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सोमवार, 11 मार्च 2019

सहायता



      विपत्ति में सहायता माँगने के लिए निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय संकेत “May Day” (मे-डे) सदा ही तीन बार – “मे-डे, मे-डे, मे-डे” दोहराया जाता है जिससे खतरनाक आपातकाल में परिस्थति को भली-भांति जीवन के लिए खतरे की स्थिति समझा जा सके। यह संकेत सन 1923 में फ्रेड्रिक स्टैनली मौक्फोर्ड द्वारा बनाया गया था, जो उस समय लंडन के क्रौएडन एयरपोर्ट पर वरिष्ठ रेडियो अफसर थे। अब बन्द किए जा चुके उस हवाई-अड्डे पर फ्रांस के पेरिस शहर से अनेकों उड़ानें आया करती थीं। नैशनल मैरिटाइम म्यूज़ियम के अनुसार मौक्फोर्ड ने यह शब्द फ्रांसीसी शब्द “m’aidez” जिसका अर्थ होता है “मेरी सहायता कीजिए” से बनाया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि राजा दाऊद, अपने जीवन भर खतरनाक जोखिम भरी परिस्थितियों का, जिनसे निकल पाने का मार्ग सूझ नहीं पड़ता था, सामना करता रहा। फिर भी हम भजन 86 में पढ़ते हैं कि अपने सबसे कठिन समय में दाऊद का भरोसा प्रभु पर था: “हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा” (पद 6, 7)।

      दाऊद ने तात्कालिक खतरे से आगे के लिए भी परमेश्वर से मार्गदर्शन माँगा, “हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं” (पद 11)। जब विपत्ति टल गई, तब भी वह परमेश्वर के साथ ही चलते रहना चाहता था।

      हमारी सबसे अधिक कठिन परिस्थितियाँ हमारे लिए परमेश्वर के साथ और प्रगाढ़ संबंध विकसित करने के मार्ग बन सकती हैं। इसका आरंभ हमारी कठिनाईयों में उसे सहायता के लिए पुकारने के द्वारा होता है। फिर सहायता के बाद उससे मार्गदर्शन पाने के अनुरोध के द्वारा यह और आगे बढ़ता है। - डेविड मैक्कैस्लैंड


परमेश्वर सहायता के लिए हमारी पुकार को सुनता है और हमें अपने मार्ग में लिए चलता है।

जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

बाइबल पाठ: भजन 86:1-13
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं।
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर।
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं।
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं।
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है।
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन।
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और न किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं।
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी।
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है।
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं।
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा।
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।  

एक साल में बाइबल:  
  • व्यवस्थाविवरण 14-16
  • मरकुस 12:28-44



मंगलवार, 11 सितंबर 2018

प्रार्थना



      सितंबर 11, 2001 के दिन, स्टैनली प्रेमनाथ वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के साउथ टावर की 81वीं मंज़िल पर कार्य कर रहा था जब उसने एक वायुयान को सीधे अपनी ओर आते देखा। स्टैनली ने एक डेस्क के नीचे बचाव के लिए कूदते हुए प्रार्थना की: “प्रभु, मुझ से यह नहीं होगा! आप ही संभालें!” स्टैनली उस वायुयान के टकराने के कारण गिरने वाले मलबे की दीवार के पीछे फंस गया। वह प्रार्थना करता और सहायता के लिए पुकारता रहा और एक अन्य दफ्तर के कर्मचारी ब्रायन क्लार्क ने उसकी आवाज़ को सुना और सहायता के लिए आया। मलबे और अन्धकार में से होते हुए वे दोनों 80 मंज़िल नीचे उतरकर बाहर आ गए।

      जब दाऊद भयानक जोखिमों का सामना कर रहा था, उसने परमेश्वर से सहायता की प्रार्थना की। युद्ध में शत्रुओं का सामना करते समय वह परमेश्वर की निकटता के लिए आश्वस्त होना चाहता था। मन से निकली एक विनती में दाऊद ने कहा, “मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं;...हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह; हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर” (भजन 71:3, 12)।

      परमेश्वर ने हम से यह वायदा तो नहीं किया है कि वह हमें प्रत्येक कठिन परिस्थिति से बचा लेगा। परन्तु हम इस बात के लिए आश्वस्त रह सकते हैं कि हम परमेश्वर हमारी प्रत्येक प्रार्थना को सुनता है, और हर परिस्थिति में हमारे साथ बना रहता है, हमें दृढ़ और स्थिर करता रहता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के निकट होना हमारी चेतन सुरक्षा है। 
अंधियारे में एक बच्चा अपने पिता के हाथ को थामने से सुरक्षित अनुभव करता है। 
- चार्ल्स हैडडन स्पर्जन

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 71:1-12
Psalms 71:1 हे यहोवा मैं तेरा शरणागत हूं; मेरी आशा कभी टूटने न पाए!
Psalms 71:2 तू तो धर्मी है, मुझे छुड़ा और मेरा उद्धार कर; मेरी ओर कान लगा, और मेरा उद्धार कर!
Psalms 71:3 मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं; तू ने मेरे उद्धार की आज्ञा तो दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ ठहरा है।
Psalms 71:4 हे मेरे परमेश्वर दुष्ट के, और कुटिल और क्रूर मनुष्य के हाथ से मेरी रक्षा कर।
Psalms 71:5 क्योंकि हे प्रभु यहोवा, मैं तेरी ही बाट जोहता आया हूं; बचपन से मेरा आधार तू है।
Psalms 71:6 मैं गर्भ से निकलते ही, तुझ से सम्भाला गया; मुझे मां की कोख से तू ही ने निकाला; इसलिये मैं नित्य तेरी स्तुति करता रहूंगा।
Psalms 71:7 मैं बहुतों के लिये चमत्कार बना हूं; परन्तु तू मेरा दृढ़ शरण स्थान है।
Psalms 71:8 मेरे मुंह से तेरे गुणानुवाद, और दिन भर तेरी शोभा का वर्णन बहुत हुआ करे।
Psalms 71:9 बुढ़ापे के समय मेरा त्याग न कर; जब मेरा बल घटे तब मुझ को छोड़ न दे।
Psalms 71:10 क्योंकि मेरे शत्रु मेरे विषय बातें करते हैं, और जो मेरे प्राण की ताक में हैं, वे आपस में यह सम्मति करते हैं, कि
Psalms 71:11 परमेश्वर ने उसको छोड़ दिया है; उसका पीछा कर के उसे पकड़ लो, क्योंकि उसका कोई छुड़ाने वाला नहीं।
Psalms 71:12 हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह; हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर!


