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शनिवार, 12 दिसंबर 2020

उत्तर

 

          मेरे एक सहकर्मी ने मुझ से कहा कि उसे नहीं लगता था कि वह यीशु का अनुयायी होने के योग्य है। वह अपने आरामदेह, आत्मकेंद्रित जीवन का वर्णन कर रहा था, और मैं सुन रहा था। उसने स्वीकार किया कि वह अपने जीवन से संतुष्ट नहीं है, और कहा, “समस्या यह है कि मैं बहुत प्रयास करता हूँ कि अच्छा बनूँ, औरों की देखभाल भी किया करूं, परन्तु मेरे यह प्रयास कुछ कार्य नहीं कर रहे हैं। मुझे लगता है कि जो मैं करना चाहता हूँ वह तो नहीं करने पाता हूँ, परन्तु जो नहीं करना चाहता हूँ, वही करता रहता हूँ।”

          फिर उसने बड़े भरोसे तथा आशा के साथ मुझ से पूछा, “तुम्हारे जीवन का क्या रहस्य है?” मैंने भी बड़ी सच्चाई और गंभीरता से उत्तर दिया, “मेरा रहस्य यह है कि मेरा कोई रहस्य नहीं है! मैं भी परमेश्वर की धार्मिकता के स्तर के अनुसार जीवन जीने में उतना ही अयोग्य और अक्षम हूँ, जितने कि तुम हो, और इसी लिए हमें प्रभु यीशु की आवश्यकता है।”

          फिर मैंने परमेश्वर के वचन बाइबल में से उसे रोमियों 7:15 दिखाया, जहाँ पर पौलुस ठीक वही बात कहता है जो उसने अपने बारे में मुझ से कही थी। प्रेरित पौलुस द्वारा कहे गए ये हताशा के शब्द उन सभी के मनों को छूते हैं जो परमेश्वर के पास आने के लिए पर्याप्त ‘मात्रा’ में भला तो होना चाहते हैं, परन्तु हो नहीं पाते हैं; वे चाहे मसीही विश्वासी हों अथवा नहीं। संभव है कि ये शब्द आपके भी हृदय को छूते हैं। यदि ऐसा है तो पौलुस का यह कथन कि हमारे उद्धार तथा परिणामस्वरूप जीवन में आने वाले परिवर्तनों का कर्ता प्रभु यीशु है (7:25-8:2) आपको अवश्य ही रोमांचित करेगा। प्रभु यीशु ने हमारे लिए पहले ही वह सब कर के दे दिया है जो हमें उन बातों से मुक्त होने के लिए चाहिए, जिनके कारण हम अपने आप से परेशान रहते हैं।

          परमेश्वर तथा हमारे मध्य की दीवार, अर्थात, पाप की दीवार, हमारे द्वारा कुछ भी किए जाने के बिना ही, हमारे लिए प्रभु यीशु मसीह ने हटा दी है। परमेश्वर हम सभी का उद्धार, और पवित्र आत्मा के द्वारा हम में परिवर्तन और हमारी उन्नति चाहता है। वह हमारी आत्मा के द्वार पर खटखटाता है। उसके इस खटखटाने का उत्तर दीजिए, क्योंकि जीवन की हर बात के लिए वह ही उत्तर है। - रैंडी किलगोर

 

प्रभु यीशु के बिना, उद्धार और आत्मिक उन्नति, हमारी पहुँच के बाहर हैं।


वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहचान लें। क्योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है। - 1 तीमुथियुस 2:4-5

बाइबल पाठ: रोमियों 7:14-25

रोमियों 7:14 क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शारीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।

रोमियों 7:15 और जो मैं करता हूं, उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।

रोमियों 7:16 और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।

रोमियों 7:17 तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।

रोमियों 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।

रोमियों 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।

रोमियों 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।

रोमियों 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है।

रोमियों 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।

रोमियों 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगों में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।

रोमियों 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?

