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गुरुवार, 27 अप्रैल 2017

पालनहार


   मेरे मित्र ग्रीष्म ऋतु के लिए सब्ज़ियाँ उगाने की योजनाएं बना रहे हैं, उन्हें लागू कर रहे हैं। कुछ ने शीघ्र आरंभ के लिए घरों के अन्दर ही बीज बो कर पौध उगाना आरंभ कर दिया है, जहाँ बीजों के अंकुरित होने के लिए वे सबसे उपयुक्त वातावरण को बना तथा नियंत्रित कर सकते हैं। जब शरद ऋतु के पाले द्वारा अंकुरों को हानि का खतरा टल जाएगा तब वे उन पौधों को बाहर ज़मीन में बनी क्यारियों में लगा देंगे। एक बार पौधे उगने लगें, फिर उनकी देखभाल करने, समय से उन्हें पर्याप्त रीति से सींचने, खाद डालने, जंगली पौधों को निकालने, कीट तथा जानवरों से उनका बचाव करने, आदि का समय आरंभ हो जाता है। भोजन वस्तु को उगाना बड़ी मेहनत का कार्य है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि मूसा के द्वारा परमेश्वर ने इस्त्राएलियों को इस बात का स्मरण दिलाया। जब वे इस्त्राएली मिस्त्र में दासत्व में थे तो उन्हें अपने हाथों से फसल की सींचाई करनी पड़ती थी (व्यवस्थाविवरण 11:10)। परन्तु परमेश्वर जिस स्थान पर बसाने के लिए उन्हें लेकर जा रहा था, वहाँ के लिए उसने उनसे वायदा किया था कि उनके इस परिश्रम को हलका करेगा, उन्हें समयानुसार वर्षा देगा: "मैं तुम्हारे देश में बरसात के आदि और अन्त दोनों समयों की वर्षा को अपने अपने समय पर बरसाऊंगा, जिस से तू अपना अन्न, नया दाखमधु, और टटका तेल संचय कर सकेगा" (व्यवस्थाविवरण 11:14)। परमेश्वर ने ऐसा करने के लिए केवल एक ही शर्त रखी थी, "और यदि तुम मेरी आज्ञाओं को जो आज मैं तुम्हें सुनाता हूं ध्यान से सुनकर, अपने सम्पूर्ण मन और सारे प्राण के साथ, अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम रखो और उसकी सेवा करते रहो" (व्यवस्थाविवरण 11:13)। प्रभु परमेश्वर अपने लोगों को एक ऐसे स्थान पर ले जा रहा था जहाँ उनकी आज्ञाकारिता और परमेश्वर की आशीष मिलकर अन्य लोगों के लिए जीवन का प्रकाश बन जाएंगे।

   आज भी परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों के द्वारा यही प्रयोजन रखता है; वह चाहता है कि उसके प्रति हमारा प्रेम, उसके वचन के प्रति हमारी आज्ञाकारिता के द्वारा प्रगट हो, जिससे उसकी आशीषों से परिपूर्ण होकर हमारे जीवन औरों को परमेश्वर की ओर आकर्षित करने वाली ज्योति बन जाएं। वह चाहता है कि संसार हमारे जीवनों से देखे कि वो हमारा सृष्टिकर्ता ही नहीं वरन पालनहार भी है, और हम सब के लिए अनन्त आनन्द के जीवन की ज्योति तथा मार्ग भी। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर से प्रेम करने से जीवन सरल नहीं हो जाता; 
परन्तु उसकी सामर्थ्य से सहज अवश्य हो जाता है।

यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे। - यूहन्ना 14:23

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 11:8-15
Deuteronomy 11:8 इस कारण जितनी आज्ञाएं मैं आज तुम्हें सुनाता हूं उन सभों को माना करना, इसलिये कि तुम सामर्थी हो कर उस देश में जिसके अधिकारी होने के लिये तुम पार जा रहे हो प्रवेश कर के उसके अधिकारी हो जाओ, 
Deuteronomy 11:9 और उस देश में बहुत दिन रहने पाओ, जिसे तुम्हें और तुम्हारे वंश को देने की शपथ यहोवा ने तुम्हारे पूर्वजों से खाई थी, और उस में दूध और मधु की धाराएं बहती हैं। 
Deuteronomy 11:10 देखो, जिस देश के अधिकारी होने को तुम जा रहे हो वह मिस्र देश के समान नहीं है, जहां से निकलकर आए हो, जहां तुम बीज बोते थे और हरे साग के खेत की रीति के अनुसार अपने पांव की नलियां बनाकर सींचते थे; 
Deuteronomy 11:11 परन्तु जिस देश के अधिकारी होने को तुम पार जाने पर हो वह पहाड़ों और तराईयों का देश है, और आकाश की वर्षा के जल से सिंचता है; 
Deuteronomy 11:12 वह ऐसा देश है जिसकी तेरे परमेश्वर यहोवा को सुधि रहती है; और वर्ष के आदि से ले कर अन्त तक तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि उस पर निरन्तर लगी रहती है।
Deuteronomy 11:13 और यदि तुम मेरी आज्ञाओं को जो आज मैं तुम्हें सुनाता हूं ध्यान से सुनकर, अपने सम्पूर्ण मन और सारे प्राण के साथ, अपने परमेश्वर यहोवा से प्रेम रखो और उसकी सेवा करते रहो, 
Deuteronomy 11:14 तो मैं तुम्हारे देश में बरसात के आदि और अन्त दोनों समयों की वर्षा को अपने अपने समय पर बरसाऊंगा, जिस से तू अपना अन्न, नया दाखमधु, और टटका तेल संचय कर सकेगा। 
Deuteronomy 11:15 और मैं तेरे पशुओं के लिये तेरे मैदान में घास उपजाऊंगा, और तू पेट भर खाएगा और सन्तुष्ट रहेगा।

