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मंगलवार, 19 जनवरी 2021

प्रेम

 

          “जाराब टपैटियो”, या मैक्सिकन टोपी का नृत्य, रोमांस या प्रेम का नृत्य है। इस तेज़ लय और ताल वाले नृत्य में  पुरुष अपनी टोपी धरती पर रख देता है, और नृत्य के अन्त होने के समय उसकी महिला साथी उस टोपी को उठाती और दोनों उसके पीछे मुँह छिपा कर एक दूसरे से अपने प्रेम को चुम्बन के द्वारा व्यक्त करते हैं।

          यह नृत्य मुझे विवाह में विश्वासयोग्य बने रहने के महत्व को याद दिलाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक के पाँचवें अध्याय में, अनैतिकता और व्यभिचार के कारण चुकाई जाने वाली बड़ी कीमत के बारे में लिखने के बाद हम पढ़ते हैं कि विवाह विशिष्ट है; “तू अपने ही कुण्ड से पानी, और अपने ही कुंए से सोते का जल पिया करना” (पद 15)। जाराब नृत्य में दस जोड़े एक साथ नृत्य कर रहे होते हैं, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति अपने ही साथी के साथ ही नृत्य करता है, केवल उसी पर अपना ध्यान लगाए रहता है। हमें अपने विवाहित साथी पर ही संपूर्ण और अविभाजित ध्यान लगाए रखना है (पद 18)।

          जैसे नृत्य करने वाले जोड़ों के प्रेम को लोग देख रहे होते हैं, और वे जोड़े भी जानते हैं कि उन पर दृष्टि लगी हुई है, वैसे ही हमारा अपने साथी के साथ संबंध किसी की दृष्टि में रहता है; “क्योंकि मनुष्य के मार्ग यहोवा की दृष्टि से छिपे नहीं हैं, और वह उसके सब मार्गों पर ध्यान करता है” (पद 21)। परमेश्वर हमारे वैवाहिक जीवन को सुरक्षित रखना चाहता है, इसलिए हम पर अपनी दृष्टि लगातार बनाए रखता है। अपने जोड़ीदार के साथ वफ़ादारी दिखाने के द्वारा, हम परमेश्वर को प्रसन्न रखें।

          जिस प्रकार से जाराब नृत्य में एक लय और ताल होती है, जिसके साथ उस नृत्य को करना होता है, वैसे ही जीवन की भी एक लय और ताल होती है जिसका पालन करना आवश्यक है। जब हम अपने सृष्टिकर्ता के द्वारा निर्धारित की गई हमारे जीवन की लय और ताल को निभाते हैं, उसके प्रति आज्ञाकारी और विश्वासयोग्य बने रहते हैं, तो चाहे हम विवाहित हों अथवा अविवाहित, हम उसके हमारे प्रति प्रेम में आनन्द और आशीष प्राप्त करते हैं। - कीला ओकोआ

 

वफादारी आनन्द और आशीष लाती है।


क्योंकि परमेश्वर ने हमें अशुद्ध होने के लिये नहीं, परन्तु पवित्र होने के लिये बुलाया है। - 1 थिस्स्लुनीकियों 4:7

बाइबल पाठ: नीतिवचन 5

नीतिवचन 5:1 हे मेरे पुत्र, मेरी बुद्धि की बातों पर ध्यान दे, मेरी समझ की ओर कान लगा;

नीतिवचन 5:2 जिस से तेरा विवेक सुरक्षित बना रहे, और तू ज्ञान के वचनों को थामे रहे।

नीतिवचन 5:3 क्योंकि पराई स्त्री के ओठों से मधु टपकता है, और उसकी बातें तेल से भी अधिक चिकनी होती हैं;

नीतिवचन 5:4 परन्तु इसका परिणाम नागदौना सा कड़वा और दोधारी तलवार सा पैना होता है।

नीतिवचन 5:5 उसके पांव मृत्यु की ओर बढ़ते हैं; और उसके पग अधोलोक तक पहुंचते हैं।

नीतिवचन 5:6 इसलिये उसे जीवन का समथर पथ नहीं मिल पाता; उसके चालचलन में चंचलता है, परन्तु उसे वह आप नहीं जानती।

