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Saturday, May 31, 2014

गलत सोच


   एक प्रचलित हास्य लघु कथा है: एक छोटे हवाई जहाज़ में चार लोग यात्रा कर रहे थे - जहाज़ का पायलेट, एक विद्वान, एक पादरी और एक सामान्य व्यक्ति। हवाई जहाज़ में कुछ खराबी आ गई और उसके इंजन चलने बन्द हो गए। पायलेट ने कहा, "अब कुछ नहीं हो सकता, अपनी जान बचाने के लिए पैराशूट के सहारे कूद जाईए, लेकिन पैराशूट केवल तीन हैं, एक को तो मरना ही होगा" और यह कहकर वह एक पैराशूट के साथ कूद गया; तुरंत ही विद्वान बोला, "संसार को मेरे ज्ञान और काबलियत की बहुत आवश्यकता है, इसलिए मेरा ज़िंदा रहना तो बहुत ही आवश्यक है", और वह भी दूसरा पैराशूट लेकर कूद गया; पादरी ने संगी यात्री से कहा, "मैं स्वार्थी नहीं हूँ, तुम वह अन्तिम पैराशूट लेकर अपनी जान बचा लो", यात्री ने मुस्कुराते हुए कहा, "नहीं, हम दोनों ही बच सकते हैं क्योंकि पैराशूट तो दो हैं; वह विद्वान पैराशूट की बजाए मेरा थैला लेकर कूद गया था!"

   उस विद्वान ने सोचा कि वह बुद्धिमता कर रहा है और सुरक्षित बच जाएगा, लेकिन उसका सोचना गलत था; जब तक सच उसके सामने आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी, कुछ बदल नहीं सकता था; जिसे उसने जीवन का मार्ग समझा था वह वास्तव में उसके विनाश का मार्ग निकला। इसी प्रकार बहुत से लोगों को यह लगता है कि वे अपने ज्ञान, युक्ति, विधियों, धर्म के तथा भले कार्यों आदि के करने से उद्धार पा सकते हैं, इसलिए वे परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में सारे जगत को सेंत-मेंत उपलब्ध कराए गए पाप क्षमा और उद्धार का तिरिस्कार कर, अपने ही तरीकों से उद्धार पाने के असफल यत्न करते रहते हैं। अनेक इसाई धर्म के मानने वाले भी यह मानते हैं कि चर्च जाने, बप्तिस्मा लेने, रीति-रिवाज़ों और अनुष्ठानों को पूरा करते रहने, भले कार्य करने, आदि के कारण वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश पा लेंगे, लेकिन यह सब गलत सोच है जो परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार नहीं है और किसी को भी परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं दिला सकती।

   बाइबल बताती है कि सब मनुष्यों ने पाप किया है और इस कारण सब परमेश्वर से दूर और परमेश्वर से बैर की दशा में हैं। लेकिन साथ ही बाइबल यह भी बताती है कि प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति के समस्त पापों के लिए अपने आप को बलिदान किया और अब जो कोई प्रभु यीशु के इस बलिदान पर विश्वास करके उससे अपने पापों की क्षमा माँग लेता है, अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, उसके पाप क्षमा हो जाते हैं तथा उसका मेल-मिलाप परमेश्वर से हो जाता है और वह परमेश्वर की सन्तान हो जाता है (रोमियों 3:23; 5:8-10; यूहन्ना1:12-13)। जो प्रभु यीशु ने हमारे लिए किया, उस अपना लेने के द्वारा ही हम पापों के दोष से मुक्त, परमेश्वर की नज़रों में धर्मी तथा उसके स्वर्ग के राज्य में प्रवेश के योग्य ठहरते हैं; प्रभु यीशु ही स्वर्ग में हमारे अनन्त जीवन का आश्वासन है।

   आज आपकी सोच क्या है? क्या आपने प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार पर विश्वास किया है? यदि नहीं, तो गलत सोच में पड़े ना रहें; अपने अनन्त को सही करने के लिए आज और अभी ही प्रभु यीशु पर विश्वास लाएं, उसे अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार करें, उस से पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित करें। - ऐनी सेटास


यदि मनुष्य अपने प्रयत्नों और साधनों से मोक्ष या उद्धार पा सकता तो प्रभु यीशु को यह प्रदान करने के लिए अपना बलिदान कभी देना नहीं पड़ता।

ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है। - नीतिवचन 16:25

बाइबल पाठ: रोमियों 5:6-12, 17-19
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। 
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? 
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? 
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं। 
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया।
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। 

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 19-21


प्रभावशाली महिला


   सोलहवीं शताबदी में योरप में हुए प्रोटेस्टेन्ट धर्म सुधार के आरंभिक दिनों में रोमन कैथोलिक मत से निकल कर आने वाली एक सन्यासिन कैथरीन वॉन बोरा का विवाह धर्म सुधार के अग्रणीय, विटिनबर्ग में रहने वाले मार्टिन लूथर से हुआ। उनका यह विवाह हर रीति से एक आनन्दमय पारिवारिक जीवन और पारस्परिक संबंध का जीवन था। लूथर ने अपने अनुभव के आधार पर लिखा, "संसार के संबंधों में भले विवाह संबंध से बढ़कर मधुर और कोई संबंध नहीं है, और जीवन साथी से बिछुड़ने से अधिक कटु कोई अनुभव नहीं है"।

   क्योंकि कैथरीना प्रति प्रातः 4 बजे उठकर अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह आरंभ कर देती थी, इसलिए लूथर उसे "विटिनबर्ग का भोर का तारा" कहते थे। कैथरीना अपने घर के फल और सबज़ी के बागीचे की मेहनत के साथ देख-रेख करती थी। वह पारिवारिक व्यवसाय, लूथर परिवार के घर और ज़ायदाद की भी उतनी ही मेहनत और लगन से देख-भाल करती थी। समय के साथ लूथर और कैथरीना के छः बच्चे भी हुए, जिनके लिए कैथरीना का मानना था कि उनके चरित्र निर्माण की पाठशाला उनका अपना घर ही है और वह इस ज़िम्मेदारी को भी उतनी ही लगन के साथ निभाती थी। कैथरीना की इस भली विचारधारा, मेहनत और लगन ने उसे वास्तव में एक बहुत प्रभावशाली महिला बना दिया था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की नीतिवचन पुस्तक के 31वें अध्याय में एक उत्तम गृहणी के चरित्र का वर्णन दिया है; कैथरीना उसी वर्णन के अनुसार अपने आप को चलाने वाली महिला थी। जो जो गुण बाइबल में दी गई उस महिला के जीवन में पाए जाते हैं, कैथरीना उन्हीं के अनुसार प्रातः होने से पहले ही उठ कर अपने घराने के लिए भोजन और परिवार की देखभाल के लिए मेहनत किया करती थी।

   कैथरीना जैसी प्रभावशाली महिलाओं के जीवनों से हम परमेश्वर के भय में जीना, हर संबंध को सच्चे प्रेम से निभाना और हर ज़िम्मेदारी को पूरी कर्मठता के साथ पूरा करना सीख सकते हैं। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के भय में चलने वाली भली माताएं ना केवल शब्दों द्वारा जीवन जीना सिखाती हैं, वरन अपने जीवनों के उदाहरण से उसे जी कर भी दिखाती हैं।

हर बुद्धिमान स्त्री अपने घर को बनाती है, पर मूढ़ स्त्री उसको अपने ही हाथों से ढा देती है। - नीतिवचन 14:1

बाइबल पाठ: नीतिवचन 31:10-31
Proverbs 31:10 भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उस के पति के मन में उस के प्रति विश्वास है।
Proverbs 31:11 और उसे लाभ की घटी नहीं होती।
Proverbs 31:12 वह अपने जीवन के सारे दिनों में उस से बुरा नहीं, वरन भला ही व्यवहार करती है।
Proverbs 31:13 वह ऊन और सन ढूंढ़ ढूंढ़ कर, अपने हाथों से प्रसन्नता के साथ काम करती है।
Proverbs 31:14 वह व्यापार के जहाजों की नाईं अपनी भोजन वस्तुएं दूर से मंगवाती हैं।
Proverbs 31:15 वह रात ही को उठ बैठती है, और अपने घराने को भोजन खिलाती है और अपनी लौण्डियों को अलग अलग काम देती है।
Proverbs 31:16 वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है।
Proverbs 31:17 वह अपनी कटि को बल के फेंटे से कसती है, और अपनी बाहों को दृढ़ बनाती है।
Proverbs 31:18 वह परख लेती है कि मेरा व्यापार लाभदायक है। रात को उसका दिया नहीं बुझता।
Proverbs 31:19 वह अटेरन में हाथ लगाती है, और चरखा पकड़ती है।
Proverbs 31:20 वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है, और दरिद्र के संभालने को हाथ बढ़ाती है।
Proverbs 31:21 वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं।
Proverbs 31:22 वह तकिये बना लेती है; उसके वस्त्र सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं।
Proverbs 31:23 जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है।
Proverbs 31:24 वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है; और व्योपारी को कमरबन्द देती है।
Proverbs 31:25 वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आने वाले काल के विषय पर हंसती है।
Proverbs 31:26 वह बुद्धि की बात बोलती है, और उस के वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं।
Proverbs 31:27 वह अपने घराने के चाल चलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती।
Proverbs 31:28 उसके पुत्र उठ उठ कर उसको धन्य कहते हैं, उनका पति भी उठ कर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है:
Proverbs 31:29 बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्ट है।
Proverbs 31:30 शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।
Proverbs 31:31 उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।

एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर 1-3


Friday, May 30, 2014

जयवन्त


   जीन ड्रिस्कॉल एक अनूठी खिलाड़ी है। वह बॉस्टन मैराथन आठ बार जीत चुकी है, चार बार पैराओलंपिक खेलों में भाग ले चुकी है और उनमें पाँच स्वर्ण पदक जीत चुकी है। जीन जन्म से ही रीढ़ की हड्डी और उसमें से होकर जाने वाली तथा शरीर को दिमाग़ से जोड़ने वाली मुख्य नस के ठीक से ना बने होने और इस कारण शरीर के निचले भाग के ठीक से कार्य ना कर पाने वाली स्थिति अर्थात स्पाईना-बाईफ़िडा से ग्रस्त है, और केवल पहिए वाली कुर्सी द्वारा ही चल सकती है और उसी में बैठ कर वह स्पर्धाओं में भाग लेती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में से जीन ड्रिस्कॉल के मनपसन्द पदों में से एक है दानिय्येल 7:9, जिसके अन्तिम भाग में परमेश्वर और उसके सिंहासन के विषय में लिखा है: "...उसका सिंहासन अग्निमय और उसके पहिये धधकती हुई आग के से देख पड़ते थे।" दानिय्येल को मिले परमेश्वर तथा उसके सिंहासन के दर्शन और अपनी स्थिति में एक सामंजस्य देखते हुए औरों को वह प्रोत्साहन के शब्द कहने पाती है; जीन कहती है: "जब कभी मुझे उन लोगों से बात-चीत करने का अवसर मिलता है जो पहिए वाली कुर्सी पर रहने को मजबूर हैं और इससे हताश हैं तो मैं उन्हें कहती हूँ, ’ना केवल आप परमेश्वर के स्वरूप में बने हैं, वरन आपकी पहिए वाली कुर्सी भी परमेश्वर के सिंहासन के स्वरूप में है!’"

