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रविवार, 8 मार्च 2026

Blessed and Successful Life - 31 - Improper Behavior Towards God’s Word - 11 / आशीषित एवं सफल जीवन – 31 - परमेश्वर के वचन के प्रति अनुचित व्यवहार – 11

 

आशीषित एवं सफल जीवन – 31 - परमेश्वर के वचन के भण्डारी बनो – 16

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परमेश्वर के वचन के प्रति अनुचित व्यवहार – 11

 

परमेश्वर के वचन से विभिन्न उदाहरणों के द्वारा हम परमेश्वर के वचन के पालन में लोगों द्वारा की जाने वाली विभिन्न गलतियों में से कुछ बातों को देखते आ रहे हैं। मुख्य बल इस बात पर रहा है कि परमेश्वर चाहता है कि उसके लोग उसके पूर्णतः आज्ञाकारी रहें। इस का अर्थ न केवल परमेश्वर द्वारा सौंपे गए काम को करना है, बल्कि उसे उसी विधि से करना भी है, जो परमेश्वर ने उसे करने के लिए निर्धारित की है। परमेश्वर के कार्य को करने के लिए, परमेश्वर द्वारा दी गई विधि के स्थान पर, मनुष्यों द्वारा बनाई किसी विधि को कभी भी लागू नहीं किया जा सकता है; और ऐसा कभी भी, बिलकुल भी नहीं करना चाहिये - ऐसा करने के सभी प्रयासों से दूर रहना चाहिये, उनका तिरस्कार करना चाहिये। आज हम संक्षेप में परमेश्वर कुछ महान भक्त लोगों के जीवनों के उदाहरणों को दोहराएंगे, जिन्हें हम पहले विस्तार से देख कूके हैं, और उनसे निष्कर्ष निकालेंगे। परमेश्वर के इन भक्त लोगों ने परमेश्वर द्वारा दिये गये विशिष्ट निर्देशों की अनदेखी की, जैसा उनकी समझ और दृष्टि में सही था, कार्यों को उस प्रकार से किया, और परिणामस्वरूप, परमेश्वर और उसके वचन को हल्के में लेने, ढिठाई करने की एक बहुत भारी कीमत चुकाई।

  

अभी तक इस विषय पर हमने जिन लोगों के उदाहरणों को देखा और उनसे सीखा है, संक्षेप में वे हैं:

  • प्रेरितों 7:22-36 - यद्यपि मूसा इस्राएलियों को छुड़ाने के लिए परमेश्वर द्वारा चुना और निर्धारित किया हुआ था, लेकिन मूसा अपनी इच्छा और तरीके से इस कार्य को नहीं कर सका, बल्कि ऐसा करने के प्रयास में जान के जोखिम में आ गया। इस कार्य को करने में मूसा तब ही सफल हुआ जब उसने इसे परमेश्वर के समय के अनुसार, परमेश्वर की विधि से, और परमेश्वर के मार्गदर्शन तथा सामर्थ्य में हो कर किया। और ठीक यही बात हम सभी पर भी लागू होती है।

  • निर्गमन अध्याय 25 से अध्याय 40 - जंगल की यात्रा के दौरान इस्राएलियों के द्वारा परमेश्वर के लिए तम्बू बनाया जाना बहुत प्रबल रीति से हमारे सामने इस तथ्य को रखता है कि न तो मनुष्य की कल्पनाएँ, न उसके तरीके, और परमेश्वर के निकट या सम्मुख आने तथा उसकी आराधना करने के लिए न ही मनुष्य की अपनी गढ़ी हुई बातें परमेश्वर को प्रसन्न कर सकती हैं, उसे स्वीकार्य हो सकती हैं। परमेश्वर केवल, जैसा उसके वचन में लिखा और कहा गया है, अपनी बातों और निर्देशों के सटीक पालन किए जाने के द्वारा, उसके कहे के अनुसार ही उसकी उपासना और आराधना किए जाने के द्वारा ही प्रसन्न होता है, और किसी तरीके से नहीं। और शैतान यही प्रयास करता रहता है कि हम किसी न किसी तरह से परमेश्वर के वचन की बातों की अनदेखी कर दें, उन में अपनी इच्छा और समझ के अनुसार कुछ बदलाव कर दें, उनमें कुछ जोड़ या घटा दें; अर्थात्, परमेश्वर के वचन को परमेश्वर का वचन न रहने दें वरन वह बस ऊपरी रीति से परमेश्वर का वचन लगे, परन्तु उसे वास्तव में मनुष्य का वचन बना लें।

  • 1 शमूएल अध्याय 13 एवं 15 - राजा शाऊल के जीवन के उदाहरण से हम देखते हैं कि, शाऊल के पास परमेश्वर का वचन आया, किन्तु उसने उस वचन को अपनी ही समझ और परिस्थिति के अनुसार लिया, न कि उसके प्रति एक प्रतिबद्धता और सही रवैया दिखाया। शाऊल ने परमेश्वर के वचन को अपने जीवन में उसका उचित महत्व नहीं दिया, और उसे कीमत चुकानी पड़ी। एक बार फिर से परमेश्वर के वचन का सन्देश हमारे सामने स्पष्ट है, न केवल परमेश्वर के कहे को करना है, वरन जैसा परमेश्वर ने बताया है उसे वैसे ही करना है, तब ही वह परमेश्वर की आज्ञाकारिता माना जाएगा। जो परमेश्वर की बातों को अपनी ही धारणा के अनुसार लेते हैं, और अपनी ही इच्छा के अनुसार काम करते हैं, और फिर यह अपेक्षा रखते हैं कि परमेश्वर उनके प्रयासों को स्वीकार करेगा और उन प्रयासों के लिए उन्हें आशीष देगा, उन्हें अपनी इस ढिठाई और अनाज्ञाकारिता के लिए परमेश्वर के न्याय को झेलना ही पड़ेगा।

  • 1 इतिहास अध्याय 13 एवं 15 - दाऊद, जो परमेश्वर के मन के अनुसार व्यक्ति था, ने भी परमेश्वर की उन बातों को मानने की बजाए, अपनी इच्छा और समझ के अनुसार कार्य किया। दाऊद परमेश्वर के लिए बहुत उत्साही था, उसे आदर देना चाहता था, उसके प्रति अपने प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त करना चाहता था। वह जो परमेश्वर के लिए करना चाहता था, यद्यपि वह सही था, लेकिन पहली बार उसने जैसे इस कार्य को किया वह परमेश्वर के वचन तथा उसके द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार नहीं था। इसलिए वह परमेश्वर की दृष्टि में किसी भी रीति से अनाज्ञाकारिता से कम नहीं था। और इसीलिए उस कार्य के इतने दुखदायी परिणाम हुए, यहाँ तक कि परमेश्वर की आज्ञाकारिता की बजाए परमेश्वर के एक भक्त मानवीय अगुवे, राजा दाऊद, की आज्ञाकारिता में होकर कार्य करने की कीमत उज्जा को परमेश्वर के प्रकोप को सहने और अपने प्राण देने से चुकानी पड़ी। केवल जब परमेश्वर के वचन को उसका उचित स्थान और महत्व प्रदान किया गया, जब कार्य को सही रीति से किया गया – परमेश्वर द्वारा पहले से ही उसके विषय दिए गए निर्देशों के अनुसार, तब ही परमेश्वर ने उसे स्वीकार किया, उस पर आशीष दी, और उसके लिए अपने लोगों की सहायता की। शिक्षा स्पष्ट है, किसी भी मनुष्य को, चाहे वह दाऊद के समान आत्मिक स्तर रखने वाला ही क्यों न हो, परमेश्वर के वचन के साथ अनुचित व्यवहार करने का कोई अधिकार नहीं है; परमेश्वर को आदर देने या उसके प्रति प्रेम और श्रद्धा की अभिव्यक्ति के लिए भी नहीं; कोई भी परमेश्वर के वचन का दुरुपयोग कर के उसके दुष्परिणामों से बच नहीं सकता है, चाहे वह दुरुपयोग किसी भी मनुष्य की इच्छानुसार क्यों न किया गया हो।

