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मंगलवार, 19 अप्रैल 2011

यीशु के बहाए लहु द्वारा

युद्ध में बुरी तरह घायल और मृत्यु के निकट एक सैनिक के साथ एक महिला प्रार्थना कर रही थी कि एक नर्स वहाँ पहुंची और सैनिक से कहने लगी, "तुम्हें अपने पापों की चिंता करने की आवश्यक्ता नहीं है; जो भी अपने प्राण अपने देश पर न्योछावर कर सकता है, वह गलत नहीं हो सकता।" सैनिक मुस्कुराया और बोला, "यह बात सही नहीं है। मैं जब युद्ध भूमि में घायल पड़ा था, तब मैं जानता था कि मैं जो कुछ अपनी मातृभूमि के लिए कर सकता था, मैंने किया है, लेकिन इस विचार ने मुझे परमेश्वर के सामने अपना हिसाब देने का साहस नहीं दिया। मुझे ज्ञात था कि मैं मर कर न्याय का सामना नहीं कर पाऊंगा। लेकिन इस महिला ने मुझे यह समझने में सहायता करी है कि यीशु ने मेरे समस्त पापों के लिए दण्ड उठा लिया है और मुझे पापों से क्षमा कर दिया है, अब मैं मरने से नहीं डरता।"

उस नर्स ने कुछ बुरा तो नहीं कहा, परन्तु जो कहा वह अज्ञानता में कहा। सैनिक ने सुसमाचार के मर्म को समझ लिया - यीशु हमारे पापों के लिए मरा। कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु की मृत्यु हमारे स्थान पर थी - जहाँ हमें होना था, वह चला गया; हम अधर्मियों के स्थान पर वह धर्मी मरा तथा वही हमारे अनन्त उद्धार की एकमात्र आशा है।

एक कवि ने लिखा: "हे यीशु, वो पापों का बोझ था जिसने तेरे सिर को झुका दिया,/ मेरे पाप तुझे उठाने पड़े;/ तूने मेरा बोझ उठा लिया और मेरे संति मर गया,/ अपने प्राण मेरे प्राण के लिए बलिदान कर दिये,/ तेरा लहु बलिदान बन कर बह गया!/ अपने अनुग्रह से तूने मुझे बचा लिया।"

हमें आवश्यक्ता है कि हम बार बार रुक कर प्रभु यीशु का धन्यवाद करें कि उसने हमारे पापों के दण्ड को अपने उपर लिया और हमारे लिए अपने प्राण दिये।

केवल उसने ही यह किया और केवल वह ही यह कर सकता था। - पौल वैन गौर्डर


स्वर्ग का जायज़ प्रवेशपत्र केवल यीशु के लहु से ही हस्ताक्षरित है।

परन्तु वह हमारे ही अपराधों के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी... - यशायाह ५३:५


बाइबल पाठ: यशायाह ५३

Isa 53:1 जो समाचार हमें दिया गया, उसका किस ने विश्वास कया? और यहोवा का भुजबल किस पर प्रगट हुआ?
Isa 53:2 क्योंकि वह उसके साम्हने अंकुर की नाईं, और ऐसी जड़ के समान उगा जो निर्जल भूमि में फूट निकले; उसकी न तो कुछ सुन्दरता थी कि हम उसको देखते, और न उसका रूप ही हमें ऐसा दिखाई पड़ा कि हम उसको चाहते।
Isa 53:3 वह तुच्छ जाना जाता और मनुष्यों का त्यागा हुआ था; वह दु:खी पुरूष था, रोग से उसकी जान पहिचान थी; और लोग उस से मुख फेर लेते थे। वह तुच्छ जाना गया, और, हम ने उसका मूल्य न जाना।
Isa 53:4 निश्चय उस ने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दु:खों को उठा लिया, तौभी हम ने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा।
Isa 53:5 परन्तु वह हमारे ही अपराधो के कारण घायल किया गया, वह हमारे अधर्म के कामों के हेतु कुचला गया; हमारी ही शान्ति के लिये उस पर ताड़ना पड़ी कि उसके कोड़े खाने से हम चंगे हो जाएं।
Isa 53:6 हम तो सब के सब भेड़ों की नाईं भटक गए थे, हम में से हर एक ने अपना अपना मार्ग लिया और यहोवा ने हम सभों के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया।
Isa 53:7 वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला।
Isa 53:8 अत्याचार करके और दोष लगाकर वे उसे ले गए, उस समय के लोगों में से किस ने इस पर ध्यान दिया कि वह जीवतों के बीच में से उठा लिया गया; मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण उस पर मार पड़ी।
Isa 53:9 और उसकी कब्र भी दुष्टों के संग ठहराई गई, और मृत्यु के समय वह धनवान का संगी हुआ, यद्यपि उस ने किसी प्रकार का अपद्रव न किया था और उसके मुंह से कभी छल की बात नहीं निकली थी।
Isa 53:10 तौभी यहोवा को यही भाया कि उसे कुचले, उसी ने उसको रोगी कर दिया; जब तू उसका प्राण दोषबलि करे, तब वह अपना वंश देखने पाएगा, वह बहुत दिन जीवित रहेगा उसके हाथ से यहोवा की इच्छा पूरी हो जाएगी।
Isa 53:11 वह अपने प्राणों का दु:ख उठाकर उसे देखेगा और तृप्त होगा; अपने ज्ञान के द्वारा मेरा धर्मी दास बहुतेरों को धर्मी ठहराएगा और उनके अधर्म के कामों का बोझ आप उठा लेगा।
Isa 53:12 इस कारण मैं उसे महान लोगों के संग भाग दूंगा, और, वह सामर्थियों के संग लूट बांट लेगा; क्योंकि उसने अपना प्राण मृत्यु के लिये उण्डेल दिया, वह अपराधियों के संग गिना गया तौभी उस ने बहुतों के पाप का बोझ उठ लिया, और, अपराधियों के लिये बिनती करता है।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल ६-८
  • लूका १५:१-१०