   यह नहीं कि दानिय्येल का दर्शन परमेश्वर को चलने-फिरने में अपंग दिखाता है; वस्तुतः परमेश्वर के सिंहासन का पहिए वाला होने को अनेक बाइबल टीकाकारों ने इस बात का सूचक बताया है कि परमेश्वर सर्वप्रभुतासंपन्न न्यायी है तथा साथ ही गतिशील भी जो मनुष्यों के कार्यों पर प्रभुता भी करता है और उनके साथ साथ अग्रसर भी रहता है और जो उस पर विश्वास रखते हैं उनकी सहायता में लगा रहता है (नीतिवचन 3:25-26; मत्ती 20:29-34; इफिसीयों 1:11)।

   अपनी दशा के बावजूद परमेश्वर में जीन ड्रिस्कॉल के अटूट विश्वास ने ना केवल उसे व्यक्तिगत चुनौतियों पर जयवन्त किया है, वरन परमेश्वर की आशीषों को औरों तक पहुँचाने के योग्य भी किया है। हम भी जीन के समान यह भरोसा रख सकते हैं कि ऊँचे पर विराजमान वह परमपवित्र और सामर्थी परमेश्वर हम से केवल एक प्रार्थना भर की दूरी पर है, और जब भी हम उस पर विश्वास रख कर उसे पुकारेंगे वह हमारी सुनेंगा और उत्तर देगा (भजन 46)। - डेनिस फिशर


जब परमेश्वर आपके पीछे आपका सहारा हो और उसके हाथ आपको दाहिने-बाएं संभाले हुए हों तो सामने से आने वाली हर परिस्थिति का आप निडर होकर सामना कर सकते हैं - वार्ड

फिर मैं ने सिंहासन देखे, और उन पर लोग बैठ गए, और उन को न्याय करने का अधिकार दिया गया; और उन की आत्माओं को भी देखा, जिन के सिर यीशु की गवाही देने और परमेश्वर के वचन के कारण काटे गए थे; और जिन्हों ने न उस पशु की, और न उस की मूरत की पूजा की थी, और न उस की छाप अपने माथे और हाथों पर ली थी; वे जीवित हो कर मसीह के साथ हजार वर्ष तक राज्य करते रहे। - प्रकाशितवाक्य 20:4

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।। 
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-18


Thursday, May 29, 2014

एक ही मूल


   बचपन की यादों में मुझे अपने घर का प्रेम और आनन्द से भरा वातावरण स्मरण है। लेकिन मेरे माता-पिता को अकसर काम के लिए बाहर जाना पड़ता था; जब वे बाहर होते थे, तो हमारे घर के उस आनन्द और प्रेम का केंद्र होता था हमारे घर का रसोईघर, जहाँ हमारे घर की तथा हम बच्चों की देखभाल करने वाली छोटे से कद की नौकरानी ऐनी होती थी। मैंने अपने बचपन के कई घंटे ऐनी के साथ रसोई की मेज़ पर किताबें पढ़ते या कुछ खिलौनों से खेलते हुए बिताए थे। हमारी देखभाल करते हुए हमेशा ही वो भक्ति के गीत गुनगुनाती रहती थी; उसके हृदय से बुद्धिमता, प्रसन्न्ता और गीतों की अविरल धारा निकलती रहती थी।

   एक प्रातः बचपने के बचकाना व्यवहार में मैंने बाहर सुना हुआ रंगभेद पर आधारित एक कटाक्ष बोल दिया; तुरंत ऐनी के मूँह से निकला, "अरे रे, यह नहीं!" और फिर उसने हृदय से निकले हुए एक कोमल भाषण द्वारा मुझे समझाया कि कैसे मेरे द्वारा प्रयुक्त वे कटु शब्द हानिकारक हो सकते हैं, दूसरों को दुखित कर सकते हैं। मुझे यह सब समझाते समय उसकी आँखों में गहरी उदासी थी - मैंने वे शब्द अपने जीवन में फिर कभी प्रयोग नहीं करे।

   मैंने सीखा कि हम कट्टरपंथी धर्मांधता के द्वारा कैसे दूसरों को नीचा दिखाकर उनका निरादर करते हैं। मैंने समझा कि प्रत्येक मनुष्य परमेश्वर के स्वरूप में बनाया गया है - संसार के अन्य किसी भी प्राणी से बढ़कर मनुष्य ही परमेश्वर के स्वरूप में है, और इसलिए प्रत्येक मनुष्य आदर के योग्य है। परमेश्वर के स्वरूप की रचना को नीचा दिखाना ना केवल उस मनुष्य को गहरी चोट पहुँचाता है वरन परमेश्वर को भी दुखी करता है।

   परमेश्वर के लिए संसार भर में केवल एक जाति है - मनुष्य जाति। परमेश्वर ने "एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं..." (प्रेरितों 17:26)। हम सब मनुष्य एक ही समान एक ही परमेश्वर द्वारा सृजे गए हैं; परमेश्वर हम सब से एक समान ही प्रेम करता है; इसीलिए सभी मनुष्यों के उद्धार के लिए ही परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु को बलिदान होने के लिए संसार में भेजा है। इसलिए हम सभी मनुष्यों का कर्तव्य है कि हम एक दूसरे की देखभाल करें, एक दूसरे का ध्यान रखें और एक दूसरे को आदर दें। - डेविड रोपर


परमेश्वर चाहता है कि हम सभी मनुष्यों को आदर दें; क्योंकि सभी मनुष्य उसी के स्वरूप में बनाए गए हैं।

क्या हम सभों का एक ही पिता नहीं? क्या एक ही परमेश्वर ने हम को उत्पन्न नहीं किया? हम क्यों एक दूसरे का विश्वासघात कर के अपने पूर्वजों की वाचा को तोड़ देते हैं? - मलाकी 2:10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:22-31
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 13-15


Wednesday, May 28, 2014

समूह


   प्रसिद्ध मसीही प्रचारक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स जब मिस्त्र में YMCA में पादरी थे (1915-17), तब प्रथम विश्वयुद्ध में काम आने वाले अनेक सैनिकों के जीवन को उन्होंने प्रभावित किया। चैम्बर्स ने अपनी डायरी में 6 नवंबर 1916 को लिखा: "आज न्य़ू ज़ीलैण्ड से एक मित्र का पत्र आया, जिससे ज्ञात हुआ कि टैड स्टरैक का देहान्त हो गया है। तो अब टैड स्टरैक भी प्रभु यीशु के पास चला गया है - वह स्वयं भी इसका वर्णन इन्हीं शब्दों में करता...वह सुन्दर था, उसमें अनुग्रह था, वह भयभीत नहीं होता था और वह प्यार करने के योग्य एक छोटा सन्त था। उसके प्रत्येक स्मरण के लिए परमेश्वर का धन्यवाद हो...वे सब ऐसे ही एक एक करके समूह में एकत्रित होते जा रहे हैं।"

   जब हम अपने किसी प्रीय जन की मृत्यु पर शोकित होते हैं, तब साथ ही हम प्रभु यीशु द्वारा हम मसीही विश्वासियों से की गई कब्र से आगे के जीवन की प्रतिज्ञा को भी स्मरण रखें। परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, "प्रकाशितवाक्य" में उसके लेखक यूहन्ना का स्वर्गीय दर्शन लिखित है, जहाँ एक विशाल समूह जो संसार के प्रत्येक राष्ट्र, जाति, भाषा से आए हैं और परमेश्वर के सिंहासन के चारों ओर एकत्रित हैं (प्रकाशितवाक्य 7:9)। इस खण्ड का विषय है वह आनन्दमय पुनर्मिलन: "क्योंकि मेम्ना जो सिंहासन के बीच में है, उन की रखवाली करेगा; और उन्हें जीवन रूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा, और परमेश्वर उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा" (प्रकाशितवाक्य 7:17)।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी का संसार से कूच करना उस आने वाले दिन का पूर्वाभास करवाता है जब हम भी उन सभी के तथा अपने प्रभु के साथ एक ही समूह में एकत्रित होंगे। आज का हमारा शोक हमें कल की आशा दिलाता है कि हम एक एक करके उस विशाल समूह में एकत्रित होते जा रहे हैं जहाँ फिर कभी कोई शोक नहीं होगा, वरन अनन्त काल के आनन्द और आशीष जीवन होगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


अलविदा संसार का नियम है; और पुनर्मिलन स्वर्ग का।

धर्मी जन नाश होता है, और कोई इस बात की चिन्ता नहीं करता; भक्त मनुष्य उठा लिये जाते हैं, परन्तु कोई नहीं सोचता। धर्मी जन इसलिये उठा लिया गया कि आने वाली आपत्ति से बच जाए, वह शान्ति को पहुंचता है; जो सीधी चाल चलता है वह अपनी खाट पर विश्राम करता है। - यशायाह 57:1-2

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 7:9-17
Revelation 7:9 इस के बाद मैं ने दृष्टि की, और देखो, हर एक जाति, और कुल, और लोग और भाषा में से एक ऐसी बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था श्वेत वस्‍त्र पहिने, और अपने हाथों में खजूर की डालियां लिये हुए सिंहासन के साम्हने और मेम्ने के साम्हने खड़ी है। 
Revelation 7:10 और बड़े शब्द से पुकार कर कहती है, कि उद्धार के लिये हमारे परमेश्वर का जो सिंहासन पर बैठा है, और मेम्ने का जय-जय-कार हो। 
Revelation 7:11 और सारे स्वर्गदूत, उस सिंहासन और प्राचीनों और चारों प्राणियों के चारों ओर खड़े हैं, फिर वे सिंहासन के साम्हने मुंह के बल गिर पड़े; और परमेश्वर को दण्‍डवत कर के कहा, आमीन। 
Revelation 7:12 हमारे परमेश्वर की स्‍तुति, ओर महिमा, और ज्ञान, और धन्यवाद, और आदर, और सामर्थ, और शक्ति युगानुयुग बनी रहें। आमीन। 
Revelation 7:13 इस पर प्राचीनों में से एक ने मुझ से कहा; ये श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए कौन हैं? और कहां से आए हैं? 
Revelation 7:14 मैं ने उस से कहा; हे स्‍वामी, तू ही जानता है: उसने मुझ से कहा; ये वे हैं, जो उस बड़े क्‍लेश में से निकल कर आए हैं; इन्‍होंने अपने अपने वस्‍त्र मेम्ने के लोहू में धो कर श्वेत किए हैं। 
Revelation 7:15 इसी कारण वे परमेश्वर के सिंहासन के साम्हने हैं, और उसके मन्दिर में दिन रात उस की सेवा करते हैं; और जो सिंहासन पर बैठा है, वह उन के ऊपर अपना तम्बू तानेगा। 
Revelation 7:16 वे फिर भूखे और प्यासे न होंगे: ओर न उन पर धूप, न कोई तपन पड़ेगी। 
Revelation 7:17 क्योंकि मेम्ना जो सिंहासन के बीच में है, उन की रखवाली करेगा; और उन्हें जीवन रूपी जल के सोतों के पास ले जाया करेगा, और परमेश्वर उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 9-12


