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शनिवार, 9 जनवरी 2010

दोष लगाएं या ना लगाएं

बाइबल पाठ: मत्ती ७:१ -२१
दोष मत लगाओ कि तुम पर भी दोष न लागाया जाए। - मत्ती ७:१

लोगों से "अपने काम से मतलब रखो" कहने के लिये यीशु की बातों का हवाला देने से अच्छा और क्या उपाय हो सकता है? जो लोग बाइबल बहुत कम पढ़ते हैं वे मत्ती ७:१ जल्दी प्रयोग करते हैं, खासकर जब वे किसी विरोधी का मुंह बन्द करना चाहते हैं - "दोष मत लगाओ कि तुम पर भी दोष न लागाया जाए"।

यदि उसके संदर्भ में देखें तो यह वाक्य हमें दोष लगाने से मना नहीं करता, परन्तु गलत दोष नहीं लगाना है। सर्वप्रथम, हमें पहले सव्यं को जांचना है। यीशु ने कहा "पहली अपनी आंख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आंख के तिनके को भली भांति देखकर निकाल सकेगा" (पद ५)। उसने फिर कहा, "झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो" (पद १५); दोनो ही बातें ’जांचने’ से संबंध रखती हैं। इसके लिये सही निर्णय करना है - हमें झूठ और सच की पहचान होनी ज़रूरी है।

यीशु ने निर्णय करने के उचित उपाय के लिये फल के रूपक का प्रयोग किया: "उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे"(पद २०)। हम स्वयं को और लोगों को भी उनसे उत्पन्न फलों की गुणवत्ता से पहचान सकते हैं। यह फल बाह्‍य स्वरूप और सौन्दर्य जैसे सांसारिक मूल्यों के आधार पर नहीं पहचाना जाता (पद १५)। उसकी जांच स्वर्गिय मूल्यों पर की जानी चाहिये - हम में उत्पन्न आत्मा के फल से, जैसे प्रेम, आनन्द, मेल आदि (गलतियों ५:२२)।

हम तो चेहरा देखकर निर्णय करते हैं पर्न्तु परमेश्वर हमारे फलों से हमारा निर्णय करते हैं और हमें भी ऐसा ही करना चाहिये। - Julie Ackerman Link

They truly lead who lead by love
And humbly serve the Lord;
Their lives will bear the Spirit's fruit
And magnify His Word. - D. De Haan

दुसरों पर दोष लगाने में धीरे और सवयं पर दोष लगाने में फुरतीले बनो।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २३, २४;
  • मत्ती ७

शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

बाद्शाह

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य १७:९ -१४

वे मेम्ने से लड़ेंगे और मेम्ना उनपर जय पाएगा क्योंकि वह प्रभुओं का प्रभु और राजाओं का राजा है। - प्रकाशितवाक्य १७:१४

यह बात आश्चर्यजन्क है कि संसार में कितनों को याद होगा कि आज एल्विस प्रेस्ली का जन्मदिन है। अमेरिका के मिसिसिपी प्राँत के इस गायक की लोकप्रीयता कई पीढ़ीयों से और संसकृतियों में बनी हुई है।

उसकी मृत्यु के ३० वर्ष बाद भी प्रेस्ली के संगीत, स्मर्ण चिन्हों और लाइसेन्स अनुबंधों की बिकरी से हर साल करोड़ों डॉलर कमाए जाते हैं। एल्विस को एक समय "रॉक अण्ड रोल संगीत का बाद्शाह" कहा जाता था, अब संक्षिपत में उसे केवल ’बाद्शाह’ कहते हैं।

चाहे इस संसार के बाद्शाह कहलने वाले लोग बहुत लोक्प्रीय हों, मेधावी खिलाड़ी हों, निर्वाचित अधिकारी हों या बड़े उद्योगपति हों, वे आते हैं और चले जाते हैं। उनका प्रभाव बहुत प्रबल हो सकता है, उनके चाहने वाले उनके बड़े भक्त हो सकते हैं, लेकिन उनकी कीर्ति सदा कल के लिये नहीं रहती।

बाइबल यीशु मसीह को अनन्त काल का राजा कहती है। प्रकाशितवाक्य १७ अध्याय भविश्य्द्वाणी में पृथ्वी के राजाओं के बारे में बताता है, जो इस युग के अन्त में अपना शासन स्थापित करने के लिये लड़ेंगे। बाइबल के ज्ञाताओं ने इन राजाओं की पहिचान करने के प्रयास के लिये वाद-विवाद किये हैं, लेकिन उस राजा की पहचान में कोई शक नहीं है जिसे वे कभी नहीं हरा पाएंगे: "वे मेम्ने से लड़ेंगे और मेम्ना उनपर जय पायेगा क्योंकि वह राजाओं का राजा और प्रभों का प्रभु है; और जो उसके साथ हैं वे चुने गए और वफादार हैं।" (प्रकाशितवाक्य १७:१४)।