सोमवार, 18 अप्रैल 2011

यीशु क्यों मरा?

सदियों से इस प्रश्न ने दुविधा उत्पन्न कर रखी है कि यीशु की मृत्यु का कारण क्या था? मध्य काल में, धर्म के नाम पर युद्ध करने वाले, तुर्कियों के हाथ से यरुशलेम को छुड़ाने योरोप से निकले। उनमे भ्रांति थी कि यहूदियों के कारण ही यीशु को मरना पड़ा, और वे यहूदियों को ’मसीह के हत्यारे’ कहते थे; इसलिए मार्ग में जहाँ भी यहूदी उन्हें मिलते, वे उन्हें मार डालते।

आज भी यीशु की मृत्यु को लेकर लोग संवेदनशील रहते हैं। लेकिन बाइबल इस बारे में क्या कहती है? मत्ती द्वारा लिखित वृतांत के अनुसार, रोमी इस बात के लिए ज़िम्मेदार प्रतीत होते हैं, क्योंकि रोमी शासक पीलातुस ने यीशु को निर्दोष करार देते हुए भी उसे मृत्यु दण्ड के लिए सौंप दिया, तथा रोमी सैनिकों ने उसे ले जाकर क्रूस पर चढ़ा दिया। लेकिन इस घटना के कुछ ही सप्ताह पश्चात, पतरस ने यरुशलेम में अपने प्रचार में यहूदियों को यीशु को क्रूस देने का दोषी ठहराया (प्रेरितों २:२२-२४)।

परन्तु सच्चाई यह है कि हम सब यीशु की मृत्यु के लिए ज़िम्मेदार हैं। क्रूस पर यीशु ने न केवल यहूदियों और रोमियों के पापों की कीमत चुकाई, वरन हम सब के पापों की कीमत भी चुकाई ( १ पतरस २:२४)। यीशु प्रत्येक पापी के लिए मरा (२ कुरिन्थियों ५:१५)। इसलिए इस बात पर बहस करना कि यीशु को किसने मारा, किसी विशवासी के लिए उचित नहीं है - वास्तविक्ता यही है कि हम सब इसके ज़िम्मेदार हैं।

यीशु ने हम सब के लिए अपने प्राण दिये, हमारे पाप ही उसकी मृत्यु का कारण हैं। उसपर विश्वास करने से हमें पापों की क्षमा, परमेश्वर से शांति और मेल-मिलाप तथा अनन्त जीवन मिलता है। - डेव एग्नर


यीशु हमारे स्थान पर मरा ताकि हम उसकी शांति पाएं; उसने हमारे पाप अपने ऊपर ले लिए जिससे हम उसके उद्धार को प्राप्त कर सकें।

हे इस्‍त्राएलियों, ये बातें सुनो: कि यीशु नासरी एक मनुष्य था जिस का परमेश्वर की ओर से होने का प्रमाण उन सामर्थ के कामों और आश्‍चर्य के कामों और चिन्‍हों से प्रगट है, जो परमेश्वर ने तुम्हारे बीच उसके द्वारा कर दिखलाए जिसे तुम आप ही जानते हो। उसी को, जब वह परमेश्वर की ठहराई हुई मनसा और होनहार के ज्ञान के अनुसार पकड़वाया गया, तो तुम ने अधमिर्यों के हाथ से उसे क्रूस पर चढ़वा कर मार डाला। प्रेरितों २:२२-२३


