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सोमवार, 14 अक्टूबर 2019

थामा हुआ



      मैं अपनी बहिन के घर गई हुई थी; दोपहर के भोजन के समाप्ति के समय मेरी बहिन ने अपने बेटी से कहा कि अब उसके जाकर सोने का समय हो गया है। मेरी वह तीन वर्षीय भांजी चौंक गई, उसकी आँखों में आँसू आ गए, और उसने शिकायत की, “लेकिन आंटी मोनिका ने मुझे अभी तक तो गोद में लिया ही नहीं है!” मेरी बहिन ने मुस्कुराते हुए उसे दिलासा दिया, “अच्छा मोनिका आंटी तुम्हें गोदी में ले सकती हैं – कितनी देर गोदी में रहना चाहोगी? मेरी भांजी ने उत्तर में कहा “पाँच मिनट।”

      मैंने अपने भांजी को गोद में ले लिया, और मैं कृतज्ञ होकर स्मरण करने लगी कि बिना प्रयास किए हुए भी वह मुझे स्मरण दिलाती है कि किसी से प्रेम करना और प्रेम पाने का अनुभव क्या होता है। मुझे लगता है कि कभी-कभी हम यह भूल जाते हैं कि मसीही विश्वास का हमारा जीवन प्रेम का अनुभव सीखने का जीवन है – परमेश्वर के प्रेम के बारे में सीखने का, इतनी भरपूरी से जितने की हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं (इफिसियों 3:18)। हम जब भी इस बात पर ध्यान देने से चूक जाते हैं, तो हम परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा लूका 15 अध्याय में दिए गए उड़ाऊ-पुत्र के दृष्टांत के उस बड़े भाई के समान हो जाते हैं जो अपने प्रयासों से परमेश्वर के प्रेम को पाने के कोशिश तो कर रहा था, बिना यह स्मरण किए कि  उसने क्या कुछ उसे पहले से ही दे रखा था (लूका 15:25-32)।

      भजन 131 भी एक ऐसी प्रार्थना है जो हमें “बालकों के समान” (मत्ती 18:3) बनने में सहायता करती है, अपने मन में चल रहे उस द्वंद को छोड़ कर जो उन बातों के कारण है जिन्हें हम समझ नहीं पाते हैं (भजन 131:1)। परेशान रहने की बजाए, प्रभु परमेश्वर के साथ बिताए गए समय के द्वारा हम शान्ति के स्थान में लौट सकते हैं (पद 2), उसके प्रेम में होकर उस आशा को प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी हमें आवश्यकता है (पद 3) – वैसे शान्त और चैन से होकर मानों हम अपनी माँ की गोद में बैठे हुए बच्चे हैं, जिन्हें उसने सुरक्षित थामा हुआ है। - मोनिका ब्रैंड्स

बच्चों के समान, हम परमेश्वर के प्रेम में शान्त होना सीख सकते हैं।

यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। - विलापगीत 3:26

बाइबल पाठ: भजन 131
Psalms 131:1 हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है; और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता।
Psalms 131:2 निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।
Psalms 131:3 हे इस्राएल, अब से ले कर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह!

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2



शनिवार, 28 सितंबर 2019

प्रार्थना



      नवंबर 2015 में, मुझे पता चला कि मुझे दिल के ऑपरेशन की आवश्यकता है। मैं चकित तथा विचलित हुआ, और स्वाभाविक था कि मैं अपनी मृत्यु की संभावना के विषय भी विचार करता। क्या कोई ऐसा संबंध था जिसमें कुछ सुधर करने की आवश्यकता थी? क्या मेरे परिवार के लिए आर्थिक बातों का प्रावधान करना था? क्या वह समय आने से पूर्व कोई कार्य करना आवश्यक था? क्या कोई ऐसा कार्य था, जिसे टाला नहीं जा सकता था; उसे किसे सौंपना था? मेरे लिए वह समय कार्य करने तथा प्रार्थना करने का समय था।

