ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

यीशु मसीह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
यीशु मसीह लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 18 नवंबर 2013

बहुभाषीय


   क्या यह संभव है कि ऐसे समाज तक, जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रति अधिकाधिक उदासीन होते जा रहा है, और उन लोगों तक जो मसीही विश्वास को नहीं मानते यह सुसमाचार सन्देश पहुँचाया जा सके? ऐसा कर सकने का एक माध्यम हो सकता है हम मसीही विश्वासियों का सांसकृतिक रूप से "बहुभाषीय" हो जाना - उन लोगों ’भाषा’ के प्रयोग द्वारा, अर्थात उन लोगों की रुचि और लगाव की बातों के माध्यम से, उन तक प्रभु यीशु मसीह में सेंत-मेंत मिलने वाली मुक्ति के सन्देश को पहुँचाना।

   सामान्यतः आम लोगों की रुचि संगीत, सिनेमा, टी.वी., खेल-कूद आदि में होती है और वे ऐसे ही विषयों पर आपस में बातचीत करते हैं। यदि हम मसीही विश्वासी भी इन बातों की आलोचना या निन्दा किए बिना, इन विषयों को बातचीत आरंभ करने का माध्यम बना कर उन तक इन विषयों के सन्दर्भ में परमेश्वर के वचन और उद्धार के मार्ग को प्रस्तुत करें तो सुसमाचार के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना सम्भव होगा।

   प्रेरित पौलुस ने इस बात का उदाहरण अथेने के लोगों के साथ अपने वार्तालाप में दिया। प्रेरितों के कार्य के अध्याय 17 में हम पाते हैं कि अथेने के अरियुपगुस में पौलुस को अवसर हुआ कि एक पूर्णतः गैरमसीही संसकृति के लोगों को मसीही विश्वास और मसीह यीशु में उद्धार के मार्ग के बारे में बताए। ऐसा करने के लिए पौलुस ने उन युनानी लोगों के कवियों की लिखी बातों को संदर्भ बनाकर सुसमाचार को उनके सामने प्रस्तुत किया; पौलुस ने कहा: "क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं" (प्रेरितों 17:28)।

   जैसे पौलुस ने उस संसकृति के लोगों तक अपनी बात उसे आधार बनाकर पहुँचाई जो वे पढ़ रहे थे, हम भी लोगों तक प्रभु यीशु मसीह में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को अधिक प्रभावी रीति से लोगों तक पहुँचा सकते हैं यदि हम उन की रुचि के विषय को आधार बनाएं तो। क्या आप किसी पड़ौसी या सहकर्मी तक सुसमाचार पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं? ’बहुभाषीय’ बन कर देखिए, शायद ऐसा करना कारगर हो जाए। - बिल क्राउडर


बाइबल का सन्देश संसार के संपर्क में लाना आवश्यक है।

क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। - प्रेरितों 17:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:18-31
Acts 17:18 तब इपिकूरी और स्‍तोईकी पण्‍डितों में से कितने उस से तर्क करने लगे, और कितनों ने कहा, यह बकवादी क्या कहना चाहता है परन्तु औरों ने कहा; वह अन्य देवताओं का प्रचारक मालूम पड़ता है, क्योंकि वह यीशु का, और पुनरुत्थान का सुसमाचार सुनाता था। 
Acts 17:19 तब वे उसे अपने साथ अरियुपगुस पर ले गए और पूछा, क्या हम जान सकते हैं, कि यह नया मत जो तू सुनाता है, क्या है? 
Acts 17:20 क्योंकि तू अनोखी बातें हमें सुनाता है, इसलिये हम जानना चाहते हैं कि इन का अर्थ क्या है? 
Acts 17:21 (इसलिये कि सब अथेनवी और परदेशी जो वहां रहते थे नई नई बातें कहने और सुनने के सिवाय और किसी काम में समय नहीं बिताते थे)। 
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10 
  • इब्रानियों 13


रविवार, 17 नवंबर 2013

साथी


   मुझे अपने प्रदेश के मार्गों पर पैदल घूमना चलना अच्छा लगता है क्योंकि ऐसा करने से मैं वहाँ की सुरम्य सुन्दरता और भव्यता को भली-भांति निहार सकता हूँ, उसका आनन्द उठा सकता हूँ। यह मुझे इस बात का भी स्मरण दिलाता है कि मैं अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के साथ एक आत्मिक यात्रा पर भी हूँ, जिसमें प्रभु यीशु मेरा साथी और मार्गदर्शक है। प्रभु यीशु भी, अपने पृथ्वी के समय में सारे इस्त्राएल देश में चलता फिरता और शिष्य बनाता रहा, उनसे यह कह कर, "मेरे पीछे चले आओ" (मत्ती 4:19)।

