ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

रविवार, 20 सितंबर 2015

समय और अवसर


   जब तकनीकी में अचानक आए परिवर्तनों के कारण एक उच्च-प्रशिक्षण पाए वैज्ञानिक को नौकरी से हाथ धोना पड़ा तो उसे एक फास्ट-फूड रेस्टोरॉन्ट में काम करना पड़ गया। एक संध्या को परमेश्वर के वचन बाइबल के हमारे अध्ययन के पश्चात उसने अपनी परिस्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि उसका यह अनुभव बहुत कठिन और दीन करने वाला है; साथ ही उसने यह भी कहा, "एक अच्छी बात जो मैं इसके विषय में कह सकता हूँ वह है कि वहाँ आने वाले जवान लोग मेरे मसीही विश्वास में बड़ी रुचि लेते हैं"। हमारे बाइबल अध्ययन समूह में उपस्थित एक जवान ने तुरंत उससे कहा, "मैं आपकी दीनता और नम्रता की प्रशंसा करता हूँ। मुझे निश्चय है कि इसके पीछे आपका मसीही विश्वास ही है।"

   उस वैज्ञानिक के समान ही जब फिलेप्पुस को अचानक ही सामरिया में चल रही सेवकाई (प्रेरितों 8:4-8) से निकालकर जंगल के एक मार्ग पर लाकर खड़ा कर दिया गया (प्रेरितों 8:26), तो उसे भी बहुत आश्चर्य हुआ होगा। लेकिन उसे वहाँ उसकी भेंट कूश (इथोपिया) देश के एक उच्च राज्य-अधिकारी से हुई जिसे परमेश्वर का वचन समझने की आवश्यकता थी (प्रेरितों 8:27-35), और तब फिलेप्पुस को बात तर्कसंगत लगी होगी।

   जब प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वायदा किया कि वह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा (मत्ती 28:20; इब्रानियों 13:5), तो उसका यह कहना हमारे कठिन एवं अच्छे दोनों समयों के लिए था। अपने जीवन के हर प्रकार के समय में, भले या बुरे, हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि हम अपना हर कार्य, हर ज़िम्म्दारी यह स्मरण रखते हुए पूरी करें कि हम यह परमेश्वर के लिए कर रहे हैं, और परमेश्वर को अपने समय और उद्देश्य के अनुसार हमें प्रतिफल देने के लिए अपना धैर्य बनाए रखें।

   क्या आपका समय या कार्यस्थल कठिन है? ऐसे में भी परमेश्वर को अवसर दें, और देखें कि वह आपके द्वारा वहाँ क्या कुछ करता है। - रैंडी किल्गोर


परिस्थित्यों के लिए प्रश्नों को उठाने से उत्तम है परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखना जिसके पास परिस्थितियों के लिए कारण हैं।

यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:18-20 

बाइबल पाठ: प्रेरितों 8:4-8, 26-35 
Acts 8:4 जो तित्तर बित्तर हुए थे, वे सुसमाचार सुनाते हुए फिरे। 
Acts 8:5 और फिलेप्पुस सामरिया नगर में जा कर लोगों में मसीह का प्रचार करने लगा। 
Acts 8:6 और जो बातें फिलेप्पुस ने कहीं उन्हें लोगों ने सुनकर और जो चिन्ह वह दिखाता था उन्हें देख देखकर, एक चित्त हो कर मन लगाया। 
Acts 8:7 क्योंकि बहुतों में से अशुद्ध आत्माएं बड़े शब्द से चिल्लाती हुई निकल गई, और बहुत से झोले के मारे हुए और लंगडे भी अच्‍छे किए गए। 
Acts 8:8 और उस नगर में बड़ा आनन्द हुआ।
Acts 8:26 फिर प्रभु के एक स्वर्गदूत ने फिलेप्पुस से कहा; उठ कर दक्‍खिन की ओर उस मार्ग पर जा, जो यरूशलेम से अज्ज़ाह को जाता है, और जंगल में है। 
Acts 8:27 वह उठ कर चल दिया, और देखो, कूश देश का एक मनुष्य आ रहा था जो खोजा और कूशियों की रानी कन्‍दाके का मन्‍त्री और खजांची था, और भजन करने को यरूशलेम आया था। 
Acts 8:28 और वह अपने रथ पर बैठा हुआ था, और यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्‍तक पढ़ता हुआ लौटा जा रहा था। 
Acts 8:29 तब आत्मा ने फिलेप्पुस से कहा, निकट जा कर इस रथ के साथ हो ले। 
Acts 8:30 फिलेप्पुस ने उस ओर दौड़ कर उसे यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्‍तक पढ़ते हुए सुना, और पूछा, कि तू जो पढ़ रहा है क्या उसे समझता भी है? 
Acts 8:31 उसने कहा, जब तक कोई मुझे न समझाए तो मैं क्योंकर समझूं और उसने फिलेप्पुस से बिनती की, कि चढ़कर मेरे पास बैठ। 
Acts 8:32 पवित्र शास्त्र का जो अध्याय वह पढ़ रहा था, वह यह था; कि वह भेड़ की नाईं वध होने को पहुंचाया गया, और जैसा मेम्ना अपने ऊन कतरने वालों के साम्हने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला। 
Acts 8:33 उस की दीनता में उसका न्याय होने नहीं पाया, और उसके समय के लोगों का वर्णन कौन करेगा, क्योंकि पृथ्वी से उसका प्राण उठाया जाता है। 
Acts 8:34 इस पर खोजे ने फिलेप्पुस से पूछा; मैं तुझ से बिनती करता हूं, यह बता कि भविष्यद्वक्ता यह किस विषय में कहता है, अपने या किसी दूसरे के विषय में। 
Acts 8:35 तब फिलेप्पुस ने अपना मुंह खोला, और इसी शास्त्र से आरम्भ कर के उसे यीशु का सुसमाचार सुनाया।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6
  • 2 कुरिन्थियों 12


शनिवार, 19 सितंबर 2015

समय


   बहुत से मसीही विश्वासी परमेश्वर के साथ प्रतिदिन प्रार्थना और उसके वचन बाइबल को पढ़ने में बिताना तो चाहते हैं, परन्तु उनके दैनिक जीवन की समय-सारिणी उन्हें ऐसा करने नहीं देती। ऐसे में दिन में यदि कुछ समय मिले और वे उसे परमेश्वर के साथ बिताना चाहें तो बीच में आने वाली कोई अन्य व्यस्तता उनकी हताशा को और बढ़ा देती है।

   प्रसिद्ध मसीही लेखक और प्रचारक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने प्रभु परमेश्वर के साथ बिताए गए केवल पाँच मिनिटों की जीवन बदलने वाली सामर्थ पर टिप्पणी करी है। परमेश्वर के साथ प्रार्थना और वचन पढ़ने में बिताए गए थोड़े से समय की भी बहुत बड़ी कीमत है; चैम्बर्स ने कहा: "जो हमें संवारता और निखारता है वह बिताए गए समय की मात्रा नहीं वरन उस बदलने, निखारने वाले की सामर्थ है। परमेश्वर और उसके वचन के साथ बिताए गए पाँच मिनिट शेष सारे दिन से भी अधिक कीमती हैं।" हमें यह लग सकता है कि चैम्बर्स ने बात को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर कह दिया है, लेकिन यह वास्तविकता है कि प्रार्थना में बिताया गया थोड़ा सा समय भी बहुत प्रभावी प्रतिफल ला सकता है, क्योंकि प्रतिफल देने वाला परमेश्वर सर्वसामर्थी है।