Tuesday, May 27, 2014

भय का बोध


   टेनिसन की उत्कृष्ट कविता, "The Charge of the Light Brigade" में साहसी घुड़सवारों की टुकड़ी के युद्ध में जाने का वर्णन है; वहाँ उन घुड़सवारों के बारे में एक प्रभावी वाक्य लिखा गया है - "वे छः सौ योद्धा मौत की तराई में बढ़ गए"। ये शब्द एक भयानक परिणाम के सूचक हैं, उनके सामने एक विनाशक त्रासदी रखी हुई थी और वे उसमें बढ़ गए।

   जब मैं एक पास्टर था तो चर्च की सभा लेने जाने के समय कभी कभी मुझे भी किसी कठिन परिस्थिति के कारण उत्पन्न हुई संभावनाओं का सामना करने के लिए लगता था मानों मैं भी किसी मौत की वादी में बढ़ जाने को तैयार हो रहा हूँ। जब लोगों के बीच किसी वर्तमान या संभावित टकराव का बोध हो, तो चिंता होना स्वाभाविक होता है; विशेषतः तब जब ऐसी किसी परिस्थिति को कम से कम चर्च के लोगों में तो नहीं होना चाहिए।

   अपने जवान शिष्य एवं चर्च के अगुवे तिमुथियुस को प्रेरित पुलुस ने लिखा, "पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं" (2 तिमुथियुस 2:23)। यह सलाह ना केवल पास्टरों के लिए है, वरन चर्च के प्रत्येक सद्स्य के लिए भी है। जिन लोगों के बीच में रहते हैं, कार्य करते हैं, संगति करते हैं, उनके मध्य हमारा व्यक्तिगत आचरण वहाँ के किसी भी तनाव को घटाने में सहायता कर सकता है, या फिर हमारा कटु और मूर्खतापूर्ण व्यवहार उस तनाव को बढ़ाकर परिस्थिति को और विनाशक कर सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल के इस खण्ड के 24-25 पद हमें सिखाते हैं कि हम नम्र, संयमी और सहनशीलता के व्यवहार के द्वारा तनाव के दुषप्रभावों से बच सकते हैं, उन्हें संभाल सकते हैं तथा तनाव का समाधान भी कर सकते हैं - यही बाइबल के अनुसार तनाव के निवारण का वह मार्ग है, जिस पर बढ़ जाने के लिए हमें किसी भय का बोध नहीं होना चाहिए।

   जैसा याकूब ने लिखा है: "और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है" (याकूब 3:18)। यदि आप मेल-मिलाप कराने वाले बनकर परिस्थितियों का सामना करने वाले निकलेंगे तो फिर किसी भय के बोध के साथ उनका सामना करने की आवश्यकता नहीं रहेगी। - बिल क्राउडर


परस्पर झगड़े में पड़े मसीही विश्वासी अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता के साथ शांति में होने का दावा कैसे कर सकते हैं?

पर मूर्खता के विवादों, और वंशावलियों, और बैर विरोध, और उन झगड़ों से, जो व्यवस्था के विषय में हों बचा रह; क्योंकि वे निष्‍फल और व्यर्थ हैं। - तीतुस 3:9

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:19-26
2 Timothy 2:19 तौभी परमेश्वर की पड़ी नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे। 
2 Timothy 2:20 बड़े घर में न केवल सोने-चान्दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये। 
2 Timothy 2:21 यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा; और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। 
2 Timothy 2:22 जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। 
2 Timothy 2:23 पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं। 
2 Timothy 2:24 और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो। 
2 Timothy 2:25 और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्या जाने परमेश्वर उन्हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें। 
2 Timothy 2:26 और इस के द्वारा उस की इच्छा पूरी करने के लिये सचेत हो कर शैतान के फंदे से छूट जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 5-8


Monday, May 26, 2014

निर्देश


   इस्त्राएली घिर कर फंस गए थे। मिस्त्र की गुलामी से निकल कर आज़ादी से रहने के लिए कनान देश की ओर उनके चल निकलने के कुछ समय पश्चात ही उन्हें अपने पीछे एक व्याकुल कर देने वाला दृश्य दिखाई दिया। धूल का एक बादल उनके पीछे से, उनकी ओर बढ़ा आ रहा था - वह धूल का बादल मिस्त्र की विशाल सेना के कारण था जो इस्त्राएलियों का पीछा कर रही थी। मिस्त्र के राजा फिरौन ने अपना हृदय एक बार फिर कठोर कर लिया था, अब उसे इस्त्राएलियों को गुलामी से जाने देने के अपने निर्णय पर पछतावा हुआ और उसने अपनी सेना उन्हें फिर से बन्धुआ बना कर मिस्त्र वापस ले आने के लिए भेजी।

   मिस्त्री सेना के इस्त्राएली सेना के निकट आने की परिस्थिति से ऐसा लगा कि मानो अब सब कुछ नाश हो जाएगा। उस समय इस्त्राएली ऐसे स्थान पर थे जहाँ उनके आगे लाल समुद्र, दोनों ओर पहाड़ियाँ और पीछे मिस्त्री सेना थी - बच कर निकलने का कोई मार्ग सूझ नहीं पड़ रहा था, विनाश अवश्यंभावी लग रहा था। इस विकट परिस्थिति से बचने के लिए उन्होंने घबरा कर मूसा ओर परमेश्वर दोनों ही को पुकारा। मूसा और परमेश्वर दोनों ही ने उनकी पुकार के प्रत्युत्तर में उन्हें कुछ करने के निर्देश दिए। मूसा ने कहा, "...डरो मत, खड़े खड़े वह उद्धार का काम देखो..." (निर्गमन 14:13); और परमेश्वर ने कहा, "...इस्राएलियों को आज्ञा दे कि यहां से कूच करें" (निर्गमन 14:15)! अब तो उनकी समस्या और बढ़ गई - एक कह रहा था खड़े रहो, तो दूसरा कह रहा था यहाँ से कूच करो! यह विरोधाभास क्यों? इन में से कौन सा निर्देश सही था, और किस का पालन करना था?

   दोनों ही निर्देश सही थे, दोनों में परस्पर कोई विरोधाभास नहीं था, और इस्त्राएलियों को दोनों का ही पालन करना था - उसी क्रम में जिस में वे निर्देश दिए गए थे। पहला काम था व्याकुलता और छटपटाहट छोड़कर शांत तथा स्थिर खड़े होकर परमेश्वर से निर्देश लेना, ना की अपनी अधीरता में कुछ गलत कर बैठना; क्या होता यदि वे परमेश्वर के निर्देश को जाने बिना ही लाल समुद्र में छलांग लगाकर उसे अपने बूते पर पार करने का, या फिर पहाड़ियों पर चढ़कर बच निकलने का प्रयास करते - वे या तो डूब मरते या फिर फिरौन की सेना द्वारा बन्धुआ बना लिए जाते अथवा घात कर दिए जाते। लेकिन पहले शांत हो जाने, परमेश्वर पर भरोसा रखने और उससे निर्देश लेकर अगला कदम उठाने के कारण वे बच सके और फिरौन की सेना भी नाश हो गई। परमेश्वर ने इस्त्राएलियों और मूसा दोनों ही के लिए निर्देश दिए - मूसा को अपनी लाठी लाल समुद्र के ऊपर उठानी थी जिससे लाल समुद्र दो भागों में विभाजित हो गया तथा इस्त्राएलियों के लिए भूमि पर होकर जाने का मार्ग बन गया और इस्त्राएलियों को समुद्र में उनके लिए बने उस मार्ग पर चलना था, आगे बढ़ना था जिस का पालन करने से वे बिना किसी परेशानी के पार उतर सके।

   क्या आप कभी अपने आप को समस्याओं और परेशानियों से घिरा हुआ पाते हैं, जब कुछ समझ नहीं आता कि क्या करें और क्या ना करें? सबसे पहले शांत हो जाईए, परमेश्वर पर भरोसा रख कर उससे निर्देश लीजिए, फिर जो निर्देश वह आपको दे, उनका वैसा ही पालन कीजिए, उनके अनुसार आगे कदम बढ़ाईए और समस्या के पार उतर जाईए! - डेव ब्रैनन


जीवन की राह पर, हर परिस्थिति के लिए, परमेश्वर का वचन बाइबल तथा प्रभु यीशु ही सर्वोत्तम मार्गदर्शक हैं।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105 