   जॉन बनयन द्वारा लिखित सुप्रसिद्ध पुस्तक "मसीही मुसाफिर" में एक स्थान पर मसीही यात्री कठिनाई के पहाड़ पर पहुँचता है, और उसे चढ़ने से पहले वह थोड़ा रुककर विश्राम करता है। उस विश्राम के समय में वह अपने पास विद्यमान परमेश्वर के वचन को पढ़ता है जो उसे परमेश्वर की उसके साथ बनी हुई उपस्थिति को स्मरण कराता है और आश्वस्त करता है कि परमेश्वर की सामर्थ उसके साथ है। इस विश्राम और मनन से वह नई स्फूर्ति पाता है और अपनी यात्रा पर आगे बढ़ने और कठिनाई के पहाड़ पर चढ़ने के लिए तैयार हो जाता है।

   मसीही विश्वास के जीवन की यह यात्रा सरल नहीं है; अनेक बार इसमें आगे बढ़ने से सरल और बेहतर लगता है इसे छोड़ देना, पीछे हट जाना, मार्ग बदल लेना। लेकिन जब ऐसे कठिन समय आएं तब उचित होता है थोड़ा समय रुककर विश्राम करना और पुनः सामर्थ प्राप्त करना - बीती यात्रा में हमारे साथ बनी रही परमेश्वर प्रभु यीशु की उपस्थिति और सहायता को स्मरण कर के और कभी साथ ना छोड़ने के उसके वायदे तथा उसके वचनों में दी गई हमारी भलाई की प्रतिज्ञाओं के स्मरण से आश्वासन लेने के द्वारा।

   केवल परमेश्वर ही यह जानता है कि हमारी यह जीवन यात्रा कितनी लंबी है, तथा कब, कहाँ और कैसे समाप्त होगी; लेकिन उसका आश्वासन सदा अपने लोगों के साथ है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)। प्रभु यीशु का यह आश्वासन किसी कथन को सुन्दर बनाने वाला कोई अलंकार मात्र नहीं है। प्रभु यीशु की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति वास्तविक है जो अनेक मसीही विश्वासियों ने अपनी विश्वास की यात्रा में भिन्न समयों और परिस्थितियों में अनुभव की है। ऐसा कोई पल नहीं जिसमें मसीह यीशु अपने विश्वासियों के साथ ना हो, ऐसी कोई यात्रा नहीं जिसके प्रत्येक पग में वह साथी ना हो। 

   मैंने अपने अनुभव से जाना है कि वह मेरा ऐसा साथी है जो मेरी जीवन यात्रा को अपनी सामर्थ और मार्गदरशन से सुगम बना देता है। क्या आपने भी मसीह यीशु को आपनी जीवन यात्रा का साथी बनाया है? - डेविड रोपर


जीवन यात्रा के कठिन मार्ग पर अपने बोझ प्रभु यीशु को सौंप दीजिए।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: मत्ती 4:18-22
Matthew 4:18 उसने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्द्रियास को झील में जाल डालते देखा; क्योंकि वे मछवे थे। 
Matthew 4:19 और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। 
Matthew 4:20 वे तुरन्त जालों को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए। 
Matthew 4:21 और वहां से आगे बढ़कर, उसने और दो भाइयों अर्थात जब्‍दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा; और उन्हें भी बुलाया 
Matthew 4:22 वे तुरन्त नाव और अपने पिता को छोड़ कर उसके पीछे हो लिए।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7 
  • इब्रानियों 12


गुरुवार, 10 नवंबर 2011

व्याकुल हृदयों के लिए शान्ति

   एक प्रिय मित्र ने अपने पत्र में हमारे साथ एक रोचक घटना बाँटी: उनकी एक अन्य सहेली का पालन पोष्ण एक भक्तिहीन एवं नास्तिक परिवार में हुआ था और वह अपने जीवन से बहुत असन्तुष्ट और निराश रहती थी। एक दिन उसने अखबार में ’शान्ति सेना’ में भर्ती के लिए विज्ञापन देखा और उसे विचार आया कि मेरे जीवन में शान्ति ही की तो कमी है, और वह उस शान्ति की तलाश में शान्ति सेना में भर्ती हो गई और उसे एक कबायली इलाके में स्वयंसेवा के लिए भेज दिया गया। सेवा करने के कुछ समय में ही वह जान गई कि जिस शान्ति की उसे तलाश थी वह अभी भी उस से दूर ही थी। अपने कार्य के दौरान वह एक वृद्ध कबायली के संपर्क में आई, और उसने देखा कि वह अन्य जितने कबायलियों के साथ संपर्क में आई थी, यह वृद्ध अपने व्यवहार और जीवन में उन सब से भिन्न है। उसने उस वृद्ध से उसके जीवन में इस सन्तुष्टि और शान्ति का राज़ पूछा, तो व्रुद्ध ने कहा यह इसलिए है क्योंकि प्रभु यीशु मसीह उसके हृदय में राज्य करते हैं। उस वृद्ध के कहने से उस स्त्री ने बाइबल पढ़नी आरंभ करी, और परमेश्वर के वचन तथा उस वृद्ध के जीवन की गवाही ने उसके जीवन में कार्य किया और उसने मसीह यीशु में उस अद्भुत शान्ति को पा लिया।