   कई बार हमारे दिन व्यस्त मांगों से भरे होते हैं जो हमें परमेश्वर की आवाज़ को सुनने और उसका प्रत्युत्तर देने से रोकते हैं। लेकिन हम चाहे जैसी परिस्थिति में क्यों ना हों, चाहे कैसे भी स्थान पर क्यों ना हों, हमें अब्राहम के समान परमेश्वर के लिए एक आत्मिक वेदी, एक प्रार्थना का समय बनाए रखना चाहिए; और जैसे वह वेदी अब्राहम के लिए आशीषें लाई थी, परमेश्वर के साथ बिताया हुआ समय हमारे लिए भी आशीषें लेकर आएगा।

   यदि परमेश्वर के साथ बिताए जाने वाले समय को लेकर आपको दिक्कत हो रही है, तो केवल पाँच मिनिट प्रतिदिन के साथ आरंभ कीजिए और फिर जैसा अवसर होता है उसके अनुसार आगे बढ़िए, और देखिए कि यह आपके जीवन में क्या प्रभाव लाता है। हमारा परमेश्वर पिता हमसे मिलने की लालसा रखता है जिससे वह हमारे जीवनों के द्वारा अपनी सामर्थ संसार के सामने प्रगट कर सके; उसे इसका यथासंभव अवसर दीजिए। - डेनिस फिशर


परमेश्वर से वार्तालाप कीजिए - वाह आपके मन की बात सुनने को लालायित रहता है।

देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। - 2 इतिहास 16:9

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:1-8
Genesis 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। 
Genesis 12:2 और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा। 
Genesis 12:3 और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे। 
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था। 
Genesis 12:5 सो अब्राम अपनी पत्नी सारै, और अपने भतीजे लूत को, और जो धन उन्होंने इकट्ठा किया था, और जो प्राणी उन्होंने हारान में प्राप्त किए थे, सब को ले कर कनान देश में जाने को निकल चला; और वे कनान देश में आ भी गए। 
Genesis 12:6 उस देश के बीच से जाते हुए अब्राम शकेम में, जहां मोरे का बांज वृक्ष है, पंहुचा; उस समय उस देश में कनानी लोग रहते थे। 
Genesis 12:7 तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा: और उसने वहां यहोवा के लिये जिसने उसे दर्शन दिया था, एक वेदी बनाई। 
Genesis 12:8 फिर वहां से कूच कर के, वह उस पहाड़ पर आया, जो बेतेल के पूर्व की ओर है; और अपना तम्बू उस स्थान में खड़ा किया जिसकी पच्छिम की ओर तो बेतेल, और पूर्व की ओर ऐ है; और वहां भी उसने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई: और यहोवा से प्रार्थना की।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3
  • 2 कुरिन्थियों 11:16-33


शुक्रवार, 18 सितंबर 2015

योजना


   मेरी सहेली लिंडा बचपन से ही परमेश्वर से बहुत प्रेम करती आई है और उसकी सेवकाई करना चाहती रही है। वह बड़ी होकर डॉक्टर बनना चाहती थी जिससे संसार के उन स्थानों पर जा सके जहाँ चिकित्सीय सहायता कम है और वहाँ अपने चिकत्सीय कौशल के साथ सुसमाचार प्रचार द्वारा परमेश्वर की सेवा कर सके। लेकिन उसके जीवन के लिए परमेश्वर की योजना कुछ और थी। आज लिंडा चिकित्सीय क्षेत्र में ही परमेश्वर की सेवा तो कर रही है, परन्तु उस रीति से नहीं जैसा वह करने की योजना बना रही थी।

