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रविवार, 8 अगस्त 2010

ग्रैनविल शार्प

ग्रैनविल शार्प (सन १७३५-१८१३) युनानी भाषा का एक प्रख्यात विद्वान था। जब मैं बाइबल कॉलेज में पढ़ता था तो युननी भाषा की कक्षा में उसका नाम भी लिया जाता था। युनानी भाषा के उसके अध्ययन द्वारा ही उन सिध्दांतों का प्रतिपादन हुआ जिनके आधार पर नए नियम का उसकी मूल युनानी भाषा से अनुवाद और व्याख्या संभव हो सकी।

पवित्र शास्त्र को पढ़ना और उसके सामर्थी सत्यों को जानना श्रेष्ठ कार्य है, लेकिन हम चाहे जितनी भी गहराई से उसे पढ़ लें, केवल उसे पढ़ना ही काफी नहीं होता है। याकूब ने इस बात को समझने की चुनौती दी जब उसने लिखा: "परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था" (याकूब १:२२-२४)।

ग्रैनविल शार्प ने इस बात को समझा और अपने विश्वास को व्यावाहरिक रूप दिया। वह न केवल बाइबल का विद्वान था वरन इंगलैंड में दास प्रथा के विरुद्ध सन्घर्ष करने वाला भी बना। उसने कहा, "दास प्रथा का समर्थन करना अमानवीय व्यवहार का समर्थन करना है।" बाइबल से उसे प्राप्त हुए मानवीय आत्मा की कीमत के बोध और पवित्र परमेश्वर के न्याय की समझ ने उसे अपने विश्वास को कार्यन्वित करने पर बाध्य किया।

वचन की ज्ञान के प्रति शार्प के जोश और उसके सत्य का पालन करने की उसकी कटिबद्धता से हमें शिक्षा लेनी चाहिये। - बिल क्राउडर


यदि हम बाइबल के वचनों का पालन नहीं करते तो हम बाइबल को जानते ही नहीं।

परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। - याकूब १:२२


बाइबल पाठ: याकूब १:१९-२७

हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।
क्‍योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।
इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो ह्रृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
परन्‍तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।
क्‍योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
इसलिये कि वह अपने आप को देखकर चला जाता, और तुरन्‍त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपके काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुन कर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों ओर विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७४-७६
  • रोमियों ९:१६-३३

शनिवार, 7 अगस्त 2010

अनुसरण

जब मैं कॉलेज में था तो मेरा सहकर्मी बड अपनी तीक्षण बुद्धिमता की बातों द्वारा अकसर मेरे जीवन को नई रौशनी से रौशन करता रहता था। एक दिन हम एक साथ बैठे भोजन कर रहे थे और मैंने बड से कहा कि मैं एक दूसरे कॉलेज में दाखिला ले रहा हूँ।

उसने पूछा, "क्यों?"

मैंने उत्तर दिया, "क्योंकि मेरे सारे दोस्त ऐसा ही कर रहे हैं।"

वह कुछ देर अपने भोजन को चबाता रहा, फिर दबी आवाज़ में व्यंग्य के साथ बोला, "शायद कॉलेज चुनने का यही सही तरीका है।"

उसके शब्द मेरे मन में गड़ गए। मैंने सोचा, " हो सकता है, लेकिन क्या कॉलेज चुनने का यही एक तरीका है? क्या मैं अपनी सारी उम्र अपने मित्रों का अनुसरण करता रहूंगा, या मसीह यीशु का अनुसरण करूंगा? क्या मैं प्रभु यीशु के दर्शन और उसकी इच्छा का खोजी होकर वहां जाऊंगा जहां वह मुझे भेजना चाहता है?"