रोमियों 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूँ।

 

एक साल में बाइबल: 

  • होशे 9-11
  • प्रकाशितवाक्य 3

शनिवार, 19 सितंबर 2020

समय


        कल मैंने अपनी पहली संतान, अपनी बड़ी बेटी को, कॉलेज भेजने के लिए उसकी हवाई यात्रा का टिकट खरीदा। ऐसा करते समय मेरी आँखों से बहकर मेरे कम्प्यूटर के की-बोर्ड पर गिरते रहने वाले आँसुओं के बाद, मुझे अचरज है कि मेरा की-बोर्ड अभी भी काम कर रहा है। मुझे उसके साथ बिताए गए अठारह वर्ष का प्रत्येक दिन इतना अच्छा लगता है कि अब उसके चले जाने की बात सोच कर ही मैं उदास हो जाती हूँ। परन्तु फिर भी केवल इसलिए कि उसकी कमी मुझे बहुत खलेगी, मैं उसे उसके भविष्य के उन्नति के अवसरों से वंचित नहीं कर सकती हूँ। उसके जीवन के इस समय में, उसके लिए यह उचित है कि वह अपने जीवन की एक नई यात्रा आरंभ करे, अपने वयस्क होने को समझे और देश के एक नए भाग को देखे।

        जबकि बेटी की परवरिश का यह समय पूरा हो रहा है, किन्तु साथ ही एक दूसरा समय भी आरंभ हो रहा है। निःसंदेह, इस नए समय में भी नई चुनौतियां होंगी, और आनन्द के नए अवसर भी होंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा सुलैमान ने लिखा कि परमेश्वर हर बात के लिए एक समय नियुक्त करता है (सभोपदेशक 3:1)। हम मनुष्यों के हाथों में अपने जीवनों की घटनाओं पर बहुत कम नियंत्रण रहता है – वे घटनाएं चाहे हमारे पक्ष में हो अथवा विरोध में। परन्तु परमेश्वर अपने समय में हर बात को सुन्दर बना कर देता है (सभोपदेशक 3:11)।

        दुःख के समयों के लिए भी हम परमेश्वर पर भरोसा रख सकते हैं कि वह अपने समय में उनसे भी कुछ अच्छा निकाल कर लाएगा। हमारे आराम और आनन्द के समय आते-जाते रह सकते हैं, परन्तु परमेश्वर के कार्य सदा बने रहेंगे (पद 14)। हमें हर एक समय चाहे अच्छा न भी लगे, कुछ बहुत दुखद भी हो सकते हैं, परन्तु परमेश्वर हर समय में से कुछ अच्छा निकाल सकता है। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

परमेश्वर हर बात से कुछ मनोहर निकाल लाता है।


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 3:1-14

सभोपदेशक 3:1 हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है।

सभोपदेशक 3:2 जन्म का समय, और मरने का भी समय; बोने का समय; और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है;

सभोपदेशक 3:3 घात करने का समय, और चंगा करने का भी समय; ढा देने का समय, और बनाने का भी समय है;

सभोपदेशक 3:4 रोने का समय, और हंसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है;

सभोपदेशक 3:5 पत्थर फेंकने का समय, और पत्थर बटोरने का भी समय; गले लगाने का समय, और गले लगाने से रुकने का भी समय है;

सभोपदेशक 3:6 ढूंढ़ने का समय, और खो देने का भी समय; बचा रखने का समय, और फेंक देने का भी समय है;

सभोपदेशक 3:7 फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है;

सभोपदेशक 3:8 प्रेम का समय, और बैर करने का भी समय; लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है।

सभोपदेशक 3:9 काम करने वाले को अधिक परिश्रम से क्या लाभ होता है?