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 10-12
  • 2 कुरिन्थियों 4



गुरुवार, 31 मई 2018

साहस और विश्वास



   चीनी दार्शनिक हैन फैजी ने जीवन के बारे कहा, “तथ्यों को जानना तो सरल है; उन तथ्यों के आधार पर कार्य करना कठिन होता है।”

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक स्थान पर हम पाते हैं कि एक धनी जवान व्यक्ति प्रभु यीशु के पास इस प्रश्न के साथ आया: “हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं?” (मरकुस 10:17)। वह मूसा द्वारा दी गई व्यवस्था को जानता था और उसका कहना था कि वह उस व्यवस्था का पालन लड़कपन से करता आया था। परन्तु प्रभु यीशु के उत्तर ने उस जवान को निराश कर दिया, क्योंकि प्रभु ने उससे कहा कि अपनी सारी संपत्ति बेचकर उस धन को कंगालों में वितृत कर दे और स्वयं प्रभु के पीछे हो ले (पद 21)। इन चंद शब्दों के द्वारा प्रभु यीशु ने उसके जीवन के उस तथ्य को उजागर कर दिया जिसे वह व्यक्ति स्वीकार करना नहीं चाहा रहा था – उसका अपनी दौलत पर भरोसा और उस दौलत से प्रेम, प्रभु पर किए गए भरोसे और प्रेम से कहीं अधिक था। प्रभु यीशु के पीछे चलने के लिए दौलत की सुरक्षा को त्यागना बहुत बड़ा जोखिम था, जिसे वह उठाना नहीं चाहता था, और वह उदास होकर खाली हाथ ही वापस चला गया (पद 22)।

   प्रभु क्या कहना चाह रहा था? प्रभु के अपने शिष्य चकित रह गए और पूछने लगे कि “फिर किसका उद्धार हो सकता है?” प्रभु का उत्तर था, “मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है” (पद 27)। प्रभु के पीछे चलने के लिए साहस और विश्वास की आवश्यकता होती है। इसके बिना उसे प्रसन्न कर पाना असंभव है: “और विश्वास बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है, क्योंकि परमेश्वर के पास आने वाले को विश्वास करना चाहिए, कि वह है; और अपने खोजने वालों को प्रतिफल देता है” (इब्रानियों 11:6)। - पो फैंग चिया


उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, 
तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा। - प्रेरितों 16:31

कि यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकर अंगीकार करे और अपने मन से विश्वास करे, कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा। - रोमियों 10:9

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-27
Mark 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं?
Mark 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर।
Mark 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।
Mark 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं।
Mark 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले।
Mark 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था।
Mark 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों का परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!
Mark 10:24 चेले उस की बातों से अचम्भित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालको, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है!
Mark 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है!
Mark 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है?
Mark 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26



बुधवार, 6 सितंबर 2017

क्रमशः


    मेरी युवावस्था में, 1950 के दशक में, मैं अकसर शनिवार की दोपहर को स्थानीय सिनेमा हॉल में फिल्म देखने जाया करता था। वहाँ कार्टून और मुख्य फिल्म के अतिरिक्त एक रोमाँचक सीरियल भी दिखाया जाता था। इस रोमाँचक सीरियल के प्रदर्शन का अन्त सदा ही एक ऐसे बिन्दु पर आकर होता था जिसमें नायक या नायिका किसी असंभव स्थिति में फंसे होते थे और उनके बच निकलने का कोई उपाय समझ में नहीं आ रहा होता था। परन्तु फिर भी प्रत्येक वृतांत का अन्त होता था "क्रमशः" शब्द से, अर्थात कहानी अभी आगे बढ़ेगी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड का एक नायक पौलुस खतरों और जान-जोखिम में डालने वाली परिस्थितियों से अनजान नही था। प्रभु यीशु मसीह के जगत का उद्धाकर्ता होने के सुसमाचार के प्रचार और प्रसार के लिए वह जेल गया, पीटा और पत्थरवाह किया गया, और समुद्री यात्राओं में जहाज़ के टूटने और जान का खतरा होने को भी अनुभव किया। वह यह निश्चित जानता था कि एक दिन उसकी मृत्यु होनी ही है, परन्तु उसने इसे कभी अपनी जीवन-गाथा का अन्त नहीं माना। पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों को लिखा, "और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तक वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया" (1 कुरिन्थियों 15:54)। पौलुस को अपने जीवन भर धुन लगी रही थी कि वह सारे संसार के सभी लोगों के उद्धार के लिए प्रभु यीशु मसीह द्वारा क्रूस पर अपने प्राणों का बलिदान देने की बात सब को बताए, जिससे प्रभु यीशु पर लाए गए विश्वास और उसे किए गए समर्पण के द्वारा लोग अपने पापों की क्षमा और उद्धार पा सकें, परमेश्वर के साथ अनन्त जीवन जीने का निश्चय पा सकें।

   हम उन सिरियलों के नायक-नायिका के समान नहीं हैं जो सदा निश्चित मृत्यु से बच निकलते थे। हमारे जीवनों में निश्चित ही वह दिन आएगा जब हमारे पार्थिव जीवन का अन्त होगा - चाहे मृत्यु के द्वारा, चाहे प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के द्वारा। परन्तु जितनों ने प्रभु यीशु पर विश्वास कर के उससे अपने पापों की क्षमा माँग ली है, अपना जीवन उन्हें समर्पित कर दिया है, उन सब के लिए पार्थिव जीवन का अन्त जीवन-गाथा की समाप्ति नहीं है, वरन "क्रमशः" है, क्योंकि उनका जीवन अनन्तकाल तक परमेश्वर के साथ चलता रहेगा; उनके स्वर्गीय जीवन और अनन्त आनन्द का कभी अन्त नहीं होगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


जीवन और मृत्यु, दोनों में प्रभु यीशु मसीह 
हमारे जीवन की आशा और आश्वासन है।

वह मृत्यु को सदा के लिये नाश करेगा, और प्रभु यहोवा सभों के मुख पर से आंसू पोंछ डालेगा, और अपनी प्रजा की नामधराई सारी पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा कहा है। - यशायह 25:8 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:50-58
1 Corinthians 15:50 हे भाइयों, मैं यह कहता हूं कि मांस और लोहू परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश अविनाशी का अधिकारी हो सकता है। 
1 Corinthians 15:51 देखो, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:52 और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूंकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जांएगे, और हम बदल जाएंगे। 
1 Corinthians 15:53 क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले। 
1 Corinthians 15:54 और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया। 
1 Corinthians 15:55 हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? 
1 Corinthians 15:56 हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। 
1 Corinthians 15:57 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। 
1 Corinthians 15:58 सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 148-150
  • 1 कुरिन्थियों 15:29-58


शनिवार, 24 जून 2017

जोखिम


   जब मैं नाव चलाना सीख रहा था तो मुझे नाव तक पहुँचने के लिए पानी पर तैरते हुए एक बहुत अस्थिर तखते से होकर उस नाव तक पहुँचना होता था जिसमें हम नाव चलाना सीख रहे थे, और मुझे इससे बहुत घबराहट होती थी, मुझे यह कदापि पसंद नहीं था। मेरा संतुलन कमज़ोर है, और इसलिए मुझे सदा यही भय सताता था कि कहीं मैं उस अस्थिर तखते और नाव के बीच में पानी में न गिर जाऊँ। अपने भय के कारण मैं नाव चलाना सीखना लगभग छोड़ ही बैठा था; परन्तु मेरे प्रशिक्षक ने मेरा उत्साह बढ़ाया, और मुझ से कहा, "अपनी दृष्टि बस मुझ पर लगाए रखो; यदि तुम गिरे भी, तो भी तुम्हें थामने और बचाने के लिए मैं हूँ।" मैंने वही किया जो उसने मुझे करने को कहा था, और आज मैं गर्व से कह सकता हूँ कि मेरे पास पाल-नौका चला लेने का बुनियादी स्तर का प्रमाण-पत्र है।