यीशु मसीह ऐसा प्रभु और राजा है जिसका राज्य अनन्त है। - David McCasland

The King of kings and Lord of lords,
Who reigns today within our heart,
Will one day bring His peace on earth -
A kingdom that will not depart. - Sper
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राजाओं के राजा की प्रजा होने से बढ़कर और कोई सौभाग्य नहीं हो सकता।
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २० - २२
  • मत्ती ६:१९ - ३४

गुरुवार, 7 जनवरी 2010

बेगुनाह इन्सान

बाइबल पाठ: उत्पत्ति १८: २२- २३ क्या सारी पृथ्वी का न्यायी न्याय न करे? - उत्पत्ति १८:२५

जॉन ग्रिशम अपने न्यायालयों से संभंधित उपन्यासों के लिये प्रसिद्ध हैं - वकीलों और अपराधियों पर आधारित तेज़ी से आगे बढ़ती कहानियाँ। लेकिन उनका एक उपन्यास "बेकसूर इन्सान" (The Innocent Man), कालपनिक नहीं है। यह उपन्यास अन्याय की एक सच्ची घटना पर आधारित है। कथानक में एक युवती की नृशंस हत्या होती है और दो आदमी, जो बेकसुर थे, पकड़े जाते हैं और उन्हें दोषी करार देकर मृत्यु दण्ड सुनाया जाता है। डी.एन.ए. जाँच पद्वति विकिसित होने के बाद, १७ साल तक अन्याय सहने के उप्रान्त, इस पद्वति द्वारा उन्हें बेकसुर प्रमाणित किया जाता है और मृत्यु दण्ड से छुड़ाया जाता है; अन्तः न्याय की जीत होती है।

हर आदमी न्याय कि चाह रखता है किंतु हमें स्मरण रखना चाहिये कि हमारी मान्वीय कमज़ोरियाँ खरा न्याय दिलवाने में चुनौती साबित होतीं हैं। हमारे मन में उत्पन्न बदला लेने के विचार, सच्चा न्याय दिलवाने के प्रयास के लिये घातक हो सकते हैं।

यह याद रखना अच्छा होगा कि सच्चा और खरा न्याय केवल परमेश्वर से ही मिल सकता है। अब्रहाम ने इस बात को प्रश्नात्मक रुप में कहा "क्या सारी पृथ्वी का न्ययी न्याय न करेगा?" (उत्पत्ति १८:२५)। इसका एक ही संभव उत्तर है - हाँ। लेकिन इस से भी बढ़कर, उसका न्यायालय ही एकमात्र स्थान है जहाँ, हम निश्चित रूप से कह सकते हैं कि, केवल न्याय ही की जीत होगी।

इस अन्याय से भरे संसार में, अपने साथ होने वाले अन्यायों को हम संसार के उस न्यायी को सौंप दें, और उसपर उसके अंतिम खरे न्याय के लिये भरोसा रखें। - Bill Crowder

The best of Judges on this earth
Aren't always right or fair;
But God, the righteous Judge of all,
Wrongs no one in His care. - Egner
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जीवन सदा सच्चा नहीं होता, लेकिन परमेश्वर सदा विश्वासयोग्य रहता है।
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति १८ - १९
  • मत्ती ६:१ -१८

बुधवार, 6 जनवरी 2010

एक बालक का विश्वास

बाइबल पाठ: मत्ती १८:१ - ५

यदि तुम ना फिरो और बालकों के समान न बनो तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने न पाओगे। - मत्ती १८:३

एक रविवार मैं ने माईक को अपने दोनो पिताओं के बारे में बोलते सुना - एक वह जिसने उसे पाला-पोसा और दूसरा स्वर्ग में परमेश्वर पिता।

पहले उसने पृथ्वी पर के अपने पिता के प्रति बचपन से अपने भरोसे के बारे में वर्णन किया, कि वह कैसा सरल और सीधा भरोसा है। वह उम्मीद रखता था कि उसके पिता बिगड़ी हुई वस्तुओं को सुधार देंगे और उसे सलाह भी देंगे। लेकिन फिर भी वह अक्सर उन्हें नराज़ करने से डरता था क्योंकि वह भूल जाता था कि उसके पिता का प्रेम और क्षमा हमेशा उप्लब्ध हैं।

माईक ने आगे कहा,"कुछ साल पहले मैं ने कई गलतियाँ कीं और बहुत से लोगों का दिल दुखाया। अपने गलती के बोझ के कारण मेरा अपने स्वर्गीय पिता के साथ सुखद और सरल संबंध टूट गया। मैं भूल गया कि मैं उससे निवेदन कर सकता था कि वह बिगड़े हुए को सुधार दे और मुझे सही सलाह दे"।

