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गुरुवार, 9 जुलाई 2020

शान्त


     एक माँ की कल्पना कीजिए, अपने छोटे से बच्चे पर प्रेम के साथ झुकी हुई, उसकी ऊँगली हलके से बच्चे की नाक और होठों पर रखी हुई है, और वह नम्र आवाज़ में बच्चे से कह रही है “श्श!, शांत!”, कोमलता से उसे सान्तवना दे रही है। उस माँ का हाव-भाव, और साधारण शब्द, उस बच्चे की निराशा, परेशानी, या दुःख के समय में उसकी व्याकुलता को शांत करने के लिए हैं। इस प्रकार के दृश्य सभी स्थानों पर देखे जाते हैं, सदा देखे जाते हैं, और हम में से अधिकाँश ने या तो यह किया है, या ऐसे प्रेम भरी अभिव्यक्तियों से शान्ति पाई है। जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 131 पर विचार करता हूँ, तो मेरे मन में यही चित्रण उभर कर आता है।

     इस भजन की भाषा और शैली यही संकेत देते हैं कि भजनकार दाऊद ने कुछ ऐसा अनुभव किया था, जिसके कारण उसे कुछ गंभीर विचार करना पड़ा था। क्या आपने किसी ऐसी निराशा, पराजय, या असफलता का सामना किया है, जिसके कारण आप ने गंभीर, विचारमग्न, आंकलन करने वाली प्रार्थना की हो? जब आप किसी परीक्षा में असफल रहते हैं, आपकी कोई नौकरी जाती रहती है, या कोई संबंध टूट जाता है? दाऊद ने अपने मन की बात खुलकर परमेश्वर के सामने रख दी, और ऐसा करते समय उसने अपने मन को भी इमानदारी से टटोला, और मन की बातों को प्रकट किया (भजन 131:1)। अपनी परिस्थितियों के साथ शान्ति स्थापित करने में, उसे वैसी ही संतुष्टि प्राप्त हुई, जैसी उस छोटे बच्चे को अपने माँ के साथ होने से मिलती है (पद 2)।

     जीवन की परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, और कभी कभी वे हमें झुका देती हैं। किन्तु फिर भी हम आशावान और संतुष्ट रह सकते हैं, इस बात में स्थिर और सुदृढ़ कि हमारा परमेश्वर पिता हमें कभी नहीं छोड़ेगा या त्यागेगा। हम शांत होक उस पर सम्पूर्ण भरोसा रख सकते हैं। - आर्थर जैक्सन

 

केवल मसीह यीशु ही में हमें संतुष्टि मिलती है।


चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है। - भजन 46:10-11

बाइबल पाठ: भजन 131

भजन संहिता 131:1 हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है; और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता।

भजन संहिता 131:2 निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।

भजन संहिता 131:3 हे इस्राएल, अब से ले कर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह!      

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21


गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

शान्त



      आतंक और भय की अनुभूति होने पर हमारे शरीर प्रतिक्रिया देते हैं। हमारे पेट में एक भारीपन सा होता है, हृदय के गति बहुत बढ़ जाती है, और हम लंबी साँसें लेने लगते हैं। हमारे शरीरों की प्रवृत्ति इन संकट की भावनाओं की अनदेखी नहीं होने देती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु के शिष्यों ने एक रात को अत्याधिक भय का सामना किया। प्रभु यीशु ने पांच हज़ार की भीड़ को भोजन खिलाने का आश्चर्यकर्म किया था, और फिर उसने संध्या के समय शिष्यों को नाव द्वारा बैथसेदा की और रवाना कर दिया, जब कि वह स्वयं पीछे रुक कर प्रार्थना में समय बिता रहा था। रात्री के समय शिष्य नाव में प्रतिकूल हवा में नाव खे रहे थे, तभी प्रभु यीशु पानी पर चलते हुए उनकी ओर आए। शिष्यों को लगा कि कोई भूत उनकी ओर आ रहा है, और वे बहुत भयभीत हो गए (मरकुस 6:49-50)।

      परन्तु प्रभु यीशु ने उन्हें ढाढ़स बंधाया, उनसे कहा की भयभीत न हों, और साहस रखें। जैसे ही प्रभु यीशु उनकी नाव में आए, हवा शांत हो गयी और वे सुरक्षित किनारे पर पहुँच गए।मैं उनमें आने वाली उस शान्ति के अनुभव की कल्पना करती हूँ जो प्रभु के आने से उन्हें मिली, उस भय की भावना के पश्चात।

      जब भी हम चिंतित होकर बेचैन हो रहे होते हैं, हम प्रभु यीशु की सामर्थ्य में आश्वस्त होकर शान्त हो सकते हैं। वह चाहे हमारे भय को दूर करे, या फिर हमें उन परिस्थितियों का सामना करने की सामर्थ्य दे, किन्तु उसकी शान्ति जो “समझ से परे” है (फिलिप्पियों 4:7) हमें उपलब्ध रहती है। और जब वह हमें हमारे भय से मुक्त करता है, तो हमारी आत्मा और शरीर शान्त स्थिति में वापस लौट सकते हैं। - एमी बाउचर पाई

प्रभु परमेश्वर हमें भय से मुक्ति देता है।

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4: 6-7

बाइबल पाठ: मरकुस 6:45-53
Mark 6:45 तब उसने तुरन्त अपने चेलों को बरबस नाव पर चढाया, कि वे उस से पहिले उस पार बैतसैदा को चले जांए, जब तक कि वह लोगों को विदा करे।
Mark 6:46 और उन्हें विदा कर के पहाड़ पर प्रार्थना करने को गया।
Mark 6:47 और जब सांझ हुई, तो नाव झील के बीच में थी, और वह अकेला भूमि पर था।
Mark 6:48 और जब उसने देखा, कि वे खेते खेते घबरा गए हैं, क्योंकि हवा उनके विरुद्ध थी, तो रात के चौथे पहर के निकट वह झील पर चलते हुए उन के पास आया; और उन से आगे निकल जाना चाहता था।
Mark 6:49 परन्तु उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा, कि भूत है, और चिल्ला उठे, क्योंकि सब उसे देखकर घबरा गए थे।
Mark 6:50 पर उसने तुरन्त उन से बातें कीं और कहा; ढाढ़स बान्‍धो: मैं हूं; डरो मत।
Mark 6:51 तब वह उन के पास नाव पर आया, और हवा थम गई: और वे बहुत ही आश्चर्य करने लगे।
Mark 6:52 क्योंकि वे उन रोटियों के विषय में ने समझे थे परन्तु उन के मन कठोर हो गए थे।
Mark 6:53 और वे पार उतरकर गन्नेसरत में पहुंचे, और नाव घाट पर लगाई।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 17-19
  • मरकुस 6:30-56



सोमवार, 14 अक्टूबर 2019

थामा हुआ



      मैं अपनी बहिन के घर गई हुई थी; दोपहर के भोजन के समाप्ति के समय मेरी बहिन ने अपने बेटी से कहा कि अब उसके जाकर सोने का समय हो गया है। मेरी वह तीन वर्षीय भांजी चौंक गई, उसकी आँखों में आँसू आ गए, और उसने शिकायत की, “लेकिन आंटी मोनिका ने मुझे अभी तक तो गोद में लिया ही नहीं है!” मेरी बहिन ने मुस्कुराते हुए उसे दिलासा दिया, “अच्छा मोनिका आंटी तुम्हें गोदी में ले सकती हैं – कितनी देर गोदी में रहना चाहोगी? मेरी भांजी ने उत्तर में कहा “पाँच मिनट।”

      मैंने अपने भांजी को गोद में ले लिया, और मैं कृतज्ञ होकर स्मरण करने लगी कि बिना प्रयास किए हुए भी वह मुझे स्मरण दिलाती है कि किसी से प्रेम करना और प्रेम पाने का अनुभव क्या होता है। मुझे लगता है कि कभी-कभी हम यह भूल जाते हैं कि मसीही विश्वास का हमारा जीवन प्रेम का अनुभव सीखने का जीवन है – परमेश्वर के प्रेम के बारे में सीखने का, इतनी भरपूरी से जितने की हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं (इफिसियों 3:18)। हम जब भी इस बात पर ध्यान देने से चूक जाते हैं, तो हम परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा लूका 15 अध्याय में दिए गए उड़ाऊ-पुत्र के दृष्टांत के उस बड़े भाई के समान हो जाते हैं जो अपने प्रयासों से परमेश्वर के प्रेम को पाने के कोशिश तो कर रहा था, बिना यह स्मरण किए कि  उसने क्या कुछ उसे पहले से ही दे रखा था (लूका 15:25-32)।