   14 वर्ष की आयु में लिंडा को एक ऐसी दीर्घकालीन स्वास्थ्य समस्या ने घेर लिया जिसके लिए उसे गंभीर ऑपरेशनों के लिए वर्ष में ही अनेक बार अस्पताल में भरती होना पड़ा। उसे दिमाग़ का संक्रमण हो गया जिससे वह 2 स्पताह तक बेहोश और 6 महीनों तक अंधी रही। एक बार उसने अपने दो लगातार जन्मदिन, बिना बीच में घर गए, अस्पताल ही में मनाए। उसे कई बार ऐसे अनुभवों से होकर निकलना पड़ा है जिनमें उसके जीवित बच निकलने की कोई आशा नहीं थी। लेकिन आज लिंडा जैसी जोश और उल्लास से भरी तथा परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ महिला आपको शायद ही कोई मिले। उसने एक बार मुझ से कहा, कि जैसा उसने चाहा था, उसकी सेवकाई का क्षेत्र अस्पताल ही है, लेकिन वहाँ डॉक्टर के रूप में कार्य करने की बजाए, वह अस्पताल के मरीज़ के रूप में सेवकाई करती है। उसके स्वास्थ्य की दशा चाहे जैसी भी हो, परमेश्वर की ज्योति लिंडा के व्यक्तित्व में होकर चमकती रहती है।

   लिंडा परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस द्वारा कही गई बात को सजीव दिखाती है; वह अपनी इन परीक्षाओं के बावजूद आनन्दित रहती है, उसने परमेश्वर की योजनाओं को अपने जीवन में सहर्ष स्वीकार किया है और उसके मसीही विश्वास की वास्तविकता उसके जीवन से प्रभु परमेश्वर के लिए "...प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण..." (1 पतरस 1:7) ठहरती है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपने जीवन के लिए योजनाएं अवश्य बनाए, परन्तु परमेश्वर को उन्हें कार्यन्वित करने दें।

यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। - भजन 37:4-5

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:1-9
1 Peter 1:1 पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्‍तुस, गलतिया, कप्‍पदुकिया, आसिया, और बिथुनिया में तित्तर बित्तर हो कर रहते हैं। 
1 Peter 1:2 और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्हें अत्यन्‍त अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।। 
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया। 
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये। 
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है। 
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। 
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। 
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। 
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 30-31
  • 2 कुरिन्थियों 11:1-15


गुरुवार, 17 सितंबर 2015

सुन्दर


   मेरे निवास-स्थान की जगह के कारण मुझे परमेश्वर की अद्भुत कारिगरी के अनेक नमूने देखने को मिलते रहते हैं। हाल ही में जंगल में होकर निकलने वाले मार्ग पर गाड़ी चलाते समय मैं पतझड़ के समय, नीले आसमान की पृष्ठभूमि पर, पेड़ों के पत्तों के गहरे लाल एवं विविध पीले रंग की छटाओं को देखकर मंत्रमुग्ध सा रह गया; सब कुछ इतने कलात्मक रूप से सजा हुआ था कि उसकी सुन्दरता स्तब्ध कर देने वाली थी।

   मैं जानता हूँ कि थोड़े ही समय बाद जब तापमान और गिरेगा और शरद ऋतु का आगमन होगा तो बर्फ भी पड़नी आरंभ हो जाएगी। कितनी विचित्र बात है कि उन अनगिनित हिमकणों में से जो एक दूसरे के ऊपर, एक दूसरे के साथ जमा होने लगेंगे, कोई भी दो हिमकण एक समान नहीं होंगे। वे सब एक साथ मिलकर लहरदार चमकीली सफेद चादर से सब कुछ को ढाँप देंगे; उस चमकीली सफेदी की सुन्दरता अलग ही होगी। फिर बसन्त ऋतु के साथ एक अन्य आश्चर्यकर्म को देखने का मौका होगा; निर्जीव ठूँठ के समान दिखने वाले पेड़ों से जीवन की कोंपलें फूट निकलेंगी और धरती तथा पेड़ हरियाली और अनेक प्रकार के अनुपम सुन्दर फूलों के अनेकों रंगों से भर जाएंगे।