   यही शान्ति उन सब को भी उपलब्ध है जो साधारण विश्वास द्वारा प्रभु यीशु को अपने निज उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करते हैं। जिनके पास परमेश्वर की यह शान्ति है उनका परमेश्वर के साथ मेलमिलाप है "जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें" (रोमियों ५:१); तथा वे हर समय उस परमेश्वर और उसकी शान्ति की सुरक्षा में रहते हैं "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी" (फिलिप्पियों ४:६, ७)।

   व्याकुल हृदयों के लिए इसी संसार में शान्ति उपलब्ध है - परमेश्वर की अद्भुत शान्ति; जीवन में यदि प्रभु यीशु नहीं तो शान्ति भी नहीं। - रिचर्ड डी हॉन

यीशु को ग्रहण करो, उसकी शान्ति स्वतः ही आ जाएगी।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - युहन्ना १४:२७
 
बाइबल पाठ: युहन्ना १४:१५-२७
    Joh 14:15  यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे।
    Joh 14:16  और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे।
    Joh 14:17  अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्‍योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा।
    Joh 14:18  मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं।
    Joh 14:19  और थोड़ी देर रह गई है कि संसार मुझे न देखेगा, परन्‍तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे।
    Joh 14:20  उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में।
    Joh 14:21  जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्‍हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा।
    Joh 14:22  उस यहूदा ने जो इस्‍किरयोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्‍या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं।
    Joh 14:23  यीशु ने उस को उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे।
    Joh 14:24  जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिस ने मुझे भेजा।
    Joh 14:25  ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
    Joh 14:26  परन्‍तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
    Joh 14:27  मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४८-४९ 
  • इब्रानियों ७

बुधवार, 9 नवंबर 2011

शांति

   भूतपूर्व अमेरीकी राष्ट्रपति जेरालड फोर्ड ने अपनी एक पुस्तक A Time to Heal में एक ऐसी कहानी बताई जो कुछ वर्ष पहले उन्होंने सुनी थी - ग्रीस (युनान) देश के गृह युद्ध के समय, सन १९४८ में, अमेरीका में बसने जा रहे एक गाँव वाले ने अपने साथ के लोगों से पूछा, "अमेरीका पहुँच कर मैं तुम्हारे लिए क्या भेजूँ - पैसा, भोजन, कपड़े?" उसके एक गरीब पड़ौसी ने उत्तर दिया, "नहीं, इन में से कुछ नहीं, बस एक टन शान्ति भेज देना।" आज भी मन-मस्तिष्क की शान्ति हमारे लिए बहुत दुर्लभ और अति आवश्यक वस्तु बनी हुई है।

   जब प्रभु यीशु अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से थोड़ा पहले अपने चेलों के साथ वार्तलाप कर रहे थे तब वे आते समय में घटने वाले उन दुखों को जानते थे जो वे और उनके चेले अनुभव करने पर थे। उन्हें पता था कि कुछ समय में ही उनके चेले उनका विश्वासघात होते, उन्हें पकड़े जाते और फिर क्रूरता के साथ क्रूस पर बलिदान होते देखेंगे। वे ये भी जानते थे कि उनके पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद चेलों को संसार के वैमनस्य का सामना करना पड़ेगा; जहाँ भी चेले प्रभु यीशु द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार लेकर जाएंगे, उन्हें हर जगह विरोध, उपहास और सताव का सामना करना होगा। इसलिए उन अन्तिम क्षणों में प्रभु यीशु ने अपने चेलों से अनन्त शान्ति की प्रतिज्ञा करी, उन्होंने चेलों से कहा, "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (युहन्ना १४:२७)।

   जब संसार में हम बोझिल हों और क्लेषों से दबने लगें, तब हमें शान्ति की आवश्यक्ता होती है, ऐसी शान्ति जो अलौकिक हो। ऐसे में मसीही विश्वासी अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की शान्ति की प्रतिज्ञा में विश्वास कर सकते हैं कि उसने अपनी शान्ति उन्हें उपलब्ध करवा रखी है। जब हम स्मरण करें कि उसने हमारे लिए क्या कुछ किया है तो उसकी प्रेम भरी बाहों में सिमट कर हम उसकी शान्ति के लिए आश्वस्त हो सकते हैं और शान्ति के राजकुमार की सामर्थ का अनुभव कर सकते हैं। - डेव एग्नर

जब मसीह हृदय पर राज्य करता है तब उसकी शान्ति मन में भर जाती है।

यहोवा अपनी प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शान्ति की आशीष देगा। - भजन २९:११

बाइबल पाठ: युहन्ना १४:२५-३१
Joh 14:25  ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं।
Joh 14:26  परन्‍तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा।
Joh 14:27  मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।
Joh 14:28  तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्‍योंकि पिता मुझ से बड़ा है।
Joh 14:29  और मैं ने अब इस के होने के पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
Joh 14:30  मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्‍योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं।
Joh 14:31  परन्‍तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४६-४७ 
  • इब्रानियों ६

