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शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2010

स्मर्णशक्ति का सदुपयोग

न्यू यॉर्क टाईम्स में प्रकाशित एक लेख में बताया गया कि कंप्यूटर में आंकड़ों को संग्रहण करने की क्षमता की बढ़ोतरी से मनुष्य द्वारा अपनी स्मर्णशक्ति का उपयोग कम होता जा रहा है। हमारे इलैक्ट्रौनिक उपकरण अब हमारे लिये फोन नम्बर, विभिन्न स्थानों और लोगों के पते-ठिकाने तथा वहां तक पहुंचने के साधन और रास्ते इत्यादि याद रखते हैं। यह सब और ऐसी ही अन्य जानकारियां कुछ समय पहले हम बार बार उपयोग के द्वारा याद करते थे। विद्यालयों में अब पाठ को कंठस्त करने और स्मरण करके बताने की प्रथा लोप होती जा रही है। टाईम्स के इस लेख के अनुसार हम अब ऐसी संसकृति को बढ़ावा दे रहे हैं जो स्मरणशक्ति के विकास को महत्व नहीं देती।

इस बदलते संसार में अब मसीही विश्वासियों के लिये यह और भी अधिक आवश्यक हो गया है कि वे परमेश्वर के वचन को अपने मन में बसा लें "जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं, मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरूद्ध पाप न करूं" (भजन ११९:९-११)। परमेश्वर के वचन को स्मरण करना केवल स्वस्थ मानसिक अभ्यास ही नहीं है, वरन इसका उद्देश्य है कि हम अपने मन को परमेश्वर के वचन से ऐसा भर लें कि हमारे जीवनों का निर्वाह उसके निर्देशों के अनुसार हो जाएं। भजनकार ने लिखा " हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा। मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे, तू अपने मार्ग में मुझे जिला" (भजन ११९:३३, ३७)।

क्यों न आज से ही परमेश्वर के वचन को स्मरण करना आरंभ कर दें? इस स्मरण अभ्यास प्रक्रिया में सफल्ता की कुंजी है इसके प्रतिदिन का नियमित अनुशासन और याद किये गये को बार बार दोहराते रहना। और जैसे शारीरिक व्यायाम के लिये, वैसे ही आत्मिक अभ्यास के लिये भी किसी मित्र या छोटे समूह में किया जाना, और भी अधिक उपयोगी होता है।

परमेश्वर के वचन के जीवनदायी ज्ञान और शिक्षाओं का पालन करना कभी न भूलें। - डेविड मैककैसलैंड


बाइबल की बातों से अपने मन को भर लो, उसे अपने हृदय पर राज्य और जीवन को निर्देशित करने दो।

मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे, तू अपने मार्ग में मुझे जिला। - भजन ११९:३७


बाइबल पाठ: भजन ११९:३३-४०

हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा।
मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा।
अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं।
मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे।
मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला।
तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर।
जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर; क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं।
देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ६५-६६
  • १ तिमुथियुस २

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

मन का संगीत

अपनी पुस्तक "Musicophilia: Tales of Music and the Brain" में लेखक औलिवर ने मानसिक रोगों के उपचार में संगित के प्रभाव को पूरा एक अध्याय दिया है। औलिवर ने लिखा है कि उसने देखा है कि "एलज़्हाईमर्स रोग (जो स्मरण शक्ति को नष्ट करके रोगी को परिवार और समाज में रहते हुए भी सबसे अलग-थलग कर देता है), के काफी बढ़े लक्षणों वाले रोगियों के समूह को भी जब संगीत सुनाया गया तो बीते समय की उनकी यादें, जिन्हें वे भूल चुके थे, सजीव हो गईं। पुराना संगीत सुनकर, जैसे जैसे वे उसे पहचानने लगे, रोगियों के चेहरे के भाव बदलने लगते हैं और उनके चेहरे पर रौनक आने लगती है। फिर एक दो जन उस संगीत को बजते हुए संगीत के साथ गाने लगते हैं। उनको गाते देखकर और रोगी भी उनके साथ सम्मिलित होने लगते हैं और धीरे धीरे सारा समूह ही एक साथ गाने लगता है, जबकि इससे पहिले उनमें से कुछ बिलकुल मौन रहते थे।"

औलिवर के समान मैंने भी ऐसी ही प्रतिक्रिया एलज़्हाईमर्स रोगियों की देख-रेख करने वाले एक स्थान पर जहां मेरी सास रहती थीं, उनके लिये आयोजित करी जाने वाली इतवार की चर्च सभा में देखी है। शायद आपने भी कुछ ऐसा अपने किसी प्रीय जन के साथ अनुभव किया हो, जिनकी स्मरण शक्ति धुंधली पड़ गई हो और कोई गीत सुनकर उनके अन्दर से प्रतिक्रिया आरंभ हो जाती है।

पौलुस ने इफुसुस के मसीहियों को प्रोत्साहित किया कि "दाखरस से मतवाले न बनो, क्‍योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ। और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो" (इफिसियों ५:१८, १९)। ऐसे गीत जो परमेश्वर को महिमा देते हैं, मन की गहराईयों तक जाते हैं, जहां उनके अर्थ कभी लुप्त नहीं होते। ये स्तुति के गीत, उनमें व्याप्त कविता, लय और विचारों से भी बढ़कर मन एवं हृदय को स्वस्थ रखते हैं। - डेविड मैककैसलैंड


परमेश्वर के साथ लयबद्ध मन उसकी स्तुति गाये बिना रह नहीं सकता।

आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो। - इफिसियों ५:१९


बाइबल पाठ: इफिसियों ५:१५-२१

इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो।
और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्‍योंकि दिन बुरे हैं।
इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्‍छा क्‍या है,
और दाखरस से मतवाले न बनो, क्‍योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।
और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो।
और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो।
और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह १४-१६
  • इफिसियों ५:१-१६