बाइबल पाठ: प्रेरितों २:२२-३९

Act 2:22 हे इस्‍त्राएलियों, ये बातें सुनो: कि यीशु नासरी एक मनुष्य था जिस का परमेश्वर की ओर से होने का प्रमाण उन सामर्थ के कामों और आश्‍चर्य के कामों और चिन्‍हों से प्रगट है, जो परमेश्वर ने तुम्हारे बीच उसके द्वारा कर दिखलाए जिसे तुम आप ही जानते हो।
Act 2:23 उसी को, जब वह परमेश्वर की ठहराई हुई मनसा और होनहार के ज्ञान के अनुसार पकड़वाया गया, तो तुम ने अधमिर्यों के हाथ से उसे क्रूस पर चढ़वाकर मार डाला।
Act 2:24 परन्‍तु उसी को परमेश्वर ने मृत्यु के बन्‍धनों से छुड़ाकर जिलाया: क्‍योंकि यह अनहोना था कि वह उसके वश में रहता।
Act 2:25 क्‍योंकि दाऊद उसके विषय में कहता है, कि मैं प्रभु को सर्वदा अपने साम्हने देखता रहा क्‍योंकि वह मेरी दाहिनी ओर है, ताकि मैं डिग न जाऊं।
Act 2:26 इसी कारण मेरा मन आनन्‍द हुआ, और मेरी जीभ मगन हुई, वरन मेरा शरीर भी आशा में बसा रहेगा।
Act 2:27 क्‍योंकि तू मेरे प्राणों को अधोलोक में न छोड़ेगा और न अपने पवित्र जन को सड़ने ही देगा!
Act 2:28 तू ने मुझे जीवन का मार्ग बताया है, तू मुझे अपने दर्शन के द्वारा आनन्‍द से भर देगा।
Act 2:29 हे भाइयो, मैं उस कुलपति दाऊद के विषय में तुम से साहस के साथ कह सकता हूं कि वह तो मर गया और गाड़ा भी गया और उस की कब्र आज तक हमारे यहां वर्तमान है।
Act 2:30 सो भविष्यद्वक्ता होकर और यह जानकर कि परमेश्वर ने मुझ से शपथ खाई है, कि मैं तेरे वंश में से एक व्यक्ति को तेरे सिंहासन पर बैठाऊंगा।
Act 2:31 उस ने होनहार को पहिले ही से देखकर मसीह के जी उठने के विषय में भविष्यद्वाणी की कि न तो उसका प्राण अधोलोक में छोड़ा गया, और न उस की देह सड़ने पाई।
Act 2:32 इसी यीशु को परमेश्वर ने जिलाया, जिस के हम सब गवाह हैं।
Act 2:33 इस प्रकार परमेश्वर के दाहिने हाथ से सर्वोच्‍च पद पाकर, और पिता से वह पवित्र आत्मा प्राप्‍त करके जिस की प्रतिज्ञा की गई थी, उस ने यह उंडेल दिया है जो तुम देखते और सुनते हो।
Act 2:34 क्‍योंकि दाऊद तो स्‍वर्ग पर नहीं चढ़ा परन्‍तु वह आप कहता है, कि प्रभु ने मेरे प्रभु से कहा;
Act 2:35 मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे बैरियों को तेरे पांवों तले की चौकी न कर दूं।
Act 2:36 सो अब इस्‍त्राएल का सारा घराना निश्‍चय जान ले कि परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया, प्रभु भी ठहराया और मसीह भी।
Act 2:37 तब सुनने वालों के ह्रृदय छिद गए, और वे पतरस और शेष प्रेरितों से पूछने लगे, कि हे भाइयो, हम क्‍या करें?
Act 2:38 पतरस ने उन से कहा, मन फिराओ, और तुम में से हर एक अपने अपने पापों की क्षमा के लिये यीशु मसीह के नाम से बपतिस्मा ले, तो तुम पवित्र आत्मा का दान पाओगे।
Act 2:39 क्‍योंकि यह प्रतिज्ञा तुम, और तुम्हारी सन्‍तानों, और उन सब दूर दूर के लोगों के लिये भी है जिनको प्रभु हमारा परमेश्वर अपने पास बुलाएगा।


एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल ३-५
  • लूका १४:२५-३५

रविवार, 17 अप्रैल 2011

आशा अथवा निराश

मैं सोचता हूँ कि उस समय यरुशलेम में कितने ही लोग ऐसे थे जो रविवार को तो प्रभु यीशु के स्वागत के लिए "होशाना" (धन्य-धन्य) के नारे लगा रहे थे और कुछ दिन पश्चात उसे क्रूस की मृत्यु देने के लिए भी चिल्ला रहे थे। लोग निराश थे कि प्रभु यीशु ने रोमी राज्य को हटा कर अपना राज्य स्थापित नहीं किया। प्रभु यीशु ने न तो लोगों द्वारा उत्साहपूर्वक अपने स्वागत को रोकने की कोशिश करी और न ही उन लोगों के जोश का लाभ उठा कर किसी बलवे के लिए उन्हें उकसाया। उस भीड़ में जो केवल विदेशी सत्ता की आधीनता से मुक्ति पाना चाहते थे, वे यीशु से बहुत निराश हुए।