नीतिवचन 5:7 इसलिये अब हे मेरे पुत्रों, मेरी सुनो, और मेरी बातों से मुंह न मोड़ो।

नीतिवचन 5:8 ऐसी स्त्री से दूर ही रह, और उसकी डेवढ़ी के पास भी न जाना;

नीतिवचन 5:9 कहीं ऐसा न हो कि तू अपना यश औरों के हाथ, और अपना जीवन क्रूर जन के वश में कर दे;

नीतिवचन 5:10 या पराए तेरी कमाई से अपना पेट भरें, और परदेशी मनुष्य तेरे परिश्रम का फल अपने घर में रखें;

नीतिवचन 5:11 और तू अपने अन्तिम समय में जब कि तेरा शरीर क्षीण हो जाए तब यह कह कर हाय मारने लगे, कि

नीतिवचन 5:12 मैं ने शिक्षा से कैसा बैर किया, और डांटने वाले का कैसा तिरस्कार किया!

नीतिवचन 5:13 मैं ने अपने गुरुओं की बातें न मानी और अपने सिखाने वालों की ओर ध्यान न लगाया।

नीतिवचन 5:14 मैं सभा और मण्डली के बीच में प्रायः सब बुराइयों में जा पड़ा।

नीतिवचन 5:15 तू अपने ही कुण्ड से पानी, और अपने ही कुंए से सोते का जल पिया करना।

नीतिवचन 5:16 क्या तेरे सोतों का पानी सड़क में, और तेरे जल की धारा चौकों में बह जाने पाए?

नीतिवचन 5:17 यह केवल तेरे ही लिये रहे, और तेरे संग औरों के लिये न हो।

नीतिवचन 5:18 तेरा सोता धन्य रहे; और अपनी जवानी की पत्नी के साथ आनन्दित रह,

नीतिवचन 5:19 प्रिय हरिणी या सुन्दर सांभरनी के समान उसके स्तन सर्वदा तुझे संतुष्ट रखे, और उसी का प्रेम नित्य तुझे आकर्षित करता रहे।

नीतिवचन 5:20 हे मेरे पुत्र, तू अपरिचित स्त्री पर क्यों मोहित हो, और पराई को क्यों छाती से लगाए?

नीतिवचन 5:21 क्योंकि मनुष्य के मार्ग यहोवा की दृष्टि से छिपे नहीं हैं, और वह उसके सब मार्गों पर ध्यान करता है।

नीतिवचन 5:22 दुष्ट अपने ही अधर्म के कर्मों से फंसेगा, और अपने ही पाप के बन्धनों में बन्धा रहेगा।

नीतिवचन 5:23 वह शिक्षा प्राप्त किए बिना मर जाएगा, और अपनी ही मूर्खता के कारण भटकता रहेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30

सोमवार, 18 जनवरी 2021

प्रश्न तथा आराधना

 

          किसी यात्रा के समय, यह सामान्य है कि यात्रियों में से कोई न कोई यह पूछ ही लेता है, “क्या हम पहुँच गए हैं?” या फिर, “पहुँचने में अभी और कितनी देर है?” अपनी मंजिल पर पहुँचने के इच्छुक बच्चों या बड़ों के होंठों से ये सामान्य प्रश्न किसने नहीं सुने होंगे? किन्तु सभी आयु के लोग, ऐसे ही प्रश्न, जीवन की कभी समाप्त न होने वाली परेशानियों से थक कर भी पूछते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भी दाऊद के साथ भजन 13 में हम कुछ ऐसी ही परिस्थिति देखते हैं। उसने भजन के पहले दो पदों में चार बार विलाप के साथ पूछा, “कब तक” – क्योंकि वह भुलाया गया, त्यागा हुआ, और पराजित अनुभव कर रहा था। दूसरे पद में वह पूछता है,मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?” इस प्रकार के विलाप वाले प्रश्नों के भजन हमें परमेश्वर के सामने अपने प्रश्नों के साथ आराधना करने आने की अनुमति देते हैं। हमारे तनाव और दुःख के समयों में, भला परमेश्वर से बेहतर और कौन हो सकता है जिसके साथ हम अपने मन की बात बाँट सकें। हम परमेश्वर के सामने बीमारी के साथ अपने संघर्ष, किसे प्रिय जन के हम से दूर चले जाने, किसी के साथ संबंधों में खटास आ जाने, आदि सभी बातों को खुल कर कह सकते हैं।