   हम अपने चारों ओर जहाँ भी देखें, हमें परमेश्वर की सृजन शक्ति के नमूने देखने को मिलते हैं, जैसे कि परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह नबी परमेश्वर के विषय में कहता है "...सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है" (यशायाह 6:3)। लेकिन इससे भी अधिक विसमित कर देने वाली बात यह है कि यह अद्भुत तथा सुन्दर दिखने वाली सृष्टि, परमेश्वर की कारिगरी का पाप से बिगड़ा हुआ नमूना है (रोमियों 8:18-22); ज़रा सोचिए कि यह सृष्टि यदि अपने बिगड़े हुए स्वरूप में इतनी सुन्दर है तो अपने मूल स्वरूप में और कितनी सुन्दर रही होगी? यह परमेश्वर का अनुग्रह ही है कि पाप से भरे और बिगड़े इस संसार में भी वह अपनी सृष्टि को इतनी सुन्दरता भरता रहता है, हर ऋतु में उसी स्थल को एक अलग ही विलक्षण सुन्दरता प्रदान करता रहता है।

   परमेश्वर का पाप से बिगड़ी सृष्टि को भी सुन्दर करना और रखना हमारे लिए इस बात को समझाने का संकेत है कि परमेश्वर पाप से बिगड़े हुए किसी भी मनुष्य को प्रभु यीशु में उपलब्ध पाप क्षमा, अनुग्रह और दया से ढाँप कर ऐसे ही सुन्दर स्वरूप दे सकता है और हर समय तथा परिस्थिति में उसे सुन्दर बनाए रख सकता है। क्या आपने अपने संवारे जाने के लिए अपने आप को परमेश्वर के हाथों में सौंपा है? - जो स्टोवैल


प्रकृति मे दिखने वाली परमेश्वर की कारिगरी से अपने जीवन के लिए शिक्षा लेना कभी ना भूलें।

हे यहोवा, देवताओं में तेरे तुल्य कौन है? तू तो पवित्रता के कारण महाप्रतापी, और अपनी स्तुति करने वालों के भय के योग्य, और आश्चर्य कर्म का कर्त्ता है। - निर्गमन 15:11

बाइबल पाठ: यशायाह 6:1-5; रोमियों 8:18-22
Isaiah 6:1 जिस वर्ष उज्जिय्याह राजा मरा, मैं ने प्रभु को बहुत ही ऊंचे सिंहासन पर विराजमान देखा; और उसके वस्त्र के घेर से मन्दिर भर गया। 
Isaiah 6:2 उस से ऊंचे पर साराप दिखाई दिए; उनके छ: छ: पंख थे; दो पंखों से वे अपने मुंह को ढांपे थे और दो से अपने पांवों को, और दो से उड़ रहे थे। 
Isaiah 6:3 और वे एक दूसरे से पुकार पुकारकर कह रहे थे: सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है। 
Isaiah 6:4 और पुकारने वाले के शब्द से डेवढिय़ों की नेवें डोल उठीं, और भवन धूंए से भर गया। 
Isaiah 6:5 तब मैं ने कहा, हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठ वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं; क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है!

Romans 8:18 क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्लेश उस महिमा के साम्हने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं। 
Romans 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशाभरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है। 
Romans 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई। 
Romans 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी। 
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 27-29
  • 2 कुरिन्थियों 10


बुधवार, 16 सितंबर 2015

भविष्य


   हम अपने भविष्य को लेकर परमेश्वर की इच्छा के बारे अकसर उत्सुक्त रहते हैं, कभी कभी चिंतित भी हो जाते हैं, विशेषकर तब जब हम कठिनाईयों में होते हैं। हम सोचने लगते हैं कि अब यहां मेरा क्या होगा? क्या मुझे यहीं रुके रहना चाहिए या फिर परमेश्वर मुझे कहीं और जाने के लिए कह रहा है? सही मार्गदर्शन जानने का एक ही निश्चित तरीका है, वह कीजिए जो परमेश्वर आज और अभी आप से करने के लिए कह रहा है। परमेश्वर द्वारा आपको आज और अभी के लिए दी गई जिम्मेदारी को भली-भाँति निभाएं और परमेश्वर आपको अगले कदम के बारे में भी बता देगा।