नए नियम में प्रभु यीशु ने पच्चीस बार अपने चेलों से कहा कि वे उसका अनुसरण करें। मरकुस ८:३४ में यीशु ने कहा, "...जो कोई मेरे पीछे आना चाहे, वह अपने आपे से इन्‍कार करे और अपना क्रूस उठाकर, मेरे पीछे हो ले।" और लोग चाहे जो भी करें, या उनके जीवन चाहे किसी भी दिशा में जाएं, हमें वही करना है जो प्रभु हम से करने को कहता है।

इस संदर्भ में एक पुराने गीत की पंक्ति स्मरण आती है, "मेरा प्रभु जंगल से होकर निकलने का मार्ग जानता है; मुझे केवल उसका अनुसरण करना है।" - डेविड रोपर


जीवन में सही मार्ग पाने के लिये, प्रभु यीशु का अनुसरण करें।

यदि कोई मेरी सेवा करना चाहे, तो मेरे पीछे हो ले; और जहां मैं हूं वहां मेरा सेवक भी होगा। - यूहन्ना १२:२६


बाइबल पाठ: मरकुस ८:३४-३८

उस ने भीड़ को अपने चेलों समेत पास बुलाकर उन से कहा, जो कोई मेरे पीछे आना चाहे, वह अपने आपे से इन्‍कार करे और अपना क्रूस उठाकर, मेरे पीछे हो ले।
क्‍योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहे वह उसे खोएगा, पर जो कोई मेरे और सुसमाचार के लिये अपना प्राण खोएगा, वह उसे बचाएगा।
यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्‍त करे और अपके प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्‍या लाभ होगा?
और मनुष्य अपके प्राण के बदले क्‍या देगा?
जो कोई इस व्यभिचारी और पापी जाति के बीच मुझ से और मेरी बातों से लजाएगा, मनुष्य का पुत्र भी जब वह पवित्र दूतों के साथ अपने पिता की महिमा सहित आएगा, तब उस से भी लजाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७२, ७३
  • रोमियों ९:१-१५

शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

सही मार्ग सुझाना

एक नई वैबसाईट आपकी सहायता करती है कि आप अपने किसी सहकर्मी तक वह सन्देश पहुंचा सकें जो आप व्यक्तिगत तौर पर उससे कहने में घबराते हैं, जैसे "मुंह स्वच्छ रखने वाली गोली का प्रयोग तुम्हारे लिये लाभकारी होगा", या "तुम्हारे मोबाइल फोन की आवाज़ बहुत उंची है", या "तुम सदा बहुत तेज़ इत्र प्रयोग करते हो" आदि। आप इन और ऐसे अन्य मुद्दों का सामना बेनाम होकर कर स्कते हैं क्योंकि वह वैबसाईट आपके लिये आपके सहकर्मी को आपका सन्देश एक बेनाम ई-मेल द्वारा भेज देगी।

दूसरों को उनकी वह बातें बताने में संकोच करना, जिनसे हमें परेशानी होती है, स्वभाविक बात है। परन्तु जब बात आती है सहविश्वासियों से उनके जीवन में पाये जाने वाले पाप के विष्य में बात करने की, तो यह और भी गंभीर बात हो जाती है। चाहे हम कितना ही चाहें कि यह बात हम बेनाम होकर कर सकें, किंतु यह हमें प्रत्यक्ष ही करना है। ऐसा करने के लिये गलतियों ६:१-५ कुछ सुझाव देता है। दूसरों से उनके पाप के बारे में बात करने के लिये, सबसे पहली और अनिवार्य बात है कि हम स्वयं परमेश्वर के निकट हों, तथा उस दूसरे से जो पाप में है, हम अपने आप को श्रेष्ठ जता के अपनी बड़ाई न करें। फिर हमें उस परिस्थिति को इस तरह आंकना है कि हम किसी पर दोष लगा कर उसे नीचा दिखाने वाले नहीं वरन उसे सहारा देकर सुधार तक लाने वाले बनें। नम्रता का आत्मा हम में सदा बना रहना है, इस भय में कि कभी हम भी ऐसी ही किसी परीक्षा में गिर सकते हैं।

प्रभु यीशु ने भी पापों के प्रति व्यक्तिगत व्यवहार के लिये कुछ निर्देश दिये - मत्ती ७:१-५, १८:१५-२०।

परमेश्वर की सामर्थ द्वारा हम हिम्मत और सहनुभूति सहित दूसरों को उनके पापों का सामना करवा सकते हैं और उन्हें पुनः परमेश्वर के निकट ला सकते हैं। - ऐने सेटास