कई वर्ष बीत गये, आखिरकर माईक परमेश्वर से टूटे संबंध के कारण बहुत बेचैन हो गया लेकिन वह समझ नहीं पा रहा था कि संबंध ठीक करने के लिये वह क्या करे। उसके पादरी ने उससे कहा कि जैसा सामान्य व्यव्हार है, सच्चे दिल से परमेश्वर के सामने अपनी गलती मान लो और उससे माफी माँग लो।

लेकिन माईक उल्झे हुए सवाल करने लगा, जैसे: "यह कैसे संभव होगा?", "अगर परमेश्वर.... ?" इत्यादि। आखिर उसके पादरी ने परमेश्वर से प्रार्थना करी, "हे परमेश्वर कृप्या माईक को एक बच्चे का सा साधारण विश्वास दीजिये!" बाद में माईक ने आनन्द के साथ इस बात की गवाही दी कि परमेश्वर ने ऐसा ही किया।

माईक को परमेश्वर पिता के साथ निकटता फिर प्राप्त हो गई। इस निकटता कि पुनः प्राप्ती का राज़, माइक के लिये भी और हमारे लिये भी, बच्चे का सा सरल और साधारण विश्वास रखना है। - Joanie Yoder

Have you noticed that the child like faith
Of a little girl or boy
Has so often shown to older folks
About knowing Salvation's joy - Branon
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विश्वास एक बच्चे जैसे हृदय में सबसे अधिक चमकता है।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति १६ - १७
  • मत्ती ५:२७ - २८

मंगलवार, 5 जनवरी 2010

स्मरण करने को बहुत

बाइबल पाठ : नीतिवचन १०:११ -२१

जो अपने मुंह पर नियंत्रण रखता है, वह बुद्धी से काम करता है। - नीतिवचन १०:१९

"बहुत धन्यवाद", कतार में मुझ से आगे खड़े व्यक्ति से डाकखाने के पटल के पीछे बैठे क्लर्क ने कहा। उस क्लर्क जौन ने मुझे कतार में खड़े देख लिया था और उसका प्रयास था के मैं उसकी बात सुन लूँ। जब पंक्ति में मेरी बारी आयी तब मैं ने जौन से 'हैल्लो' बोला, वह मेरा विद्यार्थी रह चुका था, जब मैं १९८० के दशक में हाई स्कूल में पढ़ाता था।

जौन ने मुझसे पूछा "क्या आपने ध्यान दिया की मैं ने उस महिला से क्या कहा? मैं ने उस से कहा 'बहुत धन्यवाद' (thanks a lot)" मेरे चहरे पर उसकी बात को समझ पाने के भाव को देखकर उसने स्पष्ट किया 'क्या आपको ध्यान है की आपने हमें सिखाया था की "lot" का मतलब ज़मीन का टुकड़ा होता है की "much"(बहुत) के स्थान पर उपयोग होने वाला वाक्यांश।'

मुझे आश्चर्य हुआ की २५ साल से भी अधिक पुराना अंग्रेज़ी का पाठ जौन को अभी भी कैसा याद है। यह दिखाता है की दूसरों से बोले गए शब्दों का कितना महत्त्व है। यह कवी एमिली डिकिन्सन द्वारा कही और मेरी पसंद की इस बात को भी बल देता है: "कुछ लोग कहते हैं की एक शब्द जब कह दिया जाता है तो मर जाता है, मैं कहती हूँ कि वह उस दिन से जीना शुरू करता है।"

जो शब्द हम कहते हैं उनके परिणाम बहुत लम्बे समय तक हो सकते हैं। हमारे द्वारा व्यक्त करी गयी राय, दी गयी प्रशंसा, की गयी कटु आलोचना सुनाने वालों के साथ कई दशक तक बनी रह सकती है।

यही कारण है कि पवित्र शास्त्र सिखाता है "जो अपने मुंह पर नियंत्रण रखता है, वह बुद्धी से काम करता है। - नीतिवचन १०:१९" जो शब्द हम आज कहते है वे बने रहते हैं हम सुनिश्चित करें की वे "धर्मी के मुंह से निकले" (नीतिवचन १०:२०) शब्द हों - Dave Branon
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जीभ एक छोटा अंग है जो बड़े झगड़े या मेल उत्पन्न कर सकता है
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति १३ - १५
  • मत्ती : - २६

सोमवार, 4 जनवरी 2010

धोखेबाज़ जीवन

बाइबल पाठ: २ तीमुथियुस ३: १० - १७

बालकपन से पवित्रशास्त्र तेरा जाना हुआ है, जो तुझे मसीह पर विश्वास करने से उद्धार प्राप्त करने के लिए बुद्धिमान बना सकता है। - २ तीमुथियुस ३:१५

