एक टन शान्ति भेज देना।" आज भी मन-मस्तिष्क की शान्ति हमारे लिए बहुत दुर्लभ और अति आवश्यक वस्तु बनी हुई है।

   जब प्रभु यीशु अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से थोड़ा पहले अपने चेलों के साथ वार्तलाप कर रहे थे तब वे आते समय में घटने वाले उन दुखों को जानते थे जो वे और उनके चेले अनुभव करने पर थे। उन्हें पता था कि कुछ समय में ही उनके चेले उनका विश्वासघात होते, उन्हें पकड़े जाते और फिर क्रूरता के साथ क्रूस पर बलिदान होते देखेंगे। वे ये भी जानते थे कि उनके पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद चेलों को संसार के वैमनस्य का सामना करना पड़ेगा; जहाँ भी चेले प्रभु यीशु द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार लेकर जाएंगे, उन्हें हर जगह विरोध, उपहास और सताव का सामना करना होगा। इसलिए उन अन्तिम क्षणों में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से अनन्त शान्ति की प्रतिज्ञा करी, उन्होंने चेलों से कहा, "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (युहन्ना १४:२७)।

   जब संसार में हम बोझिल हों और क्लेषों से दबने लगें, तब हमें शान्ति की आवश्यक्ता होती है, ऐसी शान्ति जो अलौकिक हो। ऐसे में मसीही विश्वासी अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की शान्ति की प्रतिज्ञा में विश्वास कर सकते हैं कि उसने अपनी शान्ति उन्हें उपलब्ध करवा रखी है। जब हम स्मरण करें कि उसने हमारे लिए क्या कुछ किया है तो उसकी प्रेम भरी बाहों में सिमट कर हम उसकी शान्ति के लिए आश्वस्त हो सकते हैं और शान्ति के राजकुमार की सामर्थ का अनुभव कर सकते हैं। - डेव एग्नर

जब मसीह हृदय पर राज्य करता है तब उसकी शान्ति मन में भर जाती है।

यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा। - भजन २९:११

बाइबल पाठ: युहन्ना १४:२५-३१
Joh 14:25  ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
Joh 14:26  परन्‍तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
Joh 14:27  मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
Joh 14:28  तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्‍योंकि पिता मुझ से बड़ा है।
Joh 14:29  और मैं ने अब इस के होने के पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
Joh 14:30  मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्‍योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं।
Joh 14:31  परन्‍तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४६-४७ 
  • इब्रानियों ६