  • 2 इतिहास अध्याय 26 - परमेश्वर किसी मनुष्य का पक्ष नहीं करता है “परमेश्वर किसी का पक्षपात नहीं करता” (गलातियों 2:6)। जब तक उज्जिय्याह परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य रहा, परमेश्वर ने उसे आशीषित किया और बढ़ाया। लेकिन जब उसने परमेश्वर के वचन का उल्लंघन किया, और उसे दी जा रही चेतावनियों को नहीं माना, तब परमेश्वर को उसके विरुद्ध कार्य करना पड़ा। क्योंकि वह पहले भक्त और आज्ञाकारी रहा था, इसलिए परमेश्वर ने उसके द्वारा वचन की अवहेलना करने को नज़रन्दाज़ नहीं किया। परमेश्वर के निर्देशों की अनदेखी करने, और अपनी ही सोच तथा बात पर अड़े रहने के परिणाम उसके लिए बहुत हानिकारक हुए; उसने जीवन भर के लिए सब कुछ गँवा दिया, उन्हें फिर कभी वापस प्राप्त नहीं करने पाया।

 

अगले लेख से हम परमेश्वर के वचन के भण्डारी होने के एक और पक्ष पर विचार करना आरम्भ करेंगे - परमेश्वर के लोगों के द्वारा परमेश्वर के वचन में, उनकी अपनी समझ के अनुसार, फेर-बदल किया जाना।


यदि आपने प्रभु की शिष्यता को अभी तक स्वीकार नहीं किया है, तो अपने अनन्त जीवन और स्वर्गीय आशीषों को सुनिश्चित करने के लिए अभी प्रभु यीशु के पक्ष में अपना निर्णय कर लीजिए। जहाँ प्रभु की आज्ञाकारिता है, उसके वचन की बातों का आदर और पालन है, वहाँ प्रभु की आशीष और सुरक्षा भी है। स्वेच्छा से अपने पापों के लिये पश्चाताप करके, प्रभु यीशु से अपने पापों के लिए क्षमा माँगकर, स्वेच्छा से तथा सच्चे मन से अपने आप को उसकी अधीनता में समर्पित कर दीजिए - उद्धार और स्वर्गीय जीवन का यही एकमात्र मार्ग है। आपको स्वेच्छा और सच्चे मन से प्रभु यीशु मसीह से केवल एक छोटी प्रार्थना करनी है, और साथ ही अपना जीवन उसे पूर्णतः समर्पित करना है। आप यह प्रार्थना और समर्पण कुछ इस प्रकार से भी कर सकते हैं, “प्रभु यीशु, मैं अपने पापों के लिए पश्चातापी हूँ, उनके लिए आप से क्षमा माँगता हूँ। मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मेरे पापों की क्षमा और समाधान के लिए उन पापों को अपने ऊपर लिया, उनके कारण मेरे स्थान पर क्रूस की मृत्यु सही, गाड़े गए, और मेरे उद्धार के लिए आप तीसरे दिन जी भी उठे, और आज जीवित प्रभु परमेश्वर हैं। कृपया मुझे और मेरे पापों को क्षमा करें, मुझे अपनी शरण में लें, और मुझे अपना शिष्य बना लें। मैं अपना जीवन आप के हाथों में समर्पित करता हूँ।” सच्चे और समर्पित मन से की गई आपकी एक प्रार्थना आपके वर्तमान तथा भविष्य को, इस लोक के और परलोक के जीवन को, अनन्तकाल के लिए स्वर्गीय एवं आशीषित बना देगी।




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Blessed and Successful Life - 31 - Be Stewards of God’s Word – 16 

English Translation

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Video Discussion                     Audio Discussion

Improper Behavior Towards God’s Word - 11

 

Through various examples from God’s Word, we have been seeing and learning about some of the errors that people can make regarding following God’s Word in their lives. The main emphasis has been that God wants complete obedience to His Word from His people. This not only means doing the God given work, but also doing it in the manner God has asked for it to be done. There should not be any substitution of God given way with a humanly devised way, to carry out what God wants done; and this should never ever be done - we should stay away from all such attempts, and all such attempts should be rejected outrightly. Today we will summarize and draw conclusions from the lives of great men of God, who became presumptuous, ignored God’s specific instructions, and tried to do things as seemed good to them, and consequently paid a very heavy price for taking God and His Word for granted, treating them lightly.


The examples, that we had seen and learnt from in detail in earlier articles are:

  • Acts 7:22-36 - Though Moses was to be the one through whom God would deliver Israel, but Moses could not do this according to his desire and by his methods, rather, in attempting to do so, jeopardized his life. Moses could only be successful, when he did this task in God’s time, in God’s way, and through God’s guidance and strength. And, that is how it is for us as well.

  • Exodus chapters 25 to 40 - The construction of the Tabernacle for God in the wilderness journey very powerfully illustrates that not the imaginations and devices of man, not man’s contrived methods of coming to God and worshipping God, but only doing things, following His instructions, worshipping Him, etc., exactly as specified by God in His Word, is what pleases God, and nothing else. And Satan keeps trying to get us to either disregard God’s instructions given in His Word, or to modify them, add or take away things from them, according to our own fancy; i.e., do not let God’s Word be God’s Word, but though externally appearing to be God’s word, to actually change it into man’s word.

  • 1 Samuel chapters 13 and 15 - From the example of King Saul’s life, we see that Saul received God’s Word, but interpreted and understood it according to his own thinking about the situation, instead of showing a commitment and proper attitude towards it. Saul failed to give God’s Word its due importance in his life, and paid the price. Those who assume things and act on their own, and then expect God to accept their efforts and bless them for those efforts, will have to suffer God’s judgment for their persistently disobedient ways.

  • 1 Chronicles chapters 13 and 15 - David, a man after God’s own heart, assumed things. David was zealous for the Lord God, wanted to honor him, express his love and reverence for Him. Though what he wanted to do for God was right, but the way he initially did it was not according to God’s Word, not according to God’s instructions already given beforehand. So, it was nothing short of disobedience in the eyes of God; hence the painful consequences so much so that obedience to the godly human leader, King David, instead of obedience to God, cost Uzza his life. Only when God’s Word was given its due place and importance, when the right thing was done the right way – according to God’s instructions for it, did God accept it, bless it, and He helped His people for it. The lesson is clear, no man, not even someone of the spiritual stature of David has the right to treat God’s Word inappropriately; not even as an expression or attempt to honor God or show love and reverence towards God; no one can misuse God’s Word and get away with it, whoever may be the person in who’s will the misuse was done.