   क्या आप भी जोखिम उठाने से घबराते हैं? हम में से अनेकों अपनी आरामदायक स्थिति से हटने का जोखिम इसलिए नहीं उठाते कि कहीं हमें कोई चोट न लग जाए, कहीं हम असफल न हो जाएं. कहीं किसी के सामने हमारा मज़ाक न बन जाए। परन्तु यदि हम भय को अपने ऊपर हावी हो लेने देंगे, तो बस उसी से बंध कर रह जाएंगे और कभी कुछ नहीं कर पाएंगे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में पतरस के पानी पर चलने की रोमाँचक कहानी, और क्यों पानी पर कुछ कदम चलकर भी पतरस फिर भी डूबने लगा (मत्ती 14:22-33) प्रचारकों के लिए प्रचार का एक लोकप्रीय मुद्दा रही है। परन्तु मुझे ध्यान नहीं आता कि मैंने कभी किसी को उन शेष शिष्यों का उल्लेख करते सुना है, जिन्होंने पतरस के समान जोखिम उठाने का प्रयास किया ही नहीं। मेरी राय में, सफल होने वाला एकमात्र शिष्य पतरस ही था, क्योंकि उसने प्रभु की बात पर विश्वास किया और उसके अनुसार प्रयास भी किया। असफल तो वे थे जिन्होंने कभी प्रयास ही नहीं किया, जिन्होंने प्रभु के कथन को स्वीकार करने का जोखिम उठाना उचित ही नहीं समझा।

   प्रभु यीशु ने हमारे लिए सब कुछ दाँव पर लगा दिया, अपना बलिदान दे दिया। क्या आज हम उसके लिए, उसकी आज्ञाकारिता में कुछ जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं? - मेरियन स्ट्राउड


जीवन या तो निर्भीक रोमांच है, या फिर कुछ भी नहीं। - हेलेन कैलर

तब यीशु ने अपने चेलों से कहा; यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे, वह उसे खोएगा; और जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे पाएगा। यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा? - मत्ती 16:24-26

बाइबल पाठ: मत्ती 14:22-33
Matthew 14:22 और उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढ़ाया, कि वे उस से पहिले पार चले जाएं, जब तक कि वह लोगों को विदा करे। 
Matthew 14:23 वह लोगों को विदा कर के, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था। 
Matthew 14:24 उस समय नाव झील के बीच लहरों से डगमगा रही थी, क्योंकि हवा साम्हने की थी। 
Matthew 14:25 और वह रात के चौथे पहर झील पर चलते हुए उन के पास आया। 
Matthew 14:26 चेले उसको झील पर चलते हुए देखकर घबरा गए! और कहने लगे, वह भूत है; और डर के मारे चिल्ला उठे। 
Matthew 14:27 यीशु ने तुरन्त उन से बातें की, और कहा; ढाढ़स बान्‍धो; मैं हूं; डरो मत। 
Matthew 14:28 पतरस ने उसको उत्तर दिया, हे प्रभु, यदि तू ही है, तो मुझे अपने पास पानी पर चलकर आने की आज्ञा दे। 
Matthew 14:29 उसने कहा, आ: तब पतरस नाव पर से उतरकर यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा। 
Matthew 14:30 पर हवा को देखकर डर गया, और जब डूबने लगा, तो चिल्लाकर कहा; हे प्रभु, मुझे बचा। 
Matthew 14:31 यीशु ने तुरन्त हाथ बढ़ाकर उसे थाम लिया, और उस से कहा, हे अल्प-विश्वासी, तू ने क्यों सन्‍देह किया? 
Matthew 14:32 जब वे नाव पर चढ़ गए, तो हवा थम गई। 
Matthew 14:33 इस पर जो नाव पर थे, उन्होंने उसे दण्‍डवत कर के कहा; सचमुच तू परमेश्वर का पुत्र है। 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 1-2
  • प्रेरितों 7:22-43


मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

खतरे और चुनौतियाँ


   टेलिविज़न पर लाखों लोग देख रहे थे, निक वॉलेन्डा ने न्याग्रा जल-प्रपात के एक से दूसरे छोर तक तने 2 इंच मोटे और 1800 फीट लंबे तार पर चलकर उसे पार किया। यह करने के लिए निक ने यथासंभव सुरक्षा रखी थी। उतनी ऊँचाई पर नीचे तेज़ बहाव वाले पानी को तार पर चलकर पार करने के इस जोखिम भरे कार्य के रोमांच तथा खतरों को कुछ और बातें बढ़ा रही थीं - घना कोहरा जो निक कीदृष्टि को धूँधला कर रहा था, तेज़ हवा जो निक के सन्तुलन को बिगाड़ रही थी और जल-प्रपात से उठती पानी की बौछार जो तार को गीला करके निक के पाँव की पकड़ को चुनौती दे रही थी। निक ने बाद में बताया, इन खतरों और चुनौतियों में, या इनके कारण, वह अपने इस प्रयास में बहुत प्रार्थना और परमेश्वर की आराधना करता रहा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी अनेक स्थानों पर खतरों और चुनौतियों में परमेश्वर के लोगों द्वारा परमेश्वर की आराधना का उल्लेख है। जब राजा यहोशापात के विरुद्ध एक बड़ी सेना उठ कर आई तो राजा ने अपनी प्रजा समेत अपने आप तथा सारी परिस्थिति को परमेश्वर के हाथ में सौंप दिया और उससे मार्गदर्शन माँगा (2 इतिहास 20:1-3)। परमेश्वर के निर्देशानुसार यहोशापात अपनी सेना को लेकर युद्ध की भूमि पर गया, और वहां उसकी सेना के आगे आगे एक दल परमेश्वर की स्तुति करते हुए चला। उनकी इस आराधना का प्रभाव था कि यहोशापात के विरुद्ध आने वाली सेना के सैनिक एक दूसरे पर ही हमला करने लगे और एक दूसरे को ही मार डाला। उस दिन एक बार फिर इस्त्राएलियों ने परमेश्वर पर विश्वास को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण पाठ सीखा।

   खतरे और चुनौती की परिस्थिति में परमेश्वर की स्तुति एवं आराधना करना हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति के विपरीत हो सकता है क्योंकि हमारी स्वाभाविक प्रवृत्ति है ऐसे में चिंता करना, बचाव की योजना बनाना और आत्म-सुरक्षा के इंतिज़ाम करना। लेकिन ऐसी परिस्थित्यों में आराधना और स्तुति हमारे मनों को शान्त रखती है और हमें अपने आप पर भरोसा रखने की बजाए परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखने में सहायक होती है। खतरों और चुनौतियों में आराधना और स्तुति करना हमें वही पाठ सिखाता है जो उस दिन इस्त्राएलियों ने सीखा - "...तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है" (2 इतिहास 20:15)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हमारे सामने चाहे जो भी हो, परमेश्वर सदा हमारे साथ और सहायता में रहता है।

क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा तुम्हारे शत्रुओं से युद्ध करने और तुम्हें बचाने के लिये तुम्हारे संग चलता है। - व्यवस्थाविवरण 20:4 