मंगलवार, 8 नवंबर 2011

जांचने का समय

   न्यूयॉर्क के एक विशिष्ट क्लब ने एक व्यक्ति को इसलिए सदस्यता देने से इन्कार कर दिया क्यों कि वह यहूदी था। एक चर्च के पास्टर ने, जो उस क्लब का सदस्य था, चर्च में दिये गए अपने इतवार के सन्देश में इस बात की भर्तस्ना करी और इसे अनैतिक कहा। उसके इस कथन से चर्च में बैठे कई लोगों को धक्का लगा, क्योंकि वे भी उस क्लब के सदस्य थे। लेकिन पास्टर यहीं नहीं रुके, उन्होंने प्रभु भोज के आमंत्रण के समय कहा कि, "यदि किसी जन ने अपने विचारों, शब्दों अथवा कार्यों द्वारा इस यहूदी व्यक्ति को क्लब सदस्यता न दिये जाने का समर्थन किया है तो वह प्रभु भोज में सम्मिलित होने के लिए तब तक आमंत्रित नहीं है जब तक वह इस संबंध में परमेश्वर के साथ अपने आप को ठीक नहीं कर लेता।"

   उस पास्टर के पास अपनी इस बात को ऐसे दृढ़ता के साथ रखने और मनवाने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल का समर्थन था, क्योंकि यह परमेश्वर का निर्देश है कि किसी भी जन के लिए प्रभु भोज में भाग लेना तब तक उचित नहीं है जब तक वह परमेश्वर से अपने पापों का अंगीकार कर के उससे उनकी क्षमा नहीं मांग लेता। बाइबल में १ कुरिन्थियों ११ अध्याय में प्रेरित पौलुस ने कुछ ऐसे चर्च सदस्यों का सामना किया जिन्हें अपने स्वार्थी और मण्डली में विभाजन कराने वाली प्रवृति को पाप के रूप में स्वीकार करके, क्षमा मांगने की आवश्यक्ता थी ( पद १८, २१)। उसने उन से आग्रह किया कि प्रभु भोज में सम्मिलित होने से पहले वे रुकें, अपने आप को गंभीरता से जांचें और पापों की क्षमा के साथ ही प्रभु यीशु के बलिदान द्वारा मिली स्वतंत्रता और नए जीवन के इस भोज में भाग लें।

   यही सिद्धांत आज भी प्रभु भोज के लिए लागू होता है। यदि ऐसा कुछ भी है जो हमारे और हमारे उद्धारकर्ता प्रभु के बीच आ गया है, तो उसकी पहचान तथा अंगीकार कर के और उसकी क्षमा मांगकर ही प्रभु भोज में सम्मिलित होना चाहिए। तब ही प्रभु भोज की वह रोटी और प्याला, जो प्रभु की तोड़ी गई देह और बहाए गए लहु के प्रतीक हैं, सार्थक होंगे और हम पापों की क्षमा की स्वतंत्रता का आनन्द ले सकेंगे। - डेनिस डी हॉन


मसिही विश्वासी के लिए प्रभु भोज पहले अपने आप को जांचने और फिर नए जीवन की गवाही देने का माध्यम है।

यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते। - १ कुरिन्थियों ११:३१

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ११:१७-३४
    1Co 11:17  परन्तु यह आज्ञा देते हुए, मैं तुम्हें नहीं सराहता, इसलिये कि तुम्हारे इकट्ठे होने से भलाई नहीं, परन्‍तु हानि होती है।
    1Co 11:18  क्‍योंकि पहिले तो मैं यह सुनता हूं, कि जब तुम कलीसिया में इकट्ठे हाते हो, तो तुम में फूट होती है और मैं कुछ कुछ प्रतीति भी करता हूं।
    1Co 11:19  क्योंकि विधर्म भी तुम में अवश्य होंगे, इसलिये कि जो लोग तुम में खरे निकले हैं, वे प्रगट हो जांए।
    1Co 11:20  सो तुम जो एक जगह में इकट्ठे होते हो तो यह प्रभु भोज खाने के लिये नहीं।
    1Co 11:21  क्‍योंकि खाने के समय एक दूसरे से पहिले अपना भोज खा लेता है, सो कोई तो भूखा रहता है, और कोई मतवाला हो जाता है।
    1Co 11:22  क्‍या खाने पीने के लिये तुम्हारे घर नहीं? या परमेश्वर की कलीसिया को तुच्‍छ जानते हो, और जिन के पास नहीं है उन्‍हें लज्ज़ित करते हो? मैं तुम से क्‍या कहूं? क्‍या इस बात में तुम्हारी प्रशंसा करूं? मैं प्रशंसा नहीं करता।
    1Co 11:23  क्‍योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी कि प्रभु यीशु ने जिस रात पकड़वाया गया रोटी ली।
    1Co 11:24  और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:25  इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:26  क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।
    1Co 11:27  इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा।
    1Co 11:28  इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।
    1Co 11:29  क्‍योंकि जो खाते-पीते समय प्रभु की देह को न पहिचाने, वह इस खाने और पीने से अपने ऊपर दण्‍ड लाता है।
    1Co 11:30  इसी कारण तुम में से बहुत से निर्बल और रोगी हैं, और बहुत से सो भी गए।
    1Co 11:31  यदि हम अपने आप में जांचते, तो दण्‍ड न पाते।
    1Co 11:32  परन्‍तु प्रभु हमें दण्‍ड देकर हमारी ताड़ना करता है इसलिये कि हम संसार के साथ दोषी न ठहरें।
    1Co 11:33  इसलिये, हे मेरे भाइयों, जब तुम खाने के लिये इकट्ठे होते हो, तो एक दूसरे के लिये ठहरा करो।
    1Co 11:34  यदि कोई भूखा हो, तो अपने घर में खा ले जिस से तुम्हारा इकट्ठा होना दण्‍ड का कारण न हो: और शेष बातों को मैं आकर ठीक कर दूंगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४३-४५ 
  • इब्रानियों ५