   जो आप जानते हैं उसे मानने के द्वारा आप अगला कदम उठाने के लिए भी सामर्थ पाएंगे; अगला, और फिर उससे अगला कदम क्या होना है, यह भी एक एक कदम करके आपको बता दिया जाएगा; परमेश्वर के साथ चलने की यही विधि है।

   लेकिन यदि आप कहें, "मान लीजिए कि मैंने एक कदम तो उठा लिया, फिर मैं कैसे जानूँ कि आगे उसका परिणाम क्या होगा?" यह चिन्ता करना परमेश्वर का काम है; मेरा और आपका काम है अभी और आज को निभाना तथा भविष्य की चिन्ता परमेश्वर पर छोड़ देना। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने कहा कि हमारे गति परमेश्वर की ओर से दृढ़ करी जाती है (भजन 37:23); आज ही के लिए दिए गए निर्देश हमारे लिए काफी हैं; कल के लिए निर्देश आज पाने से कोई लाभ नहीं होगा। जॉर्ज मैकडॉनल्ड ने कहा, "हम परमेश्वर की निर्देश पुस्तिका के अगले दिन के पन्ने को समझ ही नहीं पाते; हमें तो बस आज का पन्ना ही दिखाई देता है। जब तक हम आज के पन्ने के निर्देशों का पालन ना कर लें, उन्हें भली-भाँति सीख ना लें, हम पन्ना पलट भी नहीं सकते।"

   प्रभु यीशु ने हमें कल की चिंता कल ही पर छोड़ देने को कहा है (मत्ती 6:34)। अगर हम अपने आप को परमेश्वर की इच्छा के साथ जोड़ते हैं, और उसके द्वारा प्रतिदिन के लिए मिलने वाले निर्देशों, शिक्षाओं तथा चेतावनियों का पालन करते हैं, विश्वास के साथ उसकी आज्ञाकारिता में चलते हैं, तो हम पाएंगे कि परमेश्वर दिन प्रति दिन को भली-भाँति संपन्न करने में हमारा मार्गदर्शक बना रहेगा, और भविष्य के लिए हमारी चिंता का निवारण स्वतः ही हो जाएगा। - डेविड रोपर