लोग यह नहीं पहचान सके कि यीशु अपना सांसारिक प्रभुत्व स्थापित करना नहीं वरन उनके हृदयों पर राज्य करना चाहता है। उस समय के यहूदियों की सबसे बड़ी आवश्यक्ता रोमी साम्राज्य से छुटकारा नहीं वरन पापों से मुक्ति थी। एक दिन अवश्य यीशु अपनी महिमा और सामर्थ में समस्त संसार राज्य करेगा, लेकिन उससे पहले उसे क्रूस पर बलिदान द्वारा समस्त संसार के पाप के दण्ड की कीमत चुकाने के द्वारा ही संभव था। उसके साम्राज्य की स्थापना की कुंजी संसार में कोई विद्रोह अथवा क्रांति नहीं वरन मनुष्यों में पश्चाताप और समर्पण है; क्योंकि उसका राज्य पृथ्वी पर नहीं वरन लोगों के हृदय में और स्वर्ग में है।

सदीयाँ बीतने पर भी मुद्दा बदला नहीं है, बात वहीं और वैसी ही है। यदि हम प्रभु यीशु का अनुसरण इस उद्देश्य से करते हैं कि वह हमें ज़िन्दगी की मुशकिलों से बचा लेगा, हमारे सारे रोगों को चंगा कर देगा, हमें समृद्धि प्रदान कर देगा तो यकीन जानिए, उस समय की उस भीड़ की तरह आप भी निराशा की ओर अग्रसर हैं।

लेकिन अगर हम अपने पापों से पश्चाताप करके उसे अपने हृदय का राजा बना लें, अपना क्रूस उठाकर उसके पीछे हो लें और उसके लिए जीने की ठान लें क्योंकि वही हमारा सर्जनहार-पालनहार-तारणहार परमेश्वर है, तो हमें कभी यीशु से कोई निराशा नहीं होगी और उसकी शांति और सामर्थ हमारे जीवनों में अनन्तकाल तक राज करेगी, हमें सामर्थ देगी और हम एक जयवंत जीवन जीने वाले लोग होंगे। - डेनिस डी हॉन


अपने जीवन में यीशु को प्रथम रखिये, उसकी शांति और सामर्थ अन्त तक आपके साथ रहेगी।

देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह नम्र है और गदहे पर बैठा है बरन लादू के बच्‍चे पर। - मत्ती २१:५


बाइबल पाठ: मत्ती २१:१-११

Mat 21:1 जब वे यरूशलेम के निकट पहुंचे और जैतून पहाड़ पर बैतफगे के पास आए, तो यीशु ने दो चेलों को यह कहकर भेजा।
Mat 21:2 कि अपने साम्हने के गांव में जाओ, वहां पंहुचते ही एक गदही बन्‍धी हुई, और उसके साथ बच्‍चा तुम्हें मिलेगा; उन्‍हें खोलकर, मेरे पास ले आओ।
Mat 21:3 यदि तुम में से कोई कुछ कहे, तो कहो, कि प्रभु को इन का प्रयोजन है: तब वह तुरन्‍त उन्‍हें भेज देगा।
Mat 21:4 यह इसलिये हुआ, कि जो वचन भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया या, वह पूरा हो
Mat 21:5 कि सिय्योन की बेटी से कहो, देख, तेरा राजा तेरे पास आता है; वह नम्र है और गदहे पर बैठा है बरन लादू के बच्‍चे पर।
Mat 21:6 चेलों ने जाकर, जैसा यीशु ने उन से कहा था, वैसा ही किया।
Mat 21:7 और गदही और बच्‍चे को लाकर, उन पर अपने कपड़े डाले, और वह उन पर बैठ गया।
Mat 21:8 और बहुतेरे लोगों ने अपने कपड़े मार्ग में बिछाए, और और लोगों ने पेड़ों से डालियां काटकर मार्ग में बिछाईं।
Mat 21:9 और जो भीड़ आगे आगे जाती और पीछे पीछे चली आती थी, पुकार पुकार कर कहती थी, कि दाऊद की सन्‍तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना।
Mat 21:10 जब उस ने यरूशलेम में प्रवेश किया, तो सारे नगर में हलचल मच गई और लोग कहने लगे, यह कौन है?
Mat 21:11 लोगों ने कहा, यह गलील के नासरत का भविष्यद्वक्ता यीशु है।