सोमवार, 7 नवंबर 2011

रस्म या स्मरण

   प्रति वर्ष अमेरीकी नगरिक एक दिवस मनाते हैं "स्मरण दिवस", अपने उन नागरिकों को स्मरण करने के लिए जिन्हों ने अपने प्राण दे दिये ताकि अन्य स्वतंत्रता के साथ रह सकें। इस दिवस पर ध्यान उन दिवंगत सैनिकों पर रहना चाहिए जिन्होंने अपना बलिदान दिया, किंतु कई लोगों के लिए इस दिवस की महत्वता नहीं रही है, और वे उन बलिदान देने वालों के बारे में सोचने की बजाए केवल अपने बारे ही में सोचते रहते हैं।

   डेट्रोइट शहर के एक अखबर में एक पत्रकार ने इस दिवस पर हुई ऐसी ही एक घटना का वर्णन किया, जिसमें वहां उपस्थित एक नौसैनिक ने इस बात का दुख जताया कि लोगों के अन्दर इस दिवस और उसके अर्थ की संवेदनशीलता नहीं रही। जब इस दिवस से संबंधित कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे, तो थोड़ी ही दूरी पर एक नौजवान भड़कीले वस्त्र पहने अपनी सजी हुई साईकिल पर चक्कर लगा रहा था। साईकिल पर सुनहरे रंग का कार्डबोर्ड लगा था, जिस पर उस नौजवान की सहेलियों की फोटो लगीं थीं, २ रेडियो बज रहे थे और २० बतियाँ चारों ओर जल बुझ रहीं थी। जब उस नौजवान से इसका तात्पर्य पूछा गया तो उसने बड़ी लापरवाही से कहा, वह यह अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए कर रहा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के १ कुरिन्थियों ११ अध्याय में एक और स्मरण दिवस का उल्लेख है, जिसे कुरिन्थुस के मसीही विश्वासी बहुत लापरवही से लेने लगे थे, और तब प्रेरित पौलुस को उन लोगों को इस दिवस की महत्वता और गंभीरता को अपनी पत्री में समझाना पड़ा था कि यह समय प्रभु यीशु के क्रूस पर दिये गए बलिदान और प्रभु के विश्वासी के जीवन में उसके अर्थ एवं महत्व को स्मरण करने का है। उस समय के बहुत से मसीही विश्वासी मसीह यीशु को स्मरण करने के बजाए केवल अपना ही ध्यान करने लगे थे; उनके लिए स्मरण का वह प्रभु भोज खाने, पीने और मौज-मस्ती का अवसर बन गया था। जैसे उस समय हुआ था, वैसा ही आज भी यह दिवस भी बहुतेरे मसीहीयों के लिए अपना वास्तविक अर्थ खो चुका है, क्योंकि वे इसकी गंभीरता की ओर ध्यान लगाए बिना इसे एक रस्म के तौर पर मनाते हैं।

   परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि जब हम प्रभु भोज में सम्मिलित हों तो उस समय अपने बारे में सोचना छोड़कर प्रभु के बलिदान को, उसके कारण को और उस बलिदान से हमें मिले जीवन, उद्धार तथा आशीषों समरण करें तथा अपने आप को जांचें कि हम अपने प्रभु के निर्देषों के अनुसार चल रहे हैं अथवा नहीं, उसको अपने जीवन में उचित महत्व दे रहें हैं अथवा नहीं। प्रभु भोज कोई रस्म नहीं है, यह प्रभु और उसके कार्य को आदर देने का अवसर है।

   प्रभु भोज का समय मसीह यीशु और उसके बलिदान पर ध्यान केंद्रित करने और अपने आप को उसकी शिक्षाओं के आधार पर जांचने का समय होना चाहिए। - मार्ट डी हॉन