धन्य है वह व्यक्ति जो परमेश्वर की गति खोजता है और स्वयं भी उसी दिशा में चलता है।

इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है। - मत्ती 6:33-34

बाइबल पाठ: भजन 37:23-40
Psalms 37:23 मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, और उसके चलन से वह प्रसन्न रहता है; 
Psalms 37:24 चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है।
Psalms 37:25 मैं लड़कपन से ले कर बुढ़ापे तक देखता आया हूं; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े मांगते देखा है। 
Psalms 37:26 वह तो दिन भर अनुग्रह कर कर के ऋण देता है, और उसके वंश पर आशीष फलती रहती है।
Psalms 37:27 बुराई को छोड़ भलाई कर; और तू सर्वदा बना रहेगा। 
Psalms 37:28 क्योंकि यहोवा न्याय से प्रीति रखता; और अपने भक्तों को न तजेगा। उनकी तो रक्षा सदा होती है, परन्तु दुष्टों का वंश काट डाला जाएगा। 
Psalms 37:29 धर्मी लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और उस में सदा बसे रहेंगे।
Psalms 37:30 धर्मी अपने मुंह से बुद्धि की बातें करता, और न्याय का वचन कहता है। 
Psalms 37:31 उसके परमेश्वर की व्यवस्था उसके हृदय में बनी रहती है, उसके पैर नहीं फिसलते।
Psalms 37:32 दुष्ट धर्मी की ताक में रहता है। और उसके मार डालने का यत्न करता है। 
Psalms 37:33 यहोवा उसको उसके हाथ में न छोड़ेगा, और जब उसका विचार किया जाए तब वह उसे दोषी न ठहराएगा।
Psalms 37:34 यहोवा की बाट जोहता रह, और उसके मार्ग पर बना रह, और वह तुझे बढ़ाकर पृथ्वी का अधिकारी कर देगा; जब दुष्ट काट डाले जाएंगे, तब तू देखेगा।
Psalms 37:35 मैं ने दुष्ट को बड़ा पराक्रमी और ऐसा फैलता हुए देखा, जैसा कोई हरा पेड़ अपने निज भूमि में फैलता है। 
Psalms 37:36 परन्तु जब कोई उधर से गया तो देखा कि वह वहां है ही नहीं; और मैं ने भी उसे ढूंढ़ा, परन्तु कहीं न पाया।
Psalms 37:37 खरे मनुष्य पर दृष्टि कर और धर्मी को देख, क्योंकि मेल से रहने वाले पुरूष का अन्तफल अच्छा है। 
Psalms 37:38 परन्तु अपराधी एक साथ सत्यानाश किए जाएंगे; दुष्टों का अन्तफल सर्वनाश है।
Psalms 37:39 धर्मियों की मुक्ति यहोवा की ओर से होती है; संकट के समय वह उनका दृढ़ गढ़ है। 
Psalms 37:40 और यहोवा उनकी सहायता कर के उन को बचाता है; वह उन को दुष्टों से छुड़ाकर उनका उद्धार करता है, इसलिये कि उन्होंने उस में अपनी शरण ली है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9


मंगलवार, 15 सितंबर 2015

चमकता जीवन


   अन्तराष्ट्रीय बास्केट-बॉल संघ के अनुसार, बास्केट-बॉल संसार का दूसरा सबसे लोकप्रीय खेल है, और अनुमान लगाया गया है कि संसार भर में इसके 45 करोड़ चाहने वाले हैं। अमेरिका में मार्च महीने में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्पर्धाओं में अकसर प्रसिद्ध बास्केट-बॉल प्रशिक्षक जॉन वुडेन को स्मरण किया जाता है। लॉस ऐन्जेलेस के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अपने 27 वर्षों के दौरान वुडन द्वारा प्रशिक्षित टीमों ने अभूतपूर्व 10 बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीतीं। लेकिन आज भी वुडेन को, जिनका देहांत 2010 में हुआ, उनकी इन उपलब्धियों से अधिक उनके व्यक्तित्व के लिए स्मरण किया जाता है।

   जॉन वुडेन मसीही विश्वासी थे और अपने मसीही विश्वास को जी कर दिखाते थे; प्रतियोगिता जीतने से आसक्त वातावरण में भी वे दूसरों के प्रति एक सच्ची लगन और चिंता रखते थे। अपनी जीवनी, "They Call Me Coach" में उन्होंने लिखा, "मैंने सदा ही यह जताने का प्रयास किया है बास्केटबॉल सर्वोपरि नहीं है। हमारे उस संपूर्ण जीवन के सामने, जो हम जीते हैं, उसका महत्व बहुत कम है। एक ही जीवन है जो सदा विजयी रहता है, और वह है वो जीवन जो उद्धारकर्ता प्रभु के हाथ में समर्पित कर दिया गया है। जब तक यह समर्पण ना हो, हमारा जीवन मार्ग एक गोल चक्कर में चलते जाने के समान निरर्थक है, हमें कहीं नहीं पहुँचा सकता है।"

   प्रभु यीशु ने कहा, "उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:16)। जॉन वुडेन ने अपने जीवन के हर कार्य से परमेश्वर को आदर दिया, और उनके चमकते हुए जीवन का उदाहरण आज हमें भी यही करने के लिए प्रेरित करता है। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