      परन्तु मेरी स्थिति ऐसी थी कि मैं न कार्य कर सकता था और न ही प्रार्थना करने पा रहा था।

      मेरा शरीर और मन दोनों ही बहुत थके हुए थे, इतने कि बहुत सामान्य सा काम करना भी मुझ से नहीं हो पा रहा था; और जब मैं प्रार्थना करने का प्रयास करता तो शीघ्र ही मेरा ध्यान भटक कर मेरी शारीरिक स्थिति की ओर चला जाता, और कमज़ोर हृदय के कारण साँस लेने में होने वाली दिक्कत से मुझे शीघ्र ही नींद आ जाती थी। यह सब मेरे लिए बहुत निराशाजनक था – न मैं कुछ कर सकता था, और न ही परमेश्वर से प्रार्थना कर सकता था कि मुझे जीवन प्रदान करे जिससे मैं अपने परिवार के साथ और समय बिता सकूँ।

      मुझे सबसे अधिक परेशान मेरे प्रार्थना न कर पाने ने किया। परन्तु जिस प्रकार से हमारा परमेश्वर पिता, हमारी शारीरिक आवश्यकताओं के लिए प्रावधान करता है, उसी प्रकार से उसने मेरी इन परिस्थितियों के लिए भी प्रावधान किया हुआ था, क्योंकि वह जानता था कि मेरे साथ क्या हो रहा है। मुझे बाद में समझ आया कि हमारी ऐसी परिस्थितियों के लिए उसने हमारे लिए दो प्रावधान किए हैं: पहला, जब हम प्रार्थना करने में असक्षम होते हैं, तो पवित्रात्मा हमारे लिए प्रार्थना करता है (रोमियों 8:26), तथा हमारे लिए परमेश्वर के अन्य जन भी प्रार्थनाएं करते हैं (याकूब 5:16; गलातियों 6:2)।

      मेरे लिए यह बहुत ही दिलासा देने वाला था कि पवित्र आत्मा परमेश्वर पिता के सम्मुख मेरे लिए निवेदन कर रहा था। और फिर एक और अचरज की बात सामने आई, जब मेरे मित्र और परिवार जन मुझ से पूछते थे कि मेरे लिए वे किन विषयों पर प्रार्थना करें, तो यह भी स्पष्ट होता गया कि मैं जो उन्हें कहता था, वह परमेश्वर द्वारा मेरी की गई प्रार्थना के रूप में ग्रहण किया जा रहा था।

      अनिश्चितता और परेशानी के समय में यह जानना कितना सांत्वना देने वाला होता है कि परमेश्वर हमारे हृदय की बात को हमारी प्रार्थना के समान सुनता है, चाहे हम उसे पुकार भी न पा रहे हों। - रैंडी किल्गोर

परमेश्वर अपने बच्चों की प्रार्थनाओं की कभी अनसुनी नहीं करता है।

जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैं ने यहोवा को स्मरण किया; और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन तेरे पवित्र मन्दिर में पहुंच गई। - योना 2:7

बाइबल पाठ: रोमियों 8:22-28
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 5-6
  • इफिसियों 1



गुरुवार, 1 नवंबर 2018

सुरक्षा



      स्थानीय पार्क में विचरण करते समय, मेरा और मेरे बच्चों का सामन वहाँ विचरण के लिए आए किसी अन्य जन के कुत्तों से हुआ, जो पट्टे अथवा रस्सी से बंधे हुए नहीं थे, खुले घूम रहे थे। उन कुत्तों के मालिक को यह बात ध्यान में नहीं आई कि उन कुत्तों में से एक मेरे बेटे को डराने लगा था। मेरे बेटे ने उस कुत्ते को भगाने का प्रयास किया, परन्तु वह और भी अधिक उसे डराने लगा। अन्ततः घबराकर मेरे बेटे ने दूर की ओर भागना आरंभ कर दिया, किन्तु वह कुत्ता भी उसके पीछे  जाने लगा। यह देख मैंने तुरंत अपने बेटे को पुकार कर कहा, “दूर मत जाओ; भाग कर मेरे पास आओ!” मेरा बेटा भाग कर मेरे पास आ गया और शान्त हो गया। वह कुत्ता भी उसे मेरे पास देखकर किसी अन्य स्थान पर गड़बड़ी करने चला गया।