लोगों को वापस सही मार्ग पर लाने के लिये पहले उनके साथ चलिये और तब मार्गदर्शन कीजिए।


तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। - गलतियों ६:२


बाइबल पाठ: गलतियों ६:१-५

हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो।
तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।
क्‍योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।
पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्‍तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा।
क्‍योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ७०, ७१
  • रोमियों ८:२२-३९

गुरुवार, 5 अगस्त 2010

मन की बात

एक आध्यत्मिक सभा के आरंभ में हमारे वक्ता ने प्रश्न पूछा, "आपका मन कैसा है?" मैं इस प्रश्न से अवाक रह गया क्योंकि मैं अपनी बुद्धि से विश्वास और हाथों से काम करने पर केंद्रित रहता हूँ। सोचने और करने के बीच मेरा मन एक किनारे रह जाता है। सभा के दौरान वह वक्ता हमें बाइबल से दिखाता गया कि कैसे बाइबल हमारे जीवन के इस केंद्र - हमारे मन पर बार बार ज़ोर देती है; और मैं उस वक्ता की प्रस्तावना को समझने पाया कि विश्वास और सेवा, किसी भी अन्य बात से बढ़कर, अन्ततः मन ही की बात है।

जब प्रभु यीशु ने एक दृष्टांत द्वारा समझाया कि लोग कैसे उसकी शिक्षाओं को ग्रहण करते और उनके प्रति अपनी प्रतिक्रीया करते हैं (मत्ती १३:१-९) तो उसके चेलों ने उससे पूछा (पद १०), की "तू उन से दृष्‍टान्‍तों में क्‍यों बातें करता है?" उत्तर में प्रभु यीशु ने यशायाह भविष्यद्वक्ता को उद्वत किया, "क्‍योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है, और वे कानों से ऊंचा सुनते हैं और उन्‍हों ने अपनी आंखें मूंद लीं हैं, कहीं ऐसा न हो कि वे आंखों, से देखें, और कानों, से सुनें और मन से समझें, और फिर जाएं, और मैं उन्‍हें चंगा करूं" (पद १५, यशायाह ६:१०)।

अपने मन को नज़र अंदाज़ करना कितना आसान और खतरनाक है। यदि हमारे मन कठोर हो जाएं तो जीने और सेवा करने में हम कोई आनन्द नहीं पाएंगे और जीवन नीरस और खोखला लगेगा। किंतु यदि हमारे मन परमेश्वर की ओर कोमल रहेंगे तो हम दूसरों के लिये समझ-बूझ और सहानुभूति के स्त्रोत बन जाएंगे।

तो आपका मन कैसा है? - डेविड मैक्कैसलैंड


हम भले कार्य करने में इतने व्यस्त न हो जाएं कि हमारा मन ही परमेश्वर से दूर हो जाए।

इन लोगों का मन मोटा हो गया है, और वे कानों से ऊंचा सुनते हैं और उन्‍हों ने अपनी आंखें मूंद लीं हैं - मत्ती १३:१५


बाइबल पाठ: मत्ती १३:१०-१५

और चेलों ने पास आकर उस से कहा, तू उन से दृष्‍टान्‍तों में क्‍यों बातें करता है?
उस ने उत्तर दिया, कि तुम को स्‍वर्ग के राज्य के भेदों की समझ दी गई है, पर उन को नहीं।
क्‍योंकि जिस के पास है, उसे दिया जाएगा, और उसके पास बहुत हो जाएगा; पर जिस के पास कुछ नहीं है, उस से जो कुछ उसके पास है, वह भी ले लिया जाएगा।
मैं उन से दृष्‍टान्‍तों में इसलिये बातें करता हूं, कि वे देखते हुए नहीं देखते, और सुनते हुए नहीं सुनते, और नहीं समझते।
और उन के विषय में यशायाह की यह भविष्यद्ववाणी पूरी होती है, कि तुम कानों से तो सुनोगे, पर समझोगे नहीं, और आंखों से तो देखोगे, पर तुम्हें न सूझेगा।
क्‍योंकि इन लोगों का मन मोटा हो गया है, और वे कानों से ऊंचा सुनते हैं और उन्‍हों ने अपनी आंखें मूंद लीं हैं, कहीं ऐसा न हो कि वे आंखों से देखें, और कानों से सुनें और मन से समझें, और फिर जाएं, और मैं उन्‍हें चंगा करूं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ६८, ६९
  • रोमियों ८:१-२१