          जब हमारे मनों में प्रश्न होते हैं, तो इससे आराधना रुक नहीं जानी चाहिए। स्वर्ग का सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने चिंतित करने वाले प्रश्नों को लेकर उसके सामने आएँ। संभव है, दाऊद के समान, हमारे प्रश्न ही परमेश्वर के प्रति भरोसे और स्तुति की विनतियों तथा आराधना की अभिव्यक्तियों में परिवर्तित हो जाएंगे। - आर्थर जैक्सन

 

अपने प्रश्नों को परमेश्वर के पास लाएं।


मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुन कर तुझे बढ़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता। - यिर्मयाह 33:3

बाइबल पाठ: भजन 13

भजन 13:1 हे परमेश्वर तू कब तक? क्या सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझ से छिपाए रहेगा?

भजन 13:2 मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियां करता रहूं, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूं, कब तक मेरा शत्रु मुझ पर प्रबल रहेगा?

भजन 13:3 हे मेरे परमेश्वर यहोवा मेरी ओर ध्यान दे और मुझे उत्तर दे, मेरी आंखों में ज्योति आने दे, नहीं तो मुझे मृत्यु की नींद आ जाएगी;

भजन 13:4 ऐसा न हो कि मेरा शत्रु कहे, कि मैं उस पर प्रबल हो गया; और ऐसा न हो कि जब मैं डगमगाने लगूं तो मेरे शत्रु मगन हों।

भजन 13:5 परन्तु मैं ने तो तेरी करुणा पर भरोसा रखा है; मेरा हृदय तेरे उद्धार से मगन होगा।

भजन 13:6 मैं परमेश्वर के नाम का भजन गाऊंगा, क्योंकि उसने मेरी भलाई की है।

 

एक साल में बाइबल: उत्पत्ति 43-45; मत्ती 12:24-50

रविवार, 17 जनवरी 2021

त्यागेगा

 

          एक रेडियो कार्यक्रम के प्रस्तुतकर्ता ने अपने श्रोताओं से पूछा, “वह एक चीज़ बताएँ जिसे आप कभी नहीं त्यागेंगे। प्रत्युत्तर में श्रोताओं ने रोचक उत्तर भेजे। कुछ ने अपने परिवारों के लिए कहा, एक आदमी ने अपनी दिवंगत पत्नी की यादों के लिए कहा। कुछ ने अपने सपनों और लालसाओं, जैसे कि संगीत में प्रसिद्धि और जीविका के लिए बताया, किसी ने माँ बनने के लिए कहा। हम सभी के पास कुछ ऐसा होता है जिसे हम बहुत मूल्यवान समझते हैं, और अपने साथ सदा रखना चाहते हैं – वह कोई व्यक्ति, या शौक, या कोई संपत्ति हो सकती है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में होशे की पुस्तक में परमेश्वर कहता है कि वह अपने चुने हुए लोगों, इस्राएल, को कभी नहीं त्यागेगा, वे उसके लिए अनमोल हैं। इस पुस्तक में इस्राएल को एक पत्नी और परमेश्वर को उसके पति के समान चित्रित किया गया है। एक प्रेमी पति के समान, परमेश्वर ने इस्राएल के लिए जो कुछ भी उसकी आवश्यकता थी: भूमि, भोजन, पानी, कपड़े, सुरक्षा – वह सब कुछ उपलब्ध करवा कर दिया। फिर भी एक व्यभिचारी स्त्री के समान, इस्राएल ने परमेश्वर को छोड़ कर अपनी खुशी और सुरक्षा अन्य से प्राप्त करने के प्रयास किए। जितना अधिक परमेश्वर उसके पीछे-पीछे उसे मनाने के लिए गया, इस्राएल उतना ही परमेश्वर से दूर चलता चला गया (होशे 11:2)। यद्यपि इस्राएल ने परमेश्वर को बहुत दुःख दिया था, फिर भी परमेश्वर ने उसे त्यागा नहीं (पद 8)। परमेश्वर इस्राएल के साथ अपने संबंध को पुनःस्थापित करना चाहता था (पद 11); और इसलिए उसे औरों से छुड़ा लेने के लिए वह उसे अनुशासित करेगा।