सभोपदेशक 3:10 मैं ने उस दु:ख भरे काम को देखा है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उस में लगे रहें।

सभोपदेशक 3:11 उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते है; फिर उसने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तौभी काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य बूझ नहीं सकता।

सभोपदेशक 3:12 मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं;

सभोपदेशक 3:13 और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे।

सभोपदेशक 3:14 मैं जानता हूं कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा; न तो उस में कुछ बढ़ाया जा सकता है और न कुछ घटाया जा सकता है; परमेश्वर ऐसा इसलिये करता है कि लोग उसका भय मानें।

 

एक साल में बाइबल:
  • सभोपदेशक  1-3
  • 2 कुरिन्थियों 11:16-33

शनिवार, 9 नवंबर 2019

अच्छा अन्त



      हम “अपोलो 13” फिल्म देखने गए थे; फिल्म आरंभ होने से पहले जब बत्तियाँ बन्द होने लगीं तो मेरे मित्र ने दबी आवाज़ में कहा, “दुःख की बात है, उन सबकी मृत्यु हो गई।” मैं 1970 के उस अंतरिक्ष यात्रा की फिल्म देखने लगी, उस दुर्घटना के घटित होने की प्रत्याशा में, और तब अन्त के निकट आकर ही मुझे पता चला कि मैं धोखे में थी। मैं उस घटना की सच्ची कहानी को या तो जानती नहीं थी, या भूल गई थी – उन अंतरिक्ष यात्रियों को बहुत से कठिनाइयाँ तो झेलनी पड़ीं थीं, परन्तु वे जीवित वापस घर लौट आए थे।

      मसीह यीशु में, हम भी कहानी के अन्त को जानते हैं – हम भी जीवित घर पहुँच जाएँगे। यह कहने से मेरा तात्पर्य है कि हम सभी मसीही विश्वासी अपने स्वर्गीय परेम्श्वर पिता के साथ अनन्तकाल तक रहेंगे, जैसा कि हम परमेश्वर के वचन बाइबल की अंतिम पुस्तक प्रकाशितवाक्य में देखते हैं। परमेश्वर सब कुछ नया कर देगा, एक नए आकाश और नई पृथ्वी की रचना करेगा (21:1, 5)। उस नए नगर में परमेश्वर अपने साथ अपने लोगों को रहने के लिए स्वागत करेगा, और वहाँ हम उसके साथ बिना किसी भय, बिना रात्रि के आए सदा काल तक रहेंगे। इस कहानी का अन्त जानने के कारण हम आशा से भर जाते हैं।

      इससे क्या फर्क पड़ता है? इससे अत्यंत दुःख या कठिनाई के समय में, जैसे कि जब कोई किसी प्रिय जन की मृत्यु का, या अपनी ही मृत्यु का सामना कर रहा हो, तो यह अनन्त आशा दृष्टिकोण को परिवर्तित कर सकती है। यद्यपि मृत्यु का विचार हमें घबराता है, परन्तु साथ ही अनन्त आनन्द को प्राप्त करने की प्रतिज्ञा शांतिदायक होती है। हम उस नगर की बाट जोह रहे हैं जहाँ कोई श्राप नहीं होगा, जहाँ हम परमेश्वर की ज्योति में सदा निवास करेंगे (22:5); यह अन्त अच्छा है। - एमी बाउचर पाई

परमेश्वर ने अपने लोगों के लिए कहानी का अच्छा अन्त रखा है।

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:4

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 22:1-5
Revelation 22:1 फिर उसने मुझे बिल्लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी दिखाई, जो परमेश्वर और मेंम्ने के सिंहासन से निकल कर उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी।
Revelation 22:2 और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे।
Revelation 22:3 और फिर श्राप न होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे।
Revelation 22:4 और उसका मुंह देखेंगे, और उसका नाम उन के माथों पर लिखा हुआ होगा।
Revelation 22:5 और फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले का प्रयोजन न होगा, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा: और वे युगानुयुग राज्य करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6



शनिवार, 12 अक्टूबर 2019

चरवाहा



      मैं अपने पति के साथ अस्पताल के कमरे में थी और चिन्तित होकर प्रतीक्षा कर रही थी। हमारे बेटे की आँखों का ऑपरेशन होना था, और मैं चिन्तित तथा बेचैन होकर कभी बैठती, कभी इधर से उधर टहलती। मैंने बैठकर प्रार्थना करने का भी प्रयास किया, कि परमेश्वर मुझे अपनी शान्ति प्रदान करे; और परमेश्वर के वचन बाइबल की अपनी प्रति के भी पन्ने पलटने में लगी रही कि कुछ शांतिदायक बात मेरे सामने आ जाए। फिर मैंने बाइबल का अपना जाना-पहचाना भाग यशायाह 40 खोला, इस आशा के साथ कि उसमें से कुछ नया और दिलासा देने वाला मुझे मिलेगा।

