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Thursday, June 30, 2016

वापसी


   कैड पेनिंगटन अमेरिकन फुटबॉल के भूतपूर्व खिलाड़ी हैं जिन्हें बारंबार ऐसी चोटें आई हैं जिनसे उनका पेशेवर फुटबॉल खेलना खतरे में पड़ा। दो बार अपनी चोटों के कारण उन्हें ऑपरेशन, फिर महीनों तक फिज़ियोथैरपी और उसके बाद वापस खेल के मैदान पर लौटने के प्रशिक्षण से होकर निकलना पड़ा। लेकिन दोनों ही बार ना केवल वे पेशेवर खेल में वापस आए वरन खेल का इतना श्रेष्ठ प्रदर्शन किया कि राष्ट्रीय फुटबॉल लीग ने उन्हें वर्ष का पुनःवापसी खिलाड़ी घोषित किया। पेनिंगटन के लिए उनके प्रयास फुटबॉल में उनकी पुनःवापसी के संकल्प की दृढ़ता का प्रगटिकरण थे।

   आत्मिक जीवन में जब पाप परमेश्वर से हमारे संबंध को बाधित करते हैं और उसके लिए हमारी सेवकाई को दरकिनार कर देते हैं, तो केवल हमारा दृढ़ निश्चय ही हमें परमेश्वर के साथ सही संबंध में और उसकी सेवकाई में लौटा कर नहीं लाता। जब पाप हमारे अयोग्य हो जाने का कारण होता है, तो परमेश्वर के पास हमारी पुनःवापसी का मार्ग पाप के अंगीकार और पश्चताप के द्वारा बनता है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)।

   हमारे लिए आत्मिक पराजय से लौट पाना भी उसी प्रभु के अनुग्रह से संभव हो पाता है जिसने हमारे तथा समस्त संसार के सभी लोगों के उद्धार के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया; और इसी से हमें आशा बंधती है। प्रभु यीशु मसीह जो हमारे लिए बलिदान हुआ, हमसे अनन्त प्रेम रखता है, और जैसे ही हम अपने पापों और कमियों को उसके सामने मान लेते हैं वह अपने अनुग्रह से हमें क्षमा कर देता है।

   अंगीकार के द्वारा ही हम प्रभु परमेश्वर के साथ संगति और संबंधों के पुनःस्थापन की वापसी को अनुभव कर पाते हैं; और यही किसी के भी जीवन में होने वाली सबसे महान वापसी है। - बिल क्राऊडर


पश्चाताप और अंगीकार ही पुनःस्थापन का मार्ग है।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:1-10
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। 
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए। 
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 17-19
  • प्रेरितों 10:1-23


Wednesday, June 29, 2016

प्रक्रिया


   विलियम ज़िनसर ने अपनी पुस्तक On Writing Well में लिखा है कि बहुत से लेखक अपने लेखन के अन्तिम परिणाम की चिंता से घिरे रहते हैं। वे अपने लेखन को बेच पाने की चिंता से इतने अभिभूत रहते हैं कि वे लिखते समय ध्यान से सोचने, योजना बनाने और प्रबंधन करने की प्रक्रिया को सीखने की उपेक्षा कर बैठते हैं। परिणाम होता है एक अस्त-व्यस्त पाण्डुलिपि, क्योंकि लेखक ने समाप्ति रेखा पर अपनी नज़र तो लगाए रखी किंतु उस रेखा तक की दौड़ को ध्यान देकर नहीं दौड़ा।