  • 2 Chronicles chapter 26 - God is no respecter of persons, “God shows personal favoritism to no man” (Galatians 2:6). As long as Uzziah was faithful towards God, God blessed him and prospered him. But when he transgressed God’s Word, and would not heed to the warnings being given to him, God had to act against him. God did not condone Uzziah’s disregard for God’s Word despite the warnings, just because he had been godly earlier. The consequences of ignoring God’s instructions and persisting with his own line of thinking were very severe; he lost everything, never to regain any of it for the rest of his life.


From the next article we will start considering another aspect of this study on stewardship of God’s Word - God’s people altering God’s Word, as they see fit to do.


If you have not yet accepted the discipleship of the Lord, make your decision in favor of the Lord Jesus now to ensure your eternal life and heavenly blessings. Where there is obedience to the Lord, where there is respect and obedience to His Word, there is also the blessing and protection of the Lord. Repenting of your sins, and asking the Lord Jesus for forgiveness of your sins, voluntarily and sincerely, surrendering yourself to Him - is the only way to salvation and heavenly life. You only have to say a short but sincere prayer to the Lord Jesus Christ willingly and with a penitent heart, and at the same time completely commit and submit your life to Him. You can also make this prayer and submission in words something like, “Lord Jesus, I am sorry for my sins and repent of them. I thank you for taking my sins upon yourself, paying for them through your life.  Because of them you died on the cross in my place, were buried, and you rose again from the grave on the third day for my salvation, and today you are the living Lord God and have freely provided to me the forgiveness, and redemption from my sins, through faith in you. Please forgive my sins, take me under your care, and make me your disciple. I submit my life into your hands." Your one prayer from a sincere and committed heart will make your present and future life, in this world and in the hereafter, heavenly and blessed for eternity.


 

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सोमवार, 27 जनवरी 2020

नम्र



      एक दिन विश्वविद्यालय की एक दर्शनशास्त्र की कक्षा में, एक छात्र ने अपने शिक्षक द्वारा व्यक्त दृष्टिकोण को लेकर भड़काऊ टिप्पणी की। अन्य छात्र यह देखकर हैरान रह गए कि उस शिक्षक ने उस छात्र का धन्यवाद किया, और अगली टिप्पणी की ओर मुड़ गया। बाद में जब उससे पूछा गया कि उसने उस उद्दण्ड छात्र को उचित उत्तर क्यों नहीं दिया, तो शिक्षक का उत्तर था, “मैं अपनी ही बात को अंतिम बात न रखने के अनुशासन का अभ्यास कर रहा हूँ।”

      यह शिक्षक परमेश्वर से प्रेम करता था और उसका आदर करता था, और परमेश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित करने वाले व्यवहार को दिखाने के लिए वह नम्र भावना रखता था। उस शिक्षक के शब्द मुझे एक अन्य शिक्षक के शब्दों को स्मरण करवाते हैं, और यह दूसरा शिक्षक बहुत समय पहले का है – परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक का लेखक। यद्यपि इस दूसरे शिक्षक ने यह बात किसी क्रुद्ध व्यक्ति के प्रति व्यवहार करने के सन्दर्भ में नहीं कही थी, वरन परमेश्वर के निकट आने के समय हमारे उचित व्यवहार को सिखाने के लिए कही थी। सभोपदेशक के लेखक ने लिखा, “जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों” (सभोपदेशक 5:1-2)।

      आप परमेश्वर के निकट किस मानसिकता के साथ आते हैं? यदि आपको लगता है कि आपके व्यवहार में कुछ सुधार होना चाहिए तो क्यों न कुछ समय परमेश्वर की महानता और महिमा पर विचार करने में बिताएं? जब हम परमेश्वर की असीम बुद्धिमत्ता, सामर्थ्य, और उपस्थिति पर मनन करते हैं, तो हमारे प्रति उसके उमड़ते हुए प्रेम से हम अभिभूतित हो सकते हैं, जो फिर हमें नम्र बनाता है। जब हम ऐसे नम्र रहना पसंद करेंगे, तो फिर अपनी बात को सबसे ऊपर रखने की प्रवृत्ति रहेगी ही नहीं। - एमी बाउचर पाई

ध्यान पूर्वक चुने गए शब्द परमेश्वर को आदर देते हैं।

...यह वही बात है जिसे यहोवा ने कहा था, कि जो मेरे समीप आए अवश्य है कि वह मुझे पवित्र जाने, और सारी जनता के साम्हने मेरी महिमा करे। - लैव्यवस्था 10:3

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:1-7
Ecclesiastes 5:1 जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं।
Ecclesiastes 5:2 बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।
Ecclesiastes 5:3 क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है।
Ecclesiastes 5:4 जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना।
Ecclesiastes 5:5 मन्नत मान कर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है।
Ecclesiastes 5:6 कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुन कर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे?
Ecclesiastes 5:7 क्योंकि स्वप्नों की अधिकता से व्यर्थ बातों की बहुतायत होती है: परन्तु तू परमेश्वर को भय मानना।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20



शुक्रवार, 19 जुलाई 2019

शक्तिशाली



      ब्राजील और आर्जेंटीना की सीमा पर स्थित इगुआज़ू जल प्रपात इगुआज़ू नदी पर 2.7 किलोमीटर की दूरी में 275 जल प्रपातों का समूह है। इस जल प्रपात के ब्राजील के किनारे पर प्रपात की के दीवार पर खोद कर लिखा गया है “महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है” जिसे परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 93:4 से लिया गया है। इसके नीचे ये शब्द खोद कर लिखे गए हैं, “हमारी सभी परेशानियों पर परमेश्वर सदा प्रबल है।”

      भजन 93 के लेखक ने यह भजन उस समय लिखा था जब राजा राज्य करते थे, और वह जानता था कि सबसे महान, वह जो  अन्य सभी पर राजा है, वह परमेश्वर ही है। उसने लिखा, “यहोवा राजा है... हे यहोवा, तेरी राजगद्दी अनादिकाल से स्थिर है, तू सर्वदा से है” (पद 1-2)। लहरें और बाढ़ चाहे कितनी भी ऊँची क्यों न हो, परमेश्वर उन सबसे ऊँचा है।

      जलप्रपात के पानी गिरने का शोर बहुत भयावह हो सकता है, परन्तु उस गिरते हुए पानी की ओर बहते जाना और भी अधिक भयावह होता है। हो सकता है कि आज आपकी भी ऐसी ही स्थिति हो। शारीरिक, आर्थिक, संबंधों आदि से जुड़ी हुई समस्याएँ आपको बहुत भयावह लग रही होंगी, और आपको लग रहा होगा कि आप बस अब गिरने और नाश होने ही जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में मसीही विश्वासी के पास एक ऐसा है जिसकी ओर सहायता के लिए वह मुड़ सकता है। वह है प्रभु परमेश्वर, “जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है” (इफिसियों 3:20); वही सबसे और सब पर शक्तिशाली है। - सी. पी. हिया