      हमारे जीवनों में ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब परेशानियां हमें तंग करने लगती हैं, और हम उन बच कर इधर-उधर भागने लग जाते हैं। हम जितना उन परेशानियों से बचना चाहते हैं, वे उतनी अधिक हम पर हावी होने लगती हैं, हम उनसे बचने नहीं पाते हैं। हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमें अपने पास बुलाता है, पुकार कर हमें कहता है, “दूर मत जाओ; भाग कर मेरे पास आओ!”

      हम अपने आप में उन परेशानियों और कठिनाइयों पर जयवंत होने में सक्षम नहीं हैं; परन्तु हमारा परमेश्वर पिता सदैव हमारे साथ उपस्थित रहता है, हमें सहायता और सांत्वना प्रदान करता रहता है। हमें बस उसकी वाणी सुनकर उसकी ओर लौट कर आना है, उसका शरणागत होना है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें आश्वस्त करता है कि “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है” (नीतिवचन 18:10)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


संकट के समयों में परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: यशायाह 43:1-7
Isaiah 43:1 हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है।
Isaiah 43:2 जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।
Isaiah 43:3 क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरी सन्ती कूश और सबा को देता हूं।
Isaiah 43:4 मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा।
Isaiah 43:5 मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा, और पच्छिम से भी इकट्ठा करूंगा।
Isaiah 43:6 मैं उत्तर से कहूंगा, दे दे, और दक्खिन से कि रोक मत रख; मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथ्वी की छोर से ले आओ;
Isaiah 43:7 हर एक को जो मेरा कहलाता है, जिस को मैं ने अपनी महिमा के लिये सृजा, जिस को मैं ने रचा और बनाया है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2



गुरुवार, 3 मई 2018

आवश्यकता



   मैं एक वृद्धाश्रम में हॉल में पीछे खड़ा अपने बेटी के हाई-स्कूल की संगीत मण्डली द्वारा गाए जाने वाले मसीही स्तुतिगीत “It is Well, It is Well With My Soul” (है खुशहाल, है खुशहाल, मेरी जान) को सुन रहा था और सोच रहा थी कि मेरी बेटी ने, जो उस संगीत मण्डली की संचालक थी, इस स्तुति गीत को क्यों चुना? वह जानती थी कि यह गीत उसकी बहन की अंत्येष्टि के समय बजाया गया था, और जब भी मैं इस गीत को सुनता हूँ तो मेरे लिए अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखना कठिन हो जाता है।

   मेरे इन विचारों को बाधित करते हुए, मेरे निकट बैठे हुए एक पुरुष ने मुझ से कहा, “मुझे यही सुनने की आवश्यकता थी।” मैंने उन्हें अपना परिचय दिया और उनसे पूछा, कि उन्हें इस गीत की आवश्यकता क्यों थी? उन्होंने उत्तर दिया, “अभी पिछले सप्ताह ही  एक मोटरसाईकिल दुर्घटना में मेरे पुत्र का देहांत हुआ है; इस गीत की सांत्वना की मुझे आवश्यकता थी।”

   “ओहो! मैं तो अपने आप पर ही इतना केंद्रित हो रखा था कि  मैंने औरों की आवश्यकता के बारे में सोचा ही नहीं, किन्तु परमेश्वर उस गीत को वहाँ उपयोगी कर रहा था जहाँ इसकी आवश्यकता थी।” मैंने उस व्यक्ति, मैक, से जो उस वृद्धाश्रम में कार्य करता था मित्रता बढ़ाई, और हमने साथ बैठकर कठिन समयों में परमेश्वर की देखभाल के बारे में बातचीत की।

