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शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

दैनिक ताज़गी

   अपनी दैनिक क्रियाओं में हम सब लगभग उन्हीं बातों को दोहराते रहते हैं; हम सब प्रतिदिन खाते-पीते हैं, सोते-उठते हैं, कार्य करते हैं, अपनी सफाई करते हैं, इत्यादि। इसि प्रक्रिया को दोहराते दोहराते कभी कभी मन में विचार उठता है कि अन्ततः इस सब का प्रयोजन क्या है?

   परमेश्वर चाहता है कि हम इसे कुछ फर्क संदर्भ में देखें - बार बार दोहराई जाने वाली बातें भी मसीही विश्वासी के लिए कुछ महत्वपूर्ण रहस्य छिपाए हुए होती हैं। परमेश्वर की योजना का एक भाग है कि बार बार दोहराई जाने वाली बातों में भी उसके मार्गदर्शन को ढूंढें और उसका पालन करें।

   संसार एक मंच के समान है जिस पर अनन्तता का नाटक प्रदर्शित हो रहा है। प्रत्येक दृश्य के लिए मंच के परदे के उठने और गिरने के समान सूर्य भी प्रतिदिन के दृश्य के लिए उदय और अस्त होता है। इस दैनिक दश्य में हम कलाकार अपनी भूमिकाओं और अपने संवाद की पंक्तियों को दोहराने के बारे में निर्णय लेते हैं - या तो हम अधीरता से केवल दश्य की समाप्ति के लिए अपनी भूमिकाएं और पंक्तियां, बिना किसी लगन और अनमने होकर के दोहरा मात्र देते हैं, अथवा उस दृश्य के लिए हम नाटक के निर्देशक की मनसा जान कर के अपनी भूमिका को उसकी इच्छा के अनुसार निभाते हैं। अवश्य ही परिस्थितियां और भूमिकाएं नित्यक्रमानुसार ही हैं, और हमें लग सकता है कि हम यह पहले भी निभा चुके हैं, किन्तु नित्यप्रायः कार्यों में सहर्ष भाग लेना हम में चरित्र का गठन करता है, हमारे विश्वास को मज़बूत करता है, हमारी आशा को बढ़ाता है और हम में सहनशीलता का विकास करता है।

   प्रतिदिन के सामन्य कार्यों के द्वारा परमेश्वर हमें सिखाता है कि हमारे पृथ्वी के जीवनों के लिए व्यर्थ दोहराने से बढ़कर कुछ निर्धारित है। दिन-प्रतिदिन परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना दैनिक ताज़गी का मूल मंत्र है। - मार्ट डी हॉन


अगर जीवन सान के पत्थर के समान है, तो उसे अपने चरित्र की धार बनाने के लिए उपयोग कीजिए।
 
जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा; और सूर्य के नीचे कोई बात नई नहीं है। - सभोपदेशक १:९
 
बाइबल पाठ: सभोपदेशक १:१-९
    Ecc 1:1  यरूशलेम के राजा, दाऊद के पुत्र और उपदेशक के वचन।
    Ecc 1:2  उपदेशक का यह वचन है, कि व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है।
    Ecc 1:3  उस सब परिश्रम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?
    Ecc 1:4  एक पीढ़ी जाती है, और दूसरी पीढ़ी आती है, परन्तु पृथ्वी सर्वदा बनी रहती है।
    Ecc 1:5  सूर्य उदय होकर अस्त भी होता है, और अपने उदय की दिशा को वेग से चला जाता है।
    Ecc 1:6  वायु दक्खिन की ओर बहती है, और उत्तर की ओर घूमती जाती है; वह घूमती और बहती रहती है, और अपने चक्करों में लौट आती है।
    Ecc 1:7  सब नदियां समुद्र में जा मिलती हैं, तौभी समुद्र भर नहीं जाता; जिस स्थान से नदियां निकलती हैं, उधर ही को वे फिर जाती हैं।
    Ecc 1:8  सब बातें परिश्रम से भरी हैं; मनुष्य इसका वर्णन नहीं कर सकता, न तो आंखें देखने से तृप्त होती हैं, और न कान सुनने से भरते हैं।
    Ecc 1:9  जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा; और सूर्य के नीचे कोई बात नई नहीं है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ६५-६६ 
  • १ तिमुथियुस २