अपने प्रकाश को चमकने दें - चाहे आप कोने में लगी मोमबत्ती हों अथवा पहाड़ी पर खड़ा प्रकाशस्तंभ।

परन्तु धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है, जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है। - नीतिवचन 4:18

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-16
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 22-24
  • 2 कुरिन्थियों 8


सोमवार, 14 सितंबर 2015

इन्कार


   हवाई अड्डे में चलते हुए मेरा ध्यान भीड़ में भागते हुए एक व्यक्ति की टोपी पर लिखे वाक्य की ओर गया, जहाँ दो शब्दों में लिखा था, "सब अस्वीकारें!" मैं सोचने लगा कि इसका तात्पर्य क्या हो सकता है? क्या अपने दोष को कभी स्वीकार ना करें? जीवन के सुख-विलास का इन्कार करें? या कुछ और? मैं उन दो शब्दों के रहस्य को समझने के लिए अपना सिर खुजाने लगा।

   प्रभु यीशु के एक अनुयायी शमौन पतरस ने भी कुछ इन्कार किया था; प्रभु यीशु के पकड़वाए जाने के बाद, उसके कठिन समय में पतरस ने तीन बार इस बात का इन्कार किया कि वह उसे जानता है (लूका 22:57, 58, 60)। इससे उसे बाद में ऐसी तीव्र ग्लानि और हृदय-वेदना हुई कि वह बाहर जाकर फूट-फूटकर रोने लगा (पद 62)।

   लेकिन पतरस के उस इन्कार के कारण प्रभु यीशु का उसके प्रति प्रेम कम नहीं हुआ। वैसे ही आज हमारे द्वारा आत्मिक कमज़ोरी के क्षणों में करी गई बुराईयों और इन्कारों से हमारे प्रति प्रभु यीशु का प्रेम कम नहीं होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह नबी ने लिखा, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है" (विलापगीत 3:22-23)।

   हम इस बात से आश्वस्त हो सकते हैं कि चाहे हम विफल हो जाएं, हमारा प्रभु परमेश्वर कभी नहीं बदलता, वह हमसे सदा उस प्रेम और करुणा के साथ व्यवहार करता है जो अनन्तकाल की है, कभी कम नहीं होती, कभी टलती नहीं। - बिल क्राउडर


हमारा सिद्ध ना होना, परमेश्वर की करुणा का हम पर बने रहने का कारण है।

यदि हम अविश्वासी भी हों तौभी वह विश्वास योग्य बना रहता है, क्योंकि वह आप अपना इन्कार नहीं कर सकता। - 2 तिमुथियुस 2:13

बाइबल पाठ: लूका 22:54-62
Luke 22:54 फिर वे उसे पकड़कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे पीछे चलता था। 
Luke 22:55 और जब वे आंगन में आग सुलगाकर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उन के बीच में बैठ गया। 
Luke 22:56 और एक लौंडी उसे आग के उजियाले में बैठे देखकर और उस की ओर ताककर कहने लगी, यह भी तो उसके साथ था। 
Luke 22:57 परन्तु उसने यह कहकर इन्कार किया, कि हे नारी, मैं उसे नहीं जानता। 
Luke 22:58 थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देखकर कहा, तू भी तो उन्‍हीं में से है: पतरस ने कहा; हे मनुष्य मैं नहीं हूं। 
Luke 22:59 कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा, निश्‍चय यह भी तो उसके साथ था; क्योंकि यह गलीली है। 
Luke 22:60 पतरस ने कहा, हे मनुष्य, मैं नहीं जानता कि तू क्या कहता है! वह कह ही रहा था कि तुरन्त मुर्ग ने बांग दी। 
Luke 22:61 तब प्रभु ने घूमकर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उसने कही थी, कि आज मुर्ग के बांग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा। 
Luke 22:62 और वह बाहर निकलकर फूट फूट कर रोने लगा।

एक साल में बाइबल: नीतिवचन 19-21; 2 कुरिन्थियों 7