बुधवार, 4 अगस्त 2010

हमारा नैतिक कुतुबनुमा

जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन का परिचय लेखिका हैरियट बीचर स्टोव से करवाया गया तो कहा जाता है कि उन्हों ने उन से कहा कि "आप ही वह छोटी सी नारी हैं जिनकी लिखी पुस्तक के कारण यह बड़ा युध्द आरंभ हुआ।"

यद्यपि राष्ट्रपति लिंकन की यह टिपण्णी पूर्ण्तया गंभीरता सहित नहीं वरन कुछ विनोद के भाव से कही गई थी, किंतु यह सत्य है कि अमेरिका से दास प्रथा के अन्त कराने में स्टोव के उपन्यास ’अंकल टोम्स कैबिन’ (Uncle Tom's Cabin) का बहुत बड़ा योगदान रहा था। इस उपन्यास में दिये रंगभेद और दास प्रथा के सुचित्रित वर्णन द्वारा ही लोग इन बातों की दुखदायी वास्तविकता को पहिचान सके और इनके अन्त के लिये लड़ने को प्रोत्साहित हो सके। इसी युद्ध के अन्त में एब्राहम लिंकन द्वारा की गई स्वतंत्रता की घोषणा से सभी दास स्वतंत्र घोषित हुए। इस प्रकार स्टोव के उपन्यास ने एक राष्ट्र की नैतिक दिशा बदलने में सहायता की।

इससे सदियों पहिले, राजा सुलेमान को परमेश्वर ने बताया कि वह क्या होगा जो परमेश्वर की प्रजा इस्त्राएल की नैतिक दिशा बदलेगा - इसका आरंभ नम्रता और पापों के अंगीकार से होगा। परमेश्वर ने सुलेमान से कहा: "यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूंगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूंगा" (२ इतिहास ७:१४)।

एक मसीही समुदाय होने के नाते हमें सबसे पहिले अपने जीवन का लेखा-जोखा लेना चाहिये। जब हम पापों के लिये पश्चाताप और प्रार्थना में नम्रता सहित परमेश्वर के निकट आते हैं, तो हमारे जीवनों में परिवर्तन आने आरंभ हो जाते हैं। तब परमेश्वर राष्ट्र की नैतिक दिशा बदलने में हमारा उपयोग कर सकता है। - डेनिस फिशर


नैतिक रीति से गलत बात कभी राजनैतिक रीति से सही नहीं हो सकती। - लिंकन

यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूंगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूंगा।" - २ इतिहास ७:१४