अपनी सीमित अपेक्षाओं द्वारा परमेश्वर की असीम सामर्थ्य का आँकलन कभी न करें।

हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है। - यशायाह 43:1

बाइबल पाठ: भजन 93
Psalms 93:1 यहोवा राजा है; उसने माहात्म्य का पहिरावा पहिना है; यहोवा पहिरावा पहिने हुए, और सामर्थ्य का फेटा बान्धे है। इस कारण जगत स्थिर है, वह नहीं टलने का।
Psalms 93:2 हे यहोवा, तेरी राजगद्दी अनादिकाल से स्थिर है, तू सर्वदा से है।
Psalms 93:3 हे यहोवा, महानदों का कोलाहल हो रहा है, महानदों का बड़ा शब्द हो रहा है, महानद गरजते हैं।
Psalms 93:4 महासागर के शब्द से, और समुद्र की महातरंगों से, विराजमान यहोवा अधिक महान है।
Psalms 93:5 तेरी चितौनियां अति विश्वासयोग्य हैं; हे यहोवा तेरे भवन को युग युग पवित्रता ही शोभा देती है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40



मंगलवार, 27 मार्च 2018

महान



   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 100 एक ऐसी कलाकृति के समान है, जो हमें हमारे अदृश्य परमेश्वर का उत्सव मनाने में सहायता करती है। यद्यपि हमारी आराधना का विषय, परमेश्वर, हमारी दृष्टि से ओझल है, परन्तु वह उसके लोगों के द्वारा जाना जाता है।

   उस कलाकार की कलपना कीजिए, वह इस भजन के शब्दों को, कूची और रंगों की पटिका द्वारा चित्र बनाने के पटल पर उतार रहा है। जो हमारे समक्ष उभर कर आता है वह सँसार है – “सारी पृथ्वी के लोगों” यहोवा के लिए आनन्द से जयजयकार करो (पद 1); क्योंकि हमारे परमेश्वर का आनन्द हमें मृत्यु से बचा लेने में है। प्रभु यीशु ने, “उस आनन्द के लिए जो उसके आगे धरा था” क्रूस को सह लिया (इब्रानियों 12:2)।

   जैसे-जैसे हमारी आँखें उस चित्र-पटल पर एक से दूसरी ओर चलती हैं, हम सारे सँसार के अनगिनत लोगों की संगीत मण्डली को “आनन्द से” और “जयजयकार” के साथ परमेश्वर की स्तुति के गीत गाते हुए देखते हैं (भजन 100:2)। हमारे स्वर्गीय पिता का हृदय आनन्दित होता है जब उसके लोग, जो वह है और जो उसने किया है, उसके लिए उसकी आराधना करते हैं।

   फिर हम वहाँ हम जो उसके लोग हैं, अपने चित्र को देखते हैं, अपने सृष्टिकर्ता के हाथों के द्वारा मिट्टी से बनाए हुए, और भेड़ों के समान हरी-हरी चराइयों में ले जाए गए (पद 3); वह हमारा ध्यान रखने और पालन-पोषण करने वाला प्रेमी चरवाहा है।

   अन्ततः हम परमेश्वर के महान और महिमामय निवास-स्थान को देखते हैं – और उस फाटक को जिसमें होकर उसके छुड़ाए हुए लोग उसकी उपस्थिति में आने के लिए धन्यवाद और स्तुति करते हुए प्रवेश करेंगे (पद 4)।

   हमारे महान परमेश्वर द्वारा प्रेरित कैसा अद्भुत चित्रण है। हमारा परमेश्वर पिता भला, प्रेम करने वाला और विश्वासयोग्य परमेश्वर है। इसलिए इसमें कोई अचरज की बात नहीं कि उसकी महानता का आनन्द मनाने के लिए हमें अनन्त काल लगेगा। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर को जानने से अधिक अद्भुत और कुछ नहीं है।

और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। - फिलिप्पियों 3:9-10

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।


एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30



मंगलवार, 21 नवंबर 2017

महान पुरुस्कार


   प्रयास के प्रत्येक क्षेत्र में कोई न कोई पुरुस्कार ऐसा होता है जिसे उस क्षेत्र के लिए पहचान तथा सफलता का सर्वोच्च पुरुस्कार माना जाता है, जैसे कि ओलंपिक खेल स्पर्धाओं में मिलने वाला स्वर्ण पदक, गायिकी के लिए दिया जाने वाला ग्रैमी पुरुस्कार, सिनेमा के क्षेत्र में ऐकेडमी पुरुस्कार, वैज्ञानिक तथा अन्य क्षेत्रों की उपलब्धियों के लिए नोबेल पुरुस्कार, आदि। ये सभी पुरुस्कार महत्वपूर्ण हैं। परन्तु एक सबसे महान पुरुस्कार है, और उसे कोई भी प्राप्त कर सकता है।

   प्रेरित पौलुस प्रथम ईसवीं में होने वाली खेल स्पर्धाओं के लिए खिलाड़ियों द्वारा पुरुस्कार जीतने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा देने के बारे में भली-भांति जानता था। इस बात को ध्यान में रखते हुए, उसने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पत्री में लिखा: "परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है" (फिलिप्पियों 3:7)। क्यों? क्योंकि उसके हृदय ने एक नया उद्देश्य स्वीकार किया था: "मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं" (पद 10)। इसलिए, पौलुस ने कहा, "...उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था" (पद 12)। अपनी इस दौड़ को भली-भांति पूरा कर लेने का पुरुस्कार उसके लिए धार्मिकता का मुकुट था (2 तिमुथियुस 4:8)।

   हम में से प्रत्येक उस पुरुस्कार को पाने के लिए प्रयास कर सकता है, यह जानते हुए कि ऐसा करने से हम प्रभु का आदर करते हैं। प्रतिदिन अपने दैनिक कार्यों को प्रभु की महिमा के लिए करते रहने से हम उस महान पुरुस्कार की ओर बढ़ते जाते हैं - उस स्वर्गीय पुरुस्कार की ओर जिसके लिए परमेश्वर, मसीह यीशु में होकर हमें बुलाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह के लिए जो कुछ भी इस जीवन में किया जाता है, 
उसका पुरुस्कार आने वाले जीवन में अवश्य मिलेगा।

भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं। - 2 तिमुथियुस 4:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:7-14
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। 
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था। 
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। 
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3


बुधवार, 7 जून 2017

सर्वोत्तम तथा महानतम


   एक बार अराधना के लिए चर्च में बठे हुए, मेरी दृष्टि कई पंक्ति आगे एक शिशु पर गई। वह अपने पिता की गोद में था और उनके कंधे के ऊपर से बड़ी-बड़ी आँखों से इधर-उधर देख रहा था। उसके मुँह से लार बह रही थी, वह अपनी ऊँगलियों को मुँह में लेकर चूस रहा था, परन्तु अपने अँगूठे को मुँह तक नहीं ला पा रहा था और वह आस-पास बैठे हुए लोगों को देखते हुए कभी कभी मुस्कुरा देता था। उसकी हरकतों के कारण मेरा ध्यान पादरी द्वारा दिए जा रहे सन्देश से भटक कर बार-बार उस सुन्दर शिशु तथा उसकी अटखेलियों की ओर जा रहा था।