      भजन 131 भी एक ऐसी प्रार्थना है जो हमें “बालकों के समान” (मत्ती 18:3) बनने में सहायता करती है, अपने मन में चल रहे उस द्वंद को छोड़ कर जो उन बातों के कारण है जिन्हें हम समझ नहीं पाते हैं (भजन 131:1)। परेशान रहने की बजाए, प्रभु परमेश्वर के साथ बिताए गए समय के द्वारा हम शान्ति के स्थान में लौट सकते हैं (पद 2), उसके प्रेम में होकर उस आशा को प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी हमें आवश्यकता है (पद 3) – वैसे शान्त और चैन से होकर मानों हम अपनी माँ की गोद में बैठे हुए बच्चे हैं, जिन्हें उसने सुरक्षित थामा हुआ है। - मोनिका ब्रैंड्स

बच्चों के समान, हम परमेश्वर के प्रेम में शान्त होना सीख सकते हैं।

यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। - विलापगीत 3:26

बाइबल पाठ: भजन 131
Psalms 131:1 हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है; और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता।
Psalms 131:2 निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।
Psalms 131:3 हे इस्राएल, अब से ले कर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह!

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2



शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

क्षमा



      अपनी युवावस्था में मैंने अपनी एक सहेली को आमंत्रित किया कि वह मेरे साथ हमारे घर के निकट स्थित उपहारों की वस्तुओं को बेचने की के दूकान में सामान दखने के लिए आए। किन्तु उसने मुझे चकित कर दिया, जब उसने एक मुट्ठी-भर बालों में लगाए जाने वाले रंगीन क्लिप्स उठाकर मेरी जेब में डाल दिए और दुकानदार को पैसे दिए बिना मुझे खींचती हुई दूकान से बाहर ले गई। मैं इस बात के दोष को लेकर सप्ताह भर परेशान रही और फिर मैंने रोते हुए अपनी माँ से सब कह सुनाया।

      अपनी सहेली द्वारा चोरी करने का विरोध न करने से दुखी होकर मैंने जाकर वे चोरी के क्लिप्स दुकानदार को लौटा दिए, उससे क्षमा माँगी और प्रण लिया कि मैं फिर कभी चोरी नहीं करूँगी। परन्तु दुकानदार ने मुझ से कहा कि अब से मैं उसकी दूकान में फिर कभी न आऊँ। परन्तु क्योंकि मेरी माँ ने मुझे आश्वस्त किया कि मैंने बात को ठीक करने के लिए अपनी ओर से सब कुछ कर दिया था, और क्योंकि उन्होंने मुझे क्षमा कर दिया था, इसलिए मैं उस रात चैन से सो सकी।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पढ़ते हैं कि राजा दाऊद ने भी पापों के अंगीकार और क्षमा के द्वारा विश्राम पाया (भजन 32:1-2)। उसने बतशीबा और उरिय्याह के विरुद्ध किए गए अपने पाप को छुपाया था (2 शमूएल 11-12), किन्तु उसकी “तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई” (भजन 32:3-4)। फिर जब दाऊद ने अपने पाप को प्रगट कर दिया, तो प्रभु ने उसे क्षमा कर दिया (पद 5)। फिर परमेश्वर ने “संकट से” उसकी रक्षा की, और “छुटकारे के गीतों से घेर लेगा” (पद 7)। दाऊद आनन्दित हुआ क्योंकि “जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा” (पद 10)।

      हम अपने पापों के परिणामों को नहीं चुन सकते हैं और न ही जब हम उन्हें स्वीकार करके उनके लिए क्षमा माँगते हैं तो लोगों की प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकते हैं। परन्तु परमेश्वर हमें सामर्थी कर सकता है कि हम पापों कोस्वीकार करके, पाप के दासत्व से स्वतंत्र होकर, शान्ति का आनन्द लें, क्योंकि प्रभु हमें आश्वस्त करता है कि उसने उन पापों को मिटा दिया है। - जोशील डिक्सन


जब परमेश्वर क्षमा करता है तो सारा दोष मिट जाता है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: भजन 32:1-11
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 113-115
  • 1 कुरिन्थियों 6



बुधवार, 21 अगस्त 2019

शान्त



      लेखक डैनियल लेविटिन ने अपनी पुस्तक “The Organized Mind: Thinking Straight in the Age of Information Overload” में लिखा है कि “पिछले पाँच वर्षों में हमने इतनी जानकारी एकत्रित कर ली है जितनी मानव इतिहास में पहले कभी नहीं की गई। एक प्रकार से हम इस उत्तेजना के आसक्त हो गए हैं।” समाचारों और ज्ञान के निरन्तर होते रहने वाले ये आक्रमण हमारे मस्तिष्क पर काबू कर लेते हैं। हमारे वातावरण में मीडिया के द्वारा किए जा रहे लगातार प्रहार के कारण हमारे लिए शान्त होकर बैठना, विचार करना, और प्रार्थना करना कठिन होता जा रहा है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार लिखता है, “चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!” (भजन 46:10), जो हमें परमेश्वर की ओर ध्यान लगाने की अनिवार्यता के बारे में सचेत करता है। बहुत से लोगों के लिए प्रतिदिन परमेश्वर के साथ शान्त होकर समय बिताना, जब वे बाइबल पढ़ते, प्रार्थना करते और परमेश्वर की भलाई तथा महानता पर विचार करते हैं, दिनचर्या का एक अनिवार्य भाग है ।

      जब भजन 46 के भजनकार के समान हम भी यह अनुभव करते हैं कि “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक” (पद 1), तो इससे हमारे भय भाग जाते हैं (पद 2), तथा हमारा ध्यान सँसार की बेचैनी से हटकर परमेश्वर की शान्ति पर आ जाता है और हमारे अन्दर एक शान्त भरोसा जागृत करता है कि परमेश्वर नियंत्रण में है (पद 10)।

      हमारे चारों ओर का सँसार चाहे जितना भी अस्त-व्यस्त क्यों न हो जाए, हम अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की उपस्थिति में  शान्त होकर उसके प्रेम और सामर्थ्य में रह सकते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


हमें प्रतिदिन शान्त होकर परमेश्वर की सुनना ज़रूरी है।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया – यशायाह 30:15

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 107-109
  • 1 कुरिन्थियों 4



शनिवार, 22 जून 2019

शान्त



      गाँव में सहायता-सामग्री लाने वाले ट्रकों के काफिले के वहाँ की उन टूटी-फूटी झोपडियों के पास से निकलने की आवाज़ को सुनकर मुर्गियाँ और उनके बच्चे इधर-उधर भागने लगे और नंगे पाँव बच्चे बारिश से बिगड़ी हुई ‘सड़क’ के किनारे पर खड़े होकर उन ट्रकों को देखने लगे। काफिला आगे बढ़ते हुए वहाँ के महापौर के बड़े से मकान के सामने जाकर रुक गया। किन्तु महापौर उस मकान में रहने की बजाए, दूर शहर में स्थित आलीशान मकान में विलासिता के साथ रहता था, जबकि उसकी बस्ती के लोगों के पास जीवन की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं।

      ऐसे अन्याय को देखकर हमें क्रोध आता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि परमेश्वर का नबी भी अन्याय को देखकर क्रोधित हुआ। जब हबक्कूक ने व्यापक भ्रष्टाचार और शोषण को देखा तो वह पुकार उठा, “हे यहोवा मैं कब तक तेरी दोहाई देता रहूंगा, और तू न सुनेगा?” (हबक्कूक 1:2)। परन्तु वे सारी बातें परमेश्वर के ध्यान में थीं, और परमेश्वर ने कहा, “...हाय उस पर जो अपना घर बन्धक की वस्तुओं से भर लेता है;... हाय उस पर, जो अपने घर के लिये अन्याय के लाभ का लोभी है ” (हबक्कूक  2:6, 9); परमेश्वर का न्याय आ रहा था!