एक साल में बाइबल:
  • २ शमूएल १-२
  • लूका १४:१-२४

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

छिछली निष्ठा

अमेरिका में रविवार की प्रातः समय होता है "इलैकट्रौनिक चर्च" का। अनेक टी. वी. चैनलों द्वारा मसीही कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। कुछ टी.वी. प्रचारक तो स्पष्ट और सटीक सुसमाचार सुनाते हैं, परन्तु कई ऐसे हैं जो सम्मोहित से बैठे दर्शकों के सामने मंच पर इधर से उधर चक्कर लगाते हैं और उन्हें लुभावनी बातों से वशीभूत करने का प्रयास करते हैं, कि यीशु आपको सभी बिमरियों से चंगाई देगा, वह आपको अमीर बना देगा, गरीबी शैतान की ओर से है किंतु यीशु आपको समृद्ध देखना चाहता है। लोग ऐसे चंगाई और स्मृद्धि के "सुसमाचार" को सुनना बहुत पसन्द करते हैं और ऐसे प्रचारकों की सुनने को बड़ी भीड़ एकत्रित रहती है।

अब ज़रा अपने आप को पहली सदी के एक रविवार के दिन में ले चलिए; वर्ष है लगभग ३३ ईस्वीं और शहर है यरुशलेम। यहाँ पर पिछले ३ वर्षों से य़ीशु बिमारों को चंगा करता रहा है, उसने भूखों को भोजन दिया और यहाँ तक कि मुर्दों को भी जिला दिया। अब वह यरुशलेम में गदही के बच्चे पर बैठ कर प्रवेश कर रहा है, और बड़ी भीड़ उसका स्वागत "होशाना" (धन्य-धन्य) के नारों से कर रही है। लेकिन यह भीड़ उसका स्वागत अपने पिछले अनुभव के आधार पर इस सोच से कर रही है कि वह हमें क्या कुछ नहीं दे सकता; उन्हें इससे कोई मतलब नहीं है कि वह कौन है और क्यूँ आया है। उन्हें एक सांसारिक मसीहा चाहिए जो उनकी पार्थिव आवश्यक्ताओं को पूरा कर सके। जब यीशु उनकी उम्मीदों के अनुसार नहीं बना तो इसी भीड़ ने उसके लिए क्रूस की मृत्यु भी माँगने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उन्हें दुख उठाने वाले मसीहा से कोई सरोकार नहीं है जिसकी क्रूस पर की मृत्यु उनके पापों को प्रगट करती है, उन्हें पश्चाताप के लिए उकसाती है, उनसे समर्पण का जीवन चाहती है और उन्हें पापों की क्षमा का मार्ग देती है।

प्रभु यीशु ने कभी यह वायदा नहीं दिया कि वह संसार में संसार के सभी दुखों से छुटकारा देगा। लेकिन उसने यह वायदा अवश्य किया कि वह पापों की क्षमा, शान्ति, अनन्त जीवन और इस संसार में क्रूस उठाने का जीवन देगा।

प्रभु यीशु की सेवा करने के जीवन में क्रूस उठाने के जीवन से कमतर किसी भी बात की आशा रखना प्रभु यीशु के प्रति एक छिछली निष्ठा का प्रमाण है। - डेनिस डी हॉन


सहज (आसान) शब्द सुसमाचारों में केवल एक बार प्रयोग हुआ है, वह भी प्रभु यीशु के साथ उसके जुए में जुतने के संदर्भ में।

और जो भीड़ आगे आगे जाती और पीछे पीछे चली आती थी, पुकार पुकार कर कहती थी, कि दाऊद की सन्‍तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना। - मत्ती २१:९


बाइबल पाठ: युहन्ना १२:१२-१९

Joh 12:12 दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्ब्‍ब में आए थे, यह सुनकर, कि यीशु यरूशलेम में आता है।
Joh 12:13 खजूर की, डालियां ले लीं, और उस से भेंट करने को निकले, और पुकारने लगे, कि होशाना, धन्य इस्‍त्राएल का राजा, जो प्रभु के नाम से आता है।
Joh 12:14 जब यीशु को एक गदहे का बच्‍चा मिला, तो उस पर बैठा।
Joh 12:15 जैसा लिखा है, कि हे सिय्योन की बेटी, मत डर, देख, तेरा राजा गदहे के बच्‍चे पर चढ़ा हुआ चला आता है।
Joh 12:16 उसके चेले, ये बातें पहिले न समझे थे; परन्‍तु जब यीशु की महिमा प्रगट हुई, तो उन को स्मरण आया, कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं और लोगों ने उस से इस प्रकार का व्यवहार किया था।
Joh 12:17 तब भीड़ के लोगों ने जो उस समय उसके साथ थे यह गवाही दी कि उस ने लाजर को कब्र में से बुला कर, मरे हुओं में से जिलाया था।
Joh 12:18 इसी कारण लोग उस से भेंट करने को आए थे क्‍योंकि उन्‍होंने सुना था, कि उस ने यह आश्‍चर्यकर्म दिखाया है।
Joh 12:19 तब फरीसियों ने आपस में कहा, सोचो तो सही कि तुम से कुछ नहीं बन पड़ता: देखो, संसार उसके पीछे हो चला है।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल ३०-३१
  • लूका १३:२३-३५

