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Sunday, December 31, 2017

नज़र


   अपनी पुस्तक On The Wing में ऐलेन टेनेंट ने बाज़ पक्षी के प्रवसन पर नज़र रखने के अपने प्रयासों का ब्यौरा दिया है। ये पक्षी अपनी सुन्दरता, तीव्रता और बल के लिए जाने जाते हैं तथा शिकार के लिए राजाओं और नवाबों के साथ रखे जाते रहे हैं। परन्तु 1950 के दशक में डी.डी.टी. नामक कीटनाशक के प्रभाव के कारण, इन पक्षियों के प्रजनन में बाधा आई और इनकी संख्या इतनी अधिक घट गई, कि इन्हें विलुप्तप्रायः जीवों की सूचि में रखा गया। इन पक्षियों के पुनः संख्या वृद्धि में रुचि रखने वाले टेनेंट ने कुछ बाज़ पक्षियों पर रेडियो ट्रांसमिटर लगा कर उनके प्रवसन मार्गों और नमूनों की जानकारी जमा करनी चाही। परन्तु जब वह और उसका साथी वायुयान चालक रेडियो ट्रांसमिटर लगे पक्षियों के पीछे अपने सेसना विमान से उड़ने लगे तो उन्होंने पाया कि बारंबार उन्हें रेडियो सिगनल मिलने बन्द हो जाते थे। उन्नत टेक्नौलोजी के प्रयोग के बावजूद, जिन पक्षियों की वे सहायता करना चाहते थे, उन पर पूरी तरह से नज़र नहीं रख पा रहे थे।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए यह निश्चिन्त और आश्वस्त रहने की बात है कि जिस प्रभु परमेश्वर पर हम विश्वास करते हैं, जिसके हाथों में हमने अपना जीवन समर्पित किया है, हम कभी उसकी नज़रों से ओझल नहीं होते हैं; वह सदा हमारी चिंता और देखभाल करता है, हम पर अपनी नज़र बनाए रखता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु मसीह ने कहा: "क्या पैसे मे दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो" (मत्ती 10:29-31)।

   जब भी हम कठिनाईयों में पड़ें, भय और आशंका द्वारा शैतान हमारे मनों में डालना चाहे कि परमेश्वर हमारी परिस्थिति से अवगत नहीं है, या हमारी चिंता नहीं करता है, तो प्रभु यीशु की शिक्षाएं हमें आश्वस्त करती हैं कि परमेश्वर हम से बहुत प्रगाढ़ प्रेम करता है, और सभी बातें, सभी परिस्थितियाँ, हर समय उसके नियंत्रण में रहती हैं। वह हमारी हर बात, हर कठिनाई, हर परिस्थिति से सदैव अवगत रहता है, उसकी नज़र हम पर सदा बनी रहती है। - डैनिस फिशर


यदि परमेश्वर पक्षियों की चिंता करता है, 
तो क्या अपनी सन्तान की चिंता नहीं करेगा?

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: मत्ती 10:26-31
Matthew 10:26 सो उन से मत डरना, क्योंकि कुछ ढपा नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा। 
Matthew 10:27 जो मैं तुम से अन्धियारे में कहता हूं, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो। 
Matthew 10:28 जो शरीर को घात करते हैं, पर आत्मा को घात नहीं कर सकते, उन से मत डरना; पर उसी से डरो, जो आत्मा और शरीर दोनों को नरक में नाश कर सकता है। 
Matthew 10:29 क्या पैसे मे दो गौरैये नहीं बिकतीं? तौभी तुम्हारे पिता की इच्छा के बिना उन में से एक भी भूमि पर नहीं गिर सकती। 
Matthew 10:30 तुम्हारे सिर के बाल भी सब गिने हुए हैं। 
Matthew 10:31 इसलिये, डरो नहीं; तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो। 

एक साल में बाइबल: 
  • मलाकी 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 22


Saturday, December 30, 2017

विश्राम


   मैं अपने एक मित्र के साथ एक अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड में बैठा हुआ था, और आस-पास के अन्य मरीज़ों की पीड़ा से कराहने के आवाज़ों से विचलित हो रहा था। मैंने अपने मित्र और अन्य मरीज़ों के लिए प्रार्थना करते हुए एक बार फिर एहसास किया कि इस पृथ्वी पर हमारा जीवन कितना क्षणिक और भंगुर है। मुझे जिम रीव्ज़ द्वारा गाया हुआ एक गीत स्मरण हो आया, जिसमें वह कह रहा है कि यह संसार हमारा घर नहीं है, हम बस इसमें से हो कर गुज़र रहे हैं। हमारे इस संसार में थकान, दुःख, भूख, ऋण, ग़रीबी, बीमारी और मृत्यु भरे हुए हैं। परन्तु फिर भी हमें इस संसार और उसकी परिस्थितियों में से होकर निकलना ही है। इस लिए प्रभु यीशु द्वारा संसार के सभी लोगों को विश्राम पाने का निमंत्रण सामयिक और सुखद है: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   शायद ही ऐसा कोई अंतिम संस्कार हुआ होगा जिसमें परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के शिष्य, प्रेरित यूहन्ना द्वारा युगान्त और नए युग के आरंभ से संबंधित भविष्यवाणी की "नए आकाश और नई पृथ्वी" की बात दोहराई न जाती हो (प्रकाशितवाक्य 21:1-5)। बाइबल का यह खण्ड निश्चय ही अंतिम संसकारों के समय के लिए महत्व का है; परन्तु यह खण्ड मृतकों से अधिक जीवतों के लिए महत्व का है।

   प्रभु यीशु के निमंत्रण को स्वीकार कर के उसमें विश्राम प्राप्त करने का अवसर और समय पृथ्वी पर हमारे जीवन के दौरान ही है, उसके पश्चात नहीं। इस जीवन के दौरान प्रभु में विश्राम को स्वीकार कर लेने पर ही हम युगान्त पर मिलने वाली, बाइबल के प्रकाशित्वाक्य में उल्लेखित, आशीषों को प्राप्त करने पाएंगे। उन आशीषों मे&#