      हम औरों पर परमेश्वर के न्याय का स्वागत करते हैं, परन्तु हबक्कूक में एक ऐसा धुर्री का बिंदु है जहाँ पर आकर हम शान्त हो जाते हैं: “परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे” (2:20)। समस्त पृथ्वी ! उत्पीड़न करने वाले और उत्पीड़ित – दोनों! कभी-कभी किसी परिस्थिति को लेकर परमेश्वर के शान्त रहने के प्रति हमारा उचित प्रत्युत्तर होता है कि हम भी शान्त हो जाएँ।

      क्यों शान्त हो जाएँ? क्योंकि हम अपनी आत्मिक दरिद्रता की बड़ी सरलता से अनदेखी कर लेते हैं। लेकिन परमेश्वर के सामने शान्त भाव में आने पर, उसकी पवित्रता के सामने हमारी पापमय दशा स्वयँ हम पर प्रकट हो जाती है।

      हबक्कूक ने परमेश्वर पर भरोसा करना सीखा, और हमें भी सीखना है। हम परमेश्वर के सभी मार्गों को नहीं जानते हैं, पर हम इतना जानते हैं कि वह भला है, और अपने लोगों के लिए सदा भला ही करता है। उसके समय और नियंत्रण के बाहर कुछ भी नहीं है। - टिम गुस्ताफ्सन


धर्मी पुरूष कंगालों के मुकद्दमे में मन लगाता है
परन्तु दुष्ट जन उसे जानने की समझ नहीं रखता। - नीतिवचन 29:7

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! – भजन 46:10

बाइबल पाठ: हबक्कूक 1:1-4, 2:20
Habakkuk 1:1 भारी वचन जिस को हबक्कूक नबी ने दर्शन में पाया।
Habakkuk 1:2 हे यहोवा मैं कब तक तेरी दोहाई देता रहूंगा, और तू न सुनेगा? मैं कब तक तेरे सम्मुख उपद्रव”, “उपद्रवचिल्लाता रहूंगा? क्या तू उद्धार नहीं करेगा?
Habakkuk 1:3 तू मुझे अनर्थ काम क्यों दिखाता है? और क्या कारण है कि तू उत्पात को देखता ही रहता है? मेरे साम्हने लूट-पाट और उपद्रव होते रहते हैं; और झगड़ा हुआ करता है और वादविवाद बढ़ता जाता है।
Habakkuk 1:4 इसलिये व्यवस्था ढीली हो गई और न्याय कभी नहीं प्रगट होता। दुष्ट लोग धर्मी को घेर लेते हैं; सो न्याय का खून हो रहा है।
Habakkuk 2:20 परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 6-8
  • प्रेरितों 6



मंगलवार, 27 नवंबर 2018

वृद्धावस्था



      कुछ वर्ष पहले मैंने दूसरी ईसवीं के यूनानी लेखक एलियन द्वारा लिखित एक कृति, On The Nature of Animals में मछली पकड़ने की एक विधि को पढ़ा था। एलियन ने लिखा था, “बोरोका और थिस्सलुनीके के मध्य एस्ट्रैकस नामक एक नदी बहती है, और उसमें चितकबरी खाल वाली मछलियाँ (ट्राउट) पाई जाती हैं।” फिर उसने उन मछलियों को पकड़ने की एक विधि का वर्णन किया, जिससे मछलियाँ सरलता से पकड़ी जाती हैं। मछली पकड़ने वाले सुर्ख लाल ऊन को कांटे पर लपेटते हैं और उसमें पक्षियों के दो पंख फंसा देते हैं, और फिर इसे पानी में फेंक देते हैं। मछलियाँ उस सुर्ख रंग से आकर्षित होकर कांटे पर आती हैं और उसमें फंस जाती हैं।

      मछुआरे आज भी 2,200 वर्ष से उपयोग होती आ रही इस विधि का उपयोग करते हैं और मछलियाँ पकड़ने के लिए यह विधि अभी भी कारगर है।

      जब मैंने उस प्राचीन कृति को पढ़ा, तो मेरे मन में विचार आया, सभी पुरानी बातें व्यर्थ नहीं हैं – विशेषकर वृद्ध लोग। यदि संतुष्ट और प्रसन्न वृद्धावस्था के द्वारा हम औरों को परमेश्वर की परिपूर्णता और गंभीरता को प्रदर्शित करने पाते हैं, तो हम अपने दिनों के अन्त तक परमेश्वर के लिए उपयोगी बने रहेंगे। यह आवश्यक नहीं कि वृद्धावस्था का अर्थ ढलता हुआ स्वास्थ्य, और जो कभी था वैसा फिर से हो जाने की लालसा का जीवन जीना हो। वृद्धावस्था, उनके लिए जो परमेश्वर के साथ चलकर वृद्ध हुए हैं, शान्त चित्त, आनन्द, साहस, और दयालुता एवँ कृपा दिखाने का समय भी हो सकता है।

      इसीलिए भजनकार कहता है, “वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे” (भजन 92:13-14)। - डेविड रोपर


आयु बढ़ने के साथ परमेश्वर की विश्वासयोग्यता कई गुणा बढ़ती जाती है।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। - यिर्मयाह 17:7-8

बाइबल पाठ: भजन 92:12-15
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे।
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1 पतरस 4



गुरुवार, 23 अगस्त 2018

वार्तालाप



      हाल ही में मेरा दामाद, ईविंग, मेरी पोती, मैगी, से बातें कर रहा था और उसे समझा रहा था कि हम परमेश्वर के साथ वार्तालाप कर सकते हैं, और वह हम से बात-चीत करता है। जब ईविंग ने मैगी से कहा कि परमेश्वर हम से अपने वचन बाइबल के द्वारा वार्तालाप करता है, तो मैगी ने निःसंकोच कहा: “उसने मुझसे तो आज तक कुछ नहीं कहा है। मैंने तो आज तक परमेश्वर को मुझसे वार्तालाप करते नहीं सुना है।”

      हम में से अधिकांश मैगी की बात से सहमत होंगे, यदि हमारे साथ परमेश्वर के वार्तालाप करने का अर्थ हम यह समझते हैं कि कोई सुनाई देने वाली आवाज़ हमें निर्देश देगी, जैसे कि “अपना घर बेच दो और दूर देश में जाकर अनाथों की देखभाल करो।” परन्तु जब हम परमेश्वर द्वारा हमसे कुछ “बोलने” की बात करते हैं, तब हमारा अभिप्राय कुछ भिन्न होता है।

      हम पवित्र-शास्त्र के अध्ययन द्वारा परमेश्वर की आवाज़ को “सुनते” हैं। बाइबल हमें प्रभु यीशु के बारे में बताती है, और यह भी बताती है कि परमेश्वर ने “हम से पुत्र के द्वारा बातें की” जो “उसकी महिमा का प्रकाश और उसके तत्व की छाप है” (इब्रानियों 1:2-3)। पवित्र-शास्त्र हमें बताता है कि प्रभु यीशु मसीह में होकर हम उद्धार कैसे प्राप्त कर सकते हैं, और हम परमेश्वर को भावता हुआ जीवन कैसे व्यतीत कर सकते हैं (2 तिमुथियुस 3:14-17)। पवित्र-शास्त्र के अतिरिक्त, हमारे साथ पवित्र-आत्मा है। पहला कुरिन्थियों 2:12 कहता है कि हमें पवित्र-आत्मा इसलिए दिया गया है जिससे हम उन बातों को जान सकें जो परमेश्वर ने हमें दी हैं।

      क्या आपको परमेश्वर की आवाज़ को सुने काफी समय हो गया है? उसके वचन बाइबल के साथ समय बिताएं, उसकी पवित्र-आत्मा को सुनें जो वचन में होकर प्रभु यीशु को हम पर प्रगट करता है। परमेश्वर से होने वाले अद्भुत वार्तालाप के प्रति संवेदनशील बनें, शान्त होकर उसकी बातों को ध्यान से सुनें। - डेव ब्रैनन


जब हम सुनने के लिए समय निकालते हैं, 
तब परमेश्वर अपने वचन में होकर हम से वार्तालाप करता है।