   मसीही विश्वासी एवं प्रचारक तथा लेखक ए. डबल्यु, टोज़र ने अपनी पुस्तक The Root of the Righteous में इसी सिद्धांत को हमारे आत्मिक जीवनों में लागू करने की बात कही है। टोज़र ने बताया है कि कैसे हम केवल फल लाने पर ध्यान देने की चिंता में उस जड़ के बारे में सोचना छोड़ देते हैं जिसके कारण वृक्ष और फल हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने प्रथम शताबदी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी दूसरी पत्री में चिताया कि मसीह के समान जीवन जी पाने और परमेश्वर के लिए प्रभावी सेवकाई तक पहुँच पाने के लिए एक प्रक्रिया से होकर निकलना पड़ता है। पतरस ने आत्मिक जीवन में बढोतरी के लिए एक के ऊपर दूसरे आधारित रहने वाले आठ क्षेत्रों को बताया: विश्वास, सदगुण, समझ, संयम, धीरज, भक्ति, भाईचारे की प्रीति और प्रेम (2 पतरस 1:5-7)। फिर निष्कर्ष में पतरस ने बताया कि यदि मसीही विश्वासी इन सदगुणों में बढ़ते रहेंगे "...तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी" (2 पतरस 1:8)।

   परमेश्वर ने हम मसीही विश्वासियों को अपनी निकटता में बढ़ने और उसे और भली-भाँति जानने की अद्भुत प्रक्रिया में सम्मिलित होने के लिए बुलाया है; साथ ही परमेश्वर ने हमें यह आश्वासन भी दिया है कि यदि हम इस प्रक्रिया के भागी होंगे तो हम उसके नाम के लिए आदर का, तथा उसकी प्रभावी सेवकाई करने वाले ठहरेंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही जीवन एक प्रक्रिया है जिसमें विश्वासी जीवन की हर बात में
 परमेश्वर पर पूर्ण निर्भरता रखना सीखते हैं।

सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है। - 1 कुरिन्थियों 15:58

बाइबल पाठ: 2 Peter 1:2-11
2 Peter 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए। 
2 Peter 1:3 क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। 
2 Peter 1:4 जिन के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ। 
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ। 
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति। 
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ। 
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी। 
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है। 
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे। 
2 Peter 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43


Tuesday, June 28, 2016

आकर्षक


   पुराने दिनों की कहानी है, एक युवक जीविका कमाने के लिए ट्रेन में सेब बेचने का प्रयास कर रहा था। वह युवक सेबों से भरा हुआ थैला लिए हुए, ट्रेन के डब्बे के एक छोर से दुसरे तक कहता हुआ निकला, "सेब! क्या आप सेब खरिदना चाहेंगे?" डब्बे के दूसरे छोर तक पहुँचने पर उसका थैला सेबों से भरा हुआ था और जेब पैसों से खाली थी। एक व्यक्ति ने उसकी निराश हालत देखकर, उसे एक तरफ बुलाया और उससे एक सेब माँगा; उस सेब को लेकर वह डब्बे के अगले छोर पर गया, सेब को रुमाल से अच्छी तरह पोंछकर चमकता हुआ साफ किया और फिर उसे खाता हुआ डब्बे की दूसरे छोर की ओर चल निकला, साथ ही बोलता गया कि वह सेब कितना ताज़ा और अच्छे स्वाद का था। अब उसने उस युवक से कहा कि अब वह उन सेबों को बेचने का दोबारा प्रयास करे; इस बार उस युवक के सारे सेब बिक गए। अन्तर? एक व्यक्ति के व्यावाहरिक उदाहरण ने सेबों को खरीददारों के लिए आकर्षक कर दिया था।

   यह कहानी प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास से मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को लोगों तक पहुँचाने का एक मार्ग सिखाती है - इस अद्भुत सुसमाचार को लोगों के लिए आकर्षक बनाएं; लोगों को दिखाएं कि इस सुसमाचार पर लाए गए विश्वास ने कैसे आपके जीवन में परिवर्तन किया है। परमेश्वर के वचन बाइबल की भी यही शिक्षा है; प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखा: "अवसर को बहुमूल्य समझ कर बाहर वालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो" (कुलुस्सियों 4:5)। जब हम अपने जीवनों में हमारे मसीही विश्वास में आने से आए परिवर्तन और सदगुणों जैसे, दया, प्रेम और अनुकंपा को दूसरों को प्रदर्शित करते हैं, तो हमारा जीवन औरों के लिए आकर्षक हो जाता है, उन्हें सोचने पर बाध्य करता है कि ऐसा परिवर्तन कैसे आया; और यही हमें उनसे समस्त संसार के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु के प्रेम, क्षमा, बलिदान और अनुग्रह का बयान करने का अवसर प्रदान करता है।