          आज भी परमेश्वर के सभी बच्चों को पिता परमेश्वर की ओर से यही आश्वासन है। हमारे प्रति उसका प्रेम कभी कम नहीं होगा, वह हमें कभी नहीं त्यागेगा, उसके प्रेम से हमें कुछ भी अलग नहीं कर सकता है (रोमियों 8:37-39)। यदि हम उससे दूर भटक गए हैं, तो भी उसकी यही लालसा है कि हम उसके पास लौट आएँ। यदि परमेश्वर हमें अनुशासित भी करता है तो यह उसके हमारे प्रति प्रेम और हमारे लिए लालसा का चिह्न है, न कि उसके द्वारा त्यागे जाने का। हम उसके लिए अनमोल हैं; वह हमें कभी नहीं त्यागेगा। - पोह फैंग चिया

 

परमेश्वर की संतान का, उसके घर में सदा ही स्वागत होता है।


क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ्य, न ऊंचाई, न गहराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। - रोमियों 8:38-39.

बाइबल पाठ: होशे 11:8-11

होशे 11:8 हे एप्रैम, मैं तुझे क्योंकर छोड़ दूं? हे इस्राएल, मैं क्योंकर तुझे शत्रु के वश में कर दूं? मैं क्योंकर तुझे अदमा के समान छोड़ दूं, और सबोयीम के समान कर दूं? मेरा हृदय तो उलट पुलट हो गया, मेरा मन स्नेह के मारे पिघल गया है।

होशे 11:9 मैं अपने क्रोध को भड़कने न दूंगा, और न मैं फिर एप्रैम को नाश करूंगा; क्योंकि मैं मनुष्य नहीं परमेश्वर हूं, मैं तेरे बीच में रहने वाला पवित्र हूं; मैं क्रोध कर के न आऊंगा।

होशे 11:10 वे यहोवा के पीछे पीछे चलेंगे; वह तो सिंह के समान गरजेगा; और तेरे लड़के पश्चिम दिशा से थरथराते हुए आएंगे।

होशे 11:11 वे मिस्र से चिड़ियों के समान और अश्शूर के देश से पण्डुकी की भांति थरथराते हुए आएंगे; और मैं उन को उन्हीं के घरों में बसा दूंगा, यहोवा की यही वाणी है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23

शनिवार, 16 जनवरी 2021

बाँटना

 

          मेरे सबसे छोटे बेटे ने रोते हुए चिल्लाकर कहा, “पर मैं बांटना नहीं चाहता हूँ”; उसके रोने में उसका टूटा हुआ हृदय पता चल रहा था – वह अपने खिलौनों में से एक को भी किसी और के साथ बाँटना नहीं चाहता था। मुझे उसका यह व्यवहार बचकाना और अनुचित लगा, परन्तु वास्तविकता यही है कि इस प्रकार का व्यवहार बच्चों तक ही सीमित नहीं है। मेरे अपने जीवन और सभी मनुष्यों के जीवनों में कितनी ही बार यह भावना देखी जाती है – ढीठ और ज़िद्दी होकर अपनी वस्तुओं को लेकर उदार नहीं होना, उन्हें औरों के साथ बिलकुल भी नहीं बाँटना।