बाइबल पाठ: निर्गमन 14:5-22
Exodus 14:5 जब मिस्र के राजा को यह समाचार मिला कि वे लोग भाग गए, तब फिरौन और उसके कर्मचारियों का मन उनके विरुद्ध पलट गया, और वे कहने लगे, हम ने यह क्या किया, कि इस्राएलियों को अपनी सेवकाई से छुटकारा देकर जाने दिया? 
Exodus 14:6 तब उसने अपना रथ जुतवाया और अपनी सेना को संग लिया। 
Exodus 14:7 उसने छ: सौ अच्छे से अच्छे रथ वरन मिस्र के सब रथ लिये और उन सभों पर सरदार बैठाए। 
Exodus 14:8 और यहोवा ने मिस्र के राजा फिरौन के मन को कठोर कर दिया। सो उसने इस्राएलियों का पीछा किया; परन्तु इस्राएली तो बेखटके निकले चले जाते थे। 
Exodus 14:9 पर फिरौन के सब घोड़ों, और रथों, और सवारों समेत मिस्री सेना ने उनका पीछा कर के उन्हें, जो पीहहीरोत के पास, बालसपोन के साम्हने, समुद्र के तीर पर डेरे डाले पड़े थे, जा लिया। 
Exodus 14:10 जब फिरौन निकट आया, तब इस्राएलियों ने आंखे उठा कर क्या देखा, कि मिस्री हमारा पीछा किए चले आ रहे हैं; और इस्राएली अत्यन्त डर गए, और चिल्लाकर यहोवा की दोहाई दी। 
Exodus 14:11 और वे मूसा से कहने लगे, क्या मिस्र में कबरें न थीं जो तू हम को वहां से मरने के लिये जंगल में ले आया है? तू ने हम से यह क्या किया, कि हम को मिस्र से निकाल लाया? 
Exodus 14:12 क्या हम तुझ से मिस्र में यही बात न कहते रहे, कि हमें रहने दे कि हम मिस्रियों की सेवा करें? हमारे लिये जंगल में मरने से मिस्रियों की सेवा करनी अच्छी थी। 
Exodus 14:13 मूसा ने लोगों से कहा, डरो मत, खड़े खड़े वह उद्धार का काम देखो, जो यहोवा आज तुम्हारे लिये करेगा; क्योंकि जिन मिस्रियों को तुम आज देखते हो, उन को फिर कभी न देखोगे। 
Exodus 14:14 यहोवा आप ही तुम्हारे लिये लड़ेगा, इसलिये तुम चुपचाप रहो। 
Exodus 14:15 तब यहोवा ने मूसा से कहा, तू क्यों मेरी दोहाई दे रहा है? इस्राएलियों को आज्ञा दे कि यहां से कूच करें। 
Exodus 14:16 और तू अपनी लाठी उठा कर अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ा, और वह दो भाग हो जाएगा; तब इस्राएली समुद्र के बीच हो कर स्थल ही स्थल पर चले जाएंगे। 
Exodus 14:17 और सुन, मैं आप मिस्रियों के मन को कठोर करता हूं, और वे उनका पीछा कर के समुद्र में घुस पड़ेंगे, तब फिरौन और उसकी सेना, और रथों, और सवारों के द्वारा मेरी महिमा होगी, तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं। 
Exodus 14:18 और जब फिरौन, और उसके रथों, और सवारों के द्वारा मेरी महिमा होगी, तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं। 
Exodus 14:19 तब परमेश्वर का दूत जो इस्राएली सेना के आगे आगे चला करता था जा कर उनके पीछे हो गया; और बादल का खम्भा उनके आगे से हटकर उनके पीछे जा ठहरा। 
Exodus 14:20 इस प्रकार वह मिस्रियों की सेना और इस्राएलियों की सेना के बीच में आ गया; और बादल और अन्धकार तो हुआ, तौभी उस से रात को उन्हें प्रकाश मिलता रहा; और वे रात भर एक दूसरे के पास न आए। 
Exodus 14:21 और मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया; और यहोवा ने रात भर प्रचण्ड पुरवाई चलाई, और समुद्र को दो भाग कर के जल ऐसा हटा दिया, जिससे कि उसके बीच सूखी भूमि हो गई। 
Exodus 14:22 तब इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर हो कर चले, और जल उनकी दाहिनी और बाईं ओर दीवार का काम देता था।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-4


Sunday, May 25, 2014

परिवर्तन


   जब कभी मुझे और मेरे पति को किसी विदेश यात्रा पर जाना होता है तो हम अपने बैंक जाकर हमारे देश की मुद्रा - डॉलर के बदले उस देश की मुद्रा ले लेते हैं, जिससे हमें वहाँ पर अपने खर्चों का भुगतान करने में कोई परेशानी नहीं होने पाए। मुद्रा का यह परिवर्तन हमारे लिए परेशानियों से बचने में सहायक होता है।

   जब हम मसीही विश्वास में आते हैं तो एक अन्य प्रकार का परिवर्तन हमारे अन्दर होता है। हमारे जीवन भी मुद्रा के समान हैं; पुराने शारीरिक जीवन से निकल कर आत्मिक जीवन में आने के बाद हमारे जीवनों को भी एक नया स्वरूप लेना चाहिए। प्रभु यीशु में होकर हम अपने पुराने शारीरिक जीवन के स्थान पर प्रभु से एक नया आत्मिक जीवन पा लेते हैं; ऐसा जीवन जो प्रभु के आत्मिक राज्य में उपयोग होने के योग्य होता है। अब हम इस संसार के लिए अपनी शारीरिक लालसाओं के अनुसार अपने आप को खर्च करने की बजाए, प्रभु यीशु के लिए उसके आत्मिक राज्य में अपने आप को खर्च करने के योग्य हो जाते हैं।

   इस परिवर्तन का एक बहुत अच्छा उदाहरण है प्रेरित पौलुस का जीवन। पौलुस, जो उस समय शाऊल के नाम से जाना जाता था, का जीवन दमिश्क के मार्ग पर नाट्कीय रूप से बदला गया (प्रेरितों 9), और उसके बाद वह अपना जीवन एक बिलकुल ही भिन्न रीति से प्रभु के लिए खर्च करने लगा। पहले वो मसीही विश्वासियों के पीछे जाकर, उन्हें खोजकर, बन्दी बना कर लाता था जिससे उन्हें उनके मसीही विश्वास के लिए प्रताड़ित करवा सके, उन्हें बन्दीगृह में डलवा सके या मरवा सके। अब अपने परिवर्तन के बाद वह लोगों के सामने मसीही विश्वास की सार्थकता और अनिवार्यता को प्रस्तुत करने लगा जिससे वे पापों के पश्चाताप और प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा के द्वारा मसीही विश्वास में आ सकें और उस में स्थिर हो सकें। उसका यह परिवर्तित जीवन अब मसीही विश्वास के बढ़ावे और मसीही विश्वासियों की भलाई के लिए खर्च होने लगा। पौलुस ने कुरिन्थुस में स्थित मण्डली को लिखी अपनी पत्री में लिखा, "मैं तुम्हारी आत्माओं के लिये बहुत आनन्द से खर्च करूंगा, वरन आप भी खर्च हो जाऊंगा..." (2 कुरिन्थियों 12:15); अब उसका सारा जीवन अपनी इन आत्मिक सन्तानों की भलाई में खर्च हो जाने के लिए समर्पित था (पद 14, 19)।

   सांसारिक शारीरिक जीवन से मसीही विश्वास के आत्मिक जीवन में परिवर्तित होने का तात्पर्य केवल हमारे अनन्तकाल के गन्तव्य को बदलना ही नहीं है; वरन इसका तात्पर्य है अपने जीवन के प्रत्येक दिन को मसीह यीशु के आत्मिक राज्य की बढ़ोतरी एवं उसके लोगों की भलाई के लिए खर्च करना। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मन परिवर्तन एक क्षण में होता है, उस के द्वारा होने वाले जीवन परिवर्तन होने में सारा जीवनकाल लग जाता है।

और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? - 2 कुरिन्थियों 11:28-29

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:14-21
2 Corinthians 12:14 देखो, मैं तीसरी बार तुम्हारे पास आने को तैयार हूं, और मैं तुम पर कोई भार न रखूंगा; क्योंकि मैं तुम्हारी सम्पत्ति नहीं, वरन तुम ही को चाहता हूं: क्योंकि लड़के-बालों को माता-पिता के लिये धन बटोरना न चाहिए, पर माता-पिता को लड़के-बालों के लिये। 
2 Corinthians 12:15 मैं तुम्हारी आत्माओं के लिये बहुत आनन्द से खर्च करूंगा, वरन आप भी खर्च हो जाऊंगा: क्या जितना बढ़कर मैं तुम से प्रेम रखता हूं, उतना ही घटकर तुम मुझ से प्रेम रखोगे? 
2 Corinthians 12:16 ऐसा हो सकता है, कि मैं ने तुम पर बोझ नहीं डाला, परन्तु चतुराई से तुम्हें धोखा देकर फंसा लिया। 
2 Corinthians 12:17 भला, जिन्हें मैं ने तुम्हारे पास भेजा, क्या उन में से किसी के द्वारा मैं ने छल कर के तुम से कुछ ले लिया? 
2 Corinthians 12:18 मैं ने तितुस को समझाकर उसके साथ उस भाई को भेजा, तो क्या तीतुस ने छल कर के तुम से कुछ लिया? क्या हम एक ही आत्मा के चलाए न चले? क्या एक ही लीक पर न चले? 
2 Corinthians 12:19 तुम अभी तक समझ रहे होगे कि हम तुम्हारे सामने प्रत्युत्तर दे रहे हैं, हम तो परमेश्वर को उपस्थित जान कर मसीह में बोलते हैं, और हे प्रियों, सब बातें तुम्हारी उन्नति ही के लिये कहते हैं। 
2 Corinthians 12:20 क्योंकि मुझे डर है, कहीं ऐसा न हो, कि मैं आकर जैसे चाहता हूं, वैसे तुम्हें न पाऊं; और मुझे भी जैसा तुम नहीं चाहते वैसा ही पाओ, कि तुम में झगड़ा, डाह, क्रोध, विरोध, ईर्ष्या, चुगली, अभिमान और बखेड़े हों। 
2 Corinthians 12:21 और मेरा परमेश्वर कहीं मेरे फिर से तुम्हारे यहां आने पर मुझ पर दबाव डाले और मुझे बहुतों के लिये फिर शोक करना पड़े, जिन्हों ने पहिले पाप किया था, और उस गन्‍दे काम, और व्यभिचार, और लुचपन से, जो उन्होंने किया, मन नहीं फिराया।

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 38-42


Saturday, May 24, 2014

छुपाना


   कचरे के द्वारा भरे जाकर समतल करी जा रही ऊबड़-खाबड़ ज़मीन से उठने वाली दुर्गन्ध आस-पास के लोगों के लिए समस्या बन गई थी इसलिए भराई के कार्य में लगे लोगों ने उस दुर्गन्ध को छुपाने का प्रयास किया। उन्होंने भराई के क्षेत्र के चारों ओर पिचकारी के समान कार्य करने वाले ऐसे यन्त्र लगाए जो प्रति मिनिट कई गैलन सुगन्धित द्रव्य 50 मीटर तक की दूरी तक फेंक सकते थे। लेकिन चाहे जितने गैलन सुगन्धित द्रव्य फेंका जाता, कुछ ही समय के बाद सड़ते हुए कचरे की दुर्गन्ध वापस आ जाती। यन्त्रों द्वारा आस-पास छिड़की गई सुगन्ध तो केवल कुछ समय तक दुर्गन्ध छुपाने का असफल प्रयास भर था, स्थिति का वास्तविक हल तो उस कचरे के निवारण में था।

   राजा दाऊद ने भी कुछ छुपाने का प्रयास किया - बथशीबा के साथ किए व्यभिचार से हुई अपनी नैतिक पराजय को छुपाने के लिए उसने खामोशी, धोखे और धर्मपरायणता का प्रयोग किया (2 शमूएल 11-12)। परमेश्वर के वचन बाइबल के भजन 32 में दाऊद अपनी उस खामोशी के कारण उस पर परमेश्वर से आई दोष की तीव्र भावना को व्यक्त करता है (पद 3-4)। जब दाऊद उस दोष-भावना को और बर्दाश्त नहीं कर सका तो उसने अपने पाप को छुपाने के प्रयास छोड़कर उसे मान लिया और उसके लिए पश्चाताप किया (पद 5)। इसके बाद उसे अपने पाप को छुपाने का प्रयास करने की फिर कोई आवश्यकता नहीं रही क्योंकि परमेश्वर ने उसे क्षमा कर दिया।

