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Monday, March 31, 2014

तैयार


   जैसे उसके अन्य मित्र कर रहे थे, मेरी बेटी मेलिस्सा भी व्यसक होने और तब की ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिए अपने आप को तैयार कर रही थी। स्कूल में वो अपने भविष्य की योजना के अनुसार के विषयों के पाठ्यक्रमों के अध्ययन के द्वारा कॉलेज जाने के लिए तैयार हो रही थी, और एक कॉलेज में प्रवेश परीक्षा देने के लिए उसने अपना नाम भी लिखवा लिया था। स्कूल से बाहर अपने मित्रों, सहपाठियों और अन्य लोगों के साथ समय बिता कर तथा उनसे संवाद तथा विचारविमर्श द्वारा वो सामाजिक दायित्वों को निभाना सीख रही थी। अपने कार्य स्थल में वो विभिन्न स्तर के लोगों के साथ संपर्क तथा व्यवहार के द्वारा अपने भविष्य के कार्य की ज़िम्मेदारियों के लिए अपने आप को तैयार कर रही थी। घर पर मेलिस्सा घर के कार्यों में हाथ बंटाने और पारिवारिक संबंधों को निभाने के द्वारा एक मसीही विश्वासी परिवार के निर्वाह को सीख रही थी।

   व्यसक जीवन की तैयारी काफी मेहनत भरी होती है और मेलिस्सा उसमें पूरी तन्मयता के साथ लगी हुई थी तथा भली भांति उन्नति भी कर रही थी। लेकिन अनायास ही हुई उस अनेपक्षित दुर्घटना ने प्रगट कर दिया कि इनमें से कोई भी तैयारी वह तैयारी नहीं थी जिसकी उसे सबसे अधिक आवश्यकता थी। सन 2002 के जून माह की एक मनोरम शाम को 17 वर्षीय मेलिस्सा के जीवन का एक कार दुर्घटना में आक्समिक अन्त हो गया। उस अन्त के लिए उसे केवल एक ही तैयारी की आवश्यकता थी - परमेश्वर के सामने खड़े होकर अपने जीवन का हिसाब देने की; और उस शाम जब अचानक ही वह समय आ पहुँचा, मेलिस्सा अपने अनन्त के लिए तैयार थी, क्योंकि प्रभु यीशु में विश्वास और पापों से पश्चाताप एवं प्रभु यीशु को किए गए जीवन समर्पण के द्वारा (यूहन्ना 3:16; रोमियों 5:8-9) मेलिस्सा पहले से ही अपना अनन्त सुनिश्चित कर चुकी थी।

   जब उसकी तैयारियों को परखने की वास्तविक घड़ी अनायास ही आ पहुँची, मेलिस्सा तैयार थी - क्या आप भी उस घड़ी के लिए तैयार हैं? जैसे मेलिस्सा पर, वैसे ही आप पर भी, वह घड़ी कभी भी अनेपक्षित रूप से आ सकती है और तब तैयारी का कोई समय नहीं मिलेगा। संसार की ज़िम्मेदारियों के लिए करी गई सभी तैयारियाँ संसार में ही रह जाएंगी; असली आवश्यकता तो अनन्त काल की तैयारी की है - उस के लिए आप की तैयारी की क्या स्थिति है? - डेव ब्रैनन


यदि आज मृत्यु आपको उठा ले जाए तो क्या आप परमेश्वर के सामने जीवन का लेखा देने के लिए खड़े होने को तैयार हैं?

जैसा कहा जाता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था। - इब्रानियों 3:15

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 ​सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। 
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? 
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? 
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 5-7


Sunday, March 30, 2014

नज़रिया


   बहुत वर्षों से एलन फन्ट का टेलिविज़न कार्यक्रम Candid Camera दर्शकों के मनोरंजन का स्त्रोत रहा है। इस कार्यक्रम में एक छिपे हुए कैमरे में कैद कर के आकस्मिक और विचित्र परिस्थितियों के प्रति करी गई लोगों की हास्यासपद प्रतिक्रियाएं दिखाई जाती हैं। एलन के पुत्र पीटर के अनुसार, इस कार्यक्रम में दिखाने के लिए सामग्री एकत्रित करते समय उनका मानना यही रहता है कि, "सामान्यतः लोग अद्भुत होते हैं, और हम अपने कैमरे से यह दिखाना चाहते हैं।" पीटर का यह भी मानना है कि ऐसे ही कुछ अन्य कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ता यह मानकर चलते हैं कि लोग सामान्यतः बेवकूफ होते हैं और वे यही बात दिखाने का प्रयास करते हैं। पीटर की यह टिप्पणी दिखाती है कि लोगों के प्रति हमारा नज़रिया ही उनके प्रति हमारे व्यवहार को निर्धारित करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के जीवन से संबंधित एक घटना में, प्रभु यीशु ज़क्कई नामक एक महसूल लेने वाले के घर आतिथ्य के लिए गए। उन दिनों में क्योंकि यहूदी लोग रोमियों की गुलामी में थे और महसूल लेने वाले रोमी शासकों के लिए कार्य करते थे इसलिए यहूदी समाज महसूल लेने वाले यहूदियों को बड़ी निन्दनीय दृष्टि से देखता था और उन्हें घोर पापी मानता था। प्रभु यीशु को ज़क्कई के घर जाता देख, लोग प्रभु की आलोचना करने लगे, "यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है" (लूका 19:7)। प्रभु यीशु, इस आलोचना की परवाह किए बिना ज़क्कई के घर गए, प्रभु के व्यवहार से ज़क्कई का मन बदल गया, उसने अपने पापों से पश्चाताप किया और अधर्म से कमाई दौलत को लौटा देने का निर्णय लिया, जिस पर प्रभु ने कहा, "...आज इस घर में उद्धार आया है...क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है" (लूका 19:9, 10)।

   मेरे मित्र बौब हौर्नर कहते हैं, "यदि आप किसी को असफल प्रवृति का एवं अयोग्य देखोगे तो उसके प्रति तिरस्कारपूर्ण व्यवहार करोगे। लेकिन जब उन्हें पाप में खोया और सहायता पाने के योग्य देखोगे तो उनके प्रति आपका व्यवहार अनुकंपा और दया का होगा।"

   प्रभु यीशु कभी संसार के लोगों को असफल प्रवृति का एवं अयोग्य नहीं देखता, उसके लिए सभी जन पाप से छुड़ाए जाने तथा प्रेम किए जाने के योग्य हैं। इसीलिए उसने सारे संसार के सभी लोगों के लिए अपने प्राण बलिदान करे ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, अपने पापों से पश्चाताप करे और अपना जीवन उसे समर्पित करे, वह परमेश्वर की सन्तान कहलाने और अनन्तकाल तक उस के साथ स्वर्ग में रहने के योग्य हो जाए।

   जब हमारे सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु का नज़रिया ऐसा है तो हम जो उसके अनुयायी हैं, क्या पाप के अन्धकार में खोए संसार के लोगों के प्रति इससे भिन्न नज़रिया रखने का कोई वाजिब कारण दे सकते हैं? - डेविड मैक्कैसलैंड


जिन्होंने उद्धार पा लिया है उन्हें पाप में खोए हुओं को खोजने में लगे रहना चाहिए।

यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्तु बीमारों को है: मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को बुलाने आया हूं। - मरकुस 2:17

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10
Luke 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था। 
Luke 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था। 
Luke 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था। 
Luke 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था। 
Luke 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है। 
Luke 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया। 
Luke 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है। 
Luke 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं। 
Luke 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है। 
Luke 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 1-4


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