   हमारे चारों ओर आवश्यकताओं से भरे लोग हैं, कभी-कभी उनकी सहायता के लिए हमें अपनी भावनाओं और कार्यक्रम को अलग रखना होता है। ऐसा करने का एक तरीका है वह स्मरण करना जिसके द्वारा हमारे कठिन समयों और विपरीत परिस्थितियों में परमेश्वर ने हमें शान्ति और सांत्वना दी है, जिससे कि हम औरों को भी वही प्रदान  कर सकें (2 कुरिन्थियों 1:4)। अपनी ही बातों और चिंताओं में तल्लीन हो कर अपने साथ या निकट के किसी व्यक्ति की आवश्यकता को नज़रंदाज़ कर देना बहुत सरल होता है।

   हमें ध्यान रखना चाहिए कि हो सकता है कि हमारे आस-पास के किसी व्यक्ति को किसी बात के लिए प्रार्थना की, सान्तवना के कुछ शब्दों की, हिम्मत दिलाने वाले आलिंगन की, प्रभु यीशु के नाम में प्रेम और करुणा दिखाए जाने की, आवश्यकता हो सकती है। लोगों की आवश्यकता के प्रति संवेदनशील बने रहने से हम मसीही व्यवहार को उनके समक्ष प्रभावी रीति से रख सकते हैं। - डेव ब्रैनन

सांत्वना प्राप्त करके सांत्वना बाँटना भी आवश्यक है।

मैं, मैं ही तेरा शान्तिदाता हूं; तू कौन है जो मरने वाले मनुष्य से, और घास के समान मुर्झाने वाले आदमी से डरता है – यशायाह 51:12

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:3-7
2 Corinthians 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर, और पिता का धन्यवाद हो, जो दया का पिता, और सब प्रकार की शान्‍ति का परमेश्वर है।
2 Corinthians 1:4 वह हमारे सब क्‍लेशों में शान्‍ति देता है; ताकि हम उस शान्‍ति के कारण जो परमेश्वर हमें देता है, उन्हें भी शान्‍ति दे सकें, जो किसी प्रकार के क्‍लेश में हों।
2 Corinthians 1:5 क्योंकि जैसे मसीह के दुख हम को अधिक होते हैं, वैसे ही हमारी शान्‍ति भी मसीह के द्वारा अधिक होती है।
2 Corinthians 1:6 यदि हम क्‍लेश पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति और उद्धार के लिये है और यदि शान्‍ति पाते हैं, तो यह तुम्हारी शान्‍ति के लिये है; जिस के प्रभाव से तुम धीरज के साथ उन क्‍लेशों को सह लेते हो, जिन्हें हम भी सहते हैं।
2 Corinthians 1:7 और हमारी आशा तुम्हारे विषय में दृढ़ है; क्योंकि हम जानते हैं, कि तुम जैसे दुखों के वैसे ही शान्‍ति के भी सहभागी हो।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 14-15
  • लूका 22:21-46



गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

सांतवना


   हमारी एक मित्र के पति का अचानक ही देहांत हो गया, और उसके साथ हम भी शोकित हुए। हमारी मित्र स्वयं एक सलाहकार हैं, और उन्होंने अनेकों लोगों को ऐसी ही परिस्थितियों में सांतवना दी है, उन्हें संभाला है। अब विवाह के 40 वर्ष पश्चात, उन्हें स्वयं रोज संध्या को एक खाली घर में आने की अप्रिय परिस्थिति का सामना करना था।