कभी न भूलें, प्रभु भोज का मेज़बान प्रभु परमेश्वर होता है।

इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। - १ कुरिन्थियों ११:२५

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ११:१७-२८
    1Co 11:17  परन्तु यह आज्ञा देते हुए, मैं तुम्हें नहीं सराहता, इसलिये कि तुम्हारे इकट्ठे होने से भलाई नहीं, परन्‍तु हानि होती है।
    1Co 11:18  क्‍योंकि पहिले तो मैं यह सुनता हूं, कि जब तुम कलीसिया में इकट्ठे हाते हो, तो तुम में फूट होती है और मैं कुछ कुछ प्रतीति भी करता हूं।
    1Co 11:19  क्योंकि विधर्म भी तुम में अवश्य होंगे, इसलिये कि जो लोग तुम में खरे निकले हैं, वे प्रगट हो जांए।
    1Co 11:20  सो तुम जो एक जगह में इकट्ठे होते हो तो यह प्रभु भोज खाने के लिये नहीं।
    1Co 11:21  क्‍योंकि खाने के समय एक दूसरे से पहिले अपना भोज खा लेता है, सो कोई तो भूखा रहता है, और कोई मतवाला हो जाता है।
    1Co 11:22  क्‍या खाने पीने के लिये तुम्हारे घर नहीं? या परमेश्वर की कलीसिया को तुच्‍छ जानते हो, और जिन के पास नहीं है उन्‍हें लज्ज़ित करते हो? मैं तुम से क्‍या कहूं? क्‍या इस बात में तुम्हारी प्रशंसा करूं? मैं प्रशंसा नहीं करता।
    1Co 11:23  क्‍योंकि यह बात मुझे प्रभु से पहुंची, और मैं ने तुम्हें भी पहुंचा दी कि प्रभु यीशु ने जिस रात पकड़वाया गया रोटी ली।
    1Co 11:24  और धन्यवाद कर के उसे तोड़ी, और कहा; कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:25  इसी रीति से उस ने बियारी के पीछे कटोरा भी लिया, और कहा; यह कटोरा मेरे लोहू में नई वाचा है: जब कभी पीओ, तो मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    1Co 11:26  क्‍योंकि जब कभी तुम यह रोटी खाते, और इस कटोरे में से पीते हो, तो प्रभु की मृत्यु को जब तक वह न आए, प्रचार करते हो।
    1Co 11:27  इसलिये जो कोई अनुचित रीति से प्रभु की रोटी खाए, या उसके कटोरे में से पीए, वह प्रभु की देह और लोहू का अपराधी ठहरेगा।
    1Co 11:28  इसलिये मनुष्य अपने आप को जांच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ४०-४२ 
  • इब्रानियों ४

रविवार, 6 नवंबर 2011

कभी न भूलें

   मेरा मित्र रौजर जब बालक था तब वह और उसका परिवार गांव में एक कच्चे मार्ग के किनारे खेत में रहते थे। उस मार्ग पर बहुत कम यातायात था और कभी ही कोई मोटर कार वहां से निकलती थी। लेकिन एक दिन जब रौजर का छोटा भाई अपनी साईकिल पर वह कच्ची सड़क पार कर रहा था तो पास की एक छोटी पहाड़ी पर से एक कार तेज़ी से आई, उससे टकराई और तुरंत ही उसका देहांत हो गया। रौजर ने बताया कि बाद में जब पिताजी ने उसकी टूटी हुई साईकिल मार्ग पर से उठाई तो जीवन में पहली बार मैंने उन्हें सुबक सुबक कर रोते देखा। पिताजी ने वह टूटी हुई साईकिल उठा कर खलिहान के भीतरी ऐसे कोने में रख दी जहां हम बहुत कम जाया करते थे। लेकिन बहुत वर्षों तक मैंने देखा कि जब भी पिताजी उस साईकिल को देखते तो उनकी आंखों से आंसू बहने लगते थे। रौजर ने आगे कहा, तब से मैं अकसर यह प्रार्थना करता हूँ, "प्रभु आपकी मृत्यु की याद मेरे अन्दर भी ऐसी ही ताज़ा बनी रहे! जब कभी मैं आप के प्रभुभोज में भाग लूँ तो मेरा हृदय ऐसे कसमसा उठे जैसे यह घटना कल ही की हो। कभी भी यह प्रभुभोज मेरे लिए महज़ एक रस्म न बने और ना ही मैं रस्मपरस्ति के रूप में इसमें भाग लूँ। यह भाग लेना मेरे लिए सदा ही एक मार्मिक और दिल छू लेने वाला अनुभव रहे।"

   हमारे उद्धार के लिए प्रभु यीशु के द्वारा सही गई क्रूस की वेदना तथा मृत्यु सदा हमें परमेश्वर के प्रति दिल की गहराईयों से कृतार्थ रखे। जब हम मसीही विश्वासी प्रभु भोज में भाग लें तो स्मरण रखें कि हमारे निष्पाप और निष्कलंक प्रभु यीशु ने कैसी दर्दनाक मृत्यु हम पापियों लिए सह ली; और यह हमें पवित्र और परमेश्वर का आज्ञाकरी जीवन जीने के लिए प्रेरित करता रहे।