परन्तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। - 1 कुरिन्थियों 2:12

बाइबल पाठ: इब्रानियों 1:1-12
Hebrews 1:1 पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप-दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के।
Hebrews 1:2 इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है।
Hebrews 1:3 वह उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दाहिने जा बैठा।
Hebrews 1:4 और स्‍वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा, जितना उसने उन से बड़े पद का वारिस हो कर उत्तम नाम पाया।
Hebrews 1:5 क्योंकि स्‍वर्गदूतों में से उसने कब किसी से कहा, कि तू मेरा पुत्र है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ? और फिर यह, कि मैं उसका पिता होऊँगा, और वह मेरा पुत्र होगा?
Hebrews 1:6 और जब पहिलौठे को जगत में फिर लाता है, तो कहता है, कि परमेश्वर के सब स्वर्गदूत उसे दण्‍डवत करें।
Hebrews 1:7 और स्‍वर्गदूतों के विषय में यह कहता है, कि वह अपने दूतों को पवन, और अपने सेवकों को धधकती आग बनाता है।
Hebrews 1:8 परन्तु पुत्र से कहता है, कि हे परमेश्वर तेरा सिंहासन युगानुयुग रहेगा: तेरे राज्य का राजदण्‍ड न्याय का राजदण्‍ड है।
Hebrews 1:9 तू ने धर्म से प्रेम और अधर्म से बैर रखा; इस कारण परमेश्वर तेरे परमेश्वर ने तेरे साथियों से बढ़कर हर्ष रूपी तेल से तुझे अभिषेक किया।
Hebrews 1:10 और यह कि, हे प्रभु, आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और स्वर्ग तेरे हाथों की कारीगरी है।
Hebrews 1:11 वे तो नाश हो जाएंगे; परन्तु तू बना रहेगा: और वे सब वस्‍त्र के समान पुराने हो जाएंगे।
Hebrews 1:12 और तू उन्हें चादर के समान लपेटेगा, और वे वस्‍त्र के समान बदल जाएंगे: पर तू वही है और तेरे वर्षों का अन्‍त न होगा।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 113-115
  • 1कुरिन्थियों 6



गुरुवार, 23 नवंबर 2017

खामोशी


   मेरे एक मित्र ने कहा, छिछले नदी-नाले सबसे अधिक शोर करते हैं, जो कि एक सुप्रसिद्ध कहावत, "गहरे जल निश्चल होते हैं" का विलोम था। उसके कहने का तात्पर्य था कि जो लोग सबसे अधिक शोर करने वाले होते हैं उनके पास कहने के लिए कुछ खास नहीं होता है। इस समस्या का एक पहलु और भी है, कि बहुत बोलने वाले ठीक से सुनते भी नहीं हैं। मुझे साईमन और गारफ़न्कल के एक गीत, Sounds of Silence में कही गई बात स्मरण आती है, लोग बिना ध्यान दिए सुनते हैं। वे कहे जा रहे शब्दों को कानों से तो सुनते हैं, परन्तु अपने विचारों को शान्त कर के वास्तव में ध्यान से मन से नहीं सुनते हैं। हमारे लिए भला होगा यदि हम हम शान्त हो कर ध्यान से मन से सुनना आरंभ कर दें।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि "...चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है" (सभोपदेशक 3:7)। अच्छी खामोशी, सुनने वाली खामोशी, नम्रता की खामोशी होती है। ऐसी खामोशी से सही सुना जाता है, बात को सही समझा जाता है, और फिर सही बात कही जाती है। नीतिवचन का लेखक लिखता है, "मनुष्य के मन की युक्ति अथाह तो है, तौभी समझ वाला मनुष्य उसको निकाल लेता है" (नीतिवचन 20:5)। बात की तह तक पहुँचने के लिए बहुत ध्यान से शान्त होकर सुनना अनिवार्य होता है।

   जब हम औरों की सुनते हैं, तो साथ ही हमें परमेश्वर की भी सुनने और जो वह कहता है उस पर ध्यान देने की भी आवश्यकता है। मैं उस घटना के बारे में सोचता हूँ जब फरिसी व्यभिचार में पकड़ी गई एक स्त्री को प्रभु के पास ले कर आए और उस स्त्री के विरुद्ध आरोपों तथा निन्दा की झड़ी लगाए हुए बोले जा रहे थे; परन्तु प्रभु खामोश होकर अपनी ऊँगली से मिट्टी पर कुछ लिख रहा था (देखिए यूहन्ना 8:1-11)। प्रभु क्या कर रहा था? मेरा सुझाव है कि वह परमेश्वर पिता की आवाज़ को सुन रहा होगा कि इस क्रुद्ध भीड़ को क्या उत्तर दिया जाए, और इस प्रिय स्त्री से क्या कहा जाए? प्रभु का अपनी खामोशी द्वारा दिया गया उत्तर आज भी संसार भर में गूँज रहा है, लोगों से बातें कर रहा है। - डेविड रोपर


समयानुसार खामोशी बहुत शब्दों से अधिक अर्थपूर्ण हो सकती है।

जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है। - नीतिवचन 10:19

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:1-7
Ecclesiastes 5:1 जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना, मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। 
Ecclesiastes 5:2 बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।
Ecclesiastes 5:3 क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है। 
Ecclesiastes 5:4 जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना। 
Ecclesiastes 5:5 मन्नत मान कर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है। 
Ecclesiastes 5:6 कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुन कर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे? 
Ecclesiastes 5:7 क्योंकि स्वप्नों की अधिकता से व्यर्थ बातों की बहुतायत होती है: परन्तु तू परमेश्वर को भय मानना।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5


मंगलवार, 8 अगस्त 2017

शान्त


   अमेरिका में महिलाओं की व्यवसायिक गोल्फ प्रतियोगिताओं में, सन 2003 की विमेंस ऑपेन को एक अपेक्षाकृत अनजानी खिलाड़ी हिलैरी लंके ने जीत कर इतिहास बनाया। न केवल उसने यह प्रतियोगिता जीती, वरन पेशेवर गोल्फ में यह उसकी एक मात्र जीत भी थी। उसकी यह अप्रत्याशित और उत्साहवर्धक जीत इस बात की पुष्टि करती है कि खेल-कूद में सबसे रोमाँचक बात होती है उनकी अनिश्चितता।

   परन्तु जीवन में अनिश्चितता सदा रोमाँचकारी नहीं होती है। हम योजनाएं तथा रणनीतियाँ बनाते हैं। जो हम जीवन में होते देखना चाहते हैं उन बातों के विषय मंसूबे बाँधते हैं, प्रस्ताव रखते हैं; परन्तु बहुधा यह सब अच्छे अनुमानों से बढ़कर और कुछ नहीं हो पाते हैं। हमें कुछ पता नहीं है कि एक वर्ष, एक माह, एक सप्ताह, या एक दिन भी क्या लेकर आ जाएगा। इसलिए हम मसीही विश्वासी प्रार्थना करते हैं और उसके अनुसार योजना बनाते हैं; और फिर अपने प्रभु परमेश्वर के हाथों में, जो सब कुछ संपूर्णता के साथ जानता है, सब कुछ समर्पित करते हैं, क्योंकि हम किसी बात के विषय भविष्यवाणी नहीं कर सकते हैं। इसीलिए मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 46:10, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!", को बहुत पसन्द करता हूँ।

   जीवन अप्रत्याशित है; कभी भी कुछ भी हो सकता है। ऐसी अनेकों बातें हैं जिनके बारे में मैं कुछ नहीं जानता हूँ, और न जान सकता हूँ, कम से कम किसी निश्चितता के साथ तो कदापि नहीं जान सकता हूँ। परन्तु मैं यह तो निश्चितता के साथ जानता हूँ कि मेरा प्रभु परमेश्वर है जो सब कुछ के बारे में सब कुछ - भूत, वर्तमान, भविष्य, जानता है; वह मुझ से बहुत प्रेम करता है, मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ता है और मेरी सहायाता के लिए सदा मेरे साथ रहता है। उसे, और मेरे लिए उसकी योजनाओं के उद्देश्य को जानने के कारण, मैं हर बात में, हर परिस्थिति में शान्त बना रह सकता हूँ। - बिल क्राउडर


जीवन की अनिश्चितताओं में हमारे प्रति परमेश्वर की देखभाल ही निश्चितता है।

और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। - याकूब 4:14-15

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 74-76
  • रोमियों 9:16-33


रविवार, 11 जून 2017

शान्त


   मेरे मसीही जीवन के प्रारंभिक दिनों में मुझे शक रहता था कि मसीही समर्पण से जुड़े दायित्वों तथा जीवन शैली के कारण क्या मैं एक वर्ष भी अपने पुराने पापमय स्वभाव से दूर होकर रहने पाऊँगा। परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल के इस पद ने मेरी बहुत सहायता की: "यहोवा आप ही तुम्हारे लिये लड़ेगा, इसलिये तुम चुपचाप रहो" (निर्गमन 14:14)। ये शब्द मूसा द्वारा इस्त्राएलियों से तब कहे गए थे जब वे मिस्त्र के दासत्व से निकलकर कनान देश की ओर अपनी यात्रा में थे और फिरौन तथा उसकी सेना उन्हें फिर से बन्दी बना लेने के लिए उनके पीछे आ पहुँची थी। अपनी परिस्थितियों और परेशानियों के कारण वे इस्त्राएली भयभीत तथा हताश थे।