   ध्यान भटकाने वाली बातें अनेकों रूप और आकार में आती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम दो बहनों, मरियम और मार्था का उल्लेख पाते हैं जिन्होंने प्रभु यीशु को अपने घर आने का निमंत्रण दिया। उन में से मार्था के लिए प्रभु यीशु से ध्यान भटकाने वाली बात प्रभु की सेवा-टहल करना बन गई; बजाए प्रभु के पास बैठकर उसकी बातें सुनने के, मार्था प्रभु के लिए पकाने-परोसने में लग गई। लेकिन मरियम प्रभु के साथ ही बैठी रही, उसकी बातें सुनती रही। अपने सेवा-टहल के प्रयासों से थक कर जब मार्था ने कुड़कुड़ाते हुए प्रभु से शिकायत की तब प्रभु यीशु ने उसे समझाया, "...मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा" (लूका 10:41-42)।

   मार्था से कहे गए प्रभु यीशु के ये शब्द हम मसीही विश्वासियों को स्मरण करवाते हैं कि प्रभु यीशु के साथ हमारे सुदृढ़ तथा लगातार बढ़ते हुए संबंधों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है शान्त होकर उसके पास बैठकर उसकी सुनना, न कि उसे प्रसन्न करने के प्रयासों में अपनी इच्छानुसार कुछ भला लगने वाला करने का प्रयास करना। कहा जाता है कि बहुधा बेहतर बातें सर्वोत्तम बातों की शत्रु होती हैं - बेहतर के कारण, हम सर्वोत्तम से ध्यान हटा लेते हैं। प्रभु यीशु के अनुयायियों के लिए, इस जीवन में सर्वोत्तम तथा महानतम बात है प्रभु यीशु को निकटता से जानना और उसके साथ-साथ चलना। हम मसीही विश्वासियों के लिए प्रभु यीशु की इच्छा जानकार, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहने से बढ़कर और कुछ भी नहीं है, क्योंकि प्रभु इसी से प्रसन्न होता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हे प्रभु मुझे सिखाएं कि मैं आपको निकटता से जान सकूँ; 
क्योंकि तब ही मैं आपसे सबसे बढ़कर प्रेम करने पाऊँगा।

शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। - 1 शमूएल 15:22 

बाइबल पाठ: लूका 10:38-42
Luke 10:38 फिर जब वे जा रहे थे, तो वह एक गांव में गया, और मार्था नाम एक स्त्री ने उसे अपने घर में उतारा।
Luke 10:39 और मरियम नाम उस की एक बहिन थी; वह प्रभु के पांवों के पास बैठकर उसका वचन सुनती थी। 
Luke 10:40 पर मार्था सेवा करते करते घबरा गई और उसके पास आकर कहने लगी; हे प्रभु, क्या तुझे कुछ भी सोच नहीं कि मेरी बहिन ने मुझे सेवा करने के लिये अकेली ही छोड़ दिया है? सो उस से कह, कि मेरी सहायता करे। 
Luke 10:41 प्रभु ने उसे उत्तर दिया, मार्था, हे मार्था; तू बहुत बातों के लिये चिन्‍ता करती और घबराती है। 
Luke 10:42 परन्तु एक बात अवश्य है, और उस उत्तम भाग को मरियम ने चुन लिया है: जो उस से छीना न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 17


शनिवार, 21 जनवरी 2017

निर्भर


   अफ्रीका के एक देश घाना के राष्ट्रगीत की प्रथम पंक्ति है, "परमेश्वर हमारे देश घाना को आशीष दे।" अफ्रीका के कुछ अन्य देशों के राष्ट्रगानों में भी कुछ ऐसी ही बात पाई जाती है: "हे यूगाण्डा, परमेश्वर तुझे संभाले रहे", "परमेश्वर हमारे देश को आशीष दे" (दक्षिणी अफ्रीका), "हे सृष्टि के महान परमेश्वर, हमारे महान उद्देश्य को दिशा दे" (नाईजीरिया)। देश के राष्ट्रगानों को प्रार्थना के रूप में प्रयोग करके, उनके संस्थापक पिताओं ने परमेश्वर से देश और वहाँ के लोगों के लिए आशीष चाही। ना केवल अफ्रीका में वरन संसार भर के अनेकों अन्य देशों के राष्ट्रगानों में परमेश्वर को सृष्टिकर्ता और पालनहार माना गया है। राष्ट्रगानों की अन्य पंक्तियों में भी, जातिवाद, राजनैतिक विचार-धारा और सामाजिक असमानताओं द्वारा विभाजित समाज के लिए परमेश्वर से परस्पर मेल-मिलाप, परिवर्तन और आशा की प्रार्थनाएं हैं।

   लेकिन फिर भी आज अनेकों राष्ट्रीय अगुए और नागरिक परमेश्वर को भुला कर, इन पंक्तियों के अनुसार नहीं वरन अपनी ही इच्छा के अनुसार जीवन व्यतीत करते हैं, विशेषकर तब जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो। परन्तु परमेश्वर को स्मरण करने के लिए युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, आतंकियों के हमलों, बीमारियों, राजनैतिक चुनावों की हिंसा आदि की प्रतीक्षा क्यों की जाए? परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अपने लोगों, इस्त्राएलियों को मूसा के द्वारा चिताया कि वे परमेश्वर को भुला ना दें और उसके मार्गों पर चलना ना छोड़ें, विशेषकर तब जब जीवन अच्छे से चल रहा हो (व्यवस्थाविवरण 8:11)। बाइबल में एक अन्य स्थान पर परमेश्वर हमें सचेत करता है कि: "अपनी जवानी के दिनों में अपने सृजनहार को स्मरण रख, इस से पहिले कि विपत्ति के दिन और वे वर्ष आएं, जिन में तू कहे कि मेरा मन इन में नहीं लगाता" (सभोपदेशक 12:1)।

   ऐसे समयों में, जब हम स्वस्थ और सबल होते हैं, परमेश्वर के निकट आना और बने रहना हमें उन समयों के लिए तैयार करता है जब हम कठिन परिस्थितियों में आएं; और तब ऐसे में हम निःसंकोच अपने सहारे और आशा के लिए उस पर निर्भर हो सकते हैं। - लॉरेंस दरमानी


अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर पिता को स्मरण रखने को अपना व्यक्तिगत गान बना लें।

मैं याह के बड़े कामों की चर्चा करूंगा; निश्चय मैं तेरे प्राचीन काल वाले अद्भुत कामों को स्मरण करूंगा। मैं तेरे सब कामों पर ध्यान करूंगा, और तेरे बड़े कामों को सोचूंगा। हे परमेश्वर तेरी गति पवित्रता की है। कौन सा देवता परमेश्वर के तुल्य बड़ा है? अद्भुत काम करने वाला ईश्वर तू ही है, तू ने अपने देश देश के लोगों पर अपनी शक्ति प्रगट की है।  - भजन 77:11-14