मसीह के ज़खमों की याद से हमें उसके वचन की आज्ञाकारिता की प्रेर्णा लेनी चाहिए।

फिर उस ने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उन को यह कहते हुए दी, कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो। - लूका २२:१९
 
बाइबल पाठ: लूका २२:१४-२०
    Luk 22:14  जब घड़ी पहुंची, तो वह प्रेरितों के साथ भोजन करने बैठा।
    Luk 22:15  और उस ने उन से कहा; मुझे बड़ी लालसा थी, कि दुख-भोगने से पहिले यह फसह तुम्हारे साथ खाऊं।
    Luk 22:16  क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि जब तक वह परमेश्वर के राज्य में पूरा न हो तब तक मैं उसे कभी न खाऊंगा।
    Luk 22:17  तब उस ने कटोरा लेकर धन्यवाद किया, और कहा, इस को लो और आपस में बांट लो।
    Luk 22:18  क्‍योंकि मैं तुम से कहता हूं, कि जब तक परमेश्वर का राज्य न आए तब तक मैं दाख रस अब से कभी न पीऊंगा।
    Luk 22:19  फिर उस ने रोटी ली, और धन्यवाद करके तोड़ी, और उन को यह कहते हुए दी, कि यह मेरी देह है, जो तुम्हारे लिये दी जाती है: मेरे स्मरण के लिये यही किया करो।
    Luk 22:20  इसी रीति से उस ने बियारी के बाद कटोरा भी यह कहते हुए दिया, कि यह कटोरा मेरे उस लोहू में जो तुम्हारे लिये बहाया जाता है नई वाचा है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ३७-३९ 
  • इब्रानियों ३

शनिवार, 5 नवंबर 2011

"आप अंगूरों को पी नहीं सकते"

   जब मैंने अपने पास्टर द्वारा दिये जाने वाले सन्देश का यह शीर्षक पढ़ा, तो मैं सोच में पड़ गया कि वे कहना क्या चाहते हैं? प्रभु भोज के लिए उनका यह सन्देश प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों के साथ किये गए अन्तिम भोज में उपयोग किए गए और आते समय के लिए दिए गए दो चिन्हों पर आधरित था - रोटी और दाखरस (अंगूरों का रस)। रोटी प्रभु यीशु की देह को दिखाती है जो संसार के पापों के लिए तोड़े जाने को दी गई और दाखरस उसके लहू को दिखाता है जो संसार के पापों के धोए जाने के लिए बहाया गया। वह दाखरस पके हुए मीठे अंगूरों से आया था; लेकिन उनसे रस के निकाले जाने के लिए अंगूरों को अपने आप को कुचले जाने के लिए समर्पित करना आवश्यक था, तभी वह रस उनमें से निकल सकता था।

   यही प्रभु यीशु के जीवन के लिए भी सत्य था। उनके इस पृथ्वी पर आने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह अनिवार्य था कि उनका दूसरों की सेवा और भलाई में समर्पित जीवन संसार के सर्वोत्तम भले के लिए कुचले जाने के लिए दिया जाए। वे संसार में संसार के पापों की कीमत चुकाने आए थे जिससे संसार को पापों से मुक्ति और उद्धार का मार्ग दे सकें। यह कीमत थी उनका अपने प्राणों का बलिदान। उन्होंने यह कीमत रोमी क्रूस पर चढ़कर चुकाई। चाहे क्रूस पर चढ़ाने वाले सैनिक रोमी साम्राज्य के थे, परन्तु उनके इस दण्ड के भोगे जाने की अनुमति पिता परमेश्वर की ओर सी थी, जिसके विष्य में भविष्यद्वक्ता यशायाह ने लिखा था "तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा, उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी" (यशायाह ५३:१०)।
   यह सत्य है कि हम अंगूरों को पी नहीं सकते; उन्हें पहले कुचला जाना आवश्यक है, तभी उनका रस हमें मिल सकता है। यही मसीह यीशु के साथ कलवरी के क्रूस पर हुआ। उन्होंने अपने शारीरिक जीवन को कुचले जाने के लिए दे दिया ताकि संसार को उद्धार द्वारा अनन्त आत्मिक जीवन मिल सके। आज समस्त संसार में जो कोई भी सच्चे मन और साधारण विश्वास से उनके इस बलिदान पर विश्वास करके उन्हें स्वीकार करता है, उनसे अपने पापों की क्षमा मांगता है, वह अपने इस विश्वास द्वारा उद्धार और अनन्त जीवन पाता है।

   जब मसीही विश्वासी प्रभु भोज में भाग लेते हैं तो वे स्मरण करते हैं कि हमारे पापों के लिए परमेश्वर के पवित्र और निष्पाप पुत्र ने अपनी जान बलिदान कर दी; वह हमारे ही पापों के कारण कुचला गया और हमारे ही अधर्म के कारण उसने दुखः उठाए। - डेव एग्नर