   मुझ युवा विश्वासी के लिए, जो चारों ओर से फिर से पाप का दास बना लेने वाले प्रलोभनों तथा परीक्षाओं से घिरा हुआ था, इस पद का "चुपचाप रहो" निर्देश बहुत प्रोत्साहक था। अब लगभग 37 वर्ष पश्चात, तनाव से भरी परिस्थितियों में भी शान्त रहकर परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखना, आज भी निरंतर मेरी इच्छा एवं प्रयास रहता है।

   भजनकार ने कहा, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं" (भजन 46:10)। जब हम विचलित करने वाले हालातों में भी शान्त बने रहते हैं, परमेश्वर पर आश्वस्त रहते हैं, तो हम परमेश्वर को, उसे जो "हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक" (भजन 46:1) है, और गहराई से जानने पाते हैं। हम समझने पाते हैं कि परमेश्वर की सहायता के बिना हम कितने कमज़ोर हैं, और हर बात में उसके प्रति समर्पित तथा आज्ञाकारी रहना हमारे लिए कितना आवश्यक है। प्रेरित पौलुस ने कहा, "इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं" (2 कुरिन्थियों 12:10)।

   प्रतिदिन हम अनेकों प्रकार के तनावों और कुण्ठित कर देने वाली परिस्थितियों से होकर निकलते हैं। परन्तु हम आश्वस्त रह सकते हैं कि हमारी देख-भाल करने के अपने वायदे के प्रति परमेश्वर सदा विश्वासयोग्य रहता है, हर बात में हमारे लिए, हमारे पक्ष में होकर कार्य करता रहता है। हम उसपर भरोसा बनाए रखें और विचलित नहीं, वरन शान्त रहना सीख लें। - लॉरेंस दरमानी


प्रभु आपके तूफानों को शान्त कर सकता है, 
परन्तु अकसर उन तूफानों में वह आपको शान्त रहना सिखाता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: निर्गमन 14:10-14
Exodus 14:10 जब फिरौन निकट आया, तब इस्राएलियों ने आंखे उठा कर क्या देखा, कि मिस्री हमारा पीछा किए चले आ रहे हैं; और इस्राएली अत्यन्त डर गए, और चिल्लाकर यहोवा की दोहाई दी। 
Exodus 14:11 और वे मूसा से कहने लगे, क्या मिस्र में कबरें न थीं जो तू हम को वहां से मरने के लिये जंगल में ले आया है? तू ने हम से यह क्या किया, कि हम को मिस्र से निकाल लाया? 
Exodus 14:12 क्या हम तुझ से मिस्र में यही बात न कहते रहे, कि हमें रहने दे कि हम मिस्रियों की सेवा करें? हमारे लिये जंगल में मरने से मिस्रियों की सेवा करनी अच्छी थी। 
Exodus 14:13 मूसा ने लोगों से कहा, डरो मत, खड़े खड़े वह उद्धार का काम देखो, जो यहोवा आज तुम्हारे लिये करेगा; क्योंकि जिन मिस्रियों को तुम आज देखते हो, उन को फिर कभी न देखोगे। 
Exodus 14:14 यहोवा आप ही तुम्हारे लिये लड़ेगा, इसलिये तुम चुपचाप रहो। 

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 1-2
  • यूहन्ना 19:23-42


शुक्रवार, 26 मई 2017

तूफान


   जब चक्रवादी तूफान कैट्रीना मिसीसिपी प्रांत के समुद्र तट की ओर बढ़ रहा था, तो एक सेवानिवृत हुए पास्टर और उसकी पत्नि से उनकी पुत्री ने बहुत आग्रह किया कि वे अटलांटा आ जाएं जहाँ वह उनकी देखभाल कर सकती थी। परन्तु क्योंकि बैंक बन्द हो गए थे इसलिए वह दंपति अटलांटा की यात्रा के लिए पर्याप्त पैसे का इन्तज़ाम नहीं कर सका और उन्हें अपना घर छोड़ कर एक आश्रय स्थल में जाना पड़ा। तूफान के गुज़र जाने के पश्चात, वे अपने घर गए जिससे कि अपने सामान को संभाल सकें, जहाँ पानी में तैर रही केवल कुछ पारिवारिक फोटो ही उन्हें मिलीं। जब वह पास्टर फोटो फ्रेम में से सुखाने के लिए अपने पिता की फोटो निकाल रहे थे तो उस फ्रेम में से $366 बाहर निकल कर गिरे, जो उन दोनों के लिए अटलांटा जाने का हवाई टिकिट खरिदने के लिए पर्याप्त रकम थी। यह उनके लिए पाठ था कि अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वे प्रभु यीशु पर विश्वास रख सकते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 4:35-41 में दी गई घटना प्रभु यीशु के चेलों के लिए प्रभु में विश्वास बनाए रखने का पाठ था। प्रभु यीशु ने अपने चेलों से गलील की झील के उस पार जाने के लिए कहा और नाव में सो गया। झील पार करते हुए अनायास ही एक तेज़ तूफान ने उन्हें घेर लिया और उफनती हुई लहरों तथा तेज़ हवा को देखकर चेले घबरा गए। उन्होंने प्रभु को सोते से उठाया और कहा, "हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?" (पद 38); तब प्रभु यीशु ने "उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया" (पद 39)।

   जीवन में हम सब को अनेक प्रकार के तूफानों - सताव, आर्थिक कठिनाईयाँ, बीमारियाँ, निराशाएँ, एकाकीपन इत्यादि का सामना करना पड़ता है - और प्रभु यीशु सदा उनको रोक कर नहीं रखता है। परन्तु उसने हम से प्रतिज्ञा की है कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा (इब्रानियों 13:5)। वह हर तूफान में हमें शान्त रखेगा। - मार्विन विलियम्स


जीवन के तूफानों में हम अपने प्रभु परमेश्वर के चरित्र को देख सकते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • 1 इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 9:24-41


बुधवार, 25 जनवरी 2017

शान्त स्थान


   कुछ वर्ष पहले इडाहो प्रांत के एकांत में बसे एक पशु फार्म पर रहने वाले हमारे एक मित्र के लिए, मेरे पुत्र ब्रायन तथा मैंने, कुछ सामान उस तक पहुँचाने का बीड़ा लिया। उस क्षेत्र में कोई सड़कें नहीं हैं, कम से कम ऐसी तो कोई नहीं जिन पर मेरा ट्रक जा सके। इसलिए हमारा मित्र सड़क के अन्तिम स्थान पर दो खच्चरों से खींची जाने वली अपनी बघ्घी लेकर आया। उस बघ्घी में सामान डाल कर, वहाँ से हम बातचीत करते हुए फार्म तक गए, और हमें ज्ञात हुआ कि हमारा वह मित्र उस स्थान पर सारे वर्ष रहता है।

   उस स्थान पर सड़कें ही नहीं वरन ना तो बिजली थी और ना ही टेलिफोन, और सर्दियाँ बहुत लंबी तथा भीषण होती थीं, संपर्क का केवल एक ही साधन था - उनका सेटेलाईट रेडियो। मैंने उस से पूछा कि वह इस एकांत को सहन कैसे कर लेता है? उसने कहा, सच बात तो यह है कि मुझे यह शान्त स्थान और वातावरण बहुत पसन्द है।

   व्यस्तता से भरे हमारे दिनों में हमें भी कभी-कभी शान्त वातावरण की आवश्यकता होती है। हमारे आस-पास बहुत शोर रहता है, बहुत से लोग, बहुत सी बातें हमारे ध्यान अपनी ओर खींचती हैं; ऐसे में जैसा प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा था, "...तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो..." (मरकुस 6:31) हमें भी शान्ति के स्थान की आवश्यकता होती है। क्या हमारे पास ऐसा कोई स्थान है?