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 20:1-3, 14-23
2 Chronicles 20:1 इसके बाद मोआबियों और अम्मोनियों ने और उनके साथ कई मूनियों ने युद्ध करने के लिये यहोशापात पर चढ़ाई की। 
2 Chronicles 20:2 तब लोगों ने आकर यहोशापात को बता दिया, कि ताल के पार से एदोम देश की ओर से एक बड़ी भीड़ तुझ पर चढ़ाई कर रही है; और देख, वह हसासोन्तामार तक जो एनगदी भी कहलाता है, पहुंच गई है। 
2 Chronicles 20:3 तब यहोशपात डर गया और यहोवा की खोज में लग गया, और पूरे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया। 
2 Chronicles 20:14 तब आसाप के वंश में से यहजीएल नाम एक लेवीय जो जकर्याह का पुत्र और बनायाह का पोता और मत्तन्याह के पुत्र यीएल का परपोता था, उस में मण्डली के बीच यहोवा का आत्मा समाया। 
2 Chronicles 20:15 और वह कहने लगा, हे सब यहूदियो, हे यरूशलेम के रहने वालों, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यों कहता है, तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है। 
2 Chronicles 20:16 कल उनका साम्हना करने को जाना। देखो वे सीस की चढ़ाई पर चढ़े आते हैं और यरूएल नाम जंगल के साम्हने नाले के सिरे पर तुम्हें मिलेंगे। 
2 Chronicles 20:17 इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा। 
2 Chronicles 20:18 तब यहोशापात भूमि की ओर मुंह कर के झुका और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने यहोवा के साम्हने गिर के यहोवा को दण्डवत किया। 
2 Chronicles 20:19 और कहातियों और कोरहियों में से कुछ लेवीय खड़े हो कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति अत्यन्त ऊंचे स्वर से करने लगे। 
2 Chronicles 20:20 बिहान को वे सबेरे उठ कर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े हो कर कहा, हे यहूदियो, हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे। 
2 Chronicles 20:21 तब उसने प्रजा के साथ सम्मति कर के कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान हो कर हथियारबन्दों के आगे आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएं, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, कि यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है। 
2 Chronicles 20:22 जिस समय वे गाकर स्तुति करने लगे, उसी समय यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियों और सेईर के पहाड़ी देश के लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए। 
2 Chronicles 20:23 क्योंकि अम्मोनियों और मोआबियों ने सेईर के पहाड़ी देश के निवासियों डराने और सत्यानाश करने के लिये उन पर चढ़ाई की, और जब वे सेईर के पहाड़ी देश के निवासियों का अन्त कर चुके, तब उन सभों ने एक दूसरे के नाश करने में हाथ लगाया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2


रविवार, 30 अगस्त 2015

जोखिम


   सितंबर 7, 1838 को ग्रेस डार्लिंग नामक एक महिला ने, जो समुद्र के किनारे के खतरों के प्रति सचेत करने के लिए बनाए गए प्रकाश सतंभ के रखवाले की बेटी थी, समुद्र में डूबते हुए जलपोत और बचने के लिए किनारे की ओर तैरने का प्रयास करते हुए लोगों को देखा। अपने पिता के साथ मिलकर ग्रेस लगभग एक मील दूर तक नाव को खेकर गई और बहुत से लोगों को बचाया। अपने जीवन को जोखिम में डालकर दूसरों के प्रति अनुकंपा दिखाने और स्थिर हाथों से उनकी जान बचाने के प्रयास के लिए ग्रेस प्रसिद्ध हो गई।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने एक अन्य स्त्री-पुरुष की जोड़ी के बारे में उल्लेख किया जिन्होंने दूसरों की सहायता के लिए जोखिम उठाए। पौलुस ने प्रिसका एवं अक्वीला के बारे में लिखा, जो प्रभु यीशु में उसके सहकर्मी थे; पौलुस ने उनके विषय में लिखा कि "उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं" (रोमियों 16:4)।

   पौलुस ने यह तो स्पष्ट नहीं लिखा कि उन दोनों ने उसके लिए क्या जोखिम उठाया, लेकिन पौलुस के मसीही सेवकाई के जीवन में उसे जैसे पीटे जाने, बन्दीगृह में डाले जाने, जलयान के समुद्र में टूटने, जान की धमकी दिए जाने आदि बातों के द्वारा जोखिम उठाने पड़े थे, उससे यह समझना कठिन नहीं है कि उस दंपत्ति को अपने मित्र पौलुस के लिए कैसे जोखिम को उठाना पड़ा होगा। संभवतः उन दोनों के लिए पौलुस की जान बचाना उनकी अपनी सुरक्षा से बढ़कर था।

   दुसरों को खतरों से, वो चाहे शारीरिक हों या आत्मिक, बचाने का प्रयास करना अकसर जोखिम भरा होता है। लेकिन जब हम यह जोखिम उठाकर दूसरों की सहायातार्थ अपना हाथ बढ़ाते हैं तो हम अपने तथा सारे जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के मन को, जिसने हमारे लिए अपना सब कुछ दे दिया, प्रतिबिंबित करते हैं। - डेनिस फिशर


यदि आप बचा लिए गए हैं तो फिर आप औरों के बचाए जाने के लिए प्रयास करेंगे।

इसलिये, जैसा मसीह ने भी परमेश्वर की महिमा के लिये तुम्हें ग्रहण किया है, वैसे ही तुम भी एक दूसरे को ग्रहण करो। - रोमियों 15:7

बाइबल पाठ: रोमियों 16:1-7
Romans 16:1 मैं तुम से फीबे की, जो हमारी बहिन और किंख्रिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
Romans 16:2 कि तुम जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो; और जिस किसी बात में उसको तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।ज़ 
Romans 16:3 प्रिसका और अक्विला को जो मसीह यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्कार। 
Romans 16:4 उन्होंने मेरे प्राण के लिये अपना ही सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। 
Romans 16:5 और उस कलीसिया को भी नमस्कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्कार। 
Romans 16:6 मरियम को जिसने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्कार। 
Romans 16:7 अन्द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्कार।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 129-131
  • 1 कुरिन्थियों 11:1-16


बुधवार, 24 जून 2015

अनुभव


   जब वायु-यान चालकों का प्रशिक्षण होता है तो उन्हें कई घंटे उड़ान का सा अनुभव देने वाली मशीन - फ्लाईट सिमुलेटर पर सीखने में बिताने पड़ते हैं। ये सिमुलेटर देखने में विमान के चालक कक्ष जैसे ही बने होते हैं और उनमें उस कक्ष के समान ही सभी उपकरण लगे होते हैं। प्रशिक्षण लेने वाले के समक्ष उस सिमुलेटर में उड़ान जैसे कृत्रिम अनुभव रखे जाते हैं और उसे उन अनुभवों में होकर वायुयान चलाना सीखना होता है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशिक्षार्थी ज़मीन पर ही मशीन के अन्दर बैठा होता है, और यदि उससे उस कृत्रिम वायुयान का कोई नुकसान या दुर्घटना भी हो जाए तो भी वास्तव में कोई हानि नहीं हुई होती। सिखाने के लिए ये सिमुलेटर एक बहुत कारगर यंत्र हैं और वायुयान चालकों को तैयार करने में इनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, परन्तु फिर भी ये वास्तविक उड़ान जैसी हर परिस्थिति को बना पाने और वैसा अनुभव दे पाने में सक्षम नहीं हैं। वैसा अनुभव तो चालक को वास्तविक वायुयान में बैठकर और अन्ततः वास्तविक उड़ान भरने से ही मिलता है।

   जीवन भी अनेक रीति से ऐसा ही है - उसे कृत्रिम अनुभवों के आधार पर नहीं जीया जा सकता। ऐसा कोई भी पूर्ण्तया सुरक्षित अथवा किसी भी जोखिम से विहीन वातावरण नहीं है जिसमें हम जीवन के सभी उतार-चढ़ाव कभी भी बिना किसी हानि को उठाएअ अनुभव कर सकें। पाप और उसके दुषप्रभावों से भरे तथा उनसे बिगड़े हुए इस संसार में जीवन जीने के खतरों से हम बच नहीं सकते। इसीलिए हम मसीही विश्वासियों के लिए प्रभु यीशु द्वारा दिए गए आश्वासन बहुत शान्ति देने वाले हैं; प्रभु यीशु ने कहा, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है" (यूहन्ना 16:33)।