बाइबल पाठ: २ इतिहास ७:१-१४

जब सुलैमान यह प्रार्थना कर चुका, तब स्वर्ग से आग ने गिरकर होमबलियों तथा और बलियों को भस्म किया, और यहोवा का तेज भवन में भर गया।
और याजक यहोवा के भवन में प्रवेश न कर सके, क्योंकि यहोवा का तेज यहोवा के भवन में भर गया था।
और जब आग गिरी और यहोवा का तेज भवन पर छा गया, तब सब इस्राएली देखते रहे, और फर्श पर झुककर अपना अपना मुंह भूमि की ओर किए हुए दणडवत किया, और यों कहकर यहोवा का धन्यवाद किया कि, वह भला है, उसकी करुणा सदा की है।
तब सब प्रजा समेत राजा ने यहोवा को बलि चढ़ाई।
और राजा सुलैमान ने बाईस हजार बैल और एक लाख बीस हजार भेड़ -बकरियां चढ़ाई। यों पूरी प्रजा समेत राजा ने यहोवा के भवन की प्रतिष्ठा की।
और याजक अपना अपना कार्य करने को खड़े रहे, और लेवीय भी यहोवा के गीत के गाने के लिये बाजे लिये हूए खड़े थे, जिन्हें दाऊद राजा ने यहोवा की सदा की करुणा के कारण उसका धन्यवाद करने को बनाकर उनके द्वारा स्तुति कराई थी और इनके साम्हने याजक लोग तुरहियां बजाते रहे और सब इस्राएली खड़े रहे।
फिर सुलैमान ने यहोवा के भवन के साम्हने आंगन के बीच एक स्थान पवित्र करके होमबलि और मेलबलियों की चर्बी वहीं चढ़ाई, क्योंकि सुलैमान की बनाई हुई पीतल की वेदी होमबलि और अन्नबलि और चर्बी के लिये छोटी थी।
उसी समय सुलैमान ने और उसके संग हमात की घाटी से लेकर मिस्र के नाले तक के सारे इस्राएल की एक बहुत बड़ी सभा ने सात दिन तक पर्व को माना।
और आठवें दिन को उन्होंने महासभा की, उन्होंने वेदी की प्रतिष्ठा सात दिन की और पर्वों को भी सात दिन माना।
निदान सातवें महीने के तेइसवें दिन को उस ने प्रजा के लोगों को विदा किया, कि वे अपने अपने डेरे को जाएं, और वे उस भलाई के कारण जो यहोवा ने दाऊद और सुलैमान और अपनी प्रजा इस्राएल पर की थी आनन्दित थे।
यों सुलैमान यहोवा के भवन और राजभवन को बना चुका, और यहोवा के भवन में और अपने भवन में जो कुछ उस ने बनाना चाहा, उस में उसका मनोरथ पूरा हुआ।
तब यहोवा ने रात में उसको दर्शन देकर उस से कहा, मैं ने तेरी प्रार्थना सुनी और इस स्थान को यज्ञ के भवन के लिये अपनाया है।
यदि मैं आकाश को ऐसा बन्द करूं, कि वर्षा न हो, वा टिडियों को देश उजाड़ने की आज्ञा दूं, वा अपनी प्रजा में मरी फैलाऊं,
तब यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन होकर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी होकर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुनकर उनका पाप क्षमा करूंगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ६६, ६७
  • रोमियों ७

मंगलवार, 3 अगस्त 2010

प्रसन्न रहना

बच्पन में मेरी एक प्रीय पुस्तक थी ’पोलियन्ना’ (Pollyanna)। यह एक आशावादी लड़की की कहानी थी जो हर परिस्थिति में, चाहे वह बुरी ही क्यों न हो, प्रसन्न रहने की कोई न कोई बात ढूंढ लेती थी।

हाल ही में मुझे उस लड़की पोलियन्ना की कहानी याद आई जब मेरी एक सहेली, मेरिएन, साइकल चलते हुए दुर्घटनाग्रस्त हुई और उसकी बांह टूट गई। जब उससे मेरी बात हुई तो मेरीएन ने मुझे बताया कि वह कितनी धन्यावादी थी कि टूटी बांह के बावजूद वह घर तक साइकल चला के आ सकी। वह बहुत आभारी थी कि उसे अपनी टूटी बांह को ठीक कराने के लिये किसी ऑपरेशन के आवश्यक्ता नहीं पड़ेगी। उसे प्रसन्न्ता थी कि क्योंकि उसकी बांयी बाज़ू टूटी थी और वह दाहिने हाथ से काम करती थी, इसलिये वह अभी भी अपने काम को कर सकेगी। उसे हर्ष और अचंभा था कि उसकी हड्डियां इतनी मज़बूत थीं जिससे उसकी बांह जब जुड़ेगी तो उसमें पूरी ताकत होगी, और यह कितना अद्भुत था कि दुर्घटना के कारण कोई और गंभीर चोट नहीं आई।

वाह मेरिएन! मेरिएन उदाहरण है ऐसे व्यक्तित्व का जिसने परेशानियों में भी आनन्दित रहना सीख लिया है। उसे पूरा विश्वास है कि चाहे जो हो जाए, परमेश्वर उसकी सदा देखभाल करता है और करता रहेगा।