शारीरिक जीवन परमेश्वर की श्वास द्वारा मिला, किंतु अनन्त जीवन मसीह की मृत्यु से मिला।

तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा, उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी। - यशायाह ५३:१०
 
बाइबल पाठ: यशायाह ५३
    Isa 53:1  जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास किया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
    Isa 53:2  क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।
    Isa 53:3  वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी, और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
    Isa 53:4  निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया, तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।
    Isa 53:5  परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया, हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।
    Isa 53:6  हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया, और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
    Isa 53:7  वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला।
    Isa 53:8  अत्याचार करके और दोष लगाकर वे उसे ले गए; उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया; मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।
    Isa 53:9  और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उस ने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
    Isa 53:10  तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले; उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा, उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
    Isa 53:11  वह अपने प्राणों का दु:ख उठा कर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा, और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।
    Isa 53:12  इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया, तौभी उस ने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और अपराधियों के लिये बिनती करता है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ३४-३६ 
  • इब्रानियों २

गुरुवार, 31 मार्च 2011

परमेश्वर से बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति रौनलड रीएगन के साथ एक घटना घटी - वे एक बुज़ुर्ग अमेरिकी नागरिक से फोन पर बात करना चाह रहे थे। उन्होंने उसे टेलिफोन किया लेकिन उस व्यक्ति को विश्वास ही नहीं हुआ कि फोन पर दूसरी तरफ स्वयं राष्ट्रपति हैं और राष्ट्रपति उससे बात करना चाह रहे हैं, इसलिए उसने फोन काट दिया। राष्ट्रपति फोन मिलाते रहे और वह फोन काटता रहा; ऐसा उसने आधा दर्जन बार किया। आखिरकार टेलिफोन ऑपरेटर ने और उसके पड़ौसी ने उसे समझाया और विश्वास दिलाया कि वास्तव में राष्ट्रपति ही उससे बात करना चाह रहे हैं, फिर उसने १५ मिनिट तक राष्ट्रपति से टेलिफोन पर बातें करीं।

सदियों पहले शमूएल को भी आश्चर्य में डालने वाला बुलावा आया। उसे पता नहीं चला कि कौन उसे बुला रहा है, बुलाने वाला किसी भी राष्ट्रपति से कहीं बढ़कर था। जब शमूएल ने जाना कि स्वयं परमेश्वर उससे बातें कर रहा है, तो उसने ध्यान देकर परमेश्वर की बातें सुनीं।

हम मसीहीयों की प्रतिक्रिया भी कभी कभी कुछ ऐसी ही होती है जब परमेश्वर हमसे बातें करता है। कभी कभी हमें अपने मन की गहराईयों में किसी बात के लिए ऐसा दृढ़ विश्वास होता है जिसे हम समझ नहीं पाते। पहले पहल हम उसे परमेश्वर की आवाज़ की तरह नहीं पहचानते, फिर जब हमें विश्वास हो जाता है कि हाँ परमेश्वर ही है, तो हमें अचम्भा होता कि वह हम से बातें करना चाहता है।

हम भूल जाते हैं कि परमेश्वर अपने प्रत्येक विश्वासी से एक व्यक्तिगत संबंध रखना चाहता है, वह चाहता है कि हम भी उसे व्यक्तिगत रीति से जानें। वह हम से अपने लिखित वचन बाइबल द्वारा बातें करता है, अपने जीवित वचन प्रभु यीशु मसीह द्वारा बातें करता है, और हमारे अन्दर अपने पवित्र आत्मा के रूप में निवास करता है, जो हमें उसका वचन सुनने और समझने की सामर्थ देता है।

परमेश्वर सदा हम से बातें करने के प्रयास में लगा रहता है, इसलिए हमें भी उसकी बात सुनने और मानने के लिए तैयार रहना चाहिए। - मार्ट डी हॉन


दो तरह के मसीही होते हैं, पहले वे जो परमेश्वर की प्रतीक्षा में रहते हैं और दूसरे वे जो परमेश्वर को प्रतीक्षा करवाते रहते हैं।

सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो तो अपने मन को कठोर न करो... - इब्रानियों ३:७, ८


बाइबल पाठ: इब्रानियों ३:७-१४

Heb 3:7 सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्‍द सुनो।
Heb 3:8 तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था।
Heb 3:9 जहां तुम्हारे बाप दादों ने मुझे जांचकर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे।
Heb 3:10 इस कारण मैं उस समय के लोगों से रूठा रहा, और कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्‍होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना।
Heb 3:11 तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएंगे।
Heb 3:12 हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए।
Heb 3:13 वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए।
Heb 3:14 क्‍योंकि हम मसीह के भागी हुए हैं, यदि हम अपने प्रथम भरोसे पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें।

एक साल में बाइबल:
  • न्यायियों ११-१२
  • लूका ६:१-२६