   यद्यपि हम मसीही विश्वासी इस पतित संसार में जीवन के खतरों और जोखिमों से बचे तो नहीं रह सकते, लेकिन हम उन खतरोंअ उर जोखिमों के बावजूद आश्वस्त और शान्त होकर अवश्य रह सकते हैं क्योंकि परमेश्वर प्रभउ के साथ बना हुआ हमारा संबंध हमारे लिए अनन्त काल की शान्ति और हर परिस्थिति में आवश्यक सामर्थ तथा सहायता के उपलब्ध होने का आश्वासन है। हमारा प्रभु संसार तथा संसार के हाकिमों और दुष्ट की सभी शक्तियों एवं योजनाओं पर जयवन्त है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर को समर्पित जीवन से अधिक सुरक्षित जीवन कोई नहीं है।

प्रभु यीशु ने कहा: "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।" - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 7:22-43


बुधवार, 17 दिसंबर 2014

जोखिम


   एक नया आईपैड पाने के लिए बदले में कोई क्या दे सकता है? एक 17 वर्षीय लड़के ने अपना एक गुर्दा दे दिया! उसके पास आईपैड खरीदने के लिए पैसे नहीं थे किंतु वह आईपैड पाना इतना अधिक चाहता था कि वह अपना ऑपरेशन करवाने तथा केवल एक गुर्दे के साथ शेष जीवन बिताने का जोखिम उठाने को तैयार था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र स्तीफनुस ने भी प्रभु यीशु के सुसमाचार के प्रचार के लिए एक बड़ा जोखिम उठाया। प्रभु यीशु की सेवकाई में आश्चर्यक्रम करते हुए स्तिफनुस को पकड़ लिया गया, उस पर मूसा की व्यवस्था तथा परमेश्वर के विरुद्ध निन्दा का झूठा इलज़ाम लगाया गया और उसे महापुरोहित के सामने न्याय के लिए लाया गया (प्रेरितों 6:8-14)। जब महापुरोहित ने उससे प्रश्न किया (प्रेरितों 7:1) तब स्तिफनुस ने एक और जोखिम लिया और एक ऐसा उपदेश दिया जिसके विषय में वह जानता था कि सुनने वाले उसे पसन्द नहीं करेंगे - उसने इस्त्राएल के इतिहास का हवाला देकर यह दिखाया कि इसत्राएल के लोग सदा से ही हठीले और परमेश्वर के अनाज्ञाकरी तथा परमेश्वर के भविश्यद्वक्ताओं का तिरिस्कार करने वाले और उन को सताने तथा मारने वाले रहे हैं; और अब उन्होंने यही कार्य प्रभु यीशु के साथ भी किया जो उनका प्रतीक्षित मसीहा था। स्तिफनुस के इस उपदेश की अति तीव्र प्रतिक्रिया हुई, और उन्होंने उसे पत्थरवाह कर के मार डाला: "तब उन्होंने बड़े शब्द से चिल्लाकर कान बन्‍द कर लिये, और एक चित्त हो कर उस पर झपटे। और उसे नगर के बाहर निकाल कर पत्थरवाह करने लगे, और गवाहों ने अपने कपड़े उतार रखे" (प्रेरितों 7:57-58)।

   क्यों प्रभु यीशु का प्रचार करने के लिए स्तिफनुस ने अपने प्राण का जोखिम उठाया? क्यों प्रभु यीशु के चेले प्रभु के पृथ्वी के समय के जीवन के समय से लेकर आज तक यह जोखिम उठाते आ रहे हैं, हर स्थान पर इस प्रचार के कारण सताव सहने और तिरिस्कृत होने, यहाँ तक कि परिवार और जान गवाँ देने को भी तैयार रहते हैं? क्योंकि स्तिफनुस के समान ही प्रभु यीशु के अनुयायी यह बात संसार के सामने रखना चाहते हैं कि प्रभु यीशु मसीह के जन्म, मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण संसार के सभी लोगों के लिए पूर्णतः सेंत-मेंत पाप क्षमा और उद्धार तथा परमेश्वर के साथ अनन्त काल के जीवन का मार्ग उपलब्ध है; अब उन्हें कर्मों, व्यवस्था और रीति-रिवाज़ों के पालन के बन्धनों आदि के आधीन रहने की आवश्यकता नहीं है, अब प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा वे परमेश्वर के अनुग्रह में होकर अनन्तकाल की आशीष का जीवन बिता सकते हैं (प्रेरितों 6:13-15; इफिसीयों 2:8-9)।

   प्रभु यीशु के अनुयायी संसार को यही सुसमाचार सुनाने के लिए हर तरह का जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं। - एलबर्ट ली


मसीही विश्वासी का जीवन वह खिड़की है जिसमें से संसार प्रभु यीशु को देख सकता है।

क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। - इफिसीयों 2:8-9

बाइबल पाठ: प्रेरितों 7:51-8:2
Acts 7:51 जैसा तुम्हारे बाप दादे करते थे, वैसे ही तुम भी करते हो। 
Acts 7:52 भविष्यद्वक्ताओं में से किस को तुम्हारे बाप दादों ने नहीं सताया, और उन्होंने उस धर्मी के आगमन का पूर्वकाल से सन्‍देश देने वालों को मार डाला, और अब तुम भी उसके पकड़वाने वाले और मार डालने वाले हुए। 
Acts 7:53 तुम ने स्‍वर्गदूतों के द्वारा ठहराई हुई व्यवस्था तो पाई, परन्तु उसका पालन नहीं किया।
Acts 7:54 ये बातें सुनकर वे जल गए और उस पर दांत पीसने लगे। 
Acts 7:55 परन्तु उसने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो कर स्वर्ग की ओर देखा और परमेश्वर की महिमा को और यीशु को परमेश्वर की दाहिनी ओर खड़ा देखकर। 
Acts 7:56 कहा; देखों, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूं। 
Acts 7:57 तब उन्होंने बड़े शब्द से चिल्लाकर कान बन्‍द कर लिये, और एक चित्त हो कर उस पर झपटे। 
Acts 7:58 और उसे नगर के बाहर निकाल कर पत्थरवाह करने लगे, और गवाहों ने अपने कपड़े उतार रखे। 
Acts 7:59 और वे स्‍तिुफनुस को पत्थरवाह करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा; कि हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर। 
Acts 7:60 फिर घुटने टेककर ऊंचे शब्द से पुकारा, हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा, और यह कहकर सो गया: और शाऊल उसके बध में सहमत था।
Acts 8:1 उसी दिन यरूशलेम की कलीसिया पर बड़ा उपद्रव होने लगा और प्रेरितों को छोड़ सब के सब यहूदिया और सामरिया देशों में तित्तर बित्तर हो गए। 
Acts 8:2 और भक्तों ने स्‍तिुफनुस को कब्र में रखा; और उसके लिये बड़ा विलाप किया।

एक साल में बाइबल: 
  • इब्रानियों 11-13


बुधवार, 12 नवंबर 2014

जोखिम


   बुनियादी सैनिक प्रशिक्षण के समय डेनिस रौस से उसके साथी सैनिक तथा उसका प्रशिक्षक बहुत अप्रसन्न रहते थे क्योंकि वह शान्तिप्रीय था और युद्ध के लिए हथियार उठाने से इन्कार करता था। उसके इस भाव के कारण उसके साथी उसके साहस पर शक करते थे। डेनिस मसीही विश्वासी था और उसका प्रशिक्षण युद्ध समय में घायल सैनिकों तक चिकित्सा सहायता पहुँचाने का था, उसे युद्ध भूमि पर जाने में कोई संकोच नहीं था, लेकिन वहाँ वह जान बचाने के लिए जाना चाहता था, जान लेने के लिए नहीं।