          हम मसीही विश्वासियों को अपने जीवन औरों के साथ बाँटने की शिक्षा दी गई है। परमेश्वर के वचन बाइबल में रूत ने अपनी सास नाओमी के साथ यही किया था। नाओमी एक निर्धन विधवा थी, जिसके पास अपनी परदेशिन  विधवा बहू रूत को देने के लिए अब कुछ नहीं बचा था। फिर भी रूत ने अपने जीवन को अपनी सास के जीवन के साथ जोड़ लिया, और उससे प्रतिज्ञा की, कि वह जीवन भर उसके साथ रहेगी, किसी भी परिस्थिति में उसे नहीं छोड़ेगी। रूत ने नाओमी से कहा, “तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग तथा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा” (रूत 1:16)। रूत ने बिना किसी शर्त के अपने आप को उदारता से उस वृद्ध विधवा को दे दिया; उस से प्रेम और कृपा दिखाई।

          इस प्रकार से किसी के साथ अपने जीवनों को बाँटना कठिन हो सकता है, किन्तु हमें ऐसी उदारता के प्रतिफल भी ध्यान रखने चाहिएँ। रूत ने अपना जीवन नाओमी के साथ बाँटा, वह अपने देश और लोगों को छोड़कर नाओमी के साथ इस्राएल आ गई। जहाँ पर परमेश्वर ने उसका विवाह नाओमी के एक धनी रिश्तेदार के साथ करवा दिया; उस विवाह से जन्मा रूत का पुत्र इस्राएल के सर्वोत्तम राजा दाऊद का दादा, और हमारे तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु का पूर्वज हुआ। प्रभु यीशु ने अपना जीवन हमारे साथ बाँटा, और परमेश्वर ने उसे अति महान कर दिया, और प्रतिज्ञा दी कि इस लोक और परलोक के प्रत्येक व्यक्ति का घुटना प्रभु के सामने झुकेगा।

          जब हम उदारता से औरों के साथ बाँटते हैं, तब हम निश्चित रह सकते हैं कि हम और भी उत्तम जीवन को अनुभव करेंगे। - पीटर चिन

 

औरों की देखभाल के द्वारा परमेश्वर के प्रेम को उनके साथ बाँटें।


इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। - फिलिप्पियों 2:9-10

बाइबल पाठ: रूत 1:11-18

रूत 1:11 नाओमी ने कहा, हे मेरी बेटियों, लौट जाओ, तुम क्यों मेरे संग चलोगी? क्या मेरी कोख में और पुत्र हैं जो तुम्हारे पति हों?

रूत 1:12 हे मेरी बेटियों, लौटकर चली जाओ, क्योंकि मैं पति करने को बूढ़ी हूं। और चाहे मैं कहती भी, कि मुझे आशा है, और आज की रात मेरे पति होता भी, और मेरे पुत्र भी होते,

रूत 1:13 तौभी क्या तुम उनके सयाने होने तक आशा लगाए ठहरी रहतीं? और उनके निमित्त पति करने से रुकी रहतीं? हे मेरी बेटियों, ऐसा न हो, क्योंकि मेरा दु:ख तुम्हारे दु:ख से बहुत बढ़कर है; देखो, यहोवा का हाथ मेरे विरुद्ध उठा है।

रूत 1:14 तब वे फिर से उठीं; और ओर्पा ने तो अपनी सास को चूमा, परन्तु रूत उस से अलग न हुई।

रूत 1:15 तब उसने कहा, देख, तेरी जिठानी तो अपने लोगों और अपने देवता के पास लौट गई है; इसलिये तू अपनी जिठानी के पीछे लौट जा।

रूत 1:16 रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग तथा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा;

रूत 1:17 जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊं, तो यहोवा मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे।

रूत 1:18 जब उसने यह देखा कि वह मेरे संग चलने को स्थिर है, तब उसने उस से और बात न कही।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11