   हमारा अपने पापों को छुपाने का प्रयास करना व्यर्थ है। हम छुपाने का जो भी उपाय करें, पाप की दुर्गन्ध उसमें से होकर भी बाहर निकल ही आएगी और हमारी तथा दूसरों की परेशानी का कारण बनेगी। स्थिति का वस्तविक निवारण है उस पाप को परमेश्वर के सम्मुख मान लेना और उसके लिए सच्चे मन से परमेश्वर से पश्चाताप करना। ऐसा कर के हम परमेश्वर को यह अधिकार देते हैं कि वह हमारे अन्दर की गन्दगी को साफ कर दे, और हम इस सफाई के द्वारा उसके अनुग्रह और क्षमा से मिलने वाली ताज़गी को अनुभव करने पाते हैं।

   पाप को छुपाएं नहीं, उसे स्वीकार कर लें, और परमेश्वर प्रभु यीशु से नए जीवन के अनुभव को प्राप्त कर लें। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु के समक्ष अपने पाप को मान कर उससे मिलने वाली क्षमा के आनन्द को अनुभव करें।

दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। - यूहन्ना 1:29

बाइबल पाठ: भजन 32:1-5
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो। 
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई। 
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 35-37


Friday, May 23, 2014

जोखिम


   अपनी जीवनी की पुस्तक, "Stuntman! My Car-Crashing, Plane-Jumping, Bone-Breaking, Death-Defying Hollywood Life" (करतब-बाज़! मेरा कार-टकराने, वायु-यान से कूदने, हड्डियाँ तुड़वाने और मौत का जोखिम उठाने वाला हॉलिवुड का जीवन) में हैल नीडहैम अपने द्वारा हॉलिवुड की फिल्मों में उठाए गए जोखिमों के बारे में लिखता है। उसने मुक्केबाज़ी की है, तेज़ रफ्तार से कार चलाईं हैं, उड़ते हुए वायु-यानों के पंखों पर चला है, घोड़ों से गिरा है और उसे आग भी लगाई गई है! यह सब उसने इसलिए किया कि हॉलिवुड फिल्मों के दर्शकों का मनोरंजन हो सके; इतने करतब दिखाने के कारण उसे हॉलिवुड के सर्वश्रेष्ठ करतब-बाज़ का खिताब भी मिला है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पात्र - प्रेरित पौलुस और उनका साथी बरनबास भी ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने जीवन जोखिम में डाले (प्रेरितों 15:26); लेकिन इस जोखिम के लिए उनका उद्देश्य फर्क था। उन्होंने ऐसा प्रभु यीशु मसीह में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करने तथा प्रभु यीशु मसीह को महिमा देने के लिए किया। रोमी साम्राज्य में एक सुसमाचार प्रचारक के रुप में पौलुस ने अनेक जोखिम उठाए जिनमें उसके पानी के जहाज़ का टूटना, उसका पीटे जाना, उसे ताड़नाएं दिए जाना और बन्दीगृह में डाले जाना सम्मिलित है (2 कुरिन्थियों 11:22-30)। लेकिन प्रभु यीशु के प्रचार के लिए पौलुस इन सब जोखिमों को उठाने से कभी कतराया नहीं, वह सब दुख उठा कर भी सुसमाचार प्रचार की अपनी सेवकाई में अपने जीवन के अन्त तक लगा रहा।

   आज भी ऐसे अनेक मसीही विश्वासी हैं जो प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार के प्रचार के लिए हर तरह का जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं। क्या आप एक मसीही विश्वासी होने के बावजूद ऐसे ही किनारे पर बैठे हुए हैं, सुसमाचार प्रचार में भाग नहीं ले रहे हैं? परमेश्वर ने अपना आत्मा और अपना वचन आपको इसलिए दिया है कि आप सामर्थ पाएं और सुसमाचार प्रचार में लगें (रोमियों 1:16; प्रेरितों 1:8)।

   यदि आप अभी तक सुसमाचार प्रचार से कतराते रहे हैं तो परमेश्वर से माँगें कि वह आपको ऐसा मन और चाह दे कि आप बिना हिचकिचाए या भयभीत हुए सुसमाचार प्रचार में लग सकें। सुसमाचार प्रचार के लिए उठाया गया जोखिम कोई जोखिम नहीं वरन आने वाले भविष्य के लिए एक उत्तम निवेश है जिसके प्रतिफल सर्वोत्तम हैं; उन प्रतिफलों से बढ़कर ना तो इस जीवन में और ना ही आते जीवन कुछ मिल सकता है। - डेनिस फिशर


सुसमाचार प्रचार करने के प्रतिफल उसके लिए उठाए गए जोखिमों से बढ़कर हैं।

क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित परमेश्वर की सामर्थ है। - रोमियों 1:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-30
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जाखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 32-34


Thursday, May 22, 2014

आश्वस्त


   मेरी पत्नि गर्भवती थी; हमारा दूसरा बच्चा आने को था, लेकिन गर्भावस्था के समय में वह गंभीर रूप से बीमार हो गई। चिकित्सक उसकी बीमारी के कारण को ढ़ूढ़ने का प्रयास कर रहे थे, और वह कमज़ोर होती जा रही थी; उसकी कमज़ोरी बहुत बढ़ गई और जान पर बन आई थी। इस तरह लाचार हो कर उसे तकलीफ उठाते हुए देखते रहना मेरे लिए एक बेचैन तथा भयावह कर देने वाला अनुभव था। ऐसे भी दिन निकले जिन में लगा कि परमेश्वर हमारी प्रर्थनाएं अनसुनी कर रहा है। एक इतवार उसकी हालात को देखते हुए मैं परमेश्वर के वचन बाइबल से अपने लिए शांति और सांत्वना ढ़ूंढ़ रहा था, और मेरी आँखें यशायाह नबी की पुस्तक के 43 अध्याय के पहले पद पर पड़ीं।

   उस पद में परमेश्वर द्वारा अपनी प्रजा इस्त्राएल को दिए गए आश्वासन के आरंभिक शब्द हैं "मत डर" और वह आश्वासन अन्त होता है परमेश्वर के कथन "तू मेरा ही है" के साथ। तुरंत ही परमेश्वर के आत्मा ने वह आश्वासन मेरे लिए व्यक्तिगत बना दिया। जिस आत्मियता के साथ परमेश्वर ने आगे के पदों में इस्त्राएल को आश्वस्त किया है - जब तू जल से होकर निकले...नदी से निकले...आग से निकले, सब में मैं तेरे साथ हूँ - उसने मुझे भी आश्वस्त किया कि परमेश्वर मेरे साथ लगातार बना हुआ है। उस खण्ड का प्रत्येक वाक्यांश मानो बुलन्द आवाज़ में मुझ से कह रहा था - यह तेरे लिए भी उतना ही सत्य है।

   उस तकलीफ की घड़ी में मैंने और मेरी पत्नि ने जो शांति तथा सांत्वना पाई वह किसी चँगाई या आश्चर्यकर्म की प्रतिज्ञा से नहीं वरन उस आश्वासन से पाई कि हम कभी अकेले नहीं हैं, वरन हर परिस्थिति में हमारा परमेश्वर हमारे साथ है। इसके बाद भी हमें कई भयभीत करने वाली परिस्थितियों से होकर निकलना पड़ा, यहाँ तक कि बच्चे के पैदा होने के तुरंत बाद ऐसा भी लगा कि हम माँ और बच्चे दोनों को ही खो देंगे। लेकिन परमेश्वर हमेशा हमें अपने वचन से आश्वस्त करता रहा और हर परिस्थिति के लिए तैयाएर करता रहा।

   हर मसीही विश्वासी को उसके उद्धारकर्ता परमेश्वर का वचन आश्वस्त करता है कि परमेश्वर सदा ही उनके साथ बना रहता है; वे कभी किसी भी परिस्थिति में या किसी भी बात में अकेले नहीं होते। - रैण्डी किल्गोर


जिसे आप हर उजाले का सत्य जानते तथा मानते हैं उसे कभी किसी अन्धकार में ना भूलें।

तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैं ने तुम्हें बनाया और तुम्हें लिये फिरता रहूंगा; - यशायाह 46:4

बाइबल पाठ: यशायाह 43:1-4
Isaiah 43:1 हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है। 
Isaiah 43:2 जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। 
Isaiah 43:3 क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरी सन्ती कूश और सबा को देता हूं। 
Isaiah 43:4 मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 28-31


Wednesday, May 21, 2014

आज्ञाकारी


   पैट की वह पहली नौकरी थी; उसे किराने की दुकान पर काम मिला था, और आरंभ से ही उसे रात्रि की पारी मिली थी। शाम को जब दुकान बन्द हो जाती तब रात्रि की पारी वाले कर्मचारी आकर अगले दिन के लिए दुकान के समान को ठीक करके लगाते, बिक चुके सामान के स्थान पर और नया सामान रखते थे। पैट के मालिक का यह निर्देश था कि हमेशा सूप के डिब्बे ऐसे रखे जाएं कि उनके लेबल सामने की ओर हों जिससे वे सरलता से पढ़े जा सकें, लेकिन इसके साथ ही उस के यह भी निर्देश थे कि ऐसा कम से कम डब्बों की एक के बाद एक तीन पंक्तियाँ तक किया जाना था। एक रात को जब पैट अन्य लोगों के साथ सामान लगा रहा था, उसके सह-कर्मचारी अपने मालिक का ठठा करते हुए कहने लगे, "अरे, बस यह ध्यान रखो कि सबसे आगे की पंक्ति के डब्बे सही रखे हैं, पीछे की पंक्तियां कौन देखता है?" युवा पैट के लिए यह एक निर्णय का क्षण था - वह अपने मालिक की बात को माने या अन्य लोगों के समान वह करे जो सरल है और बाकी सब कर रहे हैं?