एक साल में बाइबल:

  • 1 राजा 1-2
  • लूका 19:28-48


शुक्रवार, 25 फ़रवरी 2011

परमेश्वर की उपासना

परमेश्वर, सिद्ध पवित्र परमेश्वर, सच्ची उपासना के योग्य है। वह ही हमारा सृजनहार, पालनहार, तारणहार है। यदि उसका प्रेम भरा मार्गदर्शन और देख-रेख हमें उपलब्ध न हो तो हमारे जीवन के लिये कोई आशा न रहे। इसलिये हमें सर्वदा उसकी ऐसी उपासना करनी चाहिये जो उसके नाम को आदर और उसे सच्ची महिमा देती हो।

प्रभु यीशु ने सामरी स्त्री से अपनी बातचीत में कहा "परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें।" (यूहन्ना ४:२४)

अपनी उत्कृष्ट पुस्तक "The Practice of the Presence of God" में लेखक भाई लौरेन्स इस का अर्थ इस प्रकार समझाते हैं "सच्चाई से परमेश्वर की आराधना करने का तातपर्य है कि परमेश्वर की वास्तविकता को जानना, उसके संपूर्ण गुणों को पहिचानना, अर्थात यह कि वह अपनी अनन्त संपूर्णता में सिद्ध, हर एक प्रकार कि बुराई से परे और समस्त दिव्यगुणों से परिपूर्ण है। किसी मनुष्य के पास उपासना करने का चाहे कोई बहुत ही छोटा प्रतीत होने वाला कारण ही क्यों न हो, लेकिन जब वह उपासना करे तो ऐसे महान परमेश्वर की उपासना उसे अपनी सारी सामर्थ से करनी चाहिये।"

हमें अपने आप से पूछने की आवश्यक्ता है कि जिस ने हमें बनाया है, क्या उसकी उपासना हम इस प्रकार करते हैं? क्या सदा अपने मन मस्तिष्क कि गहिराईयों से हम उसका आदर और मान बनाए रखते हैं? क्या जब हम उसके सन्मुख आते हैं तो उससे जिससे कोई बात छिपी नहीं है, जो मन की बात और मस्तिष्क के विचारों को भी जानता है, उसके सन्मुख अपने आप को पूरी सच्चाई से प्रस्तुत करते हैं या उससे कुछ छिपाते हुए, कोई बहाने बनाते हुए, अपने आप को सही प्रमाणित करने के प्रयास के साथ आते हैं? क्या वह जो है, हम उसकी हस्ती और उसके गुणों का अंगीकार करते हैं?

यदि उस सर्वसामर्थी, सर्वव्यापी और सर्वज्ञानी परमेश्वर की सच्ची उपासना करनी है तो यह केवल "आत्मा और सच्चाई" ही में हो सकती है। - डेव एग्नर


यदि जीवन में मसीह सबसे बहुमूल्य नहीं तो फिर उसका कोई मूल्य नहीं।

परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें। - यूहन्ना ४:२४



बाइबल पाठ: यूहन्ना ४:९-२६

उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्‍यों मांगता है? (क्‍योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
क्‍या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया और आप ही अपने सन्‍तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।
यीशु ने उस से कहा, जा, अपने पति को यहां बुला ला।
स्त्री ने उत्तर दिया, कि मैं बिना पति की हूं: यीशु ने उस से कहा, तू ठीक कहती है कि मैं बिना पति की हूं।
क्‍योंकि तू पांच पति कर चुकी है, और जिस के पास तू अब है वह भी तेरा पति नहीं; यह तू ने सच कहा है।
स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, मुझे ज्ञात होता है कि तू भविष्यद्वक्ता है।
हमारे बाप-दादों ने इसी पहाड़ पर भजन किया: और तुम कहते हो कि वह जगह जहां भजन करना चाहिए यरूशलेम में है।
यीशु ने उस से कहा, हे नारी, मेरी बात की प्रतीति कर कि वह समय आता है कि तुम न तो इस पहाड़ पर पिता का भजन करोगे न यरूशलेम में।
तुम जिसे नहीं जानते, उसका भजन करते हो, और हम जिसे जानते हैं उसका भजन करते हैं; क्‍योंकि उद्धार यहूदियों में से है।
परन्‍तु वह समय आता है, वरन अब भी है जिस में सच्‍चे भक्त पिता का भजन आत्मा और सच्‍चाई से करेंगे, क्‍योंकि पिता अपने लिये ऐसे ही भजन करने वालों को ढूंढ़ता है।
परमेश्वर आत्मा है, और अवश्य है कि उसके भजन करने वाले आत्मा और सच्‍चाई से भजन करें।
स्त्री ने उस से कहा, मैं जानती हूं कि मसीह जो ख्रीस्‍तुस कहलाता है, आनेवाला है; जब वह आएगा, तो हमें सब बातें बता देगा।
यीशु ने उस से कहा, मैं जो तुझ से बोल रहा हूं, वही हूं।

एक साल में बाइबल:
  • गिनती १२-१४
  • मरकुस ५:२१-४३