शुक्रवार, 15 जनवरी 2021

लालसा

 

          मेरे पिता का जीवन लालसा से भरा जीवन था। उनकी लालसा थी कि वे संपूर्ण हो जाएँ; पार्किन्सन की बीमारी उनके मस्तिष्क और शरीर को धीरे-धीरे और भी अपांग करती चली जा रही थी। उन्हें शान्ति की लालसा रहती थी; परन्तु उन्हें गहन निराशा की पीड़ाओं को झेलना पड़ता था। उनकी बहुत लालसा थी कि वे किसी के साथ का, तथा प्रेम और दुलार का अनुभव करें; परन्तु अकसर अपने आप को बिलकुल अकेला ही अनुभव करते थे।

          जब वे परमेश्वर के वचन बाइबल में से भजन 42 को पढ़ते थे, जो उनका मनपसंद भजन था, तब वे अपने आप को उतना अकेला अनुभव नहीं करते थे। मेरे पिता के समान ही, भजनकार को भी चंगाई की गहन लालसा और प्यास थी (पद 1, 2)। मेरे पिता के समान ही भजनकार भी ऐसी उदासी का अनुभव रखता था जो कभी गई ही नहीं (पद 3), जिसके कारण भरपूर आनन्द का जीवन एक बहुत दूर की याद लगता था (पद 6)। जैसे मेरे पिता को लगता था, कि गड़बड़ी और पीड़ा की लहरें उन्हें डुबा दे रही हैं (पद 7), वैसे ही भजनकार को भी लगा कि परमेश्वर ने उसे त्याग दिया है, और मेरे पिता के समान ही उसने भी प्रश्न किया “क्यों?” (पद 9)।

          और भजन 42 के शब्द उन्हें ढाढ़स और सांत्वना देते थे कि वे अकेले नहीं हैं, तब मेरे पिता को लगता था कि उनकी पीड़ा के साथ ही उनके अन्दर एक शान्ति भी है। उन्हें एक कोमल आवाज़ अनुभव होती थी, जो उन्हें घेरे हुए है, जो उन से कह रही है कि चाहे अभी उनके पास इन बातों के कोई उत्तर नहीं हैं, यद्यपि इन परेशानियों की लहरी अभी भी उन पर प्रहार करती हैं, किन्तु प्रभु परमेश्वर उन से बहुत प्रेम करता है, उनके साथ हमेशा बना रहता है (पद 8)।

          और रात के बेचैनी में, परमेश्वर के प्रेम गीत, भजन 42 के शब्द, उन्हें शान्ति देते थे; उन्हें उस आने वाली आशा, प्रेम, और आनन्द की धैर्य के साथ प्रतीक्षा करने, और उस प्रातः की बाट जोहने को उभारते थे जब अन्ततः उनकी सभी लालसाएँ पूरी हो जाएँगी (पद 5, 11)। - मोनिका ब्रैंड्स

 

प्रातः की प्रतीक्षा करते समय, हम परमेश्वर के प्रेम गीत में आश्वस्त और शांत रह सकते हैं।


फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: भजन 42:1-11

भजन संहिता 42:1 जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं।

भजन संहिता 42:2 जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जा कर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?

भजन संहिता 42:3 मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?

भजन संहिता 42:4 मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण कर के मेरा प्राण शोकित हो जाता है।

भजन संहिता 42:5 हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

भजन संहिता 42:6 हे मेरे परमेश्वर; मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं।

भजन संहिता 42:7 तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।

भजन संहिता 42:8 तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करुणा प्रगट करेगा; और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवन दाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।

भजन संहिता 42:9 मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहने हुए चलता फिरता हूं?

भजन संहिता 42:10 मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हड्डियां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?