   डेनिस के साहस को लेकर उसके साथियों का सन्देह जाता रहा जब उसकी टुकड़ी को युद्ध क्षेत्र में जाने का आदेश मिला। दूसरे विश्वयुद्ध के समय ओकिनावा के युद्ध में डेनिस ने अद्भुत साहस का प्रदर्शन किया। मशीनगन से हो रही गोलियों की बौछार में भी वह युद्ध में घायल हो रहे सैनिकों को खींच-खींच कर सुरक्षित स्थानों पर लाता रहा। उसकी प्रार्थना रहती थी, "प्रभु, मुझे एक और घायल सैनिक को बचा लाने की सामर्थ दे।" अन्ततः डेनिस ने 70 से भी अधिक घायल सैनिकों को एक पहाड़ी से नीचे सुरक्षित स्थान पर चिकित्सीय सहायता के लिए पहुँचाया। उसके इस साहसिक कार्य के लिए उसे अपने देश का सर्वोच्च सैनिक सम्मान पदक दिया गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक ऐसे ही मसीही विश्वासी "सैनिक" का उल्लेख है जिसने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की सहायता करी। प्रेरित पौलुस ने इपफ्रुदितुस के विषय में लिखा, "इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे" (फिलिप्पियों 2:29-30)।

   आज सारे संसार में अनेकों मसीही विश्वासी प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा सारे संसार के हर व्यक्ति के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनाने के कारण अपने प्राणों को जोखिम में डाले हुए हैं। उन सभी के लिए प्रार्थना करें कि उन संकटपूर्ण परिस्थितियों में उसकी सेवकाई करते समय परमेश्वर उनकी रक्षा करता रहे और उनकी सहायता के लिए उपयुक्त सेवकों को भी खड़ा करे। - डेनिस फिशर


साहस का अर्थ आगे बढ़ने की शक्ति रखना नहीं है, वरन शक्ति ना होते हुए भी आगे बढ़ते रहना है।

और हे भाइयों, हम तुम से बिनती करते हैं, कि जो तुम में परिश्रम करते हैं, और प्रभु में तुम्हारे अगुवे हैं, और तुम्हें शिक्षा देते हैं, उन्हें मानो। - 1 थिस्सुलुनीकियों 5:12 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:25-30
Philippians 2:25 पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा। 
Philippians 2:26 क्योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था। 
Philippians 2:27 और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो। 
Philippians 2:28 इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट कर के आनन्‍दित हो जाओ और मेरा भी शोक घट जाए। 
Philippians 2:29 इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। 
Philippians 2:30 क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रेरितों 13-14


शुक्रवार, 23 मई 2014

जोखिम


   अपनी जीवनी की पुस्तक, "Stuntman! My Car-Crashing, Plane-Jumping, Bone-Breaking, Death-Defying Hollywood Life" (करतब-बाज़! मेरा कार-टकराने, वायु-यान से कूदने, हड्डियाँ तुड़वाने और मौत का जोखिम उठाने वाला हॉलिवुड का जीवन) में हैल नीडहैम अपने द्वारा हॉलिवुड की फिल्मों में उठाए गए जोखिमों के बारे में लिखता है। उसने मुक्केबाज़ी की है, तेज़ रफ्तार से कार चलाईं हैं, उड़ते हुए वायु-यानों के पंखों पर चला है, घोड़ों से गिरा है और उसे आग भी लगाई गई है! यह सब उसने इसलिए किया कि हॉलिवुड फिल्मों के दर्शकों का मनोरंजन हो सके; इतने करतब दिखाने के कारण उसे हॉलिवुड के सर्वश्रेष्ठ करतब-बाज़ का खिताब भी मिला है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पात्र - प्रेरित पौलुस और उनका साथी बरनबास भी ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने अपने जीवन जोखिम में डाले (प्रेरितों 15:26); लेकिन इस जोखिम के लिए उनका उद्देश्य फर्क था। उन्होंने ऐसा प्रभु यीशु मसीह में मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करने तथा प्रभु यीशु मसीह को महिमा देने के लिए किया। रोमी साम्राज्य में एक सुसमाचार प्रचारक के रुप में पौलुस ने अनेक जोखिम उठाए जिनमें उसके पानी के जहाज़ का टूटना, उसका पीटे जाना, उसे ताड़नाएं दिए जाना और बन्दीगृह में डाले जाना सम्मिलित है (2 कुरिन्थियों 11:22-30)। लेकिन प्रभु यीशु के प्रचार के लिए पौलुस इन सब जोखिमों को उठाने से कभी कतराया नहीं, वह सब दुख उठा कर भी सुसमाचार प्रचार की अपनी सेवकाई में अपने जीवन के अन्त तक लगा रहा।

   आज भी ऐसे अनेक मसीही विश्वासी हैं जो प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार के प्रचार के लिए हर तरह का जोखिम उठाने को तैयार रहते हैं। क्या आप एक मसीही विश्वासी होने के बावजूद ऐसे ही किनारे पर बैठे हुए हैं, सुसमाचार प्रचार में भाग नहीं ले रहे हैं? परमेश्वर ने अपना आत्मा और अपना वचन आपको इसलिए दिया है कि आप सामर्थ पाएं और सुसमाचार प्रचार में लगें (रोमियों 1:16; प्रेरितों 1:8)।

   यदि आप अभी तक सुसमाचार प्रचार से कतराते रहे हैं तो परमेश्वर से माँगें कि वह आपको ऐसा मन और चाह दे कि आप बिना हिचकिचाए या भयभीत हुए सुसमाचार प्रचार में लग सकें। सुसमाचार प्रचार के लिए उठाया गया जोखिम कोई जोखिम नहीं वरन आने वाले भविष्य के लिए एक उत्तम निवेश है जिसके प्रतिफल सर्वोत्तम हैं; उन प्रतिफलों से बढ़कर ना तो इस जीवन में और ना ही आते जीवन कुछ मिल सकता है। - डेनिस फिशर


सुसमाचार प्रचार करने के प्रतिफल उसके लिए उठाए गए जोखिमों से बढ़कर हैं।

क्योंकि मैं सुसमाचार से नहीं लजाता, इसलिये कि वह हर एक विश्वास करने वाले के लिये, पहिले तो यहूदी, फिर यूनानी के लिये उद्धार के निमित परमेश्वर की सामर्थ है। - रोमियों 1:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-30
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जाखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 32-34


सोमवार, 12 मई 2014

पुकारें


   कातुशिका होकुसई जापान के इतिहास के सबसे यशस्वी और बहुतायत से चित्र बनाने वाले कलाकारों में गिने जाते हैं। सन 1826 से सन 1833 तक, जब उनकी आयु मध्य 60 तथा आरंभिक 70 के मध्य थी, उन्होंने अपने सबसे विख्यात कृति बनाई - लकड़ी के सांचों से रंगीन चित्रों की श्रंखला जिसका शीर्षक था, फूजी पर्वत के 36 दृश्य। इन चित्रों में से एक जो बहुत विख्यात हुआ वह था "The Great Wave off Kanagaawa" (कानागावा तट के निकट विशाल लहर)। उन्होंने यह चित्र उस समय बनाया जब वे आर्थिक और भावनात्मक संघर्ष के दौर से हो कर निकल रहे थे। इस चित्र में एक बहुत ऊँची दीवार के समान समुद्र की लहर दिखाई गई है, लहर के सिरे पर पंजों के समान दिखने वाला फेन है जो कि लहर के नीचे यात्रियों से भरी तीन छोटी नावों पर गिरने को तैयार है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 में भी समुद्र के जोखिम में फंसे लोगों का वर्णन दिया है। वे लहरों पर तैरते हुए एक पल में आकाश की ऊँचाईयों पर तो दुसरे ही पल में समुद्र की गहराईयों में उतर आते हैं, जिससे उनके जी में जी नहीं रहता। तब वे सहायता के लिए परमेश्वर को पुकारते हैं, परमेश्वर उनकी पुकार सुनकर लहरों को शान्त करता है और उन्हें उनके गन्तव्य तक सुरक्षित पहुँचा देता है।