दुख कभी न कभी सब पर आते हैं, और अधिकतर लोगों के लिये दुखों में आभारी होना उनकी प्रथम प्रतिक्रीया नहीं होती। परन्तु परमेश्वर हमसे प्रसन्न होता है जब हम हर परिस्थिति में उसके प्रति धन्यवादी होने के कारण ढूंढते हैं (१ थिसलूनिकियों ५:१६-१८)। यदि हम सच्चे मन से खराब परिस्थितियों में भी भलाई ढूंढते हैं, तो हम आभारी रह सकते हैं कि परमेश्वर हमें संभाले हुए है। जब हम उसकी भलाई में विश्वास रखते हैं तब ही हम हर परिस्थिति में प्रसन्न रह सकते हैं। - सिंडी हैस कैस्पर


धन्यावादी मन हर परिस्थिति में कुछ भलाई ढूंढ लेता है।

आज का दिन जो यहोवा ने बनाया है, हम इस में मगन और आनन्दित हों। - भजन ११८:२४


बाइबल पाठ: भजन ३०

हे यहोवा मैं तुझे सराहूंगा, क्योंकि तू ने मुझे खींचकर निकाला है, और मेरे शत्रुओं को मुझ पर आनन्द करने नहीं दिया।
हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं ने तेरी दोहाई दी और तू ने मुझे चंगा किया है।
हे यहोवा, तू ने मेरा प्राण अधोलोक में से निकाला है, तू ने मुझ को जीवित रखा और कब्र में पड़ने से बचाया है।।
हे यहोवा के भक्तों, उसका भजन गाओ, और जिस पवित्र नाम से उसका स्मरण होता है, उसका धन्यवाद करो।
क्योंकि उसका क्रोध, तो क्षण भर का होता है, परन्तु उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होती है। कदाचित् रात को रोना पड़े, परन्तु सवेरे आनन्द पहुंचेगा।।
मैं ने तो चैन के समय कहा था, कि मैं कभी नहीं टलने का।
हे यहोवा अपनी प्रसन्नता से तू ने मेरे पहाड़ को दृढ़ और स्थिर किया था, जब तू ने अपना मुख फेर लिया तब मैं घबरा गया।।
हे यहोवा मैं ने तुझी को पुकारा और यहोवा से गिड़गिड़ाकर यह बिनती की, कि
जब मैं कब्र में चला जाऊंगा तब मेरे लोहू से क्या लाभ होगा? क्या मिट्टी तेरा धन्यवाद कर सकती है? क्या वह तेरी सच्चाई का प्रचार कर सकती है?
हे यहोवा, सुन, मुझ पर अनुग्रह कर, हे यहोवा, तू मेरा सहायक हो।।
तू ने मेरे लिये विलाप को नृत्य में बदल डाला, तू ने मेरा टाट उतरवाकर मेरी कमर में आनन्द का पटुका बान्धा है;
ताकि मेरी आत्मा तेरा भजन गाती रहे और कभी चुप न हो। हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूंगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ६३-६५
  • रोमियों ६

सोमवार, 2 अगस्त 2010

सच्चे मित्र

जब मैंने इन्टरनैट की एक लोकप्रीय सामजिक नेटवर्क साईट पर अपना पंजीकरण किया तो मुझे जो पहला सन्देश मिला वह था कि "आपके कोई मित्र नहीं हैं।" यद्यपि मैं जानती थी कि यह सत्य नहीं है, फिर भी कुछ पल के लिये मैं उदास हुई। यह विचार भी कि कोई मुझे मित्र रहित कह के संबोधित करे, फिर चाहे वह एक अवैक्तिक इन्टरनैट वैबसाईट ही क्यों न हो, मेरे लिये परेशान करने वाला था। हमारे भावनात्मक, शारीरिक और आत्मिक भलाई के लिये मित्रों का होना आवश्यक है।