   अपने इस दुःख में उस मित्र ने उसका सहारा लिया जिसके विषय परमेश्वर के वचन बाइबल में आया है कि वह “टूटे मन वालों के समीप रहता है।” परमेश्वर उनके साथ उनके दुःख में चला, और उन्होंने हम से कहा कि उन्होंने अपने “विधवा” नाम को गर्व के साथ स्वीकार करने का निर्णय लिया क्योंकि उन्हें निश्चय था कि उनका विधवा होना परमेश्वर की ओर से है।

   प्रत्येक दुःख व्यक्तिगत होता है, और सब का दुःख सहने का अपना तरीका होता है। उनके दुःख सहने के इस तरीके से न तो दुःख कम होता है और न ही उनके घर का खालीपन कम होता है। परन्तु परमेश्वर के साथ चलना यह स्मरण करवाता है कि हमारे सबसे घोर दुःख में भी हम परमेश्वर पर विश्वास बनाए रख सकते हैं, हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता सदा हमारे साथ रहता है।

   हमारे स्वर्गीय परमेश्वर पिता ने भी अलगाव की अत्यंत पीड़ा सही थी। जब प्रभु यीशु मसीह, सारे सँसार के सभी मनुष्यों के पापों को लिए क्रूस पर बलिदान हुए, तो वे पुकार उठे, “...हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?” (मत्ती 27:46)। परन्तु फिर भी उन्होंने क्रूस की मृत्यु तथा परमेश्वर पिता से दूरी की पीड़ा को हमारे लिए, हमारे प्रति अपने प्रेम के लिए सहा।

   वह हमारे दुखों को समझता है! और क्योंकि “यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है” (भजन 34:18), इसलिए उसमें हमें हर परिस्थिति के लिए उपयुक्त सांतवना मिलाती है। वह सदा हमारे निकट रहता है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर हमारे दुखों को बांट लेता है।

क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यों कहता है, मैं ऊंचे पर और पवित्र स्थान में निवास करता हूं, और उसके संग भी रहता हूं, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हषिर्त करूं। - यशायाह 57:15

बाइबल पाठ: भजन 34:15-22
Psalms 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।
Psalms 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।
Psalms 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
Psalms 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।
Psalms 34:19 धर्मी पर बहुत सी विपत्तियां पड़ती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सब से मुक्त करता है।
Psalms 34:20 वह उसकी हड्डी हड्डी की रक्षा करता है; और उन में से एक भी टूटने नहीं पाती।
Psalms 34:21 दुष्ट अपनी बुराई के द्वारा मारा जाएगा; और धर्मी के बैरी दोषी ठहरेंगे।
Psalms 34:22 यहोवा अपने दासों का प्राण मोल ले कर बचा लेता है; और जितने उसके शरणागत हैं उन में से कोई भी दोषी न ठहरेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 17-18
  • मत्ती 27:27-50



शुक्रवार, 26 जनवरी 2018

प्रश्न


   अक्तूबर 31, 2014 को एक विकासाधीन वायुयान, अपनी प्रयोगात्मक उड़ान के दौरान टूट कर गिर गया, जिससे सह-चालाक की तो मृत्यु हो गई, किंतु चालाक आश्चर्यजनक रीति से बच गया। जांचकर्ताओं ने शीघ्र ही यह तो पता लगा लिया कि क्या हुआ था किंतु ऐसा क्यों हुआ, इसका कारण वे पता नहीं करने पाए। इस दुर्घटना से संबंधित अखबारों में छपे समाचार का शीर्षक था, “प्रश्न शेष हैं।”