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 8:11-18
Deuteronomy 8:11 इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे; 
Deuteronomy 8:12 ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो, और अच्छे अच्छे घर बनाकर उन में रहने लगे, 
Deuteronomy 8:13 और तेरी गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की बढ़ती हो, और तेरा सोना, चांदी, और तेरा सब प्रकार का धन बढ़ जाए, 
Deuteronomy 8:14 तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है, 
Deuteronomy 8:15 और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहां तेज विष वाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्ठान से जल निकाला, 
Deuteronomy 8:16 और तुझे जंगल में मन्ना खिलाया, जिसे तुम्हारे पुरखा जानते भी न थे, इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के अन्त में तेरा भला ही करे। 
Deuteronomy 8:17 और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई। 
Deuteronomy 8:18 परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14:1-21


शुक्रवार, 20 जनवरी 2017

उपस्थिति


   मुझे मिशिगन झील पर सूर्यास्त की तसवीरें लेना पसन्द है। उन तसवीरों में से कुछ में तो एक समान हल्के रंग दिखाई देते हैं, तो कुछ में कई चटकीले और चमकदार रंग होते हैं। कभी सूर्य धीमे से झील के पीछे ओझल हो जाता है, तो कभी अन्य समय पर उसका ढलना एक अग्निमय विस्फोट के समान होता है। चाहे तसवीरों में हो या प्रत्यक्ष मुझे वह नाटकीय अधिक पसन्द है।

   संसार में परमेश्वर के कार्य के संबंध में भी मेरी पसन्द ऐसी ही है। मुझे अपनी प्रार्थनाओं के नाटकीय उत्तर मिलना अधिक पसन्द है बजाए इसके कि दैनिक आवश्यकताओं के सामान्य तथा शान्त प्रबंध होते रहें। परन्तु मैं यह जानती हूँ कि दोनों ही परमेश्वर की ओर से होते हैं।

   परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता एलिय्याह की पसन्द भी संभवतः ऐसी ही रही होगी। परमेश्वर द्वारा अपनी उपस्थिति दर्शाने के लिए उसकी सामर्थ्य के महान प्रदर्शनों का वह आदि हो गया था। जब एलिय्याह ने प्रार्थना की तो परमेश्वर ने उत्तर में नाटकीय रीति से अपनी उपस्थिति को दिखाया - पहले बाल के पुजारियों की पराजय में और फिर एक लंबे और विनाशकारी अकाल के अन्त द्वारा (1 राजा 18)। लेकिन फिर एलिय्याह भयभीत होकर अपने प्राण बचाने के लिए भागने लगा। परमेश्वर ने अपना दूत भेजकर उसे भोजन करवाया और सामर्थ दी कि वह अपनी यात्रा पूरी कर सके। चालीस दिन की यात्रा के पश्चात वह होरेब पहुँचा। वहाँ परमेश्वर ने उसे दिखाया कि अब परमेश्वर उसके साथ नाटकीय आश्चर्यकर्मों द्वारा नहीं वरन धीमी शान्त आवाज़ में बातें कर रहा है (19:11-12)।

   यदि आज आप इसलिए निराश हैं क्योंकि परमेश्वर अपनी उपस्थिति अपनी महिमा के तेजोमय प्रदर्शन द्वार नहीं दर्शा रहा है, तो ध्यान कीजिए कि शान्त परिस्थितियों, आपकी देख-भाल, आपकी सुरक्षा और आवश्यकताओं की पूर्ति के द्वारा वह आपके साथ अपनी उपस्थिति दर्शा रहा है; दोनों ही आपके साथ उसकी उपस्थिति के सूचक हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर महान कार्यों में भी है और छोटे कार्यों में भी।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: 1 राजा 19:1-16
1 Kings 19:1 तब अहाब ने ईज़ेबेल को एलिय्याह के सब काम विस्तार से बताए कि उसने सब नबियों को तलवार से किस प्रकार मार डाला। 
1 Kings 19:2 तब ईज़ेबेल ने एलिय्याह के पास एक दूत के द्वारा कहला भेजा, कि यदि मैं कल इसी समय तक तेरा प्राण उनका सा न कर डालूं तो देवता मेरे साथ वैसा ही वरन उस से भी अधिक करें। 
1 Kings 19:3 यह देख एलिय्याह अपना प्राण ले कर भागा, और यहूदा के बेर्शेबा को पहुंच कर अपने सेवक को वहीं छोड़ दिया। 
1 Kings 19:4 और आप जंगल में एक दिन के मार्ग पर जा कर एक झाऊ के पेड़ के तले बैठ गया, वहां उसने यह कह कर अपनी मृत्यु मांगी कि हे यहोवा बस है, अब मेरा प्राण ले ले, क्योंकि मैं अपने पुरखाओं से अच्छा नहीं हूँ। 
1 Kings 19:5 वह झाऊ के पेड़ तले लेटकर सो गया और देखो एक दूत ने उसे छूकर कहा, उठ कर खा। 
1 Kings 19:6 उसने दृष्टि कर के क्या देखा कि मेरे सिरहाने पत्थरों पर पकी हुई एक रोटी, और एक सुराही पानी धरा है; तब उसने खाया और पिया और फिर लेट गया। 
1 Kings 19:7 दूसरी बार यहोवा का दूत आया और उसे छूकर कहा, उठ कर खा, क्योंकि तुझे बहुत भारी यात्रा करनी है। 
1 Kings 19:8 तब उसने उठ कर खाया पिया; और उसी भोजन से बल पाकर चालीस दिन रात चलते चलते परमेश्वर के पर्वत होरेब को पहुंचा। 
1 Kings 19:9 वहां वह एक गुफा में जा कर टिका और यहोवा का यह वचन उसके पास पहुंचा, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम? 
1 Kings 19:10 उन ने उत्तर दिया सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त मुझे बड़ी जलन हुई है, क्योकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, तेरी वेदियों को गिरा दिया, और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है, और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं। 
1 Kings 19:11 उसने कहा, निकलकर यहोवा के सम्मुख पर्वत पर खड़ा हो। और यहोवा पास से हो कर चला, और यहोवा के साम्हने एक बड़ी प्रचण्ड आन्धी से पहाड़ फटने और चट्टानें टूटने लगीं, तौभी यहोवा उस आन्धी में न था; फिर आन्धी के बाद भूंईडोल हूआ, तौभी यहोवा उस भूंईडोल में न था। 
1 Kings 19:12 फिर भूंईडोल के बाद आग दिखाई दी, तौभी यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाईं दिया। 
1 Kings 19:13 यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जा कर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ। फिर एक शब्द उसे सुनाईं दिया, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम? 
1 Kings 19:14 उसने कहा, मुझे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त बड़ी जलन हुई, क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, और तेरी वेदियों को गिरा दिया है और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है; और मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं। 
1 Kings 19:15 यहोवा ने उस से कहा, लौटकर दमिश्क के जंगल को जा, और वहां पहुंचकर अराम का राजा होने के लिये हजाएल का, 
1 Kings 19:16 और इस्राएल का राजा होने को निमशी के पोते येहू का, और अपने स्थान पर नबी होने के लिये आबेलमहोला के शापात के पुत्र एलीशा का अभिषेक करना।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58