मित्र हमारे दिल के दुखड़ों को, बिना हमें दोषी ठहराये, सुनते हैं। जब हम पर हमला होता है तो वह हमें बचाते हैं। हमारी उपलब्धियों में वे हमारे साथ खुश होते हैं और हमारे दुखों मे हमारे साथ दुखी। मित्र हमें गलत कदम उठाने से बचाते हैं, सही सलाह देते हैं और हमें सही मार्ग पर रखने के लिये हमारा उनसे क्रोधित होने का जोखिम भी उठाते हैं। मेरे मित्रों ने मेरे लिये यह सब कुछ और इससे अधिक भी किया है।

बाइबल में शायद सबसे प्रसिद्ध मित्रता दाऊद और योनातान की है। योनातान अपने पिता राजा शाऊल के राज्य का उत्तराधिकारी था। किंतु उसने जाना कि परमेश्वर ने उसे नहीं वरन दाऊद को उत्तराधिकारी होने के लिये चुना है, इसलिये दाऊद की जान बचाने के लिये उसने अपनी जान जोखिम में डाल दी (१ शैमुएल २०)।

बाइबल सिखाती है कि हमें अपने मित्र सावधानी पूर्वक चुनने चाहियें। सच्चे मित्र वे ही होते हैं जो परमेश्वर के भी मित्र होते हैं और जो परमेश्वर के साथ हमारे संबंधों को भी मज़बूत बनाते हैं (१ शैमुएल २३:१६)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


सच्चे मित्र हीरों कि तरह होते हैं - बहुमूल्य और दुर्लभ।

बाइबल पाठ: १ शैमुएल २०:३०-४२

तब शाऊल का कोप योनातन पर भड़क उठा, और उस ने उस से कहा, हे कुटिला राजद्रोही के पुत्र, क्या मैं नहीं जानता कि तेरा मन तो यिशै के पुत्र पर लगा है? इसी से तेरी आशा का टूटना और तेरी माता का अनादर ही होगा।
क्योंकि जब तक यिशै का पुत्र भूमि पर जीवित रहेगा, तब तक न तो तू और न तेरा राज्य स्थिर रहेगा। इसलिये अभी भेज कर उसे मेरे पास ला, क्योंकि निश्चय वह मार डाला जाएगा।
योनातन ने अपने पिता शाऊल को उत्तर देकर उस से कहा, वह क्यों मारा जाए? उस ने क्या किया है?
तब शाऊल ने उस को मारने के लिये उस पर भाला चलाया; इससे योनातन ने जान लिया, कि मेरे पिता ने दाऊद को मार डालना ठान लिया है।
तब योनातन क्रोध से जलता हुआ मेज पर से उठ गया, और महीने के दूसरे दिन को भोजन न किया, क्योंकि वह बहुत खेदित था, इसलिये कि उसके पिता ने दाऊद का अनादर किया था।
बिहान को योनातन एक छोटा लड़का संग लिए हुए मैदान में दाऊद के साथ ठहराए हुए स्थान को गया।
तब उस ने अपने छोकरे से कहा, दौड़कर जो जो तीर मैं चलाऊं उन्हें ढूंढ़ कर ले आ। छोकरा दौड़ा ही था, कि उस ने एक और तीर उसके परे चलाया।
जब छोकरा योनातन के चलाए तीर के स्थान पर पहुंचा, तब योनातन ने उसके पीछे से पुकार के कहा, तीर तो तेरी परली ओर है।
फिर योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकार के कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत! और योनातन का छोकरा तीरों को बटोर के अपने स्वामी के पास ले आया।
इसका भेद छोकरा तो कुछ न जानता था, केवल योनातन और दाऊद इस बात को जानते थे।
और योनातन ने अपने हथियार अपने छोकरे को देकर कहा, जा, इन्हें नगर को पहुंचा।
ज्योंही छोकरा चला गया, त्यों ही दाऊद दक्खिन दिशा की अलंग से निकला, और भूमि पर औंधे मुंह गिर के तीन बार दण्डवत की, तब उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ रोए, परन्तु दाऊद का रोना अधिक था।
तब योनातन ने दाऊद से कहा, कुशल से चला जा, क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कह के यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे। तब वह उठकर चला गया और योनातन नगर में गया।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ६०-६२
  • रोमियों ५