   हम मसीही विश्वासियों को, हम चाहे जहाँ भी हों, जैसे भी हों, ऐसा एक शान्त स्थान सदा उपलब्ध रहता है - परमेश्वर की निकटता। जब हम अपने व्यस्त समय में से कुछ समय निकालकर परमेश्वर के प्रेम और दया पर मनन करते हैं, अपने मन की बात उसे बताने के द्वारा, अपने बोझों को उस पर डालने के द्वारा अपने आप को हलका करते हैं, तो हम पाएंगे कि परमेश्वर की उपस्थिति से भरे उस समय, उस स्थान में ही हमें वह शान्त स्थान मिल जाता है, जिसे संसार की बातों ने हमारी नज़रों से ओझल कर दिया था। - डेविड रोपर


परमेश्वर के साथ शान्त होकर समय बिताना विश्रांति लाता है।

तू ने मेरे मन में उस से कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था। मैं शान्ति से लेट जाऊँगा और सो जाऊँगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है। - भजन 4:7-8

बाइबल पाठ: मरकुस 6:7-13, 30-32
Mark 6:7 और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्हें दो दो कर के भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया। 
Mark 6:8 और उसने उन्हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे। 
Mark 6:9 परन्तु जूतियां पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो। 
Mark 6:10 और उसने उन से कहा; जहां कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहां से विदा न हो, तब तक उसी में ठहरे रहो। 
Mark 6:11 जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, और तुम्हारी न सुनें, वहां से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो। 
Mark 6:12 और उन्होंने जा कर प्रचार किया, कि मन फिराओ। 
Mark 6:13 और बहुतेरे दुष्टात्माओं को निकाला, और बहुत बीमारों पर तेल मलकर उन्हें चंगा किया।
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया। 
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था। 
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16


रविवार, 12 जून 2016

शान्त


   सन 1939 में जब दूसरे विश्वयुद्ध का आरंभ हुआ, तब ग्रेट ब्रिटेन में एक सन्देश दिखाई देना भी आरंभ हुआ: "शान्त रहें, कार्य ज़ारी रखें"। ब्रिटेन के सरकारी अधिकारियों ने इसे पोस्टरों पर छपवा कर स्थान-स्थान पर लगवा दिया जिससे लोग युद्ध के कारण निराश ना हों, घबराएं नहीं और अपने कार्यों में लगे रहें।

   अपनी बन्धुवाई के समय के बाद जब इस्त्राएली लौट कर अपने देश में आए तो उन्हें उसका पुनः निर्माण करना था। उन्होंने इस कार्य का आरंभ मन्दिर के पुनःनिर्माण से किया, लेकिन इसके लिए उन्हें भी अपने भय और शत्रु के हस्तक्षेप का सामना करके उन पर विजयी होना था (एज़्रा 3:3)। जब वे पुनःनिर्माण के लिए नींव डाल चुके तो उनके शत्रु "फारस के राजा कुस्रू के जीवन भर वरन फारस के राजा दारा के राज्य के समय तक उनके मनोरथ को निष्फल करने के लिये वकीलों को रुपया देते रहे" (एज़्रा 4:5)। उन शत्रुओं ने उनके विरुद्ध दोषारोपण करते हुए सरकारी अधिकारियों को शिकायत के पत्र लिखे, उनके कार्य में बाधा डाली, और निर्माण के कार्य को रुकवा दिया (एज़्रा 4:6, 24)। इन सब प्रतिरोधों के बावजूद, अन्ततः राजा दारा ने आज्ञा-पत्र ज़ारी करके मन्दिर के पुनःनिर्माण के कार्य को पूरा करवाया (एज़्रा 6:12-14)।

   जब हम परमेश्वर के कार्यों में लगे होते हैं और हमें असफलताओं तथा निराशाओं का सामना करना पड़ता है, तब भी हम शान्त होकर अपने कार्य में लगे रह सकते हैं, क्योंकि उन इस्त्राएलियों के समान हम भी आज यह कह सकते हैं कि, "...हम तो आकाश और पृथ्वी के परमेश्वर के दास हैं..." (एज़्रा 5:11)। हमारे मार्ग में बाधाएं और विलंब तो आएंगे लेकिन हम अपने प्रभु यीशु की प्रतिज्ञा "...मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे" (मत्ती 16:18) में आश्वस्त रह सकते हैं। हम मसीही विश्वासियों में होकर कार्य करवाने वाली सामर्थ परमेश्वर की सामर्थ है ना कि हमारी अपनी, और इस सामर्थ को कोई हरा नहीं सकता; इसलिए "शान्त रहें, कार्य ज़ारी रखें"। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की आत्मा हमारी गवाही को सामर्थ प्रदान करता है।

चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! - भजन 46:10

बाइबल पाठ: एज़्रा 5:7-17
Ezra 5:7 उन्होंने उसको एक चिट्ठी लिखी, जिस में यह लिखा था: कि राजा दारा का कुशल क्षेम सब प्रकार से हो।
Ezra 5:8 राजा को विदित हो, कि हम लोग यहूदा नाम प्रान्त में महान परमेश्वर के भवन के पास गए थे, वह बड़े बड़े पत्थरों से बन रहा है, और उसकी भीतों में कडिय़ां जुड़ रही हैं; और यह काम उन लोगों से फुतीं के साथ हो रहा है, और सफल भी होता जाता है। 
Ezra 5:9 इसलिये हम ने उन पुरनियों से यों पूछा, कि यह भवन बनवाने, और यह शहरपनाह खड़ी करने की आाज्ञा किस ने तुम्हें दी? 
Ezra 5:10 और हम ने उनके नाम भी पूछे, कि हम उनके मुख्य पुरुषों के नाम लिख कर तुझ को जता सकें। 
Ezra 5:11 और उन्होंने हमें यों उत्तर दिया, कि हम तो आकाश और पृथ्वी के परमेश्वर के दास हैं, और जिस भवन को बहुत वर्ष हुए इस्राएलियों के एक बड़े राजा ने बना कर तैयार किया था, उसी को हम बना रहे हैं। 
Ezra 5:12 जब हमारे पुरखाओं ने स्वर्ग के परमेश्वर को रिस दिलाई थी, तब उसने उन्हें बाबेल के कसदी राजा नबूकदनेस्सर के हाथ में कर दिया था, और उसने इस भवन को नाश किया और लोगों को बन्धुआ कर के बाबेल को ले गया। 
Ezra 5:13 परन्तु बाबेल के राजा कुस्रू के पहिले वर्ष में उसी कुस्रू राजा ने परमेश्वर के इस भवन के बनाने की आज्ञा दी 
Ezra 5:14 और परमेश्वर के भवन के जो सोने और चान्दी के पात्र नबूकदनेस्सर यरूशलेम के मन्दिर में से निकलवा कर बाबेल के मन्दिर में ले गया था, उन को राजा कुस्रू ने बाबेल के मन्दिर में से निकलवा कर शेशबस्सर नामक एक पुरुष को जिसे उसने अधिपति ठहरा दिया था, सौंप दिया। 
Ezra 5:15 और उसने उस से कहा, ये पात्र ले जा कर यरूशलेम के मन्दिर में रख, और परमेश्वर का वह भवन अपने स्थान पर बनाया जाए। 
Ezra 5:16 तब उसी शेशबस्सर ने आकर परमेश्वर के भवन की जो यरूशलेम में है नेव डाली; और तब से अब तक यह बन रहा है, परन्तु अब तक नहीं बन पाया। 
Ezra 5:17 अब यदि राजा को अच्छा लगे तो बाबेल के राजभणडार में इस बात की खोज की जाए, कि राजा कुस्रू ने सचमुच परमेश्वर के भवन के जो यरूशलेम में है बनवाने की आज्ञा दी थी, था नहीं। तब राजा इस विषय में अपनी इच्छा हम को बताए।

एक साल में बाइबल: 
  • एज़्रा 3-5
  • यूहन्ना 20


गुरुवार, 25 फ़रवरी 2016

विश्राम


   हमारा पालतु कुत्ता कभी-कभी इतना उत्साहित और उत्तेजित हो जाता है कि उस उत्तेजना से उसे मिर्गी का सा दौरा पड़ जाता है। ऐसा होने से बचाए रखने के लिए हमें उसे शान्त करते रहना पड़ता है। हम उसे सहलाते हैं, शान्तिदायक आवाज़ में उससे बातें करते हैं और उससे लेट जाने को कहते हैं। परन्तु जैसे ही वह हमसे "लेट जाओ" सुनता है, वह तुरंत नज़रें चुराना और दुःखी होने के हाव-भाव दिखाना आरंभ कर देता है; और अन्ततः बड़े नाटकीय ढंग से यह दिखाते हुए कि वह हमारे कहे को करने के लिए मजबूर है, फर्श पर लेट जाता है।