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

सही मानदण्ड

एक छोटे बच्चे ने घोषणा करी, "मेरा कद ९ फुट है, मैं गोलियत के समान हूँ।" उसकी माँ ने पूछा, "तुम यह किस आधार पर कह सकते हो?" बच्चा बोला, "मैंने कद नापने का अपना पैमाना बनाया है और उसके अनुसार मेरा कद ९ फुट का है।" उस बच्चे ने नापा तो सही था पर जिस पैमाने से नापा था, वही गलत था।

कुछ ऐसा ही लोगों के साथ होता है जब वे अपनी धार्मिकता का स्तर अन्य लोगों की धार्मिकता से नापते हैं। दूसरों के व्यवहार की तुलना में अपने व्यवहार को रख कर उन्हें लगता है कि उनमें कोई कमी नहीं है, इसलिए उन्हें अपने आप में कोई पाप का बोध नहीं होता और न ही पाप की क्षमा पाने तथा उद्धार की कोई आवश्यक्ता महसूस होती है। लेकिन उनके अपनी धार्मिकता नापने के गलत पैमाने की सच्चाई तब सामने आती है जब वे अपने आप को धार्मिकता के सम्पूर्ण, सिद्ध और कभी न बदलने वाले स्तर - परमेश्वर प्रभु यीशु मसीह के सामने रखते हैं।

परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता यशायाह ने जब परमेश्वर का दर्शन उसके वैभव और महिमा में पाया तो वह पुकार उठा, "... हाय! हाय! मैं नाश हूआ; क्योंकि मैं अशुद्ध होंठों वाला मनुष्य हूं, और अशुद्ध होंठ वाले मनुष्यों के बीच में रहता हूं, क्योंकि मैं ने सेनाओं के यहोवा महाराजाधिराज को अपनी आंखों से देखा है!" जब प्रभु यीशु के चेले और प्रेरित युहन्ना ने प्रभु यीशु का दर्शन उसके ईश्वरीय स्वरूप में पाया, तो उसका अनुभव यशायाह के अनुभव से भिन्न नहीं था; यूहन्ना लिखता है, "जब मै ने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा और उस ने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रखकर यह कहा, कि मत डर मैं प्रथम और अन्‍तिम और जीवता हूं" (प्रकाशितवाक्य १:१७)। जब यह हाल उनका है जो परमेश्वर के भक्त और चुने हुए धर्मी जन हैं, तो हम साधारण मनुष्यों का, जिनके लिए लिखा है कि "सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों ३:२३) उस सिद्ध के सामने क्या हाल होगा?

जब हम अपनी धार्मिकता को अपने समान ही अन्य पापी लोगों से तुलना द्वारा आंकते हैं तो ना तो हम सही होते हैं और ना ही हमारे निष्कर्श, क्योंकि हमारा नापने का मानदण्ड ही गलत है। चाहे हम मनुष्यों की नज़रों में इस गलत पैमाने द्वारा धर्मी माने जा सकते हैं, लेकिन इस गलत पैमाने द्वारा हम कभी परमेश्वर के समक्ष धर्मी नहीं ठहर सकते। परन्तु परमेश्वर ने हमें धर्मी ठहराने के लिए हमारे लिए केवल एक ही मार्ग दिया है, वह मार्ग जो समस्त संसार के प्रत्येक जन के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है - किसी भी प्रकार के कर्मों द्वारा नहीं वरन साधारण विश्वास द्वारा।

प्रभु यीशु द्वारा क्रूस पर दिये गए उसके बलिदान में विश्वास करके और साधारण विश्वास से उस से अपने पापों की क्षमा माँगने भर से ही कोई भी व्यक्ति कभी भी कहीं भी किसी भी समय परमेश्वर की धार्मिकता को प्राप्त कर सकता है और अनन्त काल तक उस अविनाशी धार्मिकता के भले परिणामों का आनन्द ले सकता है। - मार्ट डी हॉन


यदि किन्ही कर्मों द्वारा मनुष्य स्वयं धर्मी बन सकता तो प्रभु यीशु मसीह को इसके लिए अपने प्राण बलिदान करने की कदापि आवश्यक्ता नहीं पड़ती।

क्‍योंकि हमें यह हियाव नहीं कि हम अपने आप को उन में से ऐसे कितनों के साथ गिनें, या उन से अपने को मिलाएं, जो अपनी प्रशंसा करते हैं, और अपने आप को आपस में नाप तौल कर एक दूसरे से मिलान कर के मूर्ख ठहरते हैं। - २ कुर्न्थियों १०:१२