   व्यावाहरिक जीवन में प्रभु यीशु मसीह के सुसमाचार को जी कर दिखाएं; इससे ना केवल आपका जीवन भला तथा आकर्षक बनेगा, वरन सुसमाचार के प्रसार का कारण भी बनेगा। - डेव ब्रैनन


बदले हुए जीवन की सुन्दरता, लोगों को अन्दर से बदलने वाले की ओर आकर्षित करती है।

और तुम बड़े क्‍लेश में पवित्र आत्मा के आनन्द के साथ वचन को मान कर हमारी और प्रभु की सी चाल चलने लगे। यहां तक कि मकिदुनिया और अखया के सब विश्वासियों के लिये तुम आदर्श बने। क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की, जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। - 1 थिस्सुलुनीकियों 1:6-8

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 4:2-6
Colossians 4:2 प्रार्थना में लगे रहो, और धन्यवाद के साथ उस में जागृत रहो। 
Colossians 4:3 और इस के साथ ही साथ हमारे लिये भी प्रार्थना करते रहो, कि परमेश्वर हमारे लिये वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे, कि हम मसीह के उस भेद का वर्णन कर सकें जिस के कारण मैं कैद में हूं। 
Colossians 4:4 और उसे ऐसा प्रगट करूं, जैसा मुझे करना उचित है। 
Colossians 4:5 अवसर को बहुमूल्य समझ कर बाहर वालों के साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करो। 
Colossians 4:6 तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 11-13
  • प्रेरितों 9:1-21


Monday, June 27, 2016

सिद्धांत


   यह माना जाता है कि युनानी चिकित्सक हिपोक्रेटिस वर्तमान एलोपैथिक चिकित्सा विज्ञान के जनक हैं। उन्होंने चिकित्सा में नैतिक मूल्यों का पालन करने के महत्व को समझा, और एक शपथ को लिखा जिसे आज भी चिकित्सकों के लिए नैतिक मार्गदर्शिका की तरह देखा जाता है। इस शपथ का मुख्य आधार है किसी का नुकसान नहीं करने का सिद्धांत; जिसका तात्पर्य है कि चिकित्सक केवल वही करेगा जिससे उसके मरीज़ों का भला हो।

   किसी का नुकसान ना करने का यह सिद्धांत हमारे दैनिक जीवन में भी लागू होता है। यही सिद्धांत परमेश्वर के वचन बाइबल की दूसरों से प्रेम करने की शिक्षा का आधार भी है। इस प्रकार प्रेम करने के परमेश्वर के इस नियम पर चिंतन करते हुए प्रेरित पौलुस ने पाया कि प्रेम का यह सिद्धांत कई अन्य शिक्षाओं का भी आधार है: "प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है" (रोमियों 13:10)।

   हमारे तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के अनुसरण में हमें प्रतिदिन ऐसे चुनाव करने होते हैं जिनका प्रभाव दूसरों के जीवनों पर होता है। इसलिए जब हम कोई निर्णय लेने लगें तो ज़रा थम कर अपने आप से प्रश्न कर लें, "क्या यह प्रभु यीशु मसीह के दूसरों के प्रति चिंता को प्रतिबिंबित करता है, या मैं केवल अपने भले की ही चिंता के आधार पर ऐसा कर रहा हूँ?"

   दूसरों की भलाई के प्रति संवेदनशील होने का यह सिद्धांत, सारे जगत के प्रति प्रभु परमेश्वर के प्रेम को दिखाता है, जिसके अन्तर्गत परमेश्वर सबकी सहायता और सबका भला करना चाहता है (यूहन्ना 3:16)। - डेनिस फिशर


दूसरों के बोझों को उठाने में सहायक