   कभी कभी हम मनुष्यों को भी शान्त होकर लेट जाने की आवश्यकता होती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 23 में हम पाते हैं कि हमारा अच्छा चरवाहा, हमारा परमेश्वर हमें हरी-हरी चराईयों में बैठाता है और सुखदाई जल के झरनों के पास ले जाता है (भजन 23:2-3)। वह जानता है कि हमें जिस शान्ति और विश्राम की आवश्यकता है वह हमें उसकी उन चराईयों और झरनों में आने से ही मिल सकेगा, चाहे हम स्वयं अपनी इस आवश्यकता का आभास ना भी कर सकें।

   हमारे शरीर नियमित विश्राम लेने के लिए बनाए गए हैं। स्वयं परमेश्वर ने भी सृष्टि की रचना करके सातवें दिन विश्राम किया (उत्पत्ति 2:2-3; निर्गमन 20:9-11)। प्रभु यीशु भी जानते थे कि लोगों की भीड़ की सेवकाई का भी समय है और विश्राम करने का भी समय है; अपनी अपनी जगह दोनों ही की आवश्यकता है। प्रभु यीशु ने सेवकाई से लौटे अपने चेलों से कहा: "...तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था" (मरकुस 6:31)। जब हम विश्राम लेते हैं तो हमारे शरीर और मस्तिषक तरोताज़ा होते हैं और अपनी ज़िम्मेदारियों पर पुनःकेन्द्रित भी हो सकते हैं। जब हम अपने सारे समय को किसी ना किसी कार्य से भरते रहते हैं, चाहे वह भला, उपयुक्त और आवश्यक कार्य ही क्यों ना हों, तो हमारा ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए परमेश्वर को हमें विश्राम में लेटा देना पड़ता है।

   हमारे सृष्टिकर्ता द्वारा, जो हमारी आवश्यकताओं को भली-भांति जानता है, विश्राम हमें दी गई एक भली भेंट है। उसका धन्यवाद करें कि वह कभी-कभी हमें विश्राम के लिए अपनी संगति की हरी चराईयों में लेटा देता है। - सिंडी हैस कैस्पर


यदि हम कार्य से अलग होकर विश्राम नहीं करेंगे, तो हम कार्य करने लायक ही ना रहकर बिखर जाएंगे। - हैवनर

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई करता है। - भजन 23:2-3

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:8-11
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43


मंगलवार, 3 नवंबर 2015

शान्त हों


   फ्रांस के पैरिस शहर में सन 1924 में आयोजित ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले धावक एरिक लिडिल की जीवनी पर एक फिल्म Chariots of Fire बनी। स्वर्ण पदक जीतने के पश्चात एरिक मिशनरी होकर चीन चले गए। कुछ वर्षों के बाद जब दूसरा विश्व-युद्ध आरंभ हुआ तो एरिक ने अपने परिवार को सुरक्षा के लिए कैनडा भेज दिया, लेकिन वे स्वयं चीन में ही रह गए। शीघ्र ही एरिक और अन्य प्रवासी मिशनरियों को एक जापानी शिविर में कैद करके रख दिया गया। कई महीनों की बन्धुवाई के बाद एरिक बीमार पड़े और डॉक्टरों को लगा कि उन्हें दिमाग़ में रसौली हो गई है।

   जिस अस्पताल में एरिक को रखा गया उसके निकट प्रत्येक इतवार को एक बैन्ड कुछ धुनें बजाया करता था। एक दिन एरिक ने उन से आग्रह किया कि वे मसीही भजन Be Still My Soul (मेरे मन शान्त रह) बजाएं। इस भजन के बोल हैं, "मेरे मन शान्त रह, समय निकट आ रहा है / जब हम सदा काल के लिए प्रभु के साथ होंगे / जब सब निराशाएं, दुख और भय जाते रहेंगे, / शोक ना होगा, प्रेम का पवित्र आनन्द पुनःस्थापित होगा / मेरे मन शान्त रह; अब परिवर्तन और आँसुओं का समय जाता रहेगा / अन्ततः हम सब सुरक्षित और आशीशित होकर एक साथ मिलेंगे। मैं सोचता हूँ कि उन दिनों एरिक इस गीत को स्मरण कर रहे थे, इस पर मनन कर रहे थे। उस बीमारी में यह भजन उनके लिए बहुत शान्तिदायक था और इस घटना के तीन दिन पश्चात उनका देहांत हो गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने अपने एक भजन में लिखा, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं..." (भजन 46:10)। अपने जीवन के गहन अन्धकार के समय में भी हम शान्त रह सकते हैं क्योंकि हमारे प्रभु यीशु ने हमारे लिए मृत्यु पर जय प्राप्त करी है, और आज उसमें आशीशित अनन्त जीवन उसपर विश्वास करने वाले सभी लोगों को सेंत-मेंत उपलब्ध है।

   इसलिए हम शान्त हों और प्रभु को हमारे हर भय का समाधान करने दें। - बिल क्राउडर


हमारे विचिलित मन का कोलाहल परमेश्वर की कोमल आवाज़ से शान्त हो जाता है।

परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे। - हबकुक 2:20

बाइबल पाठ: भजन 46:1-11
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।। 
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31
  • फिलेमौन 1


सोमवार, 17 अगस्त 2015

शान्त समय


   मुझे हमारी पृथ्वी के सागरों पर चन्द्रमा के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव द्वारा उत्पन्न होने वाले ज्वार और भाटे की लहरों के बारे में सोचकर बड़ा विलक्षण लगता है - पानी में लहरें चाँद के प्रभाव से ऊँची और नीची होती हैं। ज्वार से भाटे में परिवर्तित होते समय एक छोटा सा ऐसा समय होता है जब पानी का स्तर ना तो ऊँचा होता है और ना ही नीचा। वैज्ञानिक कहते हैं कि यह वह समय होता है जब पानी पर कोई ज़ोर नहीं होता; यह ज्वार के पुनः उठने से पहले का शान्त समय होता है।

   जीवन के कार्यों की व्यस्तता में हम अपने आप को विभिन्न आवश्यक ज़िम्मेदारियों के कारण कभी एक ओर तो कभी दूसरी ओर खिंचता हुआ अनुभव करते हैं जो हमारे जीवनों पर प्रभाव डालता है। मसीही सेवकाई में भी यह दिखाई देता है और हमारा प्रभु यीशु इस बात से भली-भांति परिचित था, वह जानता था कि उसके चेलों पर कैसे दबाव पड़ेंगे और उनको विश्राम की आवश्यकता होगी। जब प्रभु के चेले अपने पहले प्रचार और सेवकाई अभियान से वापस लौट कर आए तो उन्होंने बड़े उत्साह के साथ अपने अनुभव प्रभु यीशु को बताए (मरकुस 6:7-13; 30); परन्तु प्रभु यीशु ने उन से कहा, "...तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था" (मरकुस 6:31)।

   क्या ज़िम्मेदारियाँ का निर्वाह आपको दबाव में ला रहा है, भिन्न दिशाओं में खींच रहा है? ऐसे में विश्राम करने और थकान को दूर करके अपने शरीर को तरो-ताज़ा करने की योजना बनाना आपके लिए सर्वथा उपयुक्त और उचित है। हमारे शरीरों को इसकी आवश्यकता है और प्रभु यीशु ने इसकी सलाह दी है। जीवन की व्यस्तताओं में से कुछ शान्त समय निकालिए, वहाँ आप प्रभु से मिलें, उससे प्रार्थना में संगति करें,  ऐसा समय आपको ताज़गी देगा, ज़िम्मेदारियों को और भी भली भांति निभाने की सदबुद्धि और सामर्थ देगा। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के साथ शान्त समय बिताना, परमेश्वर से ताज़गी पाने का तरीका है।

और भोर को दिन निकलने से बहुत पहिले, वह[प्रभु यीशु] उठ कर निकला, और एक जंगली स्थान में गया और वहां प्रार्थना करने लगा। - मरकुस 1:35