शुक्रवार, 15 अप्रैल 2011

ईर्ष्या से बचाव

डाह और ईर्ष्या ऐसी भावनाएं हैं जो असंतुष्टि और रोष के कारण होती हैं। यह किसी अन्य के भले गुणों या उसकी संपदा को पाने की लालसा से हो सकता है। राहेल ने अपनी बहन लीआः से डाह रखी क्योंकि वह स्वयं बांझ थी किन्तु लिआः के सन्तान उत्पन्न होती थी (उत्पत्ति ३०:१); यूसुफ के भाईयों ने उससे ईर्ष्या करी क्योंकि उसने स्वप्न में भविष्य के दर्शन देखे थे (उत्पत्ति ३७:११); शाउल को दाउद से ईर्ष्या हुई क्योंकि उसके राज्य की महिलाएं दाउद की प्रशंसा करने लगीं (१ शमुएल १८:७-९); यहूदियों को पौलुस से ईर्ष्या हुई क्योंकि उसके प्रचार की सभी सराहना करते थे और प्रभावित होते थे (प्रेरितों १३:४५)।

दूसरे कि कोई भी योग्यता, जैसे बुद्धिमता, सुन्दरता, लोकप्रीयता, यहाँ तक कि आत्मिक बातों की समझ भी लोगों में द्वेश और ईर्ष्या उतपन्न कर सकती है। मसीही विश्वासी भी, चाहे वह कितना भी बड़ा विश्वासी क्यों न हो, इस दुरभावना का शिकार होने के खतरे में रहता है।

जब मैसचूसटस प्रांत के नौर्थफील्ड शहर में एफ. बी. मेयर्स पहली बार प्रचार के लिए आए तो उनके द्वारा दिल छू लेने वाले सन्देश सुनने के लिए लोगों की बड़ी भीड़ एकत्रित होने लगी। कुछ समय पश्चात महान बाइबल शिक्षक कैम्पबल मौर्गन उसी शहर में आए, और भीड़ उनकी सभाओं में जाने लगी। मेयर्स ने स्वीकार किया कि इस बात से उन्हें ईर्ष्या हुई; उन्होंने कहा, "अपनी इस दुर्भावना पर विजयी होने का मेरे पास एक ही उपाय है कि मैं मौर्गन की सफलता के लिए प्रार्थना करूं, और मैं रोज़ यही किया करता हूँ।"

जो हमारे पास नहीं है लेकिन किसी दूसरे के पास है, उसके प्रति नकरात्मक रवैया रखना, हमारे अन्दर पवित्र आत्मा के कार्य को बाधित करता है। लेकिन जब हम उसके भले की कामना करेंगे जिससे हमें ईर्ष्या होती है तभी हम अपने अन्दर से डाह और ईर्ष्या को उखाड़ कर फेंकने पाएंगे और इन दुरभावनाओं पर विजयी होने पाएंगे। - रिचर्ड डी हॉन


मसीह जैसे प्रेम की प्रतिदिन की खुराक ईर्ष्या रोग को हमारे अन्दर पनपने से बचा कर रखती है।

परन्‍तु यहूदी भीड़ को देखकर डाह से भर गए, और निन्‍दा करते हुए पौलुस की बातों के विरोध में बोलने लगे। - प्रेरितों १३:४५


बाइबल पाठ: प्रेरितों १३:४४-५२

Act 13:44 अगले सब्‍त के दिन नगर के प्राय: सब लोग परमेश्वर का वचन सुनने को इकट्ठे हो गए।
Act 13:45 परन्‍तु यहूदी भीड़ को देखकर डाह से भर गए, और निन्‍दा करते हुए पौलुस की बातों के विरोध में बोलने लगे।
Act 13:46 तब पौलुस और बरनबास ने निडर होकर कहा, अवश्य था, कि परमेश्वर का वचन पहिले तुम्हें सुनाया जाता; परन्‍तु जब कि तुम उसे दूर करते हो, और अपने को अनन्‍त जीवन के योग्य नहीं ठहराते, तो देखो, हम अन्यजातियों की ओर फिरते हैं।
Act 13:47 क्‍योकिं प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है कि मैंने तुझे अन्याजातियों के लिये ज्योति ठहराया है ताकि तू पृथ्वी की छोर तक उद्धार का द्वार हो।
Act 13:48 यह सुनकर अन्यजाति आनन्‍दित हुए, और परमेश्वर के वचन की बड़ाई करने लगे; और जितने अनन्‍त जीवन के लिये ठहराए गए थे, उन्‍होंने विश्वास किया।
Act 13:49 तब प्रभु का वचन उस सारे देश में फैलने लगा।
Act 13:50 परन्‍तु यहूदियों ने भक्त और कुलीन स्‍त्रियों को और नगर के बड़े लोगों को उकसाया, और पौलुस और बरनबास पर उपद्रव करवा कर उन्‍हें अपने सिवानों से निकाल दिया।
Act 13:51 तब वे उन के साम्हने अपने पांवों की धूल झाड़कर इकुनियुम को गए।
Act 13:52 और चेले आनन्‍द से और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते रहे।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल २७-२९
  • लूका १३:१-२२

गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

ईर्ष्या की औषधि

इटली के पादुआ इलाके में एक चर्च में मध्यकालीन चित्रकार जियोटो द्वारा बनाया गया एक चित्र टंगा है। चित्रकार ने इस चित्र में "ईर्ष्या" को दिखाया है - उसके लम्बे लम्बे कान हैं जो किसी दूसरे की उपल्बधियों की सभी बातों की ओर लगे हैं, उसकी लम्बी सी ज़ुबान है, जो सांप की ज़ुबान के समान है जिससे वह अपने ईर्ष्या के पात्र की कीर्ति को विषाक्त करती है। लेकिन चित्र में एक अद्भुत बात भी दिखाई गई है - ईर्ष्य़ा की यह लम्बी सी ज़ुबान मुड़कर उसकी अपनी आंखों में घुसी हुई है, यह दिखाने के लिए कि न सिर्फ ईर्ष्या अन्धी होती है वरन वह अपना नुकसान भी खुद ही करती है।

सच है, ईर्ष्या और द्वेश से भरे मन से दुखी और अभागा और कोई नहीं हो सकता। ईर्ष्यालु व्यक्ति न केवल दूसरों की खुशियों को नाश करते हैं, वे दूसरों की उपल्ब्धियों को भी खराब करते हैं और अपनी ईर्ष्या में स्वयं ही जल जाते हैं।

ईर्ष्या उन पापों में से एक थी जो कुरिन्थुस के चर्च का नाश कर रही थी। उस चर्च के सदस्य एक दूसरे के आत्मिक वरदानों से डाह रखते थे, और वह मण्डली गुटों में विभाजित हो गई थी। हर कोई अपनी ही बड़ाई चाहता था। पौलुस ने उन्हें समझाया "...तुम बड़ी से बड़ी बरदानों की धुन में रहो! परन्‍तु मैं तुम्हें और भी सब से उत्तम मार्ग बताता हूं।" (१ कुरिन्थियों १२:३१) - प्रेम का मार्ग, क्योंकि " प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।" (१ कुरिन्थियों १३:४)

यदि हम दूसरों की सफलता पर अप्रसन्न होते हैं, कुड़कुड़ाते हैं और उनपर लांछन लगाते हैं, उनकी बुराई करते हैं, तो हम "ईर्ष्या रोग" से ग्रसित हैं, जिससे चंगा होने की "प्रेम औषधि" परमेश्वर हमें देना चाहता है।

प्रेम ही वह औषधि है जो हमें "ईर्ष्या रोग" से बचा सकती है। - डेव एगनर


दूसरों पर छोड़े गए ईर्ष्या के बाण, स्वयं हमें ही घायल करते हैं।

क्योंकि मूढ़ तो खेद करते करते नाश हो जाता है, और भोला जलते जलते मर मिटता है। - अय्युब ५:२


बाइबल पाठ: गलतियों ५:१९-२६

Gal 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
Gal 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।
Gal 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के ऐसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
Gal 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज,
Gal 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
Gal 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्‍होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषों समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Gal 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।
Gal 5:26 हम घमण्‍डी होकर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल २५-२६
  • लूका १२:३२-५९

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

ईर्ष्या से प्रतिरोध

तकनीक विज्ञान में घर्षण से उतपन्न प्रतिरोध कार्य कुशलता का विरोधी है। इसी कारण वाहन निर्माता वाहन में कम से कम वायु-प्रतिरोध, आसानी से घूम सकने वाले टायर और अधिक से अधिक कार्य कुशल इंजनों पर ज़ोर देते हैं। वे वायु, सड़क और इंजन के पुर्ज़ों के घर्षण प्रतिरोध को कम से कम करना चाहते हैं।

बाइबल की गिनती नामक पुस्तक में हम एक ऐसे प्रतिरोध के बारे में पढ़ते हैं जो आपसी तनाव उतपन्न करता है, हमारी गवाही को खराब करता है, हमारी आराधना को रोकता है और हमारे जीवन में परमेश्वर के आत्मा के कार्य में बाधा डालता है। मिरियम द्वारा अपने भाई के विरुद्ध ईर्ष्या से किये गये विरोध के कारण परमेश्वर का क्रोध उन पर भड़का और इस्त्राएलियों के आगे बढ़ने में बाधा बना। जैसे मिरियम द्वारा उतपन्न प्रतिरोध इस्त्राएल के लिए बाधा बना, ऐसे ही आज भी चर्च के लोगों के आपसी संबंधों में आपसी ईर्ष्या और द्वेश उनकी बढ़ोतरी में बाधा हैं।