बाइबल पाठ: रोमियों ३:१०-२४

Rom 3:10 जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।
Rom 3:11 कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं।
Rom 3:12 सब भटक गए हैं, सब के सब निकम्मे बन गए, कोई भलाई करने वाला नहीं, एक भी नहीं।
Rom 3:13 उन का गला खुली हुई कब्र है: उन्हों ने अपनी जीभों से छल किया है: उन के होठों में सापों का विष है।
Rom 3:14 और उन का मुंह श्राप और कड़वाहट से भरा है।
Rom 3:15 उन के पांव लोहू बहाने को फुर्तीले हैं।
Rom 3:16 उन के मार्गों में नाश और क्‍लेश है।
Rom 3:17 उन्‍होंने कुशल का मार्ग नहीं जाना।
Rom 3:18 उन की आंखों के साम्हने परमेश्वर का भय नहीं।
Rom 3:19 हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्‍हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्‍द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्‍ड के योग्य ठहरे।
Rom 3:20 क्‍योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है।
Rom 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं।
Rom 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्‍योंकि कुछ भेद नहीं।
Rom 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित है।
Rom 3:24 परन्‍तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४-६
  • प्रेरितों १७:१६-३४

शुक्रवार, 8 जुलाई 2011

हर तरह का मौसम

भजनकार ने सारी सृष्टि को परमेश्वर की स्तुति में अपनी आवाज़ उठाने को कहा ( भजन १४८:७-१२)। उस ने पहचाना की प्रकृति की प्रबल शक्तियाँ परमेश्वर द्वारा भेजी जाती हैं कि उसकी इच्छा को पूरी करें। ये शक्तियाँ न केवल जीवन की रक्षा और पोषण करती हैं वरन उसे आकार और स्वरूप भी देती हैं।

अपने घर के बाहर लगे विशाल पेड़ को देखकर मैं यही सोच रहा था। लम्बे समय से उस पेड़ के मज़बूत और गगनचुँबी तने और हर तरफ फैली शाखाओं को देखकर उनहें सराहता रहता था। अब मैं ने विचार किया कि परमेश्वर द्वारा भेजी गई प्रकृति की इन प्रबल शक्तियों ने ही इस पेड़ को इसका यह स्वरूप दिया है। गरमीयों की कठोर धूप, निकट की झील से आती तेज़ ठण्डी हवाएं जो उसकी शाखाओं को झकझोरती हैं, बरसात की तेज़ आँधियाँ, सर्दियों में उस पर पड़ने और जमने वाली बर्फ जिसका बोझ उसे उठाना होता है, वसन्त ऋतु में आने वाले तूफान, सब मिलकर उस पेड़ को इतना मज़बूत और स्थिर बनाते हैं।

जीवन में आने वाले तूफान के दबाव और बर्फानी हवाओं के थपेड़े परमेश्वर की ओर से भेजे गए मौसम के अलग अलग मिज़ाजों की तरह हैं। इनसे मेरे जीवन में सामर्थ और परिपक्वता आती है, ये परमेश्वर की ओर से मुझे उस स्वरूप में ढालते हैं जो परमेश्वर मेरे जीवन में चाहता है।

हमारे जीवन में हर प्रकार का मौसम, गर्मी की तपिश और सर्दी की ठिठुरन, सब परमेश्वर की ओर से है और हमें उस ही के स्वरूप में ढालने के लिए हैं, यदि हम आपने आप को उसके हाथों में समर्पित कर दें तो।


परमेश्वर निर्धारित करेगा कि आपको क्या झेलना है, आप यह निर्धारित कीजिए कि किस रीति से झेलेंगे।

पृथ्वी में से यहोवा की स्तुति करो, हे मगरमच्छों और गहिरे सागर, हे अग्नि और ओलों, हे हिम और कुहरे, हे उसका वचन मानने वाली प्रचण्ड बयार! - भजन १४८:७, ८