      पढ़ते हुए मैं साँस रोक कर ठहर गई; हज़ारों वर्ष पुराने उस लेख के शब्द मुझे स्मरण करवा रहे थे कि प्रभु एक चरवाहे के समान अपने झुण्ड की रखवाली करता है, अपने परेशान लोगों को मेमनों के समान अपनी गोद में उठाए रहता है, अपने हृदय के समीप रखता है (पद 11)। उसी क्षण, जैसे ही मुझे यह एहसास हुआ कि प्रभु मुझे और मेरे परिवार को थामे हुए है, हमारा मार्गदर्शन कर रहा है, हमारा ध्यान रखे हुए है, मेरी सारी चिंता जाती रही। मैंने लंबी साँस लेते हुए मन ही में धन्यवाद की प्रार्थना करते हुए प्रभु से कहा, “मुझे इसी की तो आवश्यकता थी।” मेरे बेटे का ऑपरेशन भी ठीक से हो गया और उस पूरे ऑपरेशन के दौरान तथा उसके बाद भी मुझे परमेश्वर की शान्ति का एहसास बना रहा।

      परमेश्वर ने अपने लोगों से यह प्रतिज्ञा की है कि वह एक चरवाहे के समान उनकी देखभाल करेगा, उनके दैनिक जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करता रहेगा, उन्हें शान्ति में बनाए रखेगा। हम जब उसे अपनी चिंताओं और परेशानियों से, हमें विचलित करने वाली बातों और विचारों से अवगत करवाते हैं, और उसकी शान्ति तथा प्रेम के खोजी होते हैं, तो हमें भी उसकी कोमल देखभाल का अनुभव होता है। हम जानने पाते हैं कि वह हमारा अच्छा चरवाहा है जो हमें अपने हृदय से लगाए रखता है और अपनी बाहों में भर कर हमें लिए चलता है। - एमी बाउचर पाई

अच्छा चरवाहा अपनी भेड़ों की चिन्ता करता है।

प्रभु यीशु ने कहा: “अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।” - यूहन्ना 10:11

बाइबल पाठ: यशायाह 40: 3-11
Isaiah 40:3 किसी की पुकार सुनाई देती है, जंगल में यहोवा का मार्ग सुधारो, हमारे परमेश्वर के लिये अराबा में एक राजमार्ग चौरस करो।
Isaiah 40:4 हर एक तराई भर दी जाए और हर एक पहाड़ और पहाड़ी गिरा दी जाए; जो टेढ़ा है वह सीधा और जो ऊंचा नीचा है वह चौरस किया जाए।
Isaiah 40:5 तब यहोवा का तेज प्रगट होगा और सब प्राणी उसको एक संग देखेंगे; क्योंकि यहोवा ने आप ही ऐसा कहा है।
Isaiah 40:6 बोलने वाले का वचन सुनाई दिया, प्रचार कर! मैं ने कहा, मैं क्या प्रचार करूं? सब प्राणी घास हैं, उनकी शोभा मैदान के फूल के समान है।
Isaiah 40:7 जब यहोवा की सांस उस पर चलती है, तब घास सूख जाती है, और फूल मुर्झा जाता है; नि:सन्देह प्रजा घास है।
Isaiah 40:8 घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।
Isaiah 40:9 हे सिय्योन को शुभ समचार सुनाने वाली, ऊंचे पहाड़ पर चढ़ जा; हे यरूशलेम को शुभ समाचार सुनाने वाली, बहुत ऊंचे शब्द से सुना, ऊंचे शब्द से सुना, मत डर; यहूदा के नगरों से कह, अपने परमेश्वर को देखो!
Isaiah 40:10 देखो, प्रभु यहोवा सामर्थ्य दिखाता हुआ आ रहा है, वह अपने भुजबल से प्रभुता करेगा; देखो, जो मजदूरी देने की है वह उसके पास है और जो बदला देने का है वह उसके हाथ में है।
Isaiah 40:11 वह चरवाहे के समान अपने झुण्ड को चराएगा, वह भेड़ों के बच्चों को अंकवार में लिये रहेगा और दूध पिलानेवालियों को धीरे धीरे ले चलेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40
  • कुलुस्सियों 4