   जब हम जीवन कि कठिनाईयों का सामना कर रहे होते हैं तो सहायता, मार्गदर्शन और सांत्वना के लिए हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रीया अन्य मनुष्यों की ओर देखने की होती है। लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि वे मनुष्य भी तो हमारे समान ही जीवन की परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं, उन्हें भी हमारे समान ही कठिनाईयों और जोखिमों का सामना करना होता है। केवल परमेश्वर ही है जो जीवन रूपी नाव और परिस्थितियों रूपी समुद्र से बाहर है, उनके ऊपर है, तथा उन पर नियंत्रण रखने की सामर्थ रखता है। वह ही है जो परिस्थितियों के समुद्र को शांत कर के हमें गन्तव्य तक भली भांति पहुँचा सकता है। क्या आप भी जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना कर रहे हैं? परमेश्वर प्रभु यीशु को विश्वास के साथ पुकारें, अपने जीवन की बाग-डोर उसके हाथ में सौंप दें और निश्चिंत हो जाएं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हम उस परमेश्वर की आराधना करते हैं जो हमारी हर समस्या से बड़ा है तथा हमारे जीवन की हर बात को नियंत्रित कर सकता है।

और संकट के दिन मुझे पुकार; मैं तुझे छुड़ाऊंगा, और तू मेरी महिमा करने पाएगा। - भजन 50:15

बाइबल पाठ: भजन 107:23-32
Psalms 107:23 जो लोग जहाजों में समुद्र पर चलते हैं, और महासागर पर हो कर व्यापार करते हैं; 
Psalms 107:24 वे यहोवा के कामों को, और उन आश्चर्यकर्मों को जो वह गहिरे समुद्र में करता है, देखते हैं। 
Psalms 107:25 क्योंकि वह आज्ञा देता है, वह प्रचण्ड बयार उठ कर तरंगों को उठाती है। 
Psalms 107:26 वे आकाश तक चढ़ जाते, फिर गहराई में उतर आते हैं; और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता; 
Psalms 107:27 वे चक्कर खाते, और मतवाले की नाईं लड़खड़ाते हैं, और उनकी सारी बुद्धि मारी जाती है। 
Psalms 107:28 तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उन को सकेती से निकालता है। 
Psalms 107:29 वह आंधी को थाम देता है और तरंगें बैठ जाती हैं। 
Psalms 107:30 तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उन को मन चाहे बन्दर स्थान में पहुंचा देता है। 
Psalms 107:31 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें। 
Psalms 107:32 और सभा में उसको सराहें, और पुरनियों के बैठक में उसकी स्तुति करें।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 4-7


शुक्रवार, 14 मार्च 2014

थामने वाला


   जीवन जोखिमों से भरा है। कभी हम सफलता की ऊँची उड़ान भर रहे होते हैं, और कभी अनायास ही असफलता की डरावनी सच्चाई और घोर निराशा की गहराईयों में पड़े विचार कर रहे होते हैं कि क्या आशा रख पाने का कोई कारण है भी?

   हाल ही में एक अन्त्येष्टि के समय एक पास्टर ने सरकस में ऊँचाईयों पर लटक कर कलाबाज़ीयों के करतब दिखाने वाले एक कलाकार की कहानी सुनाई - यद्यपि वह कलाकार उस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण और नायक समझा जाता था, लेकिन स्वयं उसके अनुसार असली नायक तो उसका साथी था जो दूसरे डंडे से लटक कर उसे थामता था और उसके सुरक्षित नीचे उतर आने को सुनिश्चित करता था। सारे करतबों के सफल होने और उस कलाकार के सुरक्षित रह पाने की कुंजी थी विश्वास। उस ऊँचाई पर करतब करते हुए एक से दूसरे डंडे पर जाने के लिए जब वह लपकता था तो उसे पूरा विश्वास रखना होता था कि उसका साथी उसे थामने के लिए तैयार है और सही स्थान पर उसे मिलेगा, उसे थाम लेगा। ऐसे ही मृत्यु के समय में भी हमें विश्वास रखना है कि परमेश्वर भी थामने वाले के समान सही समय और स्थान पर हम मसीही विश्वासियों को थामने के लिए तैयार मिलेगा। अपनी जीवन यात्रा की कलाबाज़ियाँ पूरी कर लेने के पश्चात संसार से उस पार उतर जाने के समय हम मसीही विश्वासी निश्चिंत होकर विश्वास रख सकते हैं कि दूसरी ओर परमेश्वर हमें थाम कर अनन्त काल के लिए अपने साथ स्वर्ग में स्थान देने के लिए तैयार खड़ा है।

   प्रभु यीशु ने अपने पकड़वाए जाने और क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले अपने चेलों को आशवासन दिया कि वह उनके लिए स्थान तैयार करने जा रहा है और फिर आकर उन्हें वहाँ ले जाएगा, इसलिए वे घबराएं नहीं, विश्वास बनाए रखें (यूहन्ना 14:1-3)। इसमें कोई शक नहीं है कि जीवन जोखिमों से भरा है, लेकिन यदि आपने मसीह यीशु पर विश्वास किया है और उसे अपना उद्धारकर्ता माना है तो निश्चिंत रहें - वह इस जीवन में आपके साथ बना रहेगा, आपको सुरक्षा देता रहेगा, और पृथ्वी के इस जीवन के बाद आपका थामने वाला होकर आपको अपने साथ अनन्त स्वर्गीय जीवन में सुरक्षित उतार लाएगा। - जो स्टोवैल


हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता की बाहें अपने बच्चों को थामे रहने के लिए, इस जीवन तथा उस जीवन दोनों में ही, सदा तैयार और उपलब्ध रहती हैं।

यदि कोई मेरी सेवा करे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहां मैं हूं वहां मेरा सेवक भी होगा; यदि कोई मेरी सेवा करे, तो पिता उसका आदर करेगा। - यूहन्ना 12:26

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-6
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो। 
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं। 
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो। 
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो। 
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें? 
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

एक साल में बाइबल: 
1 शमूएल 1-3

मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

जोखिम


   प्रभु यीशु के जन्म के वृतांत में उनके सांसारिक पिता यूसुफ का भी उल्लेख आता है, लेकिन उनके जन्म से संबंधित घटनाओं के पश्चात यूसुफ के बारे फिर बहुत कम ही मिलता है। हम इससे यह निषकर्ष निकाल सकते हैं कि प्रभु यीशु के मानवीय जीवन के संदर्भ में युसुफ कोई महत्वपूर्ण पात्र नहीं था; उसकी आवश्यकता केवल प्रभु यीशु के दाऊद के घराने से होने को प्रमाणित करने के लिए थी। लेकिन यह धारणा रखना सही नहीं है।