शनिवार, 12 नवंबर 2016

कलाकृति


   बेलफास्ट, उत्तरी आयरलैंड में जो 11 एकड़ के खाली मैदान से आरंभ हुआ था, उसका अन्त ब्रिटेन के सबसे बड़े भूमिचित्र के रूप में हुआ। कलाकार जॉर्ज रॉड्रिगुएज़-गेराडा द्वारा बनाई गई "विश" नामक यह कलाकृति लकड़ी की 30,000 खूँटियों, 2000 टन मिट्टी, 2000 टन रेत और अनेकों अन्य सामग्री जैसे कि घास, पत्थर और रस्सी आदि से बनी है।

   इसके बनने के आरंभ में केवल कलाकार ही जानता था कि उसकी कलाकृति का अन्तिम स्वरूप क्या होगा। जॉर्ज ने मज़दूरों और स्वयंसेवकों को इस कार्य के लिए भरती किया, अपने साथ लिया; और वे उसके निर्देशों के अनुसार सामग्री को ढोने और एक से दूसरे स्थान पर पहुँचाने में लगे रहे। यह सब कार्य करते समय उन्हें ज़रा भी आभास नहीं था कि कुछ विस्मित कर देने वाला तैयार होकर प्रगट होने वाला है; लेकिन ऐसा ही हुआ। धरती पर से वह चित्र कुछ विशेष प्रतीत नहीं होता है; लेकिन ऊपर आकाश से देखने वाले एक छोटी लड़की का मुस्कुराता हुए चेहरे का एक विशाल चित्र देखने पाते हैं।

   परमेश्वर इस संसार में, हम मसीही विश्वासियों को साथ लेकर इससे भी कुछ विलक्षण और महान कर रहा है। जैसा प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विशवासियों को लिखा, हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं (1 कुरिन्थियों 3:9) जिनमें होकर वह इस कार्य को साकार कर रहा है। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर अपने लोगों को स्मरण कराता है कि वही है जो  "...पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है; और पृथ्वी के रहने वाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल की नाईं फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है" (यशायाह 40:22)।

   आज चाहे हम परमेश्वर द्वारा बनाई जा रही इस कलाकृति का अन्तिम स्वरूप नहीं देख अथवा समझ पाते हैं, लेकिन फिर भी हम उसके कार्य में उसके निर्देशानुसार लगे रहते हैं, इस विश्वास के साथ कि हम एक अद्भुत कलाकृति का भाग हैं - ना केवल उसके बनाने में वरन उस कलाकृति में भी। अन्ततः वह एक ऐसी कलाकृति होगी जो बनेगी तो पृथ्वी पर, परन्तु देखी जाएगी स्वर्ग से। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर हमें अपनी महान कलाकृति को बनाने में प्रयुक्त कर रहा है।

क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। - 1 कुरिन्थियों 3:9 

बाइबल पाठ: यशायाह 40:21-31
Isaiah 40:21 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? क्या तुम को आरम्भ ही से नहीं बताया गया? क्या तुम ने पृथ्वी की नेव पड़ने के समय ही से विचार नहीं किया? 
Isaiah 40:22 यह वह है जो पृथ्वी के घेरे के ऊपर आकाशमण्डल पर विराजमान है; और पृथ्वी के रहने वाले टिड्डी के तुल्य है; जो आकाश को मलमल की नाईं फैलाता और ऐसा तान देता है जैसा रहने के लिये तम्बू ताना जाता है; 
Isaiah 40:23 जो बड़े बड़े हाकिमों को तुच्छ कर देता है, और पृथ्वी के अधिकारियों को शून्य के समान कर देता है।
Isaiah 40:24 वे रोपे ही जाते, वे बोए ही जाते, उनके ठूंठ भूमि में जड़ ही पकड़ पाते कि वह उन पर पवन बहाता और वे सूख जाते, और आंधी उन्हें भूसे की नाईं उड़ा ले जाती है।
Isaiah 40:25 सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है। 
Isaiah 40:26 अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में से कोई बिना आए नहीं रहता।
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52
  • इब्रानियों 9


सोमवार, 18 जनवरी 2016

महान


   कुछ लोग अपने आप को एक विशाल खाई में कहीं खोए हुए एक छोटे से कंकड़ के समान देखते हैं; परन्तु हम अपने आप को चाहे जितना भी नगण्य समझें, हम सभी परमेश्वर द्वारा बहुतायत से प्रयोग किए जाने की क्षमता रखते हैं। सुप्रसिद्ध मसीही प्रचार्क मार्टिन लूथर किंग ने 1968 के आरंभ में, परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 10 में प्रभु यीशु द्वारा कही गई बातों पर आधारित एक सन्देश में कहा था, "प्रत्येक जन महान हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक जन मसीही सेवकाई कर सकता है। मसीही सेवकाई के लिए आपके पास किसी कॉलेज की कोई डिग्री होने की आवश्यकता नहीं है; आपको अपनी भाषा के व्याकरण में अच्छा होने की आवश्यकता नहीं है; आपको प्रसिद्ध दार्शनिकों प्लेटो और सुकरात के बारे में जानने की आवश्यकता नहीं है...आपके पास केवल अनुग्रह से भरा हृदय और प्रेम से जन्मी आत्मा होनी चाहिए।"

   जब प्रभु यीशु के शिष्य आपस में विवाद कर रहे थे कि स्वर्ग में अधिक आदर के स्थान किसे मिलेंगे, तो प्रभु ने उन से कहा, "...जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (मरकुस 10:43-45)।

   मैं अपने और हम सब के बारे में सोचता हूँ; क्या महानता के विषय में हमारी समझ प्रभु की समझ के अनुरूप है? क्या हम खुशी से सेवा करने और ऐसे कार्य करने को तैयार रहते हैं जहाँ हमें कोई नहीं देखता, जिसके बारे में कोई नहीं जानता? हमारी सेवा का उद्देश्य क्या है - प्रभु को प्रसन्न करना या लोगों से प्रशंसा प्राप्त करना? प्रभु हमारे हर छोटे से छोटे कार्य की भी जानकारी रखता है और उसके लिए किया गया कोई कार्य बिना प्रतिफल नहीं जाएगा: "जो कोई एक कटोरा पानी तुम्हें इसलिये पिलाए कि तुम मसीह के हो तो मैं तुम से सच कहता हूं कि वह अपना प्रतिफल किसी रीति से न खोएगा" (मरकुस 9:41)।

   यदि हम समर्पित सेवक बनकर अपने स्वामी की सच्ची सेवा करेंगे, तो हमारे जीवन प्रभु यीशु की ओर संकेत करेंगे जो वास्तव में महान है, और अपने समय तथा तरीके से वह अपने सेवकों को भी महान करता है। - वैर्नन ग्राउंड्स


मसीह यीशु के नाम में किए गए छोटे छोटे कार्य भी प्रभु की दृष्टि में महान होते हैं।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। - 1 पतरस 5:6 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50