बाइबल पाठ: मरकुस 6:7-13; 30-32
Mark 6:7 और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्हें दो दो कर के भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया। 
Mark 6:8 और उसने उन्हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे। 
Mark 6:9 परन्तु जूतियां पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो। 
Mark 6:10 और उसने उन से कहा; जहां कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहां से विदा न हो, तब तक उसी में ठहरे रहो। 
Mark 6:11 जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, और तुम्हारी न सुनें, वहां से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो। 
Mark 6:12 और उन्होंने जा कर प्रचार किया, कि मन फिराओ। 
Mark 6:13 और बहुतेरे दुष्टात्माओं को निकाला, और बहुत बीमारों पर तेल मलकर उन्हें चंगा किया। 
Mark 6:30 प्रेरितों ने यीशु के पास इकट्ठे हो कर, जो कुछ उन्होंने किया, और सिखाया था, सब उसको बता दिया। 
Mark 6:31 उसने उन से कहा; तुम आप अलग किसी जंगली स्थान में आकर थोड़ा विश्राम करो; क्योंकि बहुत लोग आते जाते थे, और उन्हें खाने का अवसर भी नहीं मिलता था। 
Mark 6:32 इसलिये वे नाव पर चढ़कर, सुनसान जगह में अलग चले गए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 97-99
  • रोमियों 16


सोमवार, 6 अक्टूबर 2014

शिथिल हाथ


   बचपन में मैं बहुत चंचल स्वभाव का था और कुछ स्थानों पर, जैसे कि चर्च में, मेरे लिए शान्त बैठे रहना बहुत कठिन होता था। चर्च में थोड़ी थोड़ी देर में मेरी माँ को मेरे घुटने दबा कर मुझे शान्त बैठे रहने के लिए कहते रहना पड़ता था। इसलिए जब मेरे सामने परमेश्वर के वचन बाइबल का पद, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं" (भजन 46:10) आता था तो मेरी समझ यही रहती थी कि इसका तात्पर्य चंचल या व्याकुल ना होने से है।

   कई वर्ष बाद मुझे मालूम हुआ कि मूल इब्रानी भाषा के जिस शब्द का अनुवाद "शान्त" या "चुप" हो जाना हुआ है उसका वास्तविक अर्थ मेरी धारणा से कहीं अधिक गहरा है; उसका वास्तविक अर्थ है "व्याकुलता छोड़ देना"। वह शब्द बताता है कि अपने हाथ और प्रयास शिथिल छोड़कर, सब कुछ परमेश्वर के हाथों में छोड़ दें, अपनी ओर से उसे कार्य करने दें और उसके कार्य में अपने सुझावों या प्रयासों का व्यवधान ना डालें। इस शब्द का यह चित्रण रोचक है क्योंकि हम अकसर अपने हाथों को ही व्यवधान के लिए प्रयोग करते हैं, चाहे वह किसी वस्तु का सामने से हटाने के लिए हो, या फिर उसे सामने लाने के लिए हो, या अपने बचाव के लिए कुछ बीच में लाने के लिए हो अथवा किसी पर प्रहार करने के लिए हो - हमारे हाथ ही सबसे पहले आगे आते हैं। जब हम अपने हाथों को शिथिल कर के नीचे लटका देते हैं तो हम अपने आप को कमज़ोर तथा असुरक्षित अनुभव करने लगते हैं। इस असुरक्षा और असहाय होने की स्थिति से हम तब ही बच सकते हैं जब हम परमेश्वर पर पूरा-पूरा भरोसा कर के यह स्वीकार कर लें कि, "परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक" (पद 1) तथा "सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है" (पद 7); दूसरे शब्दों में, व्याकुल होकर फड़फड़ाने की बजाए परमेश्वर को अपना कार्य अपनी रीति से करने दें और उसके समय की प्रतीक्षा करें।

   जीवन की हर परिस्थिति में हम परमेश्वर पर भरोसा रखने से आने वाली शान्ति का अनुभव कर सकते हैं (यूहन्ना 14:27)। हर परेशानी में परमेश्वर की सामर्थ हम मसीही विश्वासियों के साथ बनी रहती है, हमें बस प्रार्थनापूर्वक और बिना व्याकुल हुए उसके समय और विधि की प्रतीक्षा करनी है, और वह हमारे लिए मार्ग निकालेगा, हमें सुरक्षित रखे हुए उस मार्ग पर लेकर चलता रहेगा जब तक परेशानी से हमारा छुटकारा ना हो जाए। इसलिए अपनी हर परेशानी को परमेश्वर के हाथों में सौंप कर अपने हाथों को शिथिल छोड़ दें, व्याकुल ना हों और परमेश्वर को अपना कार्य अपनी रीति से करने दें; वह जो करेगा सर्वोत्तम करेगा और आपके भले के लिए ही करेगा। आपके शिथिल हाथ ही आपकी सबसे सामर्थी और कारगर सहायता होंगे। - जो स्टोवैल


जब हम अपने हाथ परमेश्वर के हाथों में छोड़ देते हैं, तब वह अपनी शान्ति हमारे मनों में भर देता है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27  

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।। 
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • सपन्याह 1-3


गुरुवार, 2 अक्टूबर 2014

सन्तुष्ट


   सन्तुष्ट रहना बहुत कठिन है। विश्वास के नायक, प्रेरित पौलुस को भी सन्तुष्ट रहना सीखना पड़ा (फिलिप्पियों 4:11); उसके लिए भी सन्तुष्टि, चरित्र का एक स्वाभाविक गुण नहीं था। पौलुस के द्वारा यह लिखा जाना कि वह हर परिस्थिति में सन्तुष्ट रहता है वास्तव में अचरजपूर्ण है, क्योंकि जब पौलुस ने फिलिप्पियों को अपनी पत्री लिखी, तब वह शासन के प्रति राजद्रोह और विश्वासघात जैसे गंभीर अपराधों के आरोप में जेलखाने में कैद था। उसने अपने न्याय के लिए रोमी साम्राज्य के सर्वोच्च स्थान अर्थात कैसर की अदालत में गुहार लगाई थी, परन्तु क्योंकि उसके पास ना तो कोई वैधानिक सहायक थे और ना ही कोई ऐसा मित्र-जानकार जो उसके लिए ऊँचे पदों पर कार्य करता, इसलिए पौलुस को अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए कैदखाने में पड़े पड़े ही प्रतीक्षा करनी पड़ रही थी। ऐसे में पौलुस के लिए अधीर और अप्रसन्न होना बहुत ही स्वाभाविक बात होती, लेकिन इसके विप्रीत इन परिस्थितियों में भी वह फिलिप्पियों के मसीही विश्वासियों को लिखता है कि उसने ऐसे में भी सन्तुष्ट रहना सीख लिया है।

   ऐसा पौलुस ने कैसे सीखा - एक एक कदम कर के, जब तक कि उसने असुविधाजनक परिस्थितियों में भी सन्तुष्ट रहने का पाठ भली भाँति सीख नहीं लिया। पहले उसने सीखा कि जो भी परिस्थिति उसके मार्ग में आए वह उसे स्वीकार करे (पद 12), फिर उसने सीखा कि जो कुछ भी सहायता उसे उसके साथी मसीही विश्वासियों से मिलती है उसके लिए वह धन्यवादी रहे (पद 14-18), और सबसे बड़ी बात जो उसने सीखी वह थी कि हर परिस्थिति में परमेश्वर ही है जो उसकी हर आवश्यकता को पूरी करता है (पद 19)।

   सन्तुष्ट रहना हमारे लिए भी स्वाभाविक गुण नहीं है। हमारे अन्दर पाई जाने वाली परस्पर स्पर्धा करने की प्रवृति हमें दूसरों के साथ तुलना करने, शिकायत करने तथा लालच करने के लिए उकसाती रहती है। हम में से शायद ही कोई होगा जो पौलुस के समान कठिनाईयों में पड़ा हो, इसलिए पौलुस का जीवन हमें सिखाता है कि हम भी उसके समान हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा रखें और सन्तुष्ट रहें। - सी. पी. हिया


सन्तुष्टि का अर्थ प्रत्येक ऐच्छित बात प्राप्त करना नहीं है, वरन हर प्राप्त बात के लिए परमेश्वर का धन्यवादी रहना है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:10-20
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला। 
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं। 
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है। 
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। 
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए। 
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की। 
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था। 
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए। 
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है। 
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। 
Philippians 4:20 हमारे परमेश्वर और पिता की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-4