   युसुफ की भूमिका प्रभु यीशु के जन्म के वृतांत में सामरिक रीति से बहुत महत्वपूर्ण है। यूसुफ की मंगेतर, मरियम, के गर्भवती होने की बात पता चलने के बाद से ही यूसुफ चिंतित था और मरियम को चुपचाप छोड़ देने पर गंभीरता से विचार कर रहा था। ऐसे में जब परमेश्वर की ओर से भेजे गए स्वर्गदूत ने उससे मरियम को अपने घर ले आने को कहा (मत्ती 1:20), तो यह युसुफ के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण फैसला था। यदि यूसुफ स्वर्ग्दूत की बात को मानने से इंकार कर देता, तो मानवीय दृष्टिकोण से, प्रभु यीशु के जन्म का पूरा घटनाक्रम बड़े जोखिम में पड़ जाता। लेकिन मरियम को अपनी पत्नि स्वीकार कर के घरअ ले आना भी जोखिम से बाहर नहीं था। यदि वह यीशु का पिता होना स्वीकार करता तो वह एक झूठ के साथ समझौता करता और यहूदी व्यवस्था को तोड़ने वाला ठहरता; यदि वह पिता होने से इन्कार करता तो समाज से बहुत बदनामी मिलना स्वाभाविक था। आज हम सब को यूसुफ का आभारी और धन्यवादी होना चाहिए कि उसने अपनी बदनामी और अपने विचारों की परवाह किए बैगैर परमेश्वर की योजना का एक भाग बनना स्वीकार किया और परमेश्वर का आज्ञाकारी रहा। परिणामस्वरूप उसे अब अनन्त काल के लिए परमेश्वर के वचन में उसे प्रभु यीशु का सांसारिक पिता होने का आदर प्राप्त है और उसकी इस आज्ञाकारिता कि चर्चा और प्रशंसा सदा होती रहती है।

   संसार के प्रनुख लोगों की तुलना में, संसार के घटनाक्रम में, हम में से अधिकांशतः की भूमिका बहुत छोटी या फिर नगण्य है। लेकिन हम में से प्रत्येक से परमेश्वर अपने प्रति आज्ञाकारी रहने की आशा रखता है। अनेक बार परमेश्वर की यह आज्ञाकारिता हमें बहुत जोखिम भरी या फिर अनावश्यक लग सकती है। लेकिन केवल परमेश्वर ही जानता है उस आज्ञाकारिता में होकर वह हमें किन आशीशों से परिपूर्ण करना चाहता है। परमेश्वर सदा अपने बच्चों के लिए केवल भलाई ही की योजनाएं बनाता है, चाहे वह भलाई अभी दिखाई दे या ना दे; क्या मैं और आप उसकी आज्ञाकारिता में जोखिम उठाने और उन आशीशों को पाने को तैयार हैं? - जो स्टोवैल


परमेश्वर पर भरोसा रखना और उसके आजाकारी रहना कोई छोटी बात नहीं है।

धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। - याकूब 1:12

बाइबल पाठ: मत्ती 1:18-25
Matthew 1:18 अब यीशु मसीह का जन्म इस प्रकार से हुआ, कि जब उस की माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हो गई, तो उन के इकट्ठे होने के पहिले से वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई। 
Matthew 1:19 सो उसके पति यूसुफ ने जो धर्मी था और उसे बदनाम करना नहीं चाहता था, उसे चुपके से त्याग देने की मनसा की। 
Matthew 1:20 जब वह इन बातों के सोच ही में था तो प्रभु का स्वर्गदूत उसे स्‍वप्‍न में दिखाई देकर कहने लगा; हे यूसुफ दाऊद की सन्तान, तू अपनी पत्‍नी मरियम को अपने यहां ले आने से मत डर; क्योंकि जो उसके गर्भ में है, वह पवित्र आत्मा की ओर से है। 
Matthew 1:21 वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा। 
Matthew 1:22 यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो। 
Matthew 1:23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “ परमेश्वर हमारे साथ”। 
Matthew 1:24 सो यूसुफ नींद से जागकर प्रभु के दूत की आज्ञा अनुसार अपनी पत्‍नी को अपने यहां ले आया। 
Matthew 1:25 और जब तक वह पुत्र न जनी तब तक वह उसके पास न गया: और उसने उसका नाम यीशु रखा।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 1-4 
  • प्रकाशितवाक्य 1


सोमवार, 10 जनवरी 2011

पाप का गणित

मैंने कैद में पड़े हुए कैदियों को शोकित होकर अपने सिर हिलाते और यह कहते देखा है कि "मैंने कभी नहीं सोचा था कि बात इस हद तक बिगड़ जाएगी।" जब उन्होंने छोटे छोटे अपराध करने शुरू किये तो बड़े या गंभीर अपराधों में पड़ने का उनका कोई इरादा नहीं था। लेकिन एक के बाद दूसरा अपराध होता गया, वे अपराध के जीवन में फंसते चले गए और अब वे आत्मग्लानि के साथ बन्दीगृह में पड़े हैं।

इन लोगों ने कभी यह नहीं पहचाना कि पाप में सदा पतन ही होता है और उसकी गंभीरता बद से बदतर ही होती है। जब हम जीवन के एक पहलू में परमेश्वर के नियमों को तोड़ते हैं तो जैसे गणित के जोड़ और गुणा के सिद्धांत जीवन में कम करने लग जाते हैं। शीघ्र ही पाप बढ़कर जीवन के अन्य पहलूओं में भी अपने प्रभाव डालने लगता है।

यह सोचना मूर्खता है कि हम बस एक छोटा प्रीय पाप पाल कर रख सकते हैं। वह एक पाप बढ़ता और फैलता रहेगा और हमें पतन की ओर अग्रसर रखेगा जब तक कि हम उसे पूरी तरह अपने से दूर नहीं कर देते। इसीलिये प्रभु यीशु ने पाप करने वाला हाथ काट कर फेंकने और पाप करने वाली आंख निकालने की बात कही (मत्ती १८:८, ९)। ऐसे कठोर शब्द रूपक प्रयोग करने में प्रभु का उद्देश्य यही समझाना था कि पाप को दूर रखने के लिये जो कुछ बन पड़े वह करो।

हम पाप के साथ खिलवाड़ करने का जोखिम नहीं उठा सकते। पौलुस ने रोमियों की पत्री के पहले अध्याय में तीन बार लिखा परमेश्वर ने पाप में बने रहने वालों को उनके दुष्कर्मों पर छोड़ दिया। वह पाप के पतन को उसका समय पूरा होने तक छोड़ देता है ताकि न केवल पापी को पश्चाताप का पूरा अवसर मिले, वरन न्याय को भी पूरा अवसर मिले और जब न्याय का समय आए तो उससे बचने का कोई बहाना न रहे।

हम प्रभु यीशु पर विश्वास करके पाप के इस अव्श्यंभावी गणित से बच सकते हैं। आज और अभी हमारे जीवन के किसी भी पाप से बचने के लिये उसकी सामर्थ काफी है। नहीं तो एक समय आएगा जब हमें उसके न्याय का सामना करना पड़ेगा और तब कोई और बचाव का मार्ग या उपाय नहीं होगा। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


कोई भी अचानक ही दुष्ट नहीं हो जाता।

यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काट कर फेंक दे। - मत्ती १८:८


बाइबल पाठ: मत्ती १८:६-९

पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता।
ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्य है, पर हाय उस मनुष्य पर जिस के द्वारा ठोकर लगती है।
यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काट कर फेंक दे। टुण्‍डा या लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो हाथ या दो पांव रहते हुए तू अनन्‍त आग में डाला जाए।
और यदि तेरी आंख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर फेंक दे।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २५-२६
  • मत्ती ८:१-१७