   हम सब कभी ना कभी ऐसी ही किसी परिस्थिति से होकर निकले हैं, जहाँ हमें भी ऐसा ही कोई निर्णय लेना पड़ा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में लिखा कि हम मसीही विश्वासियों को उस समय भी आज्ञाकारी बने रहना है जब कोई हमें देख भी नहीं रहा होता है: "हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से" (कुलुस्सियों 3:22)।

   हमारा वह करना जो सही है इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि हमारा अधिकारी या मालिक आस-पास है कि नहीं, या कोई हमें देख रहा है कि नहीं। भली, उचित या न्यायसंगत आज्ञाओं के लिए भी हर समय आज्ञाकारी रहना चाहे सरल या सुविधाजनक नहीं भी हो, लेकिन ऐसा करना सही होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल की चेतावनी के प्रति सचेत रहें: "इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है" (याकूब 4:17)। - सिंडी हैस कैसपर


जब कोई ना देख रहा हो ऐसे में हम जो करते हैं वह हमारे चरित्र का नाप है।

जितने दास जूए के नीचे हैं, वे अपने अपने स्‍वामी को बड़े आदर के योग्य जानें, ताकि परमेश्वर के नाम और उपदेश की निन्‍दा न हो। - 1 तिमुथियुस 6:1

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:22-25
Colossians 3:22 हे सेवकों, जो शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, सब बातों में उन की आज्ञा का पालन करो, मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये नहीं, परन्तु मन की सीधाई और परमेश्वर के भय से। 
Colossians 3:23 और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। 
Colossians 3:24 क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हें इस के बदले प्रभु से मीरास मिलेगी: तुम प्रभु मसीह की सेवा करते हो। 
Colossians 3:25 क्योंकि जो बुरा करता है, वह अपनी बुराई का फल पाएगा; वहां किसी का पक्षपात नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 25-27


Tuesday, May 20, 2014

तैयार


   पिछले अनेक वर्षों में अनेक लोगों ने प्रभु यीशु मसीह के दूसरे आगमन की तिथि की भविष्यवाणियाँ की हैं। कुछ वर्ष पहले भी अमेरिका से रेडियो प्रसारण द्वारा प्रचार करने वाले एक व्यक्ति ने मीडीया की रुचि को बहुत जागृत किया जब उसने यह भविष्यवाणी करी कि प्रभु यीशु 21 मई 2011 को पुनः आएंगे।

   जो कोई परमेश्वर के वचन बाइबल को जानते हैं, वे यह भी जानते हैं कि ऐसी भविष्यवाणी कभी सत्य नहीं हो सकती; और यही हुआ भी, क्योंकि प्रभु यीशु ने स्वयं अपने दूसरे आगमन के लिए कहा है कि: "तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उस घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जावेगा" (लूका 12:40)। लेकिन मैं यह तो मानूँगा कि उस प्रचारक की भविष्यवाणी ने मेरा भी ध्यान आकर्षित किया। अकसर मैं जीवन की व्यस्तता में इतना खो जाता हूँ कि मैं ऐसे जीने लगता हूँ मानो प्रभु यीशु का दूसरा आगमन कोई बहुत दूर भविष्य में होने वाली घटना है। मैं भूल जाता हूँ कि प्रभु यीशु कभी भी पुनः आ सकते हैं। उस प्रचारक की वह भविश्यवाणी गलत तो थी ही, लेकिन उस ने मुझे स्मरण कराया कि मुझे अपने उद्धारकर्ता प्रभु के पुनः आगमन के लिए कैसे तैयार रहना चाहिए, तथा मेरे उस पुनः आगमन के लिए उत्साहित रहने को फिर से जागृत किया, क्योंकि यह किसी भी दिन हो सकता है - आज भी।

   कभी कभी हम सोचते हैं कि प्रभु यीशु के पुनः आगमन के लिए तैयार रहने का अर्थ है कुछ बातों को अपने जीवन में ना होने देना या उन्हें नहीं करना। लेकिन प्रभु यीशु से मिलने के लिए तैयार होने का अर्थ है कि हम निरंतर उसकी समानता में ढ़लते चले जाएं, जिससे कि जब भी वह आए हम उसे भावते हुए रहें (1 यूहन्ना 3:2-3)। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को सिखाया कि उसके आगमन के लिए तैयार रहने का तात्पर्य है हमेशा उसकी इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करते रहना (लूका 12:47)।

   ज़रा विचार कीजिए, जब कभी भी प्रभु यीशु का दूसरा आगमन वास्तव में हो जाए, तब क्या आप उसके लिए तैयार पाए जाएंगे? - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के लिए तैयार बने रहिए, और आप उसकी महिमा और आज्ञाकारिता का जीवन बिताते रहेंगे।

और वह दास जो अपने स्‍वामी की इच्छा जानता था, और तैयार न रहा और न उस की इच्छा के अनुसार चला बहुत मार खाएगा। - लूका 12:47

बाइबल पाठ: लूका 12:35-40
Luke 12:35 तुम्हारी कमरें बन्‍धी रहें, और तुम्हारे दीये जलते रहें। 
Luke 12:36 और तुम उन मनुष्यों के समान बनो, जो अपने स्‍वामी की बाट देख रहे हों, कि वह ब्याह से कब लौटेगा; कि जब वह आकर द्वार खटखटाए, तुरन्त उसके लिये खोल दें। 
Luke 12:37 धन्य हैं वे दास, जिन्हें स्‍वामी आकर जागते पाए; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वह कमर बान्‍ध कर उन्हें भोजन करने को बैठाएगा, और पास आकर उन की सेवा करेगा। 
Luke 12:38 यदि वह रात के दूसरे पहर या तीसरे पहर में आकर उन्हें जागते पाए, तो वे दास धन्य हैं। 
Luke 12:39 परन्तु तुम यह जान रखो, कि यदि घर का स्‍वामी जानता, कि चोर किस घड़ी आएगा, तो जागता रहता, और अपने घर में सेंध लगने न देता। 
Luke 12:40 तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उस घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जावेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 21-24


Monday, May 19, 2014

इतिहास


   मैं अपनी पत्नि के साथ ब्रिटिश संग्रहालय को देखने गया; वहाँ भ्रमण करते हुए हम लंडन शहर में स्थित उस विशाल भवन में विद्यमान इतिहास तथा विरासत की महानता को देख कर बहुत प्रभावित हुए। वहाँ हमने ऐसे पुरातन अवशेष देखे जो हमारे अपने देश अमेरिका में पाई जाने वाली किसी भी वस्तु से सैंकड़ों वर्ष पहले के थे। यह सब देखकर मुझे बोध हुआ कि इतिहास का भाव रखना कितना महत्वपूर्ण है। इतिहास हमें दृष्टिकोण, संदर्भ और परिणामों का ऐसा लेखा-जोखा देता है जो हमें शिक्षा लेने तथा सही फैसले करने में सहायक होते हैं, क्योंकि जो हम से पहले हो कर गए हैं उनकी सफलताओं एवं असफलताओं का संपूर्ण ब्यौरा हमारे सामने खुला होता है।

   प्रेरित पौलुस ने भी इतिहास से पाठ सीखने के महत्व को जाना और समझा। उसने अपने पाठकों को स्मरण दिलाया कि कैसे इस्त्राएली लोगों के द्वारा किए गए गलत निर्णय तथा परमेश्वर की योजनाओं पर अविश्वास ने उन्हें चालीस वर्ष की जंगल यात्रा करने पर बाध्य कर दिया था (गिनती 14)। इस घटना के संदर्भ में पौलुस ने कुरिन्थुस के विश्वासियों को चिताया, "परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर थीं; और वे हमारी चेतावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं" (1 कुरिन्थियों 10:11)।

   परमेश्वर ने हमें अपना वचन बाइबल इस लिए दिया है कि हम उस में होकर परमेश्वर को जानें तथा उस में दिए गए परमेश्वर के लोगों के इतिहास से अपने वर्तमान के लिए शिक्षा लें। बाइबल में दिए गए उदाहरण और शिक्षाएं हमें सचेत करती हैं कि हम अपनी प्रवृतियों में फंसकर वही गलतियाँ ना करें जो लोग पहले कर चुके हैं, और जिनके परिणाम हमारे लिए लिखे गए हैं, वरन उन से चेतावनी पाकर बुद्धिमता के साथ परमेश्वर को समर्पित तथा उसके प्रति विश्वास एवं आज्ञाकारिता का जीवन बिताएं।

   प्रश्न यही है - क्या हम इतिहास से शिक्षा ले कर सही मार्ग चुनेंगे, अथवा हम से पहले के लोगों की उन्हीं गलतियों को दोहरा कर वैसे ही परिणामों के भागी बनेंगे? - बिल क्राउडर


हम से पहले के परमेश्वर के लोगों के जीवनों से बहुमूल्य शिक्षाएं ली जा सकती हैं - क्या हम ऐसा करते हैं?

यह बात आने वाली पीढ़ी के लिये लिखी जाएगी, और एक जाति जो सिरजी जाएगी वही याह की स्तुति करेगी। - भजन 102:18

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 10:1-13
1 Corinthians 10:1 हे भाइयों, मैं नहीं चाहता, कि तुम इस बात से अज्ञात रहो, कि हमारे सब बाप दादे बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हो गए। 
1 Corinthians 10:2 और सब ने बादल में, और समुद्र में, मूसा का बपितिस्मा लिया। 
1 Corinthians 10:3 और सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया। 
1 Corinthians 10:4 और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया, क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे, जो उन के साथ-साथ चलती थी; और वह चट्टान मसीह था। 
1 Corinthians 10:5 परन्तु परमेश्वर उन में के बहुतेरों से प्रसन्न न हुआ, इसलिये वे जंगल में ढेर हो गए। 
1 Corinthians 10:6 ये बातें हमारे लिये दृष्‍टान्‍त ठहरी, कि जैसे उन्होंने लालच किया, वैसे हम बुरी वस्‍तुओं का लालच न करें। 
1 Corinthians 10:7 और न तुम मूरत पूजने वाले बनों; जैसे कि उन में से कितने बन गए थे, जैसा लिखा है, कि लोग खाने-पीने बैठे, और खेलने-कूदने उठे। 
1 Corinthians 10:8 और न हम व्यभिचार करें; जैसा उन में से कितनों ने किया: एक दिन में तेईस हजार मर गये । 
1 Corinthians 10:9 और न हम प्रभु को परखें; जैसा उन में से कितनों ने किया, और सांपों के द्वारा नाश किए गए। 
1 Corinthians 10:10 और न तुम कुड़कुड़ाओ, जिस रीति से उन में से कितने कुड़कुड़ाए, और नाश करने वाले के द्वारा नाश किए गए। 
1 Corinthians 10:11 परन्तु यें सब बातें, जो उन पर पड़ी, दृष्‍टान्‍त की रीति पर थीं; और वे हमारी चितावनी के लिये जो जगत के अन्‍तिम समय में रहते हैं लिखी गईं हैं। 
1 Corinthians 10:12 इसलिये जो समझता है, कि मैं स्थिर हूं, वह चौकस रहे; कि कहीं गिर न पड़े। 
1 Corinthians 10:13 तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 18-20


Sunday, May 18, 2014

सर्वोत्तम


   यह वह नहीं है जो मैंने अपने जीवन के बारे में सोचा था। मैंने सोचा था कि मैं 19 वर्ष की आयु में ही शादी कर लूँगी, मेरे आधा-दर्जन बच्चे होंगे और मैं एक पत्नी एवं माँ के रूप में अपना जीवन व्यतीत करूँगी। लेकिन मैं काम करने लगी, चालीस वर्ष से ऊपर की आयु में मेरी शादी हुई, और मैं माँ नहीं बनी। बहुत वर्षों तक मैं यही आशा रखती थी कि परमेश्वर मेरे लिए भजन 37:4 - "यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा" के अनुसार करेगा; लेकिन यह भी नहीं हुआ।

   कभी कभी इन अधूरी इच्छाओं की यादें मन को थोड़ा उदास कर देती हैं। जैसे मेरे साथ हुआ, हो सकता है कि आपके साथ भी हुआ हो और जीवन आपकी आशा के अनुसार नहीं वरन उससे भिन्न मार्ग पर चला हो। इस संदर्भ में भजन 37 में लिखी गई कुछ बातें विचार के लिए आपके सामने रखती हूँ (यद्यपि यह भजन मुख्यतः दुष्टों के साथ धर्मी जन के जीवन की तुलना है)।