हम सबने विद्वेशियों के शब्दबाणों की वेदना का अनुभव किया है, लेकिन विद्वेश से सबसे अधिक तकलीफ उसे होती है जो विद्वेश को अपने मन में पालता है। ईर्ष्या ईर्ष्यालु व्यक्ति को अन्दर ही अन्दर खा जाती है और उसके आत्मिक तथा सांसारिक, दोनो जीवनों का नाश कर देती है। इसीलिए प्राचीन काल के दार्शनिक सुकरात (Socrates) ने ईर्ष्या को "आत्मा की आरी" कहा।

जब कभी हम विद्वेश के प्रतिरोध को अपने अन्दर अनुभव करें, हमें तुरंत परमेश्वर के सामने उसका अंगीकार कर लेना चाहिए और परमेश्वर से उसके ऊपर जयवंत होने की सामर्थ मांगनी चाहिए। साथ ही उन्हें भी क्षमा कर देना चाहिए जिन्होंने हमारा बुरा किया या चाहा; और जिनका हमने बुरा किया या चाहा, उनसे क्षमा मांग लेनी चाहिए।

ऐसा करने से हमारे अन्दर का "घर्षण प्रतिरोध" समाप्त हो जाएगा और हमारे जीवन में कार्य कुशलता पुनः लौट आएगी। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


हम एक ही समय में ईर्ष्यालु और कार्य कुशल नहीं हो सकते।

...क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के साथ बातें की हैं? क्या उस ने हम से भी बातें नहीं कीं? - गिनती १२:२


बाइबल पाठ: गिनती १२

Num 12:1 मूसा ने तो एक कूशी स्त्री के साथ ब्याह कर लिया था। सो मरियम और हारून उसकी उस ब्याहता कूशी स्त्री के कारण उसकी निन्दा करने लगे;
Num 12:2 उन्होंने कहा, क्या यहोवा ने केवल मूसा ही के साथ बातें की हैं? क्या उस ने हम से भी बातें नहीं कीं? उनकी यह बात यहोवा ने सुनी।
Num 12:3 मूसा तो पृथ्वी भर के रहने वाले मनुष्यों से बहुत अधिक नम्र स्वभाव का था।
Num 12:4 सो यहोवा ने एकाएक मूसा और हारून और मरियम से कहा, तुम तीनों मिलापवाले तम्बू के पास निकल आओ। तब वे तीनों निकल आए।
Num 12:5 तब यहोवा ने बादल के खम्भे में उतर कर तम्बू के द्वार पर खड़ा होकर हारून और मरियम को बुलाया; सो वे दोनों उसके पास निकल आए।
Num 12:6 तब यहोवा ने कहा, मेरी बातें सुनो: यदि तुम में कोई नबी हो, तो उस पर मैं यहोवा दर्शन के द्वारा अपने आप को प्रगट करूंगा, वा स्वप्न में उस से बातें करूंगा।
Num 12:7 परन्तु मेरा दास मूसा ऐसा नहीं है; वह तो मेरे सब घरानों मे विश्वास योग्य है।
Num 12:8 उस से मैं गुप्त रीति से नहीं, परन्तु आम्हने साम्हने और प्रत्यक्ष होकर बातें करता हूं और वह यहोवा का स्वरूप निहारने पाता है। सो तुम मेरे दास मूसा की निन्दा करते हुए क्यों नहीं डरे?
Num 12:9 तब यहोवा का कोप उन पर भड़का, और वह चला गया;
Num 12:10 तब वह बादल तम्बू के ऊपर से उठ गया, और मरियम कोढ़ से हिम के समान श्वेत हो गई। और हारून ने मरियम की ओर दृष्टि की, और देखा, कि वह कोढ़िन हो गई है।
Num 12:11 तब हारून मूसा से कहने लगा, हे मेरे प्रभु, हम दोनों ने जो मूर्खता की वरन पाप भी किया, यह पाप हम पर न लगने दे।
Num 12:12 और मरियम को उस मरे हुए के समान न रहने दे, जिसकी देह अपनी मां के पेट से निकलते ही अधगली हो।
Num 12:13 सो मूसा ने यह कहकर यहोवा की दोहाई दी, हे ईश्वर, कृपा कर, और उसको चंगा कर।
Num 12:14 यहोवा ने मूसा से कहा, यदि उसका पिता उसके मुंह पर थूका ही होता, तो क्या सात दिन तक वह लज्जित न रहती? सो वह सात दिन तक छावनी से बाहर बन्द रहे, उसके बाद वह फिर भीतर आने पाए।
Num 12:15 सो मरियम सात दिन तक छावनी से बाहर बन्द रही, और जब तक मरियम फिर आने न पाई तब तक लोगों ने प्रस्थान न किया।
Num 12:16 उसके बाद उन्होंने हसेरोत से प्रस्थान करके पारान नाम जंगल में अपने डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल:
  • १ शमूएल २२-२४
  • लूका १२:१-३१