वर्ष २००७ दक्षिण कोरिया में "धोखे के जीवन का साल" बुलाया गया, क्योंकि देश में शिक्षा और राजनीति के क्षेत्रों में धोखे और भ्रष्टाचार का बोलबाला था. एक ३४० प्रोफेसरों पर किये गए सर्वेक्षण के अनुसार, उनहोंने इसे चीनी भाषा के एक वाक्य "जा-गी-गी-इन" अर्थात "अपने आप और दूसरों को धोखा देना" की संज्ञा में संक्षिप्त किया।

ऐसी ठगी की कहानी से हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि अंत के दिनों का वर्णन बताते समय पौलूस प्रेरित ने कहा था की "दुष्ट और बहकाने वाले धोखा देते हुए और धोखा खाते हुए बिगड़ते चले जायेंगे" - २ तीमुथियुस ३:१३। धोखा देना, यानी दूसरों को असत्य को सत्य के रूप में स्वीकार करवाना या गलत को सही के रूप में स्वीकार कराना है।

धोखे का शिकार होने से बचने का एक उपाय है परमेश्वर का वचन जानना, क्योंकि "हर एक पवित्र शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से लिखा गया है और धर्म की शिक्षा, सुधारने, समझाने, और नैतिक मार्ग सीखने के लिए लाभदायक है।" 'सुधारना' का अर्थ है गलत मार्ग को सही करना और 'धर्म की शिक्षा' का अर्थ है सही बात सिखाना। परमेश्वर का वचन न सिर्फ हमें गलतियों से अवगत कराता है, वह हमें उन्हें ठीक करने की प्रेरणा और शिक्षा भी देता है।

क्या आपका नए साल का निर्णय परमेश्वर और मनुष्यों के सन्मुख सही मार्ग पर चलना और 'हरेक भले काम के लिए तत्पर होना' है? यदि है तो परमेश्वर के वचन को पढ़ें और उसपर अमल भी करें, तथा परमेश्वर से प्रार्थना करें की वो आपको एक इमानदार व्यक्ति बनाए। - AL

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हम जितना परमेश्वर के वचन पर मनन करेंगे, उतनी तत्परता से हम अपनी गलतियों को पहिचानेंगे
एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ती १० -१२
  • मत्ती

रविवार, 3 जनवरी 2010

उपासना के रूप में खाना

बाइबल पाठ : उत्पत्ती २:८-१७

क्या तूने मधु पाया? तो जितना तेरे लिये ठीक हो उतना ही खाना। - नीतिवचन २५:१६


जनवरी में पुस्तकों की दूकान की मेज़ पर, तबियत के लिये अच्छे भोजन के विषय में कई पुस्तकें रखी मिलती हैं कई हफ्तों के लिये छुट्टीयों में बहुत अच्छा खाना खाने के बाद लोग कम खाने की ओर ध्यान देते हैं

पवित्र शास्त्र में भोजन का एक मुख्य स्थान है। परमेश्वर उसका उपयोग हमें अनुग्रह देने को ही नहीं सिखाने को भी करता है। भोजन का दुरूपयोग हमें परमेश्वर को योग्य रीति से जानने नहीं देता।

पुराने नियम में परमेश्वर ने आदम को निर्देश दिया की क्या खाना है और क्या नहीं खाना है (उत्पत्ती :१६-१७) बाद में उसने इस्त्रालियों को 'मन्ना' दिया ताकि वह विश्वास करें की वह परमेश्वर है और वह उनका विश्वास परख सके (निर्गमन १६:१२, व्यवस्थाविवरण :१६) नए नियम में पौलुस प्रेरित ने सब काम करने की उचित प्रवत्ती सिखाई, खाने की भी, "तुम चाहे खाओ, चाहे पीयो.........सब कुछ परमेश्वर की महिमा के लिये करो"( कुरिन्थियों १०:३१)

चाहे भोजन को हम एक सान्तावना देनेवाले मित्र के रूप में देखें या हमें मोटा करने वाले दुश्मन के रूप में, दोनों ही स्वरूपों में हम भोजन को परमेश्वर से मिलने वाले अद्भुत उपहार के रूप में नहीं देख पाते। ज़्यादा खाना और नहीं खाना, दोनों ही बातें दिखाती हैं की हमारा मन भोजन देने वाले पर नहीं, परन्तु केवल भोजन पर ही है, जो एक तरह की मूर्ती पूजा है।

जब भोजन करना उपासना के स्वरूप में होगा, तो उपासना भोजन की नहीं भोजन देने वाले की होगी। - जल

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खाना जब देवता बन जाता है, तो "जीवन की रोटी" के लिये हमारी भूख कम हो जाती है।

बाइबल एक साल में, पढ़िये :
  • उत्पत्ती ७-९
  • मत्ती ३