बाइबल पाठ: भजन १४८

Psa 148:1 याह की स्तुति करो! यहोवा की स्तुति स्वर्ग में से करो, उसकी स्तुति ऊंचे स्थानों में करो!
Psa 148:2 हे उसके सब दूतों, उसकी स्तुति करो: हे उसकी सब सेना उसकी स्तुति कर!
Psa 148:3 हे सूर्य और चन्द्रमा उसकी स्तुति करो, हे सब ज्योतिमय तारागण उसकी स्तुति करो!
Psa 148:4 हे सब से ऊंचे आकाश, और हे आकाश के ऊपर वाले जल, तुम दोनों उसकी स्तुति करो।
Psa 148:5 वे यहोवा के नाम की स्तुति करें, क्योंकि उसी ने आज्ञा दी और ये सिरजे गए।
Psa 148:6 और उस ने उन को सदा सर्वदा के लिये स्थिर किया है और ऐसी विधि ठहराई है, जो टलने की नहीं।
Psa 148:7 पृथ्वी में से यहोवा की स्तुति करो, हे मगरमच्छों और गहिरे सागर,
Psa 148:8 हे अग्नि और ओलों, हे हिम और कुहरे, हे उसका वचन मानने वाली प्रचण्ड बयार!
Psa 148:9 हे पहाड़ों और सब टीलो, हे फलदाई वृक्षों और सब देवदारों!
Psa 148:10 हे वन- पशुओं और सब घरैलू पशुओं, हे रेंगने वाले जन्तुओं और हे पक्षियों!
Psa 148:11 हे पृथ्वी के राजाओं, और राज्य राज्य के सब लोगों, हे हाकिमों और पृथ्वी के सब न्यायियों!
Psa 148:12 हे जवानों और कुमारियों, हे पुरनियों और बालकों!
Psa 148:13 यहोवा के नाम की स्तुति करो, क्योंकि केवल उसी का नाम महान है; उसका ऐश्वर्य पृथ्वी और आकाश के ऊपर है।
Psa 148:14 और उस ने अपनी प्रजा के लिये एक सींग ऊंचा किया है, यह उसके सब भक्तों के लिये अर्थात इस्राएलियों के लिये और उसके समीप रहने वाली प्रजा के लिये स्तुति करने का विषय है। याह की स्तुति करो।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३६-३७
  • प्रेरितों १५:२२-४१

गुरुवार, 7 जुलाई 2011

चिकने और गोलाकार

समुद्र के किनारे पैदल चलते हुए मैं एक छोटी से खाड़ीनुमा स्थान पर आया जिसका मुहाना तंग तथा सुरक्षित था और बड़ी तथा तेज़ लहरें वहाँ अन्दर तक वेग से नहीं आ पाती थीं। मैंने ध्यान किया कि जो पत्थर और चट्टानें वहाँ तट पर पड़ीं थीं वे उबड़-खाबड़ और पैनी थीं न की चिकनी और गोलाकार, जैसी की उस खाड़ीनुमा इलाके के बाहर थीं जहाँ पर समुद्र की लहरें वेग से आकर चट्टानों पर टूटती थीं और उन से घिस कर चट्टानों का पैनापन जाता रहा था और वे चिकनी हो गई थीं।

यही बात मसीही विश्वासी के चरित्र पर भी लागु होती है। जैसे लहरों और पानी का कठोर प्रहार चट्टानों को घिस कर चिकना कर देता है, वैसे ही हमारे जीवनों की कठिनाईयाँ और परिक्षाएं हमारे चरित्र को निखार कर हम में मसीही परिपक्वता ले आती हैं। इसी लिए भजनकार ने लिखा कि, "मुझे जो दु:ख हुआ वह मेरे लिये भला ही हुआ है, जिस से मैं तेरी विधियों को सीख सकूं" (भजन ११९:७१)। इसी भाव को प्रचारक सैमुएल रदरफोर्ड ने भी व्यक्त किया जब उसने कहा कि "क्लेषों की भट्टी से होकर निकलने से मुझे परमेश्वर का वचन एक नए रूप में मिल गया है।" जब उसका विश्वास परखा गया तो परमेश्वर के वचन की एक नई समझ उसे मिली और साथ ही उसका चरित्र भी और अधिक निखर गया।

एक सामन्य भ्रांति है कि जब हमारे साथ कुछ बुरा हो रहा होता है, तब परमेश्वर हमें दण्ड दे रहा होता है। यह सदा सत्य नहीं होता, परमेश्वर का वचन हमें यह भी सिखाता है कि परीक्षाएं एक मसीही विश्वासी के लिए सम्मान के पदक भी हो सकते हैं। वे दिखाती हैं कि उन परीक्षाओं में होकर परमेश्वर हम में कार्य कर रहा है जिससे वह हम में वह धैर्य उत्पन्न कर सके जिसकी चर्चा याकूब ने करी और जो हमें परिपक्व करता है जिससे हम किसी भी घटी में न रहें (याकूब १:४)।