भजन संहिता 42:11 हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42

गुरुवार, 14 जनवरी 2021

विश्वास

 

          विश्वास के बारे में सीखने के लिए पाठ, अनपेक्षित स्थानों से आ सकते हैं – जैसा कि मैंने अपन पालतू कुत्ते, बेयर, से एक पाठ सीखा। बेयर का पानी पीने का बड़ा सा कटोरा, हमारे रसोई के एक कोने में रखा रहता है। जब भी वह कटोरा खाली हो जाता है, तो बेयर न तो उस पर पंजे मार कर शोर करता है, और न ही वहाँ पर जाकर भौंकता है। वह बस शांत होकर उस कटोरे के पास बैठ जाता है। उसे भरोसा है कि मैं वहाँ आऊँगा, उस खाली कटोरे को देखूँगा और उसमें पानी भर दूँगा। कभी-कभी उसे इसके लिए कई मिनिट तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है, परन्तु बेयर ने सीख लिया है कि देर-सवेर मैं अन्दर आऊँगा, उसे वहाँ बैठा हुआ देखूँगा, और उसकी आवश्यकता की पूर्ति कर दूँगा। मुझ में उसके इस साधारण से भरोसे ने मुझे परमेश्वर में और अधिक भरोसा रखना सिखाया है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि “और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है” (इब्रानियों 11:6)। जितने भी परमेश्वर के पास मसीह यीशु में लाए गए व्यक्तिगत विश्वास के द्वारा आते हैं, परमेश्वर उनके लिए अपनी सभी प्रतिज्ञाओं को पूरा करने में विश्वासयोग्य है।

          कभी-कभी, ‘अनदेखी वस्तुओं में विश्वास रखना कठिन होता है। परन्तु हम परमेश्वर की भलाई तथा उसके प्रेमी स्वभाव पर, उसकी बुद्धिमत्ता की हर बात के लिए सिद्ध और सर्वोत्तम  होने पर, भरोसा रख सकते हैं – चाहे हमें कुछ समय तक उसकी कार्यवाही होने की प्रतीक्षा ही क्यों न करनी पड़े। वह सदा ही अपनी कही बात को पूरा करने में विश्वासयोग्य रहता है कि वह हमारी अनन्त आत्माओं को बचाएगा और हमारी सभी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, अभी और हमेशा। इसलिए हम विश्वास के साथ उसके पास आएँ और पूरे भरोसे के साथ उसके साथ चलें। - जेम्स बैंक्स

 

कल की चिंता न करें – परमेश्वर वहाँ अभी से विद्यमान है।


और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। - फिलिप्पियों 4:19

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:1-6

इब्रानियों 11:1 अब विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है।

इब्रानियों 11:2 क्योंकि इसी के विषय में प्राचीनों की अच्छी गवाही दी गई।

इब्रानियों 11:3 विश्वास ही से हम जान जाते हैं, कि सारी सृष्टि की रचना परमेश्वर के वचन के द्वारा हुई है। यह नहीं, कि जो कुछ देखने में आता है, वह देखी हुई वस्तुओं से बना हो।

इब्रानियों 11:4 विश्वास ही से हाबिल ने कैन से उत्तम बलिदान परमेश्वर के लिये चढ़ाया; और उसी के द्वारा उसके धर्मी होने की गवाही भी दी गई: क्योंकि परमेश्वर ने उस की भेंटों के विषय में गवाही दी; और उसी के द्वारा वह मरने पर भी अब तक बातें करता है।

इब्रानियों 11:5 विश्वास ही से हनोक उठा लिया गया, कि मृत्यु को न देखे, और उसका पता नहीं मिला; क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया था, और उसके उठाए जाने से पहिले उस की यह गवाही दी गई थी, कि उसने परमेश्वर को प्रसन्न किया है।

इब्रानियों 11:6 और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20

बुधवार, 13 जनवरी 2021

संबंध

 