   इस भजन का चौथा पद हमें सिखाता है कि अपूर्ण इच्छाएं हमारे जीवन के आनन्द को हम से नहीं छीन सकतीं; जैसे जैसे हम परमेश्वर के मन को जानते चले जाते हैं, परमेश्वर स्वयं ही हमारा आनन्द होता चला जाता है।

   पद पाँच हमें सिखाता है कि हम अपने मार्ग की चिंता पूर्णतः परमेश्वर पर छोड़ दें, ऐसे जैसे एक कमज़ोर व्यक्ति अपने उस बोझ को जिसे वह स्वयं नहीं उठा सकता उसे अपने उस बलवन्त मित्र एवं साथी को सौंप देता है जो उसकी सहायता करने के लिए सदा उसके साथ रहता है। साथ ही यह पद हमें अपने उस साथी एवं मित्र, अर्थात परमेश्वर पर सदा भरोसा बनाए रखने को भी कहता है। क्योंकि जब हम यह भरोसा बनाए रखते हैं, तब हम निश्चिंत तथा शांत होकर रह सकते हैं, जैसा कि पद सात कहता है।

   मूल बात है, परमेश्वर पर भरोसा रखें, उस पर ही निर्भर रहें, क्योंकि वह जो करेगा, अपने बच्चों के लिए सर्वोत्तम ही करेगा। - ऐनी सेटास


मनुष्य मन में अपने मार्ग पर विचार करता है, परन्तु यहोवा ही उसके पैरों को स्थिर करता है। - नीतिवचन 16:9

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: भजन 37:1-8
Psalms 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर! 
Psalms 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे। 
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। 
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। 
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। 
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा। 
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है! 
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 14-17


Saturday, May 17, 2014

घर


   एक दम्पति ने अपनी एक वृद्ध रिशेतदार को उनकी देख-रेख के लिए अपने साथ रखने का निर्णय लिया। उस दम्पति को चिंता थी कि वे वृद्धा जब एक नए घर और माहौल में आएंगी तो उन्हें अटपटा लगेगा। इसलिए उन्होंने उनके रहने के कमरे को बिलकुल वैसा ही बनाने का निर्णय लिया जैसा उनका अपना कमरा उस घर में था जिसे छोड़कर वे उनके साथ रहने आ रहीं थीं। जब वे वृद्धा उनके साथ रहने आईं तो उन्होंने पाया कि उनके रहने का स्थान, उसकी साज-सज्जा, वहाँ की मेज़-कुर्सी आदि बिलकुल वैसा ही था जैसा वे छोड़कर आईं थीं; यह उनके लिए अपने ही घर में मिले स्वागत के समान था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 13:36-14:4 में प्रभु यीशु की अपने चेलों के साथ हो रही वार्ता में हम पाते हैं कि प्रभु यीशु उन्हें अपने मारे जाने, पुनरुत्थान और फिर स्वर्गारोहण के लिए तैयार कर रहा है। जब पतरस ने प्रभु यीशु से पूछा कि वह कहाँ जा रहा है तो प्रभु ने उत्तर दिया, जहाँ मैं जा रहा हूँ वहाँ अभी तो तू नहीं आ सकता, परन्तु बाद में वहाँ आएगा (यूहन्ना 13:36)। फिर वार्तालाप में और थोड़ा आगे प्रभु यीशु ने पतरस तथा अन्य सभी चेलों को आश्वस्त करते हुए कहा, "मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:2-3)।

   स्वर्ग वह स्थान है जहाँ समस्त संसार के हर जाति, राष्ट्र, भाषा, समूह इत्यादि से मसीही विश्वासी एक साथ एक परिवार के समान एकत्रित होंगे और साथ रहेंगे, क्योंकि वह हम सब मसीही विश्वासियों के स्वर्गीय पिता का घर भी है; और उस घर में प्रभु यीशु हम सब के लिए स्थान तैयार कर रहा है।

   जब आप अपने घर पहुँचेंगे और प्रभु यीशु वहाँ आपका स्वागत करेगा, तो आप तुरंत पहचान लेंगे कि आप अपने घर ही में आए हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी का घर स्वर्ग है।

हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। - 1 पतरस 2:11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:36-14:4
John 13:36 शमौन पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, तू कहां जाता है यीशु ने उत्तर दिया, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तू अब मेरे पीछे आ नहीं सकता! परन्तु इस के बाद मेरे पीछे आएगा। 
John 13:37 पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, अभी मैं तेरे पीछे क्यों नहीं आ सकता? मैं तो तेरे लिये अपना प्राण दूंगा। 
John 13:38 यीशु ने उत्तर दिया, क्या तू मेरे लिये अपना प्राण देगा? मैं तुझ से सच सच कहता हूं कि मुर्ग बांग न देगा जब तक तू तीन बार मेरा इन्कार न कर लेगा। 
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 11-13


Friday, May 16, 2014

वार्तालाप


   क्या वर्तमान की तकनीकी प्रगति ने आज हमें परस्पर संवाद और एक दूसरे से आमने-सामने बात करने में अक्षम और कमज़ोर कर दिया है? आज अधिकारी ईमेल के द्वारा अपने कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्तगी की सूचना सरलता से भेज सकते हैं; लोग एक दूसरे की आलोचना ट्विटर पर या फेसबुक पर बिना सामने आए कर सकते हैं। लोगों के लिए एक दूसरे के सामने आकर अपना दृष्टिकोण समझाए या बताए बिना ही अपनी बात दूसरे पर लाद देना या सामाजिक रूप से उनपर ऊँगुली उठा देना बहुत सरल हो गया है। इसलिए यह बेहतर होगा कि हम परमेश्वर के वचन बाइबल के उदाहरणों से सीखें कि यदि किसी बात को लेकर परस्पर मतभेद भी हों तो उनका निवारण कैसे करना चाहिए।

   प्रेरित पौलुस और पतरस में एक परिस्थिति को लेकर मतभेद हुआ, और पौलुस ने पतरस के द्वारा परमेश्वर के अनुग्रह को गौण करने को लेकर उसका सामना किया (गलतियों 2:11-16)। बात यह थी कि पतरस अपनी सेवकाई के दौरान गैर-यहूदियों, अर्थात अन्यजातिय मसीही विश्वासियों के साथ संगति कर रहा था, लेकिन जब कुछ ऐसे यहूदी आए जो मसीह यीशु पर विश्वास रखने का दावा तो करते थे परन्तु साथ ही उस गलत धारणा को भी मानते थे कि उद्धार पाने के लिए मसीह यीशु पर विश्वास के साथ मूसा द्वारा दी गई व्यवस्था का पालन भी आवश्यक है, तो पतरस उन अन्यजाति मसीही विश्वासियों से पृथक होकर उन गलत धारणा रखने वाले यहूदी लोगों के साथ हो गया। पौलुस ने जब पतरस के इस दोगलेपन को देखा, तो मसीही प्रेम और सहानुभूति के साथ उसने पतरस का उसके इस व्यवहार के लिए सामना किया; पतरस को समझाया कि वह क्यों उस विधि सम्मत पद्धति का पालन करना चाह रहा है जो जीवन परिवर्तन करने में अक्षम रही है। साथ ही पौलुस ने पतरस को यह भी स्मरण दिलाया कि पाप की गुलामी से मुक्ति दिलाकर परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहने की सामर्थ केवल परमेश्वर के अनुग्रह ही से मिलती है ना कि किसी विधि-विधान अथवा कर्म-काज के पालन से।

   परमेश्वर के वचन पर आधारित तथ्यों के साथ, परमेश्वर की आत्मा की प्रेर्णा और सहायता से जब हम अपने संगी मसीही विश्वासियों के साथ सादर और सप्रेम वार्तालाप करेंगे तो यह अवश्य ही मतभेदों के निवारण और आपसी प्रेम तथा मसीही पवित्रता के प्रोत्साहन एवं उन्नति का कारण ठहरेगी। एक दूसरे के साथ प्रेम पूर्ण व्यवहार के द्वारा हम सत्य को सप्रेम वार्तालाप द्वारा प्रकट करने और पवित्र आत्मा की आधीनता में अपने आप को संचालित करने की अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह निःसंकोच कर सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


सही रीति से कहे गए थोड़े से शब्द बहुत विवादों का समाधन कर सकते हैं।

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। - गलतियों 6:1

बाइबल पाठ: गलतियों 2:11-21
Galatians 2:11 पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुंह पर उसका साम्हना किया, क्योंकि वह दोषी ठहरा था। 
Galatians 2:12 इसलिये कि याकूब की ओर से कितने लोगों के आने से पहिले वह अन्यजातियों के साथ खाया करता था, परन्तु जब वे आए, तो खतना किए हुए लोगों के डर के मारे उन से हट गया और किनारा करने लगा। 
Galatians 2:13 और उसके साथ शेष यहूदियों ने भी कपट किया, यहां तक कि बरनबास भी उन के कपट में पड़ गया। 
Galatians 2:14 पर जब मैं ने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्चाई पर सीधी चाल नहीं चलते, तो मैं ने सब के साम्हने कैफा से कहा; कि जब तू यहूदी हो कर अन्यजातियों की नाईं चलता है, और यहूदियों की नाईं नहीं तो तू अन्यजातियों को यहूदियों की नाईं चलने को क्यों कहता है? 
Galatians 2:15 हम जो जन्म के यहूदी हैं, और पापी अन्यजातियों में से नहीं। 
Galatians 2:16 तौभी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा। 
Galatians 2:17 हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं। 
Galatians 2:18 क्योंकि जो कुछ मैं ने गिरा दिया, यदि उसी को फिर बनाता हूं, तो अपने आप को अपराधी ठहराता हूं। 
Galatians 2:19 मैं तो व्यवस्था के द्वारा व्यवस्था के लिये मर गया, कि परमेश्वर के लिये जीऊं। 
Galatians 2:20 मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया। 
Galatians 2:21 मैं परमेश्वर के अनुग्रह को व्यर्थ नहीं ठहराता, क्योंकि यदि व्यवस्था के द्वारा धामिर्कता होती, तो मसीह का मरना व्यर्थ होता।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 8-10


Thursday, May 15, 2014

दूर और निकट


   दो स्वस्थ आँखें होना ही स्पष्टता से देख पाने के लिए काफी नहीं है - यह मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभव से जाना है। मेरी आंख का पर्दा खराब हो गया था जिसके लिए मुझे कई ऑपरेशनों से होकर निकलना पड़ा। उन ऑपरेशनों के द्वारा मेरी दोनों आँखों को ठीक से दिखाई तो देने लगा, लेकिन वे दोनों परस्पर ताल-मेल के साथ कार्य नहीं कर रहीं थीं। एक आँख से दूर की चीज़ें स्पष्ट दिखती थीं तो दूसरी से पास की, और एक साथ मिलकर कार्य करने की बजाए, दोनों ही एक दूसरे पर हावी होने के प्रयास में रहती थीं, जिससे मैं किसी भी चीज़ पर दृष्टि केंद्रित कर के उसे स्पष्ट देख नहीं पाती थी। अन्ततः 3 महीने के अंतराल के बाद मुझे एक नया चश्मा दिया गया जिसकी सहायता से मैं दृष्टि केंद्रित कर के स्पष्ट देखने पाई।