क्लेषों और परीक्षाओं के द्वारा परमेश्वर हमारे चरित्र के पैने और ऊबड़-खाबड़ हिस्सों को घिस कर चिकना और गोलाकार करता है और हमें अपने पुत्र और हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में बदलता जाता है। - पौल वैन गोर्डर


परमेश्वर हमारे जीवनों में कठिनाईयाँ और परिक्षाएं हमें निखारने के लिए आने देता है, हमें बिगाड़ने के लिए नहीं।

...तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है। - याकूब १:३


बाइबल पाठ: याकूब १:१-१८

Jas 1:1 परमेश्वर के और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब की ओर से उन बारहों गोत्रों को जो तित्तर बित्तर होकर रहते हैं नमस्‍कार पहुंचे।
Jas 1:2 हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो
Jas 1:3 तो इसे पूरे आनन्‍द की बात समझो, यह जानकर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्‍पन्न होता है।
Jas 1:4 पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे।
Jas 1:5 पर यदि तुम में से किसी को बुद्धि की घटी हो, तो परमेश्वर से मांगे, जो बिना उलाहना दिए सब को उदारता से देता है और उस को दी जाएगी।
Jas 1:6 पर विश्वास से मांगे, और कुछ सन्‍देह न करे क्‍योंकि सन्‍देह करने वाला समुद्र की लहर के समान है जो हवा से बहती और उछलती है।
Jas 1:7 ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा।
Jas 1:8 वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
Jas 1:9 दीन भाई अपने ऊंचे पद पर घमण्‍ड करे।
Jas 1:10 और धनवान अपनी नीच दशा पर: क्‍योंकि वह घास के फूल की नाई जाता रहेगा।
Jas 1:11 क्‍योंकि सूर्य उदय होते ही कड़ी धूप पड़ती है और घास को सुखा देती है, और उसका फूल झड़ जाता है, और उस की शोभा जाती रहती है; उसी प्रकार धनवान भी अपने मार्ग पर चलते चलते धूल में मिल जाएगा।
Jas 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है क्‍योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।
Jas 1:13 जब किसी ही परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है क्‍योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वही किसी की परीक्षा आप करता है।
Jas 1:14 परन्‍तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंचकर, और फंसकर परीक्षा में पड़ता है।
Jas 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती होकर पाप को जनता है और पाप बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्‍पन्न करता है।
Jas 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।
Jas 1:17 क्‍योंकि हर एक अच्‍छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।
Jas 1:18 उस ने अपनी ही इच्‍छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्‍पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३४-३५
  • प्रेरितों १५:१-२१

बुधवार, 6 जुलाई 2011

दिल पर हावी

अपनी बैसाखियों के कारण रौजर कभी खेल-कूद में भाग नहीं ले सका, लेकिन वह अपनी पढ़ाई में सदा अच्छा स्थान बनाए रहा, सदा हँसमुख रहता था और उसके साथ के लोग उसे बहुत पसन्द करते थे। बहुत समय तक उसकी इस असमर्थता के बारे में किसी ने उससे कुछ नहीं पूछा, लेकिन एक दिन उसके एक अच्छे मित्र ने उस से पूछ ही लिया। रौजर ने उसे बताया कि उसकी यह असमर्थता बचपन में हुई पोलियो की बीमारी के कारण थी। उसके मित्र ने फिर पूछा "इतनी कठिनाईयों और तकलीफों के बावजूद तुम्हारे अन्दर कोई कडुवाहट क्यों नहीं दिखाई देती?" रौजर ने अपने दिल की ओर ऊँगुली का इशारा करते हुए और मुस्कुराते हुए उत्तर दिया "क्योंकि मैंने इसे अपने दिल पर कभी हावी नहीं होने दिया।"

हो सकता है कि कोई लोग ऐसे भी हों जिन्होंने कभी क्लेषों का सामना नहीं किया हो। लेकिन हम में से अधिकांश लोगों के लिये क्लेष - शारीरिक, मानसिक अथवा भावनाओं से जुड़े हुए, अनजान नहीं हैं; देर-सवेर, किसी न किसी रूप में, ये हमारे जीवनों में आ ही जाते हैं और तब हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया इनसे बचने और राहत पाने की होती है। परमेश्वर का वचन बाइबल कभी कहीं यह आश्वासन नहीं देती कि हमारे जीवन सदा क्लेषों से मुक्त होंगें और हम पर कभी कोई असमर्थता नहीं आएगी, और ना ही कोई ऐसा आश्वासन देती है कि क्लेषों से मुक्ति की प्रत्येक प्रार्थना का उत्तर हमारी इच्छानुसार ही होगा, यद्यपि कभी ऐसा होता भी है। लेकिन परमेश्वर का वचन हमें यह आश्वासन अवश्य देता है कि हर क्लेष में हमारा परमेश्वर और उसकी शांति तथा सामर्थ हमारे साथ बनी रहेगी और हर क्लेष में वह हमारे अविनाशी आत्मा को संभाले रहेगा, जो नशवर शरीर से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