   अपने जीवन भर हम, बिना किसी संतोषजनक स्पष्टीकरण के, दुःख भरे अनुभवों से होकर निकलते रहते हैं। कुछ अनुभव तो बहुत कटु होते हैं, और उनके प्रभाव भी बहुत दूर-गामी होते हैं; कुछ अन्य व्यक्तिगत, या निजी त्रासदियाँ होती हैं जो परिवारों या व्यक्तियों के जीवनों को बदल देती हैं। हम उत्तर जानना चाहते हैं कि ऐसा क्यों हुआ, परन्तु उत्तरों से अधिक हमें प्रश्नों का ही सामना करना पड़ता है। जब हम ऐसे “क्यों” से संघर्ष कर रहे होते हैं, तब भी परमेश्वर अपने सिद्ध प्रेम में हमारे साथ होता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, अय्यूब, ने एक ही दिन में अपने बच्चों और संपत्ति को खो दिया (अय्यूब 1:13-19), वह बहुत खिन्न और निराश हुआ, और सहानुभूति जताने आए मित्रों द्वारा स्पष्टिकरण के लिए कही गई किसी भी बात का विरोध करने लगा। परन्तु उसे फिर भी आशा थी कि एक दिन उसे परमेश्वर से अपने उत्तर अवश्य मिलेंगे। निराशा के उस अन्धकार में घिरे अय्यूब ने कहा, “परन्तु वह [परमेश्वर] जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा” (अय्यूब 23:10)।

   सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक तथा लेखक ओस्वौल्ड चैम्बर्स ने कहा, “एक ऐसा दिन भी आएगा जब परमेश्वर एक व्यक्तिगत और सीधे स्पर्श के द्वारा हमारे प्रत्येक आँसू और उलझन, प्रत्येक शोषण और पीड़ा, प्रत्येक दुःख और सहन करने का, हमारे साथ हुए प्रत्येक गलत व्यवहार और अन्याय का, संपूर्ण, समुचित और अभिभूत कर देने वाला स्पष्टीकरण हमें दे देगा।”

   आज जब हम अनसुलझे प्रश्नों का सामना करते हैं, तो प्रभु परमेश्वर के प्रेम और वायदों में हम सांतवना तथा सहायता पा सकते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


जब अनुतरित प्रश्नों का सामना करें 
तो परमेश्वर के प्रेम में सहायता और आशा पाएँ।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे [प्रभु यीशु] पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है। - मत्ती 11: 28-30

बाइबल पाठ: अय्यूब 23:1-12
Job 23:1 तब अय्यूब ने कहा,
Job 23:2 मेरी कुड़कुड़ाहट अब भी नहीं रुक सकती, मेरी मार मेरे कराहने से भारी है।
Job 23:3 भला होता, कि मैं जानता कि वह कहां मिल सकता है, तब मैं उसके विराजने के स्थान तक जा सकता!
Job 23:4 मैं उसके साम्हने अपना मुक़द्दमा पेश करता, और बहुत से प्रमाण देता।
Job 23:5 मैं जान लेता कि वह मुझ से उत्तर में क्या कह सकता है, और जो कुछ वह मुझ से कहता वह मैं समझ लेता।
Job 23:6 क्या वह अपना बड़ा बल दिखा कर मुझ से मुक़द्दमा लड़ता? नहीं, वह मुझ पर ध्यान देता।
Job 23:7 सज्जन उस से विवाद कर सकते, और इस रीति मैं अपने न्यायी के हाथ से सदा के लिये छूट जाता।
Job 23:8 देखो, मैं आगे जाता हूँ परन्तु वह नहीं मिलता; मैं पीछे हटता हूँ, परन्तु वह दिखाई नहीं पड़ता;
Job 23:9 जब वह बाईं ओर काम करता है तब वह मुझे दिखाई नहीं देता; वह तो दाहिनी ओर ऐसा छिप जाता है, कि मुझे वह दिखाई ही नहीं पड़ता।
Job 23:10 परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा।
Job 23:11 मेरे पैर उसके मार्गों में स्थिर रहे; और मैं उसी का मार्ग बिना मुड़े थामे रहा।
Job 23:12 उसकी आज्ञा का पालन करने से मैं न हटा, और मैं ने उसके वचन अपनी इच्छा से कहीं अधिक काम के जान कर सुरक्षित रखे।


एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17