   कुछ ऐसा ही परमेश्वर के प्रति हमारे दृष्टिकोण के साथ भी होता है। कुछ लोग परमेश्वर को निकटता से जान पाने पर ही - अर्थात उसे अपने प्रतिदिन के जीवन में निकटता से स्क्रीय अनुभाव कर के ही उस पर अपना ध्यान केंद्रित करने पाते हैं। अन्य लोगों को दूर का परमेश्वर ही स्पष्ट दिखाई देता है - अर्थात वे उसे किसी भी सोच-विचार से ऊपर और महान, सारी सृष्टि पर सामर्थी, प्रभावी और महिमामय जान कर ही उस पर केंद्रित रहने पाते हैं।

   जब इन दोनों दृष्टिकोणों में विवाद हो और सहमति नहीं बने, तब परमेश्वर का वचन बाइबल ही मेरे उस चश्मे के समान कार्य करती है, दोनों दृष्टिकोणों में तालमेल बनाती है और यह दिखाती है कि दोनों ही दृष्टिकोण सही हैं। राजा दाऊद ने अपने लिखे भजन - भजन 145 में दोनों ही दृष्टिकोणों को रखा है। वह कहता है: "यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है" (पद 3); और फिर यह भी कि, "जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है" (पद 18)।

   हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमारे इतना निकट है कि हमारी हर दशा को जानता है और हमारी हर प्रार्थना को सुनता है; लेकिन साथ ही इतना महान, महिमामय और सामर्थी है कि हमारी हर समस्या एवं आवश्यकता से कहीं बड़ा और उन्हें पूरा करने की क्षमता रखने वाला है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर इतना बड़ा है कि हमारी छोटी से छोटी आवश्यकता को समझ सकता है, उसे पूरा कर सकता है।

देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं? - व्यवस्थाविवरण 4:7

बाइबल पाठ: भजन 145
Psalms 145:1 हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा। 
Psalms 145:2 प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूंगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूंगा। 
Psalms 145:3 यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है। 
Psalms 145:4 तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा। 
Psalms 145:5 मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा। 
Psalms 145:6 लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूंगा। 
Psalms 145:7 लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण कर के उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे। 
Psalms 145:8 यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 145:9 यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है। 
Psalms 145:10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे! 
Psalms 145:11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे; 
Psalms 145:12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें। 
Psalms 145:13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी। 
Psalms 145:14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। 
Psalms 145:15 सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है। 
Psalms 145:16 तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है। 
Psalms 145:17 यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है। 
Psalms 145:18 जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। 
Psalms 145:19 वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है। 
Psalms 145:20 यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है। 
Psalms 145:21 मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 5-7


Wednesday, May 14, 2014

जीवन का जल


   एक व्यक्ति ने, जो पश्चिमी टेक्सस के एक खेती-किसानी करने वाले परिवार में बड़ा हुआ था, मुझे अपने खलिहान के निकट लगी एक जर्जर पवन-चक्की के बारे में बताया था। उस पवन-चक्की के चलने से ही पानी को उसके घर तक लाने का पंप चलता था, और वही मीलों दूर तक पानी का एकमात्र स्त्रोत थी। जब हवा तेज़ चल रही होती थी तो वह पवन-चक्की भलि-भांति चलती थी और अच्छे से पानी उपलब्ध कराती थी, परन्तु जब हवा धीमी होती थी तो जर्जर अवस्था के कारण पवन-चक्की घूम कर हवा के रुख के अनुकूल अपने आप नहीं हो पाती थी इसलिए नहीं चल पाती थी; तब उसे हाथ से घुमा कर ऐसी स्थिति में लाना पड़ता जहाँ से हवा द्वारा उसके पंखे चल सकें और पानी के पंप को चला सकें जिससे घर को पानी मिल सके। पानी मिलने के लिए पवन-चक्की का हवा के अनुकूल दिशा में होना अनिवार्य था।

   जब मैं दूर-दराज़ के इलाकों में कार्य कर रहे पस्टरों से मिलता हूँ, और उनकी सनस्याएं सुनता हूँ तो मुझे उस पवन-चक्की की याद आती है। बहुत से पास्टर ऐसे होते हैं जिन्हें लगता है कि वे बिलकुल अकेले और बेसहारा रह गए हैं - ऐसे देख-रेख करने वाले जिनकी अपनी देख-रेख करने वाला कोई नहीं है। परिणाम यह होता है कि अपनी निराश के कारण वे अपने चर्च के लोगों को जीवन का जल अर्थात परमेश्वर का वचन ठीक से नहीं देने पाते। उन्हें मैं उस पवन-चक्की के बारे में बताता हूँ, और समझाता हूँ कि उन्हें भी अपने आप को ऐसी स्थिति में लाना है, अर्थात प्रभु यीशु और उसके वचन की ओर उन्मुख होना है जिससे उनमें से होकर परमेश्वर का वचन लोगों तक पहुँच सके। जब वे परमेश्वर की ओर सही रीति से होंगे, तब परमेश्वर उन में होकर अपने जीवनदायक वचन को लोगों तक भी पहुँचा सकेगा।

   जो बात उन पास्टरों के लिए सही है, वही हम सब मसीही विश्वासियों के लिए भी उतनी ही सही है, क्योंकि प्रभु की सेवकाई हमारे अन्दर से निकल कर संसार के लोगों में प्रवाहित होती है। प्रभु यीशु ने कहा, "जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी" (यूहन्ना 7:38)। जब परमेश्वर हमारे अन्दर की गहराइयों से होकर बोलता है, तब ही हम दूसरों के जीवनों को छूने और प्रभावित करने पाते हैं। दूसरों को तरोताज़ा करते रहने के लिए हमें स्वयं भी उस जीवन के जल के स्त्रोत के साथ सही रीति से जुड़े रहना है। - डेविड रोपर


जब आप जीवन के संघर्षों में थकने लगें तो प्रभु यीशु को अपनी सामर्थ का स्त्रोत बना लीजिए।

यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। - यूहन्ना 4:10

बाइबल पाठ: गलतियों 6:6-10
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 1-4


Tuesday, May 13, 2014

चिंता


   आँकड़े पेचीदा होते हैं, वे हमें जानकारी तो देते हैं, लेकिन कभी कभी वे हमें उन लोगों के प्रति संवेदनविहीन भी बना देते हैं जिनकी जानकारी वे हमें दे रहे हैं। मुझे इस बात का एहसास अभी हाल ही में हुआ जब मैंने एक जानकारी देने वाला आँकड़ा पढ़ा: संसार भर में प्रति वर्ष डेढ़ करोड़ लोग भूख से मर जाते हैं। यह कंपकंपा देने वाली बात है, और उनके लिए जो बहुतायत के समाज में रहते हैं इसे समझना कठिन है। संसार भर में लाखों बच्चे अपने पाँचवे जन्म दिन से पहले ही मर जाते हैं, और इन मौतों में से एक तिहाई भूख के कारण होती हैं। ये संख्याएं स्तब्ध कर देने वाली हैं, लेकिन ये आंकड़ों से बढ़कर भी कुछ हैं - ये मनुष्य हैं, वे मनुष्य जिन्हें परमेश्वर ने बनाया, जिनके उद्धार के लिए अपने एकलौते पुत्र को बलिदान किया और जिनसे परमेश्वर उतना ही प्रेम करता है जितना वह मुझ से और आप से करता है।

   परमेश्वर पिता के इस प्रेम को हम उन लोगों तक पहुँचा सकते हैं, उन लोगों की सहायता करने तथा उनकी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक होने के द्वारा। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "जो कंगाल पर अंधेर करता, वह उसके कर्ता की निन्दा करता है, परन्तु जो दरिद्र पर अनुग्रह करता, वह उसकी महिमा करता है" (नीतिवचन 14:31)। स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा इन ज़रूरतमंद लोगों की सहायता के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों में स्वयंसेवक बनकर, उन लोगों के लिए नौकरी की तलाश करने में उनकी सहायता कर के, उन्हें कोई रोज़गार कमाने की कला सिखा कर, स्कूल जाने वाले गरीब बच्चों के लिए भोजन का प्रबन्ध कर के, भूख से पीड़ित लोगों के लिए भोजन सामग्री दान कर के, जहाँ स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है उनके लिए स्वच्छ जल के कुएँ खोदने के लिए आर्थिक सहायाता देकर, इत्यादि ऐसे अनेक तरीके हैं जिनके द्वारा हम उन के सहायक हो सकते हैं और वह प्रेम जो परमेश्वर ने हम से किया है, उसकी अनुभूति उन्हें भी करवा सकते हैं।

   इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने का बीड़ा उठा कर हम परमेश्वर के उनके प्रति प्रेम का आदर करते हैं, उनके लिए उसकी चिंता और देख-रेख में संभागी होते हैं। यह सहायता करना का एक और कारण से भी हम मसीही विश्वासियों के लिए आवश्यक है - जब भूख से कुलबुला रहे पेट और अंतड़ियों का शोर उन लोगों पर हावी नहीं होगा तो शायद प्रभु यीशु में मिलने वाली पाप क्षमा और सेंत-मेंत उद्धार का सुसमाचार वे लोग बेहतर सुन और समझ भी सकेंगे। - बिल क्राउडर


हम अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम को जितना अधिक समझने पाएंगे, उतना ही उसे दूसरों को पहुँचाने का प्रयास भी करेंगे।

जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा। - नीतिवचन 19:17

बाइबल पाठ: मत्ती 25:31-46
Matthew 25:31 जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा। 
Matthew 25:32 और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा। 
Matthew 25:33 और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाई और खड़ी करेगा। 
Matthew 25:34 तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है। 
Matthew 25:35 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया। 
Matthew 25:36 मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए। 
Matthew 25:37 तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया? 
Matthew 25:38 हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए? 
Matthew 25:39 हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? 
Matthew 25:40 तब राजा उन्हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया। 
Matthew 25:41 तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है। 
Matthew 25:42 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया। 
Matthew 25:43 मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया; मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहिनाए; बीमार और बन्‍दीगृह में था, और तुम ने मेरी सुधि न ली। 
Matthew 25:44 तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हम ने तुझे कब भूखा, या प्यासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्‍दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल न की? 
Matthew 25:45 तब वह उन्हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं कि तुम ने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया। 
Matthew 25:46 और यह अनन्त दण्‍ड भोगेंगे परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 8-10