यदि हम किसी ऐसी व्याधि से होकर निकलें, जिसका निवारण परमेश्वर तुरंत और हमारी इच्छानुसार नहीं कर देता तो हमें निराश और हताश होकर अपने जीवनों में कडुवाहट, आत्मग्लानि और परमेश्वर के प्रति विरोध और विद्रोह को आने नहीं देना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में अवश्य ही इस प्रकार के विचार हमारे मनों में घर बनाने का प्रयास करेंगे। जब जब ऐसा हो तो बड़ी सच्चाई और साधारण विश्वास के साथ हमें अपनी इन भावनाओं को परमेश्वर के सामने मान लेना चाहिए, क्योंकि वह न केवल सब कुछ जानता है वरन हमारी दशा को समझता भी है और हमसे प्रेम तथा सहानुभुति भी रखता है। ऐसा करने से न केवल हम परिस्थितियों पर जयवंत होंगे और हमारे जीवनों में परमेश्वर की शांति राज करेगी, वरन परमेश्वर भी हमें अपने प्रेम और सामर्थ का उदाहरण बना कर दूसरों तक अपनी गवाही को पहुँचाने पाएगा जिससे कि उनके जीवनों में भी निराशा राज न करने पाए।

यदि हर परिस्थिति में हम अपने जीवन परमेश्वर के आगे खुले रखेंगे तो कोई परिस्थिति कभी हमारे दिलों पर हावी नहीं हो सकेगी। - डेनिस डी हॉन


शरीर का ऐसा कोई क्लेष नहीं है जिससे आत्मा सामर्थ न पा सके।

जब वह व्याधि के मारे सेज पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा; तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा। - भजन ४१:३


बाइबल पाठ: भजन ४१

Psa 41:1 क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा।
Psa 41:2 यहोवा उसकी रक्षा करके उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। तू उसको शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़।
Psa 41:3 जब वह व्याधि के मारे सेज पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा; तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा।
Psa 41:4 मैं ने कहा, हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर, मुझ को चंगा कर, क्योंकि मैं ने तो तेरे विरूद्ध पाप किया है!
Psa 41:5 मेरे शत्रु यह कह कर मेरी बुराई करते हैं: वह कब मरेगा, और उसका नाम कब मिटेगा?
Psa 41:6 और जब वह मुझ से मिलने को आता है, तब वह व्यर्थ बातें बकता है, जब कि उसका मन अपने अन्दर अधर्म की बातें संचय करता है; और बाहर जाकर उनकी चर्चा करता है।
Psa 41:7 मेरे सब बैरी मिलकर मेरे विरूद्ध कानाफूसी करते हैं; वे मेरे विरूद्ध होकर मेरी हानि की कल्पना करते हैं।
Psa 41:8 वे कहते हैं कि इसे तो कोई बुरा रोग लग गया है, अब जो यह पड़ा है, तो फिर कभी उठने का नहीं।
Psa 41:9 मेरा परम मित्र जिस पर मैं भरोसा रखता था, जो मेरी रोटी खाता था, उस ने भी मेरे विरूद्ध लात उठाई है।
Psa 41:10 परन्तु हे यहोवा, तु मुझ पर अनुग्रह करके मुझ को उठा ले कि मैं उनको बदला दूं!
Psa 41:11 मेरा शत्रु जो मुझ पर जयवन्त नहीं हो पाता, इस से मैं ने जान लिया है कि तू मुझ से प्रसन्न है।
Psa 41:12 और मुझे तो तू खराई से सम्भालता, और सर्वदा के लिये अपने सम्मुख स्थिर करता है।
Psa 41:13 इस्राएल का परमेश्वर यहोवा आदि से अनन्तकाल तक धन्य है आमीन, फिर आमीन।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३२-३३
  • प्रेरितों १४