          जब मेरे भाई ने मुझे क्रेफिश (एक प्रकार की झींगा मछली) पकड़ने के लिए उसके साथ चलने का निमंत्रण दिया, तो मैं बहुत उत्तेजित हुई। जब उसने मुझे एक प्लास्टिक की बाल्टी पकड़ाई, तो मैंने विस्मय से उससे पूछा, “इसपर कोई ढक्कन नहीं है?” उसने कहा, “उसकी ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी” और हम मछली पकड़ने के लिए आवश्यक अन्य सामान उठा कर चल दिए। बाद में, जब हम कई क्रेफिश पकड़ चुके, तो मैं लगभग भरी हुई बाल्टी में से उनके बाहर निकलने के व्यर्थ प्रयासों को देख रही थी, और मुझे समझ में आ गया कि क्यों बाल्टी के ढक्कन की आवश्यकता नहीं थी। जैसे ही कोई क्रेफिश थोड़ा सा ऊपर, बाल्टी के किनारे की ओर बढ़ती, कोई दूसरी उसे पकड़ कर वापस अन्दर खींच लेती।

          उन क्रेफिश के परस्पर व्यवहार से मुझे शिक्षा मिली कि अपनी ही उन्नति के प्रयास में औरों को नीचे खींचना कितना हानिकारक होता है। यदि हम अपने समाज और समुदाय के हित के लिए नहीं, वरन उनकी कीमत पर अपने ही स्वार्थ के लिए कार्य करते हैं, तो न हम और न ही वो बढ़ने पाते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस ने एक दूसरे को उभारने वाली संगति और संबंधों के महत्व के बारे में थिस्सलुनीके के मसीही विश्वासियों को लिखा। उसने उन से आग्रह किया, और हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उन को समझाओ, कायरों को ढाढ़स दो, निर्बलों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ” (1 थिस्स्लुनीकियों 5:14)।

          उसने उनके परस्पर देखभाल करने वाले समुदाय की सराहना करते हुए (पद 11) उन्हें और भी अधिक प्रेम और शान्ति से परिपूर्ण संबंधों को बनाने और बढ़ाने के लिए कहा (पद 13-15)। औरों के साथ कृपा, क्षमा, करुणा के संबंधों को बनाए रखने के प्रयासों से, उनके आपस के तथा परमेश्वर के साथ सही संबंधों में बढ़ोतरी होगी, दृढ़ता आएगी (पद 15, 23)।

          इस प्रकार की प्रेम पूर्ण एकता के द्वारा चर्च उन्नति करता है और मसीह का गवाह ठहरता है। जब मसीही विश्वासी परमेश्वर का आदर करते हैं, औरों को नीचे खींचने के स्थान पर, अपने शब्दों तथा कार्यों के द्वारा उनकी उन्नति होने में सहयोग देते हैं, तब हम और हमारे समुदाय, हमारे समाज का विकास होता है। - सोहचील डिक्सन

 

मसीह के समान औरों की सहायता और उन्नति में सहयोगी बनें।


विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे। - फिलिप्पियों 2:3-4

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 5:11-18

 1 थिस्स्लुनीकियों 5:11 इस कारण एक दूसरे को शान्ति दो, और एक दूसरे की उन्नति के कारण बनो, निदान, तुम ऐसा करते भी हो।

1 थिस्स्लुनीकियों 5:12 और हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उन्हें मानो।

1 थिस्स्लुनीकियों 5:13 और उन के काम के कारण प्रेम के साथ उन को बहुत ही आदर के योग्य समझो: आपस में मेल-मिलाप से रहो।

1 थिस्स्लुनीकियों 5:14 और हे भाइयों, हम तुम्हें समझाते हैं, कि जो ठीक चाल नहीं चलते, उन को समझाओ, कायरों को ढाढ़स दो, निर्बलों को संभालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओ।

1 थिस्स्लुनीकियों 5:15 सावधान! कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्पर रहो आपस में और सब से भी भलाई ही की चेष्टा करो।

1 थिस्स्लुनीकियों 5:16 सदा आनन्दित रहो।

1 थिस्स्लुनीकियों 5:17 निरन्तर प्रार्थना में लगे रहो।

1 थिस्स्लुनीकियों 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38