रविवार, 7 जुलाई 2019

अच्छा



      मेरे माता-पिता ने मुझे और मेरी बहन को बचपन से ही “अच्छे लोग” होने की परवरिश दी। हमारे घर में “अच्छा” होने का अर्थ था माता-पिता का आज्ञाकारी होना, सदा सच बोलना, स्कूल और कार्य-स्थल के सभी दायित्वों के निर्वाह में सफल होना, और चर्च जाना...कम से कम क्रिसमस और ईस्टर पर तो अवश्य। मेरा मानना है कि अच्छा होने की यह परिभाषा बहुतेरे लोगों के लिए चिर-परिचित है, वे चाहे किसी भी स्थान या संस्कृति के क्यों न हों। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में अपनी संस्कृति के अनुसार “अच्छे” होने की परिभाषा के द्वारा एक बड़ी बात को समझाया।

      पौलुस, प्रथम शताब्दी का एक भक्त यहूदी व्यक्ति थी, और अपनी संस्कृति के नैतिक व्यवस्था का बहुत कड़ाई से पालन करता था। उसका जन्म “अच्छे” परिवार में हुआ था, उसे “अच्छी” शिक्षा मिली थी, और वह “अच्छे” धर्म का सही निर्वाह करता था। वह यहूदी मान्यताओं के अनुसार “अच्छा” व्यक्ति होने के सभी मानकों पर खरा उतरता था। पौलुस ने अपनी पत्री में यह भी लिखा कि यदि वह चाहता तो अपने अच्छे होने पर घमण्ड भी कर सकता था। परन्तु इतना सब अच्छा होते हुए भी, एक बार जब पौलुस का प्रभु यीशु मसीह से साक्षात्कार हो गया, तो उसने अपने अच्छे होने की वास्तविकता को पहचाना, और जान लिया कि चाहे अच्छा होना भला है, किन्तु परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

      पौलुस ने आगे लिखा, कि परमेश्वर को प्रसन्न करने के लिए प्रभु यीशु मसीह को व्यक्तिगत रीति से जानना अनिवार्य है। पौलुस ने स्वयँ अपने विषय कहा कि अपनी सभी घमंड कर सकने योग्य बातों को वह, प्रभु यीशु मसीह की पहचान की उत्तमता के सामने “कूड़ा” समझता है। जो बात पौलुस ने अपने उदाहरण से हमें समझाई है वह है : अपनी अच्छाई मात्र से ही हम परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले और उसे ग्रहण योग्य नहीं हो जाते हैं; केवल जब प्रभु यीशु मसीह ही में हमारा विश्वास, समर्पण और आशा होते हैं, तब ही हम वास्तव में “अच्छे” होते हैं और परमेश्वर को प्रसन्न करने पाते हैं। - कैरेन वुल्फ


हम भले, और परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले तब ही होते हैं, 
जब हम केवल प्रभु यीशु मसीह ही में विश्वास और आशा रखते हैं।

हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं, और हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं। हम सब के सब पत्ते के समान मुर्झा जाते हैं, और हमारे अधर्म के कामों ने हमें वायु के समान उड़ा दिया है। - यशायाह 64:6

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:1-11
Philippians 3:1 निदान, हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो: वे ही बातें तुम को बार बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्हारी कुशलता है।
Philippians 3:2 कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करने वालों से चौकस रहो, उन काट कूट करने वालों से चौकस रहो।
Philippians 3:3 क्योंकि खतना वाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते।
Philippians 3:4 पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं।
Philippians 3:5 आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं; व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं।
Philippians 3:6 उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला; और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था।
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है।
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं।
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं।
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 34-35
  • प्रेरितों 15:1-21