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

क्लेषों का उद्देश्य

सूखे और पत्थरीले रेगिस्तानी इलाकों में पाई जाने वाली कुछ झाड़ीयों के बीज तब तक अंकुरित नहीं होते जब तक रगड़ खाकर उनके बाहरी खोल क्षतिग्रस्त नहीं हो जाते। जब झाड़ीयों में बीज बनता है तो उसपर एक कठोर खोल भी चढा होता है जो उनके अन्दर के अंकुरित होने की क्षमता और सामग्री की रक्षा करता है, लेकिन इस खोल के कारण पानी उनके अन्दर भी नहीं पहुंच पाता और वे सही परिस्थितयों के होने तक अंकुरित नहीं हो पाते। जब भारी बारिश से उन पत्थरीली ढालों पर पानी तेज़ी से बहता है, तो उस पानी के वेग से वे बीज भी कंकड़ों और पत्थरों से टकाराते और रगड़ खाते हुए पानी के प्रवाह के साथ लुड़कते चले जाते हैं और उनका कठोर बाहरी खोल क्षतिग्रस्त होता जाता है, जिससे पानी उनके अन्दर पहुँच पाता है। पानी के साथ बहते हुए ये बीज ऐसे स्थानों में मिट्टी में दब जाते हैं जहाँ पानी का कुछ ठहराव हो और भूमि की नमी कुछ समय बनी रहे। यहाँ पर इन अनुकूल परिस्थितित्यों में अब ये अंकुरित होकर जड़ पकड़ सकते हैं और आगे चलकर बीज बनाने वाले नए पौधे बन सकते हैं।

कभी कभी हम मसीही विश्वासी भी इन बीजों की तरह ही होते हैं। हमें भी जीवन के तेज़ प्रवाह द्वारा इधर उधर पटके जाने की आवश्यक्ता होती है जिससे परमेश्वर के वचन का जल हमारे अन्दर पहुँच सके और हम में मसीही चरित्र को अंकुरित कर सके। हम तब तक अपने विश्वास को गंभीरता से नहीं लेते जब तक कुछ उग्र हमारे साथ घटित नहीं हो जाता, जैसे, बीमारी और अस्पताल के बिस्तर पर बिताया कुछ समय, या अचानक आया कोई बड़ा खर्च, या परिवार में आई कोई गंभीर समस्या आदि। यद्यपि हमारा परमेश्वर पिता हमें अनावश्यक रूप से किसी दुख और संकट में जाने नहीं देना चाहता, लेकिन वह हमारे जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ आने देता है जो हमारे अन्दर परमेश्वर के वचन रूपी जल को पहुँचने से रोकने वाली बातों को छीलकर हटाती रहें और हमें नम्र बनाए रखें। ऐसी परिस्थितियाँ अवश्य दुख देती हैं, लेकिन जब इनमें भी हम परमेश्वर की योजना को पहचान कर परमेश्वर के आगे नम्र और उसके आधीन हो जाते हैं तो यही परिस्थितियाँ हमारे आत्मिक जीवन की बढ़ोतरी का कारण भी बन जाती हैं।

चाहे हम बीज के रुप में एक स्थान पर सूखे और शिथिल पड़े रहना चाहते हों, लेकिन हमारा परमेश्वर पिता हमें फलवन्त वृक्ष देखना चाहता है, और इसलिए वह हम पर क्लेष भी आने देता है कि हम अंकुरित हों और उसकी महिमा के लिए फल लाएं। - मार्ट डी हॉन


कठिनाईयों से निकले बिना कुछ प्राप्त नहीं होता।

हे मेरे पुत्र, यहोवा की शिक्षा से मुंह न मोड़ना, और जब वह तुझे डांटे, तब तू बुरा न मानना, क्योंकि यहोवा जिस से प्रेम रखता है उसको डांटता है, जैसे कि बाप उस बेटे को जिसे वह अधिक चाहता है। - नीतिवचन ३:११, १२


बाइबल पाठ: इब्रानियों १२:१-१२

Heb 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्‍तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।
Heb 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर से ताकते रहें, जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दुख सहा और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।
Heb 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो।
Heb 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो।
Heb 12:5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाई दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़।
Heb 12:6 क्‍योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है और जिसे पुत्र बना लेता है, उस को कोड़े भी लगाता है।
Heb 12:7 तुम दुख को ताड़ना समझ कर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता?
Heb 12:8 यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्यभिचार की सन्‍तान ठहरे!
Heb 12:9 फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्‍या आत्माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से जीवित रहें।
Heb 12:10 वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएं।
Heb 12:11 और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्‍द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उस को सहते सहते पक्के हो गए हैं, पीछे उन्‍हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है।
Heb 12:12 इसलिये ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधे करो।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब ३०-३१
  • प्रेरितों १३:२६-५२