शनिवार, 21 नवंबर 2015

नाम


   हमारे साथ मिशिगन में कुछ समय बिताने के बाद हमारी एक वर्षीय पोती मैगी और उसका परिवार वापस अपने घर मिसूरी चले गए। मैगी की माँ ने हमें बताया कि घर वापस लौटने के कुछ दिन बाद तक मैगी घर के अन्दर घूमते-फिरते बड़े आनन्द के साथ ’मिशिगन’, ’मिशिगन’ कहती रहती थी। उस नाम में कुछ था जिसने मैगी को आकर्षित किया; शायद उसका उच्चारण, शायद वह आनन्दायक समय जो उसने मिशिगन में हमारे साथ बिताया। वह क्या आकर्षण था यह एक वर्ष के बच्चे के विषय में कहना तो संभव नहीं है, लेकिन उस नाम ’मिशिगन’ ने मैगी पर ऐसा प्रभाव डाला था कि वह उसे बार बार लेने से रुक नहीं पा रही थी।

   यह मुझे एक और नाम का स्मरण दिलाता है - हमारे तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु का नाम - यीशु, जिस नाम के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा गया है, "...परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है" (फिलिप्पियों 2:9)। क्यों यह नाम हम मसीही विश्वासियों को इतना प्रीय है? क्योंकि यह हमारे उद्धारकर्ता, हमें पापों से मुक्ति देने वाले, हमारी चिंता और रक्षा करने वाले, हमें अनन्त जीवन और परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार देने वाले का नाम है। जो संज्ञाएं प्रभु यीशु का वर्णन करती हैं उनमें कितनी गहराई है! जब हम यीशु के महान नाम का उल्लेख उन से करते हैं जिन्हें उसे मुक्तिदाता के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है, तो हम उन्हें बता सकते हैं कि उसने हमारे तथा संसार के सभी लोगों के लिए क्या कुछ किया है, क्या कुछ सेंत-मेंत उपलब्ध करवाया है।

   यीशु हमारा उद्धारकर्ता है, उसने अपने लहु के द्वारा हमें छुड़ाया है, हम ने स्वेच्छा से अपने जीवन उसे समर्पित किए हैं और उसे अपना प्रभु स्वीकार किया है; और अब अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर हम सब लोगों से बाइबल की बात निःसंकोच कह सकते हैं कि यीशु के नाम के अतिरिक्त और किसी नाम में उद्धार नहीं है (प्रेरितों 4:12), इसलिए संपूर्ण स्वर्ग और सारी पृथ्वी और उसके सब निवासी यीशु नाम को महिमा दें उसका आदर करें। - डेव ब्रैनन


समस्त सृष्टि में सबसे बहुमूल्यतम नाम है यीशु।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:5-11
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3


गुरुवार, 15 मई 2014

दूर और निकट


   दो स्वस्थ आँखें होना ही स्पष्टता से देख पाने के लिए काफी नहीं है - यह मैंने अपने व्यक्तिगत अनुभव से जाना है। मेरी आंख का पर्दा खराब हो गया था जिसके लिए मुझे कई ऑपरेशनों से होकर निकलना पड़ा। उन ऑपरेशनों के द्वारा मेरी दोनों आँखों को ठीक से दिखाई तो देने लगा, लेकिन वे दोनों परस्पर ताल-मेल के साथ कार्य नहीं कर रहीं थीं। एक आँख से दूर की चीज़ें स्पष्ट दिखती थीं तो दूसरी से पास की, और एक साथ मिलकर कार्य करने की बजाए, दोनों ही एक दूसरे पर हावी होने के प्रयास में रहती थीं, जिससे मैं किसी भी चीज़ पर दृष्टि केंद्रित कर के उसे स्पष्ट देख नहीं पाती थी। अन्ततः 3 महीने के अंतराल के बाद मुझे एक नया चश्मा दिया गया जिसकी सहायता से मैं दृष्टि केंद्रित कर के स्पष्ट देखने पाई।

   कुछ ऐसा ही परमेश्वर के प्रति हमारे दृष्टिकोण के साथ भी होता है। कुछ लोग परमेश्वर को निकटता से जान पाने पर ही - अर्थात उसे अपने प्रतिदिन के जीवन में निकटता से स्क्रीय अनुभाव कर के ही उस पर अपना ध्यान केंद्रित करने पाते हैं। अन्य लोगों को दूर का परमेश्वर ही स्पष्ट दिखाई देता है - अर्थात वे उसे किसी भी सोच-विचार से ऊपर और महान, सारी सृष्टि पर सामर्थी, प्रभावी और महिमामय जान कर ही उस पर केंद्रित रहने पाते हैं।

   जब इन दोनों दृष्टिकोणों में विवाद हो और सहमति नहीं बने, तब परमेश्वर का वचन बाइबल ही मेरे उस चश्मे के समान कार्य करती है, दोनों दृष्टिकोणों में तालमेल बनाती है और यह दिखाती है कि दोनों ही दृष्टिकोण सही हैं। राजा दाऊद ने अपने लिखे भजन - भजन 145 में दोनों ही दृष्टिकोणों को रखा है। वह कहता है: "यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है" (पद 3); और फिर यह भी कि, "जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है" (पद 18)।

   हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमारे इतना निकट है कि हमारी हर दशा को जानता है और हमारी हर प्रार्थना को सुनता है; लेकिन साथ ही इतना महान, महिमामय और सामर्थी है कि हमारी हर समस्या एवं आवश्यकता से कहीं बड़ा और उन्हें पूरा करने की क्षमता रखने वाला है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर इतना बड़ा है कि हमारी छोटी से छोटी आवश्यकता को समझ सकता है, उसे पूरा कर सकता है।

देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं? - व्यवस्थाविवरण 4:7

बाइबल पाठ: भजन 145
Psalms 145:1 हे मेरे परमेश्वर, हे राजा, मैं तुझे सराहूंगा, और तेरे नाम को सदा सर्वदा धन्य कहता रहूंगा। 
Psalms 145:2 प्रति दिन मैं तुझ को धन्य कहा करूंगा, और तेरे नाम की स्तुति सदा सर्वदा करता रहूंगा। 
Psalms 145:3 यहोवा महान और अति स्तुति के योग्य है, और उसकी बड़ाई अगम है। 
Psalms 145:4 तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा। 
Psalms 145:5 मैं तेरे ऐश्वर्य की महिमा के प्रताप पर और तेरे भांति भांति के आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करूंगा। 
Psalms 145:6 लोग तेरे भयानक कामों की शक्ति की चर्चा करेंगे, और मैं तेरे बड़े बड़े कामों का वर्णन करूंगा। 
Psalms 145:7 लोग तेरी बड़ी भलाई का स्मरण कर के उसकी चर्चा करेंगे, और तेरे धर्म का जयजयकार करेंगे। 
Psalms 145:8 यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 145:9 यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है। 
Psalms 145:10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे! 
Psalms 145:11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे; 
Psalms 145:12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें। 
Psalms 145:13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी। 
Psalms 145:14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। 
Psalms 145:15 सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है। 
Psalms 145:16 तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है। 
Psalms 145:17 यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है। 
Psalms 145:18 जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। 
Psalms 145:19 वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है। 
Psalms 145:20 यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है। 
Psalms 145:21 मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 5-7