सोमवार, 4 जुलाई 2011

तराशा हुआ हीरा

एक हीरा अपने स्वाभाविक स्वरूप में कंकड़ या छोटे पत्थर के समान ही दिखता है, उसकी सुन्दरता तराशे जाने के बाद ही निखर कर बाहर आने लगती है तथा तराशे जाने के बाद जब उसे चमकाया जाता है और तब उसकी चमक देखने लायक होती है तथा उसकी कीमत बन जाती है। साधारण कंकड़ से बहुमूल्य हीरा बनाने के लिए निपुण कारीगर उसे कठोर सान पर लगा कर चारों ओर से घिसता है, जिससे उसके बेडौल स्वाभाविक स्वरूप को सुन्दर स्वरूप में बदल सके। यह एक बहुत बारीकी से करी गई कारिगरी की प्रक्रिया है जिसमें बहुत ध्यान और समय लगता है। स्वरूप देने के बाद कारीगर फिर उसे निखारने के लिए रगड़ कर उसे चमकाता है।

यह प्रक्रिया उस प्रक्रिया के समान है जो परमेश्वर अपनी सन्तान के साथ करता है। जिन कठोर परिस्थितियों का सामना हमें प्रति दिन करना पड़ता है वे उस सान के समान हैं जो हीरे को स्वरूप देती है। परमेश्वर जीवन की कठिनाईयों और विषम परिस्थितियों द्वारा हमें तराशता और चमकाता है जिससे हमारा चरित्र निखर कर सिद्ध हो जाए और हम एक दिन उसके साथ स्वर्ग में सुन्दर और तेजोमय हो सकें। अवश्य ही यह प्रक्रिया सुखद नहीं होती, और ना ही उस ईश्वरीय कारीगर का उद्देश्य इसका सुखदाई होना है। उसकी नज़र हमारे अन्तिम तेजोमय स्वरूप पर है, और उस स्वरूप में बदलने के लिए वह हमारे जीवन और चरित्र से हर अनावश्यक बात तराश कर निकालता रहता है और हमें रगड़ कर चमकाता रहता है।

पतरस प्रेरित ने कहा "... कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो" (१ पतरस १:६), लेकिन जब हम इन परीक्षाओं के उद्देश्य को समझ लेंगे तो अपनी इन परीक्षाओं की आवश्यक्ता और कीमत को भी जान सकेंगे। परमेश्वर का, इस निखारे जाने की प्रक्रिया के दौरान, अपनी सन्तान के लिए एक ही ध्येय है: "और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे" (१ पतरस १:७)।

अपने जीवन में आने वाली परेशानियों और कठिनाईयों के उद्देश्य को जानते और पहचानते हुए, हमें परमेश्वर और हमारे प्रति उसके प्रेम पर शक नहीं करना चाहिए, वरन इन बातों के आगे आने वाले तेजोमय भविष्य पर अपनी नज़रें लगा कर वर्तमान में भी आनन्दित रहना चाहिए ना कि उन से निराशा होना चाहिए। - पौल वैन गौर्डर


जैसे सान पर लगाए बिना हीरा तराशा नहीं जा सकता, वैसे ही कठिनाईयों की रगड़ लगे बिना मनुष्य निखर नहीं सकता।

और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे।" - १ पतरस १:७


बाइबल पाठ: १ पतरस १:१-९

1Pe 1:1 पतरस की ओर से जो यीशु मसीह का प्रेरित है, उन परदेशियों के नाम, जो पुन्‍तुस, गलतिया, कप्‍पदुकिया, आसिया, और बितुनिया में तित्तर बित्तर होकर रहते हैं।
1Pe 1:2 और परमेश्वर पिता के भविष्य ज्ञान के अनुसार, आत्मा के पवित्र करने के द्वारा आज्ञा मानने, और यीशु मसीह के लोहू के छिड़के जाने के लिये चुने गए हैं। तुम्हें अत्यन्‍त अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
1Pe 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिस ने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।
1Pe 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये।
1Pe 1:5 जो तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है।
1Pe 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो।
1Pe 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे।
1Pe 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है।
1Pe 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्‍त करते हो।

एक साल में बाइबल:
  • अय्युब २८-२९
  • प्रेरितों १३:१-२५